यूपी के मुसलमान, आजतक चैनल और एंकर अंजना कश्यप

Arun Maheshwari : यूपी के मुसलमान और ‘आज तक’… ‘आजतक’ चैनल की एक एंकर है अंजना कश्यप। हमेशा वीर रस वाले भाव बोध में रहने वाली -‘दुर्गा वाहिनी’ वालों का तेवर लिये हुए। आज वे यूपी की राजनीति में मुसलमानों के बारे में एक रिपोर्ट पेश कर रही थी। मुसलमान देश के अन्य सभी तबक़ों से कितने पिछड़ गये हैं, इसके तमाम आँकड़े रख रही थी।

मुंबई प्रेस क्लब में तब प्रणय राय ने कहा था- ”तीन साल के अंदर भारतीय मीडिया की कोई साख नहीं रह जायेगी”

Arun Maheshwari : इस बात को सिर्फ़ साढ़े नौ महीने हुए हैं। मुंबई प्रेस क्लब द्वारा लाईफ़ टाईम पुरस्कार से नवाजे जाने के समय एनडीटीवी के प्रणय राय ने वहाँ मौजूद दर्शकों को यह कहते हुए हैरत में डाल दिया था कि एक हिंदी चैनल पर उन्होंने बालों को झटकते हुए एक महिला एंकर को यह कहते सुना था कि – ‘ब्रेक के बाद आप को एक रेप दिखायेंगे’।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के स्टेट ऑफ़ द यूनियन के अंतिम भाषण से संकटग्रस्त पूंजीवाद का चीत्कार सुनाई दे रहा!

Arun Maheshwari : अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का स्टेट ऑफ़ द यूनियन का अंतिम भाषण सुना। अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित अट्ठावन मिनट का यह भाषण ओबामा के ख़ास प्रकार के आवेग, ओज और आकर्षक वाग्मिता के साथ ही कई मायनों में विचारोत्तेजक और पूरी दुनिया के मौजूदा परिदृश्य और उसमें अमेरिका की एक नेतृत्वकारी और निर्णायक भूमिका के बारे एक समग्र दृष्टिकोण को पेश करने वाला भाषण था। इस पर अलग से धीरज के साथ लिखने की ज़रूरत है।

हमारा इशारा हंसी-कोप के स्थायी भाव में रहने वाले सुधीश पचौरी और विष्णु खरे की टिप्पणियों की ओर है

Arun Maheshwari : लेखकों और विवेकवान बुद्धिजीवियों पर लगातार जानलेवा हमलों के प्रतिवाद में उदयप्रकाश ने साहित्य अकादमी का पुरस्कार लौटा दिया। इसका हिंदी के व्यापक लेखक समुदाय को जहां गर्व है तो वहीं कुछ बुरी तरह आहत। उनकी प्रतिक्रियाओं से लगता है जैसे किसी सुंदर औरत को देखकर अचानक ही कोई चीखने लगे – देखो वह कितनी बेशर्म है, अपने कपड़ों के पीछे पूरी नंगी है! इस बारे में हमारा इशारा खास तौर हंसी और कोप के स्थायी भाव में रहने वाले क्रमश: सुधीश पचौरी और विष्णु खरे की टिप्पणियों की ओर है।

It is hard to be loved by Idiots… मूर्खों से प्यार पाना मुश्किल है…

Arun Maheshwari : ग्यारह जनवरी को दस श्रेष्ठ कार्टूनिस्टों के हत्याकांड के बाद आज सारी दुनिया में चर्चा का विषय बन चुकी फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका ‘शार्ली एब्दो’ पर सन् 2007 एक मुकदमा चला था। तब इस पत्रिका में डैनिस अखबार ‘जिलैट पोस्तन’ में छपे इस्लामी उग्रपंथियों पर व्यंग्य करने वाले कार्टूनों को पुनर्प्रकाशित किया गया था। इसपर पूरे पश्चिम एशिया में भारी बवाल मचा था। फ्रांस के कई मुस्लिम संगठनों ने, जिनमें पेरिस की जामा मस्जिद भी शामिल थी, शार्ली एब्दो पर यह कह कर मुकदमा किया कि इसमें इस्लाम का सरेआम अपमान किया गया है। लेकिन, न्यायाधीशों ने इस मुकदमे को खारिज करते हुए साफ राय दी कि इसमें मुसलमानों के खिलाफ नहीं, इस्लामी उग्रपंथियों के खिलाफ व्यंग्य किया गया है।