अनिता भारती की किताब को ‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान 2016’ की घोषणा

स्त्रीवादी पत्रिका ‘स्त्रीकाल, स्त्री का समय और सच’ के द्वारा वर्ष 2016 के लिए ‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान’ लेखिका अनिता भारती की किताब ‘समकालीन नारीवाद  और दलित स्त्री का प्रतिरोध’ (स्वराज प्रकाशन) को देने की घोषणा की गई है. अर्चना वर्मा , सुधा अरोड़ा , अरविंद जैन,  हेमलता माहिश्वर, सुजाता पारमिता, परिमला आम्बेकर की सदस्यता वाले निर्णायक मंडल ने यह निर्णय 3 अप्रैल को 2016 को बैठक के बाद लिया . 2015 में पहली बार यह सम्मान शर्मिला रेगे को उनकी किताब ‘ अगेंस्ट द मैडनेस  ऑफ़ मनु : बी आर आम्बेडकर्स  राइटिंग ऑन ब्रैहम्निकल पैट्रीआर्की ‘ (नवयाना प्रकाशन) के लिए दिया गया था.

इस सम्मान के लिए 2009 से 2015  तक हिन्दी में लिखी गई या अनूदित स्त्रीवादी वैचारिकी की  प्रकाशित किताबों पर विचार करते हुए निर्णायक मंडल ने अंतिम तौर पर प्रमिला केपी, सुधा सिंह, रेखा कास्तवार, कृष्ण कुमार,  रोहिणी अग्रवाल और अनिता भारती की किताबों, क्रमशः ‘ यौनिकता बनाम अध्यात्मिकता’ ‘ज्ञान का स्त्रीवादी पाठ’ ‘स्त्रीचिंतन की चुनौतियां’, ‘चूड़ी बाजार में लडकी’ ‘हिन्दी उपन्यास का स्त्रीवादी पाठ’ तथा ‘समकालीन नारीवाद और दलित स्त्री का प्रतिरोध’ पर विचार किया. निर्णय के लिए दो दर्जन से अधिक किताबों पर विचार किया गया.

निर्णायक मंडल ने अपने अंतरिम नोट में कहा कि: ‘दलित स्त्रीवाद की किसी आंगिक (ऑर्गनिक) विदुषी  द्वारा दलित स्त्रीवाद की सैद्धांतिकी निर्मित करने की दिशा में हिन्दी की यह पहली किताब है . इस किताब में 7 खण्ड हैं : क्रमश: दलित लेखिकाओं का स्त्रीवादी स्तर, खुद से गुजरते हुए, साहित्यकार प्रेमचन्द और दलितस्त्री, संघर्ष के विविध आयाम, छूटे पन्ने, पितृसत्ता को चुनौती, अम्बेडकरवाद और दलित साहित्य। इस प्रकार- किताब मूलत: स्त्रीवादी लेखन के इतिहास- वर्तमान को केन्द्रित कर समकालीन स्त्रीवाद में दलित स्त्री के प्रतिरोध को चिहनित और स्थापित करती है।’

‘यह सम्मान 20 जुलाई, 2016 को दिया जायेगा,’ यह जानकारी देते हुए स्त्रीकाल पत्रिका के संपादक संजीव चंदन ने कहा कि ‘यह दिन ऐतिहासिक दिन है. इस दिन ही 1942 में डा. बाबा साहेब आम्बेडकर के द्वारा प्रेरित महिलाओं का ऐतिहासिक सम्मलेन नागपुर में संपन्न हुआ था, जिसमें 25000 महिलाओं ने भाग लिया था.’ इस वर्ष देश बाबा साहेब आम्बेडकर का 125 वी जयंती भी मना रहा है. इस लिए भी दलित स्त्रीवाद की एक किताब के लिए दलित स्त्री लेखिका अनिता भारती को सम्मानित करने का निर्णायक मंडल का निर्णय महत्वपूर्ण है. इस सम्मान के लिए किताब की लेखिका / लेखक को स्त्रीवादी विचारक और अधिवक्ता अरविंद जैन के द्वारा 12 हजार रूपये की राशि दी जाती है.

‘Savitribai Phule Vaichariki Samman 2016’ to Anita Bharti’s book

The feminist magazine, ‘Streekal, Stree ka Samay aur Sach’ has announced to confer ‘Savitribai Phule Vaichariki Samman,2016’  to the writer Anita Bharti for her book ‘Samkaleen Nareevad Aur Dalit Stree Ka Pratirodh’ (Swaraj Prakashan). The selection committee comprising of Archana Verma, Sudha Arora, Arvind Jain, Hemlata Mahishwar, Sujata Parmita, Parimala Ambedkar took the decision after the meeting held on 3 April 2016.

This honour for the first time was conferred in 2015 to Sharmila Rege for her book ‘Against the madness of Manu; B.R. Ambedkar’s writing on Brahminical Hierarchy’ (Navyana Prakashan). This time the books that were lastly selected for consideration for the honor were ‘Yaunikta banam adhyatmikta’, ‘Gyan ka Streevadi Path’, ‘Streechintan ki Chunautiyan’,  ‘Chudi Bazar Me Ladki’, ‘Hindi Upanyas ka Streevadi Path’ and ”Samkaleen Nareevad Aur Dalit Stree Ka Pratirodh ‘ written respectively by Pramila K.P., Sudha Singh, Rekha Kastavar, Krishna Kumar, Rohini Agrawal and Anita Bharti and were from among many such books written in Hindi or translated between 2009 to 2015 in the genre of feminist thinking (ideology). More than two dozen books were considered for this honor.

The selection committee in its interim note said that ‘this is the first book in Hindi for the purpose of theorizing the concept of dalit feminism that has been written by an organic intellectual lady who is well known for her long association with the very idea of Dalit Feminism’. The book has 7 parts which are respectively related with the the ideas of the level of feminist urge in dalit female writers, the reflections while going through oneself, writer Premchand and dalit women, different dimensions of struggle, the pages which are left to be written, the challenge of patriarchy and Amberkarism and dalit literature. Thus the book locates and establishes the resistance of dalit women in the contemporary feminism keeping the history and the present of the feminist writing in center.’

‘The honor will be conferred on 20 July, 2016. While sharing the information Sanjeev Chandan,  the editor of the magazine Streekal said that, ‘ This is a historic moment. On the same date in 1942 the historic conference of women was organized on the inspiration of  Dr. Baba Saheb Ambedkar which was attended by 25000 women.’ The country is also celebrating this year the 125th birth anniversary of Baba Saheb Ambedkar. Therefore the decision of the selection committee to honor a Dalit woman  writer,  Anita Bharti, for a book on dalit feminism is of great importance. An amount of Rs 12000 is conferred to the writer by the feminist thinker and advocate,  Arvind Jain,  as a token for this honor.

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राकेश मालवीय समेत कई पत्रकारों को दिया गया एक लाख रुपये वाला ‘नेशनल फाउंडेशन फॉर मीडिया एवार्ड’

स्वतंत्र युवा पत्रकार राकेश मालवीय को दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में नेशनल फाउन्डेशन फार मीडिया का नेशनल अवार्ड प्रदान किया गया. दिल्ली के पर्यावास भवन में वरिष्ठ पत्रकार सागरिका घोष जेएनयू की प्रोफेसर जयति घोष और पाल दिवाकर की उपस्थिति में एक समारोह आयोजित किया गया जिसमें अतिथियों के द्वारा मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ में श्रम तस्करी पर काम करने के लिए स्वतंत्र युवा पत्रकार राकेश मालवीय को नेशनल फाउन्डेशन फार मीडिया का नेशनल अवार्ड दिया गया. इस अवार्ड के तहत उन्हें एक लाख रूपये की राशि दी गई है.

भोपाल में स्वतंत्र रूप से कार्य करने वाले युवा पत्रकार राकेश मालवीय होशंगाबाद जिले के सिवनी मालवा तहसील के ग्राम हिरणखेडा के निवासी है. मीडिया अवार्ड के लिए युवा पत्रकार राकेश मालवीय के साथ देश के दस अन्य पत्रकारो को भी चुना गया था जिसमें चैन्नई की अपर्णा कार्तिकेयन, केरल के जानसन, मुम्बई की प्रियंका वोरा और जानवी सराठे, झारखण्ड के अखिलेश्वर, विकास सिन्हा और मोनिका गुप्ता, दिल्ली के संदीप कुमासर लद्वाख, के तेनजिंग एवं मध्य प्रदेश के पवन श्रीवास्तव शामिल थे.

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विभूति नारायण राय और अभिरंजन कुमार सम्मानित

सामाजिक संस्था “भोर” और सुगौली प्रेस क्लब, मोतिहारी द्वारा 4 और 5 मार्च को संयुक्त रूप से आयोजित “भोर लिटरेचर फेस्टिवल – 2016” में वरिष्ठ साहित्यकार विभूति नारायण राय को प्रथम रमेश चंद्र झा स्मृति सम्मान और चर्चित कवि-पत्रकार अभिरंजन कुमार को प्रथम पंकज सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। बिहार के महत्वपूर्ण गीतकार-उपन्यासकार और स्वाधीनता सेनानी रहे स्वर्गीय रमेश चंद्र झा की स्मृति में शुरू किया गया सम्मान साहित्य और समाज के क्षेत्र में, जबकि कवि-पत्रकार स्वर्गीय पंकज सिंह की स्मृति में शुरू किया गया सम्मान साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है।

इन दोनों सम्मानों के तहत प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति पत्र  प्रदान किए गए।  निर्णायक मंडल में वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन, अनुरंजन झा और अतुल सिन्हा शामिल थे। पूर्व पुलिस अधिकारी विभूति नारायण राय ‘घर’, ‘तबादला’ और ‘शहर में कर्फ्यू’ जैसे अपने उपन्यासों के कारण काफी ख्याति बटोर चुके हैं और वे महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के उप-कुलपति भी रह चुके हैं। कवि-पत्रकार अभिरंजन कुमार अपने कविता संग्रहों उखड़े हुए पौधे का बयान, बचपन की पचपन कविताएं और मीठी-सी मुस्कान दो के लिए जाने जाते हैं। नियमित साहित्य-सृजन के अलावा वे कई टीवी चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं।

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आजमगढ़ के पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह ‘विद्यावाचस्पति’ (पीएच.डी.) से विभूषित

आजमगढ़ । विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ (विश्वविद्यालय) भागलपुर बिहार ने अपने दो दिवसीय (20-21, फरवरी 2016) 20वां महाधिवेशन सह-सम्मान समारोह में जनपद के पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह संपादक, ‘शार्प रिपोर्टर’ को उनके एक दशक की पत्रकारीय व साहित्यिक अवदान तथा विशिष्ट शोधकार्य के लिए अपना प्रतिष्ठित मानद सम्मानोपाधि, ‘विद्यावाचस्पति’ (पीएच.डी.) से विभूषित किया है। जनपद के रामपुर, जहानागंज के मूल निवासी अरविन्द कुमार सिंह ने सन् 2014-15 में देश की राष्ट्रीय महत्व की संस्था, ‘‘उच्च शिक्षा एवं शोध संस्थान, दक्षिण भारत हिन्दी प्रचार सभा’’, मद्रास (विश्वविद्यालय) के हैदराबाद केन्द्र से आंचलिक पत्रकारिता में एम.फिल.किया।

आंचलिक पत्रकारिता पर आधारित यह शोधकार्य ‘पूर्वांचल की हिन्दी पत्रकारिता और उसकी चुनौतियां’ पर आधारित था। इस महत्वपूर्ण शोधकार्य के क्षेत्र विस्तार में, उ.प्र. की पूर्वी अंचल का 28 जनपद और पश्चिमी बिहार के 7 जनपदों की बिस्तृत आबादी के बीच, आंचलिक पत्रकारिता का अतीत, वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का वृहद अध्ययन है। यह शोध इतना महत्वपूर्ण था और है कि उन्हें पच्चासी प्रतिशत अंक के साथ गोल्ड मेडल हेतु भी चयन हो गया। हैदराबाद केन्द्र में सर्वोत्तम अंक पाने के साथ ही उन्होंने समूचे विश्वविद्यालय में भी सर्वोत्तम अंक पाकर विश्वविद्यालय को भी टाप कर किया। उनकी इस सफलता के लिए उन्हें आगामी 28 फरवरी-2016 को मद्रास के त्यागराय नगर स्थित विश्वविद्यालय कैम्पस के 78वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल के हाथों दो स्वर्ण पदक प्रदान किये जायेंगे।

इसके पूर्व भी श्री सिंह ने पत्रकारिता में पिछले एक दशक से विभिन्न आयामों को लेकर जनपद और उसके बाहर भी काम किया है। ‘शार्प रिपोर्टर’ और ‘मनमीत’ जैसी पत्रिका का संपादन उनके द्वारा काफी सालों से किया जा रहा। साथ ही श्री सिंह के राजनैतिक एवं साहित्यिक विषयों पर आधारित मौलिक आलेख देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में नियमित प्रकाशित होते रहें हैं। अभी देश की सबसे प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका ‘हंस’ के दिसम्बर-15 के अंक में सम्मानों और पुरस्कारों की वापसी को लेकर छपे आलेख की पूरे देश में चर्चा हुई।

श्री सिंह के इन सभी अवदानों को देखते हुए विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर ने 20 फरवरी-16 को अपने दीक्षांत समारोह में ‘विद्यावाचस्पति’ (पीएच.डी.) की मानद उपाधि प्रदान किया। इस उपाधि को विद्यापीठ के कुलाधिपति सुमन जी भाई, कुलपति तेज नारायण कुशवाहा, कुलसचिव देवेन्द्र नाथ साह, अधिष्ठाता योगेन्द्र नारायण शर्मा ‘अरूण’ तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के सदस्य के.डी. मिश्र के हाथों प्रदान किया गया।

इस अवसर पर आयोजित सेमिनार के विषय ‘‘हिन्दी साहित्य में मिथक’’ पर भी श्री सिंह द्वारा शोधपत्र पढ़ा गया। जिसको देशभर से आये साहित्यकारों, लेखकों, विद्वानों व पत्रकारों ने सराहा। जनपद के पत्रकार की सफलता पर वरिष्ठ साहित्यकार पारसनाथ पाण्डेय ‘गोवर्धन’ ने कहा कि यह सम्मान किसी पत्रकार को नही, बल्कि जनपद को मिला है। दक्षिण भारत के साथ बिहार में जाकर जनपद का मान बढ़ाने पर हम युवा संपादक अरविन्द कुमार सिंह को बंधाई देते हैं। वरिष्ठ समाजवादी विचारक एवं पत्रकार विजय नारायण ने इस सम्मान पर बंधाई देते हुए कहा कि यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। वरिष्ठ पत्रकार चिन्तक गुंजेश्वरी प्रसाद ने इसे समूचे हिन्दी पट्टी का सम्मान बताया और कहा कि हिन्दीतर क्षेत्र में हिन्दी भाषी को सम्मान हिन्दी प्रेम को दिखाता है।

जनपद के पत्रकार व शार्प रिपोर्टर के उप संपादक दीपनारायण मिश्र ने कहा कि यह जनपद की परम्परा का सम्मान है। पत्रकार आशुतोष द्विवेदी इसे पत्रकारिता का सम्मान कहा। इस अवसर पर पत्रकार सुभाष सिंह, राजेश चन्द्र मिश्रा, विकास, विश्राम शर्मा, अम्बिका, पूनम श्रीवास्तव, निरुपमा श्रीवास्तव के अतिरिक्त साहित्यकार वेदप्रकाश उपाध्याय, डॉ. ईश्वर चन्द्र त्रिपाठी, मधुर नज्मी तथा शिक्षक नेता वेदपाल सिंह आदि लोगों ने भी अरविन्द सिंह को बंधाई दिया। पत्रकार अरविन्द कुमार सिंह ने कहा कि यह सम्मान मेरा नहीं है बल्कि मेरे जनपद की माटी का है। इस जनपद की साहित्यिक और पत्रकारीय परम्परा का है।

आनन्द विश्वकर्मा की रिपोर्ट.

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जबलपुर में पत्रकार कल्याण चन्द्र जायसवाल को अरुण शुक्ला स्मृति वरिष्ठ पत्रकार सम्मान मिला

जबलपुर। यश भारत प्रकाशन समूह का वर्ष 2016 का अरुणोदय पत्रकार अरुण शुक्ला स्मृति वरिष्ठ पत्रकार सम्मान कल्याण चन्द्र जायसवाल को यहां मानस भवन में आयोजित भव्य समारोह में राज्यसभा के टीवी के कार्यकारी निदेशक राजेश बादल ने प्रदान किया. श्री जायसवाल का चयन नगर के वरिष्ठ पत्रकारों सर्वश्री रवींद्र वाजपेयी संपादक हिंदी एक्सप्रेस श्री सुशील तिवारी संपादक दैनिक भास्कर श्री श्याम कटारे संपादक यश भारत श्री अजित वर्मा संपादक जयलोक और श्री अनूप शाह संपादक नई दुनिया की समिति ने किया था।

इलाहाबाद में 1955 में जन्मे एवं इलाहाबाद विश्वविदयालय से हिंदी भाषा एवं साहित्य में एमए और कानपुर विवि से प्राचीन इतिहास में स्नातकोत्तर श्री जायसवाल ने 1976 से राष्ट्रीय समाचार पत्रिका माया से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। श्री जायसवाल विगत चार दशकों से निरंतर सक्रिय पत्रकारिता के जरिये समाजसेवा में रत हैं। राष्ट्रीय विचारों के श्री जायसवाल के नव भारत टाइम्स, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका, नई दुनिया, अमर उजाला, अमृत प्रभात, माया, परख आदि प्रमुख राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं 100 से अधिक लेख, रिपोर्ट प्रकाशित हो चुके हैं। वह अमृत बाजार पत्रिका समूह के राष्ट्रीय हिंदी दैनिक अमृत प्रभात, राष्ट्रीय समाचार पत्रिका माया, दैनिक जागरण एवं असम के हिंदी दैनिक पूर्वांचल प्रहरी आदि राष्ट्रीय समाचार पत्रों में उच्च दायित्व निभाने के बाद वर्ष 2004 से दैनिक भास्कर में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में सेवाएं दे रहे हैँ। सम्मान के रूप में श्री जायसवाल को पदक, शील्ड के साथ अंगवस्त्रम, श्रीफल एवं 2500 रुपए का चेक प्रदान किया गया।

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मुंबई में पत्रकार मिथिलेश सिन्हा को छत्रपति शिवाजी सम्मान से सम्मानित किया गया

मुंबई : छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती पर इस्कॉन सभागार में भव्य समारोह का आयोजन किया गया। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश सिन्हा को अभिनेता-गायक अरुण बख्शी ने छत्रपति शिवाजी सम्मान से सम्मानित किया. मिथिलेश सिन्हा को यह सम्मान मिलने पर चेंबर ऑफ फ़िल्म जर्नलिस्ट ने भी उन्हें बधाई दी है.

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार मिथिलेश सिन्हा के अलावा समाजसेवी अनिल मुरारका, पद्मभूषण उदित नारायण, ऐक्टर-सिंगर अरुण बख्शी, टीना घई, निर्देशक कैलाश मासूम, टीवी सीरियल ‘सम्राट अशोक’ के नायक सिद्धार्थ निगम, ‘तारा’ की नायिका रेखा राणा, संगीतकार रफीक राजा, ‘बन्नो तेरा स्वैगर’ फेम गायिका स्वाति शर्मा को भी शिवराज मुद्रा छत्रपति शिवाजी पुरस्कार से नवाजा गया. आयोजक इंडियन मार्शल आर्ट महाराष्ट्र के अध्यक्ष एस. सुदर्शन ने स्वागत भाषण किया. इस अवसर पर शिवाजी के कालातीत व्यवस्थापन पर पुणे में प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण हुआ और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए.

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दैनिक भास्कर के संपादक मधु आचार्य को ‘गवाड़’ के लिए विश्वनाथ तिवारी ने साहित्य अकादमी का पुरस्कार दिया

दैनिक भास्कर के संपादक मधु आचार्य को राजस्थानी उपन्यास ‘गवाड़’ के लिए नई दिल्ली के फिक्की ऑडिटोरियम में इस वर्ष का साहित्य अकादमी का पुरस्कार दिया गया| साहित्य अकादमी के अध्यक्ष विश्वनाथ तिवारी द्वारा आचार्य को १ लाख रुपये, शॉल, श्रीफल, माला, मोमेंटो पुरस्कार में दिया गया|

मधु आचार्य ‘आशावादी’ के जिस उपन्यास को अकादमी अवार्ड दिया गया है, उसकी कथावस्तु में नायक कोई व्यक्ति नहीं एक मोहल्ला है जिसे राजस्थानी में ‘गवाड़’ कहा जाता है। वैश्विक गांव का स्वरूप लिए इस ‘गवाड़’ में पात्रों के जरिये दुनिया के हालात बयां करते हुए इनमें सुधार का संदेश दिया गया है। वर्ष 2012 में प्रकाशित इस राजस्थानी उपन्यास के साथ आचार्य की अब तक 27 पुस्तकें सामने चुकी है।

कार्यक्रम के अतिथि पद्म भूषण प्रो. गोपी चन्द नारंग, प्रख्यात लेखक चंद्र शेखर कंबार और साहित्य अकादमी के सचिव के एस राव थे| कार्यक्रम में सांसद अर्जुन राम मेघवाल , साहित्यकार अर्जुन देव चारण, मीठेश निर्मोही, माल चन्द तिवारी राजेंद्र जोशी, आनंद वी आचार्य, राजेंद्र व्यास, आनंद जोशी, प्रदेश कॉंग्रेस सचिव जियाउर रहमान, सहित देश भर के साहित्यकारो, कलाप्रेमियो के साथ ही बड़ी सख्या में शिरकत की|

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अनुपम खेर को इतनी चिरौरी और टीटीएम के बाद पद्म भूषण न मिलता तो नाइंसाफी हो जाती

Khushdeep Sehgal : वक्त वक्त की बात है- 26 जनवरी 2010 को अभिनेता अनुपम खेर का ट्वीट- “हमारे देश में अवॉर्ड्स हमारे सिस्टम का मज़ाक बन कर रह गए हैं। इनमें से किसी की भी विश्वसनीयता बाकी नहीं रह गई है। चाहे वे फिल्म, नेशनल अवॉर्ड हों या फिर अब पद्म।”

25 जनवरी 2016 को पद्मभूषण अवॉर्ड मिलने के बाद अनुपम खेर का ट्वीट- “ये शेयर करते हुए खुश, विनम्र और सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि भारत सरकार ने मुझे पद्म भूषण से सम्मानित किया। मेरे जीवन की महानतम ख़बर। ‪जय‬ हिंद”

Vineet Kumar : अनुपम खेर पिछले कुछ महीने से बेहूदगी की हद तक जाकर जिस तरह से सत्ता की चिरौरी और टीटीएम (ताबड़तोड़ तेल मालिश) करते आए हैं, ऐसे में पद्म भूषण न मिलने पर नाइंसाफी हो जाती. वो तो मिलना तय ही था. लेकिन अफसोस सिर्फ इस बात का है कि ये कलाकार बिना इन सबके भी पद्मश्री के काबिल था.

जिस कारण उन्हें ये सम्मान मिला है, हम बहुत उदार होकर भी सोचें तो ये उनकी कला का सम्मान नहीं, अपने सम्मान की चिंता किए बगैर साख की सरेआम टोपी उछाले जाने का मेहताना है.. ये खांटी एक कलाकार का सम्मान तो नहीं ही है. बाकी तो हिन्दी सिनेमा अनुपम खेर जैसे बाप के किरदार के बिना तो अधूरा है ही. काश वो असल जिंदगी में भी राज (डीडीएलजे) के पिता की ही तरह अक्खड़,उदार और बड़ी सोच के होते..

पत्रकार खुशदीप सहगल और विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.

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कई संपादक व उद्योगपति जिस मेंबरी के लिए अपना ईमान मार दे रहे, वह रामोजी राव को प्लेट में दी गई थी, बिना मांगे

Gunjan Sinha : रामोजी राव साहब को पद्म पुरस्कार दो दशक पहले मिलता तो ज्यादा ख़ुशी होती. अब वे इनसे काफी ऊपर हैं और इस बीच पद्म अपनी काफी चमक विवादों में खो चुके. उधर निष्पक्ष और उच्च पत्रकारिता के जो प्रतिमान उन्होंने स्थापित किये थे, वे उसी ईटीवी में उनके हमारे देखते देखते रोज ध्वस्त हो रहे हैं. मुझे लगता है वे अब कभी ईटीवी (हिंदी चैनल्स) नही देखते होंगे. मेहनत से बनाए ये चैनल उन्हें बेचने पड़े. जब वे झंडे गाड़ चुके तब कोई पद्म नहीं मिला, अब जब वे झंडे उखड चुके तो पुरस्कारों का क्या मतलब? फिर भी बधाई! अंधों को दिखा तो सही!

आठ साल मैंने रामोजी साहब के साथ ईटीवी बिहार के प्रमुख के तौर पर काम किया. लेकिन बहुत लोगों को यकीन नही होगा कि सिर्फ एक दफा उन्होंने किसी खबर को रोकने के लिए मुझे फोन किया. खबर थी कि भाजपा उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाने जा रही है. रामोजी साहब ने इस खबर के चलते ही मुझे फोन कर के उसे तुरंत रोकने को कहा. कारण बताए, पहला ये कि-

“मेरी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं; उन लोगों ने पूछे बिना नाम दे दिया. मैं उन्हें मना कर रहा हूँ. वजह है कि राज्यसभा की मेम्बरी की जवाबदेहियां महान हैं. मेरे पास पहले से ही इतना काम है, मैं नहीं कर पाता. मेम्बरी से न्याय नही कर पाऊंगा, समय नही दे सकूँगा. लेकिन मैं नहीं चाहता कि ये भी खबर चले कि रामोजी ने एमपी बनने से मना कर दिया. वह बहुत सम्मानित पद है. मना करने की खबर से उसका सम्मान आहत होगा. हाँ और दूसरी बात, गुंजन, आप सभी चैनल्स के लिए एक निर्देश पत्र जारी कर दीजिये कि मेरे और मेरे परिवार के कोई सदस्य किसी कार्यक्रम में शामिल हों, कहीं उन्हें पुरस्कृत सम्मानित किया जाए, यानी उनसे जुडी कोई फोटो/खबर, हमारे किसी भी चैनल पर नहीं चलाई जाएगी. ये आदेश सभी चैनल्स को जारी कीजिये और इसे इम्प्लीमेंट करिए.”

आजकल कई सम्पादक, चैनल हेड्स और उद्योगपति जिस मेम्बरी के लिए अपना ईमान मार दे रहे हैं, वह रामोजी को प्लेट में दी गई थी, बिना मांगे. और जहाँ वे अपने बारे में बड़े से बड़े सम्मान की खबर अपने चैनल पर कभी नही चलने देते थे, आज उनके ही बिके हुए चैनल और देश के दूसरे कई चैनलों में उनके मालिक और सम्पादक अपनी मार्केटिंग के लिए अपने चैनल और अख़बार का निर्लज्ज इस्तेमाल कर रहे हैं – खबर जाए भाड़ में. अपना स्टाफ माला पहनाता है और फोटो देश पर थोप दी जाती है. चेहरा भी कालाधन के घी से भोथराये कटहल जैसा.

इसीलिए मैंने सुझाव दिया था कि सनी और राखी को चैनल हेड बनाइये. कुछ तो देखने लायक हो जाएगा. ओह, रामोजी साहब से सम्बंधित पोस्ट में ये सब लिखना! लेकिन चलिए लिख गया तो लिख गया, अब रामोजी साहब भी तो जाने कि उन्होंने अपने ऊंचे प्रकाश स्तंभों को कैसे हाथों में दे दिया. उनकी जीवन गाथा एक अद्भुत उपन्यास का विषय है. काश कोई लिखे. या कम से कम उन पर एक किताब ही लिखे. वह किताब निश्चित रूप से अरविन्द अडिगा के “व्हाइट टाइगर” को एक हिन्दुस्तानी का बेहद जरुरी जवाब होगी.

वरिष्ठ पत्रकार गुंजन सिन्हा के फेसबुक वॉल से.

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थाईलैण्ड में कई हिंदी ब्लागरों को परिकल्पना सम्मान से किया गया सम्मानित

परिकल्पना द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किया जाने वाला अन्तर्राष्ट्रीय ब्लागर सम्मेलन 16 से 21 जनवरी के बीच थाईलैण्ड की राजधानी बैंकाक में आयोजित किया गया। नई दिल्ली, लखनऊ, काठमांडो (नेपाल) थिम्मू (भूटान) कोलम्बो (श्रीलंका) के सफल आयोजनों की श्रंृखला में थाईलैण्ड का सम्मेलन भी पूरे वैभव के साथ सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर थाईलैण्ड के प्रमुख शहर पटाया और राजधानी बैंकाक में सम्पन्न हुए सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों में कवि सम्मेलन पुस्तक लोकार्पण, परिचर्चा एवं सांस्कृतिक संध्या जैसे कार्यक्रम सम्पन्न हुए।

17 जनवरी की सायं पटाया के गोल्डन बीच होटल के सभागार में रवीन्द्र प्रभात की अध्यक्षता में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें सुनीता प्रेम यादव, डा0 विनयदास, प्रीति, ‘अज्ञात’ डा0 निर्मला सिंह ‘निर्मल’ कुसुम वर्मा, डा0 रामबहादुर मिश्र आदि कवियों ने काव्य पाठ किया। 19 जनवरी को थाईलैण्ड की राजधानी बैंकाक के होटल सीजन स्याम के मुख्य सभागार में चार सत्रों में सम्मेलन का मुख्य कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। प्रथम उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि उ0प्र0 शासन के पूर्व नगर विकास मंत्री श्री नकुल दुबे थे।

अध्यक्षता श्री रवीन्द्र प्रभात ने किया विशिष्ट अतिथि के रूप में अन्तर्राष्ट्रीय बाक्सिंग कोच श्री एस0एन0 मिश्र तथा अवध ज्योति के सम्पादक डा0 राम बहादुर मिश्र थे। आयोजन की परिकल्पना पर प्रकाश डालते हुए आयोजक श्री रवीन्द्र प्रभात ने बताया हिन्दी साहित्य और ब्लागिंग के बीच सेतु निर्माण एवं योगदान देने के उद्देश्य से संस्था द्वारा 2010 में अन्तर्जाल पर उत्सव की परिकल्पना की गयी नाम दिया गया था परिकल्पना ब्लागोत्सव। हमारा उद्देश्य है एक सुन्दर एवं खुशहाल सह अस्तित्व की परिकल्पना को मूर्त रूप देना। मुख्य अतिथि श्री नकुल दुबे ने अपने सम्बोधन में कहा कि परिकल्पना का उद्देश्य बहुत ही पवित्र है वह पूरी दुनिया की बेहतरी के लिए काम कर रही है। उसका उद्देश्य सह अस्तित्व और वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पर केन्द्रित है।

विशिष्ट अतिथि डा0 राम बहादुर मिश्र ने कहा कि ब्लागरों की दस्तक ने साहित्य की दुनिया का स्वरूप बदल दिया है लेकिन लेखन के नाम पर कुछ सतही ब्लागरों की उपस्थिति ने ब्लागरों की छवि को नुकसान पहुंचाया है। लोकार्पण सत्र में मुख्य अतिथि ने सद्यः प्रकाशित साहित्यक कृतियों का लोकार्पण किया इनमें प्रमुख थी अवधी पत्रिका अवध ज्योति का अवधी कविता विशेषांक (सं0 डा0 राम बहादुर मिश्र) लफ्जों का सफर (काव्य संग्रह) डा0 अशोक गुलशन, अतुल श्रीवास्तव की पुस्तक फ्रंट पेज, डा0 अनीता श्रीवास्तव की पत्रिका रेवांत, डा0 निर्मला सिंह, निर्मल की पुस्तक दस्तक हमारी, अग्नि पुरूष की अंतिम उड़ान, शिखर की ओर, धरती रही पुकार।

तीसरा सत्र परिचर्चा का था। डा0 राम बहादुर मिश्र की अध्यक्षता में सम्पन्न हुए प्रथम सत्र का विषय इंटरनेट पर सृजनात्मक साहित्य का विस्तार था। विषय प्रवर्तन किया डा0 संदीप रमाभाऊ ठोकल (महाराष्ट्र) ने मुख्यवक्ता डा0 रमाकांत कुशवाहा ने मुख्य विषय पर बोलते हुए कहा अभिजन की भाषा जन की भाषा पर शासन करना चाहती है किन्तु इण्टरनेट ने जन भाषा को विशेष प्रोत्साहन दिया। परिचर्चा में रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी डा0 विनयदास, डा0 विजय प्रताप श्रीवास्तव, डा0 उमेश कुमार पटेल आदि ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। परिचर्चा का दूसरा सत्र साहित्य की समृद्धि में महिलाओं का योगदान विषय पर केन्द्रित था जिसकी अध्यक्षता डा0 निर्मला सिंह ने की। इस सत्र में प्रीति अज्ञात सुनीता प्रेम यादव तथा डा0 अनीता श्रीवास्तव ने अपने विचार रखे, संचालन कुसुम वर्मा ने किया।

अंतिम सत्र सम्मान पुरस्कार अलंकरण में मुख्य अतिथि श्री नकुल दुबे ने प्रतिभागियों को सम्मानित किया जिसका विवरण इस प्रकार है- परिकल्पना सार्क सम्मान 2015 कुसुम वर्मा, परिकल्पना साहित्य सम्मान 2015 प्रीति अज्ञात (अहमदाबाद), परिकल्पना ब्लाग सम्मान 2015 अतुल श्रीवास्तव (छत्तीसगढ़), परिकल्पना सृजन सम्मान 2015 डा0 निर्मला सिंह (लखनऊ), परिकल्पना अभिव्यक्ति सम्मान 2015 डा0 विनयदास (बाराबंकी), परिकल्पना हिन्दी प्रसार सम्मान 2015 डा0 विजय प्रताप श्रीवास्तव (कुशीनगर), परिकल्पना हिन्दी गौरव सम्मान 2015 रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी (गोरखपुर), परिकल्पना हिन्दी भूषण सम्मान 2015 डा0 रमाकान्त कुशवाहा (देवरिया), परिकल्पना शब्द शिखर सम्मान 2015 डा0 उमेश कुमार पटेल (महराजगंज उ0प्र0) परिकल्पना पत्रकारिता सम्मान 2015 डा0 अनीता श्रीवास्तव (लखनऊ उ0प्र0)।

सांय 6 बजे से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया एक शाम कुसुम वर्मा के नाम इस सांस्कृतिक संध्या में भारत और थाईलैण्ड के प्रतिभागियों की उपस्थिति में कुसुम वर्मा की मोहक प्रस्तुति ने समां बांध दिया। इस प्रकार मुख्य समारोह अपने विविध आयोजनों की वैभवशाली प्रस्तुति से सम्पन्न हुआ। अगले दिन विश्व प्रसिद्ध सफारी वल्र्ड के अनेक कार्यक्रमों में पूरा दिन व्यस्त रहा और अंतिम दिन 21 जनवरी को थाईलैण्ड के धार्मिक स्थलों एवं मन्दिरों के दर्शनोपरान्त सांय 4 बजे थाईलैण्ड के सुवर्ण भूमि एयरपोर्ट से उड़ान भरते हुए प्रतिभागियों ने विदा ली।

बैंकाक से डा0 रामबहादुर मिश्र की रिपोर्ट.

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31 दिसंबर को पंकज, अनिल, प्रदीप समेत कई लोग होंगे जयप्रकाश शाही स्‍मृति सम्‍मान से सम्मानित

लखनऊ। लोकबंधु राजनारायण के लोग संस्‍था ने 31 दिसम्‍बर 2015 को अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्‍ट कार्य करने वालों को लोकबंधु राजनारायण स्‍मृति सम्‍मान और जयप्रकाश शाही स्‍मृति सम्‍मान से विभूषित करने का निर्णय लिया है। लोकबंधु राजनारायण के निर्वाण दिवस पर आयोजित स्‍मृति समारोह में प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री श्री ओमप्रकाश सिंह, राष्‍ट्रपुरुष चन्‍दशेखर पुस्‍तक के विचार संपादक व विधान परिषद सदस्‍य श्री यशवंत सिंह और हिन्‍दुस्‍तान, दैनिक जागरण तथा राष्‍ट्रीय सहारा जैसे अखबारों में दो दशक से अधिक समय तक संपादक रहे श्री सुनील दुबे खास मेहमान के रूप में उपस्थित रहेंगे।

हजरतगंज स्थित हिंदी संस्‍थान के निराला सभागार में दिन के तीन बजे से आयोजित होने वाले लोकबंधु श्री राजनारायण स्‍मृति समारोह, 31 दिसम्‍बर, 2015 में सम्‍मानित किए जाने वाले साथ‍ियों के नाम हैं, सर्वश्री पंकज चतुर्वेदी (पत्रकार) को जयप्रकाश शाही स्‍मृति सम्‍मान के साथ अंगवस्‍त्रम से विभूषित किया जाएगा। साथ ही लालजी राय (विशेष सचिव, वन एवं पर्यावरण), मधुकर त्रिवेदी (वरिष्‍ठ पत्रकार), अनामिका श्रीवास्‍तव (वरिष्‍ठ कार्यक्रम अधिकारी, आकाशवाणी), अजय श्रीवास्‍तव (पत्रकार), प्रदीप कुमार (पत्रकार), हुसैन अफसर (पत्रकार), तारिक कमर (पत्रकार), अशोक यादव (वरिष्‍ठ छायाकार), रूपेश सोनकर (छायाकार) और इमरान सिद्द‍िकी (सामाजिक कार्यकर्ता) को लोकबंधु श्री राजनारायण स्‍मृति सम्‍मान और अनिल सिह यादव (पत्रकार), पंकज चतुर्वेदी (पत्रकार) तथा आमिर साबरी (शायर) को जयप्रकाश शाही स्‍मृति सम्‍मान के साथ अंगवस्‍त्रम से विभूषित किया जाएगा।

लोकबंधु राजनारायण के लोग संस्‍था के संयोजक शाहनवाज अहमद कादरी ने बताया है कि इस अवसर पर उत्‍तर प्रदेश सरकार के पर्यटन मंत्री श्री ओमप्रकाश सिंह, राष्‍ट्रपुरुष चन्‍द्रशेखर पुस्‍तक के विचार संपादक एवं विधान परिषद सदस्‍य यशवंत सिंह और हिन्‍दुस्‍तान, दैनिक जागरण और राष्‍ट्रीय सहारा जैसे अखबारों में दो दशक से अधिक समय तक संपादक रहे श्री सुनील दुबे सम्‍मानित किए जाने वाले साथियों को अंगवसत्रम एवं प्रणाम पत्र भेंट करेंगे। श्री कादरी ने समस्‍त पत्रकारों, समाजसेवियों, प्रबुद्धजनों और समाजवादियों से लोकबंधु श्री राजनारायण के निर्वाण दिवस पर आयोजित स्‍मृति समारोह में भाग लेकर लोकबंधु राजनारायण को श्रद्धां‍जलि देने और अपने कार्य के साथ ही सामाजिक सरोकार के प्रति भी सजग रहने वालें मित्रों को प्रोत्‍साहित करने के लिए 31 दिसम्‍बर 2015 को निराला सभागार में दिन के तीन बजे पहुंचने की अपील की है।

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रवि मिश्र को रामेश्वरम हिंदी पत्रकारिता पुरस्कार, झांसी के पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया

झांसी। राजकीय संग्रहालय सभागार, झॉसी में स्व0 पं0 रामेश्वर दयाल त्रिपाठी (नन्ना) की पुण्य स्मृति में स्थापित रामेश्वरम् हिन्दी पत्रकारिता पुरस्कार का बारहवां सम्मान समारोह सम्पन्न हुआ। डा. इकबाल खान ने वर्ष 2015 का राष्ट्रीय स्तर पर रामेश्वरम् हिन्दी पत्रकारिता पुरस्कार रवि मिश्रा (हिंदुस्तान, झांसी) को देने की घोषणा की। इसके बाद उन्हे मुख्य अतिथिद्वय के कर कमलों द्वारा 11,000 (ग्यारह हजार) रूपये का नगद पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। रवि मिश्र ने पूरी संजीदगी से अपना काम करते रहने का संकल्प दोहराया। उन्होंने ये पुरस्कार माता-पिता और झांसी के लोगों को समर्पित किया।

इस समारोह में इलेक्ट्रानिक मीडिया से धर्मेंद्र साहू प्रिट मीडिया के पत्रकारों हरिकृष्ण चतुर्वेदी, बृजेंद्र खरे, मुकेश त्रिपाठी, दीपक चंदेल, रवींद्र सिंह गौर, और शीतल तिवारी को प्रशस्तिपत्र, शाल्र व श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। इन सभी ने पत्रकारिता जगत की विसंगतियों एवं खामियों का भी उल्लेख किया। सम्मान के लिए संस्थान के प्रति आभार भी व्यक्त किया।  समारोह की अध्यक्षता कर रहे कैलाशचन्द्र जैन ने अपने सम्बोधन में स्व0 पं0 रामेश्वर दयाल त्रिपाठी (नन्ना) के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। संस्थान के अध्यक्ष सुधांशु त्रिपाठी को इस अच्छे कार्य के लिए साधुवाद भी दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को संबल देने की जरूरत है।

 

इस समारोह में डा. धन्नूलाल गौतम, बार के अध्यक्ष महेंद्रपाल वर्मा, जयदेव पुराोहित, वीरेंद्र शर्मा, आरएन शर्मा, मनोहरलाल चतुर्वेदी, भरत राय, सलिल रिछारिया, हरीश लाला, महेश पटैरिया, राधाचरण शांडिल्य, राजेश राय, रामजीवन ओझा, पुष्कर पंडित, नफीसा सिददीकी, दिलीप अग्रवाल, ओमप्रकाश राय, देवीदयाल यादव, डा. श्यामाकांत पाराशर, मंसूर अहमद आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण जैन ने किया। जिला बार के सचिव प्रणय श्रीवास्तव एडवोकेट ने सभी आये हुए आगन्तुक महानुभावों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अविनाशचंद्र पाण्डेय बतौर मुख्य अतिथि शामिल थे। वरिष्ठ पत्रकार कैलाशचन्द्र जैन की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ। शुभारम्भ गिरिजाशंकर ने स्व0 पं0 रामेश्वर दयाल त्रिपाठी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस समारोह के विशिष्ट अतिथि पूर्व मंत्री हरगोविन्द कुशवाहा, वरिष्ठ पत्रकार बंशीधर मिश्र, विष्णुदत्त स्वामी, गिरीश सक्सेना, मोहन नेपाली और मुकेश अग्रवाल रहे। इनका स्वागत संस्थान के पदाधिकारियों डा0 सुधीर त्रिपाठी, प्रतीक चौरसिया, राहुल शुक्ला, संजय गुप्ता, सुनील पाण्डेय, उमेश शुक्ल, डा. मानव अरोरा, डा. मो नईम, मनोज गुप्ता, डा. अरूण पटैरिया ने पुष्पगुछ भेंट करके किया। 

संस्थान के अध्यक्ष सुधांशु त्रिपाठी ने संस्थान की प्रगति आख्या प्रस्तुत की तथा उसकी गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए समस्त अतिथियों व आगन्तुको का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की समाज में  अहम भूमिका है इतिहास गवाह है कि जब-जब शासन निरंकुश हुआ है तब-तब पत्रकारों ने उनके खिलाफ आवाज बुलन्द की है।

वरिष्ठ पत्रकार बंशीधर मिश्र ने पत्रकारिता जगत के समक्ष उत्पन्न संकटों का जिक्र करते हुए कहा कि इनके निराकरण के लिए समाज को पहल करने की आवश्यकता है। वरिष्ठ पत्रकार गिरीश सक्सेना ने पत्रकारों से अपने चरित्र की रक्षा करते हुए दायित्व का निर्वहन करने की सीख दी। मोहन नेपाली ने प्रेस की महत्ता का उल्लेख किया। साथ ही पत्रकारों के संघर्षो की चर्चा न होने की बात भी कही।

मुख्य अतिथि एवं वरिष्ठ पत्रकार गिरिजाशंकर ने कहा कि आज के दौर में जब पूरी पत्रकारिता गाली का पात्र बन गई हे ऐसे में पत्रकारों का सम्मान होते देखना सुखद और महत्वपूर्ण है। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता की चुनौतियों का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि सम्मान से पत्रकारों की उर्जा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को आकर्षण से बचकर रहना है और साथ ही साथ अपने दायित्वों का निर्वहन भी करना है।

मुख्य अतिथि और बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो अविनाश चंद्र पाण्डेय ने गोस्वामी तुलसीदास कृत श्रीरामचरित मानस के विविध प्रसंगों का जिक्र करते हुए कहा कि क्रोध भी एक प्रकार का मनोविकार है। उन्होंने विविध प्रसंगों का उदाहरण सामने रखते हुए बताया कि कैसे दर्पणों से अलग.अलग समय पर पात्रों को भिन्न प्रकार के संकेत मिले। कुछ ने इन्हें समझा पर कुछ ने इन्हें नहीं समझा या माना। उन्होंने कहा कि दर्पर्णों से मिले संकेतों को न समझना भी ठीक परिणाम नहीं देता है। उन्होंने बुदेलखंड क्षेत्र की रचनाओं को मौलिक मानते हुए उनकी खूबियों का उल्लेख किया। प्रो पाण्डेय ने पत्रकारों से अपील की कि वे लोगों को ऐसे दर्पण दिखाएं कि सभी सच को जान सकें।

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प्रो. लाल बहादुर वर्मा को प्रथम ‘शारदा देवी शिक्षक सम्मान’

20 दिसम्बर को सम्मान समारोह  

 

इलाहाबाद  | इस वर्ष प्रथम ‘शारदा देवी शिक्षक सम्मान’  प्रो. लाल बहादुर वर्मा, प्रख्यात इतिहासविद तथा लेखक को प्रदान दिया जा रहा है| यह सम्मान राष्ट्रीय स्तर पर हर वर्ष ऐसे शिक्षक को दिया जाता है जो सामाजिक सरोकारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हों  और कक्षा की पढ़ाई के साथ समाज निर्माण में सक्रिय हों| यह सम्मान बरेली जिले में कार्यरत रहीं प्रधानाध्यापिका शारदा देवी के नाम पर दिया जाता है, जिन्होंने अपना पूरा  जीवन बालिकाओं की  शिक्षा के लिए समर्पित कर दिया| उन्होंने अनगिनत लड़कियों को पढ़ाने और अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए हरसंभव  प्रयास किया| शिक्षा के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए उन्हें राज्यपाल पुरस्कार से दिया गया| मात्र 53 वर्ष की उम्र में कैंसर से जूझते हुए वे जिंदगी को अलविदा कह गयीं|

प्रो. लाल बहादुर वर्मा को सम्मानित करने प्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. कमल नयन काबरा दिल्ली से आ रहे हैं| इस अवसर पर पूर्व आईपीएस और साहित्यकार विकास नारायण राय तथा आन्जनेय कुमार सिंह, आईएएस भी आ रहे हैं| कार्यक्रम की अध्यक्षता इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ए. सत्यनारायण करेंगे| शारदा देवी जी के क्षेत्र के दस शिक्षक और शिक्षिकाएं इस कार्यक्रम में शिरकत करने बरेली से आ रहे हैं| 

यह सम्मान पाने वाले प्रो. लाल बहादुर वर्मा  कर्मठ और ऊर्जावान शिक्षक हैं, उनके लेखन, जीवट और लगन से युवाओं की कई पीढियां तैयार हुईं, जिन्होंने खुद को समाज निर्माण में लगा दिया| तार्किक समाज निर्माण में उनका अतुलनीय योगदान है|  तीन सदस्यीय निर्णायक समिति, जिनमे डा. प्रणय कृष्ण, डा. संजय श्रीवास्तव और डा. मो. आरिफ शामिल हैं,  ने इस सम्मान के लिए सहर्ष प्रो. लाल बहादुर वर्मा का नाम प्रस्तावित किया|  इस अवसर पर शिक्षा के सामाजिक सरोकारों पर प्रो. कमल नयन काबरा का एकल वक्तव्य भी आयोजित है| इस कार्यक्रम का आयोजन शारदा देवी ट्रस्ट कर रहा है| शारदा देवी ट्रस्ट होनहार वंचित छात्रों को छात्रवृत्ति भी देता है|

प्रेस विज्ञप्ति 
संध्या नवोदिता 
अध्यक्ष 
शारदा देवी ट्रस्ट

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‘दलित दस्तक’ मैग्जीन के संपादक अशोक दास ‘प्रभाष जोशी स्मृति पत्रकारिता सम्मान’ से नवाजे गए

दिल्ली से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका ‘दलित दस्तक’ के संपादक एवं प्रकाशक अशोक दास को ‘प्रभाष जोशी स्मृति पत्रकारिता सम्मान’ से नवाजा गया है. श्री दास को यह पुरस्कार रायबरेली (उत्तर प्रदेश) की संस्था ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी राष्ट्रीय स्मारक समिति’ की ओर से दिया गया है. 21 नवंबर को आयोजित भव्य कार्यक्रम में उन्हें यह पुरस्कार दिया गया. इस मौके पर अशोक दास ने आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को याद करते हुए उन्हें हिन्दी पत्रकारिता का प्रथम पुरुष कहा.

उन्होंने कहा कि आर्चाय द्विवेदी ने अपने संपादन में निकलने वाली पत्रिका “सरस्वती” में पहली बार हीरा डोम द्वारा लिखित कविता ‘अछूत की शिकायत’ को प्रकाशित किया था. इससे यह पता चलता है कि वह सामाजिक समरसता के पक्षधर थे. इस दौरान दास ने प्रभाष जोशी के साथ अपने संस्मरण को भी याद किया. साथ ही प्रभाष जोशी से परिचय करवाने वाले भड़ास4मीडिया के संपादक/संचालक यशवंत सिंह और वरिष्ठ पत्रकार रामबहादुर राय का आभार प्रकट किया. आगामी 26 नवंबर को संविधान दिवस का जिक्र करते हुए उन्होंने इस सम्मान को बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर, हिन्दी पत्रकारिता के प्रथम पुरुष आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी और हिन्दी पत्रकारिता के स्तंभ पुरुष प्रभाष जोशी को संयुक्त रूप से समर्पित किया.

आचार्य स्मृति दिवस 21 नवंबर के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी युगप्रेरक सम्मान प्रख्यात कथाकार प्रो. काशीनाथ सिंह को, जबकि डॉ. राममनोहर त्रिपाठी लोकसेवा सम्मान पंजाब के तुगलपुर के प्रख्यात शिक्षासेवी सरदार स्वर्ण सिंह और सरदार गगनजीत सिंह को दिया गया. इस मौके पर जिले की मेधावी छात्रा सुश्री दिव्या सिंह को शिवानंद मिश्र ‘लाले’ स्मृति सम्मान दिया गया. जबकि जनपद के उभरते कलाकार सहर्ष शुक्ला (फिल्म- हाइवे) का नागरिक अभिनंदन किया गया. जबकि दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार अरविंद सिंह (राज्यसभा टीवी) और नवभारत अखबार के रिजनल हेड पत्रकार गोविन्द बड़ोने को संस्था के लिए उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया.

फिरोज गांधी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जिलाधीकारी सूर्यपाल गंगवार तथा मौजूद अन्य मंचासीन अतिथियों ने ‘आचार्य पथ’ नामक स्मारिका एवं ‘आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अभिनंदन ग्रंथ’ का लोकार्पण समारोह भी किया. अतिथियों का स्वागत गौरव अवस्थी ने किया. संचालन हिन्दुस्तान लखनऊ में कार्यरत पत्रकार आंचल अवस्थी ने किया. इस दौरान रायबरेली में दलित दस्तक के विक्रेता भीम पुस्तक केंद्र के संचालक आर.पी. राम, डॉ. जयप्रकाश एवं लखनऊ से पहुंचे जे.सी लाल ‘व्यथित’ भी मौजूद थे.

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जिसने किया महिला टीचर का सम्मान तार-तार, उसे मिला रामनाथ गोयनका सम्मान

Vineet Kumar : जी न्यूज के दागदार संपादक सुधीर चौधरी को 16 दिसंबर 2012 में हुए दिल्ली गैंगरेप की पीडिता के दोस्त का इंटरव्यू करने के लिए साल 2013 का रामनाथ गोयनका सम्मान दिया गया. ये सम्मान सुधीर चौधरी के उस पत्रकारिता को धो-पोंछकर पवित्र छवि पेश करती है जिसके बारे में जानने के बाद किसी का भी माथा शर्म से झुक जाएगा. पहली तस्वीर में आप जिस महिला के कपड़े फाड़ दिए जाने से लेकर दरिंदगी के साथ घसीटने,बाल नोचने के दृश्य दे रहे हैं, ये शिक्षक उमा खुराना है. इन पर साल 2007 में लाइव इंडिया चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन किया और लोगों को बताया कि ये महिला शिक्षक जैसे पेशे में होकर छात्राओं से जिस्मफरोशी का धंधा करवाती है. चैनल ने इस पर लगातार खबरें प्रसारित की.

नतीजा ये हुआ कि दिल्ली के तुर्कमान गेट पर बलवाईयों ने इस महिला को घेर लिया..कपड़े फाड़ दिए और मार-मारकर बुरा हाल कर दिया. पुलिस की सुरक्षा न मिली होती तो इस महिला की जान तक चली जाती. बाकी देश के लाखों लोगों की निगाह में ये शिक्षक ऐसी गुनाहगार थी जिसका फैसला लोग अपने तरीके से करने लग गए थे. लेकिन जल्द ही पता चला कि चैनल के रिपोर्टर प्रकाश सिंह ने कम समय में शोहरत हासिल करने के लिए जिस स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया था वो पुरी तरह फर्जी है. उस वक्त चैनल के प्रमुख यही सुधीर चौधरी थे और उन्होंने अपने रिपोर्टर को क्रिमिनल बताते हुए साफ-साफ कहा कि इसने हमें धोखे में रखा और इस खबर की हमें पहले से जानकारी नहीं थी. चैनल एक महीने तक ब्लैकआउट रहा. प्रकाश सिंह थोड़े वक्त के लिए जेल गए..फिर छूटकर दूसरे न्यूज चैनल और आगे चलकर राजनीतिक पीआर में अपना करिअर बना लिया और इधर खुद सुधीर चौधरी तरक्की करते गए.

इस फर्जी स्टिंग ऑपरेशन के देखने के बाद जनता ने शिक्षक उमा खुराना के साथ जो कुछ भी किया, उसकी कोई भरपाई नहीं हुई..अब वो कहां हैं, क्या करती हैं, किस हालत में है इसकी मीडिया ने कभी कोई खोजखबर नहीं ली लेकिन अब जबकि सुधीर चौधरी को महिलाओं के सम्मान के लिए ये अवार्ड मिला है तो कोई जाकर उनसे अपने चिरपरिचत अंदाज में पूछे कि आपको ये खुबर सुनकर कैसा लग रहा है तब आपको अंदाजा मिल पाएगा कि महिलाओं का सम्मान कितना बड़ा प्रहसन बनकर रह गया है. बाकी जी न्यूज के इस दागदार संपादक पर बोलने का मतलब देशद्रोही होना तो है ही. ‪

कथित दलाली मामले में जेल जा चुके संपादक को मिला रामनाथ गोयनका सम्मान… एक तरफ कथित दलाली मामले में जेल जा चुके ज़ी न्यूज़ के दागदार संपादक सुधीर चौधरी को भारतीय पत्रकारिता का सर्वश्रेष्ठ रामनाथ गोयनका सम्मान मिला है तो दूसरी तरफ हर साल की तरह मेरे उन दोस्तों को जो मीडिया में रहते हुए मेनस्ट्रीम मीडिया के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते रहे हैं. कायदे से तो ऐसे दागदार संपादक पर हमें बात करनी छोड़ देनी चाहिए. भई जिसे देश की एक बड़ी जमात उसे राष्ट्रवादी मीडियाकर्मी मानकर सम्मान से डीएनए शो देखती है तो दूसरी तरफ खुद मीडिया के भीतर के लोग उन्हें पुरस्कार से नवाजते हैं.लेकिन इन सबके बीच मेरे दिमाग में एक सवाल तो बार-बार उठता ही है- क्या पुरस्कार चयन समिति में वो मीडियाकर्मी भी शामिल रहे हैं जिन्होंने 100 करोड़ की कथित दलाली मामले में कभी सौ सुधीर चौधरी का विरोध किया था? बाकी ब्रांड के मेकओवर के लिए रामनाथ गोयनका अवार्ड तो असरदार विम लिक्विड है ही..सारे दाग-धब्बे साफ़

और हां, रामनाथ गोयनका सम्मान से मोदी और उनकी सरकार को कोई लेना-देना नहीं है… कुछ लोग जी न्यूज के दागदार संपादक सुधीर चौधरी को पुरस्कार दिए जाने पर मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं. प्लीज ऐसा न करें. इस पुरस्कार से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है. इस तरह की बातें करने से संदर्भ बदल जाते हैं और एक सीरियस बात मजाक में बदल जाती है. ये पुरस्कार इंडियन एक्सप्रेस समूह के संस्थापक रामनाथ गोयनका की याद में उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए दी जाती है और इसका पूरा खर्च समूह अपने ढंग से वहन करता है. हां ये जरूर है कि कार्यक्रम में रौनक लाने के लिए हर साल बड़े पैमाने पर राजनीतिक और सरकार से जुड़े लोगों को आमंत्रित किया जाता है लेकिन इस पुरस्कार के दिए जाने में उनकी कहीं कोई भूमिका नहीं होती.

युवा मीडिया विश्लेषक और ब्लागर विनीत कुमार के फेसबुक वॉल से.


मूल खबर>

कुलदीप नैयर को लाइफ टाइम अचीवमेंट… इन 56 पत्रकारों को भी मिला रामनाथ गोयनका एवार्ड…

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एबीपी न्यूज के तमाशेबाजों ने डरा कर रख दिया…

आलोक कुमार : एबीपी न्यूज के तमाशेबाजों ने डरा कर रख दिया। शो हिट कराने के लिए मेरे प्रिय शायर मुनव्वर राना को निशाने पर ले लिया। हमारे दौर के सबसे संवेदनशील रचनाकार मुनव्वर को एवीपी वालों ने “निशान ए साहित्य अकादमी” और सम्मान की एक लाख रूपए की राशि के साथ आने को राजी कर लिया था। लाइव शो में गजब का डायलॉग बोलकर मुनव्वर साब ने सम्मान वापसी का एलान कर दिया। यह हमारे इर्द गिर्द बढती असहिष्णुता पर जबरदस्त तमाचा है। मैं अंदर से हिल गया हूं और सचमुच लगा रहा है कि अब अति हो गई है। सरकार को सम्मान लौटाने वालों के साथ तत्काल संवाद कायम करना चाहिए। इसके लिए साहित्यकारों की संवेदना की इज्जत करने वाले व्यक्ति को सामने करना चाहिए। वरना हमारी शानदार पहचान को घातक चोट लगने का सिलसिला जारी रहेगा।

Santosh Manav :  श्री मुनव्वर राणा आपका बहुत सम्मान करता हूं । आपकी कविता मेरे हिस्से मे आई माँ सुनकर पढ़कर आज भी कलेजा कांप जाता है । लेकिन जिस तरह आपने आज अकादमी पुरस्कार लौटाया । वह जंचा नहीं । आप आज साहित्यकार की तरह नहीं बोले । दुख हुआ । आप भी?

Anand Singh : मुनव्वर राणा के नाम एक खुला खत… हर दिल अजीज, शायरों के शायर, जनाब मुनव्वर राणा जी, इस नाचीज का सलाम कुबूल करें। आज एबीपी न्यूज पर आपको बोलते देखा। आपके तेवर देखे। आपकी भावनाएं देखीं। आपकी भंगिमाएं देखीं। आपको साहित्य अकादमी का पुरस्कार और बैंक आफ बड़ौदा का वह चेक लौटाते देखा, जिस पर आपने एक लाख रुपये और नीचे अपना दस्तखत किया था। आपने एबीपी न्यूज के मंच का बेहतरीन इस्तेमाल किया। आपने बीच बहस में, चर्चा के दौरान जिस तरीके से साहित्य अकादमी के पुरस्कार को लात मार दिया, वह पूरे देश ने देखा। अगर एबीपी न्यूज विदेशों में भी दिखता हो तो विदेश के लोगों ने भी आपको साहित्य अकादमी का पुरस्कार लौटाते देखा ही होगा। मुझे लगता है, आप अपनी जमात में शहीदाना दर्जा प्राप्त करने में कामयाब हो गए। आपकी इस चालाकी पर आपको दिल से बधाई। एबीपी न्यूज पर जिस नजाकत के साथ आपने पुरस्कार लौटाया, वह तो हिंदी की सस्पेंस वाली फिल्मों को भी मात कर देगा। 25 साल पहले, जब मैंने साहित्य पढ़ना शुरु किया था तो गद्य में मेरे दो हीरो थेः पहले प्रेमचंद, दूसरे रेणु। जब जगन्नाथ जैन कालेज के हिंदी के विभागाध्यक्ष डा. देवनंदन सिंह विकल सर के कहने पर मैंने शायरी पढ़नी शुरु की तो कोडरमा रेलवे स्टेशन के एक मात्र बुकस्टाल से मैंने आपकी ही किताब उठाई। क्यों। ये आप कभी नहीं समझ सकेंगे। मैंने आपको कभी मुसलमान के रूप में नहीं देखा। कैसे देखता। मेरा नजरिया ये था कि कलाकार, साहित्यकार, पत्रकार किसी जाति के तो होते ही नहीं और न ही वे किसी धर्म विशेष के होते हैं। बेशक, आप मुसलमान हों, हिंदू हों, गुरदयाल सिंह सरीखे सिक्ख हों या फिर फर्माडों या लियो तालस्यताय सरीखे क्रिश्चन, अगर आप साहित्य से जुड़ें हैं तो आप सिर्फ एक इंसान हैं। जाति-मजहब तो कहीं रहता ही नहीं, एक साहित्यकार के साथ।

जनाब, आपने अपनी जुबान से कहा है एबीपी न्यूज पर कि अखलाक को साजिशन मार-मार कर खत्म कर दिया गया, इसलिए मैं पुरस्कार लौटा रहा हूं। आपने अपने मुंह से कहा है कि देश में लिखने-पढ़ने लायक माहौल नहीं है, इसलिए आप पुरस्कार लौटा रहे हैं। कमाल है। देश की रक्षा करने वाले हेमराज का सिर पाकिस्तान की आर्मी काट कर ले जाती है तब आपने क्यों नहीं विरोध किया। तब आपने क्यों नहीं कहा कि पाकिस्तान के इरादे घटिया हैं और मैं कभी पाकिस्तान जाकर शेर-औ-शायरी नहीं करूंगा। अखलाक की हत्या हुई, यह आपको दिख गया। हेमराज का सिर काट दिया गया, यह आपको क्यों नहीं दिखा राणा साहेब। मुझे यह कहने में अत्यधिक तकलीफ हो रही है कि मुनव्वर राणा भी हकीकी हिंदुस्तानी मुसलमान नहीं रह गए। राणा साहेब भी हिंदू-मुसलमानों में भेद करते हैं। यह साहित्य जगत के लिए कहीं से ठीक नहीं है। गोरखपुर में कोई तीन साल पहले आपको सुना था मैंने। इस्लामिया इंटर कालेज कैम्पस में। आप शेर सुना रहे थे, मैं रो रहा था। आप मां सुना रहे थे। मैं दो साल पहले अपनी मां को खो चुका था। आपकी कविता की मां और मेरी अपनी मां के दरम्यान वह सब कुछ था जो आपकी कविता में थी। एकरूपता थी। इसीलिए मैं दिल से आपकी इज्जत करता था। मुझे क्या मालूम कि मैं साहित्याकार नहीं वरन एक इस्लाम को मानने वाले, एक अखलाक की हत्या के खिलाफ अकादमी पुरस्कार लौटाने वाले राणा साहेब को सुन रहा हूं। साहित्यकार सिर्फ एक इंसान होता है। न उससे कम, न उससे ज्यादा। जब लिटरेचर से जुड़े लोग हिंदू और मुसलमान हो जाएंगे तो इस देश को नष्ट होने में कितना वक्त लगेगा भला। बहुत सारे लोगों ने अखलाक की हत्या के खिलाफ, सरकार के रवैये के खिलाफ आक्रोश जाहिर करते हुए अकादमी पुरस्कार लौटाए हैं। अकादमी पुरस्कार को लौटाना एक सियासत के तहत है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं। लेकिन, जिस तरीके से राणा साहेब ने पुरस्कार लौटाया, एक चैनल के प्रोग्राम को जिस कदर उन्होंने हाइजैक कर लिया, वह इस देश के सभ्य लोगों के लिए, साहित्य के रसिकों के लिए बहुत बड़ा झटका है। यह झटका देश देर तक महसूस करता रहेगाः जैसे भूकंप के झटकों के बाद देश ने महसूस किया था। मैं नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना करने वाला कलम का सिपाही हूं। आलोचना के कई कारण हैं। लेकिन कोई इस बात के लिए मोदी सरकार की आलोचना करे कि देश में पढ़ने-लिखने का माहौल नहीं रह गया है और हालात इतने खराब हो गए हैं कि लोग पुरस्कार लौटा रहे हैं, तो मैं सिर्फ हंस सकता हूं। मैं उनकी सोच पर सिर्फ तरस खा सकता हूं। पुरस्कार लौटाने वाले हमारे साहित्यकार लोग इस बात पर क्यों नहीं चर्चा करते कि राजसत्ता से ज्यादा अहम है जनता के बीच की किस्सागोई। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के तलवे चाटने वाले हरामखोर किस्म के साहित्याकार लोगों को मोदी सरकार में कोई तवज्जो नहीं मिल रही है तो वे पुरस्कार लौटा रहे हैं। मैं पुरस्कार लौटाने वाले सभी साहित्यकारों को इस श्रेणी में नहीं रख रहा पर पाठक गण यह तय कर लें कि लिखने वाले कौन हैं और राजसत्ता का प्रसाद चाटने वाले कौन। -आनंद सिंह, प्रधान संपादक, मेरी दुनिया मेरा समाज, गोरखपुर

पत्रकार आलोक कुमार, संतोष मानव और आनंद सिंह के फेसबुक वॉल से.

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प्रो. कलबुर्गी की हत्‍या के विरोध में उदय प्रकाश ने साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार लौटाया

Uday Prakash : पिछले समय से हमारे देश में लेखकों, कलाकारों, चिंतकों और बौद्धिकों के प्रति जिस तरह का हिंसक, अपमानजनक, अवमानना पूर्ण व्यवहार लगातार हो रहा है, जिसकी ताज़ा कड़ी प्रख्यात लेखक और विचारक तथा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ साहित्यकार श्री कलबुर्गी की मतांध हिंदुत्ववादी अपराधियों द्वारा की गई कायराना और दहशतनाक हत्या है, उसने मेरे जैसे अकेले लेखक को भीतर से हिला दिया है।

अब यह चुप रहने का और मुँह सिल कर सुरक्षित कहीं छुप जाने का पल नहीं है। वर्ना ये ख़तरे बढ़ते जायेंगे। मैं साहित्यकार कुलबर्गी जी की हत्या के विरोध में ‘मोहन दास’ नामक कृति पर २०१०-११ में प्रदान किये गये साहित्य अकादमी पुरस्कार को विनम्रता लेकिन सुचिंतित दृढ़ता के साथ लौटाता हूँ। अभी गॉंव में हूँ। ७-८ सितंबर तक दिल्ली पहुँचते ही इस संदर्भ में औपचारिक पत्र और राशि भेज दूँगा। मैं उस निर्णायक मंडल के सदस्य, जिनके कारण ‘मोहन दास’ को यह पुरस्कार मिला, अशोक वाजपेयी और चित्रा मुद्गल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए, यह पुरस्कार वापस करता हूँ।

आप सभी दोस्तों से अपेक्षा है कि आप मेरे इस निर्णय में मेरे साथ बने रहेंगे, पहले की ही तरह।

आपका

उदय प्रकाश


(हिंदी के नामचीन लेखक उदय प्रकाश ने हिंदुत्‍ववादी ताकतों द्वारा कन्‍नड़ के विद्वान प्रो. कलबुर्गी की हत्‍या के विरोध में साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार लौटाने की घोषणा की है। उन्‍होंने शुक्रवार की सुबह अपने फेसबुक वॉल पर उपरोक्त पोस्‍ट लिखा है)

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कल्याण के हाथों पुरस्कार लेने का विरोध करने वालों को ओम थानवी ने दुश्मन करार दिया

Om Thanvi : दुश्मनों के पेट में फिर बल पड़ गए। कहते हैं, महाकवि बिहारी के नाम पर दिया जाने वाला केके बिड़ला फाउंडेशन का पुरस्कार मैंने कल्याण सिंह के हाथों क्यों ले लिया? अगर मुझे चुनाव की सुविधा होती तो आयोजकों से कहता किसी लेखक के हाथों दिलवाइए। इसके बावजूद, सच्चाई यह है कि पुरस्कार मैंने कल्याण सिंह के हाथों नहीं, राज्यपाल के हाथों लिया है; राज्यपाल जो संविधान की सत्ता का प्रतीक होता है, संविधान का प्रतिनिधि और कार्यपालक होने के नाते। राजभवन कल्याण सिंह या भाजपा की मिल्कियत नहीं है।

पुरस्कारों से मुझे खास खुशी नहीं होती, लेकिन एक लाख रुपये से जरूर होती है। बेरोजगारी में और ज्यादा। बिड़ला लोग कंजूस हैं जो 24 बरसों से एक लाख की राशि को जड़ रखे हुए हैं, वरना मेरी खुशी (और दुश्मनों की नाखुशी) और बढ़ी होती! मेरे लिखे की कद्र कोई भी करे – चाहे सरकार भी – इसमें मुझे क्या गिला? (कभी कोई ढंग का काम कर लेने का हक बेढंगे लोगों को भी होना चाहिए कि नहीं?)

अफसोस बस इस बात का है कि राजभवन में मैंने क्या कहा इसकी चर्चा दिलजले लोगों ने नहीं की – वे करेंगे भी क्यों? पुरस्कार ग्रहण करने के बाद मैंने देश में व्याप्त सांप्रदायिकता की बात की, उसे मिलने वाली शह की निंदा की; इस हिंसक दौर पर यह टीका मैंने दो रोज पहले कट्टरपंथियों के हमले के शिकार हुए प्रो. कुलबर्गी के कत्ल का जिक्र करते हुए की। इससे पहले राजभवन के भीतर सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ बोलने कब कौन नाशुक्रा पहुंचा होगा, मेरी किताब पर मुझे ही पुरस्कार लेने न लेने का उपदेश झाड़ने वाले जरा यह तो बता दें!

जनसत्ता के पूर्व संपादक और वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.

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कल्याण सिंह के हाथों पुरस्कार लेने पर ओम थानवी सोशल मीडिया पर घिरे

Neelabh Ashk : मत छेड़ फ़साना कि ये बात दूर तलक जायेगी. ओम तो गुनहगार है ही, हिन्दी के ढेरों लोग किसी न किसी मौक़े पर और किसी न किसी मात्रा में गुनहगार हैं. इस हमाम में बहुत-से नंगे हैं. पुरस्कार पाने वाले की पात्रता के साथ पुरस्कार देने वाली की पात्रता भी देखी जानी चाहिए। ऐसी मेरी मान्यता है. मैंने साहित्य अकादेमी का पुरस्कार लौटा दिया था. मेरी मार्क्स की पढ़ाई ने मुझे पहला सबक़ यह दिया था कि कर्म विचार से प्रेरित होते हैं. 55 साल बाद तुम चाहते हो मैं इस सीख को झुठला दूं. ओम की कथनी और करनी में इतना फ़र्क़ इसलिए है कि सभ्यता के सफ़र में इन्सान ने पर्दे जैसी चीज़ ईजाद की है. ईशोपनिषद में लिखा है कि सत्य का मुख सोने के ढक्कन के नीचे छुपा है. तुम सत्य को उघाड़ने की बजाय उस पर एक और सोने का ढक्कन रख रहे हो. ये ओम के विचार ही हैं जो उसे पुरस्कार>बिड़ला>राज्यपाल>कल्याण सिंह की तरफ़ ले गये. मैं बहुत पहले से यह जानता था. मुझे कोई अचम्भा नहीं हुआ. मैं ओम की कशकोल में छदाम भी न दूं. और अगर यह मज़ाक़ है तो उम्दा है, पर हिन्दी के पद-प्रतिष्ठा-पुरस्कार-सम्मान-लोभी जगत पर इसका कोई असर नहीं होगा.

Dilip C Mandal : एक मित्र पूछ रहे हैं कि क्या मैं योगी आदित्यनाथ या कल्याण सिंह के हाथों कोई पुरस्कार लेता? चूँकि ऐसा कोई अवसर मेरे सामने नहीं आया है, इसलिए कल्पना से ही उत्तर देना होगा। शायद नहीं। भारत सरकार के दो नेशनल अवार्ड मैंने लिए हैं। एक उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के हाथो और दूसरा तत्कालीन केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री जगतरक्षकन साहेब से। एक प्रेस कौंसिल का और दूसरा सूचना और प्रसारण मंत्रालय का। पुरस्कार पाने वाले की पात्रता के साथ पुरस्कार देने वाली की पात्रता भी देखी जानी चाहिए। ऐसी मेरी मान्यता है। मुझे नहीं लगता कि योगी आदित्यनाथ या कल्याण सिंह मुझे पुरस्कार देने के लिए सही पात्र हैं। मुझे नहीं लगता है कि कभी मौक़ा मिला भी तो मैं इनके हाथों पुरस्कार लेना चाहूँगा। अभी तक तो यही सोच है मेरी। मैं अपने लिए कामना करता हूँ कि मुझमें इतना नैतिक बल बचा रहे कि इन्हें मना कर सकूँ। आमीन!

Mohammad Anas : जनसत्ता के पूर्व संपादक श्री ओम थानवी जी द्वारा भाजपा के नेता, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और बाबरी मस्जिद विध्वंस में शामिल कल्याण सिंह के हाथों अपनी किताब के लिए पुरूस्कार लिया जाना वाकई आलोचना की श्रेणी में आता है। श्री थानवी जी को यह पुरूस्कार एक प्राइवेट संस्था द्वारा दिया गया है, यदि वह न लेने का नैतिक दबाव बनाते तो संस्था कल्याण सिंह के अलावा किसी और से भी उनको यह पुरूस्कार दे सकती थी या फिर बिमारी का बहाना बना कर राजभवन न जाते। करने को वे बहुत कुछ कर सकते थे। ऐसा मेरा मानना है। पर वे ऐसा कुछ करने का साहस नहीं जुटा सके। अफसोस। राज्यपाल बन जाने भर से कल्याण सिंह के पिछले सारे कारनामें धुल गए? राज्यपाल कौन लोग बनाए गए हैं, किसी से छिपा नहीं है। भाजपा के इस फासीवाद को एक गहरा तमाचा होता यदि ओम थानवी कल्याण के हाथों पुरूस्कार लेने से मना कर देते। क्या आप तालिबान के हाथों, अफगानिस्तान के किसी प्राइवेट संस्था का पुरूस्कार लेना पसंद करेंगे? और यह कहते हुए कि मैंने तालिबान को धार्मिक हिंसा पर लेक्चर दिया। लेकिन इसे आधार बना कर आप ऐसे लोगों से सम्मानित होने को न्यायोचित कैसे कह सकते हैं? दिन रात सांप्रदायिकता पर लेक्चर देने वाले लोग जब दंगाईयों के हाथों से सम्मानित होने को बड़े गर्व से प्रस्तुत कर सकते हैं तो फिर हम ऐसे लोगों के पीछे क्यों खड़े हो? ओम थानवी का सम्मान मेरी नज़र में हमेशा से रहा है। यदि वे कल्याण के हाथ से एक लाख रूपए का इनाम लेने से मना कर देते तो मेरी नज़र और उन तमाम लोगों की नज़र में उनकी इज्जत दो लाख गुना बढ़ जाती।

वरिष्ठ पत्रकार नीलाभ अश्क, दिलीप मंडल और मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.


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कल्याण के हाथों पुरस्कार लेने का विरोध करने वालों को ओम थानवी ने दुश्मन करार दिया

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Om जी के पास के.के. बिड़ला पुरस्‍कार देने वाले को चुनने की सुविधा नहीं थी!

 

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अमेरिका में ज्ञान चतुर्वेदी, चित्रा मुदगल तथा उषा प्रियंवदा को मिला साहित्‍य सम्‍मान

संयुक्त राज्य अमेरिका : ‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-अमेरिका’  ने अमेरिका के मोर्रिस्विल्‍ल शहर के हिन्‍दू भवन कल्‍चरल हॉल में आयोजित एक भव्‍य समारोह में वर्ष 2014 हेतु ‘ढींगरा फ़ाउण्डेशन-हिन्दी चेतना अंतर्राष्ट्रीय साहित्य सम्मान’ प्रदान किए। समारोह में समग्र साहित्यिक अवदान हेतु उषा प्रियंवदा को, कहानी संग्रह- ‘पेंटिंग अकेली है’ हेतु चित्रा मुद्गल को, उपन्यास-‘हम न मरब’ हेतु डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी को सम्‍मानित किया गया। सम्‍मान के अंतर्गत तीनों रचनाकारों को शॉल, श्रीफल, सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न, प्रत्येक को पाँच सौ डॉलर (लगभग 31 हज़ार रुपये) की सम्मान राशि, प्रदान की गई।

 

तीनों रचनाकारों को ढींगरा फाउण्‍डेशन के अध्‍यक्ष ओम ढींगरा, हिन्‍दी प्रचारिणी सभा कैनेडा के संरक्षक श्‍याम त्रिपाठी, मोर्रिस्विल्‍ल शहर के मेयर मार्क स्‍टोलमेन, काउंसलर विक्‍की जानसन, काउंसलर स्‍टीफ राव, हिन्‍दी चेतना की संपादक सुधा ओम ढींगरा ने यह सम्‍मान प्रदान किये। तीनों सम्‍मानित रचनाकारों को नार्थ कैरोलाइना के गवर्नर पैट मेकरोरी, मेयर मार्क स्‍टोलमेन तथा मेम्‍बर ऑफ कांग्रेस जार्ज होल्डिंग की ओर से भी विशेष रूप से प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गए। साहित्‍यकार पंकज सुबीर को मोर्रिस्विल्‍ल शहर की ओर से मेयर मार्क स्‍टोलमेन ने हिन्‍दी सेवा के लिए सम्‍मान पत्र प्रदान किया।  इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अमेरिका तथा भारत के राष्‍ट्रगान से हुआ तथा कुबी बाबू द्वारा कुचिपुड़ी नृत्‍य प्रस्‍तुत किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी ने कहा कि विदेशों में रह कर हिन्‍दी की सेवा जो प्रवासी भारतीय कर रहे हैं वह बहुत प्रशंसनीय है। चित्रा मुदगल ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्‍दी को लेकर जो उत्‍साह यहां नजर आ रहा है वह सुखद है। उषा प्रियंवदा ने अपने संबोधन में कहा कि हिन्‍दी ने भारत की सीमा के बाहर आकर जो स्‍थान बनाया है उसका ही प्रमाण है यह कार्यक्रम। कार्यक्रम के अगले चरण में आयोजित रचना पाठ सत्र में डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी अभिनव चतुर्वेदी तथा पंकज सुबीर ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। प्रथम सत्र का संचालन दूसरे सत्र का संचालन प्रवासी कवि अभिनव शुक्‍ल ने किया। डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी द्वारा किए गए व्‍यंग्‍य पाठ को श्रोताओं ने बहुत सराहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्‍या में भारतीय हिन्‍दी प्रेमी श्रोतागण उप‍स्थित थे। अंत में आभार प्रमोद शर्मा ने व्‍यक्‍त किया।

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Journalist Uday Banerjee received the Lifetime Achievement Award

KOLKATA: Journalist Uday Banerjee received the Lifetime Achievement Award at the 6th edition of the Journalism Awards. Banerjee, who covered government and administration for four decades, is known for his honesty and is revered in the fraternity. Tripura governor Tathagata Roy presented him with the trophy and citation. Consumer affairs minister Sadhan Pande presented the ‘Hall of Fame Award’ to sports journalist Debashish Dutta at the same ceremony. 

Of the 18 other categories of awards, the Times of India group bagged five. Out of the total 10 journalists from TOI and 12 from Ei Samay shortlisted as finalists, three each from TOI and Ei Samay won the honours. Two TOI scribes shared the Best Journalist News (English) award while another won the Best Journalist Lifestyle & Cinema (English) award. Ei Samay picked up Best Journalist Lifestyle & Cinema (Bengali), Best Journalist Sports (Bengali) and Best Journalist Features (Bengali). 

Judges included Abhijit Dasgupta, retired station director of Doordarshan and secretary of Kolkata Sukriti Foundation, Dilip Banerjee, former photo editor of Mail Today, Tapas Ganguly, former chief of bureau of The Week, Manik Banerjee, former chief of bureau of UNI, Pradipta Sankar Sen, vice-president of Calcutta Film Society and ex-resident editor of Hindustan Times, Shyam Afif Siddiqui, visiting faculty at Management Development Institute, Murshidabad. 

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Shalet Jimmy, BN Arun, Subitha Sukumar, Krishna Priya समेत कई पत्रकारों को पुरस्कार

KOCHI: Shalet Jimmy, senior reporter with The New Indian Express, Thiruvanthapuram, has been selected for the Special Jury Award for mediapersons instituted by Dr B R Ambedkar Institute for National Studies (BRAINS) for 2015. Shalet was selected for her various news reports on the section of people who were “denied justice”, a statement by BRAINS said here.

BRAINS Awards recognises media efforts through their news reports, documentaries, feature articles and books which are aimed at the uplift of the downtrodden segment of the public. The other winners are: Television – B N Arun (Investigative feature – Manorama News), Subitha Sukumar (News feature – Jeevan TV), Krishna Priya (Social issue feature – Asianet News), Ranjith N Nair (Development-oriented feature – Jaihind TV), Vidhu Vincent (News documentary – Media One).

Print media: Sibi P Mathew (Feature – Rashtra Deepika), Shajin Kumar (Series – Malayala Manorama), V R Hariprasad (Special Jury Award – Rashtra Deepika), Nissar Puduvana (Special Jury Award – Madyamam), Shabnam Siyad (Investigative journalism – Thejus).

Books: Dr Jiji Paul (assistant professor, Political Science department, Mar Dionysius College, Thrissur, for ‘Ambedkar – The Soul of Dalit’. Public Service: K K Parameshwaran (freedom fighter and Adivasi Dalit). The awards will be distributed at a function in Kochi on August 17.

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लोकमत उत्तर प्रदेश के पांचवें स्थापना दिवस पर सोलह विभूतियां हुईं सम्मानित

उत्तर प्रदेश की माटी से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों को उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित करने के क्रम में संगीत नाट्य अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में राज्यपाल श्री राम नाईक द्वारा  प्रदेश की सोलह विभूतियों को सम्मानित किया गया। लोकमत समाचार पत्र पिछले कई वर्षों से ऐसी विभूतियों को सम्मानित करता आया है, जिन्होंने अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करके समाज पर अपनी छाप छोड़ी है।

गाडगे प्रेक्षागृह में आयोजित लोकमत सम्मान 2015 समारोह का उद्घाटन करते हुए राज्यपाल श्री नाईक ने पत्रकारिता के व्यापक क्षेत्र पर प्रकाश डालते हुए इस बात पर अनिच्छा जाहिर की कि अखबारों के बीच प्रतिस्पर्धा आज वैमनस्यता तक पहुंच गयी है। एक समाचार पत्र के कार्यक्रम को अन्य अखबारों के द्वारा अपने समाचार में स्थान न दिया जाना दु:ख का विषय है। उन्होंने कहा कि इस सभागार में जिन लोगों को उन्होंने सम्मानित किया है, वे अपने-अपने क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रहें हैं और इन्हें सम्मानित करना खुशी की बात है। राज्यपाल ने कहा कि ये सम्मानित हस्तियां इसी प्रदेश की माटी से जुड़ी हुईं हैं और इनके कार्यों का लाभ प्रदेश की ही जनता को मिल रहा है। ऐसे में इन्हें अपने अखबारों में स्थान न देना न्यायोचित नहीं है।

इस अवसर पर एवरेस्ट फतह करने वाली पद्मश्री अरूणिमा सिन्हा ने अपने साथ बीती दुर्घटना और उसके कुप्रभावों को शेयर किया और आज की युवा पीढ़ी को कठिन वक्त से लडऩे की सीख दे गयीं। वहीं जनसंचार क्षेत्र के लिए सम्मानित वरिष्ठ पत्रकार अशोक पाण्डेय ने नये पत्रकारों को सच्चाई का साथ देने की सलाह देते हुए सीख भी दी कि सत्य के साथ ठोस प्रमाण भी जुटाना उनकी जिम्मेदारी है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए लोकमत लखनऊ के संपादक आनंद वर्धन सिंह ने लोकमत सम्मान की निष्पक्ष और पारदर्शी पूरी प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकमत सम्मान के जरिए इन महानुभावों को सम्मानित करके लोकमत परिवार समाज के प्रति अपने दायित्वों को पूरा करने का एक छोटा सा प्रयास करता है।

कार्यक्रम में आज जिन 16 विभूतियों को सम्मानित किया गया, उनमें हस्तशिल्प के लिए मो.बिलाल, क्रीड़ा के लिए डा.एसबी सिंह, विकलांग के लिए सूर्य प्रकाश शर्मा, स्वास्थ्य के लिए डा.संदीप तिवारी, साहित्य के लिए डा.विद्या बिन्दु सिंह, व्यवसाय के लिए संस्था आर्गेनिक इंडिया, कृषि के लिए रामसरन वर्मा, कला एवं संस्कृति के लिए श्रीमती कुसुम वर्मा, शिक्षा के लिए डा. तेज प्रताप सिंह,  पर्यावरण के लिए डा.संदीप बेहरा, महिला के लिए श्रीमती अनुपमा सिंह, सार्वजनिक जीवन के लिए रोशन लाल उमर वैश्य, कानून के लिए न्यायमूर्ति इम्तियाज मुर्तजा और जनसंचार के लिए अशोक  पाण्डेय शामिल हैं। इन विभूतियों को चयन प्रक्रिया के तहत विशेषज्ञों ने चयनित किया। इसके अतिरिक्त अनाथ एवं अबोध बच्चों को पालने वाली संस्था वरदान शिशु गृह के लिए राकेश रंजन दुबे को संकल्प सम्मान तथा देश के जाने-माने शिक्षाविद् एवं उर्दू भाषा के मर्मज्ञ प्रो.शारिब रूदौलवी को जनक सम्मान से नवाजा गया।

प्रेस रिलीज

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फेलोशिप के तहत रिसर्च पूरी करने वाले अंतिमा, विवेक और सुरेंद्र 6 जून को होंगे सम्मानित

अमर उजाला फाउन्डेशन की ओर से पत्रकारों को मिली फेलोशिप के तहत उन्हें शनिवार यानि 6 जून को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर दिल्ली में सम्मानित किया जाएगा. उनकी किताबों को रेल मंत्री सुरेश प्रभु लॉन्च करेंगे. इस स्कॉलरशिप में अमर उजाला की पत्रकार अन्तिमा सिंह, एक निजी चैनल में कार्यरत विवेक मिश्रा ओर पत्रकार सुरेन्द्र बंसल को सम्मानित किया जाएगा.  अन्तिमा ने खाप पंचायतों, विवेक मिश्रा ने घाघरा की तबाही ओर सुरेंद्र ने शिक्षा के नवाचार पर अपनी रिसर्च पूरी की है. इस संबंध में एक आर्टिकल अमर उजाला के रविवार को आये देशकाल में भी सरोकार के रूप में दिया गया है.

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पांच साहित्यकार एवं तीन पत्रकार सम्मानित होंगे

जोधपुर : साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थान जोधपुर प्रदत्त राज्य स्तरीय कथा अलंकरण श्रृंखला के अंतर्गत इस वर्ष हिन्दी एवं राजस्थानी के पांच लब्ध प्रतिष्ठ साहित्यकारों एवं तीन पत्रकारों को अलंकृत किया जाएगा। संस्थान की ओर से सितम्बर माह में एक समारोह में ये अलंकरण प्रदान किए जाएंगे।

कथा संस्थान के सचिव मीठेश निर्मोही ने बताया कि संस्थान के अध्यक्ष प्रोफेसर जहूर खां मेहर एवं निदेशक चैनसिंह परिहार ने संयुक्त रूप से यह घोषणा की। कथा संस्थान की राज्य स्तरीय कथा अलंकरण श्रृंखला के अन्तर्गत इस वर्ष हिन्दी साहित्यकारों में देश के जाने-माने कहानीकारों धीरेन्द्र अस्थाना (मुंबई) को उनके समग्र लेखन पर ‘पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी सम्मान’ एवं माधव नागदा (राजसमंद) को उनकी कथाकृति ‘परिणति तथा अन्य कहानियां’ पर ‘रघुनंदन त्रिवेदी कथा सम्मान’, वरिष्ठ कवि सवाईसिंह शेखावत (जयपुर) को उनकी काव्यकृति ‘घरों से घिरी हुई दुनिया’ पर ‘नंद चतुर्वेदी कविता सम्मान’ घोषित किया गया है। इसी तरह राजस्थानी साहित्यकारों में वरिष्ठ कथाकार मालचंद तिवाड़ी (बीकानेर) को उनके समग्र कथा सृजन पर ‘सांवरदइया कथा सम्मान’ तथा चर्चित युवा कवि विनोद स्वामी (परलिका, हनुमानगढ) को उनकी राजस्थानी काव्यकृति ‘प्रीत कमेरी’ पर ‘सत्यप्रकाश जोशी कविता सम्मान’ घोषित किया गया है। 

इसी तरह पत्रकारिता में विशिष्ट योगदान करने वाले पत्रकारों में संपादक ईशमधु तलवार (ईटीवी, जयपुर) को साहित्यिक एवं सांस्कृतिक पत्रकारिता के लिए ‘प्रकाश जैन लहर पत्रकारिता सम्मान’, वरिष्ठ पत्रकार मनोज वर्मा (भास्कर, जोधपुर) को ‘गोवर्द्घन हैड़ाऊ पत्रकारिता सम्मान’ तथा वरिष्ठ छायाकार रामजी व्यास (जोधपुर) को ‘सूरज एन. शर्मा फोटो पत्रकारिता सम्मान’ घोषित किया गया है। 

कथा के सचिव निर्मोही ने बताया कि हिन्दी एवं राजस्थानी के साहित्य सम्मानों के निर्णायकों में साहित्यकार हबीब कैफी, प्रोफेसर माधव हाड़ा, प्रोफेसर सूरज पालीवाल, डॉ. कुन्दन माली, प्रोफेसर सत्यनारायण व डॉ. पद्मजा शर्मा, प्रोफेसर अर्जुनदेव चारण  डॉ.आदि  मदन सैनी , डॉ. भरत ओला (हनुमानगढ), डॉ. दिनेश पांचाल (डूंगरपुर) आदि शामिल थे। 

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भड़ासी आत्महंता आस्था और लखनऊ में राज्यपाल के हाथों सम्मान : आइये गरियाना जारी रखें…

Yashwant Singh : भड़ास आत्महंता आस्था से शुरू किया था. सभी हरामियों को चिन्हित करके गरियाना है. हर दलाल को सरेआम दलाल संबोधित कर उसके बारे में सबको बताना है. एक-एक उत्पीड़कों, शोषकों, धंधेबाजों के खिलाफ आवाज उठाना है, ललकारना, चुनौती देना है. किसी को नहीं छोड़ना है. कुछ ऐसी ही मानसिकता में भड़ास की बीज नींव पड़ी डाली थी. चोट्टों दोगलों उचक्कों हरामियों चापलूसों चिरकुटों बेवकूफों अपढ़ों से भरी मीडिया के संपादकों व मालिकों की असलियत जानकर तो उबकाई आने लगी थी.

भगत सिंह को आदर्श मानकर सोशल पोलिटिकल एक्टिविस्ट बना और उसी आदर्श को दिल में रख पत्रकारिता शुरू की. पर यहां तो दलालों दोगलों की भरपूर भरी-पूरी दुनिया फलते-फूलते देखने लगा. ये लोग कहते कुछ. करते कुछ. दिखते कुछ. रहते कुछ. एक दौर ऐसा आया जब इन अखबारी दलाल मालिकों संपादकों को अपने यहां मेरी जरूरत नहीं थी और मेरे दिल में इन अखबारी दलालों मालिकों संपादकों की असलियत जानने के बाद इनके प्रति कोई साफ्ट कार्नर शेष न था.

खेती वेती कर जीवन गुजारने गांव जाने से पहले दिल्ली में ही कुछ दिन महीने रहकर भड़ास निकाल लेने की ठानी. वक्त काटने के लिए एक मोबाइल कंटेंट प्रोवाइडर कंपनी में वाइस प्रेसीडेंट कंटेंट एंड आपरेशंस के पद पर ज्वाइन किया. Bhadas4media के लांच होते ही और कुछ तेवरदार तीखी खरी खबरें छपते ही मीडिया घरानों में तरह तरह की कुर्सियों पर छितराए / तरह तरह की कुर्सियों को चिपकाए बैठे लोगों के पेट में मरोड़ उठने का क्रम शुरू होने लगा. पुलिस थाना मुकदमा जेल मर्डर…. ये अंजाम हमें पता था. हमेशा से ऐसा ही होता आया है उनके साथ जो छिपाए दबाए जा रहे सच को उधेड़ कर पूरे जोर से बाहर लाते हुए सरेआम असलियत कहने बताने लगते हैं.

असल में इस देश का लोकतंत्र संविधान न्यायपालिका मीडिया नौकरशाही आदि इत्यादि मिलाकर पूरा सिस्टम जो कुछ है, वह सब कुछ एक बहुत बड़ा नाटक नौटंकी है और इसके शीर्ष पर बैठे लोग सबसे शानदार व दिमागदार अभिनेता. सच्चाई यही है कि ये पूरी व्यवस्था बड़ों के लिए, बड़ों के द्वारा और बड़ों से रचित संरक्षित सृजित संचालित है. आप परत दर परत इस सिस्टम के भीतर घुसते जाएंगे तो सच की असलियत खुद आपको पता लगती चल जाएगी. इस सिस्टम यानि काजल की कोठरी में जितना आप गहरे घुसेंगे तो पाएंगे कि यहां तो वैसा कोई न मिला जैसा किताबों में पढ़ा सीखा सोचा था. पाएंगे कि आपके आदर्श नैतिकता न्यायप्रियता संवेदनशीलता सब कुछ सिर्फ दिखाउ लिखाउ पढ़ाउ चीजें हैं, व्यवहार में इनकी कोई जगह नहीं है. यानि सत्य संवेदना न्याय बराबरी आदि इत्यादि मेनस्ट्रीम नहीं हैं, मुख्य धारा नहीं है.

भड़ास के जरिए जब धमाके शुरू किए तो बड़े बड़ों के परखच्चे उड़े. लांछन आरोप छीटें मेरे पर भी आने थे. लेकिन जैसे पागल को ये क्या पता कि लोग उसे क्या कह रहे, उसी तरह अपन भी अपनी ओर उठती उंगलियों से बेखबर रहे. नोटिस थाना जेल मुकदमे दनादन मेरे पर होने लगे. घर आफिसों पर छापे तक पड़ने लगे. सबने मिलकर भड़ास और मेरे को नक्सली / पागल / अराजक / अनसिस्टमेटिक / अनप्रेडिक्टबल / जाने क्या क्या घोषित कर दिया. ऐसी मन:स्थिति और ऐसे हालात में कभी अपेक्षा नहीं करता कि कोई मुझे सम्मानित करेगा, कोई मुझे रिकागनाइज करेगा. लेकिन आज आम मीडियाकर्मियों के साथ साथ सत्ता शीर्ष पर बैठा कथित बड़ा आदमी भी जब भड़ास और मेरा नाम सम्मान से लेते हैं और इसे पुरस्कार के काबिल मानते हैं तो सोचता हूं कि कहीं ये भड़ास को नष्ट करने की साजिश तो नहीं. ऐसी ही मन:स्थिति में लखनऊ में राज्यपाल रामनाईक के हाथों सम्मानित हो आया. दरअसल लखनऊ यानि अपने गृह प्रदेश की राजधानी में इस सम्मान के बहाने मैंने लखनऊ के ढेर सारे सत्ता शीर्ष के चिरकुटों, चारण-भाटों को दिखा चिढ़ा दिया कि लगातार गालियां देते रहने से भी सम्मान मिल जाया करता है, इसके लिए अनवरत तेल लेपन व झूठ बोलन ही कतई जरूरी नहीं 🙂

तो भाइयों, आइए गरियाना जारी रखें. सत्ता सिस्टम की पोल खोलना बरकरार रखें. लुटेरों, भ्रष्टाचारियों को सरेआम नंगा करना जारी रखें. हमारे काम को कोई समझ पाए और सम्मान वम्मान करा दे तो बहुत अच्छा. न कराए तो उससे भी अच्छा.

हम चले थे ना यह सोचकर कि मंजिल मिल ही जाएगी
अपनी मस्ती में बहते रहे
रस्ते बनते रहे
कहीं कहीं प्रणाम सम्मान दिखते रहे
हम रहे सबसे बेपरवाह
हमें तो अपनी सुर लय गति प्यारी थी
हमें अपनी कलकल आनंद भरी जलधारा प्यारी थी
इसे ले जाना था उस महासमुद्र में
जहां सारी बेचैनियों संघर्षों मुश्किलों भ्रमों का
एकाकार हो जाया करता है अंत
होकर अनंत…

चीयर्स मित्रों 🙂

भड़ास के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.


यशवंत के उपरोक्त फेसबुक स्टेटस पर आए कुछ कमेंट्स इस प्रकार हैं…

डॉ. अजीत : आपको लगभग एक दशक से जानता हूँ सर आपकी साफगोई और फक्कड़पन से वाफिक हूँ। आप इस सम्मान के लिए सर्वथा पात्र व्यक्ति है। भड़ास एक आश्वस्ति का प्रतीक है जो मुश्किल दौर में सबके साथ खड़ा होता है। बधाईयाँ स्वीकारें 🙂

Sanjaya Kumar Singh : “लगातार गालियां देते रहने से भी सम्मान मिल जाया करता है। तो भाइयों, आइए गरियाना जारी रखें। सत्ता सिस्टम की पोल खोलना बरकरार रखें। लुटेरों, भ्रष्टाचारियों को सरेआम नंगा करना जारी रखें। हमारे काम को कोई समझ पाए और सम्मान वम्मान करा दे तो बहुत अच्छा। न कराए तो उससे भी अच्छा।” समझें तो ठीक ना समझें तो भी ठीक।

संतोष उपाध्याय : बधाई …. सच के लिये गरियाना यदि सच लगे त ‘गारी’ अच्छी है।

Shiva Aggarwal : आपने पत्रकारिता के पैनेपन को बरक़रार रखा है। यह तब और ज्यादा प्रशंसनीय है जब पत्रकारिता मूल्यों में लगातार गिरावट आ रही है। भड़ास को पत्रकारो के शोषण के विरुद्ध बेलाग लिखने वाले के रूप में जाना जाता है। आप पर स्वाभाविक रूप से आरोप भी लगे जेल तक जाना पड़ा पर आपके पैनेपन में कहीं कोई कमी नहीं आई।
रोज गिर गिरकर भी खड़े हैं
ए परेशानियां देख हम तुझसे कितने बड़े हैं।

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भड़ास4मीडिया के संस्थापक-संपादक यशवंत सिंह का उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने किया सम्मान

{jcomments off}: मीडिया क्षेत्र में पारदर्शिता के लिए सतत संघर्षरत भड़ास संपादक को सैकड़ों गणमान्य लोगों के बीच राज्यपाल ने शॉल ओढ़ाकर और समृति चिन्ह देकर किया सम्मानित :  चौथे स्तंभ यानि मीडिया क्षेत्र में पारदर्शिता के लिए सतत संघर्षरत भड़ास4मीडिया डॉट कॉम के संस्थापक व संपादक यशवंत सिंह को लखनऊ में बीते शाम सैकड़ों गणमान्य लोगों के बीच उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने सम्मानित किया. इस मौके पर यशवंत सिंह को शॉल ओढ़ाकर, प्रतीक चिन्ह देकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर राज्यपाल ने उनकी हौसलाअफजाई की और भविष्य में ऐसे ही देश व समाज हित में कार्य करने का आह्वान करते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की.

मौका था श्री टाइम्स अखबार के तीन साल होने का. इस अखबार के प्रधान संपादक राजेंद्र बहादुर सिंह हैं. आयोजन स्थल था विभूतिखंड, गोमतीनगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान का मरकरी ऑडिटोरियम. श्री मीडिया वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के इस आयोजन का पूरा श्रेय वन मैन आर्मी राजेंद्र बहादुर सिंह को जाता है जिन्होंने कुछ ही वर्षों में लखनऊ की पत्रकारिता में अपना विशिष्ट स्थान हासिल किया. रायबरेली जिले से दैनिक भास्कर अखबार से पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले राजेंद्र बहादुर के संपादकत्व में श्री टाइम्स ने थोड़ी ही समय में लखनऊ में जो उंचाइयां हासिल की, उसका बखान राज्यपाल राम नाईक ने किया. राज्यपाल ने अपने संबोधन में श्री टाइम्स के चौथे वर्षगांठ तक इसके कई एडिशन्स निकलने की कामना की.

श्री ग्रुप के प्रधान संपादक राजेंद्र बहादुर सिंह ने भड़ास4मीडिया से बातचीत में बताया कि पिछले 27 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए कुछ वर्षों पहले लखनऊ आने के बाद उन्हें यह एहसास हुआ कि पत्रकारिता पूरी तरह बदल चुकी है. खासकर राजधानी लखनऊ की पत्रकारिता में कंटेंट से ज्यादा बिजनेस प्रभावी है. राजेंद्र बहादुर के मुताबिक वे अपने निजी स्तर पर भरसक कोशिश करते हैं कि सरकुलेशन व बिजनेस के आधुनिक किस्म के कई दबावों के बावजूद सच्चे कंटेंट व सरोकारी तेवर को बरकरार रख सकें. यही कारण है कि लखनऊ में अखबारों की भीड़ में श्री टाइम्स एक नए किस्म का उभरता और बढ़ता अखबार है.

उल्लेखनीय है कि राजेंद्र बहादुर ने अपने करियर का लंबा समय रायबरेली में व्यतीत किया और कई अखबारों के ब्यूरो चीफ रहे. रायबरेली में रहते हुए जिन प्रमुख अखबारों का कामधाम संभाला उनके नाम इस प्रकार हैं- दैनिक भास्कर, दैनिक आज, दैनिक जन कदम, दैनिक स्वतंत्र भारत, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक कुबेर टाइम्स, दैनिक जनसत्ता एक्सप्रेस, दैनिक राष्ट्रीय सहारा आदि. इसके बाद राजेंद्र बहादुर सिंह लखनऊ आए और यहां श्री टाइम्स अखबार को लांच किया.

श्री टाइम्स के तीन साल पूरे होने पर राजेंद्र बहादुर सिंह ने एक जलसा आयोजित करने की ठानी और इसे कर दिखाया. श्री टाइम्स के इस आयोजन में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक के अलावा लखनऊ के महापौर व वरिष्ठ भाजपा नेता दिनेश शर्मा, हिंदी संस्थान के अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह, दैनिक भास्कर यूपी के प्रधान संपादक दीपक द्विवेदी आदि ने शिरकत की. कार्यक्रम के शुरुआत में ‘समाज में पत्रकारिता का योगदान’ विषय पर संगोष्ठी हुई जिसमें विभिन्न वक्ताओं ने लखनऊ की पत्रकारिता के कल, आज और कल पर प्रकाश डाला. इसके बाद सम्मान समारोह शुरू हुआ जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले लोगों का सम्मान किया गया. मीडिया सम्मान कैटगरी में मीडिया क्षेत्र में विशिष्ट कार्य हेतु भड़ास4मीडिया के संस्थापक व संपादक यशवंत सिंह को सम्मानित किया गया. इस अवसर पर सांस्कृतिक संध्या एवं रात्रिभोज का भी आयोजन था जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए.

अपने संबोधन में राज्यपाल राम नाईक ने मीडिया को बड़े प्यार से आईना दिखाया. उन्होंने कहा कि बिजनेस सरकुलेश आदि सब कुछ ठीक है लेकिन अखबारों की गुणवत्ता भी बनी रहनी चाहिए. पहले लोग कहते थे कि जो छपा है वह सही है. अब लोग ऐसा नहीं कहते. इसका मतलब कि मीडिया का क्षरण हुआ है, मीडिया का असर कम हुआ है. इसको लेकर मीडिया वालों को सोचना चाहिए. राज्यपाल राम नाईक ने आम जनजीवन को कनेक्ट करते हुए कहा कि ग्राम सुराज, रामराज, गुड गवरनेंस जैसे कांसेप्ट गांधी जी से लेकर कई लोगों ने दिए लेकिन इसे जमीन पर किस तरह लागू किया जाए, कैसा लागू किया गया है, इसका वर्णन चित्रण मीडिया को करना चाहिए. मीडिया और आम जन के बीच रिश्ता बताते हुए राम नाईक ने कहा कि आजादी के पहले व आजादी के बाद मीडिया के रोल अलग अलग हुआ करते थे. पहले मीडिया के लोग कलम के जरिए तलवार का काम करते थे. तब न्यायपालिका से लेकर सरकार तक हम लोगों की नहीं हुआ करती थी. अब जो मीडिया है वह चौथा खंभा है. उसके अलावा कई खंभे हैं. मीडिया को अब कई किस्म के दबावों प्रलोभनों का सामना करना पड़ता है. ऐसे मुश्किल कठिन वक्त में मीडिया को अपने तेवर के साथ जिंदा रहना व रखना बड़ा चुनौती व मुश्किल भरा काम है.

आयोजन में लखनऊ के जाने-माने साहित्यकार योगेश प्रवीण, वरिष्ठ पत्रकार श्याम कुमार, लोकेश प्रताप सिंह, बाल साहित्यकार डा. चक्रधर नलिन, व्यवसायी विनय मिश्रा, कलाकार मिथिलेश लखनऊ आदि को भी राज्यपाल राम नाईक ने सम्मानित किया.

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भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह को IMWA का बेस्ट सोशल मीडिया अवॉर्ड

दिल्ली : मावलंकर ऑडिटोरियम में गत दिवस हर साल की तरह इंडियन मीडिया वैल्फेयर एसोसिएशन की ओर से इम्वा अवार्ड 2015 से पत्रकारों को सम्मानित किया गया। केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा, सांसद उदित राज आदि की उपस्थिति में पत्रकारिता के भिन्न-भिन्न क्षेत्र में सक्रिय पत्रकार सम्मानित हुए। बेस्ट सोशल मीडिया का अवॉर्ड भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह को दिया गया। बेस्ट क्राइम एंकर श्रीवर्धन त्रिवेदी और लीडिंग शो के लिए रजत शर्मा को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर इंडियन मीडिया वेल्फेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव निशाना ने कहा कि पत्रकार हर परिस्थिति में हर खबर पर नज़र बनाए रखता है और जनता को हर खबर से राबता कराता है। मीडिया को ही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। इसीलिए IMWA  पत्रकारों के मान और सम्मान के लिए इम्वा अवॉर्ड हर साल कराता है, जिससे पत्रकारों का हौसला अफज़ाई हो और साथ साथ उनका मनोबल भी बढ़ता जाए। 

सम्मान समारोह में बेस्ट एनसीआर न्यूज़ चैनल टोटल टीवी, फोकस न्यूज़ सीईओ दीपक अरोड़ा, बेस्ट रीजनल न्यूज़ चैनल यूपी न्यूज़ नेशन, बेस्ट रीजनल चैनल एमपी सहारा समय, बेस्ट नेशनल एंकर अजय कुमार न्यूज़ नेशन, बेस्ट नेशनल एंकर (वुमेन) अंजना ओम कश्यप आज तक, बेस्ट क्राइम एंकर (वुमेन) अनुराध दास (ज़ी न्यूज़), बेस्ट लाइफ टाइम अचिवमेंट अवॉर्ड वरिष्ठ पत्रकार रमाकांत पांडे को दिया गया। बेस्ट प्रोग्राम कॉर्डिनेटर मुन्ने भारती, बेस्ट कैमरामैन शेलेंद्र कुमार न्यूज़ एक्सप्रेस, बेस्ट सोशल न्यूज़ चैनल दिशा टीवी, बेस्ट लीगल जर्नलिस्ट धर्मेंद्र मिश्रा दैनिक जागरण, बेस्ट फिल्ड जर्नलिस्ट राकेश सोनी, बेस्ट फ्रीलांस जर्नलिस्ट दीपक दालमिया, बेस्ट सोशल जर्नलिस्ट प्रिंट शगुफ्ता शीरीन रायपुर ,  बेस्ट हेल्थ जर्नलिस्ट संदीप तिवारी, बेस्ट सोशल यंग जर्नलिस्ट अंकुर शुकला, बेस्ट इंटरनेशनल जर्नलिस्ट राजेश शर्मा, बेस्ट एजुकेशन जर्नलिस्ट- अंजुम जाफरी रोज़नामा, बेस्ट सेलिब्रिटी जर्नलिस्ट वुमेन सुनीता तिवारी हिंदुस्तान टाइम्स, बेस्ट इंटरटेंमेंट जर्नलिस्ट संजय निगम को सम्मानित किया गया।

इसी प्रकार से बेस्ट स्पोर्टस जर्नलिस्ट आरती दलाल, बेस्ट इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट राहुल छाबरा डेक्कन हराल्ड, बेस्ट एक्टिविटी जर्नलिस्ट फरीद अली आजतक, बेस्ट आर्ट & कल्चर अली आबिदी, बेस्ट इंटरप्रेन्यूर शगुन कश्यप, बेस्ट पीआर एजेंसी क्रोम, बेस्ट रेडियो जॉकी नवेद रेडियो मिर्ची, बेस्ट एचआर इश्तियाक खान न्यूज़ एक्सप्रेस, बेस्ट न्यूज़ पोर्टल पर्दाफाश अभिलाश, बेस्ट यंग इंटरटेंमेंट जर्नलिस्ट(वुमेन) सुनिता मिश्रा पंजाब केसरी, बेस्ट यंग जर्नलिस्ट(मेल) अमित आंनद यूएनआई, बेस्ट सोशल क्राइम रिपोर्टर – दुर्गेश गजरी, बेस्ट आरटीआई एक्टीविस्ट राजीव शर्मा, बेस्ट पॉलिटीकल जर्नलिस्ट उत्तराखंड – विधि चंद सिंघल, बेस्ट फार्मिग जर्नलिस्ट विरेंद्र परिहर, बेस्ट न्यूज़ एजेंसी (इलेक्ट्रोनिक) एएनआई , बेस्ट न्यूज़ एजेंसी(प्रिंट) यूएनआई, बेस्ट आर्ट एंड कल्चरल जर्नलिस्ट(इलेक्ट्रोनिक) समीना अली राज्यसभा टीवी, बेस्ट क्राइम जर्नलिस्ट(इले.) रवि के वैश न्यूज़ एक्सप्रेस, बेस्ट यंग जर्नलिस्ट(यंग) योगेश मिश्रा एसएमबीसी चैनल, बेस्ट इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट(इलेक्ट.) परिमल दास एनडीटीवी, बेस्ट स्पोर्टस जर्नलिस्ट रुमाना खान एबीपी न्यूज़, बेस्ट सोशल जर्नलिस्म रविश कुमार एनडीटीवी,  बेस्ट न्यूज़ एंकर यूपी अंजीत श्रीवास्तव न्यूज़ नेशन यूपी, बेस्ट फिमेल एंकर एवं समाजसेविका अनिता सहगल आदि को सम्मानित किया गया।

इम्वा अवॉर्ड के प्रोग्राम में दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ अजय लेखी, पॉप सिंगर शंकर साहनी, कॉमेडियन राजीव मल्हौत्रा, सरदार प्रताप फौजदार आदि जैसे प्रसिद्ध लोग मौजूद थे।

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मातृश्री पुरस्कार या दलालश्री एवार्ड! : साधना के मालिक गौरव गुप्ता और पंजाब केसरी के मालिक आदित्य नारायण चोपड़ा को किस काम के लिए पुरस्कार?

मातृश्री पुरस्कार या दलालश्री एवार्ड? यह सवाल अब उठेगा. साधना टीवी और पंजाब केसरी अखबार के मालिकों के बेटों को किस बात के लिए किस काम के लिए पुरस्कार देने की घोषणा की गई है? गौरव गुप्ता और आदित्य नारायण चोपड़ा ने आखिर पत्रकारिता क्षेत्र में क्या इतना बड़ा योगदान कर दिया है कि इन्हें भरी जवानी में पुरस्कृत किया जा रहा है? कहने का आशय ये कि जिन्हें अपने खानदान के मीडिया बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए आए हुए जुम्मा जुम्मा दो ही दिन हुए हों, उन्हें एवार्ड देने की जल्दी क्यों?  

आजकल पुरस्कारों की स्थिति बहुत बुरी हो गई है. हर कोई पुरस्कृत हो रहा है. वह चाहे बेइमान हो या इमानदार. पुरस्कार देने वाले लाइन लगाए हैं. ओबलाइज हो रहे हैं और ओबलाइज कर रहे हैं. मातृश्री पुरस्कारों को ही ले लीजिए. इस बार साधना टीवी चैनल के मालिक गौरव गुप्ता और पंजाब केसरी के मालिक आदित्य नारायण चोपड़ा को भी यह एवार्ड देने की घोषणा की गई है. इन युवा मालिकों ने अभी कुछ ही दिन हुए जब अपने अपने पिताओं के संस्थानों में कामकाज संभाला है. मालिकों के बेटे को हमेशा निदेशक ही कहा जाता है. यह पद वंशानुगत होता है. कभी कभी बेटा एमडी यानि मैनेजिंग डायरेक्टर भी हो जाया करता है और पिता सीएमडी यानि चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर कहलाया करता है. बाप बेटे पदों की कबड्डी ऐसे ही खेला करते हैं और अपना धंधा पानी चमकाते रहते हैं.

पहले बात गौरव गुप्ता की. इन सज्जन ने ऐसा क्या एक काम कर दिया है, जिसके कारण उन्हें मातृश्री एवार्ड दे दिया गया? यह पुरस्कार देने वाले नहीं बता रहे. लेकिन साधना टीवी से जुड़े रहे लोगों का कहना है कि गौरव गुप्ता ने अपने चैनल के माध्यम से पत्रकारिता को कलंकित करने का काम ही हमेशा किया है, सरोकारों से उनका दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं. बिजनेस-धंधा-मार्केटिंग ही इस शख्स का पेशा शगल क्षेत्र रहा है. जिस भी तरीके से हो, ज्यादा से ज्यादा पैसा बनाओ, यह इसका एजेंडा रहा है. इसी तरह मातृश्री पुरस्कार देने वालों से पूछा जाना चाहिए कि पंजाब केसरी के निदेशक आदित्य नारायण चोपड़ा ने ऐसा क्या कर दिया है कि उन्हें पुरस्कार दिया जा रहा है. सिर्फ इसलिए कि वे चोपड़ा खानदान में से किसी एक चोपड़ा के पुत्र हैं? गौरव गुप्ता हों या आदित्य नारायण चोपड़ा, इन युवा मीडिया मालिकों ने सिर्फ अपने अपने संस्थानों को ज्यादा से ज्यादा मानेटाइज करने के लिए अपना दमखम लगाया है, अच्छी पत्रकारिता के लिए कोई एनर्जी खर्च नहीं किया है. बल्कि संभव है कि कुछ अच्छे पत्रकारों को धंधे में उतारकर मीडिया का माकीनाकासाकीनाका करने में अच्छा-खासा योगदान दिलाया हो.

ऐसा लगता है कि ये पुरस्कार हर साल मीडिया के ढेर सारे अच्छे बुरे लोगों को ओबलाइज करने के लिए एक साथ थोक के भाव दे दिया जाता है… जब घटिया लोगों को एवार्ड दिया जाएगा तो सवाल उठना लाजिमी है. बात सिर्फ मातृश्री पुरस्कारों की ही नहीं है. साल भर में हजारों पुरस्कार मीडिया वालों के लिए अलग अलग संगठन संस्थाएं ट्रस्ट एनजीओ कंपनियां सरकारें घोषित करती हैं जिनका अपना अपना निजी एजेंडा होता है. इसी कड़ी में मातृश्री पुरस्कारों की भी अपनी एक मनमर्जी वाली निजी राजनीति है. हो सकता है मातृश्री पुरस्कार के लिए कई जेनुइन लोगों का भी सेलेक्शन किया गया है. लेकिन जैसे एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर सकती है उसी तरह पुरस्कार के लिए एक घटिया और सेटिंग वाला चयन सारे पुरस्कार लेने वालों पर सवालिया निशान लगाने के लिए काफी है.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


मातृश्री एवार्ड से जुड़ी मूल खबर इस प्रकार है…

मातृश्री मीडिया अवार्ड समिति के संयोजक दिनेश शर्मा ने मातृश्री पुरस्कारों की घोषण कर दी. उन्होंने बताया कि साधना टीवी चैनल के निदेशक गौरव गुप्ता, पंजाब केसरी के निदेशक आदित्य नारायण चोपड़ा, यूनीवार्ता की पत्रकार प्रीति कनौजिया और पीटीआई के संजय आनंद को इस वर्ष का मातृश्री पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. उन्होंने बताया कि कला और पत्रकारिता के क्षेत्र में इस वर्ष के मातृश्री पुरस्कारों की घोषणा कर दी गयी है जिनमें चर्चित फिल्म मैरीकाम’’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म माना गया है. समाज सेवा के क्षेत्र में पूर्व विधायक श्याम लाल गर्ग का चयन किया गया है. उन्होंने कहा कि 40 वें मातृश्री पुरस्कारों के लिए पत्रकारों और कलाकारों का चयन कर लिया गया है.

श्री शर्मा ने बताया कि पुरस्कार वितरण समारोह 26 अप्रैल को होगा और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ये पुरस्कार प्रदान करेंगे. इस पुरस्कार के तहत पत्रकारों तथा कलाकारों को भारत माता की आकृति वाली शील्ड और प्रशस्ति पत्र भेंट दिया जाता है. उन्होंने बताया कि समाचार समितियों में युनाईटेड न्यूज आफ इंडिया की पत्रकार रिंकू बहेड़ा और यूनीवार्ता की प्रीति कनौजिया तथा प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया के पत्रकार संजय आनंद और भाषा के अजय श्रीवास्तव का चयन किया गया है.

इसके अलावा नवभारत टाइम्स के शाहनवाज मलिक, पंजाब केसरी के आदित्य नारायण चोपड़ा, साधना टीवी चैनल से गौरव गुप्ता के नाम की घोषणा की गयी है. दैनिक हिन्दुस्तान के अनुराग मिश्र, अमर उजाला के पवन कुमार, राष्ट्रीय सहारा के अजय नैथानी, सांध्य टाइम्स के मेखला गुप्ता और सार इकोनोमिस्ट के डा. अरविंद कुमार को मातृश्री पुरस्कार देने का फैसला किया गया है. इसके अलावा पीटीआई के फोटोग्राफर शाहनवाज खान, आज तक टीवी चैनल के कपिल दुबे, टोटल टीवी चैनल के जितेंद्र चौहान, चैनल वन की प्रीत किरण, दूरदर्शन के महेंद्र दुबे, आकाशवाणी की ललिता चतुव्रेदी, न्यूज नेशन के सुमित चौधरी, इंडिया न्यूज के कैमरामेन प्रकाश तिवारी और आईबीएन के रवि सिंह को भी यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा.

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अरुण पुरी को ‘एडिटर ऑफ द ईयर’ अवॉर्ड, पुण्य प्रसून बाजपेयी को बेस्ट न्यूज एंकर का सम्मान

आईएए (लीडरशिप अवॉर्ड्स फॉर एक्सीलेंस) ने इंडिया टुडे ग्रुप के चेयरमैन और एडिटर इन चीफ अरुण पुरी को ‘एडिटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड’ घोषित किया है। आज तक के ही एंकर पुण्य प्रसून वाजपेयी को बेस्ट न्यूज एंकर का अवॉर्ड मिला है.

अरुण पुरी को इससे पहले भी देश-विदेश में कई सम्मान मिल चुके हैं. वर्ष 2001 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था. अरुण पुरी को आईएए ने एडिटर ऑफ द ईयर अवॉर्ड दिया, तो आज तक के वरिष्ठ एंकर पुण्य प्रसून वाजपेयी को सर्वश्रेष्ठ एंकर का खिताब मिला. न्यूज चैनलों के लोकप्रिय बुलेटिन ’10 तक’ के एंकर पुण्य प्रसून वाजपेयी ने खबरों को संवेदनशील और सहज तरीके से पेश कर अपनी अलग पहचान बनाई है. ये अवॉर्ड उसी पहचान का सम्मान माना जा रहा है.

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