उम्रदराजी की छूट अगर नीलाभ को मिली तो वागीश सिंह को क्यों नहीं?

Amitesh Kumar : हिंदी का लेखक रचना में सवाल पूछता है, क्रांति करता है, प्रतिरोध करता है..वगैरह वगैरह..रचना के बाहर इस तरह की हर पहल की उम्मीद वह दूसरे से करता है. लेखक यदि एक जटिल कीमिया वाला जीव है तो उसका एक विस्तृत और प्रश्नवाचक आत्म भी होगा. होता होगा, लेकिन हिंदी के लेखक की नहीं इसलिये वह अपनी पर चुप्पी लगा जाता है. लेकिन सवाल फिर भी मौजूद रहते हैं.

मजीठिया पर बहस के संकेत नकारात्मक

मजीठिया वेतनमान को लेकर राज्य सभा टीवी पर बहस नकारात्मक संकेत दे रही है। इस बहस से साफ हो गया है कि सरकार भी यह मानती है कि मजीठिया वेतनमान देना छोटे समाचार पत्रों के लिए संभव नहीं। और बड़े प्रेस मालिक छोटों का रोना रोकर अपनी तिजोरी भरने के प्रयास में है। लेकिन यह सब भ्रमक बातें है, मजीठिया वेतनबोर्ड की अनुशंसा में प्रेस मालिक, पत्रकार और जज शामिल होते है। लंबे समय के मंथने के बाद आय के आधार पर पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन की अनुशंसा की गई। इस अनुशंसा को बड़े समाचार पत्रों ने चुनौती दी और सुप्रीम कोर्ट ने 4 साल की बहस के बाद इसे बाजिब माना। 

मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर राज्यसभा टीवी पर बहस : हरिवंश संपादक हैं या मालिक ?

दिल्ली : राज्यसभा टीवी पर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करने, न करने को लेकर एक ‘मालिकाना’ किस्म की बहस प्रायोजित की गई। बहस में प्रभात खबर के संपादक एवं राज्यसभा सदस्य हरिवंश, डीयूजे के एसके पांडे, कोलिन गोंजाल्विस, अजय उपाध्याय ने भाग लिया। ‘मजीठिया मंच’ फेसबुक पेज से साभार प्राप्त बहस-सामग्री यहां वक्ताओं के कथन और उस पर मजीठिया मंच के प्रति-कथन के साथ प्रस्तुत है….

A lecture on ‘Role of Media in Intellectual Growth of the Nation’ was organised by Journalism University

Bhopal, January 30: Every nation has its own nature and behaviour. And development could b achieved only when the policies are made according to the nature otherwise there will be deformation. The first intellectual development of the human beings occur at the home and then in the society. Today, media has to play a great role in the intellectual growth of the human beings. Therefore, media should first understand the cultural India then transfer the knowledge to the people.

डीडी के मठाधीशों, आने वाली पीढ़ियों की जड़ों में मट्ठा मत डालो

सोशल मीडिया से ही सुना-पढ़ा है कि गोवा फिल्म फेस्टीवल में डीडी नेशनल का बैंड बजवा चुकी महिला एंकराइन को लेकर संस्थान में ही कई गुट हो गये हैं। प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सिरकार इस सवाल के जवाब को लेकर व्याकुल हैं, कि इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम की कवरेज के लिए इन भद्र और अनुभवहीन महिला एंकर को गोवा भेजा ही क्यों गया? इस सवाल की पड़ताल के लिए प्रसार भारती ने अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के आला-अफसर को दिल्ली से मुंबई भेजा है। साथ ही प्रसार भारती ने इस सब कलेश को ‘सिस्टम फेल्योर’ मान लिया है।

नवीन कुमार ने संस्कृत का मरण उत्सव मनाया है तो मैं संस्कृत का जीवनोत्सव मनाउंगा

(पहली किस्त) : न्यूज़ 24 में मेरे बेहद अनन्य नवीन कुमार ने अपने फेसबुक वॉल पर संस्कृत भाषा का बड़ा भारी मरण उत्सव मनाया है। मैंने उसे कहीं दूसरी जगह पढ़ा और देखा क्योंकि अब वो मुझे मेरे फेसबुक पर दिखाई नहीं देते। रोज दफ्तर में मिलते हैं, चर्चा होती है, कुछ हल्की-फुल्की बहस भी। नवीन कुमार में ओज है, तेजस्विता है, ऐसी प्रचंड लपलपाती आग हमेशा चेहरे पर दिखाई देती है कि मानो अभी जलाकर सब कुछ भस्म कर देगी। खैर, उनका मन बालसुलभ कोमलता से भरा है, वो गरजते हैं तो मैंने उन्हें लरजते भी देखा है, निजी चर्चा में उनकी भावना को मैंने समझा है।

क्या हिंदू ब्राह्मणों ने भी कर्बला की लड़ाई में हिस्सा लिया था ?

हिंदुस्तान के सभी धर्मों में हज़रत इमाम हुसैन से अकीदत और प्यार की परंपरा रही है. घटना कर्बला के महान त्रासदी ने उदारवादी मानव समाज हर दौर में प्रभावित किया है. यही कारण है कि भारतीय समाज में शहीद मानवता हज़रत इमाम हुसैन की याद न केवल मुस्लिम समाज में रही है बल्कि ग़ैर मुस्लिम समाज में मानवता के उस महान नेता की स्मृति बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है. भारतीय सभ्यता जिसने हमेशा मज़लूमों का साथ दिया है घटना कर्बला के महान त्रासदी से प्रभावित हुए बगैर ना रह सकी. भारतीय इज़ादारी एक व्यक्तिगत स्थिति रखता है, जो सांस्कृतिक परंपरा न केवल मुसलमानों में स्थापित है बल्कि हिन्दो हज़रात भी इसमें भाग लेते हैं. भारतीय पूर्व राजवाड़ों में हिन्दो हज़रात यहाँ इमाम हुसैन से अकीदत की ऐतिहासिक परंपरा मिलती हैं जिसमें राजस्थान, ग्वालियर “मध्य प्रदेश”, बंगाल मुख्य है.