मिथिला में रंग बरसे…

मिथिला में होली खेलने की बहुत पुरानी परंपरा है। यहां की निराली होली के कहने ही क्या ! रंग और उमंग में पूरा मिथिलांचल सराबोर हो जाता है। मिथिला नरेश की इस धरती पर राम को याद किए बिना, उनके साथ रंग अबीर उड़ाए बिना सीता के मायके की होली भला कैसे पूरी हो सकती है। इस दिन हर घर, दरवाजे पर लोग पारंपरिक होली गीत गाने जाते हैं और वो भी ढ़ोल और नगाड़े के साथ।