जिसने भड़ास पढ़ने के कारण पत्रकार को नौकरी नहीं दी वह खुद ही छिप-छिप कर भड़ास पढ़ता है!

यशवंत भाई

सादर प्रणाम,

एक खबर bhadas4media.com पर पढ़ने को मिला कि एक पत्रकार साथी को सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं दी गई क्योंकि वह भड़ास का रीडर है. सबसे बड़ी बात यह है कि वह जिसने पत्रकार साथी को नौकरी नहीं दी, वह अभी तक अपने पद पर कैसे बना है? उसे भी तो संस्थान को निकाल देना चाहिए था. क्योंकि हकीकत तो यह है वह भी भड़ास पढ़ता है, भले ही छुप छुप कर पढ़ता हो. यह सच्चाई है कि मीडिया से जुड़ा हर आदमी.. चाहे कैमरामैन हो, पत्रकार हो यहां तक सफाई कर्मचारी भी भड़ास के रीडर हैं.

यशवंत पर हमले की कहानी, उन्हीं की जुबानी ( देखें सुनें संबंधित आडियो, वीडियो और तस्वीरें )

बिना वाइपर की बस… यह तस्वीर तबकी है जब बारिश थोड़ी कम हो गई थी.

दिल्ली को अलविदा कहने के बाद आजकल भ्रमण पर ज्यादा रहता हूं. इसी कड़ी में बनारस गया. वहां से रोडवेज बस के जरिए गाजीपुर जा रहा था. मेरे चाचाजी को हार्ट अटैक हुआ था, जिसके बाद उनकी ओपन हार्ट सर्जरी होनी है. उन्हीं को देखने के लिए गाजीपुर जा रहा था. शिवगंगा ट्रेन से बनारस उतरा और रोडवेज की बस पकड़ कर गाजीपुर जाने लगा. मौसम भीगा भीगा था. बारिश लगातार हो रही थी. बस चलने लगी. बिना वाइपर की बस धीमी गति से रेंगते हुए बढ़ रही थी. ड्राइवर कुछ ज्यादा ही सजग था क्योंकि लगातार बारिश से बस का शीशा पानीमय हुआ जा रहा था और उसे शीशे के पार सड़क पर देखने के लिए कुछ ज्यादा ही मशक्कत करनी पड़ रही थी.

यशवंत जी, आपका ब्लाग कुछ समय से अरविन्द केजरीवाल, ABP न्यूज़ और ND टीवी का मुखपत्र बन गया है!

प्रिय यशवंत जी।

मैं लंबे समय से आपका भड़ास4मीडिया ब्लॉग पढ़ रहा हूँ। पहले मुझे ये अच्छा लगता था क्यों की आप मीडिया में फैली बुराइयों को सामने लाते थे। लेकिन कुछ समय से देख रहा हूँ की आपका ये ब्लॉग अरविन्द केजरीवाल, ABP न्यूज़ और ND टीवी का मुखपत्र बन गया है।

भड़ास वाले यशवंत ने दिल्ली को अलविदा कहा

Yashwant Singh : अलविदा दिल्ली। 9 साल का साथ आज ख़त्म। पैकिंग कम्प्लीट। रात में रवानगी। अब पूरा देश मेरा। केरल से लेकर कासगंज तक रहेगा डेरा, बारी बारी। दिल्ली में आज आखिरी दिन विदा देने राहुल पूनम राजीव आदि साथी पहुंचे। सबका आभार। लेकिन हे दिल्ली वालों, ये मत बुझना कि यहाँ से गया तो चला ही गया। आऊंगा, भले ही मेहमान की तरह। दिल्ली में हर राज्य के बने भवन सदन गेस्ट हाउस निवास जो हजारों की संख्या में हैं, सब मेरे हैं। इतने सारे दोस्त साथी मित्र भाई दिल्ली में हैं कि रहने के दिन कम पड़ जाएंगे, जगह नहीं। इसलिए जाने का मतलब ये नहीं कि मूंग दलना बंद होगा या कम होगा। पर अब फिक्स हो कर नहीं बैठेंगे। पूरा भारत दबा के घूमना है। काम जब अपना ऑनलाइन है तो शरीर के मोबाइल रहने में कोई प्रॉब्लम नहीं। और, कई दफे शरीर की सचेत या निष्प्रयोज्य मोबिलिटी आत्मा चेतना को झकझोरने जगाने का काम करता है। कुल मिला कर अज्ञात नए के लिए के लिए तन मन से प्रस्तुत हूँ।

यशवंत सिंह की अगुवाई में भड़ास लड़ रहा मजीठिया की लड़ाई

मीडिया में सिर्फ एक फीसद मस्त-मस्त संप्रदाय सारस्वत है और बाकी लोग अस्पृश्य बंधुआ मजदूर …; बहरहाल मोदियापे में मशगूल मीडिया कर्मियों से हमारा सवाल है कि लंबे तेरह साल के इंतजार के बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो मजीठिया अपनी देखरेख में लागू करने का फैसला किया है, उसमें समानता और न्याय कितना है, क्या वेतनमान मिला, ठेके पर जो हैं, उनको क्या मिला, ग्रेडिंग और कैटेगरी में कितनी ईमानदारी बरती गयी और दो-दो प्रमोशनों के बाद उनकी हैसियत क्या है, पहले इस पर गौर करें तो आम जनता पर क्या कहर बरप रहा है, उसका तनिक अंदाज आपको हो जाये। ‘भड़ास4मीडिया’ जैसे मंचों से उनकी बात सिलसिलवार सामने आ रही है और हमें इसके लिए यशवंत सिंह का आभार मानना चाहिए। लेकिन सिर्फ पत्रकार उत्पीड़ित नहीं हैं, जिनके लिए वे आवाज बुलंद कर रहे हैं। हम मीडिया उनके हवाले छोड़ आम जनता के मसले उठा रहे हैं।

भड़ास पर खबर आने के बाद सहारा वालों ने मेरी माता को भुगतान कर दिया

 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृहग्राम हरनौट में दिनकर प्रसाद सिंह की सत्तर वर्षीय मां सरोज सिंह के जमा अवधि पूरी कर चुके अमाउंट के 3,20,000 रुपए सहारा ने बिना उनकी अनुमति के अन्य स्कीम में हड़प कर लिया था। दिनकर प्रसाद सिंह ने बताया कि भड़ास4मीडिया पर यह खबर प्रसारित होने के बाद सहारा प्रबंधन ने पूरे रुपए का भुगतान सरोज सिंह को कर दिया है। 

भ्रष्टाचार में डूबे हैं देश के बड़े मीडिया घराने, अब भरोसा सिर्फ सोशल मीडिया पर : यशवंत सिंह

मथुरा (उ.प्र.) के चन्द्रलेखा कैम्पस में 31 मई को आईएमए के पत्रकार सम्मान समारोह को संबोधित करते भड़ास4मीडिया के संस्थापक संपादक यशवंत सिंह  

मथुरा (उ.प्र.) : पत्रकारिता दिवस पर एक सम्मान समारोह को मुख्यवक्ता के रूप में सम्बोधित करते हुए भड़ास4मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने कहा कि इस बड़े मीडिया घराने पूरी तरह से भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं। मजीठिया आयोग की शिफारिशों को आज तक इन मीडिया घरानों ने लागू नहीं किया है। सत्ता एवं भ्रष्ट तंत्र के साथ जोड़तोड़ बनाकर मीडिया कर्मियों को उनके श्रम का न्याय संगत एवं वेज बोर्ड से निर्धारित वेतनमान नहीं दिया जा रहा है। इसीलिए अब सोशल मीडिया पर ही लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। ऐसे हालात में एक सच्चाई ये है कि सोशल मीडिया ने अब परम्परागत मीडिया को पीछे छोड़ दिया है। 

 

चन्द्रलेखा कैम्पस में दीप प्रज्ज्वलन कर पत्रकार सम्मान समारोह एवं विचारगोष्ठी के शुभारंभ की झलक।

भड़ास को कूरियर से पांच हजार रुपये रिश्वत भेजने वाले ने दिमाग तो खूब लगाया लेकिन थोड़ी-सी कमी कर दी

Editor

BHADAS4MEDIA.COM

माननीय महोदय

सब जानते है साम, दाम अथवा दण्ड से भड़ास पर दबाव बना नहीं सकते. माफिया ने भेद का अक्लमंदी से उपयोग किया. आप के आत्मसम्मान को गहरी ठेस पहुंचाने का उनका उददेश्य हुआ पूरा. कमी हमारी लाल इमली टीम में है. कुछ लोग प्रतिज्ञा के साथ जुड़े थे. हमारी टीम के जयचंद चंद टुकड़ों के लिए प्रयास आरंभ होते ही कुठाराघात कर देते है. हम क्या सोचते हैं, किस तरफ काम कर रहे हैं,  वो BIC Management तक बिजली की गति से परोसा जाता रहा है. जो उद्योगपति 12 साल तक इस घोटाले को थामे हुए हैं, वह हम लोगों से सौ गुना तेज हैं. यह बात कई बार साबित हो चुकी है. लाल इमली के हम लोग इस लायक नहीं कि एकजुट हो कर इस संघर्ष को आगे ले जा सके.

खबर छापने पर bhadas4media को मिले पांच हजार के नोट !

ये तो बड़ी अजीब सी बात, कि हम आप के लिए खबर लिखें और उसके बदले लिफाफे में पांच हजार रुपए डाल कर हमे उसे कोरियर से भेजें। कुछ ऐसा ही वाकया गुजरा आज भड़ास4मीडिया के साथ। ये चौंकाने वाला घटनाक्रम है, 18 मई, 2015 को भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित ‘कानपुर ‘लाल इमली महाघोटाले’ पर हाईकोर्ट के रुख से वस्त्र मंत्रालय हिला’ शीर्षक समाचार के संबंध में।

टेक्नोलॉजी क्रांति के दौर में आज इंटरनेट मीडिया कमाई का बड़ा अवसर : यशवंत सिंह

गोरखपुर : गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब व लेंस मैन के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को प्रेस क्लब सभागार में भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक यशवंत सिंह ने ’वेब मीडिया कंटेंट मानेटाइजेशन वर्कशाप’ में यूट्यूब चैनल, न्यूज पोर्टल, ब्लाग, फेसबुक, के जरिए पैसे कमाने के तरीके बताए। 

शुक्रवार को गोरखपुर प्रेस क्लब सभागार में वर्कशॉप के बाद भड़ास4मीडिया के संस्थापक संपादक यशवंत सिंह (बीच में) के साथ सहभागी मीडिया कर्मी

जुआ खेलकर रक़म जीतने का लालच देता ये विज्ञापन भड़ास को शोभा नहीं देता!

यशवंत सिंह जी

संपादक, भड़ास4मीडिया

भड़ास को हम सब पत्रकार बहुत गंभीरता से लेते हैं… पर एक ऐसा विज्ञापन देखा कि आपको पत्र लिखने को मजबूर हुआ.. लिखने को तो दस पेज भी लिख सकता हूँ.. मगर आप बुद्धिजीवी हैं… इसलिए पूरा यकीन है कि कम लिखे को ज़्यादा ही समझेंगे… इस मेल के साथ में एक तस्वीर अटैच की है, उसे देखिए… इसमें जो ऑफर है, वो किसी भी नज़रिये से स्वस्थ नहीं कहा जा सकता… जुआ खेलने का ऑफर देकर रक़म जीतने की उम्मीद या लालच देता ये विज्ञापन भड़ास को शोभा नहीं देता… आशा करता हूं कि आप इस पर ध्यान देंगे.

धन्यवाद.

आसिफ खान

Asif Khan

kasif.niaz@gmail.com

भास्कर, हिंदुस्तान, जागरण समेत कई अखबारों में भड़ास पर पाबंदी

खुद को अभिव्यक्ति की आजादी का नेता बताने वाले और इस हक के लिए लड़ाई लड़ने का दावा करने वाले मीडिया समूह अब उन छोटे व नए मीडिया माध्यमों की आवाज अपने यहां दबाने में लगे हैं जो बड़े बड़े मीडिया हाउसों की पोल खोलते हैं. ताजी सूचना के मुताबिक दैनिक भास्कर और दैनिक हिंदुस्तान अखबार के दफ्तरों में भड़ास4मीडिया डॉट कॉम को ब्लाक कर दिया गया है. इन संस्थानों के प्रबंधकों ने ऐसा फैसला मालिकों के निर्देश के बाद लिया है. मालिकों ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर भड़ास4मीडिया द्वारा चलाए गए अभियान और आम मीडियाकर्मियों को उनका हक दिलाने से संबंधित मुहिम से नाराज होकर इस पोर्टल को अपने संस्थान के अंदर बंद कराने का आदेश दिया ताकि उनके यहां काम करने वाला कोई कर्मचारी इस पोर्टल को पढ़कर सुप्रीम कोर्ट न चला जाए.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह का एक पुराना इंटरव्यू

मीडियासाथी डॉट कॉम नामक एक पोर्टल के कर्ताधर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने 10 मार्च 2011 को भड़ास के संपादक यशवंत सिंह का एक इंटरव्यू अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया था. अब यह पोर्टल पाकिस्तानी हैकरों द्वारा हैक किया जा चुका है. पोर्टल पर प्रकाशित इंटरव्यू को हू-ब-हू नीचे दिया जा रहा है ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और यशवंत के भले-बुरे विचारों से सभी अवगत-परिचित हो सकें.

यशवंत सिंह

 

मजीठिया के हिसाब से पैसा मिलते ही रजनीश रोहिल्ला ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली (देखें कोर्ट आर्डर)

आरोप लगा सकते हैं कि रजनीश रोहिल्ला ने सबकी लड़ाई नहीं लड़ी, अपने तक सीमित रहे और मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से दैनिक भास्कर से पैसे मिलते ही सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली. ज्यादा अच्छा होता अगर रजनीश रोहिल्ला सबकी लड़ाई लड़ते और सारे पत्रकारों को मजीठिया के हिसाब से पैसा दिला देते. लेकिन हम कायर रीढ़विहीन लोग अपेक्षाएं बहुत करते हैं. खुद कुछ न करना पड़े. दूसरा लड़ाई लड़ दे, दूसरा नौकरी दिला दे, दूसरा संघर्ष कर दे, दूसरा तनख्वाह दिला दे. खुद कुछ न करना पड़े. न लड़ना पड़े. न संघर्ष करना पड़े. न मेहनत करनी पड़े.

आप जिया न्यूज के कर्मियों के पक्ष में लिख-लड़ रहे हैं और वो कर्मी आपका विश्वास नहीं करते!

यशवंत भईया प्रणाम, बड़े दु:ख की बात है कि ये जो जिया न्यूज के कर्मचारी आपका विश्वास नहीं करते, आपके सहयोगियों का विश्वास नहीं करते, उनके लिए आप इतना कर रहे हैं. आपको बता दूं भइया, आपने एक न्यूज डाली थी भड़ास पर जिया न्यूज की महिला कर्मचारी का पैर कटने की. उस समाचार को मैंने सभी जिया न्यूज के कर्मचारियों को मेल किया. उस मेल में रोहन जगदाले, एसएन विनोद और कई शीर्ष कर्मियों के नाम शामिल थे.

भड़ास के जरिए मैंने जिंदगी में पहली बार न्यू मीडिया / सोशल मीडिया की शक्ति का अनुभव किया

जानिब ए मंजिल की ओर अकेला चला था मगर
लोग मिलते गए, कारवां बनता गया!!!

यशवंतजी की ओर से देशभर के पत्रकारों के नाम भड़ास पर पोस्ट हुआ संदेश न्याय की लड़ाई में उबाल ला चुका है। भड़ास के जरिए मैंने जिंदगी में पहली बार न्यू मीडिया / सोशल मीडिया की शक्ति का अनुभव किया। भड़ास की पूरी टीम को मेरा धन्यवाद! धन्यवाद देने का एक बड़ा कारण यह भी है कि मजीठिया के मामले में देश के पत्रकारों को एकजुट होने का मंच भी मिला है। भड़ास के यशवंतजी का मेरे को लेकर लेख आने के बाद मेरे पास पिछले दो दिनों से देशभर से बड़ी संख्या में पत्रकारों के फोन आ रहे हैं। अधिकांश पत्रकार मजीठिया की लड़ाई में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहते हैं।

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मीडिया से जुड़ी सूचनाओं, खबरों, विश्लेषण, बहस के लिए मीडिया जगत में सबसे विश्वसनीय और चर्चित नाम है भड़ास4मीडिया डॉट कॉम. यह पोर्टल अपनी विशिष्टता, बेबाकी, ईमानदारी, साहस, जन सरोकार के लिए जाना जाता है. भड़ास4मीडिया एक ऐसा न्यू मीडिया प्लेटफार्म है जो विशेष तौर पर मीडिया के अंदरखाने चलने वाले स्याह-सफेद को उजागर करता है, आम मीडियाकर्मियों के दुख-सुख का प्रतिनिधित्व करता है, साथ ही मुख्य धारा की कारपोरेट मीडिया द्वारा दबाई-छिपाई गई खबरों को प्रमुखता के साथ प्रकाशित प्रसारित कर पूरे मीडिया जगत का माइंडसेट तय करता है.

पहले यश मेहता को गालियां दी, नौकरी से निकाला गया तो भड़ास पर खबर छपने के कारण यशवंत को गालियां दे रहा

Yashwant Singh :  कल रात एक बंदे ने मुझे फोन किया और बिना नाम पहचान बताए धाराप्रवाह माकानाका करने लगा यानि गालियां बकने लगा. खूब दारू पिए हुए लग रहा था. उससे मैं पूछता रह गया कि भाई साब आप कौन हैं, क्या समस्या है.. पर वो सिवाय गाली बकने के दूसरा कोई काम नहीं कर रहा था, न सुन रहा था, न सवालों का जवाब दे रहा था. वह सिर्फ गालियां बकता जा रहा था. फोन कटा तो मैं हंसा. उस बंदे का नंबर फेसबुक पर डाला और फेसबुकिया साथियों से पता लगाने को कहा कि ये कौन शख्स है, जरा काल कर के इससे पूछें.

Divya Ranjan

Bhadas Workshop Pic 9

: 17 April 2015 : Bhadas Content Monetisation Workshop : Urdu Ghar, Deen Dayal Upadhyay Marg, Delhi :

वर्कशाप में मेहमान बनकर शिरकत करने आए वरिष्ठ टीवी जर्नलिस्ट और एंकर अतुल अग्रवाल से बातचीत करते भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह…