पर्ल ग्रुप की संपत्तियों की नीलामी के लिए सुप्रीम कार्ट ने कमेटी बनाई

हाल ही में करीब 50,000 करोड़ रूपये की हेराफरी के मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ने पर्ल ग्रुप के मालिक निर्मल सिंह भंगू को गिरफ्तार किया था. उन पर निवेशकों के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगा था. अब खबर आ रही है कि पर्ल ग्रुप की संपत्तियों की नीलामी के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी बना दी है. कोर्ट ने पूर्व जज आर एम लोढा की अध्यक्षता में कमेटी बनाई. सेबी के जरिये लोगों को पैसे लौटाया जाएगा और यह कमेटी इस बात की निगरानी रखेगी कि किस तरह अगले 6 महीनों में लोगों के कर्ज को चुकाया जा सके. सेबी को इस केस से जुड़े सारे दस्तावेज़ इस कमेटी को सौंपना होगा.

कंपनी पर पोन्जी योजना के जरिए निवेशकों के 55 हजार करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है. P7 न्यूज़ चैनल और पर्ल्स ग्रुप के चेयरमैन निर्मल सिंह भंगू के साथ सीबीआई ने 4 दूसरे लोगों को भी गिरफ्तार किया है. कंपनी पर आरोप है कि इसने करीब 6,00,00,000 निवेशकों से 49,100 करोड़ रुपए जुटाये हैं. सेबी के आदेश के मुताबिक अगर पीएसीएल ब्याज समेत ये रकम रिफंड करती है तो उसे करीब 55,000 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था करनी होगी.

इस मामले की जांच सेबी के अलावा सीबीआई और ईडी भी कर रहे हैं. सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कंपनी के चारों कार्यकारियों को सीबीआई के मुख्यालय पर गहन पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के दौरान उन्होंने बिना तालमेल वाले जवाब देने शुरू किए और साथ ही सहयोग करना भी बंद कर दिया, जिसके बाद उन्हें अरेस्ट कर लिया गया। इनके खिलाफ IPC की धारा 120B (आपराधिक साजिश) तथा 420 (धोखाधड़ी) की धाराओं में मामला दायर किया गया है। निवेशकों को भारी रिटर्न का लालच देकर उनसे धन जुटाया गया था.

सीबीआई ने 19 फरवरी, 2014 को पर्ल्स के 60 साल के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू पर देश के इतिहास में सबसे बड़े चिटफंड घोटाले को चलाने की आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया था। करीब 2 साल बाद अब उसे सीबीआई गिरफ्तार करने में सफल हुई है। घोटाले की रकम 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 5 करोड़ से ज्यादा छोटे निवेशकों से पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड और पर्ल्स गोल्डन फॉरेस्ट लिमिटेड के नाम पर धोखे से ली गई थी। पर्ल्स की ये दोनों कंपनियां जमीन-जायदाद का कारोबार करती दिखाई गईं थीं।

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भंगू का हाल में ही किडनी बदला गया है, जेल प्रशासन रखेगा ध्यान

देश के सबसे बड़े पौंजी घोटाले में गिरफ्तार पर्ल्स समूह के सीएमडी निर्मल सिंह भंगू का अभी हाल में ही किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है. इस बात का उल्लेख उनके दो वकीलों ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान किया. भंगू के अधिवक्ता मनीष जैन और विजय अग्रवाल ने अदालत से कहा कि भंगू का हाल में किडनी प्रत्यारोपण हुआ है इसलिये जेल में उनकी नियमित जांच होनी चाहिये. साथ ही उनकी मेडिकल कंडीशन के मुताबिक इलाज व दवाइयां दिए जाने की मांग की. अदालत ने इस पर कहा कि जेल प्रशासन इसका ध्यान रखेगा. वकीलों की यह मांग भी कोर्ट ने मान ली कि उन्हें रोजाना एक घंटे अपने क्लाइंट यानि भंगू से मुलाकात की अनुमति दी जाए.

पर्ल्स समूह के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक निर्मल सिंह भंगू और तीन अन्य को 45,000 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी मामले में एक स्थानीय अदालत ने 14 दिन की न्याययिक हिरासत में भेज दिया. मुख्य महानगर दंडाधिकारी सुगंधा अग्रवाल ने सीबीआई के यह कहने पर कि अब हिरासत में उनसे पूछ-ताछ की जरूरत नहीं है, आरोपियों को छह फरवरी तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया. अदालत ने कहा, ‘आरोपियों को 14 दिन के पुलिस रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया. अब 14 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए एक याचिका दायर की गई है. आवेदन में दी गई वजहों के तहत इसकी मंजूरी दी जाती है.’

इस प्रकार ये लोग 6 फरवरी तक के लिए जेल भेज दिए गए. इन पर आपाराधिक साजिश रचने और धोखाधड़ी के आरोप हैं. सीबीआई ने इन आरोपियों को आठ जनवरी को दो साल की लंबी जांच पड़ताल के बाद गिरफ्तार किया था. जांच के आदेश उच्चतम न्यायालय ने दिये थे.

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तिहाड़ जेल के हवाले हुए चिटफंड के सरगना भंगू और उनके गिरोह के प्रमुख सदस्य

चिटफंड कंपनियों पीएसीएल और पर्ल्स ग्रुप के मालिक भंगू समेत कई घपलेबाजों को 14 दिन के लिये दिल्ली की तिहाड़ जेल में भेज दिया गया है। अदालत ने उसे और उसके साथियों को न्यायिक हिरासत में रखने का फैसला किया है। पर्ल्स समूह के सीएमडी और प्रबंधक निदेशक निर्मल सिंह भंगू और उसके तीन अन्य साथियों को 45,000 करोड़ रूपये की धोखाधड़ी मामले में अदालत ने 14 दिन के लिए जेल भेजा है। अदालत ने कहा, ‘आरोपियों को 14 दिन के न्यायिक रिमांड के बाद अदालत में पेश किया गया। अब अगले 14 दिन की न्यायिक हिरासत के लिए एक याचिका दायर की गई है। आवेदन में दी गई वजहों के तहत इसकी मंजूरी दी जाती है।’

सीबीआई ने बताया कि निर्मल सिंह भंगू के अलावा जिन आरोपियों को जेल भेजा गया है उनमें सुखदेव सिंह एमडी तथा प्रमोटर डायरेक्टर पर्ल्स एग्रोटेक कॉरपोरेशन, गुरमीत सिंह एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वित्त तथा सुब्रत भट्टाचार्य हैं। चारों आरोपियों को गत आठ जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। इस बीच महाराष्ट्र की पुलिस ने एक दूसरे मामले में निर्मल सिंह भंगू की हिरासत की मांग की है।

पर्ल्स गोल्डन फारेस्ट लिमटेड (पीजीएफ) के चेयरमैन एंव प्रबंध निदेशक तथा पर्ल्स आस्ट्रेलिसिया प्रा. लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन भंगू के अलावा पीएसीएल के प्रबंध निदेशक और प्रवर्तक-निदेशक सुखदेव सिंह, कार्यकारी निदेशक (वित्त) गुरमीत सिंह और पीजीएफ एवं पीएसीएल में कार्यकारी निदेशक सुब्रत भट्टाचार्य को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। दो साल से इस मामले की जांच चल रही थी जिसमें सीबीआई अधिकारियों ने पर्ल्स कंपनी के 1300 बैंक खातों का पता लगाया और 108 करोड़ रुपये हाईकोर्ट में जमा कराए थे। सीबीआई ने भंगू तथा कंपनी से संबंधित संपत्तियों के 20 हजार दस्तावेज बरामद किए थे। इनका मूल्य करीब पांच हजार करोड़ आंका गया है। दिल्ली में भंगू की 583 एकड़ भूमि भी मिली है।

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चिटफंड के ‘चैनलों’ से सावधान! मीडियाकर्मियों की जिंदगी नरक बना देते हैं ये

नई दिल्ली: एक का दो और दो का चार बनाने का दावा करती हैं चिटफंड कंपनियां. कंपनियां कुछ ही समय में लखपति बनाने का सपना दिखाती हैं और इनके लालच में आ जाते हैं गरीब और आम निवेशक. लोगों से लिए गए पैसों से चिटफंड कंपनियां संपत्तियां खरीदती हैं और जब निवेशक पैसा वापस मांगते हैं तो उन्हें दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है पर आज की कहानी ये नहीं है. आज हम बता रहे हैं किस तरह चिटफंड कंपनियां अपने कारोबार को चमकाने के लिए न्यूज चैनल और अखबार शुरू करती हैं और फिर निवेशकों का पैसा डूबने के बाद पत्रकारों और मीडियाकर्मियों को बर्बाद होने के लिए छोड़ देती हैं.

अब हम आपको कुछ पत्रकारों के नाम बताते हैं. हर्षवर्धन त्रिपाठी, अगस्त्य अरुणाचल, मनोजित मलिक और सुभदीप राय ये सभी वो टीवी पत्रकार हैं जिन्हें चिट फंड कंपनी वाले टीवी चैनलों ने कहीं का नहीं छोड़ा. P7 चैनल में काम कर चुके अगस्त्य अरुणाचल आज बेरोजगार तो नहीं लेकिन इनका दर्द किसी बेरोजगार से कम भी नहीं. अगस्त्य अरुणाचल का कहना है, ”पत्नी ने नौकरी शुरू कर दी है, भाई से मदद ले लेता हूं, मां को बताया नहीं है लेकिन कुछ-कुछ करके काम चल रहा है. वहीं एक और पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी का है, ”बहुत सारे लोगों ने हमारे सामने अपनी पत्नी और बच्चों को गांव भेज दिया. सैलरी नहीं आई तो उनका वक्त कटना मुश्किल था.

अगस्त्य अरुणाचल और हर्षवर्धन त्रिपाठी को दो राहे पर लाकर खड़ा करने वाला पी7 चैनल न्यूज चैनल नवंबर 2014 में बंद हो चुका है. इसका संचालन करने वाली कंपनी पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू को धोखाधड़ी के आरोप में सीबीआई ने हाल ही में गिरफ्तार किया है. भंगू ने लाखों निवेशकों को शिकार बनाया तो पी 7 न्यूज चैनल के जरिए सैंकड़ों पत्रकार सड़कों पर आ गए. जैसे-जैसे पर्ल्स ग्रुप पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कसता गया तो सबसे पहले पी 7 न्यूज चैनल को ही बंद करने की बात सामने आई.

पर्ल्स ग्रुप के P7 न्यूज के पत्रकारों की लड़ाई

अगस्त्य अरुणाचल का कहना है कि जब उन्होंने पी-7 न्यूज चैनल में नौकरी शुरू की तब इस चीज पर जरा भी गौर नहीं फरमाया कि ये चैनल चिट फंड कंपनी का है लेकिन चैनल में वरिष्ठ लोगों की कार्यशैली देखकर अहसास होने लगा कि इस चैनल का मिशन पत्रकारिता नहीं है बल्कि पत्रकारिता के जरिए कंपनी का प्रचार-प्रसार करना इसका मकसद है.

पी7 न्यूज चैनल के आउटपुट विभाग में 4 साल तक काम कर चुके हर्षवर्धन त्रिपाठी का कहना है बुरा दौर तब शुरू हुआ जब सैलरी 15 दिन लेट आने लगी और फिर बढ़ते-बढ़ते ये दौर दो-दो महीने पर पहुंच गया. हर्षवर्धन के मुताबिक चैनल बंद होने की घोषणा के बाद उन्होंने तीन महीने की सैलरी पाने के लिए जमीन आसमान एक कर दिया. डायरेक्टर के सामने धरना प्रदर्शन किया तो साथ ही नोएडा के जिला कलेक्टर को भी साथ लिया. श्रम विभाग के आयुक्त के सामने अर्जी डालकर उन्होंने न्यूज चैनल के संघर्ष कर रहे कर्मचारियों की लड़ाई को आगे बढ़ाया तब जाकर उन्हें अपना हक मिला.

पीएसीएल का कहना है कि निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है. कंपनी में जिन लोगों ने पैसा लगाया है उन्हें उनका पैसा वापस मिलेगा. कंपनी के वकील का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2015 में कमिटी बनायी थी और उसके पास कंपनी के सारे दस्तावेज़ मौजूद हैं.

रोजवैली, सारधा ग्रुप के चैनल के पत्रकारों की लड़ाई

पश्चिम बंगाल के रोज वैली कंपनी के चैनल न्यूज टाइम्स में काम करने वाले कर्मचारियों को अब भी वेतन नहीं मिल रहा. वहां बतौर एनटरटेनमेंट प्रोड्यूसर काम कर चुके सुभदीप राय ने बताया कि उन्होंने 5 साल न्यूज टाइम्स में काम किया लेकिन कंपनी ने उनका पीएफ अकाउंट में डालना साल 2014 से ही बंद कर दिया और जब पत्रकारों ने देरी से सैलरी मिलने, ईपीएफ खाते में न डाले जाने जैसी शिकायतों के खिलाफ आवाज उठाई तो वहां मौजूद बाउंसरों के जरिए उनकी आवाज दबाने की कोशिश की गई. रोजवैली से इस पूरे मामले पर उनका पक्ष मांगा गया लेकिन कंपनी ने कुछ भी कहने से मना कर दिया.

सुभदीप राय अब भी बेरोजगार हैं तो सारधा समूह के चैनल 10 में 5 साल तक काम कर चुके एक और पत्रकार मनोजित मलिक की कहानी भी कमोबेश यही है. अप्रैल 2013 में सारधा ग्रुप के मालिक सुदीप्तो सेन की गिरफ्तारी के बाद चैनल 10 के पत्रकारों को अचानक बर्खास्त किया जाने लगा. वेतन में कटौती शुरू हो गई और मजबूरी में जो लोग आज भी वहां हैं उनकी हालत भी बेरोजगार वालों जैसी ही है.

लब्बोलुआब ये कि पर्ल्स ग्रुप, सारधा ग्रुप, रोजवैली जैसी चिट फंड कंपनियों से जुड़े टीवी चैनलों के पत्रकार कहीं के नहीं रहे. यही नहीं चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन परिवार के चैनल लाइव इंडिया के मालिक महेश मोतेवार को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है. P7 न्यूज या लाइव इंडिया हो, चैनल 10 हो, न्यूज टाइम्स हो या फिर चिट फंड कंपनी से जुड़ा कोई और टीवी चैनल, हकीकत ये है कि इनके मालिकों का पत्रकारिता से दूर-दूर तक का कोई नाता नहीं.

कई पत्रकारों को बेरोजगार करने वाले भंगू की कहानी

P7 न्यूज कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू की जिंदगी का सफर साइकिल पर दूध बेचने से शुरू हुआ था. पंजाब के जिला चमकौर साहबिब में भंगू साइकिल पर दूध इकट्ठा कर शहर में घर-घर जाकर बेचने का काम करता था. इसी दौरान वो एक चिट फंड कंपनी के लिए एजेंट का काम करने लगा. धीरे-धीरे इस काम में भंगू इतना माहिर हो गया कि उसने गुरवंत एग्रोटेक के नाम से अपनी कंपनी शुरू कर दी. ये कंपनी मैग्नेटिक पिलोज बेचने के नाम पर लोगों से पैसा जमा कराती थी. इसके बाद कंपनी का नाम बदलकर 1998 में पीएसीएल इंडिया यानि पर्ल एग्रोटेक कार्पोरेशन लिमिटेड रख दिया गया.

इस तरह दो दशक के भीतर भंगू हिंदुस्तान के सबसे बड़े लैंड बैंक का मालिक बन गया. इस ग्रुप की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसके ब्रेंड एंबेसेडर अक्षय कुमार से लेकर ऑस्ट्रेलिया के तेज गेंदबाज ब्रैट ली तक रह चुके हैं. पीएसीएल का मुख्य दफ्तर दिल्ली में है. देशभर में इसके एजेंटों का जाल फैला हुआ है. कंपनी के करीब 8 लाख एजेंट पूरे देश में हैं जो चेन मार्केटिंग के तहत काम करते हैं. इसके अलावा आईपीएल में पंजाब की टीम किंग्स इलेवन के साथ भी पर्ल ग्रुप जुड़ा रहा है.

कंपनी ने रियल एस्टेट, टिंबर इंडस्ट्री, हेल्थ, बीमा, होटल जैसे क्षेत्रों में हाथ आजमाने के बाद 2011 में P7 न्यूज चैनल शुरू किया. चैनल के जरिए पर्ल्स ग्रुप कंपनी का प्रचार-प्रसार करना ही उसका मकसद था. राष्ट्रीय चैनल के अलावा भंगू ने क्षेत्रीय चैनल पर्ल्स मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ भी शुरू किया और खूब पूंजी निवेश कराया. लेकिन आज 5 करोड़ निवेशकों से 45 हजार करोड़ रु ऐंठने के आरोप में भंगू को जेल भेजा जा चुका है. इस बीच सीबीआई की जांच में पचा चला है कि निवेशकों के पैसों से कंपनी ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में 66 दफ्तरों को खरीदा. पंजाब के संगरुर में पर्ल्स कंपनी के कई निवेशकों को अपनी रकम डूबने का डर सता रहा है.

लाइव इंडिया के मालिक महेश मोतेवार की कहानी

लाइव इंडिया और महाराष्ट्र में मी मराठी न्यूज चैनल के मालिक महेश मोतेवार का शुरूआती सफर भी संघर्ष भरा रहा. महेश मोतेवार ने 2005 में खोली अपनी समृद्ध जीवन परिवार कंपनी को और ताकतवर बनाने के लिए चैनल खोला, अच्छे पत्रकारों को ऊंची सैलरी पर नौकरी दी. मोतेवार की कंपनी ग्रामीणों को बताती थी कि वह पुणे में बकरी और गाय पालन का कारोबार करती है. इसके बड़े-बड़े फार्म हैं, जहां पशुओं का पालन-पोषण होता है. कंपनी ने ग्रामीणों को बताया कि उनके पास जितने भी पैसे हैं, वे उनकी कंपनी में निवेश कर दें. बकरी व गाय पालन में मिलने वाले तीन गुना लाभ उन तक सीधे पहुंचेगा. इस तरह ग्रामीण उनके चंगुल में फंस गए.

महाराष्ट्र के नांदेड जिले के लोहारा तहसील के जेवली गांव में करीब डेढ़ सौ लोगों ने समृद्ध जीवन परिवार में निवेश किया है. श्याम सुंदर पाटिल नाम के किसान ने 21 लाख तो श्रीमंत घोडकें नाम के इस किसान ने 36 हजार रुपये समृद्ध जीवन परिवार में जमा किये हैं. अब मालिक महेश मोतेवार की गिरफ्तारी के बाद अब सभी को अपनी राशि वापस न मिलने का डर सता रहा है. लाइव इंडिया चैनल से इस पूरे मामले पर एबीपी न्यूज ने संपर्क साधा लेकिन उनका अब तक कोई जवाब नहीं आया है. जो भी हो इन चिट फंड कंपनियों के सबसे ब़ड़े शिकार बने निवेशक और खुद पत्रकार जिन्होंने इन कंपनियों से जुड़े टीवी चैनलों में काम किया या फिर कर रहे हैं. पी 7 न्यूज में काम कर चुके पत्रकार हर्षवर्धन और अगस्त्य अरुणाचल का कहना है कि चैनल खोलने के लिए बाकायदा केंद्र सरकार कायदा कानून बनाए और ऐसे लोगों को ही न्यूज चैनल का लाइसेंस दे जो पत्रकार रह चुके हैं या फिर पत्रकारिता करना चाहते हों.

साभार- एबीपी न्यूज

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अंतत: अरेस्ट हो गए चिटफंड कंपनियों पीएसीएल और पर्ल्स ग्रुप के दिग्गज निर्मल सिंह भंगू, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रत भट्टाचार्य

सीबीआई ने 45 हजार करोड़ रुपये के घोटाले में पीएसीएल व पर्ल्स ग्रुप के सीएमडी निर्मल सिंह भंगू तथा इनके तीन सहयोगी एमडी सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह, सुब्रत भट्टाचार्य को गिरफ्तार कर लिया है। इन्हें पोंजी स्कीम केस के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। बताया जा रहा है कि ये लोग लगातार बयान बदल रहे थे और जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे। सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार भंगू के साथ पीएसीएल के प्रमोटर-डायरेक्टर तथा एमडी सुखदेव सिंह, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (फाइनेंस) गुरमीत सिंह तथा ईडी सुब्रत भट्टाचार्य से शुक्रवार को एजेंसी के मुख्यालय में विस्तृत पूछताछ की गई।

इसके बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप है कि इन लोगों ने कृषि भूमि के विकास तथा बिक्री के नाम पर देश भर के 5.5 करोड़ निवेशकों से 45 हजार करोड़ रुपये एकत्रित किए थे। निवेशकों को भारी रिटर्न का लालच दिया गया था। जांच में पता चला है कि आरोपियों ने पीड़ितों को फर्जी भूमि आवंटन पत्र दिए थे। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक छानबीन में भारत तथा विदेश में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्ति के भी दस्तावेज मिले हैं। यह भी पता चला है कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने जब पर्ल्स गोल्डेन फॉरेस्ट लिमिटेड (पीजीएफ) को स्कीम बंद करने तथा निवेशकों का रुपया वापस करने का आदेश दिया तो पर्ल्स एग्रोटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के नाम से वैसी ही दूसरी फर्जी योजना चला दी गई।

इसका ऑफिस नई दिल्ली के बाराखंभा में खोला गया और पीएसीएल से मिले रुपये पीजीएफ के निवेशकों को लौटाने में इस्तेमाल किए गए। लोगों से पैसा ऐंठने के लिए पूरे देश में लाखों कमीशन एजेंट का जाल बिछाया गया था। इन एजेंटों को मोटा कमीशन दिया जाता था। पीएसीएल और इसके प्रमोटर रहे निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ ईडी और सीबीआई का शिकंजा लगातार कसता जा रहा था. पिछले महीने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश के कई शहरों में पीएसीएल के दफ्तरों पर छापे मारे थे.

मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत दिल्ली, मुंबई, मोहाली, चंडीगढ़ और जयपुर में छापे मारे गए थे. सन् 2015 में सीबीआई की एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने पीएसीएल के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया था. इसके बाद जांच शुरू कर दी थी. पीएसीएल ने रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट के नाम पर बिना पूंजी बाजार नियामक की मंजूरी लिए सामूहिक निवेश योजनाएं यानी पोंजी स्कीम चलाई. इसके जरिए निवेशकों से करीब 45 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए, जिसे वसूलने का आदेश दिया गया था.

सीबीआई जांच से पता चला कि इन्होंने पांच करोड़ निवेशकों को लूटा. कुल 45 हजार करोड़ रुपये निवेशकों से इकठ्ठा किए. बटोरी गई बेहिसाब दौलत को निजी फायदे के लिए इस्तेमाल किया. इस दौलत का बड़ा हिस्सा विदेश ले गए. ऑस्ट्रेलिया में कारोबार शुरू किया. यूपी में ठगे गए 1.30 करोड़ निवेशक. महाराष्ट्र में लुटे 61 लाख निवेशक. तमिलनाडु में लुटे 51 लाख लुटे निवेशक. राजस्थान में लुटे 45 लाख निवेशक. हरियाणा में लुटे 25 लाख निवेशक.

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पीएसीएल वाले निर्मल सिंह भंगू के कई ठिकानों पर ईडी ने की छापेमारी

पीएसीएल और इसके प्रमोटर रहे निर्मल सिंह भंगू के खिलाफ शिकंजा कसता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देश के कई शहरों में पीएसीएल के दफ्तरों पर छापे मारे। ईडी निवेशकों से गैरकानूनी तरीके से जुटाई गई करीब 60 हजार करोड़ रुपये की राशि के मामले में मनी लांड्रिंग के पहलू की जांच कर रहा है। यह राशि कई पोंजी स्कीमों के जरिये जुटाई गई।

ईडी के अधिकारियों ने बताया कि पर्ल और इसके निदेशकों व सहयोगियों के ठिकानों पर मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत दिल्ली, मुंबई, मोहाली, चंडीगढ़ और जयपुर में छापे मारे गए हैं। सीबीआई की एफआईआर के आधार पर इस साल की शुरुआत में प्रवर्तन निदेशालय ने पीएसीएल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। कंपनी के खिलाफ कई सरकारी एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं। पर्ल पर आरोप है कि इसने रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट के नाम पर बिना पूंजी बाजार नियामक की मंजूरी लिए अनधिकृत रूप से सामूहिक निवेश योजनाएं यानी पोंजी स्कीमें चलाईं। इनके जरिये निवेशकों से कई सालों में तकरीबन 60 हजार करोड़ रुपये जुटाए गए।

देश की सबसे बड़ी गैरकानूनी धन उगाही स्कीम के चलते शिकंजे में फंसे पीएसीएल (पर्ल) के निदेशक निर्मल सिंह भंगू सेबी के खिलाफ सैट के शरण में पहुंच गए हैं। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने 22 अगस्त 2014 को पीएसीएल और भंगू समेत कंपनी के सभी निदेशकों को निवेशकों सेवसूले गए लगभग 50 हजार करोड़ रुपये वापस करने का आदेश दिया था। अब यह रकम ब्याज समेत लगभग साठ हजार करोड़ रुपये पहुंच गई है।

इस बीच रामपुर से खबर है कि सिविल लाइंस क्षेत्र में डीएम आवास किनारे स्थित पर्ल बनाम पीएसीएल लिमिटेड के ऑफि‍स में मुरादाबाद के एजेंट्स ने जमकर हंगामा किया। इस दौरान मौका पाकर ऑफि‍स मैनेजमेंट और कर्मचारी वहां से खिसक लिए। पड़ोसी जिले मुरादाबाद से पहुंचे एजेंटों के मुताबिक, उन्हें कई दिन से पीएसीएल के ऑफि‍स में रुपयों के जमा होने की सूचना मिल रही थी, जिसके चलते शुक्रवार को एजेंट यूनियन ने ऑफि‍स पर छापा मारा। छापे के दौरान ऑफि‍स में बदस्तूर काम जारी मिला। साथ ही बैकडेट में कलेक्शन जमा किया जा रहा था।

एजेंट की बात पर अगर यकीन किया जाए तो सेबी और हाईकोर्ट ने पर्ल बनाम पीएसीएल को ग्राहकों का रुपया आगे जमा करने पर रोक लगा रखी है। यह रोक 22 अगस्त 2014 से जारी है। इसके बावजूद कंपनी बदस्तूर हाईकोर्ट और सेबी के आदेशों का उल्लंघन करते हुए ग्राहकों से रुपया जमा कर रही है। साथ ही पुराने जमा रुपयों के प्लान की मैच्योरिटी होने के बावजूद पिछले करीब एक साल से कोई भुगतान नहीं कर रही है।

सेबी ने वर्ष 2014 में तीन महीने में ग्राहकों का भुगतान करने के आदेश दिए थे। ऐसा नहीं होने पर ग्राहकों और अभिकर्ताओं में जबरदस्त नाराजगी है। इसी के चलते आज अभिकर्ताओं की यूनियन ने कंपनी के ऑफि‍स पहुंचकर सारी ट्रांसएक्शन बंद करवा दी। इस दौरान ऑफि‍स मैनेजमेंट और कर्मचारी मौका देखकर वहां से खिसक लिए। साथ ही आक्रोशित अभिकर्ताओं ने कंपनी ऑफि‍स में ही डेरा डाल लिया। अभिकर्ताओं ने टीडीएस काटने और आयकर विभाग को सूचना न देने का इल्जाम भी लगाया। कलेक्शन एजेंट्स का मानना है कि इस तरह पूरे यूपी और इंडि‍या में कंपनी ने हजारों करोड़ जनता का रुपया ठग लिया है और फ्रॉड जारी है। इसपर यूनियन ने पुलिस और जिला प्रशासन को सूचना देकर कार्रवाई और जांच की मांग की है।

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पीएसीएल और पर्ल ग्रुप की संपत्ति बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाने के आदेश, पेड मीडिया ने इस बड़ी खबर पर साधी चुप्पी

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पीएसीएल को निवेशकों का 49100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश बरकरार

मुंबई। भारतीय प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) ने बाजार नियामक सेबी के उस आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया जिसमें प्रॉपर्टी डेवलपर पीएसीएल को निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश जारी किया गया था। सेबी ने अवैध सामूहिक निवेश योजना को लेकर पीएसीएल के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद पिछले साल सेबी के आदेश के खिलाफ पीएसीएल ने ट्रिब्यूनल में अपील किया था। लेकिन ट्रिव्यूनल ने पीएसीएल की अपील खारिज करते हुए उसे सेबी के निर्देशों पर तीन महीने में अमल करने को कहा।

सेबी ने अवैध योजनाओं के जरिये निवेशकों से धन जमा करने के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए पीएसीएल लिमिटेड (पहले पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन) को तीन महीने के भीतर 49 हजार 100 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाने का आदेश दिया था। सेबी ने कंपनी से अवैध सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) को बंद करने को भी कहा है।  सेबी के आदेश के बाद पीएसीएल ने इसे प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) में चुनौती दी। वहीं, पीएसीएल के बयान में कहा गया कि दुर्भाग्य से सेबी इस बात पर ध्यान नहीं दे सका कि कंपनी ने कहा था कि उसे सीआईएस नहीं माना जाए। कंपनी ने कहा है, ‘पीएसीएल ने सेबी की बेंच के सामने कहा था कि वह सीआईएस नहीं चला रही है। कंपनी ने अपने रीयल एस्टेट कारोबार के लिए जो धन जुटाया है, उसके पास उचित मात्रा में परिसंपत्तियां हैं।’

सेबी ने कहा है कि वह उच्चतम न्यायालय के एक दिशानिर्देश के अनुसार कंपनी तथा निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा व्यापार में अनुचित व्यवहार करने वह सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआइएस) के बारे में सेबी के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पीएसीएल के खिलाफ कार्रवाई की है।  भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस संबंध में 92 पृष्ठ का आदेश जारी किया था। इसके अनुसार कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने 49,100 करोड़ रुपये जुटाये है और अगर पीएसीएल एक अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच जुटाये गये कोष का पूरा ब्योरा दे तो यह राशि और भी अधिक हो सकती है। जिन निवेशकों से यह राशि जुटायी गयी, उनकी संख्या करीब 5.85 करोड़ है। इनमें वे ग्राहक भी शामिल है। जिन्हें जमीन आवंटित करने की बात कही गयी थी और उन्हें अभी तक जमीन नहीं दी गयी। अवैध तरीके से धन जुटाने के मामलों में यह न केवल राशि के लिहाज से बल्कि निवेशकों की संख्या को लेकर भी सबसे बड़ा मामला है।

वही, पीएसीएल तथा निर्मल सिंह भांगू समेत उसके शीर्ष कार्यकारियों के खिलाफ सीबीआई भी जांच कर रही है। साथ ही यह सेबी की जांच के घेरे में पुराने मामलों में से एक है। नियामक ने 16 साल पहले फरवरी 1998 में पीएसीएल को कहा था कि वह न तो कोई योजना शुरू कर सकती है और न ही अपनी मौजूदा योजनाओं के तहत कोष जुटा सकती है। कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि वह कोई अवैध योजना नहीं चला रही है और जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल है। सेबी ने अवैध तरीके से धन जुटाने की योजना चलाने को लेकर 1999 में पीएसीएल को नोटिस जारी किया था। बाद में मामला अदालतों में गया। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल फरवरी में आदेश जारी कर सेबी को यह पता लगाने को कहा कि क्या पीएसीएल का कारोबार सामूहिक निवेश योजना के दायरे में आता है या नहीं और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा।

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पीएसीएल और पर्ल ग्रुप की संपत्ति बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाने के आदेश, पेड मीडिया ने इस बड़ी खबर पर साधी चुप्पी

एक बड़ी खबर सुप्रीम कोर्ट से आ रही है. सहारा के घोटाले साइज से लगभग डबल साइज के घोटाले से घिरी पीएसीएल और पर्ल ग्रुप नामक कंपनियों की संपत्ति बेचकर निवेशकों का पैसा लौटाने का आदेश उच्चतम न्यायालय ने दिया है. इस बीच सीबीआई ने पीएसीएल और पर्ल ग्रुप के मालिक निर्मल सिंह भंगू समेत कंपनियों के कई निदेशकों के खिलाफ चीटिंग और साजिश की नया केस दर्ज किया है. पीएसीएल और पर्ल ग्रुप को करीब छह हजार करोड़ निवेशकों को छियालीस हजार करोड़ रुपये लौटाना है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन छह हजार करोड़ रुपये के निवेशकों को उनका पैसा मिल जाएगा लेकिन कई लोगों का कहना है कि भंगू ने अपना पूरा कारोबार और ज्यादातर पैसा विदेशों में ट्रांसफर कर लिया है. इसलिए भारत में बेचने के लिए बहुत कुछ मिलने वाला नहीं है.

46,000 करोड़ रुपये की उगाही करने वाली पर्ल और पीएसीएल नामक कंपनियों के छह हजार करोड़ निवेशक पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश समेत कई प्रदेशों में हैं. बताया जा रहा है कि निवेशकों का पैसा लौटाने के लिए इन कंपनियों की दस हजार से ज्यादा संपत्तियों को बेचा जाएगा. निर्मल सिंह भंगू द्वारा संचालित दो कंपनियों Pearls Agrotech Corporation Limited (PACL) और Pearls Golden Forest Limited (PGFL) ने ये जनता को लुभावने सपने दिखाकर ये पैसे उगाहे हैं. ज्ञात हो कि सहारा वालों ने गैरकानूनी तरीके से 24,000 करोड़ रुपये इकट्ठे किए जिसके कारण सुब्रत राय अभी तक जेल में है लेकिन पर्ल / पीएसीएल वालों ने गैरकानूनी तरीके से सहारा वालों से दोगुना ज्यादा पैसा वसूला लेकिन इसका मालिक भंगू जेल से बाहर घूम रहा है. चर्चा है कि इसने मीडिया से लेकर सारी एजेंसीज तक को मैनेज कर रखा है ताकि यह पूरा महाघोटाला मीडिया ट्रायल का हिस्सा न बने और न ही कोई एजेंसी ज्यादा सक्रिय होकर उसे गिरफ्तार कर पाए. भंगू को बचाने में कई जाने माने राजनीतिक लोग भी लगे हुए हैं. कई मीडियाकर्मी भी दिन रात भंगू के लिए काम कर रहे हैं. अब जब भंगू की भारत की संपत्ति बेचने के सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं तो यह भी खबर लगभग दबा दी गई क्योंकि ज्यादातर मीडिया घराने भंगू और पीएसीएल के पैरोल पर हैं.

सुप्रीम कोर्ट की एफएमआई कलीफुल्ला और शिवा कीर्ति सिंह की बेंच ने पर्ल / पीएसीएल ग्रुप की संपत्ति बेचने के लिए एक स्पेशल कमेटी बनाई है. यह कमेटी निवेशकों के पैसे लौटाने के लिए ग्रुप की कंपनियों की चल अचल संपत्ति के शीघ्र बिक्री और पैसे को निवेशकों तक पहुंचाने की गारंटी करेगी. इस कमेटी में हाईकोर्ट के रिटायर जज के. राममूर्थी और इश्वर हैं. इस कमेटी को सेबी और सीबीआई की तरफ से पूरा सहयोग दिया जाएगा. ये दोनों एजेंसीज चल अचल संपत्ति के कागजों की जांच पड़ताल कर बिक्री के काम में मदद करेंगी. साथ ही ग्रुप की कंपनीज पर मारे गए छापे के दौरान जब्त किए गए पैसे को कमेटी को सौंपेंगी ताकि उसे निवेशकों तक पहुंचाया जा सके.

बीते अप्रैल महीने में सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने छापे मारकर अस्सी करोड़ रुपये नगद और पर्ल / पीएसीएल की करीब अठारह सौ संपत्तियों के कागजात जब्त किए. कोर्ट ने आदेश दिया कि सेबी और सीबीआई सारे कागजात व कैश कमेटी को दे दे ताकि वह जांच पड़ताल के बाद बिक्री आदि कर पैसे जल्द से जल्द निवेशकों तक लौटा दे. देखना है कि क्या अठारह सौ संपत्तियों की बिक्री से 48 हजार करोड़ रुपये मिल पाता है. अगर इन पैसों पर मिलने वाले ब्याज आदि की गणना करें तो पूरा मामला पचास हजार करोड़ रुपये तक जाएगा. ऐसे में लोग चर्चा कर रहे हैं कि भंगू तो सारा पैसा लेकर विदेश भाग गया. अब देश में बस नाम की संपत्तियां हैं. अगर यह बात सच हुई तो यह दूसरा महाघोटाला होगा जिसके लपेटे में मीडिया से लेकर राजनीति तक के कई दिग्गज आएंगे जिनकी मदद से भंगू घोटाला प्रकरण दबा रहा और भंगू पूरा पैसा विदेश ले जाने में कामयाब हुआ.

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पीएसीएल के निवेशक परेशान, भंगू ने सम्मन फेंका कूड़ेदान में, एजेंसियां लाचार

पीएसीएल के हजारों करोड़ रुपये के फ्राड के पीड़ित धीरे धीरे सामने आ रहे हैं लेकिन पूरे तंत्र को भंगू ने इस तरह साध लिया है कि कहीं पीड़ितों की आवाज तक नहीं उठ रही है. सहारा उगाही मामले में सेबी और सुप्रीम कोर्ट ने भले तल्ख रुख दिखाकर सुब्रत राय को अंदर कर दिया लेकिन भंगू मामले में सारी मशीनरी असहाय दिख रही है. भारतीय सेना के रिटायर अधिकारी केएल शर्मा ने अपनी बिटिया की शादी के मकसद से पीएसीएल में अपनी सेविंग को इनवेस्ट कर दिया था. यह बात 2007 की है. बीते साल यह निवेश मेच्योर हो गया. उन्होंने कुल पौन तीन लाख रुपये लगाए थे. कंपनी ने मेच्योरिटी पर जो देने का वादा किया था, उसे तो छोड़िए, सेना के इस रिटायर अधिकारी को अपना मूल धन वापस नहीं मिल रहा. इस अधिकारी ने धन डबल होने के लालच में पैसा लगा दिया था.

राजस्थान के रहने वाले केएल शर्मा कहते हैं कि उन्होंने अपने गांव के एक एजेंट के लोकलुभाव वादों में आकर पीएसीएल में निवेश कर दिया था पर अब मैं स्तब्ध हूं. कहीं से पैसे मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है. ज्ञात हो कि पीएसीएल पर किसी भी तरह का पैसा उगाहने पर रोक है लेकिन इसके एजेंट अब भी बैकडोर से भोले भाले लोगों से पैसे जमा करा रहे हैं. सहारा की तरह पीएसीएल में भी जिन लोगों ने पैसे लगाए हैं और वापसी की मांग कर रहे हैं, उन्हें पैसे वापस मिलने में कई साल लग जाएंगे और कई किस्म की कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा. 

बात सिर्फ पीएसीएल की ही नहीं है. ऐसी दर्जनों कंपनियों का मामला सेबी और अन्य एजेंसियों के पास पड़ा है लेकिन इनके खिलाफ सहारा जैसी सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है. इन चिटफंड कंपनियों के आका पूरे सिस्टम को साधने में सफल हो जाते हैं और इस तरह लाख कोशिश के बावजूद सेबी की लाचारी नजर आने लगती है. पीएसीएल का प्रकरण सबसे ज्यादा ज्वलंत और सामयिक है लेकिन यह पूरा मामला मीडिया से इस कदर गायब हुआ पड़ा है कि लोगों कई बार मीडिया की तरफ शक की नजर से देखते हैं. साथ ही अन्य एजेंसीज के कर्ताधर्ता भी शक के दायरे में आते हैं. आखिर क्या वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पीएसीएल के कर्ताधर्ता अब तक सींखचों के बाहर हैं. उधर, हजारों करोड़ डूबने की आशंका से निवेशक परेशान हैं और मारे-मारे घूम रहे हैं.

मिलेनियम पोस्ट नामक वेबसाइट पर पीएसीएल और इसके मालिक भंगू के बारे में छपी खबर यह बताने के लिए पर्याप्त है कि किस तरह बड़े लुटेरों पर सत्ता-सिस्टम मेहरबान हो जाता है और इनका कुछ भी नहीं बिगड़ता. झेलता सिर्फ गरीब आदमी है. सीरियस फ्राड इनवेस्टीगेशन आफिस यानि एसएफआईओ की तरफ से दर्जनों नोटिस और सम्मन पीएसीएल के मालिक भंगू को भेजे गए लेकिन भंगू ने सबको डस्टबिन में फेंक दिया. पूरी स्टोरी यूं है….

PACL founder Bhangoo not responding to SFIO summons

New Delhi : Pearl Agrotech Corporation Limited’s (PACL) founder Nirmal Bhangoo is not responding to ‘couple of summons’ sent by Serious Fraud Investigation Office (SFIO), an organisation that probes financial frauds. It was found that the company continues to be involved in collecting money ‘illegally’ despite an ongoing CBI inquiry, which is monitored by the Supreme Court.

SFIO has sent letters to Bhangoo’s office in Delhi and Chandigarh on January 28 and February 2 and asked him to respond to it at the earliest. The probe agency, which falls under the Ministry of Corporate Affairs (MCA) asked Bhangoo to explain over his ‘agents’ continued involvement in collecting money mainly from the rural areas.

“He has failed to provide any explanation to us. We have sent reminders but (got) no reply,” sources said.

It was learnt that SFIO wanted to have the exact figures of PACL’s collection and funds mobilised during the period of April 1, 2012 to February 25, 2013. Also, he was asked to provide details of funds collected during April 2013 to August 2013 and in December 2013 to February 2014.

“This is the period, which are crucial in terms of his collection as we are anticipating that the figures could be more. So, far as per our total amount mobilised by the company, by its own admission comes to a whopping Rs 49,100 crore. But we suspect that this could be more and therefore, we have asked for his explanation,” sources said.

Earlier, on November 14, 2014, the SEBI has written an ‘alert letter’ to the MCA and requested it to take action against Company’s agents involved in such activities. Probe revealed that they are mainly targeting people living in the rural areas of South India and some parts of Uttar Pradesh, Bihar and Jharkhand.

Meanwhile, CBI and Serious Fraud Investigation Office (SFIO) made contact with its Australian counterparts to get ‘every single’ piece of information about his other investments.

CBI Chief Anil Sinha had recently claimed that they have formed four separate teams to go deep in to the case. It was learnt that one of the teams, was asked to look in to foreign affairs of Bhangoo and already they are in touch with the Australian authorities in getting details of Bhangoo’s dubious investment in real estate, hotels, sports and remittance business. Also, Indian sleuths are also in touch with the Australasian Consumer Fraud Taskforce (ACFT) to strengthen their case against Bhangoo.

There are reports that Bhangoo has made some investments in Dubai too and that the probe agency will take on with its Dubai counterparts soon. “If required we will also take help from the Interpol to unearth how he came in contact with the notorious fugitive Christopher Skase, who died in 2001.

Bhangoo’s Pearls Australasia Company paid $62 million cash for the luxurious Sheraton Mirage Resort and Spa to Skase, and spent another $20 million on its renovations. There must be some middleman who broke the deal and we need those information,” sources said. (मिलेनियम पोस्ट में प्रकाशित सुजीत नाथ की रिपोर्ट.)

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पीएसीएल ने भारतीय तंत्र को दिखाया ठेंगा, पाबंदी के बावजूद जमकर उगाही जारी

चिटफंड कंपनी पीएसीएल को हजारों करोड़ रुपये का फ्रॉड करने के कारण भले ही सरकारी सिस्टम चौतरफा शिकंजे में लिए हो लेकिन इस कंपनी की सेहत पर कोई असर पड़ता दिख नहीं रहा है. कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू के अघोषित आदेश के कारण पीएसीएल का पैसा उगाही अभियान जोरों पर जारी है. एक ताजे आंतरिक सर्वे में पता चला है कि इस कंपनी ने बिहार, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत भारत के बहुत बड़े हिस्से में निवेशकों को बरगलाकर पैसे जमा कराने का काम जारी रखा हुआ है.

(राजस्थान का कोटा शहर. यहां चिटफंड कंपनी पीएसीएल का चमचमाता बड़ा सा आफिस बीच शहर में जोर शोर से चालू है. यहां हर रोज लाखों रुपये निवेशकों का जमा कराया जाता है. पीएसीएल के एजेंट स्थानीय लोगों को लंबे चौड़े सपने दिखाकर पैसे जमा कराते हैं और खुद भारी भरकम कमीशन खाते हैं. यह खेल पूरे देश में जारी है. हालांकि सेबी, सुप्रीम कोर्ट समेत कई एजेंसियों संस्थाओं ने इस कंपनी पर पाबंदी लगाकर निवेशकों से पैसे जमा कराने पर रोक लगा दी है और पहले जमा कराए गए पैसे लौटाने को कहा है. पर पीएसीएल के कर्ताधर्ता भारतीय तंत्र को धता बताकर अपना धंधा जारी रखे हुए हैं.)

उधर, जो निवेशक परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद पैसे मांगने कंपनी के आफिस आ रहे हैं तो उन्हें हर हाल में बिना पैसे दिए टरका दिया जा रहा है. इन लोगों को उनका पैसा किसी अन्य स्कीम में डालने का प्रलोभन दिया जा रहा है ताकि पैसा कंपनी से बाहर न जाए. ऐसे हजारों लोगों ने पिछले दिनों पीएसीएल के मालिकों के घरों के सामने प्रदर्शन किया लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है. कंपनी प्रबंधन अब भी भारतीय सिस्टम को पटाने और खरीदने में जुटा हुआ है. चर्चा है कि इसी कारण अभी तक भंगू गिरफ्तार नहीं हो पा रहा है.

एक चर्चा यह भी है कि भंगू ने सारी संपत्ति देश से बाहर ले जाकर दूसरे देशों में धंधा जमा लिया है. इसने भारत में अपनी कंपनियों में खुद की पोजीशन ऐसी कर ली है कि मालिक के रूप में दूसरे लोग फंसेंगे, वह खुद को बेदाग निकाल लेने में सफल रहेगा. मास्टर माइंड निर्मल सिंह भंगू के इस खेल पर से आंतरिक सर्वे एजेंसी ने परदा उठाया है.

पर्ल्स और पीएसीएल के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू और उनके रिश्तेदारों का पीएसीएल लिमिटेड की तीन में से दो मातृ कंपनियों पर नियंत्रण है. ये ब्योरा 61 वर्षीय भंगू के उस दावे के बाद सामने आ रहा है जिसमें उन्होंने खुद को कंपनी का ‘सलाहकार’ होने का दावा किया. जिन दिनों बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पीएसीएल लि. से 5.85 करोड़ निवेशकों से जुटाए गए 49,100 करोड़ रुपये लौटाने के लिए कहा था तब भंगू ने सेबी को बताया कि उन्हें कारण बताओ नोटिस गलत भेजा गया है.

पीएसीएल की वार्षिक रिपोर्ट में उसके शीर्ष शेयरधारकों में तीन कारोबारी इकाइयों के नामों का उल्लेख है. ये सिंह एंड सिंह एंड सिंह टाउनशिप डेवलपर्स लिमिटेड याशिका फिनलीज लि. और अलार्मिंग फिनवेस्ट लि. थीं, जिनके पास पीएसीएल की कुल 20 फीसदी हिस्सेदारी थी. निर्मल सिंह भंगू के पास याशिका फिनलीज की 8.84 फीसदी हिस्सेदारी है. निर्मल सिंह भंगू के रिश्तेदार हरविंदर सिंह भंगू की याशिका में 9.55 फीसदी हिस्सेदारी है. शेयर बाजारों को दी गई जानकारियों में इस शख्स और भंगू के बीच संबंध को स्पष्ट नहीं किया गया. इसमें हरविंदर को दिल्ली के पश्चिम विहार का निवासी बताया गया है और पिता / पति के कॉलम में ‘निर्मल सिंह भंगू’ लिखा था. इस प्रकार यह भंगू का बेटे हो सकता है. परिवार के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि भंगू के बेटे का नाम हरविंदर था, जो कुछ साल पहले गुजर गया. उनकी दो बेटियां ऑस्ट्रेलिया में कारोबार का प्रबंधन करती हैं. याशिका की स्थापना वर्ष 1994 में की गई थी.

ऐसे तमाम खेल, गणित, तिकड़मों के जरिए भंगू खुद बचा लेने का मंसूबा पाले हुए है. देखना है कि भारतीय न्याय प्रणाली, भारतीय जांच व्यवस्था भारत के इस सबसे बड़े चारसौबीस को सीखचों के पीछे पहुंचाने और निवेशकों को उनका वाजिब धन दलाने में में कामयाब हो पाती है या फिर सबको चकमा देकर भंगू भारत से भागकर विदेशों में ऐश का जीवन बसर करता रहेगा व भारत के करोड़ों निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई के लिए खून के आंसू रोते रहेंगे.

भड़ास4मीडिया के स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) के हेड सुजीत कुमार सिंह प्रिंस की रिपोर्ट. संपर्क: 09170257971

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PACL कंपनी दिवालिया, निवेशकों का धावा, मालिक भंगू फरार, सीबीआई टीमें कर रही तलाश

चिटफंड कंपनी पीएसीएल से एक बड़ी खबर आ रही है. इस कंपनी में पैसे लगाने वाले निवेशक इन दिनों बेचैन हैं. चर्चा आम है कि पीएसीएल कंपनी दिवालिया हो गई है. जो भी निवेशक परिपक्वता अवधि पूरे होने के बाद पैसे मांगने जाता है उसे कोई न कोई बहाना बनाकर बिना पैसे दिए लौटा दिया जाता है. इससे नाराज पीएसीएल के सैकड़ों निवेशकों ने पिछले दिनों पीएसीएल कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भूंग के गुड़गांव स्थित घर के बाहर प्रदर्शन किया.

गुड़गांव के सेक्टर 57 सुशांत लोक फेज 3 के ब्लाक ए स्थित भंगू के मकान के बाहर सैकड़ों निवेशक जमा हो गए और तोड़फोड़ करने लगे. ये लोग अपने पैसे वापस मांग रहे थे. इन लोगों का कहना था कि कंपनी पिछले दो साल से किसी के भी पैसे नहीं लौटा रही है और तरह तरह के बहाने कर टाल रही है. मौके पर पहुंची पुलिस ने नाराज निवेशकों को शांत किया और कानून अपने हाथ में न लेने की अपील की. पुलिस ने आश्वासन दिया कि पूरे मामले को उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा.

उधर, सेबी और सीबीआई के शिकंजे में फंसी कंपनी पीएसीएल के मालिक भंगू के बारे में सूचना मिल रही है कि वे फरार हो गए हैं. सीबीआई की चार टीमें भंगू को तलाशने और गिरफ्तार करने के लिए बनाई गई हैं. लाखों लोगों को घर का सपना दिखाकर अरबों खरबों रुपये वसूलने वाला निर्मल सिंह भंगू कहां फरार है, ये किसी को पता नहीं चल पा रहा है. पीएसीएल से जुड़े उच्चाधिकारियों ने अपने अपने फोन बंद कर लिए हैं. पूरे देश भर में पीएसीएल के निवेशकों में बेचैनी का माहौल है. चर्चा यहां तक है कि भंगू ने दो तिहाई पैसा भारत के बाहर आस्ट्रेलिया व अन्य देशों में ट्रांसफर करा दिया है और वहां अपना रीयल स्टेट समेत कई तरह के धंधों को जमा लिया है. ऐसे में यह संभव है कि भारत में एक नए किस्म का सारधा घोटाला हो और लाखों लोगों के पैसे मारे जाएं.

इस बीच, केंद्रीय जांच ब्यूरो ने 45 हजार करोड़ रुपये के पीएसीएल पर्ल घोटाला मामले में पर्ल समूह के खिलाफ जांच में तेजी लाने के लिए चार टीमें गठित की हैं. सीबीआई सूत्रों ने बताया कि पर्ल समूह की दो कंपनियों पर्ल एग्रोटेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) और पर्ल गोल्डेन फॉरेस्ट लिमिटेड (पीजीएफएल) द्वारा पोंजी योजनाों के माध्यम से बटोरी गई हजारों करोड़ के घोटाले की जांच को गति प्रदान करने के लिए चार टीमें गठित की गई हैं. ये टीमें जल्द से जल्द जांच करके त्वरित सुनवाई के लिए अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी.
    
सीबीआई ने समूह के प्रबंध निदेशक निर्मल सिंह भंगू, उसकी दो कंपनियों तथा निदेशक सुखदेव सिंह के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने सहित विभिन्न धाराों के तहत मुकदमा र्दज किया था तथा गत वर्ष फरवरी में पल्र्स समूह के खाते जब्त कर लिये थे. सेबी ने पीएसीएल के परिचालन पर सवाल खड़े किये थे. सेबी का दावा है कि पीएसीएल ने रीयल एस्टेट कंपनी के माध्यम से गरीब निवेशकों से करीब 45 हजार करोड़ रुपये अर्जित किये हैं. उच्चतम न्यायालय ने शारदा चिटफंड घोटाले के अलावा अन्य पोंजी बचत योजनाों की भी जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा है.

ज्ञात हो कि गैरकानूनी रूप से निवेशकों से धन जमा करने के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पीएसीएल लिमिटेड की मनी पूलिंग स्कीम पर रोक लगा दी है. करीब 50 हजार करोड़ की रकम जुटाने वाली इस स्कीम के निवेशकों को उनकी रकम लौटाने का सेबी ने कंपनी को आदेश दिया है. पीएसीएल की स्कीम पर रोक लगाने के साथ ही सेबी ने फर्जीवाडे़ और और नियमों का उल्लंघन करते हुए कारोबार के अनुचित तरीके अपनाने को लेकर कंपनी के नौ प्रोमोटरों और निदेशकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही है.

सेबी ने अपने 92 पन्नों के आदेश में कहा है कि कंपनी की स्वीकारोक्तियों के आधार पर इस स्कीम के तहत जुटाई गई रकम 49,100 करोड़ रुपये बैठती है. सेबी के मुताबिक पीएसीएल की ओर से 1 अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच हस्तांतरित धनराशि संबंधी पूरे विवरण उपलब्ध कराए जाने पर स्कीम के जरिए जुटाई गई राशि कहीं अधिक बैठती. सेबी ने बताया कि पीएसीएल की इस स्कीम के जरिए करीब 5.85 करोड़ ग्राहकों से रकम जुटाई गई है. इसमें वह लोग भी शामिल हैं जिन्हें कथित रूप से रकम के एवज में जमीन दे दी गई है और वह भी, जो अभी जमीन मिलने के इंतजार में हैं. गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई निर्मल सिंह भंगू सहित पीएसीएल के शीर्ष प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है. पीएसीएल के प्रोमोटर और निदेशक पर्ल ग्रुप और पीजीएफ ग्रुप के साथ भी जुडे़ रहे हैं.

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लगता है पीएसीएल कंपनी भी धराशाई होने की कगार पर है. यही कारण है कि यह कंपनी अपने निवेशकों का धन उन्हें परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद लौटा नहीं रही है. भड़ास4मीडिया को भेजे एक मेल में पीएसीएल के एक निवेशक सुरेंद्र कुमार पुनिया ने बताया है कि उनका इस कंपनी में एजेंट कोड Agent Code 1950022771 है. इनके कुल आठ एकाउंट हैं जिसमें कुल चार लाख रुपये यानि 4,00,000/- जमा हैं. इनकी परिपक्वता अवधि दिसंबर 2013 और जनवरी-फरवरी 2014 थी. पर कंपनी पैसे लौटाने में आनाकानी कर रही है. सुरेंद्र ने PACL Amount Refund मामले में भड़ास से दखल देने की गुजारिश की है.

ज्ञात हो कि ऐसे मामलों को सेबी देखती है और सेबी ही वो प्लेटफार्म है जहां निवेशक / एजेंट सीधे मेल कर रिफंड की फरियाद लगा सकते हैं. Surendra Punia की मेल आईडी surendrak.punia@gmail.com है.  सुरेंद्र पुनिया तो मात्र एक उदाहरण हैं. ये मेल लिख भेज लेते हैं इसलिए इनकी बात सुनी भी जा रही है, प्रकाशित भी हो रही है. लेकिन ऐसे हजारों एजेंट हैं जो अपढ़ हैं और मेल वगैरह का इस्तेमाल नहीं करते. वे लोग अपनी शिकायत बात कहां रख पाते होंगे. पीएसीएल के कई एजेंटों का कहना है कि उन्हें परिपक्वता अवधि पर पैसा लौटाने की जगह कंपनी किन्हीं दूसरी योजनाओं में पैसा लगवा दे रही है, वह भी बिना सहमति लिए. ऐसी गुंडागर्दी देखकर आज ये निवेशक / एजेंट उस क्षण को कोस रहे हैं जब उन्होंने अपना पैसा पीएसीएल में लगाने का फैसला किया.

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पीएसीएल फ्रॉड प्रकरण सामने आने के बाद से एक चेहरा जो मीडिया में छाया हुआ है वो है पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू का। 61 वर्षीय भंगू ने दावा किया है कि वो पीएसीएल के सिर्फ ‘सलाहकार’ हैं और सेबी ने गलती से उनको कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। लेकिन सच्चाई ये है कि भंगू और उसके नजदीकी रिशतेदारों की उन तीन में से दो कंपनियों में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है जो पीएसीएल को नियंत्रित करती हैं।

पीएसीएल की वार्षिक रिपोर्ट तीन कॉर्पोरेट इकाइयों को अपना शीर्ष शेयरधारी बताती है। ये हैं- सिंह एंड सिंह टाउनशिप डेवलेपर्स, याशिका फिनलीज़ और अलार्मिंग फिनवेस्ट। 1994 में निगमित याशिका फिनलीज़ में 8 सितंबर, 2013 तक निर्मल सिंह भंगू की 8.84 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। परिवार के करीबियों का कहना है कि भंगू के पुत्र हरविंदर सिंह, जिसकी याशिका में 9.55 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, का कुछ साल पहले निधन हो गया था। भंगू की दो बेटियां है जो ऑस्ट्रेलिया में उनके व्यापार हितों की देखरेख करती हैं। इसी तरह सिंह एंड सिंह टाउनशिप में परमिंदर सिंह की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है जो निर्मल सिंह भंगू के बड़े भाई का लड़का है।

जुलाई 2013 में भंगू ने सेबी को लिखे एक पत्र में कहा था कि वो बहुत ही थोड़े समय, 3 जून, 1996 सो 3 फरवरी 1998 तक, के लिए पीएसीएल से जुड़े थे। भंगू ने बताया कि 1983 में उन्होने पीजीएफ लि. नामक एक कंपनी प्रोमोट की थी और उसके चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के रूप में काम किया। वो अपनी व्यक्तिगत हैसियत में रियल एस्टेट क्षेत्र में संपत्तियों की खरीद-बेच का काम करते हैं और अपनी आजीविका चलाते हैं। कृषि और रीयल एस्टेट के क्षेत्र में उनके ज्ञान और अनुभव को देखते हुए ही उन्हें पीएसीएल के बोर्ड में ‘सलाहकार’ के रूप में जुड़ने के लिए आमंत्रित किया गया था। इसलिए भंगू का कहना है कि सेबी द्वारा उनको कारण बताओ नोटिस का भेजा जाना गलत है।

खैर, कॉर्पोरेट जगत के खिलाड़ियों द्वारा कंपनी कानून से खिलवाड़ करना और उसे तोड़-मरोड़ कर अपना रक्षा कवच बना लेना कोई नई बात नहीं है। भंगू और सहारा की कहानी काफी हद तक समान है। दोनो ऐसा बिज़नेस चलाते हैं जिसके परिचालन को उनके आलोचक अपारदर्शी बताते हैं। दोनों ही राजनीतिज्ञो और फिल्म सितारों से अच्छे रिश्ते रखते हैं। भंगू के बारे में कहा जाता है कि उसके शुभचिंतक हर राजनीतिक दल में हैं। पंजाब के एक पूर्व कांग्रेसी सांसद के वो बहुत ही करीब हैं। वहीं सत्तासीन भाजपा और शिरोमणी अकाली दल के नेताओं से भी उसके रिश्ते बहुत अच्छे हैं।

भंगू और सहारा दोनो की रियल एस्टेट परियोजनाएं चल रही हैं। दोनो के होटल व्यवसाय भी हैं। रॉय के जहां न्यूयॉर्क और लंदन में होटल हैं (जिन्हे फिलहाल वे ज़मानत की रकम जुटाने के लिए बेचने की फिराक में हैं) वहीं भंगू ने भी ऑसेट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में होदल खरीदा है और ब्रिसबेन में काफी घरों का निर्माण कराया है। दोनो की रुचि खेल-कूद में भी है। रॉय एक लम्बे समय तक भारतीय क्रिकेट टीम के प्रायोजक रहे हैं, आईपीएल की पुणे टाम और फार्मूला वन टीम के मालिक हैं वहीं भंगू ने भी आईपील और कबड्डी टूर्नामेंट आयोजित किए हैं। पीएसीएल ने पिछले चार सालों में कबड्डी के प्रायोजन पर करीब 35 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

भंगू और रॉय दोनो का ही दख़ल मीडिया के क्षेत्र में भी है। रॉय के राष्ट्रीय सहारा अखबार और सहारा समय न्यूज़ चैनल से तो सभी वाकिफ हैं भंगू का पीएसीएल भी P7 टेलीविज़ न्यूज़ नेटवर्क परिचालित करता है। P7 का उपयोग कंपनी की स्कीमों और हितों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। इसके साथ ही पीएसीएल ने पर्यटन, निर्माण, शिक्षा और मसालों के क्षेत्र में भी अपने पैर पसार रखे हैं।

कहते हैं कि राजनीतिज्ञों से ज्यादा दोस्ती और गैरकानूनी धन आपको मुसीबत में डाल ही देता है। भंगू के साथ भी ऐसा ही हुआ। अपनी जवानी के दिनों में जो व्यक्ति अपने बड़े भाई नक्षत्तर सिंह के साथ, भारत-पाक सीमा के निकट स्थित बेला गांव में दूध बेचा करता था, वही भंगू आज पोंजी योजनाओं से इकट्ठा किए धन और राजनीतिज्ञों से निकटता को लेकर चर्चा में है। देश में इस समय छोटे बड़े स्तर पर न जाने कितने ही भंगू हैं जो पोंजी स्कीमें चला रहे हैं। कुछ लोग थोड़े समय स्कीम चला कर पैसा ले कर भाग जाते हैं और निवेशक ठगा रह जाता है। ऐसे न जाने कितने हैं जो न कभी सरकार या सेबी की नज़र में आए हैं और न आने की उम्मीद है।

वहीं कुछ, भंगू की तरह एक लंबे समय तक पोंजी स्कीमों को चलाने का माद्दा रखते हैं और अपने लाखों कमीशनखोर एजेंटों के माध्यम से ग्राहकों के दिलो-दिमाग में एक बिज़नेस मॉडल की छवि बना देते हैं कि वो भूमि की खरीद-बेच से पैसा कमा रहे हैं। तो असल में पीएसीएल कर क्या रही थी? बस यही कि अपने एजेंटों के माध्यम से नए निवेशकों से पैसा लेकर उन निवेशकों को देना जिनके निवेश की अवधि पूरी हो चुकी है। यही वह साधारण सा बिज़नेस मॉडल है जो सरकार की सतत निगरानी के अभाव में किसी रॉय या भंगू को असाधारण धन का मालिक बना देता है।

उल्लेखनीय है कि सेबी ने पिछले सप्ताह पीएसीएल को तीन माह के अन्दर 5.85 करोड़ निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश दिया था। अपने 92 पेज के आदेश में सेबी ने कहा कि निवेशित धन का यह आंकड़ा और अधिक हो सकता था यदि पीएसीएल ने 1 अप्रैल, 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच के धन इकट्ठा करने के आंकड़े भी उपलब्ध कराए होते। सेबी के अनुसार अब तक किसी भी गैर-कानूनी सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) में इतनी रकम और निवेशक सामने नहीं आए हैं जितना पीएसीएल द्वारा इकट्ठी की गई रकम और निवेशकों की संख्या है। पीएसीएल की रकम के सामने सुब्रत रॉय बेचाराश्री नज़र आते हैं जो इस साल मार्च से ऐसे ही मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते तिहाड़ में बंद हैं और अपनी ज़मानत की रकम जुटाने के लिए उन्हे अपनी विदेशों में खरीदी गई संपत्तियां तक बेचनी पड़ रही हैं। पीएसीएल का ये मामला नया भी नहीं है। करीब 16 साल पहले, 1998 में सेबी ने कंपनी के खिलाफ कार्यवाही की थी। तब मामला कानूनी दांव-पेचों में उलझ गया था। मामला बाद में अदालत पहुंचा और पिछली साल सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को निर्देश दिया कि कि वो जांच कर इस बात को सुनिश्चित करे कि पीएसीएल का धंधा सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) की श्रेणी में आता है या नहीं और तत्पश्चात कानून के अनुसार कार्यवाही करे।

मुंबई से दीपक कुमार की रिपोर्ट.


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पहले सीबीआई की रेड, फिर इनकम टैक्स की मार और अब सेबी का प्रहार. एक के बाद एक झटकों से चिटफंड कंपनी पीएसीएल का धंधा चरमराने की कगार पर आ गया है. निवेशकों में आशंका व्याप्त हो गई है. सेबी के ताजे आदेश के बाद पीएसीएल के नौ प्रमोटरों-डायरेक्टरों के जेल जाने की नौबत आ गई है. सेबी ने पीएसीएल के निर्मल सिंह भंगू, सुब्रत भट्टाचार्या, तरलोचन सिंह, गुरमीत सिंह, सुखदेव सिंह, गुरनाम सिंह, आनंद गुरवंत सिंह, उप्पल देविंदर कुमार और टाइगर जोगिंदर के खिलाफ फ्राड, चीटिंग आदि का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. सेबी के 92 पेजी आदेश पर आधारित एक संक्षिप्त खबर इस प्रकार है…

Capital market regulator Sebi has ordered PACL to return Rs 50,000cr to investors. The company has allegedly collected this money by running illegal Ponzi schemes. Sebi has ordered PACL Ltd to refund the money within three months. Sebi has also announced to initiate further proceedings against the company and its nine promoters and directors for fraudulent and unfair trade practices, as also for violation of Sebi’s CIS Regulations, among others, as per a direction from the Supreme Court.

As per Sebi’s 92-page order, the total amount mobilised by the company, “by its own admission” comes to a whopping Rs 49,100 crore and “this figure could have been even more if PACL would have provided the details of the funds mobilized during the period of April 1, 2012 to February 25, 2013”.

It is estimated that the company has collected the total money from around 5.85 crore, which includes the customers who said to have been allotted land and who are yet to be allotted the land. According to the regulator, this is the biggest ever amount and the largest number of investors found involved in a case of unauthorised ‘collective investment scheme’ by them.

It is to be noted that PACL and its top executives, including Nirmal Singh Bhangoo, are being probed by CBI. PACL claimed it was in the business of purchasing and developing land, adding the developed land was transferred to investors, who could sell it for gains. “It is difficult to believe a person in Uttar Pradesh will purchase 100-150 yards of agricultural land 2,000 km away. The lack of maintenance of proper records/data is a clear indication the activities of PACL are in the nature of a Ponzi scheme,” Sebi said.

“PACL Ltd and its promoters and directors, including Tarlochan Singh, Sukhdev Singh, Gurmeet Singh and Subrata Bhattacharya, shall wind up all the existing collective investment schemes of the company and refund the monies collected under its schemes with returns due to its investors, according to the terms of offer, within a period of three months,” it added.

सेबी के 92 पेज के संपूर्ण आदेश की कापी को डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें: Sebi PACL ORDER

मूल खबर…

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लगता है सहारा के बाद अब पीएसीएल का नंबर है. सुब्रत राय की तरह निर्मल सिंह भंगू पर भी जेल जाने की तलवार लटकने लगी है. भले ही भंगू के जेल जाने में अभी देर हो. पर इतना तो तय है कि सेबी की सक्रियता से चिटफंड के धंधेबाजों में दहशत का माहौल है. बाजार नियामक सेबी ने गैरकानूनी रूप से निवेशकों से धन जमा करने के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए पीएसीएल लिमिटेड की मनी पूलिंग स्कीम पर रोक लगा दी है. आकलन के मुताबिक करीब 50 हजार करोड़ की रकम जुटाने वाली इस स्कीम के निवेशकों को उनकी रकम तीन हफ्ते के भीतर लौटाने का सेबी ने कंपनी को दिया है.

Nirmal Singh Bhangoo

पीएसीएल की स्कीम पर रोक लगाने के साथ ही सेबी ने फर्जीवाडे़ और और नियमों का उल्लंघन करते हुए कारोबार के अनुचित तरीके अपनाने को लेकर कंपनी के नौ प्रोमोटरों और निदेशकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही है. सेबी ने अपने 92 पन्नों के आदेश में कहा है कि कंपनी की स्वीकारोक्तियों के आधार पर इस स्कीम के तहत जुटाई गई रकम 49,100 करोड़ रुपये बैठती है. सेबी के मुताबिक पीएसीएल की ओर से 1 अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच हस्तांतरित धनराशि संबंधी पूरे विवरण उपलब्ध कराए जाने पर स्कीम के जरिए जुटाई गई राशि कहीं अधिक बैठती. सेबी ने बताया कि पीएसीएल की इस स्कीम के जरिए करीब 5.85 करोड़ ग्राहकों से रकम जुटाई गई है. इसमें वह लोग भी शामिल हैं जिन्हें कथित रूप से रकम के एवज में जमीन दे दी गई है और वह भी, जो अभी जमीन मिलने के इंतजार में हैं. गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई निर्मल सिंह भंगू सहित पीएसीएल के शीर्ष प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है. पीएसीएल के प्रमोटर और निदेशक पर्ल ग्रुप और पीजीएफ ग्रुप के साथ भी जुडे़ रहे हैं. पर्ल ग्रुप की तरफ से पी7न्यूज नामक न्यूज चैनल भी संचालित किया जा रहा है.

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