बिहार-झारखण्ड भास्कर के एडिटोरियल हेड बने ओम गौड़

ओम गौड़ ‘भास्कर’ बिहार-झारखण्ड के स्टेट एडिटोरियल हेड बनाये गए  हैं. सम्पादकीय  सारे कार्य इनके निर्देशन में होंगे. 

गौड़ की लीडरशिप में ही झारखण्ड में भास्कर की लांचिंग हुई थी. रांची में इन्होंने काफी काम किया था. बाद में इनका तबादला जोधपुर कर दिया गया था. ओम गौड के पहले नवीन  जोशी को दोनों प्रान्तों का स्टेट हेड बनाया गया था. पटना इनका मुख्यालय  था लेकिन वे टिक नहीं पाए. भास्कर की प्रिंट लाइन में संपादक (बिहार-झारखण्ड) ओम गौड़ का नाम कल  से छपने लगा है. भागलपुर, गया और मुजफ्फरपुर में भास्कर की लांचिंग गौड़ के नेतृत्व में हुई  है. गौड़ की पोस्टिंग को दूसरी नजर से देखा जा रहा है. मसलन, कुछ लोगों की यहाँ से या तो छुट्टी होगी या बिहार झारखण्ड से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है.  

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दैनिक भास्कर ने भागलपुर के बाद गया से भी लांच किया एडिशन, अब मुजफ्फरपुर की बारी

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले दैनिक भास्कर बिहार के प्रमुख शहरों में विस्तार करो अभियान के तहत अब गया जिले से भी एडिशन लांच कर दिया है. इसके पहले भागलपुर से एडिशन शुरू किया था. दैनिक भास्कर का संचालन करने वाली कंपनी डीबी कॉर्प ने बिहार में अपने नेटवर्क का विस्तार का क्रम जारी रखा हुआ है. गया में दैनिक भास्कर का एडिशन लांच होने के बाद गया दैनिक भास्कर का 60वां एडिशन हो गया है.

सोमवार को एक समारोह में शहर के प्रबुद्ध नागरिक, राजनीतिज्ञ, साहित्यकार और प्रशासनिक अफसरों की मौजूदगी में अखबार का लोकार्पण किया गया है. पटना में दैनिक भास्कर को मिली सफलता के बाद गया बिहार में भास्कर का तीसरा पड़ाव है. 7 अगस्त को दैनिक भास्कर के मुजफ्फरपुर एडिशन का भी शुभारंभ हो जाएगा. चार एडिशन के बाद दैनिक भास्कर संपूर्ण बिहार का अखबार होगा.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया : श्रम आयुक्त ने होशंगाबाद भास्कर के संपादक की पहल ठुकराई

मजीठिया मामले पर होशंगाबाद दैनिक भास्कर प्रबंधन के तौर-तरीकों से नाराज श्रम आयुक्त ने संस्थान के कर्मचारियों की दिक्कतों के साथ सहानुभूति रखते हुए संपादक की सिफारिश को अनसुना करते हुए दोनो पक्षों में समझौता कराने से इनकार कर दिया है। श्रम आयुक्त का कहना है कि अब जो भी होगा, अदालत में होगा। मामला लेबर कोर्ट में चल रहा है।  

भास्कर होशंगाबाद के संपादक विनोद सिंह को एमडी ऑफिस से ग्रुप एडिटर का फोन आया कि होशंगाबाद के श्रम विभाग के ऑफिस जाकर श्रम आयुक्त से बात कर मामले को बाहर ही रफा दफ़ा कराया जाय। विनोद सिंह 4 अगस्त को होशंगाबाद श्रम आयुक्त से मिलने उनके ऑफिस पहुंचे। श्रम आयुक्त ने विनोद सिंह को समझौते से मना कर दिया। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

जयपुर भास्कर कर्मियों का श्रम विभाग पर दबाव बरकरार, लेबर इंस्पेक्टर की लीपापोती की कमिश्नर से शिकायत

सुप्रीम कोर्ट के आदेश अनुसार मजीठिया की जाँच में जयपुर लेबर इंस्पेक्टर द्वारा चल रही लीपा पोती और खानापूरी के संदर्भ में जयपुर भास्कर की टीम ने जॉइंट लेबर कमिश्नर को अपनी शिकायत देकर मैनजमेंट के खिलाफ अपना दबाव बरकरार रखा है। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि हर मीडिया कर्मी को उसका हिस्सा मिले। जो बुरा करे, उसके साथ बुरा हो और अच्छे के साथ बहुत अच्छा, ये भी ईश्वर का नियम है। शिकयत संलग्न है –

देखना है, श्रम मंत्रालय से इस संदर्भ में क्या पहल या कार्यवाही होती है वर्ना सुप्रीम कोर्ट में श्रम मंत्रालय को अपनी गलत रिपोर्ट पर फटकार जरूर लगेगी। देश के मीडिया हाउसों के ज्यादातर कर्मचारियों की उम्मीद सुप्रीम कोर्ट पर टीकी हुई है, क्योंकि सिस्टम इतना भ्रष्ट हो चुका है कि दूसरी जगह से न्याय पाना मुश्किल हो गया है।

आलोक के एफबी वाल से

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अखबार मालिकों और लेबर अफसरों में फिर एका, दोनों मिल कर करा रहे 20J के कागजों पर साइन (देखें प्रमाण)

इस देश में बड़े लोग अपने हित में एक से एक फंडे निकालते रहते हैं और गरीब आदमी न्याय के लिए टुकुर टुकुर ताकता रह जाता है. मीडियाकर्मियों को बेहतर सेलरी और भत्ता देने के लिए बनाई गई सरकारी मजीठिया वेज बोर्ड के रिपोर्ट को लागू करने के केंद्र सरकार के कानूनी और सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक आदेश को धता बताने के लिए मीडिया मालिकों ने झूठ दर झूठ बोलने का काम शुरू कर दिया है. किस तरह पैसे बचा लिए जाएं और अपने कर्मियों को कम दाम में काम करने को मजबूर किया जाता रहे, इसके लिए रोजाना ये अखबार मालिक नए तरीके निकाल रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने लेबर डिपार्टमेंट को जिम्मा दिया कि वह तीन महीने में जमीनी रिपोर्ट ले आए कि क्या वाकई सुप्रीम कोर्ट के आदेश को मीडिया मालिकों ने लागू नहीं किया है, तो लेबर आफिस और मीडिया मालिकों ने मिलकर एक नई तरकीब ढूंढ ली है. 20J के कागजों पर साइन कराकर हर मीडियाकर्मी से यह घोषित करवा दे रहे हैं कि वह मालिक के दिए जा रहे सेलरी से संतुष्ट है और इसी के तहत वह दस्तखत कर रहा है.

दैनिक भास्कर, जयपुर में कल लेबर इंस्पेक्टर की टीम गई. इस टीम ने एडिटर के साथ बैठकर चाय पकौड़े का आनंद लिया. प्रबन्धन ने एक-एक कर कर्मचारियों को बुलाकर 20 j के कागजों पर साइन कराना शुरू किया. लेबर इंस्पेक्टर ने उनको वेरीफाई किया. कल भास्कर राजस्थान के 200 कर्मचारियों ने साइन किए. यही प्रक्रिया दूसरी यूनिट में भी शुरू होने वाली है. नए सिरे से 20J पर साइन करवाने के बाद लेबर विभाग यही रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को देगा कि प्रत्येक इंप्लाई मजीठिया वेज बोर्ड पा चुका है या मजीठिया वेज बोर्ड से बेहतर सेलरी पाकर खुशी का लिखित इजहार कर चुका है. हालांकि कई ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने 20 J वाले कागज पर साइन नहीं किया है लेकिन भास्कर प्रबंधन इन्हें साइन किया हुआ घोषित कर रहा है और सहमति के लिस्ट में इन लोगों का नाम भी श्रम विभाग को भेज रखा है. ये वो 7 लोग हैं जिन्होंने 20J पर साइन नहीं किया- 1. ओम कटारा 2. राजीव सक्सेना 3. देवेन्द्र राठौड़ 4. मनोज गौतम 5. राजेश सक्सेना 6. गुरु दत्त शर्मा 7. हरी प्रसाद सुमन.

दैनिक भास्कर कोटा के करीब 48 कर्मियों ने श्रम विभाग में मुकदमा डाल रखा है, मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर. 24 जुलाई 2015 को स्थानीय लेबर कार्यालय में समझौता वार्ता थी. लेकिन भास्कर प्रबंधन की तरफ से कोई नहीं गया. इस दौरान दूसरे अख़बार के अन्य साथियों ने भी शिकायत लिखित में दी कि उन्हें अभी तक मजीठिया का कोई लाभ नहीं मिला है. दैनिक भास्कर प्रबंधन की शिकायत करने वालों की संख्या बढ़कर 48 हो गई जिसमें 10 साथी कर्मचारी वो हैं जिन्होंने दैनिक भास्कर को कभी अपना कीमती समय दिया लेकिन उनको उसके अनुरूप प्रतिफल नहीं मिला. इस सन्दर्भ में उन्होंने भी अपने एरियर के लिए भुगतान के लिए लिखित में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है. दूसरे अख़बारों से 7 लोगों ने मजीठिया के लिए कोटा लेबर आफिस में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया.

इस बीच, जार यानि जर्नलिस्ट आफ राजस्थान संगठन के कोटा ज़िला अध्यक्ष हरी वल्लभ मेघवाल ने मीडिया कर्मचारियों के साथ संयुक्त लेबर कमिश्नर से मुलाकात की और मजीठिया को लेकर बातचीत की. उन्होंने लिखित में एक शिकायती पत्र दिया जिसमें कहा गया है कि सर्वोच्च नयायालय के आदेशों का पालन नहीं करते हुए लेबर विभाग ने अभी तक किसी भी अख़बार या संस्थान में जाँच के लिए कोई टीम नहीं भेजा. अत: बिना जांच कराए जनसुनवाई निराधार है.

दैनिक भास्कर कोटा के दर्जनों कर्मियों द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड से संबंधित श्रम विभाग में की गई शिकायत के जवाब में भास्कर प्रबंधन ने जो जवाब प्रस्तुत किया है वह चौंकाने वाला है. भास्कर ने अपनी सफाई में लिखित दस्तावेज दिया कि सभी कर्मचारियों ने 20J पर साइन कर रखे हैं. लेकिन प्रबंधन ये नहीं बता रहा कि किसने कब साइन किया और कहां किया. इस बारे में भास्कर के दस्तावेज मौन हैं. ऐसा बताया जाता है कि Journalist act 1955 के अनुसार 20 J पर letter of notification के 3 महीने के अंदर अंदर साइन होना जरूरी है जबकि भास्कर ने सबसे साइन 31 मार्च 2014 को करवाये थे और भारत सरकार का मजेटिया गैजेट 11 NOV 2011 से लागू होता है.

भास्कर ने भेड़चाल चलते हुए सबका एक ही जवाब बनाया कि सभी कर्मचारियों ने 20J पर साइन कर रखे हैं. जबकि 46 में से 9 लोग ऐसे हैं जो मार्च 14 से पहले ही नौकरी छोड़ चुके हैं और उन्होंने 20J पर साइन भी नहीं किए हैं. लेबर इंस्पेक्टर ने जब सभी कर्मचारियों का वो साइन किया हुआ 20J फॉर्म माँगा तो भास्कर ने जयपुर लेबर आफिस मुख्यालय में जमा होने का हवाला दिया. भास्कर के लिखित जवाब को कर्मचारियों ने न्यायसंगत नहीं बताया और उसे अस्वीकार किया. भास्कर मैनजमेंट ने भी आश्वासन दिया कि जो कर्मचारी कार्य कर रहे हैं, जिन्होंने लेबर कार्यालय मे मजीठिया की शिकायत दी है, उनको यथावत कार्य करने दिया जायेगा, उनकी सेवा शर्तों में कोई परिवर्तन नहीं किया जायेगा.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भास्कर छोड़ मतिकांत, गुंजेश गए हिंदुस्तान, लोकेंद्र ने दबंग दुनिया को ठुकराया

बिहार में भास्कर की लांचिंग से हिंदुस्तान ने भास्कर रांची यूनिट के कई शीर्ष पत्रकारों को अपने खेमे में शामिल कर लिया है। आठ साल से भास्कर का साथ निभा रहे और भास्कर के फाउंडर मेंबर में से एक मतिकांत सिंह ने भास्कर को बाय-बाय कर दिया। मतिकांत सिंह भास्कर के उन चुने गिने पत्रकारों में हैं, जिन्होंने झारखंड में अखबार को मजबूती प्रदान की। झारखंड के सभी संस्करणों के लिए झारखंड और बिहार डेस्क इंचार्ज रहे।

माना जा रहा है कि वे अपना ट्रांसफर भागलपुर चाहते थे, लेकिन उन्हें मैनेजमेंट के द्वारा उचित रिस्पांश नहीं मिला। इससे वे नाराज चल  रहे थे। सूत्र बताते हैं कि वे दैनिक भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल के काफी करीबी थे। उधर गुंजेश कुमार ने भी भास्कर को इस्तीफा भेज दिया है। वे भी दैनिक हिंदुस्तान भागलपुर के साथ जुड़ गए हैं।  वहीं भास्कर के करीब और दस लोग हिंदुस्तान की संपर्क में हैं। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इन लोगों को हिंदुस्तान उस समय अपने यहां ज्वाइनिंग कराने की तैयारी में है, जब भास्कर, भागलपुर और मुजफ्फरपुर लांचिंग को फाइनल टच दे रहे होंगे।

वहीं यह खबर आ रही है कि भागलपुर भास्कर के संपादक अपने रिश्तेदारों को बुला बुलाकर अखबार में भर रहे हैं। कई ऐसे लोगों को हिंदुस्तान से भास्कर में शामिल किया गया, जो किसी काम के नहीं थे और मोटी रकम लेकर भास्कर की टीम में शामिल हुए। 

उधर, दबंग दुनिया के ग्रुप सर्क्युलेशन हेड लोकेंद्र जैन ने संस्थान से इस्तीफा दे दिया है। वह अहमदाबाद दिव्य भास्कर में ऑपरेशन हेड के पद पर 1 अगस्त से ज्वाइन करेंगे। उन्होंने ये इस्तीफा दबंग दुनिया के वैभव शर्मा एवं एचआर के तानाशाह रवैये के कारण दिया है। चेयरमैन किशोर वाधवानी भी इनकी तानाशाही को रोक नहीं पा रहे हैं। तानाशाही और अड़ियल रवैये के कारण आगे भी दबंग दुनिया से कई लोगों के इस्तीफे दिए जाने की संभावना है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Bhaskar obtaining illegal undertaking from employees, IFWJ writes to Delhi CM

Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) has condemned the sinister attempts of Dainik Bhasker management to obtain forcibly the undertaking from the employees that they do not want the Majithia Award. In an email to Delhi Chief Minister of Delhi Arvind Kejriwal, Labour Minister Gopal Rai and the Labour Commissioner, the Secretary General of the IFWJ Parmanand Pandey, has requested them to intervene to safeguard the interests of the employees. The IFWJ has also sent a protest letter to the Managing Director of the D.B. Corp Ramesh Chandra Agarwal desist from indulging into gross unfair labour practice of getting signatures from employees.

In his letter to the Chief Minister and the Labour Minister Shri Pandey has said that the management was not paying wages and allowances to the employees as per the Majithia Award despite the notification by the Government and the order of the Hon’ble Supreme Court of India. Thus, the employees of Dainik Bhaskar had no choice but to file many contempt petitions in the Supreme Court. On the last date of hearing, the Supreme Court ordered all the state governments to appoint Labour Inspectors to find out the status of the implementation of the Majithia Award. Needless to say, that a large number of the newspapers has not implemented the Award but the worst violators are Dainik Bhaskar, Dainik Jagran, Naidunia, Rajasthan Patrika, Prabhat Khabar, Aaj, Sahara, the Hindustan Times, and the Statesman etc.

To hoodwink the order of the Supreme Court the newspaper employers are adopting the coercive methods to secure the signatures of the employees on a paper stating that they are satisfied with the wages being given to them by their newspapers and therefore, they do not want Majithia Award. It is a ridiculous ruse of the owners, which can be seen through any body but the most distressing part is that the state governments are maintaining the policy of criminal detachment by overlooking the interests of the employees and thereby the supporting the proprietors. 

Surprisingly, Dainik Bhaskar management was trying to get the signature of the employees even till yesterday, at a time when the investigations about the status of the Majithia Award as order by the Supreme Court are in the full swing, which demonstrates that the owner of Dainik Bhaskar has fear for the law, the government or even of the court. 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

दिल्ली भास्कर की साजिश को कर्मचारियों ने ठोकर मारी, वकील को बैरंग लौटाया

दिल्ली : भास्कर की धोखेबाजी को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उसके वकील सचिन गुप्ता ने गत दिनो एक नायाब चाल चली। उसने एक ऐसे पेपर मीडियाकर्मियों से हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया, जिसमें कर्मचारियों को उद्धृत किया गया था कि उन्हें मजीठिया वेतनमान मिल चुका है। षड्यंत्र की भनक लगते ही सभी कर्मचारियों ने एकजुट होकर वकील को खरी-खोटी सुनाते हुए दफ्तर से बैरंग लौटा दिया। 

सूत्रों के मुताबिक गत दिवस भास्कर के वकील सचिन गुप्ता दबे पांव सुनियोजित तरीके से अखबार के दफ्तर पहुंचे। उनके पास कुछ ऐसे पेपर थे, जिन पर भास्कर कर्मी यदि गुप्ता की योजना के मुताबिक साइन कर देते तो कोर्ट में दिखाने के लिए ये पेपर एक बड़ा हथियार बन जाते। ये हस्ताक्षरित पेपर अदालत में इस बात की चुगली करने में कामयाब हो जाते कि भास्कर कर्मियों को तो मजीठिया वेतनमान मिल चुका है। देखिए, इन पेपरों पर उन्होंने इसकी हामी भी भर दी है, यानी उन्होंने मजीठिया वेतनमान मिल जाने की आत्मस्वीकृति भी जता दी है। 

बताया जाता है कि वकील गुप्ता की ओर से प्रस्तुत हथकंडे वाले इस पेपर पर सबसे पहले दिल्ली भास्कर के संपादक ने हस्ताक्षर किया, ताकि इसके बाद अन्य कर्मी खुद दबाव में, अपने सीनियर का लिहाज करते हुए फटाफट हस्ताक्षर कर देंगे और फिर तो पक्का साजिश परवान चढ़ जाएगी। साजिश करने वालों की समझ का स्तर तो देखिए। पता नहीं वैसे कैसे मान बैठे कि पढ़े-लिखे कर्मचारी ऐसे आत्मघात के लिए तैयार हो जाएंगे। संपादक ने तो साइन कर दिया लेकिन प्रबंधन की ये नादानी भरी कोशिश उस समय फुस्स हो गई, जब कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रस्ताव टके से जवाब के साथ ठुकरा दिया। 

कर्मचारियों का कहना था कि वे जिंदा मक्खी कभी निगल सकते हैं। प्रबंधन चाहे जितने तरह के दुष्प्रयास कर डाले। वे निष्कासन, न तबादलों के उत्पीड़न से अब डरने वाले हैं। जब मजीठिया वेतनमान मिला ही नहीं, तो वे इन पेपरों पर साइन क्यों करें? बताया जाता है कि वकील और संपादक ने कर्मचारियों को नौकरी ले लेने की धमकी तक दे डाली। आखिरकार मुंह लटकाकर वकील को अपनी टीम के साथ बैरंग लौटना पड़ा। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भागलपुर में भास्कर की आहट से जागरण, हिंदुस्तान और प्रभात खबर में खलबली

भागलपुर में दैनिक भास्कर के आगमन की आहट ने पहले से जमे तीनों मीडिया हाउसों हिंदुस्तान, दैनिक जागरण और प्रभात खबर में उथल पुथल मचा दी है. तीनों अखबार अपने अपने तरीके से भास्कर का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं. एक बात तो तय है कि भास्कर के बाजार में आ जाने के बाद पहले से जमे एक अखबार की लुटिया डूब सकती है. 

दैनिक जागरण पूरी तैयारी कर चुका है. भागलपुर शहर में दैनिक जागरण नंबर वन भी है. बेहतर अभियान के कारण भास्कर के बाजार में आने पर दैनिक जागरण पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ने वाला है. अब बात हिंदुस्तान की तो शहर में इस अखबार की जबरदस्त पैठ है. भास्कर में चले जाने के डर से कई क्रीम पत्रकारों की सैलरी को बढ़ा दिया गया है. इक्के दुक्के पत्रकारों के भास्कर में चले जाने के बाद कोई खास प्रभाव भी नहीं है. बात प्रभात खबर की करें तो यह अखबार भास्कर के संभावित हमले को लेकर कतई तैयार नहीं है. इसका कारण है कर्मियों की असंतुष्टि. 

भास्कर ने पहले ही हमले में प्रभात खबर के क्राईम किले को ध्वस्त कर चुका है. अगर दूसरा तीसरा हमला हुआ तो प्रभात खबर की स्थति दयनीय होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. भास्कर के बाजार में आने के बाद उसकी सीधी टक्कर प्रभात खबर से ही होनी है. प्रभात के पाठक सलाना बुकिंग प्रक्रिया से बनते हैं तो भास्कर ने भी यही रास्ता अख्तियार किया है. ग्रामीण इलाकों में प्रभात खबर की प्रसार संख्या काफी कम है. भास्कर का हमला ग्रामीण इलाके से ही शुरू होने की संभावना है. 

दूसरी तरफ भास्कर की टीम और उसका नेतृत्व फिलहाल अनुभवी नहीं है. हिंदुस्तान भागलपुर में समाचार संपादक रहे राजेश रंजन को भागलपुर भास्कर का संपादक बनाया गया है. स्वभाव से सख्त भास्कर के संपादक पत्रकारों के चयन में भी चमचों की बात मान रहे हैं. कुछ वेसै लोग कर्ता धर्ता बनाये गये जो स्वभाव से संकुचित हैं. इसका फायदा दूसरे अखबारों यथा प्रभात खबर को मिल सकता है. 

प्रभात खबर के आंतरिक सूत्र बताते हैं कि अखबार अपने पुराने स्वभाव के अनुसार भोज के समय कोढ़रा रोपने का काम करेगा. दूसरी तरफ जागरण व हिंदुस्तान भास्कर के संभावित हमले के लिये तैयार हैं. बात पाठकों की करें तो पाठक फिलहाल चौथे अखबार के लिये कतई तैयार नहीं हैं. अभी तो पाठक धीरे धीरे प्रभात खबर को ही एडजेस्ट कर रहे थे. पाठकों की इच्छा के विपरीत चौथे अखबार की लांचिंग किसी एक अखबार के लिये खतरनाक जरूर हो सकती है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

गोरखपुर आइनेक्स्ट में एक और विकेट गिरा

गोरखपुर आइनेक्स्ट में सब एडिटर रहे रासेख कुमार ने दैनिक भास्कर रेवाड़ी (हरियाणा) ज्वॉइन कर लिया है। इससे पहले सीनियर सब एडिटर रवि प्रकाश ने भी एडिटोरियल इंचार्ज अश्विनी पांडेय की प्रताड़ना से आजिज आकर संस्थान छोड़ दिया था। बताते हैं कि राकेश कुमार के जाने की वजह भी पांडेय का रवैया रहा है। उन्हें नौकरी से अलग किया जाता, उससे पहले ही वह निकल लिए। इन दिनो डेस्क पर काम करने वाले कर्मचारियों की कमी से आइनेक्स्ट गोरखपुर में मुश्किल बढ़ गई है। आने वाले दिनों में ऐसी संभावना है कि कई और कर्मचारी संस्थान को नमस्ते करने वाले हैं। लखनऊ में बैठे अधिकारियों के भी हाथपांव फूलने लगे हैं। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पुरोहितवार के भास्कर ज्वॉइन करते ही देवघर प्रभात खबर में खलबली

प्रभात खबर देवघर में काम करने वाले राकेश पुरोहितवार के भास्कर भागलपुर ज्वॉइन करने से देवघर प्रभात खबर में अंदरूनी खुशी का माहौल है। कम वेतन में देवघर में 8-10 सालों से काम कर रहे कर्मचारियों को उम्मीद है कि अब भागलपुर में उनकी सेटिंग हो जाएगी। पहले भी इस बात को इस साईट पर डाला जा चुका था कि देवघर निवासी भागलपुर में कार्यरत एक पत्रकार की जबरदस्त लाबिंग से प्रभात खबर सकते में। अब नाम खुलकर सामने आ गया। 

मालूम हो कि देवघर प्रभात खबर में एक गुट का पिछले 10 साल से कब्जा है। उदय खवाड़े जैसे सीनियर सख्स ने यहां काम करने को मना कर दिया। प्रबंधन के आफर को उन्होंने यह कहते ठुकरा दिया था कि दो आदमी को यहां से हटाना होगा, लेकिन मैनेजमेंट को एक भाजपा के बड़े नेता ने फोन करके बदलाव करने पर विज्ञापन नहीं देने की बात कहके रूकवा दिया। उसी कड़ी में राकेश भी थे। जबरन मैनेजमैंट ने उन्हें देवघर से हटाने का फरमान सुना दिया क्योंकि वह जमा गुट राकेश पर भारी नहीं पड़ रहा था। 

बताते चलें कि राकेश पुरोहितवार ने देवघर प्रभात खबर से ही अपना करियर शुरू किया था और यूनिट बनने के बाद उक्त लाबी ने उन्हें यह से चलता कर दिया। फिर प्रधान संपादक के हस्तक्षेप से राकेश वापस आए, लेकिन यहां जमी लाबी ने फिर इन्हें यहां से हटा दिया। ऐसे में जब राकेश भास्कर के चीफ रिपोर्टर भागलपुर में बनाए गये है तो प्रभात खबर में कुछ लोगों को काफी खुशी व कुछ को दुख है। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भास्कर के बूढ़े एडिटर अपने इंतजाम में व्यस्त, रिपोर्टर मस्त, काम-काज ध्वस्त

दैनिक भास्कर के अजमेर संस्करण में पिछले कई महीनों से पत्रकारों की मौज हो रही है। इसका कारण बुजुर्ग संपादक रमेश अग्रवाल का दूसरे कामों में व्यस्त होना है। संपादक अग्रवाल ऐसे तो करीब दो साल पहले ही रिटायर हो चुके हैं, मगर वो अब एक्सटेंशन पर हैं। 

 

मूल रूप से अजमेर के ही निवासी अग्रवाल का ध्यान अब अपने संपादन के बजाय अपने दूसरे धंधों पर है। वो अपने रिटायर्डमेंट के बाद के जीवन को खुशहाल बनाने में लगे हैं। उन्होंने अजयमेरु प्रेस क्लब को वापस जिंदा किया है। वे स्वयं क्लब के अध्यक्ष बन गए हैं। वे रोजाना लगभग तीन घंटे का समय प्रेस क्लब को देते हैं और इस दौरान शहर के विभिन्न वर्गों के लोग वहां जुटते हैं। अग्रवाल ने सालों पहले अजमेर के पंचशील नगर इलाके में जमीन खरीदी थी। अब उस पर अपार्टमेंट बनाने का काम शुरू करवा दिया है। 

कुल मिलाकर उनका ध्यान अखबारी कामकाज पर बिल्कुल नहीं है। इसका फायदा चीफ रिपोर्टर सुरेश कासलीवाल और दूसरे रिपोर्टर जमकर उठा रहे हैं। कासलीवाल अजमेर दबंग भाजपा नेता भंवरसिंह पलाड़ा सहित कई असफरों के फेवर में जुटे हैं। आए दिन इनके स्तुतिगान छापते रहते हैं। पलाड़ा की सह पर उन्होंने अजमेर की दलित जिला प्रमुख के खिलाफ भी भास्कर में अभियान चला रखा है। खास बात यह है कि कासलीवाल की ये हरकतें कोई नई नहीं हैं। वे जब ब्यावर में भास्कर के ब्यूरो चीफ थे तो वहां तत्कालीन भाजपा विधायक देवीशंकर भूतड़ा के पक्षधर थे। उनके इशारे पर ही सारी खबरें लिखते थे। उनकी इन हरकतों की शिकायत तत्कालीन संपादक ने ब्यावर से हटा दिया था, मगर अब रमेश अग्रवाल के कार्यकाल में उनके अच्छे दिन वापस लौट आए हैं।  अग्रवाल के दूसरे कामों बिजी होने और अखबार पर ध्यान नहीं होने कासलीवाल और उनके चेलों को खुलकर खाने और खेलने का मौका मिल रहा है। बताते हैं कि कासलीवाल संपादक की अनदेखी का फायदा उठाते हुए डेस्क को भी अपने शिकंजें में ले लिया है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया : चंडीगढ़ भास्कर श्रम विभाग को चकमा देने की तैयारी में

प्रिंट मीडिया मंडली में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा किसकी है? यह सवाल इस मंडली से संबद्ध किसी भी सदस्य-कर्मचारी-कामगार  या फिर किसी बड़े ओहदेदार के समक्ष उछाल दीजिए तो वह छूटते ही बोल पड़ेगा- श्रम विभाग। जी हां, श्रम विभाग और उसके अफसर ही आजकल इस मंडली की चर्चा के केंद्र बिंदु हैं। यह मंडली छोटे-बड़े सभी तबके की अलग-अलग है। पत्रकार-गैर पत्रकार कर्मचारियों की मंडली श्रम महकमे की बाट इसलिए जोह रही है ताकि मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों के मद्देनजर रिपोर्ट वह उनके हक में सुप्रीम कोर्ट में पेश करे। मीडिया मालिकों-मैनेजमेंट की मंडली इस घात में है कि श्रम विभाग ऐसी रिपोर्ट सर्वोच्च अदालत के समक्ष रखे जिसमें दर्ज हो कि मैनेजमेंट ने कर्मचारियों की हर सुख-सुविधा का ख्याल हमेशा रखा है। उसे इतना वेतन देता है-दे रहा है-मिलता रहा है कि कर्मचारी निश्चिंत भाव से बेफिक्र होकर अपने आवंटित काम को अंजाम दे सकें और मैनेजमेंट से कोई गिला शिकवा न करें। 

इस पुनीत काम-क्रियाकलाप में सबसे ज्यादा मशगूल दैनिक भास्कर मालिकान-मैनेजमेंट है। वह इसके लिए हर संभव तैयारी कर रहा है, या तैयारी कर ली है। इसके लिए उसने कर्मचारियों से साल भर पहले ही एक उस फार्म पर साइन करा लिए थे जिसमेें साफ तौर पर लिखा था कि भास्कर अपने कर्मचारियों को संतुष्ट-निश्चिंत-बेफिक्र रहने लायक सेलरी देता है। उसे मजीठिया वेज बोर्ड संस्तुतियों के हिसाब से सेलरी-सुविधा की कोई जरूरत-अपेक्षा-दरकार नहीं है। इस फार्म पर ज्यादातर कर्मचारियों ने बेमन से ही सही, साइन कर दिए थे। लेकिन इन फार्मों पर तारीख डालने से रोक दिया गया था। मतलब ये कि इन फार्मों पर तारीख अपनी मर्जी से डालने को मैनेजमेंट स्वतंत्र था, या कि है। 

इन फार्मों पर दस्तखत कराने की जो प्रक्रिया बरती गई वह खुली जोर-जबर्दस्ती, तानाशाही वाली थी। कर्मचारियों ने नौकरी बचाने-बचे रहने-बनाए रखने की फिक्र में दस्तखत कर दिए थे। अब इन्हीं फार्मों को फाइलों में सजाकर मैनेजमेंट श्रम विभाग को सौंपने को तैयार बैठा है। यानी जब भी श्रम विभाग का कोई अफसर आ धमकेगा तो मैनेजमेंट इन्हीं फार्मों का पुलिंदा उन्हें थमा देगा और अपनी जिम्मेदारी-उत्तरदायित्व से छुटकारा पा लेगा। 

इसकी सबसे तगड़ी तैयारी दैनिक भास्कर चंडीगढ़ के मानव संसाधन (एचआर) विभाग ने कर रखी है। इस विभाग की मुखिया मोहतरमा रुपिंदर कौर इस काम में इतनी मशरूफ हैं कि पूछो मत! उन्होंने इसके लिए कर्मचारियों की नाक में दम कर रखा है। एचआर विभाग का हर कर्मचारी इस काम के लिए गाहे-बगाहे उनकी झिडक़ी सुनने के लिए खुद को तैयार किए बैठा है। लेकिन विभाग के चंद मैनेजरनुमा घाघ प्राणी इस गतिविधि, अफरा-तफरी पर मंद-मंद मुस्कराते हुए आनंद लेने में भी मशगूल हैं। 

बता दें कि चंडीगढ़ श्रम विभाग का कुछ अरसा पहले जब नोटिस आया था तो उसे रिसीव नहीं किया गया था। सुप्रीम कोर्ट का आदेश जारी होने के बाद ही दैनिक भास्कर चंडीगढ़ के रिसेप्शन काउंटर को हिदायत दे दी गई थी कि ऐसा कोई भी नोटिस यदि श्रम विभाग से आता है तो उसे रिसीव न किया जाए। सवाल यह है कि जब नोटिस रिसीव ही नहीं किया गया है तो श्रम विभाग को जवाब देने की इतनी तैयारी क्यों की जा रही है? श्रम विभाग को जवाब सौंपने की इतनी बेताबी क्यों है? इसका जवाब है श्रम विभाग की सक्रियता। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र शासित राज्यों के प्रशासकों के सलाहकारों के माध्यम से लेबर कमिश्नरों को इस काम में लगाया हुआ कि तीन महीने की अवधि के अंदर उसे रिपोर्ट भेजें कि किन अखबारों में मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुति लागू हुई है और किन में नहीं। इस बारे में मैनेजमेंट का क्या रवैया है और कर्मचारियों की स्थिति-दशा क्या है। 

चंडीगढ़ लेबर कमिश्नर अपने असिस्टेंट लेबर कमिश्नर के जरिए इस काम में पूरी तरह जुटे हुए हैं। एएलसी (असिस्टेंट लेबर कमिश्नर) स्वयं लेबर इंस्पेक्टरों के साथ सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पूरा करने में जुटे हुए हैं। इसी के तहत सभी अखबारों को नोटिस भी सर्व कर दिए गए हैं। एक निजी बातचीत में उन्होंने भी माना है कि दैनिक भास्कर कर्मचारियों को अन्य अखबारों की तुलना में बहुत कम सेलरी मिलती है। मैनेजमेंट उनसे बेहिसाब, अनियत समय तक काम लेता है और बदले में इतना भी नहीं देता कि कर्मचारी नींद भर सो सकें। एएलसी तो ऐसे पीडि़त, सताए-दबाए गए कर्मचारियों से मिलने के लिए तैयार बैठे हैं जो उनसे मिलें और अपनी समस्याओं-दिक्कतों से उन्हें अवगत कराएं। 

एएलसी ने चंडीगढ़ से प्रकाशित होने वाले सभी अखबारों के कर्मचारियों का आह्वान कर रखा है कि वे उनसे मिलें और अपनी सेलरी के ब्योरे के साथ अपनी समस्याओं का लेखा-जोखा भी उन्हें सौंपें। अब जिम्मेदारी तो प्रिंट मीडिया कर्मचारी मंडली की बनती है कि वह एएलसी या श्रमायुक्त के ऑफिस में नमूदार हो, पहुंचे और अपनी तकलीफों का पुलिंदा वहां प्रस्तुत करे। या फिर अगर कोई लेबर अफसर अखबार के ऑफिस में पहुंचता है तो उसके सामने अपना दर्द लिखित-जुबानी बयां करे। वे, खासकर भास्कर के कर्मचारी बताएं कि भास्कर मैनेजमेंट ने जिन फार्मों पर उनसे साइन कराए हैं वे उन्होंने स्वेच्छा से नहीं बल्कि मजबूरी में किए हैं। उनसे साइन जबरिया कराए गए हैं। वैसे भी, ऐसे किसी भी फार्म पर साइन कराना वैध नहीं है। ऐसा कराना अनैतिक है ही अवैध-गैर कानूनी है। वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट एवं वेजेज एक्ट में साफ लिखा है कि मैनेजमेंट की यह करतूत-कृत्य पूरी तरह अवैध है। कर्मचारियों को इस तथ्य से बा-खबर होकर श्रम अफसरों के सामने खुलकर बोलने की जरूरत है तभी उन्हें मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ मिलेगा। 

एएलसी मानते हैं कि वेज बोर्ड के फायदे पाने के लिए कर्मचारियों को बोलना तो पड़ेगा ही। हां, यह जरूर है कि वे मनबढ़, खूंखार दुर्दांत, ढींठ, बदमाश मालिकों की तरह कई बार खुलकर सामने नहीं आ सकते, लेकिन बच-बचाकर, छिप-छिपाकर अपनी बात, अपनी समस्या, अपना संकट, अपनी पीड़ा श्रम अधिकारियों तक तो पहुंचा सकते हैं। फिर उसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा दिया जाएगा। एएलसी बातचीत में मेरी ओर इशारा करते हुए कहते हैं– सब लोग आप जैसे नहीं हो सकते। इस रीजन में आप अकेले हैं जिन्होंने दैनिक भास्कर चेयरमैन पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का केस कर रखा है। इसके अलावा इंडियन एक्सप्रेस चंडीगढ़ कर्मचारी यूनियन ही है जिसने केस कर रखा है। 

  पिछले दिनों हरियाणा में कई स्थानों पर लेबर कमिश्नर की अगुआई में श्रम अफसरों ने दैनिक भास्कर कार्यालयों में पहुंचकर कर्मचारियों एवं मैनेजमेंट के लोगों से मजीठिया क्रियान्वयन के बारे में जानकारी मांगी। ऐसे में मैनेजमेंट के बंदों ने वही कर्मचारियों के साइन वाले फार्म पेश कर दिए। लेकिन इन फार्मों को लेबर अफसरों ने अवैध, गैर कानूनी करार दिया। ऐसा करके मैनेजमेंट सरेआम दिखा रही है कि वह मजीठिया नहीं देगी। वह यह दिखा रही है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश उसके ठेंगे पर। इस स्थिति में कर्मचारियों को कानूनी लड़ाई खुलकर लडऩी होगी तभी उन्हें अपना हक मिलने के आसार बनेंगे। साथ ही मालिकों-मैनेजमेंट को उनके किए की सजा भी दिलवा पाएंगे। इसलिए कर्मचारी-कामगार मंडली खुलकर, एकजुट होकर बोलो और पूरी ताकत से अपने हक के लिए लड़ो। 

लेखक-पत्रकार भूपेंद्र प्रतिबद्ध से संपर्क : bhupendra1001@gmail.com, 9417556066

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

जानिए, कैसे ब्लैकमेल करते हैं ये दैनिक भास्कर वाले… (सुनें टेप) …रिपोर्टर ने संपादक के लिए प्राचार्य से मांगी LED

दैनिक भास्कर होशंगाबाद के सीनियर रिपोर्टर अभिषेक श्रोती ने यूनिट के संपादक अतुल गुप्ता के लिए रिश्वत में 70 हज़ार रुपये की LED मांगी है. रिपोर्टर ने यह LED ज़िले के शासकीय स्कूल पिपरिया के प्राचार्य से आगे खबर नहीं छापने और अभी तक छापी गई खबर में प्राचार्य सरयाम के विरुद हुई कार्रवाई को कलेक्टेर व जिला शिक्षा अधिकारी से फाड़कर फिकवाने के लिये मांगी है. यह खुलासा प्राचार्य द्वारा की गयी रिकॉर्डिंग में सामने आया है. रिपोर्टर द्वारा रिश्वत मांगने के बाद प्राचार्य ने इस रिकॉर्डिंग को सार्वजानिक की है.

प्राचार्य और रिपोर्टर की मोबाइल पर हुई करीब 12 मिनट की बातों में रिपोर्टर स्पस्ट शब्दों में प्राचार्य से कह रहा है कि मैंने आपकी खबर को 3 दिन से रुकवाकर रखा हुआ है. मैंने सामने वाले (संपादक) से कमिटमेंट कर रखा है और आप इसे पूरा नहीं कर रहे हो. आप अगर कमिटमेंट पूरा नहीं करोगे तो आपकी रिलीविंग कभी नही होंगी. साथ ही आपकी जाँच को कलेक्टर और डीईओ से बोलकर आप पर तत्काल कार्यवाही करवा दूंगा. वहीं बेबस प्राचार्य अपनी बीमारी का हवाला देकर रिपोर्टर से टाइम मांग रहा है. 

प्राचार्य ने इसकी शिकायत भास्कर प्रबंधन, कलेक्टर, स्थानीय मीडिया, डीईओ से भी की है लेकिन संपादक और रिपोर्टर पर कार्यवाही करने की बजाये सब के सब मामले को दबाने में लगे हुए हैं. इस मामले में दैनिक भास्कर होशंगाबाद के लोग यह कहते फिर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा उपर से फोन ही आयेगा, इससे आगे कुछ नही होगा क्योंकि उगाही का माल तो मालिकों तक भी जाता है. साथ ही भास्कर वालों की पूरी कोशिश है कि सारे मामले को रफा दफा कर दिया जाए.

भास्कर को पलीता लगाने की सोच चुके रिपोर्टर और संपादक की पहले भी कई बार भ्रष्टाचार की शिकायत हुई है लेकिन प्रबन्धन ने सभी पर पर्दा डाल दिया है. कुछ महीने पहले भी शहर के कुछ स्थानीय लोगों ने लिखित में भास्कर प्रबन्धन को शिकायत कर बताया था कि कैसे अखबार से जुड़े लोग पैसे लेकर बड़ी बड़ी खबरों को रोक देता है. नगरपालिका से 2 लाख रुपये महीना बंधा हुआ है जिसका सबूत भी लोगों ने दिया था. इसके अलावा एक खबर रुकवाने के एवज में इनकी कार के चारों टॉयर बदलने की भी खूब चर्चा थी. लेकिन प्रबन्धन ने कार्यवाही नहीं की.

भास्कर की नेशनल HR हेड रचना कामरा ने भास्कर के सभी कर्मचारियों को पर्सनल पोर्टल पर एक नोटिस जारी कर कहा था कि यदि कोई भी रिश्वत लेते पकड़ा जाता है या कंपनी की पालिसी के खिलाफ कोई भी काम करता है तो उसे तत्काल कंपनी से हटा दिया जायेगा. लेकिन होशंगाबाद यूनिट में ऐसा होता दिख नहीं रहा है. यहाँ के संपादक के इशारों पर सारे रिपोर्टर सभी विभाग की खबरों में जमकर तोड़ी करते हैं. ऐसा लगता है कि कंपनी के डायरेक्टरों ने संपादकों और रिपोर्टरों को जमकर उगाही की छूट दे रखी है और उसका हिस्सा मालिकों निदेशकों तक भी जाता है. बहरहाल अब देखना ये है कि प्राचार्य की यह रिश्वत वाली रिकॉर्डिंग कार्यवाही के लिए पर्याप्त सबूत के तौर पर भास्कर प्रबंधन मानता है या नहीं.

ये है टेप…

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

अगर आप उपरोक्त टेप न सुन पा रहे हों तो इसे डाउनलोड करने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं: Bhaskar Audio


इन्हें भी पढ़िए-सुनिए…

अगर इस नए चैनल से जुड़ना चाहते हैं तो ये-ये काम करने होंगे (सुनें टेप)

xxx

सुदर्शन न्यूज में काम कर रही एक लड़की ने पूरे ऑफिस के सामने महेश का भांडा फोड़ दिया (सुनें टेप)

xxx

आपको मैनेज किया था, फिर कैसे छप गई आपके अखबार में खबर (सुनें टेप)

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेतनमान पर उपायुक्त ने औरंगाबाद भास्कर से जवाब तलब किया

औरंगाबाद दैनिक भास्कर के मराठी दैनिक अखबार दिव्य मराठी को कामगार उप आयुक्त कार्यालय औरंगाबाद विभाग ने मजीठिया के संदर्भ में 19 जून 2015 को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि आप ने मजीठिया वेतनमान अपने यहां लागू किया है नहीं।

इस संबंध में वस्तुस्थिति रिपोर्ट आयुक्त कार्यालय को तुरंत उपलब्ध कराएं। अखबार कर्मियों का कहना है, अब देखना ये है कि श्रम विभाग अपने काम में कितना सही साबित होता है और प्रबंधन इस नोटिस पर क्या कदम उठाता है।

नीचे प्रस्तुत है कामगार उप आयुक्त कार्यालय औरंगाबाद से जारी नोटिस –

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भास्कर होशंगाबाद के पाँच कर्मचारियों को वापस काम पर रखने के सख्त आदेश

दैनिक भास्कर होशंगाबाद के कर्मचारियों द्वारा गुजरात हाई कोर्ट में मजीठिया का केस लगाने के बाद भास्कर प्रबंधन ने 25 में से 5 कर्मचारियों का अलग-अलग राज्यो में ट्रांसफर कर दिया था। साथ ही वहां ज्वॉइन कराने को लेकर प्रबंधन लगातार दबाव बना रहा था । कर्मचारियों ने ट्रांसफर को चुनौती दे दी। श्रम आयुक्त ने सुनवाई करते हुए भास्कर प्रबंधन को आदेश दिया कि आप कर्मचारियों को परेशान न करें। जब तक कोर्ट से केस का फ़ैसला नहीं आ जाता, ट्रान्सफर किये गए सभी 5 कर्मचारियों से पहले की तरह होशंगाबाद में काम लें और उनका रुका हुआ वेतन दें। 

श्रम विभाग का भास्कर प्रबंधन को प्रेषित आदेश पत्र की छाया प्रति

पूरे मामले में अभी तक अहमदाबाद हाई कोर्ट चार बार सुनवाई कर चुका है। अगली तारीख 23 जून तय की है। इधर, प्रबंधन की प्रताड़ना से तंग 25 कर्मचरियों ने ट्रान्सफर को  संभागीय श्रम आयुक्त होशंगाबाद में चुनैती दे रखी है। इस मामले में इसी माह 3 जून को तीसरी पेशी हुई थी। उसमें यूनिट हेड सुरेन्द्र राय, एच आर हेड अविनाश कोठारी और संपादक अतुल गुप्ता प्रबंधन की ओर से पहुंचे। आयुक्त श्रीमती नीलम सिंह ने उनको जमकर लताड़ा और कहा की भास्कर आम लोगों के मामले को उठाता है और उन्हें इंसाफ दिलाता है लेकिन यहाँ भास्कर के कर्मचारी प्रबधंन से इतने परेशान हैं, उन्हें उनका अधिकार नहीं दिया जा रहा है। नौकरी या अपना हक मांगने पर प्रताड़ित करना ठीक नहीं है। श्रम आयुक्त श्रीमती सिंह ने 9 जून की शाम को एक आदेश जारी किया, जिसमें भास्कर प्रबंधन को  साफ साफ निर्देशित किया गया है –

”मैं सहायक संभागीय श्रम आयुक्त की हैसियत से आपको कहती हूँ कि ट्रान्सफर किये गए अजय गोस्वामी, केशव आंनद दुबे, हरिओम शिवहरे, अजय लोखंडे, प्रकाश मालवीय परेशान हैं। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, पांचों के ट्रान्सफर पर पुनर्विचार करें, उन्हें पहले की तरह काम करने दें ताकि उनकी आर्थिक, मानसिक स्थिति ठीक हो सके। ”

इस आदेश की कॉपी मिलते ही प्रबधंन के होश उड़ गए हैं। पहले तो प्रबंधन ने आदेश की कॉफी लेने से मना कर दिया। फिर बाद में जब श्रम विभाग के कर्मचारी ने समझाया, तब कहीं जाकर  लिया। श्रम आयुक्त के यहाँ से ऐसा कोई आदेश न निकले, इसके लिए भास्कर ने अपने संपादक और यूनिट हेड को बार-बार श्रम विभाग के दफ्तर के चक्कर लगवाए। श्रम आयुक्त को मनाने के हर संभव प्रयास किये लेकिन सभी प्रयास फेल हो गए। 

वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नोटिस भी होशंगाबाद भास्कर प्रबंधन को मिल गया है। उसमें प्रबंधन से पूछा गया है कि सभी कर्मचारियों को मजीठिया वेतन बोर्ड का लाभ दिया है या नहीं, कितने कर्मचारी हैं, एरियर की राशि कब से दी है, और अगर नहीं दिया है तो क्यों नहीं दिया। यह जवाब श्रम विभाग ने तीन दिन के अंदर देने को कहा है। इससे भास्कर प्रबधंन में खलबली मची हुई है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

राजस्थान में अब बढ़ेंगी भास्कर और पत्रिका की मुश्किलें

राजस्थान में दैनिक भास्कर व राजस्थान पत्रिका की मुश्किलें अब बढऩे वाली हैं। अभी तक तो ये दोनों अखबार श्रम विभाग के इंस्पेक्टरों को कोई तव्वजो नहीं देते थे। कागजात मांगने पर आनाकानी करते थे। संपादकों के जरिए सीएमओ से फोन करवा कर इंस्पेक्टरों पर धौंस जमाया करते थे। अब श्रम विभाग का यही इंस्पेक्टर इनकी मुश्किलें बढ़ाने वाला है।

राजस्थान में सर्वोच्च न्यायालय के मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने की जांच के आदेश की पालना में श्रमजीवी पत्रकार एवं अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा की शर्ते) और प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम 1955 की धारा 17 (ख) की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए संपूर्ण राज्य में निरीक्षकों की नियुक्ति की गई है। इसके बाद श्रम विभाग के अधिकारी राज्य के विभिन्न समाचार पत्रों विशेषकर दैनिक भास्कर व राजस्थान पत्रिका समेत विभिन्न समाचार पत्रों के कार्यालयों में जाकर कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन देने की जांच करेंगे। इसके लिए उनसे दस्तावेज मांगेंगे और कर्मचारियों से उनका पक्ष भी सुनेंगे। 

समाचार पत्रों में कार्यरत सभी कर्मचारी, जिन्होंने अभी तक केस नहीं किया है, वे संबंधित अधिकारियों को जाकर व्यक्तिगत रुप से लिखित में अपना पक्ष रख सकते हैं। श्रम विभाग राजस्थान की वेबसाइट पर जाकर कोई भी इस अधिसूचना को डाउनलोड कर सकता है। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हिन्दुस्तान में भगदड़, 37 ने दिया भास्कर में इंटरव्यू, शशिशेखर मनाने पहुंचे बिहार

हिन्दुस्तान की मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है। इस बार उसकी परेशानी का कारण बिहार में दैनिक भास्कर बना है। बिहार में अपने विस्तार में जुटे दैनिक भास्कर ने हिन्दुस्तान को बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है।

भागलपुर और मुजफ्फरपुर यूनिट लांच करने के लिए दैनिक भास्कर बड़ी संख्या में हिन्दुस्तान के रिपोर्टरों को तोड़ने की जुगत में लगा है। इसके लिए एक साथ हिन्दुस्तान के 37 लोगों के इंटरव्यू दैनिक भास्कर ने अपने यहां करा लिया है। इसमें सब एडिटर से लेकर न्यूज एडिटर तक शामिल हैं। 

इसकी भनक लगते ही समूह संपादक शशि शेखर अपने सहयोगी सुधांशु श्रीवास्तव समेत पटना में जा डटे और लोगों को मनाने की जुगत में लगे हैं। माना जा रहा है कि डैमेज कंट्रोल की अपनी नीति को सफल बनाने के लिए शशि शेखर इन लोगों को बेहतर करने का आश्वासन दे रहे हैं।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मेरा संपादक श्याम शर्मा और एचआर विकास विजयवर्गीय मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं : रणजीत सिंह राजपूत

आदरणीय यशवंत सिंह
संपादक
भड़ास4मीडिया

महोदय मैं रणजीत सिंह राजपूत, सब एडिटर, दैनिक भास्कर भीलवाड़ा में हूं. वर्तमान में मुझे यहां कार्यरत संपादक श्याम शर्मा एवं एचआर विकास विजयवर्गीय प्रताड़ित कर रहे हैं. मेरे खिलाफ तरह तरह की बातें और अफवाह फैला रहे हैं. ये दोनों यह लोगों को यह कह कर भ्रमित कर रहे है कि रणजीत सिंह राजपूत ने रिजाइन दे दिया है. ये लोग मुझे  इरादतन मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं ताकि मेरा मानसिक संतुलन बिगड़ जाए या मैं उत्पीड़न से परेशान होकर नौकरी छोड़ दूं.

 

अगर मेरे साथ कुछ भी बुरा होता है तो इसके लिए जिम्मेदार संपादक श्याम शर्मा और एचआर विकास विजयवर्गीय होंगे.

कृपया इस सूचना और खबर को भड़ास पर चला दें.

रणजीत सिंह राजपूत
उप संपादक
दैनिक भास्कर
भीलवाड़ा
ranjeetrajput007@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेतनमान मांगने पर हिसार भास्कर ने दो को सस्पेंड किया, गोली मारने की धमकी

मुन्ना प्रसाद हिसार (हरियाणा) दैनिक भास्कर में 26 वर्ष से काम कर रहे हैं। इस समय वह भास्कर में सीटीपी ऑपरेटर हैं। मुन्ना प्रसाद ने मजीठिया वेतनमान के लिए सुप्रीम कोर्ट में केस कर रखा है। जब भास्कर प्रबंधन को ये बात पता चली तो उसने मुकदमा वापस लेने के लिए उन पर दबाव बना दिया। पेपर में जो छोटी-छोटी गलतियां होती रहती हैं, उन्हीं को आधार बनाकर भास्कर प्रबंधन ने मुन्ना प्रसाद और उनके एक अन्य सहकर्मी सुरेंद्र कुमार को सस्पेंड कर दिया। 

सुरेंद्र कुमार को भास्कर प्रबंधन द्वारा जारी सस्पेंशन लेटर

भास्कर प्रबंधन द्वारा सुरेंद्र कुमार को जारी सस्पेंशन लेटर

इस प्रकरण पर मुन्ना प्रसाद ने सिविल थाना, सीएम कार्यालय और लेबर डिपार्टमेंट में लिखित फरियाद की।  लेकिन कही से भी कार्रवाई पूरी तरह से नहीं हो रही है। पुलिस ने उन्हें बुलाकर कहा कि भास्कर आफिस जाकर वह इंक्वायरी करेगी, क्योंकि भास्कर के प्रोडक्शन हेड शांतनु विश्नोई ने उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दी थी। सुरेंद्र कुमार को भी गोली मारने की धमकी दी गई। बताते हैं विश्नोई के लाइसेंसी हथियार है। धमकी देते हुए विश्नोई ने ये भी कहा कि उसका बाप पुलिस में है तो कानून उसका क्या बिगाड़ लेगा। इससे मुन्ना प्रसाद और सुरेंद्र ने अपनी जान का खतरा बताया है। 

मुन्ना प्रसाद का कहना है कि पुलिस दिए गए समय पर ऑफिस छानबीन करने नहीं पहुंची। क्योंकि शांतनु के पिता पुलिस इंस्पेक्टर हैं। इसलिए बाहर का बाहर ही मामला निपटा दिया गया। 

भास्कर प्रबंधन द्वारा सुरेंद्र कुमार को जारी सोकॉज लेटर

मुन्ना प्रसाद द्वारा हरियाणा के मुख्यमंत्री को दिया गया पत्र

मुन्ना प्रसाद से संपर्क : mmunnaprasad@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मीडिया कर्मियों से रिरिया भी रहे और धमका भी रहे, जयपुर भास्कर के संपादक एलपी पंत

जयपुर : दैनिक भास्कर जयपुर के संपादक एल पी पंत ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन नहीं देने पर अवमानना का केस करने वाले और अपने यहां काम करने वाले पत्रकार साथियों पर केस वापस लेने के लिए धमकाना शुरू कर दिया है। उनकी हरकतों से मीडिया कर्मियों में भारी रोष बताया जाता है।

पंत ने शनिवार रात को केस करने वाले कर्मचारियों को अपने चैम्बर में बुलाया। उनसे केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया। साथ ही कहना नहीं मानने पर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दे डाली। पंत ने पहले तो सभी साथियो को अच्छा इन्क्रीमेंट और मजीठिया के अनुसार सैलरी दिलाने का वादा किया था, साथ ही आश्वासन दिया था कि केस करने वाले कर्मचारियों को तंग नहीं किया जाएगा। इसके बाद ही वे अपने वादे से मुकर गए और दो पत्रकार साथियो संजय सैनी और सुधीर शर्मा का जयपुर से बाहर रांची डेपुटेशन करवा दिया और केस करने वाले 21 कर्मचारियों को निलंबित करवा दिया था।  

पंत की दादागिरी के खिलाफ भास्कर के वरिष्ठ संपादक रामबाबू सिंघल ने इस्तीफा दे दिया था। अपनी इमेज ख़राब होती देख दूसरे संपादक स्तर के अधिकारी हबीब को इस्तीफा भेजने पर अपने चमचों के जरिेए हबीब को मनाया। उनकी नाराजगी दूर कर उन्हें प्रमोट किया था। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

कोऑपरेटिव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खबर भास्कर ने नहीं छापी

जोधपुर : अपने आप को देश का सबसे बड़ा अखबार कहने वाले दैनिक भास्कर ने में क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की खबर को छिपा लिया। उसे सिर्फ वेबसाइट पर प्रसारित कर दिया। प्रदेश के जागरूक तबके में इस घटिया नीयत को लेकर तरह तरह की चर्चाएं हैं।    

राजस्थान में हजारों की संख्या में क्रेडिट सोसायटियां गरीब लोगों से भारी धनराशि जमा कराती रही हैं जिसकी वापसी की कोई गारंटी नहीं। इसको लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में चीफ जस्टिस की बेंच ने राजस्थान में इन सोसायटियों पर पूर्ण रूप से रोक लगाते हुए तीन माह में आरबीआई से लाईसेंस लाने का आदेश जारी किया था। उसके खिलाफ राजस्थान की कुछ क्रेडिट सोसायटियों ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की। 

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को प्रभावी रखा, साथ ही कहा है कि क्रेडिट सोसायटियां बैंकिंग व्यवसाय नहीं कर सकतीं। नॉमिनल सदस्यों से जमाएं नहीं ले सकेंगी। इस आदेश के साथ शुक्रवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी। इस समाचार को राजस्थान में प्रमुख समाचार पत्रों ने जनहित में विशेष तरीके से प्रकाशित किया। राजस्थान पत्रिका ने प्रथम पृष्ठ पर दिया, लेकिन अपने आप को पाठकों की आवाज कहने वाले दैनिक भास्कर ने इस समाचार को प्रकाशित ही नहीं किया। इसके पीछे तरह तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। 

पहले हाईकोर्ट, उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सोसायटियों का कारोबार राजस्थान में चौपट हो गया है। इससे जनता को बहुत राहत मिली है। ऐसे में एक बड़े समाचार पत्र ने खबर रोक कर पाठकों के विश्वास के साथ खुला धोखा किया है।

जोधपुर से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

जयपुर भास्कर ने संजय सैनी का जवाबी पत्र लेने से किया इनकार

जयपुर भास्कर प्रबंधन अब अपने पत्रों का जवाब स्वीकार करने से मना कर रहा है। इस कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार संजय सैनी की ओर से 17 मई का भेजा हुआ जवाबी पत्र भास्कर प्रबंधन ने स्वीकार नहीं किया है। सैनी ने भास्कर जयपुर की एचआर हेड वंदना सिन्हा को पत्र भेज कर 21 मई तक रांची ज्वाइन करने की चेतावनी भरे पत्र का कड़ा जवाब दिया था। उन्होंने अपने डेपुटेशन को अवैध व गैरकानूनी बताते हुए आदेश को भास्कर प्रबंधन की दुर्भावनावश की गई हरकत करार दिया था। सैनी ने यह जवाबी पत्र स्पीड पोस्ट से भिजवाया था लेकिन वंदना सिन्हा ने इसे रिफ्यूज कहते हुए लेने से मना कर दिया। सैनी को जब यह पत्र मिला तो उन्होंने बाकायदा ई-मेल कर भास्कर प्रबंधन की इस हरकत की जानकारी सर्वोच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को भी दे दी है। 

सैनी को भास्कर प्रबंधन का 6 मई का पत्र 15 मई 2015 को मिला। सैनी ने दैनिक भास्कर राजस्थान, जयपुर की एचआर हैड वंदना सिन्हा को लिखा कि कंपनी प्रबंधन की ओर से प्रार्थी कामगार पर अनर्गल आरोप लगाते हुए एक रजिस्टर्ड पत्र 6 मई को उसके निवास स्थान पर भेजा था जो 15 मई को मिला है। प्रार्थी कामगार ने इस पत्र का जवाब 17 मई को आपको व दैनिक भास्कर के राज्य संपादक व नेशनल सेटेलाइट एडीटर ओम गौड को ई-मेल पर दे दिया था। साथ ही इस पत्र का स्पीड पोस्ट से जवाबी पत्र भेजा गया था।

उन्होंने लिखा कि बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है, कंपनी की जिम्मेदार अधिकारी होते हुए भी आपने इस पत्र को लेने से मना कर दिया। इससे साफ तौर पर जाहिर होता है कि आप प्रार्थी के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई षड्यंत्र कर रही हैं। प्रार्थी को आशंका है कि कंपनी प्रबंधन जवाबी पत्र नहीं मिलने की आड़ लेकर प्रार्थी के खिलाफ दुर्भावनावश कोई कार्रवाई करना चाहता है। इसका उदाहरण मेरा जवाबी पत्र लेने से मना किया जाना है।  यह जवाबी पत्र मुझे 26 मई को वापस मिला है।

कंपनी प्रबंधन को उन्होंने यह भी बताया कि सर्वोच्च न्यायालय अपने कई फैसलों में यह कह चुका है कि न्यायालय में विवादित मामलों में यदि कोई जिम्मेदार अधिकारी, कंपनी या जिसके नाम पत्र लिखा गया है, वह पत्र को लेने से मना करता है तो वह पत्र स्वीकार ही माना जाएगा।  ऐसे में कंपनी प्रबंधन कोई कार्रवाई करता है तो वह कार्रवाई अवैध मानी जाएगी। 

सैनी ने वंदना सिन्हा को 17 मई 2015 को लिखा कि उसकी ओर से 1 जनवरी 2015 को मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना का केस करने के बाद कंपनी प्रबंधन की ओर से लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। उस पर केस वापस लेने के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उसके केस वापस लेने से मना करने के बाद दुर्भावनावश और अवैधानिक तरीके से उसका डेपुटेशन रांची किया गया है। इसका उदाहरण नेशनल सेटेलाइट एडीटर ओम गौड़ का 3 मार्च का कथन है कि-‘तुमने कंपनी के खिलाफ केस करके गलती की है। तुमने कंपनी की पॉलिसी के खिलाफ जाकर काम किया है। इस कारण तुम्हारा डेपुटेशन किया गया है।’ इसके बाद 3 मार्च को ही स्टेट एडीटर लक्ष्मीप्रसाद पंत का कथन कि ‘तुमने केस वापस नहीं लिया तो तुम्हें और तुम्हारे परिवार को जेल भेज देंगे। तुमने कंपनी के खिलाफ केस किया है तो इसके नतीजे भुगतने के लिए भी तैयार रहना होगा।’  

उन्होंने अपने जवाबी पत्र में लिखित रूप से यह भी बताया है कि इससे पूर्व एच.आर. मैनेजर जोगेन्दर सिंह और सिटी प्रभारी सतीश कुमार सिंह ने 25 फरवरी को दिन में 12 बजे एक कमरे में उसे बुला कर कुछ कागजों पर उसके जबरन हस्ताक्षर करवा लिए। केस वापस लेने के लिए शपथ पत्र पर हस्ताक्षर कराने की कोशिश की। इन तमाम सबूतों की वीडियो रिकार्डिंग और तथ्यों के आधार पर प्रार्थी कामगार ने अपने डेपुटेशन आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की है। हालांकि इस पर आदेश अभी नहीं हुए हैं पर यह मामला अब  सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में कंपनी प्रबंधन की ओर से बार-बार डेपुटेशन पर जाने के आदेश देना, नहीं जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की धमकी देना अवमानना के स्तर को और भी बढ़ाता है।  ऐसे में प्रार्थी कंपनी प्रबंधन पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई कर सकता है।

उन्होंने भास्कर प्रबंधन को बताया कि अपनी बीमारी के दौरान सरकारी डॉक्टर से 27 मार्च 15 तक का मेडिकल अवकाश दे चुका था। उसके बाद भी कंपनी प्रंबधन ने अपने पैनल के डाक्टर के साथ मिल कर मेडिकल चैकअप के बहाने प्रार्थी कामगार की बीमारी में भी उसके जीवन से खिलवाड़ करने और जीवन को नुकसान पहुंचाने का षड्यंत्र किया।  इससे प्रार्थी डर गया कि कंपनी प्रबंधन मैनेज करके प्रार्थी और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाने के लिए कोई भी एक्सीडेंट करा सकता है। इससे प्रार्थी मानसिक अवसाद में आ गया। प्रार्थी ने अपने मनोचिकित्सक डा. तुषार जगावत की मेडिकल उपचार की पर्ची 28 मार्च 15 को ही मेल कर दी थी। ऐसी स्थिति में प्रार्थी को अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री राजस्थान सरकार, राज्य मानवाधिकार से गुहार करनी पड़ी। प्रार्थी कामगार के नियुक्ति पत्र (19 अगस्त 2004) के अनुसार प्रार्थी की नियुक्ति जयपुर में हुई थी। प्रार्थी के नियुक्ति आदेश में जयपुर से बाहर तबादला करने/डेपुटेशन पर भेजने संबंधी भेजने का कोई ब्यौरा नहीं है। ऐसे में प्रार्थी कामगार को तीन महीने के लंबे समय से जयपुर से बाहर नहीं भेजा जा सकता।

दैनिक भास्कर प्रबंधन ने आज तक स्थाई आदेश जारी नहीं किए जो औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश )अधिनियम 1946 के तहत जरूरी है। ऐसे में कंपनी प्रबंधन पर राज्य सरकार के आदर्श स्थायी आदेश लागू होते हैं। इन आदेशों के तहत कंपनी प्रबंधन किसी भी कर्मचारी को दूसरे राज्य में डेपुटेशन पर भेजने के लिए कर्मचारी की सहमति लेना आवश्यक है। जो प्रार्थी कामगार से नहीं ली गई। ऐसे में प्रार्थी के डेपुटेशन आदेश अवैध और गैरकानूनी है। इसे निरस्त किया जाए।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भास्कर के नोटिस पर उपसंपादक का करारा जवाब, कहा- ये सुप्रीम कोर्ट की सरासर तौहीन है जनाब

इंदौर (म.प्र.) : दैनिक भास्कर इंदौर में कार्यरत उप-संपादक तरुण भागवत ने अदालत में विचाराधीन अपनी नौकरी के मामले में किशोर कुमार व्यास एडवोकेट के नोटिस के जवाब में कड़ा प्रतिवाद जताया है। उन्होंने लिखा है कि 30 अप्रैल 2015 को जारी पत्र 5 मई को स्पीड पोस्ट और 6 मई को रजिस्टर्ड पोस्ट से मिला। जैसा कि पत्र के पहले पैरा में उल्लेख किया गया है, डीबी कार्प प्रबंधन द्वारा मेरे और प्रबंधन के बीच चल रहे सर्विस मैटर में तथ्यों का पता लगाने और रिपोर्ट देने के लिए मेरे खिलाफ डोमेस्टिक इंक्वायरी हेतु नियुक्त किया गया है। इसमें प्रबंधन के प्रतिनिधि एचआर मैनेजर योगेश के. शर्मा होंगे।

मेरा सर्विस मैटर देश की सर्वोच्च अदालत में विचाराधीन है। इस प्रकरण की हाल ही में 28 अप्रैल 2015 को सुनवाई हुई थी। डीबी कार्प द्वारा माननीय न्यायालय के आदेशों की लगातार अवहेलना किए जाने से नाराज कोर्ट ने स्पष्ट कह दिया है कि अब इस प्रकरण में आरोपियों की तरफ से किसी तरह का काउंटर एफिडेविट स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद इस मामले में डीबी कार्प प्रबंधन और आप अलग से सुनवाई कैसे कर सकते हैं? क्या आप स्वयं को माननीय उच्चतम न्यायालय से भी बड़ा और अधिकारसंपन्न समझते हैं? कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण की इस तरह अलग से सुनवाई तय कर आपने तो सीधे तौर पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना कर न्यायालय को ही चुनौती दे डाली है।

उन्होंने लिखा है कि चूँकि कोई भी अधिवक्ता किसी भी प्रकरण का अच्छी तरह अध्ययन करने के बाद ही उसकी पैरवी करने या न करने की सहमति देता है, ऐसे में यह नामुमकिन है कि आप मेरे प्रकरण में सभी तथ्यों से वाकिफ न हों। इसलिए आपके इस पत्र से मुझे आपके वकील होने पर भी संदेह है क्योंकि यह बात तो कानून का नौसिखिया विद्यार्थी भी भलीभांति जानता है कि किसी भी कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण की इस तरह सुनवाई नहीं की जा सकती, यह अपराध है। इसी तरह एचआर मैनेजर शर्मा ने भी डीबी कार्प प्रबंधन द्वारा तय की गई इस सुनवाई में शामिल होने की सहमति देकर माननीय सर्वोच्च न्यायालय और भारतीय कानून प्रणाली को सरेआम चुनौती दी है। ऐसे में आप मुझे लिखित स्पष्टीकरण दें कि आपके इस गैरकानूनी कृत्य के कारण मैं आपको भी माननीय उच्चतम न्यायालय की अवमानना का आरोपी क्यों नहीं बनाऊं? पत्र में लिखे अन्य बेबुनियाद आरोपों के आपको जवाब देना मैं उचित नहीं समझता।

तरुण भागवत ने अपने पत्र की प्रतिलिपि रमेशचंद्र अग्रवाल (चेअरमैन डीबी कार्प लि.), सुधीर अग्रवाल (एमडी डीबी कार्प लि.), गिरीश अग्रवाल (एमडी डीबी कार्प लि.), कल्पेश याग्निक (समूह संपादक, दैनिक भास्कर), नवनीत गुर्जर (संपादक दैनिक भास्कर म.प्र.), जया आजाद (असिस्टेंट जनरल मैनेजर एचआर एंड एडमिन, डीबी कार्प लि. म.प्र.-छग), पंकज श्रीवास्तव (लीगल कंप्लायंस हेड, म.प्र.-छग, डीबी कार्प लि.), हेमंत शर्मा (स्थानीय संपादक दैनिक भास्कर, इंदौर), अनिल कर्मा (समाचार संपादक दैनिक भास्कर, इंदौर), योगेश के. शर्मा (एचआर मैनेजर दैनिक भास्कर, जोधपुर आदि को भी प्रेषित की है। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

बिना धूप, बिना छाया के भास्कर की माया, झूठी खबर से हरियाणा में खूब भद्द पिटी

एक समय हरियाणा में दैनिक भास्कर की अपनी अलग पहचान थी। सच्ची व विश्वसनीय खबरों के लिए भास्कर का नाम लिया जाता था। परन्तु मीडिया संस्थानों से थोक के भाव निकले पत्रकारों के रूप में सस्ते मजदूर मिलने से भास्कर ने अपनी विश्वसनीयता भी खो दी है।

…और ये रही वो खबर

पिछले दिनों राजस्थान के एक अखबार में समाचार प्रकाशित हुआ था कि इस बार मात्र 188 दिन स्कूल लगेगा। वह समाचार स्कूलों से संबंधित होने के चलते हरियाणा के कुछ अध्यापकों के व्हाट्सएप ग्रुप व फेसबुक पर घूमने लगा। रोहतक भास्कर के एक पत्रकार ने शायद उस समाचार को व्हाट्सएप या फेसबुक पर देख लिया होगा। उसने बिना सोचे समझे उस समाचार को उठाकर रोहतक डेटलाइन से भास्कर के पाठकों के लिए परोस दिया। उसने बाकायदा रोहतक के जिला शिक्षा अधिकारी का वर्जन भी दिखा दिया। जिला शिक्षा अधिकारी रोहतक सत्यवती नंदल की तरफ से स्पष्टीकरण भी आ गया है कि उन्होंने ऐसी कोई खबर नहीं दी। ये खुद पत्रकार ने अपनी तरफ से लगाईं है।

यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि पत्रकार को यह भी नहीं पता, हरियाणा व राजस्थान के शिक्षा विभाग व स्कूलों के सिस्टम में कितना अंतर है। हरियाणा में जहां 1 अप्रैल से नया सत्र शुरू हो जाता है वहीं राजस्थान में मई में नया सत्र शुरू होता है। परन्तु पत्रकार ने इसकी कोई परवाह नहीं की और राजस्थान वाली खबर में बिना कोई बदलाव किए ज्यों का त्यों परोस दिया। डेस्क पर बैठे लोगों व अन्य वरिष्ठ लोगों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। हर वर्ष हरियाणा के स्कूलों में ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 जून से शुरू होते हैं, लेकिन राजस्थान के समाचार में 16 मई से अवकाश होना बताया गया था, इसलिए समाचार की कापी करते समय रोहतक वाले पत्रकार ने हरियाणा में भी 16 मई  से अवकाश बता दिया। 

इस समाचार के प्रकाशित होने के बाद हरियाणा में शिक्षा विभाग के अध्यापकों व छात्रों के बीच यह समाचार आग की तरह फैल गया। सभी अध्यापक जहां अपने आला अधिकारियों से जल्दी अवकाश होने की पुष्टि करने की कोशिश करने लगे, वहीं स्कूली छात्रों ने अध्यापकों के सामने सवालों की झड़ी लगा दी। इस बारे में जब रोहतक भास्कर के पत्रकारों से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने साफ कह दिया कि उनके संज्ञान में ऐसा कोई समाचार नहीं है तथा उन्हें अवकाश की पुष्टि अपने अफसरों व बोर्ड से करनी चाहिए। अगर अफसरों से ही पुष्टि करनी होती तो प्रकाशित समाचारों की क्या अहमियत रह जाएगी। 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

ओछी हरकतों पर उतरा जयपुर भास्कर प्रबंधन

श्रम विभाग में सुनवाई के दौरान शुक्रवार को जयपुर भास्कर प्रबंधन के कर्मचारी ओछी हरकतों पर उत्तर आए। भास्कर के पत्रकारों ने सीटू के सचिव जयपुर भास्कर के सीओओ संजय शर्मा ओर एच आर मैनेजर वंदना सिन्हा के खिलाफ प्रताड़ना और दुर्भावना से कार्रवाई करने पर केस कर रखा है। इस केस में श्रम विभाग ने सीओओ संजय शर्मा ओर एच आर मैनेजर वंदना सिन्हा को नोटिस जारी कर रखे है जिसकी शुक्रवार को तारीख थी। 

सीओओ और एच आर मैनेजर जेल जाने से बचने और अपनी गलतियों को छिपाने के लिए अब डराने और धमकाने की कोशिश में लग गया है। भास्कर के लीगल ऑफिसर सुमित व्यास के साथ शुक्रवार को दादागरी करने के लिए उसने अपने खास चमचे को भेजा। सीओओ के सामने अपने नम्बर बढ़ाने के लिए उसने आते ही इस चमचे ने बदतमीजी शुरू कर दी। उसने धमकाया की या तो वे इस केस को वापस ले ले या फिर सीओओ को जेल जाने से बचाने के लिए उन्हें जवाब लेने के लिए लम्बी तारीख लेने दे।

उसने श्रम विभाग के ऑफिस में माहौल ख़राब करने की कोशिश की पर भास्कर के पत्रकार उसकी नीयत जान गए थे। उन्होंने शान्ति बनाये रखी। भास्कर प्रबंधन के इन दोनों सेवको को तारीख लेने की इतनी जल्दी थी कि वे शनिवार 30  मई को अवकाश के दिन की ही तारीख ले गए।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

जागरण और भास्कर से शिवकुमार, त्रिभुवन, नृपेंद्र, मोहिंदर के बारे में सूचनाएं

दैनिक भास्कर पानीपत के संपादक शिवकुमार विवेक का भोपाल  ट्रान्सफर। सेटेलाइट सेटअप देंखेंगे। दैनिक भास्कर उदयपुर के संपादक बलदेवकृष्ण शर्मा पानीपत के नए संपादक होंगे। वह पहली मई से चार्ज लेंगे। उदयपुर के नए संपादक होंगे त्रिभुवन। इससे पहले त्रिभुवन दैनिक भास्कर जयपुर के ब्यूरो चीफ हुआ करते थे।

दैनिक जागरण नोएडा के जीएम नृपेंद्र श्रीवास्तव को नोएडा एनसीआर और हरियाणा का सीजीएम बनाया गया है। वही पंजाब से खबर है कि दैनिक जागरण में कार्यरत मार्केटिंग के मोहिन्दर सिंह का प्रमोशन हुआ है. उन्हें GM के पद से प्रमोट कर CGM बना दिया गया है. इसके साथ ही अब वो पंजाब, हिमाचल और जम्मू देखेंगे.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भास्कर जयपुर के सीओओ संजय शर्मा को सताने लगा जेल जाने का डर

दैनिक भास्कर जयपुर के सीओओ संजय शर्मा को अब ये डर सताने लगा है कि अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट उन्हें भी कही जेल न भेज दे। 

सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें मार्च में हुई सुनवाई में नोटिस जारी कर पूछा है कि अब तक मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों की पालना क्यों नहीं हुई। सीओओ संजय शर्मा को तो इस नोटिस के बारे में पता ही नहीं था। भड़ास में खबर आने के बाद उनके कान खड़े हुए क्योंकि जिस दैनिक भास्कर जयपुर के  सीओओ है उस कंपनी ने ही उन्हें इस बारे में नहीं बताया। 

सुना है की दैनिक भास्कर के मालिक जयपुर, राजस्थान,गुजरात (पूरा पश्चिम क्षेत्र ) की जिम्मेदारी उन्हें बताते हुए कंपनी अवमानना का ठीकरा उन्हीं पर फोड़ने वाले  है। जिस तरह राजस्थान पत्रिका के मालिको ने अपना बचाव करते हुए अपने निदेशक एचपी तिवारी को  अवमानना के लिए जिम्मेदार बताया है। वैसी ही आशंका जयपुर में भी है। इसी कारण कंपनी ने उन्हें नोटिस के बारे में नहीं बताया और अब उनकी तरफ से गुपचुप में जवाब दाखिल कर देगी।  ऐसे में वो जवाब भी नहीं दे पा रहे है। उन्होंने अपने बचाव के लिए खुद ही नोटिस  की तलाश शुरू कर दी है। 

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

मजीठिया वेतनमान : भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए झूठे जवाब

दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में देश भर के पत्रकारों के भविष्य से जुड़े मजीठिया वेज बोर्ड के मामले  महत्वपूर्ण सुनवाई की तिथि अब चार-पांच दिन दूर है। इसके साथ ही मीडिया मालिकों ने पेशबंदी तेज कर दी है। पत्रकारों का हक मारने के लिए वे कानूनी स्तर पर तरह तरह की कागजी फरेब में लगे हुए हैं। सूत्रों के मुताबिक गत दिनो सुप्रीम कोर्ट में दैनिक भास्कर और राजस्थान पत्रिका ने अपने झूठे जवाब दाखिल करते हुए अदालत को बताया है कि उन्होंने अप्रैल 2014 से अपने यहां मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू कर दी हैं। उन्होंने यह भी सफेद झूठ बयान किया है कि मजीठिया की धारा 20-जी के अनुसार उनके संस्थान के सभी मीडिया कर्मियों ने प्रबंधन को लिख कर दे दिया है कि वे पुराने वेतनमान से संतुष्ट हैं। इसके पीछे मंशा ये साबित करने की है कि जो मीडिया कर्मी कोर्ट नहीं गए हैं, उन्हें मजीठिया वेतनमान नहीं मिलेगा। बाकी कर्मचारियों का काम प्रबंधकीय प्रकृति का है, इसलिए वे मजीठिया वेतनमान के हकदार नहीं हैं।

 

….और ये रहा राजस्थान पत्रिका के सफेद झूठ का दावा 

सूत्रों के मुताबिक अपने दाखिल जवाब में दोनो अखबार मालिकों ने ये भी कहा है कि मजीठिया वेतनमान दिलाने का काम सुप्रीम कोर्ट का नहीं है। यह काम तो लेबर कोर्ट का है। इसलिए याचिकाकर्ता वहीं से अपने मामले पर फैसला लें। उल्लेखनीय है कि राजस्थान पत्रिका की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल उपरोक्त जवाब में गुलाब कोठारी और निहार कोठारी को पार्टी बनाया गया है। यह नियमतः गलत है। कम्पनी के ऐसे सभी कामों के लिए एच पी तिवाड़ी जिम्मेदार हैं। 

सुप्रीम कोर्ट में देश भर के पत्रकारों के आर्थिक हितों की लड़ाई लड़ रहे संगठनों ने आह्वान किया है कि ‘साथियों, अब जवाब तैयार करना है। जवाब सभी को मिलकर तैयार करना है। आप सभी के सहयोग की जरूरत पड़ेगी। किसी भी कीमत पर पीछे न हटें। मालिकान को ये लड़ाई हारनी ही हारनी है। बताया गया है कि गुलाब कोठारी और निहार कोठारी को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और जेल जाने से बचाने के लिए एचपी तिवाड़ी को बलि का बकरा बनाया गया है। राजस्थान पत्रिका का जवाब झूठ के पुलिंदे के सिवा और कुछ नहीं। पत्रकारों ने इसका भी करारा जवाब देने की तैयारी कर ली है। पत्रिका प्रबंधन कुछ एक कर्मचारियों को 20 प्रतिशत वेतन वृद्धि से फुसलाकर उनके हक मार जाना चाहता है लेकिन वह अपनी चाल में कामयाब होने से रहा।   

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भागलपुर में भास्कर की बुकिंग शुरू होते ही लुढ़के अखबारों के भाव

भागलपुर (बिहार) : यहां के प्रमुख समाचार पत्रों दैनिक जागरण, हिंदुस्तान और प्रभात खबर ने अखबारों की कीमत डेढ़ रूपये कम करते हुए अब ढाई रूपये कर दी है. रविवार का अंक तीन रूपये का होगा. दैनिक भास्कर की आहट ने तीनों अखबारों की निंद उड़ा दी है. दैनिक भास्कर की बुकिंग अठारह अप्रैल से शुरू कर दी गयी है. भास्कर निन्यानवे रूपये में एक साल तक के लिये पाठक बना रहा है. बुकिंग कराने पर कथित रूप से ढाई सौ रूपये के गिफ्ट के अलावा साढ़े सात सौ रूपये का विज्ञापन कूपन भी दिया जा रहा है. बुकिंग कराने वाले पाठकों को 75 रू प्रति माह अखबार शुल्क देना होगा. 

दूसरी तरफ दैनिक जागरण इन दिनों सबसे ज्यादा प्रयोग कर रहा है. कर्मियों का फेर बदल जम कर किया जा रहा है. इस क्रम में नवगछिया के मॉडम प्रभारी दिनेश को हटा कर बेगुसराय भेजा गया और उनकी जगह पर धीरज को प्रभारी बनाया गया है. नवगछिया भागलपुर संस्करण में ही आता है लेकिन वहां खबरों की उत्पादकता ज्यादा है. इसलिये प्रभात खबर का भी यहां कार्यालय है. जिसके मॉडम प्रभारी कृष्णा मिश्रा है. 

नवगछिया में हिंदुस्तान की कमान संजीव संभाल रहे हैं. दूसरी तरफ कल तक डांट डपट करते रहे संपादकों के मुंह में इन दिनों मिश्री घुल गयी है. पंद्रह सौ से दो हजार रूपये में काम करने वाले रिपोर्टरों की भी पूछ हो रही है. भास्कर की पहली पसंद हिंदुस्तान के रिपोर्टर हैं. दूसरे नंबर की पसंद पर प्रभात खबर है. 

प्रभात खबर की कमान संपादक जिवेश रंजन सिंह, हिंदुस्तान की कमान विश्वेस्वर कुमार और दैनिक जागरण की कमान किशोर झा संभाल रहे हैं. जिवेश रंजन ने प्रभात खबर की कमान उस समय संभाली, जब प्रभात खबर को डूबती नाव कहा जाने लगा था. जिवेश ने कड़ी मेहनत से प्रभात खबर को भागलपुर में सम्मान जनक स्थान पर लाया. 

विश्वेस्वर कुमार भागलपुर हिंदुस्तान के संकट मोचक माने जाते हैं. स्वभाव से कड़क विश्वेश्वर ने बेहतर खबरों की श्रृंखला सजा कर हिंदुस्तान को पुरानी पहचान फिर से दिला दी. दैनिक जागरण के किशोर झा काफी अनुभवी हैं. वे जागरण के बेहतर ब्रांडिग को बरकरार रखे हुए हैं. भास्कर का आगमन तीनों संपादकों के लिये भी कड़ी चुनौती है. इन सब बातों से इतर मेहनती व शोषित रिपोर्टर वर्ग इस दौड़ में अच्छे दिन की उम्मीद लगाये बैठै हैं.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: