सोलह साल बाद किसी भारतीय फिल्म को कान में पुरस्कार

भारतीय सिनेमा के लिए सचमुच यह खुशी की बात है कि दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित कान फिल्मोत्सव के अधिकारिक चयन में इस बार दो फिल्में प्रदर्शित की गईं, गुरविंदर सिंह की पंजाबी फिल्म ‘चौथी कूट’ और नीरज घायवान की ‘मसान’। यह भी कम महत्वपूर्ण नहीं है कि लगभग सोलह साल बाद किसी भारतीय फिल्म को कान में पुरस्कार मिला। 68 वें कान फिल्मोत्सव में शिरकत के बाद वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अजित राय की रपट: