सलाम मांझी! सलाम कंवल भारती!

दलित-पिछड़ों यानी मूलनिवासी की वकालत को द्विज पचा नहीं पा रहे हैं। सामाजिक मंच पर वंचित हाषिये पर तो हैं ही, अब राजनीतिक और साहित्यिक मंच पर भी खुल कर विरोध में द्विज आ रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के आर्यों के विदेशी होने के बयान से उच्च जाति वर्ग पार्टी और विचार धारा से ऊपर जाकर बौखलाहट और तीखा विरोध के साथ सामने आया तो वहीं लखनउ में कथाक्रम की संगोष्ठी ‘लेखक आलोचक, पाठक सहमति, असहमति के आधार और आयाम’, में लेखक कंवल भारती के यह कहने पर कि ‘साहित्य और इतिहास दलित विरोधी है। ब्राह्मण दृष्टि असहमति स्वीकार नहीं करती।

मीडिया के बर्ताव से दुखी जीतन मांझी बोले- मीडिया की नजर में मैं गंवार हूं

बिहार के गया जिले के गोशाला के एक कार्यक्रम में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, आप सभी जानते हैं कि मैं कैसा हूं और कितना पढ़ा-लिखा हूं. पर, मीडियावालों का हाल देखिए. उनकी नजरों में हम निठाह गंवार हैं. मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि नीतीश कुमार के साथ मेरा चोली-दामन का संबंध है. दोनों के बीच कहीं कोई मनभेद या मतभेद नहीं है. हाल-फिलहाल मीडिया में जो बातें सामने आयी हैं, सब फिजुल की हैं. किसी का कोई आधार नहीं है. वे दोनों (सीएम व नीतीश) अपने-अपने दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं. नीतीश कुमार पार्टी को सशक्त बनाने में लगे हैं. पार्टी ने मुङो सरकार चलाने का दायित्व सौंपा है. मैं अपना काम कर रहा हूं.