यूपी में महिला आईएएस पर डीएम की बुरी नजर, सीएम तक पहुंची बात, आईएएस एसोसिएशन भी गंभीर

लखनऊ/दिल्ली : उत्तर प्रदेश में तैनात एक ट्रेनी महिला आईएएस की आपबीती ने गोरखपुर के जिलाधिकारी रंजन कुमार के आचरण को संदिग्ध बना दिया है। आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ.नूतन ठाकुर के मुताबिक महिला अफसर ने उनसे मिलकर अफसर की बदनीयती की सारी हरकत खोल दी है। एक अखबार ने इस पूरे मामले का रहस्योदघाटन किया है। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंच चुका है। सेंट्रल आईएएस एसोसिएशन के सचि‍व संजय भूस रेड्डी और यूपी आईएएस एसोसिएशन के सचिव भुवनेश कुमार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। 

वसुन्धरा राजे ने किया ज़ी राजस्थान न्यूज चैनल के लोगो का अनावरण

जयपुर : मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे ने सोमवार को अपने आवास पर ज़ी मीडिया समूह के प्रादेशिक न्यूज चैनल ज़ी राजस्थान न्यूज के लोगो का अनावरण किया। मुख्यमंत्री ने चैनल की री-लॉन्चिग भी की। इस मौके पर ग्रुप के सीईओ भास्कर दास और चैनल के स्टेट हैड पुरुषोत्तम वैष्णव भी मौजूद रहे। कृपया हमें अनुसरण …

पत्रकार ने लिखी सीएम शिवराज सिंह चौहान पर किताब

भोपाल : पत्रकार कृष्णमोहन झा ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर एक किताब लिखी है- ‘संकल्प सेवा समर्पण की त्रिवेणी शिवराज’। पुस्तक का प्रकाशन  सुदित पब्लिकेशन्स द्वारा किया जा रहा है। पुस्तक में अलग-अलग लेखों में मुख्यमंत्री के नौ वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों का चित्रण किया गया है।

पीएम-सीएम से आईपीएस अमिताभ की मांग, हाशिमपुरा कांड के पीड़ितों को मिले न्याय

लखनऊ : आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से हाशिमपुरा के पीड़ितों को न्याय देने के लिए हर संभव कदम उठाने का निवेदन किया है.

आरोपी मंत्री को बचाने पर सीएम की राज्यपाल से शिकायत

लखनऊ : सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता डॉ. नूतन ठाकुर ने प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक से शिकायत की है कि तीन साल की सजा पाने के बावजूद मंत्री कैलाश चौरसिया को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने हटाया नहीं है। उनका कहना है कि कैलाश चौरसिया अब कानूनन मंत्री नहीं हैं। 

आईपीएस पर रेप का फर्जी आरोप लगाने वाली महिला का पति समाजवादी पार्टी का नेता निकला

: सीबीआई जांच की मांग : मेरे और मेरे पति अमिताभ ठाकुर पर गाज़ियाबाद की एक महिला द्वारा लगाए गए पूर्णतः फर्जी बलात्कार के आरोपों में आज हमें महत्वपूर्ण जानकारी हासिल हुई. यह ज्ञात हुआ कि खुद को गरीब असहाय कहने वाली इस महिला के पति ‘वरिष्ठ’ सपा नेता हैं जो मोहल्ले में काम लायक रसूख और पहचान रखते हैं. इस तथ्य के सामने आने के बाद पूरे केस की वस्तुस्थिति देखते हुए मुझे पूर्ण विश्वास हो गया है कि यह षडयंत्र मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति द्वारा उनके खिलाफ चल रही जांच में डराने और फंसाने के लिए कराया गया है.

यूपी में जंगल राज : आप लोग इस यादव के खिलाफ कुछ लिखते क्यों नहीं?

Yashwant Singh : एक मेरे उद्योगपित मित्र कल मिलने आए. बोले- यार कुछ लिखते क्यों नहीं आप लोग इस यादव के खिलाफ?

मैंने पूछा- किस यादव के खिलाफ? उनका पूरा नाम पता तो होगा?

गैर-आदिवासी और गैर-झारखंडी के हाथ में झारखंड की कमान

झारखंड में भाजपा की राजनीति कैसे सफल हुई और मोदी की राजनीति कितनी कारगर साबित हुई, इस पर हम चर्चा करेंगे लेकिन सबसे पहले प्रदेश में बनने वाले पहले गैर-आदिवासी और गैर-झारखंडी मुख्यमंत्री के बारे में कुछ जानकारी। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पहले रघुबर दास के नाम पर सहमति जताई और इसके बाद अपने सिखाए पढाए दूतों के जरिए रांची में रघुबर के नाम की घोषणा करवा दी। रघुबर दास इस राज्य के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री होने जा रहे हैं। रघुबरदास के बारे में अखबारों में कई तरह की खबरें छप रही हैं। उनके व्यक्तित्व, उनके परिवार, उनकी शिक्षा दीक्षा, उनके खान पान और न जाने क्या क्या।

जी न्यूज के एंकर ने बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साथ बदतमीजी की

Dilip C Mandal : बात-बात पर जाति का रोना लेकर मत बैठिए. यह सही है कि न्यूज एंकर ने बिहार के माननीय मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के साथ जो बदतमीजी की, और उनके बारे में जिस अंदाज और भाषा में बाकी जगह भी बात की जा रही है, उसके पीछे जाति है, लेकिन आपको मान्यवर कांशीराम बनने से किसने रोका है. कांशीराम साहेब के साथ कोई ऐसा करने की सोच सकता था क्या?

आईएएस अफसर सदाकांत व संजीव शरण का तबादला और दो घंटे बाद तबादले का निरस्त होना….

Amitabh Thakur :  बीती बात बिसारिये… आईएएस अफसर सदाकांत और संजीव शरण का तबादले और मुख्यमंत्री द्वारा काम करने पर तबादला निरस्त करने की कथित चेतावनी के दो घंटे के अन्दर ही इनका तबादला निरस्त हो जाने के प्रकरण में मैं अकादमिक फ्रंट पर यह अवश्य कहना चाहूँगा कि 28 जनवरी 2014 को आईएएस तथा आईपीएस कैडर संशोधन नियमावली के लागू हो जाने के बाद अब किसी भी आईएएस तथा आईपीएस अफसर का तबादला मात्र सिविल सेवा बोर्ड की संस्तुतियों पर ही किया जा सकता है और किसी अन्य प्राधिकारी, चाहे वह कितना भी बड़ा क्यों ना हो, को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है. ये नियम काफी सोच-विचार के बाद बनाए गए थे और इनसे किसी भी प्रकार का दुराव प्रशासनिक व्यवस्था में हानिकारक प्रभाव ही उत्पन्न करेगा. प्रशासन में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के क्षेत्र में कार्य करने के नाते मैं चाहता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि बेहतर प्रशासन के लिए ये नियम पूरे देश में पूरी तरह से पालन किये जायेंगे और इनमे किसी स्तर पर मनमर्जी के दवाब में कोई शिथिलता नहीं बरती जायेगी.