‘अच्छे दिन’ आयो रे ! ट्रेनों के गंदे बॉथरूम में आम आदमी का सफ़र

भारतीय ट्रेनों में भीड़ के चित्र पहले भी देखने में आते रहे हैं लेकिन पटरियों के ऊपर से गुजरी विद्युत लाइन ने इस भीड़ की तस्वीर में परिवर्तन कर दिया है। तस्वीर बदली है लेकिन हालत सुधरने के बजाय और बदतर ही हुई है और जो इंतजाम न होने से लाजमी भी है। लेकिन मसला यह भी है कि अब वह भीड़ छतों पर नहीं दिखती। 

इस लोकतंत्र में छंछूदर हमारे सिर पर नाचे, पूँजीवादी जूतों से आम आदमी ख़ूनमख़ून

आज एक सप्ताह पुराने अखबार देखे। पहला समाचार- ‘हम फिर 2017 चुनाव जीतकर वापस आयेंगे : अखिलेश यादव’। दूसरा समाचार – ‘मई 10, 2015 – लखनऊ के कृष्णानगर में 18 माह की दूधमुही बच्ची के साथ बलात्कार, खून बहते हुए गंभीर हालत में लोकबन्धु हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, बच्ची के मां कचरा बीनकर सड़क के किनारे ही जीवन बिताती है’….