एचटी समिट के लिए एक करोड़ के प्रायोजक जुगाड़ने की जिम्मेदारी मुझे दी जाती थी : अनुपमा

Mukesh Kumar : एस्सार मामले में केवल शांतनु सैकिया का ही नहीं सात पत्रकारों के नाम लिए जा रहे हैं। इनमें से एक अनुपमा हिंदुस्तान टाइम्स की एनर्जी एडिटर हैं जिन्हें अख़बार ने निलंबित कर दिया है। लेकिन अनुपमा ने उलटवार करते हुए कहा है कि उनका अख़बार और संपादक उन्हें लगातार इस्तेमाल करता रहा है और एचटी सम्मिट के लिए एक करोड़ के प्रायोजक जुगाड़ने की जो ज़िम्मेदारी उसे दी जाती थी, वह उसे निभाती भी थी। इसी तरह दैनिक भास्कर के भी एक पत्रकार के इसमें शामिल होने का शक़ है। बाक़ी पत्रकारों के नाम अभी मिले नहीं हैं मगर पूरा मामला खुले तो राडिया कांड-2 जैसा होगा।

वरिष्ठ पत्रकार मुकेश कुमार के फेसबुक वॉल से.

यादव सिंह पीआईएल : हलफनामे से सीबीसीआईडी जांच की सच्चाई खुली

यादव सिंह मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर की पीआईएल में देबाशीष पांडा, प्रमुख सचिव, गृह द्वारा दायर हलफनामे से श्री यादव के खिलाफ सीबीसीआईडी जांच की सच्चाई सामने आ जाती है. नॉएडा प्राधिकरण के आर पी सिंह ने सेक्टर-39, नॉएडा में दायर एफआईआर में श्री सिंह और श्री रामेन्द्र पर 8 दिनों में 954.38 करोड़ के बांड हस्ताक्षित करने के साथ तिरुपति कंस्ट्रक्शन और जेएसपी कंस्ट्रक्शन द्वारा 08 दिसंबर 2011 को भूमिगत 33/11 केवी केबल का 92.06 करोड़ का काम ठेका मिलने के पहले ही 60 फीसदी काम पूरा कर लेने में मिलीभगत का आरोपी बताया था.

Yadav Singh PIL : Affidavit exposes CBCID enquiry truth

The affidavit filed by Principal Secretary Home Debashish Panda before Lucknow bench of Allahabad High Court in the PIL filed by social activist Dr Nutan Thakur in Yadav Singh scam, exposes the truth about CBCID enquiry against Sri Yadav. R P Singh of Noida Authority registered an FIR in Sector 39, Noida against Sri Singh and Sri Ramendra for executing bonds worth Rs. 954.38 crores in merely 8 days and for colluding with Tirupati Construction and JSP Construction, who completed 60 percent of Rs. 92.06 crore underground 33/11 KV cable work before actual execution of contract on 08 December 2011.

कार्पोरेट गठजोड़ का हुआ खुलासा : मंत्री से लेकर पत्रकार तक पर एस्सार निसार

एस्सार समूह के आंतरिक पत्राचार से खुलासा हुआ है कि कंपनी ने सत्ताधारियों, रसूखदार लोगों को उपकृत करने करने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाए। एक ‘विसल ब्लोअर’ ने इस पत्राचार को सार्वजनिक करने का फैसला किया है और अब ये जानकारियां अदालत में पेश होने वाली हैं। जुटाए गए पत्राचार में ई-मेल, सरकारी अधिकारियों के साथ हुई बैठकों से जुड़े पत्र और मंत्रियों, नौकरशाहों और पत्रकारों को पहुंचाए गए फायदों से जुड़ी जानकारियां हैं। सुप्रीम कोर्ट में दायर होने वाली एक जनहित याचिका में ये बातें रखी गई हैं। सेंटर फार पब्लिक इंट्रेस्ट लिटीगेशन की ओर से यह याचिका दायर की जाएगी। पत्राचार से जानकारी मिली है कि एस्सार अधिकारियों ने दिल्ली के कुछ पत्रकारों के लिए कैब भी मुहैया कराई।

दैनिक जागरण, अमर उजाला और हिन्दुस्तान के सोनभद्र प्रमुखों का पुतला दहन

सोनभद्र। जिले के भ्रष्ट नौकरशाहों, नेताओं और खनन माफियाओं के पक्ष में खबरें प्रकाशित करना राष्ट्रीय स्तर के तीन अखबारों के ब्यूरो प्रमुखों को भविष्य में भारी पड़ सकता है। रॉबर्ट्सगंज स्थित कांशीराम आवास कॉलोनी के बाशिंदों ने रविवार को हिन्दुस्तान, अमर उजाला और दैनिक जागरण के ब्यूरो प्रमुखों का पुतला दहन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां के लोग कॉलोनी में व्याप्त समस्याओं के साथ गरीबों और आम जनता के अधिकारों के लिए भ्रष्ट अधिकारियों से लड़ते हैं लेकिन दैनिक जागरण, अमर उजाला और हिन्दुस्तान अखबार के ब्यूरो प्रमुख उनकी खबरों को प्रकाशित नहीं करते हैं।

कांग्रेस राज के मुकाबले मोदी राज में ज्यादा करप्ट और तानाशाह है डीएवीपी

: मोदी सरकार की बदनामी का कारण बन रहा है DAVP : सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अन्‍तर्गत आने वाले भारत के सबसे बड़े भ्रष्‍ट व तानाशाही पूर्ण रवैया वाली सरकारी एजेंसी जिसे डीएवीपी कहा जाता है, ने पूरे देश के इम्‍पैनलमेंट किये गये समाचार पत्रों की लिस्‍ट 11 फरवरी 2015 को जारी की है. DIRECTORATE OF ADVERTISING AND VISUAL PUBLICITY यानि DAVP भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अन्‍तर्गत आता है. यह विभाग देश भर के हर छोटे व बड़े समाचार पत्रों को विज्ञापन हेतु इम्‍पैनल करता है. बडे अखबारों को छोडकर लघु व मध्‍यम समाचार पत्रों को साल भर में बड़ी मुश्‍किल से दो विज्ञापन देता है. वह भी 400 वर्गसेमी के.

ग्वालियर में मीडिया और पुलिस का कथित गठजोड़, 2 करोड़ की खुली बंदरबांट!

खबर ग्वालियर से है। पुलिस, पत्रकारों, कुछ प्रादेशिक चैनल के ब्यूरो हैड और क्राईम ब्राँच के पुलिस कर्मचारियों, अधिकारीयों के गठजोड़ के बीच 2 करोड़ रुपये की बंदरबांट की गई है. चर्चा के मुताबिक एक प्रादेशिक चैनल के ब्यूरो हेड ने 3 अन्य प्रादेशिक चैनल के कारिंदो और लोकल चैनल व लोकल अख़बार के कुछ पत्रकारों एवं क्राइम ब्राँच के कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से 2 करोड़ रुपये हज़म किये हैं.

बेइन्तहा पैसे वाली हो गई डाक कर्मचारी की बेटी मायावती पर टिकट बेचने को लेकर चौतरफा हमला :

: बसपा से बिदकते नेताओं की भाजपा पहली पसंद : बसपा सुप्रीमो मायावती के ऊपर एक बार फिर टिकट बेचने का गंभीर आरोप लगा है।यह आरोप भी पार्टी से निकाले गये बसपा के एक कद्दावर नेता ने ही लगाया है।मायावती के विरोधियों और मीडिया में अक्सर यह चर्चा छिड़ी रहती है कि बसपा में टिकट वितरण में खासकर राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों में पार्दशिता नहीं दिखाई पड़ती है। विपक्ष के आरोपों को अनदेखा कर भी दिया जाये तो यह बात समझ से परे हैं कि बसपा छोड़ने वाले तमाम नेता मायावती पर टिकट बेचने का ही आरोप क्यों लगाते हैं। किसी और नेता या पार्टी को इस तरह के आरोप इतनी बहुतायत में शायद ही झेलने पड़ते होंगे। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि धुआ वहीं से उठता है जहां आग लगी होती है। आरोप लगाने वाले तमाम नेताओं की बात को इस लिये भी अनदेखा नहीं किया क्योंकि यह सभी नेता लम्बे समय तक मायावती के इर्दगिर्द रह चुके हैं और उनकी कार्यशैली से अच्छी तरह से परिचित हैं।

एक अकेले बंदे ने, एक अकेली शख्सियत ने पूरी की पूरी केंद्र सरकार की नींद उड़ा रखी है

दिल्ली चुनाव इन दिनों आकर्षण और चर्चा का केंद्र है. हो भी क्यों ना, एक अकेले बंदे ने, एक अकेली शख्सियत ने पूरी की पूरी केंद्र सरकार की नींद उड़ा कर रखी हुई है. आपको याद होगा कि 2013 में सरकार गठन पर अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि अन्य दलों को राजनीति तो अब आम आदमी पार्टी सिखाएगी. अब जाकर यह बात सही साबित होती हुई दिखाई दे रही है. जहाँ महाराष्ट्र, झारखंड, जम्मू कश्मीर और हरियाणा में बीजेपी ने बिना चेहरे के मोदी के नाम पर चुनाव लड़ा और नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाया लेकिन दिल्ली में उसे चेहरा देना ही पड़ा. अपने पुराने सिपहसालारों व वफादारों को पीछे करके एक बाहरी शख्सियत को आगे लाया गया. देखा जाए तो ये भी अपने आप में केजरीवाल और उनकी पार्टी की जीत है. कहना पड़ेगा, जो भी हो, बन्दे में दम है.

आईबीएन7 और ईटीवी वालों ने स्ट्रिंगरों को वेंडर बना डाला! (देखें फार्म)

अंबानी ने चैनल खरीद लिया तो जाहिर है वह एक तीर से कई निशाने साधेंगे. साध भी रहे हैं. मीडिया हाउस को मुनाफे की फैक्ट्री में तब्दील करेंगे. मीडिया हाउस के जरिए सत्ता की दलाली कर अपने दूसरे धंधों को चमकाएंगे. मीडिया हाउस के जरिए पूरे देश में रिलायंस विरोधी माहौल खत्म कराने और रिलायंस पक्षधर दलाली को तेज कराने का काम कराएंगे. इस कड़ी में वे नहीं चाहते कि जिले से लेकर ब्लाक स्तर के पत्रकार कभी कोई आवाज उठा दें या रिलायंस की पोल खोल दें या बागी बन जाएं. इसलिए रिलायंस वाले खूब विचार विमर्श करने के बाद स्ट्रिंगरों को वेंडर में तब्दील कर रहे हैं. यानि जिले स्तर का आईबीएन7 और ईटीवी का स्ट्रिंगर अब वेंडर कहलाएगा और इस बाबत दिए गए फार्मेट पर हस्ताक्षर कर अपने डिटेल कंपनी को सौंप देगा.

सतीश उपाध्याय, उमेश उपाध्याय और बिजली कंपनियों का खेल

Madan Tiwary : सतीश उपाध्याय पर अरविन्द केजरीवाल ने आरोप लगाये है बिजली के मीटर को लेकर सतीश उपाध्याय बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष हैं। उन्होंने मानहानि का मुकदमा करने की धमकी दी है और आरोपों से इंकार किया है। सतीश जी, शायद केजरीवाल के हाथ बहुत छोटी सी जानकारी लगी है। आप जेल चले जायेंगे सतीश जी। आपके ऊपर करीब चार सौ करोड़ बिजली कंपनी से लेने का मुद्दा बहुत पहले से गरमाया हुआ है और आपके भाई उमेश उपाध्याय की सहभागिता का भी आरोप है। यह दीगर बात है कि पत्रकार बिरादरी भी यह सबकुछ जानते हुए खुलकर नहीं बोल रही है। दिल्ली की जनता को दुह कर दिल्ली की सत्ता को दूध पिलाने का काम करती आ रही हैं बिजली कंपनियां। खैर मुद्दा चाहे जो हो लेकिन एक साल के अंदर बिजली की दर 2:80 प्रति यूनिट से 4:00 प्रति यूनिट करने की दोषी तो भाजपा है ही। देश है, सब मिलकर बेच खाइये। जनता है, किसी न किसी को वोट देगी ही। काश! देश की जनता सही लोगों को चुन पाती या चुनाव बहिष्कार कर पाती। अपने नेताओं से सवाल कर पाती। काश।

यूपी में जंगल राज : भ्रष्टाचारी घर में घुसकर हत्या कराने की धमकी दे रहे, पुलिस प्रशासन मौन साधे है

To: pmindia@nic.in, pmosb@nic.in, cmup@nic.in, csup@nic.in, manojksinha.bjp@gmail.com, manojsinha.mp@sansad.nic.in

दिनांक: 27/12/2014

सेवा में,

माननीय प्रधानमंत्री,

भारत सरकार, नई दिल्ली

विषय: ग्राम प्रधान छावनी लाइन गाजीपुर उ० प्र०, इस ग्राम प्रधान के पति तथा परिजनों द्वारा किये गये विभिन्न भ्रष्टाचार की शिकायत करने पर शिकायतकर्ता को जान से मारने की मिल रही धमकियों के सम्बन्ध में।

डीआई पीआर में 4 पेज के अखबार को राज्यस्तरीय बनाने वाला कौन है?

: राजस्थान के डीआई पीआर में अखबारों की मान्यता का फर्जीवाड़ा : 4 पेज के अखबार को राज्यस्तरीय दर्जा, लाखों का चूना : जोधपुर। राजस्थान के सूचना एवं जन सम्पर्क निदेशालय के आला अधिकारी अखबारों की मान्यता की कार्यवाही मे बड़े स्तर पर घपला कर सरकार को चूना लगा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है जोधपुर में फर्जी प्रिंट लाईन से छप रहे 4 पेज के अखबार दैनिक प्रतिनिधि का। दैनिक प्रतिनिधि का मालिक खुद को राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी का रिश्तेदार बताता है। उक्त समाचार पत्र का एक ही संस्करण जोधपुर में छप  रहा है। इस चार पेज के अखबार के पीछे  प्रिन्ट लाईन में नियम तोड़ कर प्रिन्टिंग प्रेस के पते की सूचना तक दर्ज नहीं की जा रही हैं जबकि प्रेस एक्ट में मुद्रणालय के पूरे पते की सूचना आवश्यक रूप से दी जाती है। जिस भण्डारी ऑफसेट से यह अखबार छपना बताया जा रहा है इस नाम की कोई प्रिंन्टिंग प्रेस अस्तित्व में नही है।

बड़ा संपादक-पत्रकार बनने की शेखर गुप्‍ता और राजदीप सरदेसाई वाली स्टाइल ये है…

Abhishek Srivastava : आइए, एक उदाहरण देखें कि हमारा सभ्‍य समाज आज कैसे गढ़ा जा रहा है। मेरी पसंदीदा पत्रिका The Caravan Magazine में पत्रकार शेखर गुप्‍ता पर एक कवर स्‍टोरी आई है- “CAPITAL REPORTER”. गुप्‍ता की निजी से लेकर सार्वजनिक जिंदगी, उनकी कामयाबियों और सरमायेदारियों की तमाम कहानियां खुद उनके मुंह और दूसरों के मार्फत इसमें प्रकाशित हैं। इसके बाद scroll.in पर शिवम विज ने दो हिस्‍से में उनका लंबा साक्षात्‍कार भी लिया। बिल्‍कुल बेलौस, दो टूक, कनफ्यूज़न-रहित बातचीत। खुलासों के बावजूद शख्सियत का जश्‍न जैसा कुछ!!!

अपराधी मीडिया मालिक छुट्टा घूम रहे, विज्ञापन एजेंट को तीन साल की जेल हो गई

किसी अखबार या चैनल मालिक को आपने पेड न्यूज या छंटनी या शोषण या चोरी के मामले में जेल जाते आपने नहीं सुना होगा लेकिन एक विज्ञापन एजेंट को तीन साल की जेल की सजा इसलिए हो गई क्योंकि उसने अखबार में विज्ञापन छपवाकर उसका पेमेंट जमा नहीं कराया. विज्ञापन छपवा कर पैसे न जमा कराना अपराध है. उचित ही सजा मिली. लेकिन ऐसी सजाएं बड़े लोगों को अपराध में क्यों नहीं होती.

सहारा समय चैनल ने दिया चुनाव में वसूली का टार्गेट

झारखण्ड में चल रहे विधानसभा चुनाव के मद्देनज़र मीडिया में चुनावी खर्चे की वसूली की चर्चा शुरू हो गयी है। इस कड़ी में सबसे बड़ा नाम है इन दिनों विवादों से ग्रस्त कंपनी के चैनल सहारा समय बिहार झारखण्ड का। विगत चार नवम्बर को रांची कार्यालय में हुई बैठक में सभी रिपोर्टरों को चुनाव में टार्गेट का टास्क दिया गया था। इस बैठक में बिहार झारखण्ड के चैनल हेड भी उपस्थित थे।

इंडिया टीवी का खर्चीला प्रोग्राम यानि मीडिया के भ्रष्टाचार पर कोई जुबान क्यों नहीं खोलता?

Mohammad Anas : INDIA TV पर जश्न का माहौल है। मौका है नाटकीय और पहले से तय सवाल जवाब वाले शो ‘आपकी अदालत’ के 21 साल पूरे होने के। हर क्षेत्र के दिग्गज मौजूद हैं। पूरे प्रोग्राम पर अमूमन कितना खर्च हो रहा है, यह मेहमानों की लिस्ट देख कर आप अंदाजा लगा सकते हैं। पैसे की बर्बादी पर क्या कोई चैनल टूटेगा या फिर आज़म की बग्घी और यादव सिंह की चटाई के नीचे छिपे नोट पर ही लोटपोट होना आता है? मीडिया के भ्रष्टाचार पर कोई ज़ुबान क्यों नहीं खोलता।

कोर्ट खुद संज्ञान लेकर यादव सिंह और उसकी पत्नी को कठोर दंड दे और नजीर कायम करे

प्रिय यशवंत भाई,  पिछले कई महीनों से लिखने की सोच रहा था लेकिन काम की व्यस्तता के कारण लिख नहीं पाया और कई बार टाइम होने के बाद भी लिखने का मन नहीं किया क्योंकि सरकार, कर्मचारी, अफसर, राजनेता सब इतने ढीठ हो गए हैं कि तुम उनको कितना भी सुनाते रहो, लिखते रहो उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगती क्योंकि वो करते वहीं हैं जो उनको करना है क्योंकि उनको पता है कि भारत का कानून इतना लचीला है कि उनका कोई कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता।

कुछ मीडिया घराने बीजेपी के दलाल बन गए हैं : ममता बनर्जी

दुर्गापुर। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ बेबुनियाद खबरें दिखाने को लेकर मीडिया पर हमला किया। एक रैली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष बनर्जी ने कहा कि जिस तरह खाने की सामग्री बेची जाती है, उसी तरह मेरी सरकार के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण गलत खबरें बेचना एक नया व्यापार बन गया है।

Suspected money laundering by the Adani Group!

Yogendra Yadav : Here is a letter written by former IAS officer (former secretary to government of India) and noted anti-corruption crusader Mr EAS Sarma to various central investigating agencies about the suspected money laundering by the Adani Group. Mr Sarma has pointed out that the Supreme Court appointed Special Investigation Team on black money is investigating the matter and the State Bank of India should not have signed the MoU with the group under investigation for money laundering. Read the letter for yourself and please give a thought on what our Modi Sarkar is up to.

भ्रष्टाचार का आरोप लगते ही जोर-जोर से रोने लगी महिला अधिकारी

देवरिया : जिले के आपूर्ति विभाग में तैनात निरीक्षक श्रीमती मीरा राय भ्रष्टाचार का आरोप लगने पर प्रदेश के प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग जितेन्द्र कुमार के सामने जोर जोर से रोने लगीं। प्रमुख सचिव उस दिन देवरिया जिले के दौर पर थे और जिला अधिकारी शरद कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक डा0 एस चनप्पा के साथ जिलाधिकारी के कार्यालय में बैठकर लोगों की फरियाद सुन रहे थे। उसी समय कुछ लोगों ने श्रीमती राय की शिकायत की। जब प्रमुख सचिव ने आपूर्ति निरीक्षक श्रीमती राय को तलब किया तो आते ही श्रीमती राय जोर जोर से रोने लगी तथा रो रो कर अपनी व्यथा सुनाने लगी। उनका रोना बन्द नहीं हो रहा था लेकिन जब डांट कर प्रमुख सचिव ने चुप कराया तो उनका रोना बन्द हुआ।

राजस्थान पत्रिका, जोधपुर में भ्रष्टाचार और जातिवाद चरम पर, गुलाब और नीहार कोठारी को भेजा गया गोपनीय पत्र

यशवंत जी, यह पत्र दो सप्ताह पहले राजस्थान पत्रिका के प्रमुख गुलाब कोठारी और नीहार कोठोरी को भेजा गया था… इस आशा के साथ कि यह पत्र मिलने के बाद कोई ठोस कार्यवाही होगी… लेकिन जैसे खबरें दबाई जाती हैं, वैसे ही इस पत्र को दबा दिया गया… आखिर में यह पत्र आपको भेजा जा रहा है… व्हिसल ब्लोअर का नाम उजागर नहीं करना पत्रकारिता का धर्म है और बात रही सत्यता की एक भी बात असत्य नहीं है… हर कर्मचारी पीड़ित है…

मोदी सरकार ने जनता के हिस्से के 6000 करोड़ रुपये हड़प लिए!

Anil Singh : बेशर्मी की हद है…. इस सरकार ने एक झटके में लूट लिए 6000 करोड़ रुपये… महंगाई खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई मोदी सरकार को इतनी भी शर्म नहीं है कि अंतरराष्ट्रीय वजहों से सस्ते हुए पेट्रोल व डीजल का पूरा लाभ अवाम तक पहुंचने दे। मौका ताड़कर उसने अनब्रांडेड पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 1.20 से बढ़ाकर 2.70 रुपए, ब्रांडेड पेट्रोल पर 2.35 से बढ़ाकर 3.85 रुपए, अनब्रांडेड डीजल पर 1.46 रुपए से बढ़ाकर 2.96 रुपए और ब्रांडेड डीजल पर 3.75 से बढ़ाकर 5.25 रुपए कर दिया। इससे उसे अभी से लेकर मार्च 2015 तक के साढ़े चार महीनों में ही 6000 करोड़ रुपए मिल जाएंगे।

हिंदी संस्थान के पुरस्कार पाने वालों में 80 प्रतिशत से ज्यादा पोंगापंथी और सांप्रदायिक मानसिकता के लोग हैं

Anil Kumar Singh : कँवल भारती की औकात बताने के बाद आज उत्तर प्रदेश सरकार ने हिंदी संस्थान के पुरस्कारों की घोषणा कर दी है. चूंकि मायावती की सरकार ने इन पुरस्कारों को बंद कर दिया था इसलिए पूरी कोशिश की गई है कि इस लिस्ट से दलितों का पत्ता पूरी तरह साफ रहे. भाजपा के शासन में पंडित दीनदयाल उपाध्ध्याय के नाम पर पुरस्कार शुरू किया गया था, उसे चालू रखा गया है क्योंकि उससे सपा के समाजवाद को मजबूती मिलने की संभावना है २०१४ में. दो-तीन यादव भी हैं क्योंकि इस समय की मान्यता है कि असली समाजवादी वही हो सकते हैं. खोज-खाज कर एक दो मुस्लिम भी लाये गए हैं क्योंकि उनके बिना समाज वाद २०१४ का ख्वाब भी नहीं देख सकता.

हिंदी संस्थान ने लखकों को झूठा-फ्रॉड साबित कर अपनी फोरेंसिक लैबोरोट्री भी खोल ली है…

Dayanand Pandey : उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में इस बार पुरस्कार वितरण में धांधली भी खूब हुई है। इस धांधलेबाजी खातिर पहली बार उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने एक फर्जी फोरेंसिक लैब्रोटरी भी खोल ली है। तुर्रा यह कि बीते साल किसी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में किसी ने याचिका दायर कर दी थी सो इस याचिका कर्ता के भय में लेब्रोटरी में खुद जांच लिया कि कौन सी किताब किस प्रेस से कैसे छपी है और इस बिना पर कई सारी किताबों को समीक्षा खातिर ही नहीं भेजा समीक्षकों को। और इस तरह उन्हें पुरस्कार दौड़ से बाहर कर दिया। क्या तो वर्ष 2014 की छपाई है कि पहले की है कि बाद की है। खुद जांच लिया, खुद तय कर लिया। ज़िक्र ज़रूरी है कि इस बाबत लेखक की घोषणा भी हिंदी संस्थान लेता ही है हर बार।

यूपी में जंगलराज : केएनआईटी सुलतानपुर में क्यों है इस कदर भ्रष्टाचार!

कमला नेहरू प्रौद्यौगिकी संस्थान सुलतानपुर में भ्रष्टाचार की जडे़ं इतनी गहरी है जिसका पूरा अन्दाजा लगा पाना थोड़ा मुश्किल है। तकनीकी शिक्षा के लिए सरकारी गजट और शासन द्वारा बनाये गये नियम कानून के यहां कोई मायने नहीं हैं।  कई कहानियां हैं। एक-एक कर बताते हैं। यहां कार्यवाहक निदेशक के रूप में के.सी. वर्मा तैनात है। इनकी खुद की तैनाती एक बड़ी कहानी है, जिसे बाद में बताएंगे। पहले इनके अपने अपने चहेते सदा शिव मिश्र के बारे में जानिए। वर्मा जी ने अपने चहेते सदा शिव मिश्र को 2012 में दो बार पदोन्नति दी, शासनादेश एवं निर्देशों की धज्जियां उड़ाकर। लाबिंग मजबूत करने के लिए राम चन्द्र तिवारी को निदेशक के वैयक्तिक सहायक के पद पर अनर्गल पदोन्नत करने के साथ ही अन्य लाभ देने का काम किया गया।

राजदीप सरदेसाई के धतकरम के बहाने अपने दाग और जी न्यूज के पाप धोने में जुटे सुधीर चौधरी

सौ चूहे खा के बिल्ली चली हज को… जी न्यूज पर पत्रकारिता की रक्षा के बहाने हाथापाई प्रकरण को मुद्दा बनाकर राजदीप सरदेसाई को घंटे भर तक पाठ पढ़ाते सुधीर चौधरी को देख यही मुंह से निकल गया.. सोचा, फेसबुक पर लिखूंगा. लेकिन जब फेसबुक पर आया तो देखा धरती वीरों से खाली नहीं है. युवा मीडिया विश्लेषक विनीत कुमार ने सुधीर चौधरी की असलियत बताते हुए दे दनादन पोस्टें लिख मारी हैं. विनीत की सारी पोस्ट्स इकट्ठी कर भड़ास पर प्रकाशित कर दिया. ये लिंक http://goo.gl/7i2JRy देखें. ट्विटर पर पहुंचा तो देखा राजदीप ने सुधीर चौधरी पर सिर्फ दो लाइनें लिख कर तगड़ा पलटवार किया हुआ है. राजदीप ने रिश्वत मांगने पर जेल की हवा खाने वाला संपादक और सुपारी पत्रकार जैसे तमगों से सुधीर चौधरी को नवाजा था..

हम हैं यूपी के पत्रकार, कानून हमारी जेब में!

लखनऊ। सरकार और आम जनता के बीच का आईना समझा जाने वाला मीडिया और उसमें कार्यरत पत्रकार चरित्रहीनता की पराकाष्ठा को लांघते जा रहे हैं। चाहें बड़ी कम्पनियों की प्रेस वार्ताओं में उपहार ‘‘डग्गा’’ को लेकर मारामारी हो या फिर सरकार से लाभ लेने की होड़। चाहें पीड़ितों से माल ऐंठकर उनके काम का आश्वासन का मामला हो या फिर अपराधियों को शरण देने के एवज में मोटी कमाई की लालसा। बलात्कार के मामलों से लेकर हत्या और लूट जैसे मामलों में पत्रकारों की संलिप्तता मीडिया के मिशन को गहरी चोट देती आयी है।

यूपी में सरकारी सम्पत्ति पर मीडिया की मण्डी, नियम ताक पर

राज्य सरकार की सम्पत्तियों पर मीडिया की दुकानें सजी हुई हैं। इन कथित खबरनवीसों ने बकायदा अपने अखबार की प्रिंट लाइन में नियम विरूद्ध तरीके से सरकारी आवासों का पता दे रखा है। इतना ही नहीं आरएनआई को भेजे शपथ पत्रों में भी सरकारी आवासों को अखबार का कार्यालय दर्शाया गया है। दूसरी ओर तत्कालीन मुलायम सरकार के कार्यकाल में अनुदानित दरों पर प्लॉट और मकान हथियाने वाले तथाकथित नामचीन पत्रकार भी अपनी गरिमा को ताक पर रखकर नियम विरूद्ध तरीके से अपने मकानों और भू-खण्डों को या तो बेच चुके हैं या फिर उसे किराए पर देकर स्वयं सरकारी आवासों का सुख भोग रहे हैं।

जिया न्यूज की बढ़ी मुश्किलें: पूर्व एचआर हेड सहित 18 कर्मी पहुंचे कोर्ट, प्रबंधन को नोटिस

जिया न्यूज की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। ताजा मामले में एक बार फिर से चैनल के 18 पूर्व कर्मचारी, जो कि बिना कारण बर्खास्त कर दिए गए थे, ने अपना बकाया लेने के लिए लेबर कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया है। आमतौर पर ऐसा होता नहीं है, लेकिन जिया न्यूज में जो हो जाए कम है क्योंकि इस चैनल के तो एचआर/एडमिन हेड को अपने अधिकार के लिए लेबर कोर्ट जाना पड़ा है।