भोंपू को अख़बार न कहो प्रियदर्शन… जागरण कोई अख़बार है! : विमल कुमार

Vimal Kumar : दो साल की सज़ा या जुर्माना या दोनों एक साथ का प्रावधान है। ये लोग अदालत को मैनेज कर केवल जुर्माना देकर बच जाएंगे। जिसने विज्ञापन दिया उसे भी जेल की सजा हो। जागरण कोई अख़बार है, भोंपू को अख़बार न कहो प्रियदर्शन!

यशवंत की जागरण कर्मियों को सलाह- संजय गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए चुनाव आयुक्त को पत्र भेजो

Yashwant Singh : दैनिक जागरण का संपादक संजय गुप्ता है. यह मालिक भी है. यह सीईओ भी है. एग्जिट पोल वाली गलती में यह मुख्य अभियुक्त है. इस मामले में हर हाल में गिरफ्तारी होनी होती है और कोई लोअर कोर्ट भी इसमें कुछ नहीं कर सकता क्योंकि यह मसला सुप्रीम कोर्ट से एप्रूव्ड है, यानि एग्जिट पोल मध्य चुनाव में छापने की कोई गलती करता है तो उसे फौरन दौड़ा कर पकड़ लेना चाहिए. पर पेड न्यूज और दलाली का शहंशाह संजय गुप्ता अभी तक नहीं पकड़ा गया है.

संपादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया, गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये : देवेंद्र सुरजन

Devendra Surjan : एक्ज़िट पोल छापने वाले जागरण परिवार की पूर्व पीढ़ी के दो और सदस्य सांसद रह चुके हैं. गुरुदेव गुप्ता और नरेन्द्र मोहन. यह परिवार सत्ता की दलाली हमेशा से करता आ रहा है. वर्तमान में जागरण भाजपा का मुखपत्र बना हुआ है. सत्ताधीशों का धन इसमें लगा होने की पूरी सम्भावना है. हर राज्य में किसी न किसी नाम से और किसी न किसी रूप में संस्करण निकाल कर सरकार के क़रीबी बना रहना इस परिवार को ख़ूब आता है. एक्ज़िट पोल छाप कर सम्पादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया जबकि गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये थी.

जागरण का मालिक और सीईओ संजय गुप्ता ने पेड न्यूज करने के धंधे को कुबूल कर लिया

Om Thanvi : इंडियन एक्सप्रेस में जागरण के सम्पादक-मालिक और सीईओ संजय गुप्ता ने कहा है कि उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के मतदान से पहले जागरण द्वारा शाया किया गया एग्ज़िट पोल उनके विज्ञापन विभाग का काम था, जो वेबसाइट पर शाया हुआ। (“Carried by the advertising department on our website”) माने साफ़-साफ़ पेड सर्वे!

दैनिक जागरण प्रबंधन ने अपने सभी संपादको को भूमिगत होने का निर्देश दिया!

खोज खोज कर जागरण सम्पादकों को पकड़ रही है पुलिस… चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में देश की सर्वोच्च चुनावी अथॉरिटी चुनाव आयोग द्वारा दैनिक जागरण के 15 जिलों के संपादकों सहित प्रधान संपादक और प्रबंध निदेशक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश का अनुपालन करते हुए यूपी पुलिस संपादकों को गिरफ्तार करने में जुट गई है. शेखर त्रिपाठी को गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में उन्हें जमानत मिल गई.

दैनिक जागरण के सम्पादक शेखर त्रिपाठी को मिली जमानत

चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में देश की सर्वोच्च चुनावी अथॉरिटी चुनाव आयोग द्वारा दैनिक जागरण के 15 जिलों के संपादकों सहित प्रधान संपादक और प्रबंध निदेशक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। इस आदेश के बाद दैनिक जागरण के संपादकों और प्रबंध निदेशक की अकल ठिकाने आ गयी है। खबर है कि दैनिक जागरण अखबार के ऑनलाइन सम्पादक शेखर त्रिपाठी को आचार संहिता का उल्‍लंघन करने पर गिरफ्तार किया गया। बाद में गाजियाबाद की जिला अदालत ने शेखर त्रिपाठी को जमानत दे दिया।

एग्जिट पोल छापने वाले जागरण के संपादक शेखर त्रिपाठी गिरफ्तार

दैनिक जागरण डॉट कॉम के संपादक शेखर त्रिपाठी को गाजियाबाद की कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दैनिक जागरण की वेबसाइट पर यूपी चुनाव के पहले चरण के बाद ही एग्जिट पोल दे दिया गया. इस पर चुनाव आयोग ने दैनिक जागरण के  प्रबंध संपादक, संपादक और एग्जिट पोल कराने वाली संस्था रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड यानि आरडीआई के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे. इसी के बाद पहली गिरफ्तारी जागरण डॉट कॉम के संपादक शेखर त्रिपाठी के रूप में हुई है. कुछ लोगों का कहना है कि संभव है बीजेपी से खबर चलने के लिए पैसा लिया होगा मालिक ने, लेकिन जेल गए शेखर त्रिपाठी.

एक्जिट पोल छाप कर दैनिक जागरण फंसा, आयोग ने कहा- FIR दर्ज करो

भारत के चुनाव आयुक्त ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के 15 जिले के चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दैनिक जागरण के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में संपादकीय विभाग के मीडिया हेड के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करायें।

दैनिक जागरण मजीठिया का लाभ कर्मचारियों को नहीं देगा! हिंदुस्तान, अमर उजाला और सहारा ने भी चली चाल

खुद को देश का नंबर वन अखबार बताने वाले दैनिक जागरण के कानपुर प्रबन्धन ने अपने कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से साफ़ तौर पर पलटी मार लिया है। यही नहीं कानपुर से प्रकाशित हिंदुस्तान और अमर उजाला तो यहाँ तक दावा कर रहे हैं कि वह अपने कर्मचारी को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दे रहे हैं। कानपुर से प्रकाशित राष्ट्रीय सहारा और आज अखबार ने अपने आर्थिक हालात का रोना रोते हुए मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से इनकार कर दिया है।

जागरण न्यूज़ पेपर के MD आशुतोष मोहन की गन्दी बात सुनिए

मुझसे जुलाई 2015 में छतरपुर की जागरण रीवा ब्यूरोशिप और एजेंसी के नाम पर इंदौर रीवा जोन जागरण के एमडी आशुतोष मोहन ने HDFC का 25000 का चेक लिया था, जो कि 28-07-15 को क्लीयर भी हो गया। बाद में इन लोगों ने किसी तरह का कोई पेपर न भेजा और ना ही कोई खबरें प्रकाशित की। आज करीब एक साल बाद तक पैसा वापस करने की बात ये लोग कहते रहे लेकिन पैसे लौटाए नहीं।

जिन लोगों ने ABVP के खिलाफ ज्ञापन दिया, जागरण ने उन्हीं को बता दिया अभाविप कार्यकर्ता!

जागरण वाले ये क्या छाप देते हैं… देखिए एक ब्लंडर : बदायूं में कल जिस अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के विरोध में वकीलों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन दिया था, आज दैनिक जागरण अख़बार ने उसी ABVP का वकीलों को कार्यकर्ता बता कर खबर छाप दिया. सुबह दैनिक जागरण अखबार देखकर वकील सकते में आ गए. एबीवीपी के खिलाफ ज्ञापन दिया था और उन्हें ही बता दिया गया एबीवीपी कार्यकर्ता. इस ब्लंडर को लेकर दैनिक जागरण के पाठकों में भारी रोष है. वकीलों ने माफीनामा न छापने पर अखबार के बहिष्कार की धमकी दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता को तलब किया

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न करने और सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानून, न्याय, संविधान तक की भावनाओं की अनदेखी करने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने आज दैनिक जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता और संजय गुप्ता को अगली सुनवाई पर, जो कि 25 अक्टूबर को होगी, कोर्ट में तलब किया है. आज सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न किए जाने को लेकर सैकड़ों मीडियाकर्मियों द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई हुई.

दैनिक जागरण में कितने यादव हैं, सीएम अखिलेश ने सरेआम पूछ लिया (देखें वीडियो)

Mahendra Yadav : मिस्टर दैनिक जागरण ! आप बताते क्यों नहीं कि दैनिक जागरण में कितने यादव हैं? जागरण फोरम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ये सवाल किया है तो जवाब तो बनता है न! चलिए, ब्राह्मण कितने हैं, ठाकुरों को कितनी जगह मिली है, कायस्थों को कितनी सीटें मिली हैं, बनियों को कितनी मिली है, कितने अल्पसंख्यक हैं, कितने आदिवासी हैं…कितने ओबीसी हैं..यही बता दीजिए..

दैनिक जागरण के मालिक और मैनेजर भगवान से नहीं डरते लेकिन जनता को भगवान के नाम पर डराते हैं, देखें तस्वीरें

ये तस्वीरें दैनिक जागरण लखनऊ कार्यालय के बाहर की हैं. इसे कहते हैं- ”पर उपदेश कुशल बहुतेरे” यानि जो लोग भगवान से ना डरते हुए अपने कर्मियों को उनका मजीठिया वेज बोर्ड वाला कानूनी, न्यायिक और संवैधानिक हक नहीं दे रहे हैं, वे ही लोग जनता को ईश्वर की नजर में होने का भय दिखाकर पेशाब न करने, कूड़ा न फेंकने की अघोषित हिदायत दे रहे हैं.

एबीसी आंकड़े : भास्कर ने देश और अमर उजाला ने उत्तर प्रदेश में बजाया दैनिक जागरण का बैंड

एबीसी के आंकड़े अभी आफिसियली जारी नहीं किए गए हैं लेकिन इसकी वेबसाइट पर डाले जा रहे आंकड़े मार्केट में सरकुलेट होने लगे हैं. ऐसा एबीसी के मेंबर अखबारों को एबीसी वेबसाइट पर मिली लागिन सुविधा के कारण संभव हो पा रहा है. भास्कर और अमर उजाला ने आंकड़े निकाल कर यह बता दिया है कि दैनिक जागरण की हर तरफ से बैंड बज रही है.

दैनिक जागरण के गाजियाबाद कार्यालय में उठापटक, इंदू शेखावत ने भूपेंद्र तालान के खिलाफ थाने में दी तहरीर

गजियाबाद । अधिकारियों की चाटुकारिता और खबरों के एवज में वसूली जैसे आरोपों के कारण चर्चा में रहने वाले दैनिक जागरण के गाजियाबाद कार्यालय में उठापटक और सिर फुटव्व्ल की नौबत आ गयी है। ताजा मामला नगर निगम के आयुक्त अब्दुल समद के पक्ष में प्लांट करके लगायी जा रही खबरों से जुड़ा है। नगर निगम की बीट जागरण संवाददाता भूपेंद्र तालान देखते हैं। काफी समय से तालान पर यह आरोप लग रहे थे कि वह नगर आयुक्त के पक्ष में जागरण में पाजिटीव खबरें लगाा रहे हैं। इस मामले में जागरण के प्रबंधन को शिकायतें भी मिल रही थीं, लेकिन ब्यूरो चीफ राज कौशिक का सानिध्य होने के कारण तलान पर कभी आंच नहीं आयी।

जागरण के आजादी वाले कार्यक्रम में विनीत कुमार क्या जागरणकर्मियों के शोषण की बात रख पाएंगे?

Yashwant Singh : आज मंच जागरण का, परीक्षा विनीत कुमार की… ‘मीडिया मंडी’ किताब के लेखक विनीत कुमार मीडिया विमर्श में उभरते नाम हैं। विनीत बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। मीडिया संस्थानों के दोहरे मानदंडों को बेनकाब करने में विनीत कोई उदारता नहीं बरतते। सामाजिक मुद्दों पर भी विनीत की लेखनी ईमानदार और धारदार रही है। विनीत 4 अप्रैल यानि आज रोहतक में जागरण समूह की ओर से आयोजित किए जा रहे संवाद कार्यक्रम को मॉडरेट करने जा रहे हैं। कार्यक्रम ‘नारी से जुड़े आज़ादी और दायरा’ विषय पर है। इसका आयोजन रोहतक के झज्जर रोड पर स्थिति वैश्य महिला महाविद्यालय पर सुबह 11.30 बजे से है। कार्यक्रम की वक्ता शतरंज चैंपियन और लेखिका अनुराधा बेनिवाल हैं। विनीत ने अपने फेसबुक वॉल पर इस कार्यक्रम की बाकायदा पोस्टर के साथ जानकारी दी है।

अखिलेश यादव को मक्खन लगाने में दैनिक जागरण के संपादक दिलीप अवस्थी ने कलमतोड़ पसीना बहाया, आप भी पढ़ें

दैनिक जागरण, लखनऊ के संपादक दिलीप अवस्थी हैं. अखिलेश यादव की सरकार के चार साल पूरे होने पर इन्होंने एक विशेष आर्टकिल लिखा है दैनिक जागरण में. इस आर्टकिल को पढ़ते पढते आपको महसूस होगा कि इन्होंने अखिलेश यादव को मक्खन लगाते लगाते इस कदर कलमतोड़ पसीना बहाया है कि चमचागिरी के सारे प्रतिमान शरमा जाएं.

दैनिक जागरण ने इलाहाबाद के पूर्व मेयर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह को जीते जी मार दिया

दैनिक जागरण महान अखबार है. यहां कभी मायावती के लिए गंदी गंदी गालियां छप जाया करती हैं तो कभी जिंदा लोगों को मरा घोषित कर दिया जाता है. ताजा मामला इलाहाबाद एडिशन का है. कल दैनिक जागरण इलाहाबाद में पेज नंबर नौ पर एक छोटी सी खबर छपी है जिसमें बताया गया है कि पूर्व मेयर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह के निधन के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष निर्मल खत्री ने उनके घर पहुंचे और उन्होंने वहां शोक संतप्त परिवार को सांत्वाना दी.

मजीठिया : लेटलतीफी और समय पर जवाब न देने पर जागरण पर लगा 10 हजार रुपये का जुर्माना

नई‍ दिल्‍ली। दिल्‍ली में विश्‍वकर्मा नगर (झिलमिल कालोनी) स्थित उप श्रमायुक्‍त कार्यालय में चल रहे रिकवरी मामले में लेटलतीफी और समय पर जवाब नहीं देने पर दैनिक जागरण पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

दैनिक जागरण ने कब्जाई व्यापारी की करोड़ो की जमीन, कोर्ट में केस दर्ज

बुलंदशहर की जिलाधिकारी बी. चन्द्रकला के संग जबरन सेल्फी प्रकरण के बाद आरोपी की वकालत में फँसे दैनिक जागरण का नया फर्जीवाड़ा सामने आया है। बी0 चंद्रकला को उनके माता-पिता द्वारा परिवार की सम्पत्ति बँटवारे में मिले एक फ्लैट और तेलंगाना के नक्सल प्रभावित रंगारेड्डी जिले में कृषि योग्य कुछ ज़मीन पर सवाल खड़े करने वाला दैनिक जागरण खुद भूमाफिया है। समाचार-पत्र की आड़ में सरकारी सिस्टम पर हेकड़ी जमाकर दैनिक जागरण ने काली कमाई और अवैध जमीनों की खरीद का एक बड़ा साम्राज्य देश में खड़ा किया है। ताज़ा मामला राजधानी लखनऊ का है। आपको बताते हैं कैसे जागरण ने 50 करोड़ की ज़मीन को फर्जीवाड़ा करके कब्जा रखा है।

जागरण ने जो कूड़ा देश में फैलाया है उसके सामने यह कूड़ा कुछ भी नहीं

Mohammad Anas :  सोनभद्र, उत्तर प्रदेश से भी निकलता है दैनिक जागरण. इस अखबार ने दिसंबर 2015 से लेकर जनवरी 2016 तक लगातार साठ दिन तक शहर में मौजूद बूचड़खाने के खिलाफ कैम्पेन चलाया. वह बताता है कि बूचड़खाने से शहर का माहौल ख़राब होता है. हर रोज़ तीन चार हिन्दू नाम वाले व्यापारियों की तस्वीर लगा कर उनके मत प्रस्तुत करता है. कभी भाजयुमो से प्रदर्शन करवाता तो कभी विहिप से. फर्जी विरोध प्रदर्शन को अच्छा स्पेस देता. हवा बनाता है.

दैनिक जागरण के मालिकानों ने दिखाया अखिलेश सरकार को ठेंगा

नई दिल्ली/ नोएडा। हुआ वही जिसका अंदाजा था। तानाशाह दैनिक जागरण के मालिकानों ने उत्तर प्रदेश की समाजवादी अखिलेश यादव सरकार को ठेंगा दिखा दिया। अखिलेश सरकार ने गत 25 जनवरी को प्रदेश के मीडियाकर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन सेवा का शुभारम्भ किया था। खुद मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने सेवा की शुरुआत करते हुए उत्तर प्रदेश के तमाम मीडियाकर्मियों को इस बात का विश्वास दिलाया था कि हेल्पलाइन निश्चित रूप से मीडियाकर्मियों के मसलों को सुलझाएगी और उन्हें इन्साफ दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

दैनिक जागरण की कुत्सित मानसिकता पर बुलंदशहर के सफाईकर्मियों का प्रहार, आफिस को कचरे से पाटा (देखें वीडियो)

बुलंदशहर में डीएम संग जबरन सेल्फी खिचाने वाले आरोपी की वकालत करने वाले दैनिक जागरण को अब समाज के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 5 दिनों से महिला विरोधी मानसिकता से की जा रही पत्रकारिता पर जिले के सफाईकर्मियों ने प्रहार कर दिया है। महिला सम्मान की इज्जत उतारने वाले दैनिक जागरण का आफिस कूड़े से पाट दिया गया है और सफाईकर्मियों ने ऐलान किया है कि अगर अपनी बदतमीजियां जागरण ने बंद नही की तो पूरे शहर का कचरा जागरण के आफिस पर डाला जायेगा।

मानवाधिकारों का हनन कर रहा दैनिक जागरण, अहंकार त्यागने को तैयार नहीं मालिकान

नई दिल्ली/ नोएडा। मानवाधिकारों का हनन और कर्मचारियों का शोषण करने में नंबर एक संस्थान है दैनिक जागरण। ये अखबार खुद को विश्व में सबसे अधिक पढ़े जाने का दावा करता है। लेकिन इसे इस मुकाम तक पहुँचाने वाले कर्मचारियों का शोषण करने में इसने कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। आप अखबार उठाकर देखिये पूरा अखबार सदाचार, संस्कार और नैतिकता के बारे में भाषणों से भरा हुआ मिलेगा।

संजय गुप्ता यानि स्वतंत्रता का दुश्मन

Shrikant Singh : देश के इस दुश्‍मन को अच्‍छी तरह पहचान लें… दोस्‍तो, देश के दुश्‍मनों से लड़ने से कहीं ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण उन्‍हें पहचानना है। सीमापार के दुश्‍मनों से कहीं अधिक खतरनाक दुश्‍मन देश के अंदर हैं। आप उन्‍हें पहचान गए तो समझिए हमारी जीत पक्‍की। हम आपका ध्‍यान देश के एक ऐसे दुश्‍मन की ओर दिलाना चाहते हैं, जो पुलिस, प्रशासन, देश की न्‍यायपालिका और यहां तक कि देश की व्‍यवस्‍था तक को प्रभावित कर अपनी मुनाफाखोरी के जरिये इस देश को लूट रहा है। आप पहचान गए होंगे। हम दैनिक जागरण प्रबंधन की बात कर रहे हैं। आज 26 जनवरी है। गणतंत्र दिवस। इस दिन एक वाकया याद आ रहा है।

शर्मनाक : गायकी के उस्ताद अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन को दैनिक जागरण ने पाकिस्तानी फ़नकार बताया!

शर्म से डूब मरने की बात है। हिंदी के सबसे बड़े अख़बार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण ने जयपुर की माटी में खिलकर, गायकी के उस्ताद बने अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन को पाकिस्तानी फ़नकार बताया है। यह हाल है पराड़कर जी के शहर वाराणसी की पत्रकारिता का। नाक़ाबिले माफ़ी यह है ग़लती, क्योंकि सवाल किसी वर्तनीदोष या छपाई का नहीं है..इन उस्ताद भाइयों के परिचय में कुछ जोड़ा गया है यानी संपादनकला का परिचय दिया गया है…!

सहारा और जागरण के हजारों मीडिया कर्मियों के इतने बड़े-लंबे आंदोलनों को कवरेज नहीं दे रहे बड़े मीडिया हाउसों को अब बेशर्मी छोड़ने की जरूरत

आउटलुक मैग्जीन को धन्यवाद जो उसने सहारा मीडिया के हजारों कर्मियों की बड़ी पीड़ा को आवाज दी. साल भर से बिना सेलरी काम कर रहे और लगभग भुखमरी के शिकार हजारों मीडियाकर्मियों के सड़क पर उतरने और प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखने के बावजूद देश के बड़े मीडिया हाउसों की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली है. लगता है सहारा चिटफंड से अरबों खरबों का पैसा विज्ञापन के नाम पर डकारने के कारण ये मीडिया हाउस नमक का कर्ज अदा कर रहे हैं.

दैनिक जागरण में अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल के एक माह हुए पूरे, कर्मचारियों ने कहा- डटे रहेंगे

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफरिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों की हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है। पिछले डेढ़ वर्ष से अपने हक़ और इंसाफ के लिए आंदोलित कर्मचारी बेहद अनुशासित ढंग से पूरे महीने दिल्ली और नोएडा में प्रदर्शन करते रहे लेकिन जागरण प्रबंधन उनके आंदोलन को कुचलने में अपनी सारी ताकत खर्च करता रहा।

दूसरी तिमाही में जागरण के मालिकों ने 91 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ कमाया लेकिन कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड देने में नानी मर रही है

30 सितंबर को खत्म हुए वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजे बताते हैं कि जागरण प्रकाशन लिमिटेड यानि जेपीएल ने शुद्ध मुनाफा 91.27 करोड़ रुपये कमाया है. इस बाबत दैनिक जागरण की वेबसाइट पर भी खबर प्रकाशित की गई है. लेकिन इन जागरण के मालिकों को जब कानून के मुताबिक सही सही सेलरी देने की बात कही जाती है तो इनकी नानी मरने लगती है.