एग्जिट पोल छापने वाले जागरण के संपादक शेखर त्रिपाठी गिरफ्तार

दैनिक जागरण डॉट कॉम के संपादक शेखर त्रिपाठी को गाजियाबाद की कविनगर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. दैनिक जागरण की वेबसाइट पर यूपी चुनाव के पहले चरण के बाद ही एग्जिट पोल दे दिया गया. इस पर चुनाव आयोग ने दैनिक जागरण के  प्रबंध संपादक, संपादक और एग्जिट पोल कराने वाली संस्था रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड यानि आरडीआई के खिलाफ केस दर्ज करने के आदेश दिए थे. इसी के बाद पहली गिरफ्तारी जागरण डॉट कॉम के संपादक शेखर त्रिपाठी के रूप में हुई है. कुछ लोगों का कहना है कि संभव है बीजेपी से खबर चलने के लिए पैसा लिया होगा मालिक ने, लेकिन जेल गए शेखर त्रिपाठी.

यूपी में 11 फरवरी को पहले चरण के चुनाव हुए थे. इनमें पश्चिमी यूपी की 73 सीटों पर वोट डाले गए थे.  इन्हीं सीटों के एग्जिट पोल जागरण ने अपनी वेबसाइट पर डाले थे. दैनिक जागरण की ओर से सफाई भी दी गई है. जागरण की ओर से कहा गया है- ‘’डिजिटल इंग्लिश प्लेटफॉर्म के अलावा एग्जिट पोल से संबंधित खबर दैनिक जागरण अखबार में नहीं छापी गयी. इंग्लिश वेबसाइट पर एग्जिट पोल से जुड़ी एक खबर अनजाने में डाली गयी थी, इस भूल को फौरन सुधार लिया गया और संज्ञान में आते ही वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से संबंधित न्यूज रिपोर्ट को तुरंत हटा दिया गया था.’’

लेकिन चुनाव आयोग अपने आदेश पर कायम रहा. जिसके बाद 15 जिलों में जागरण और आरडीआई के खिलाफ केस दर्ज किए गए. चुनाव के सभी चरणों का मतदान पूरा होने से पहले एग्जिट पोल छापना आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है. जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 ए के मुताबिक यूपी चुनाव पर कोई भी व्यक्ति, 4 फरवरी की सुबह 7 बजे से लेकर 8 मार्च के शाम साढ़े 5 बजे तक कोई एग्जिट पोल नहीं कर सकता या इनके नतीजों को प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रकाशित नहीं कर सकता. दोषी पाए जाने पर दो साल की कैद या जुर्माना या दोनों ही सजा का प्रावधान है.

पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह की रिपोर्ट.

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एक्जिट पोल छाप कर दैनिक जागरण फंसा, आयोग ने कहा- FIR दर्ज करो

भारत के चुनाव आयुक्त ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के 15 जिले के चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दैनिक जागरण के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में संपादकीय विभाग के मीडिया हेड के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करायें।

दैनिक जागरण पर आरोप है कि उसने चुनाव के पहले ही एक्जिट पोल का प्रकाशन कर चुनाव आयोग के नियमों का उलंघन किया है। यह एफआईआर दैनिक जागरण के प्रबंध निदेशक और अन्य अथोरिटी के अलावा रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल (आई) प्राईवेट लिमिटेड के खिलाफ कराने का निर्देश दिया गया है। दैनिक जागरण के प्रबंध निदेशक के साथ साथ इसी अखबार के प्रबंध संपादक, मुख्य संपादक, संपादक के खिलाफ भी चुनाव आयोग ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

चुनाव आयुक्त ने जिला अधिकारियों को इस मामले में एफआईआर कराने के बाद पूरी रिपोर्ट भी देने का निर्देश दिया है। देश के सभी मीडिया हाउस को चुनाव से पहले उस एक्जिट पोल का प्रकाशन या प्रसारण करना मना है जिसके प्रकाशन या प्रसारण से मतदाताओं पर असर पड़े। दैनिक जागरण पर आरोप लगा है कि इस अखबार ने धारा 126 ए और बी का उलंघन किया है। दैनिक जागरण पर आरोप है कि उसने ओपनियन पोल में दिखाया था कि भारतीय जनता पार्टी पहले चरण में हुये चुनाव में सबसे आगे है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
मुंबई
९३२२४११३३५

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दैनिक जागरण मजीठिया का लाभ कर्मचारियों को नहीं देगा! हिंदुस्तान, अमर उजाला और सहारा ने भी चली चाल

खुद को देश का नंबर वन अखबार बताने वाले दैनिक जागरण के कानपुर प्रबन्धन ने अपने कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से साफ़ तौर पर पलटी मार लिया है। यही नहीं कानपुर से प्रकाशित हिंदुस्तान और अमर उजाला तो यहाँ तक दावा कर रहे हैं कि वह अपने कर्मचारी को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दे रहे हैं। कानपुर से प्रकाशित राष्ट्रीय सहारा और आज अखबार ने अपने आर्थिक हालात का रोना रोते हुए मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से इनकार कर दिया है।

कानपुर के मीडिया जगत की ये सच्चाई सामने आई है आरटीआई के जरिये। कानपुर के पत्रकार और मजीठिया क्रांतिकारी शारदा त्रिपाठी ने उत्तर प्रदेश के कामगार आयुक्त कार्यालय से आरटीआई से ये जानकारी मांगी थी कि कानपुर में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का किन किन अखबारों ने पालन किया और किसने किसने नहीं किया, पूरी रिपोर्ट दी जाय। इस पर कामगार आयुक्त कार्यालय ने चौकाने वाली जानकारी उपलब्ध कराई है। कानपुर से प्रकाशित अख़बारों में दो अखबारों का दावा है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप वेतन दे रहे हैं। ये हैं हिंदुस्तान और अमर उजाला। दो अखबार राष्ट्रीय सहारा और आज की हालात नाजुक बताई गयी है।

रही बात दैनिक जागरण अखबार की तो उसे ‘नॉट अप्लीकेबल’ की स्थिति में रखा गया है। दैनिक जागरण अखबार धोखे से अपने कर्मचारियों का सादे कागज पर हस्ताक्षर आये दिन कराता रहता है। ऐसा ही एक प्रपत्र मजीठिया वेज बोर्ड की धारा 20 जे का तैयार कर लिया गया है और उसी को ढाल बनाकर कानपुर के सहायक श्रमायुक्त रवि श्रीवास्तव दैनिक जागरण को बचाने पर लगे हैँ कि जागरण कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ न मिले और भईया जी की उन पर कृपादृष्टि भी बनी रहे।

उल्लेखनीय है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना वाद संख्या 411 / 2014 की सुनवाई करते हुए 23 / 8 / 2016 को श्रमायुक्त को आदेश दिया था कि मजीठिया लागू करवाओ। लेकिन सहायक श्रमायुक्त ने जो रिपोर्ट भेजा है, वह चौंकाने वाली है। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसाएं दैनिक जागरण अखबार पर लागू नही होंगी। चूंकी इसके कर्मचारियों ने पुराने वेतन और परिलाभ लेने के लिए सहमति दी है और इस बाबत प्रबंधन ने हस्ताक्षर कराये हैं। यानी यह आसानी से कहा जा सकता है कि वेज बोर्ड का कानून इस अखबार पर लागू नहीं होगा और सारे कर्मचारी पुराने वेतन पर काम करते रहेंगे।

यहां यह बताना जरूरी होगा कि कानपुर में लगभग 15 कर्मचारी 17(1) के तहत रिकवरी दाखिल किये हुए हैं और इनकी लगभग 8 डेट भी पड़ चुकी है जिसमें मलिकानों का जवाब आ गया है और अभिलेख के लिए अगली डेट भी पड़ी हुई है। ऐसी स्थिति में यह जाँच रिपोर्ट क्या साबित करेगी, सोचनीय है। लेकिन इन अखबारों के कुछ मजीठिया क्रांतिवीर अब भी पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
मुंबई
9322411335

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जागरण न्यूज़ पेपर के MD आशुतोष मोहन की गन्दी बात सुनिए

मुझसे जुलाई 2015 में छतरपुर की जागरण रीवा ब्यूरोशिप और एजेंसी के नाम पर इंदौर रीवा जोन जागरण के एमडी आशुतोष मोहन ने HDFC का 25000 का चेक लिया था, जो कि 28-07-15 को क्लीयर भी हो गया। बाद में इन लोगों ने किसी तरह का कोई पेपर न भेजा और ना ही कोई खबरें प्रकाशित की। आज करीब एक साल बाद तक पैसा वापस करने की बात ये लोग कहते रहे लेकिन पैसे लौटाए नहीं।

अब एमडी आशुतोष मोहन से जब उनके मोबाइल नंबर 9893024599 पर पैसे या पेपर की मांग की जाती है तो वो गाली गलौज कर असभ्य भाषा का इस्तेमाल करते हैं। मैं इस ऑडियो को मीडिया के सभी लोगों तक पहुँचाना चाहता हूँ ताकि और लोग इन चोरों के झाँसे में ना आयें। सभी लोग सुनिए कि दैनिक जागरण जैसे न्यूज़ पेपर का मैनेजिंग डायरेक्टर किस भाषा में बात करता है। टेप सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :

https://youtu.be/2B3lSdN8y_A

अवधेश कुमार
awadhesh.vnews@gmail.com
छतरपुर
मध्य प्रदेश

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जिन लोगों ने ABVP के खिलाफ ज्ञापन दिया, जागरण ने उन्हीं को बता दिया अभाविप कार्यकर्ता!

जागरण वाले ये क्या छाप देते हैं… देखिए एक ब्लंडर : बदायूं में कल जिस अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के विरोध में वकीलों ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन दिया था, आज दैनिक जागरण अख़बार ने उसी ABVP का वकीलों को कार्यकर्ता बता कर खबर छाप दिया. सुबह दैनिक जागरण अखबार देखकर वकील सकते में आ गए. एबीवीपी के खिलाफ ज्ञापन दिया था और उन्हें ही बता दिया गया एबीवीपी कार्यकर्ता. इस ब्लंडर को लेकर दैनिक जागरण के पाठकों में भारी रोष है. वकीलों ने माफीनामा न छापने पर अखबार के बहिष्कार की धमकी दी है.

एडवोकेट सलमान सिद्दीकी ने बताया कि वे इस झूठी खबर का पूरी तरह से खंडन करते हैं. वे लोग ABVP कार्यकर्ता कभी नहीं रहे हैं. सलमान सिद्दीकी ने सभी से अनुरोध किया कि वे लोग दैनिक जागरण की इस तरह की किसी भी खबर पर यकीन न करें. ज्ञात हो कि यह मामला यूपी के बदायूं का है. जिन लोगों ने कल avbp के विरोध में DM बदायूं को एक ज्ञापन दिया था उन्हें आज बदायूं के दैनिक जागरण ने avbp का कार्यकता बताकर गलत खबर छाप दी.  इसका कड़ा विरोध किया जा रहा है.

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सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन और संजय गुप्ता को तलब किया

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न करने और सुप्रीम कोर्ट से लेकर कानून, न्याय, संविधान तक की भावनाओं की अनदेखी करने से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने आज दैनिक जागरण के मालिकों महेंद्र मोहन गुप्ता और संजय गुप्ता को अगली सुनवाई पर, जो कि 25 अक्टूबर को होगी, कोर्ट में तलब किया है. आज सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू न किए जाने को लेकर सैकड़ों मीडियाकर्मियों द्वारा दायर मानहानि याचिका पर सुनवाई हुई.

कोर्ट ने आज के दिन कई प्रदेशों के लेबर कमिश्नरों को बुला रखा था. कोर्ट ने सभी लेबर कमिश्नरों से कहा कि जिन जिन मीडियाकर्मी ने क्लेम लगाया है, उसमें वे लोग रिकवरी लगाएं और संबंधित व्यक्ति को न्याय दिलाएं. कोर्ट के इस आदेश के बाद अब श्रम विभाग का रुख बेहद सख्त होने वाला है क्योंकि पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने लापरवाही बरतने पर उत्तराखंड के श्रमायुक्त के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया था.

सैकड़ों मीडियाकर्मियों की याचिका का प्रतिनिधित्व करते हुए एडवोकेट उमेश शर्मा ने आज सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दैनिक जागरण की किसी भी यूनिट में किसी भी व्यक्ति को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से न तो एरियर दिया गया है और न ही सेलरी दी जा रही है.

साथ ही दैनिक भास्कर समूह के बारे में भी विस्तार से बताया गया. आज सुप्रीम कोर्ट ने जागरण के मालिकों को कोर्ट में आने के लिए आदेश कर दिया है ताकि उनसे पूछा जा सके कि आखिर वो लोग क्यों नहीं कानून को मानते हैं. चर्चा है कि अगली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट भास्कर के मालिकों को तलब कर सकता है. फिलहाल इस सख्त आदेश से मीडियाकर्मियों में खुशी की लहर है.

कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुंबई के पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट शशिकांत सिंह भी मौजूद थे. उन्होंने फोन करके बताया कि आज सुप्रीम कोर्ट ने जो सख्ती दिखाई है उससे वे लोग बहुत प्रसन्न है और उम्मीद करते हैं कि मालिकों की मोटी चर्बी अब पिघलेगी. सैकड़ों मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड से संबंधित अपने हक के लिए गाइड करने वाले पत्रकार शशिकांत सुप्रीम कोर्ट में हुई आज की सुनवाई की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं जिसे जल्द भड़ास पर प्रकाशित किया जाएगा.

अपडेटेड न्यूज (7-10-2016 को दिन में डेढ़ बजे प्रकाशित) ये है….

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दैनिक जागरण में कितने यादव हैं, सीएम अखिलेश ने सरेआम पूछ लिया (देखें वीडियो)

Mahendra Yadav : मिस्टर दैनिक जागरण ! आप बताते क्यों नहीं कि दैनिक जागरण में कितने यादव हैं? जागरण फोरम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ये सवाल किया है तो जवाब तो बनता है न! चलिए, ब्राह्मण कितने हैं, ठाकुरों को कितनी जगह मिली है, कायस्थों को कितनी सीटें मिली हैं, बनियों को कितनी मिली है, कितने अल्पसंख्यक हैं, कितने आदिवासी हैं…कितने ओबीसी हैं..यही बता दीजिए..

सुनील यादव : सुने हैं कि आज फिर से किसी दलाल अखबार वाले ने यह सवाल उठाया कि यूपी पुलिस में यादव कितने हैं? उसका प्रत्युत्तर भी ठीक मिला कि तुम्हारे अखबार में यादव कितने हैं? पर उन हरामखोरों के लिए मैं एक बात लिखना चाहूँगा जिनके पेट में यूपी पुलिस में यादवों कि संख्या पर मरोड़ उठने लगती है ….उनको यह लगता है कि सपा सरकार ने यादवों को सर्वाधिक यूपी पुलिस में ठूस दिया है तो ….सुनो…..बसपा सरकार के समय की पुलिस भर्ती का रिजेल्ट उठा के देख लो और बहुत पीछे के उन गैर सपा सरकारों के पुलिस भर्ती का रिजेल्ट उठा के देखों …यह देखो की सपा सरकार में इन सरकारों की अपेक्षा कम यादव भर्ती क्यों हुए? .केवल बकलोली से निष्कर्ष नहीं निकलता शारीरिक दक्षता वाली भर्तियों के रिजेल्ट उठाओ उसे गौर से देखों फिर समझ में आएगा असली मामला क्या है? असली मामला दलाली का नहीं है असली मामला गरीब गुरबों के श्रम का है …जिसे तुम बार बार लतियाते रहते हो …यह घनघोर श्रम के अपमान का मामला है। आज पहली बार आपका यह तमाचा भरा जवाब मुझे खुश कर गया शुक्रिया….

Yashwant Singh : दैनिक जागरण ने यादवीकरण का सवाल पूछ कर चौका मारना चाहा तो अखिलेश यादव ने दैनिक जागरण में यादवों की संख्या पूछ कर छक्का मार दिया. दैनिक जागरण की तरफ से लखनऊ में जागरण फोरम नामक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इसमें शिरकत कर रहे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से दैनिक जागरण के नेशनल ब्यूरो चीफ प्रशांत मिश्रा ने सवाल यूपी में थानों के यादवीकरण पर किया तो अखिलेश ने पलट कर पूछ लिया कि बताओ दैनिक जागरण में कितने यादव हैं?

संबंधित वीडियो देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=iTtX0D-bCA4

महेंद्र, सुनील और यशवंत की एफबी वॉल से.

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दैनिक जागरण के मालिक और मैनेजर भगवान से नहीं डरते लेकिन जनता को भगवान के नाम पर डराते हैं, देखें तस्वीरें

ये तस्वीरें दैनिक जागरण लखनऊ कार्यालय के बाहर की हैं. इसे कहते हैं- ”पर उपदेश कुशल बहुतेरे” यानि जो लोग भगवान से ना डरते हुए अपने कर्मियों को उनका मजीठिया वेज बोर्ड वाला कानूनी, न्यायिक और संवैधानिक हक नहीं दे रहे हैं, वे ही लोग जनता को ईश्वर की नजर में होने का भय दिखाकर पेशाब न करने, कूड़ा न फेंकने की अघोषित हिदायत दे रहे हैं.

नोएडा और आसपास की कई यूनिटों में कुल मिलाकर 300 लोगों को जागरण प्रबंधन ने इसलिए बर्खास्त कर रखा है क्योंकि ये लोग अपना कानूनी हक मांग रहे थे, ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अपना एरियर व सेलरी की मांग कर रहे थे. इसी तरह दैनिक जागरण लखनऊ में भी उपर से नीचे तक किसी को मजीठिया वेज बोर्ड का हक दिए बिना उनसे जबरन लिखवा लिया गया कि उन्हें यह वेज बोर्ड नहीं चाहिए और वे अपनी सेलरी से संतुष्ट हैं. ऐसे धतकरम करने वाला जागरण प्रबंधन अगर खुद ईश्वर से नहीं डर रहा तो फिर जनता को ईश्वर के नाम से क्यों डरा रहा. वो कहते हैं न कि असल में ईश्वर और धर्म अमीरों के लिए हथियार है जिसका इस्तेमाल गरीबों को डराने और बांटने के लिए किया जाता है. जागरण के मामले में तो यह बिलकुल सही जान पड़ता है.

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एबीसी आंकड़े : भास्कर ने देश और अमर उजाला ने उत्तर प्रदेश में बजाया दैनिक जागरण का बैंड

एबीसी के आंकड़े अभी आफिसियली जारी नहीं किए गए हैं लेकिन इसकी वेबसाइट पर डाले जा रहे आंकड़े मार्केट में सरकुलेट होने लगे हैं. ऐसा एबीसी के मेंबर अखबारों को एबीसी वेबसाइट पर मिली लागिन सुविधा के कारण संभव हो पा रहा है. भास्कर और अमर उजाला ने आंकड़े निकाल कर यह बता दिया है कि दैनिक जागरण की हर तरफ से बैंड बज रही है.

एबीसी के आंकड़ों के मुताबिक दैनिक भास्कर पूरे देश में प्रसार संख्या के मामले में नंबर एक अखबार बन चुका है. खुद को नंबर एक बताने वाला दैनिक जागरण अब दो नंबरी अखबार हो चुका है. वहीं उत्तर प्रदेश में अमर उजाला नंबर एक अखबार बन चुका है. खासकर दैनिक जागरण के गढ़ कानपुर में अमर उजाला का नंबर एक अखबार बनना बड़ी बात है.

भड़ास के पास अमर उजाला से जुड़े कई लोगों के मैसेज आए, जो इस प्रकार है: Glad to share that Amar Ujala has become No-1 daily newspaper of Kanpur City (as per ABC JD-15)…Congratulations to ‘Team AU’…

एबीसी की आफिसियल वेबसाइट से निकाले गए आंकड़े से पता चलता है कि कानपुर में अमर उजाला ने अपने सेकेंड ब्रांड कांपैक्ट को भी अमर उजाला कांपैक्ट नाम दे दिया है जिसके कारण इसका सरकुलेशन भी अमर उजाला के सरकुलेशन में जोड़ दिया गया है. दरअसल कांपैक्ट अखबार को पिछले वर्ष के मध्य में टैबलायड से ब्राडशीट कर दिया गया और नाम भी अमर उजाला कांपैक्ट कर दिया गया. दाम पहले की तरह कम रखा गया. इस प्रयोग को लोगों ने हाथोंहाथ लिया. उत्तर प्रदेश में अमर उजाला कुल 70 हजार कापी की दैनिक जागरण से बढ़त लेकर नंबर वन बन गया है. ये आंकड़े पिछले साल जुलाई से लेकर दिसंबर तक के हैं जिन्हें रिलीज किया जाना बाकी है.

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दैनिक जागरण के गाजियाबाद कार्यालय में उठापटक, इंदू शेखावत ने भूपेंद्र तालान के खिलाफ थाने में दी तहरीर

गजियाबाद । अधिकारियों की चाटुकारिता और खबरों के एवज में वसूली जैसे आरोपों के कारण चर्चा में रहने वाले दैनिक जागरण के गाजियाबाद कार्यालय में उठापटक और सिर फुटव्व्ल की नौबत आ गयी है। ताजा मामला नगर निगम के आयुक्त अब्दुल समद के पक्ष में प्लांट करके लगायी जा रही खबरों से जुड़ा है। नगर निगम की बीट जागरण संवाददाता भूपेंद्र तालान देखते हैं। काफी समय से तालान पर यह आरोप लग रहे थे कि वह नगर आयुक्त के पक्ष में जागरण में पाजिटीव खबरें लगाा रहे हैं। इस मामले में जागरण के प्रबंधन को शिकायतें भी मिल रही थीं, लेकिन ब्यूरो चीफ राज कौशिक का सानिध्य होने के कारण तलान पर कभी आंच नहीं आयी।

हाल में राज कौशिक की माता जी का देहांत हो गया था, जिसके कारण इंदु शेखावत को कार्यवाहक की भूमिका मिल गयी थी। सूत्रों का कहना है भूपेंद्र तालान ने नगर आयुक्त अब्दुल समद के पक्ष में एक प्लांटेड खबर इंदु शेखावत को सबमिट की तो उस खबर को शेखावत ने फर्जी खबर बताकर होल्ड कर दिया। अगले दिन तलान की नाईट डयूटी थी। इसी का फायदा उठाकर तलान ने इस खबर को  सीधे नोएडा भेज दिया। नगर निगम की रुटीन खबर अक्सर दिन में ही 6 से सात बजे तक सबमिट हो जाती है, लेकिन यह रुटीन की खबर देर रात छपने के लिए नोएडा क्यों भेजी गयी, इस पर नोएडा यूनिट के सम्पादकीय प्रभारी विष्णु त्रिपाठी की भौं तन गयी। त्रिपाठी ने इंदु को फोन करके पूछताछ की तो इंदु ने बताया की इस खबर को तो उन्होंने होल्ड कर दिया था। तलान की नाईट है, इसलिए इस खबर को जानबूझकर भेजा गया है।

विष्णु त्रिपाठी के पास इस प्रकार की प्लांटेड खबरें छापे जाने की शिकायतें तलान के खिलाफ पहले भी मिल रही थीं। पहले जीडीए की बीट भी तलान के पास थी। वसूली की शिकायत मिलने के बाद जीडीए की बीट से तलान को हटा दिया गया था। इस बार पुख्ता सबूत मिलने के बाद विष्णु त्रिपाठी ने भूपेंद्र तलान को नोएडा बुलाकर सोमवार से नोएडा कार्यालय में तबादला किए जाने का आदेश थमा दिया। तबादले के इस आदेश के बाद भूपेंद्र तलान बौखला गया और सीघे अपने मोबाईल से इंदु शेखावत को जान से मारने और बीवी बच्चों के प्रति अश्लील कमेंट करने लगा।

इस काल के बाद इंदु ने इलाकाई थाना में तलान के खिलाफ तहरीर लिखकर दे दी। इंदु ने अपने साथ किसी अनहोनी की आशंका व्यक्त की है। सू़त्रों का कहना है नगर निगम आयुक्त की पाजीटिव खबर छापने के पीछे ब्यूरो चीफ के अपने स्वार्थ हैं। राज कौशिक का सगा भाई रवि प्रकाश शर्मा नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में लिपिक है। निगम का यह मलाईदार विभाग माना जाता है। रवि की तैनाती पहले पेंशन में थी, बाद में नगर निगम प्रशासन की चाटुकारिता वाली खबरों के जरिये रवि को यह विभाग दिलवाया गया। यही नहीं, रवि की नियुक्ति पहले नगर निगम में पम्प आपरेटर के रूप में हुयी थी।

कायदे कानूनों को ताक पर रखकर यह प्रमोशन किया गया। अमर उजाला से राज कौशिक इसी प्रकार की शिकायतों के बाद हटाया गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम में सुदर्शन एडवरटाइजिंग नामक जो एड एजेंसी काम करती है, इस एजेंसी को राज कौशिक का सगा भतीजा प्रमोद उर्फ गोल्डी चलाता है। कायदे कानूनों को ताक पर रखकर केवल इस एजेंसी के माध्यम से ही सारे विज्ञापन जारी कराए जाते हैं। चर्चा है कि बहुत जल्द दैनिक जागरण गाजियाबाद में बड़े पैमाने पर फेरबदल किया जा सकता है। राज कौशिक से पहले अशोक ओझा और तोषिक कर्दम की जोड़ी को इन्हीं सब वजहों के चलते हटाया गया था।

गाजियाबाद के एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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जागरण के आजादी वाले कार्यक्रम में विनीत कुमार क्या जागरणकर्मियों के शोषण की बात रख पाएंगे?

Yashwant Singh : आज मंच जागरण का, परीक्षा विनीत कुमार की… ‘मीडिया मंडी’ किताब के लेखक विनीत कुमार मीडिया विमर्श में उभरते नाम हैं। विनीत बेबाक राय के लिए जाने जाते हैं। मीडिया संस्थानों के दोहरे मानदंडों को बेनकाब करने में विनीत कोई उदारता नहीं बरतते। सामाजिक मुद्दों पर भी विनीत की लेखनी ईमानदार और धारदार रही है। विनीत 4 अप्रैल यानि आज रोहतक में जागरण समूह की ओर से आयोजित किए जा रहे संवाद कार्यक्रम को मॉडरेट करने जा रहे हैं। कार्यक्रम ‘नारी से जुड़े आज़ादी और दायरा’ विषय पर है। इसका आयोजन रोहतक के झज्जर रोड पर स्थिति वैश्य महिला महाविद्यालय पर सुबह 11.30 बजे से है। कार्यक्रम की वक्ता शतरंज चैंपियन और लेखिका अनुराधा बेनिवाल हैं। विनीत ने अपने फेसबुक वॉल पर इस कार्यक्रम की बाकायदा पोस्टर के साथ जानकारी दी है।

विनीत ने अपनी इस पोस्ट के साथ लिखा-

“हम आपसे बातचीत करने रोहतक, हरियाणा आ रहे हैं। पिछले कुछ महीने में आजादी के इतने अलग-अलग मायने पैदा कर दिए गए हैं कि वे गुलामी के पर्याय बनकर हमारे सामने है। जमीनी स्तर पर जिस आजादी को हासिल करने की कोशिश की जा रही है, उसे परंपरा, राष्ट्रहित और संस्कार के नाम पर उन तहखानों में कैद करने के धत्तकर्म किए जा रहे हैं कि हमारे जेहन में बस एक ही सवाल बाकी रह जाता है। आजाद हुए तो क्या और गुलाम बने रहे तो क्या नुकसान? और इन सबके बीच सालों से इज़्ज़त की ख़ातिर, खोल में छिपी दास्ताँ तो है ही। इधर आजादी रोजमर्रा की जिंदगी और आसपास की दुनिया में बची हो चाहे नहीं, एक के बाद एक विज्ञापनों में चेंपने का काम जोरों पर है। पानी बिल से आजादी (दिल्ली जलबोर्ड), एयरपोर्ट पर लाइन लगने से आजादी (यात्रा डॉट कॉम), गीलेपन से आजादी (सेनेटरी नैपकिन के लगभग सारे विज्ञापन)…जमीनी स्तर पर आाजादी की आवाज बुलंद करनेवाले आंदोलनों से आइडिया चुराकर ये सारे विज्ञापनों ने अपनी कॉपी भर ली है। लेकिन आजादी की मार्केटिंग और मैनेजमेंट की जाने की कवायदों के बीच हमारी-आपकी दुनिया कितनी आजाद है, हम इन सारे बेसिक मुद्दों पर बात करेंगे। वैसे तो बातचीत का सिरा होगा अनुराधा बेनीवाल की किताब ‘आजादी मेरा ब्रांड’ लेकिन हम इसे विमर्श का जनाना डब्बा बनाने के बजाय, दूसरे उन कई मसलों पर बातचीत करेंगे जिनमे आपकी दिलचस्पी होगी। हम तो बस मौजूद होंगे, विमर्श के वजूद में तो आखिर तक आप ही बने रहेंगे। तो मिलते हैं कल।“

विनीत ने इसी पोस्ट के 4 घंटे बाद अपने फेसबुक वॉल पर एक और पोस्ट डाली। इस पोस्ट में विनीत कुछ कुछ सफ़ाई देने वाले अंदाज़ में दिखे। विनीत को आखिर क्यों खुद को जस्टीफाई करने की ज़रूरत पड़ी। क्या ये ‘अपराधबोध’ था कि उन्होंने जागरण ग्रुप के कार्यक्रम का मॉडरेटर बनना स्वीकार किया। क्या उन्हें डर था कि कल को इस बात को लेकर उन पर सवाल उठाए जा सकते हैं। बहरहाल विनीत ने पहले ही डिफेंस मुद्रा में आना बेहतर समझा।

पढ़िए विनीत ने अपनी इस दूसरी पोस्ट में क्या लिखा-

“कल को मुझे पाञ्चजन्य, सामना, रामसंदेश, संदेश कमल जैसी पत्रिकाएं, अखबार और सुदर्शन जैसे चैनल भी अपनी बात रखने के लिए बुलाते हैं और मेरे पास समय होगा, मेरी सुविधा के हिसाब से इंतजाम होगा तब मैं बोलने जरूर जाऊंगा। इन सुविधाओं में घर से लाना-वापस छोड़ना, रास्तेभर पानी, फ्रूट्स, वॉशरूम का इंतजाम, राह खर्च और प्रोत्साहन राशि शामिल है। मैं मीडिया और साहित्य का छात्र हूं। मेरा एक ही धर्म है संवादधर्मिता। हम हर हाल में अपनी बात रखना चाहते हैं और कोई भी मंच मुझे अपने तरीके से बोलने देगा, सुरक्षित ले जाएगा और वापस घर छोड़ देगा तो मैं इस धर्म के साथ हूं। रही बात प्रतिबद्धता की तो वो मेरे भीतर गहरे रूप में मौजूद है, रहेगी। हमने इस मंच पर जाना है, उस मंच पर नहीं जाना। ये डिब्बाबंदी मुझे प्रतिबद्ध कम, मानसिक रोगी ज्यादा बना देगा। ये एक स्वस्थ समाज के लिए खतरनाक और नए किस्म की छुआछूत की बीमारी है और मुझे मेरे शुभचिंतकों ने कम से कम लोड लेकर जीने की सलाह दी है। मैं ऐसी बीमारी से दूर रहना चाहता हूं। हम कोई बुद्धिजीवी नहीं है, किसी पार्टी के कार्यकर्ता नहीं हैं। हम नॉलेज प्रोड्यसूर हैं और प्रोड्यूस करने के साधन जहां मिलेंगे, वहां करूंगा। मैंने अपने इस छोटे से जीवन में पार्टी, संस्थान, व्यक्ति के प्रति प्रतिबद्धता की होर्डिंग लगाकर, विचार और मौके पर फैसले के स्तर पर एक से एक धुरंधर लोगों को मैनेज होते, जनतंत्र विरोधी होते देखा है। ऐसे में मुझे बदनाम होकर, शक किए जाने पर भी अपने से अलग, विपरीत और असहमत लोगों, मंचों के बीच बोलना पसंद है।“

विनीत, आपने ये दोनों पोस्ट वैसी ही अच्छी और धाराप्रवाह लिखीं जैसे कि आप हमेशा लिखते रहे हैं। नहीं कह सकते कि आपने दूसरी पोस्ट सफ़ाई वाले अंदाज़ में क्यों लिखी। लेकिन इसमें आपने लिखा कि आप इस कार्यक्रम में हमारी-आपकी दुनिया कितनी आजाद है, उन सारे मुद्दों पर बातचीत करेंगे। आपने ये भी अच्छा कहा कि आप इस विमर्श का जनाना डब्बा बनाने के बजाय, दूसरे उन कई मसलों पर बातचीत करेंगे जिनमे आपकी दिलचस्पी होगी। विनीत ने दूसरी पोस्ट में ये भी कहा कि विपरीत और असहमत लोगों, मंचों के बीच बोलना पसंद है।

विनीत के मुताबिक जिन मसलों पर सबकी दिलचस्पी होगी, उन सभी पर विमर्श करेंगे। विनीत मेरी दिलचस्पी इस कार्यक्रम के आयोजक ‘जागरण ग्रुप’ से जुड़े कुछ मसलों पर हैं। और ये मसले ‘आजादी’ से ही जुड़े हैं। लेकिन इन मसलों पर आऊं, इससे पहले एक बात बताना चाहता हूं। पत्रकारिता के पुरोधा दिवंगत प्रभाष जोशी जी ने एक बार अरविंद केजरीवाल से अपनी नाराज़गी जताई थी। दरअसल प्रभाष जोशी ने आरटीआई यानी सूचना के अधिकार संबंधी घोषित पुरस्कार की जूरी में इसी ग्रुप के संपादक-मालिक के होने पर ऐतराज़ जताया था। यही ग्रुप रोहतक में भी संवाद कार्यक्रम करने जा रहा है। विनीत आपने अपनी पोस्ट में लिखा है कि आप किसी भी मंच पर जाकर बोलेंगे बशर्ते कि आपको अपने तरीके से बोलने दिया जाए। विनीत इस कार्यक्रम के मॉडरेटर हैं, इसमें कोई आपत्ति नहीं है। दिलचस्पी इस बात पर है कि विनीत इस कार्यक्रम में क्या बोलते हैं। क्या वे अपने मेज़बान आयोजक की विसंगतियों और खामियों पर सवाल उठा सकेंगे।

क्या विनीत कह सकेंगे कि आजादी पर विमर्श तभी सार्थक होगा जब जागरण ग्रुप अपने कर्मचारियों को भी ईमानदारी से उनके हक़ देगा। क्या उनके साथ गुलामों जैसा व्यवहार बंद कर सम्मान के साथ कार्य करने का अधिकार दिया जाएगा। क्या उचित मेहनताने के लिए आवाज़ उठाने वाले कर्मचारियों पर उत्पीड़न की कार्रवाई बंद की जाएगी। आईबीएन-सीएनएन से करीब 320 कर्मचारियों की छंटनी के ख़िलाफ़ जिस तरह आवाज़ उठाई गई थी, क्या जागरण के संवाद मंच से ही उसके कर्मचारियों के हक़ में आवाज़ उठाई जा सकेगी। विनीत इस पर क्या रुख अपनाते हैं, ये देखना दिलचस्प होगा।

विनीत आपने कहा कि ये कार्यक्रम मूलत: जनाना डिब्बे से जुड़े मसलों पर है। विषय भी है नारी से जुड़ा आज़ादी और दायरा। यहां भी जागरण ग्रुप से जुड़े दो मसले विचार के लिए आपकी पेश-ए-नज़र हैं। विनीत इस कार्यक्रम में विमर्श से पहले आगरा की समाज सेविका प्रतिमा भार्गव की कहानी ज़रूर जान जाइएगा। जागरण ग्रुप के ही अखबार आई-नेक्स्ट के दुर्व्यवहार, मानहानि, प्रताड़ना की कहानी सुनाते सुनाते प्रतिमा दिल्ली प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए रो पड़ीं थीं। मसालेदार खबर परोसने के चक्कर में इस समाजसेविका के चाल चलन चरित्र पर ऐसी फर्जी मनगढ़ंत खबर छाप दी कि इनका जीना मुश्किल हो गया। घर परिवार समाज में इनकी इज्जत दाव पर लग गई।

इसी ग्रुप से जुड़ा दूसरा किस्सा तो हाल ही का है। बुलंदशहर में महिला आईएएस बी. चंद्रकला के खिलाफ लगातार कुत्सित अभियान चलाने वाले दैनिक जागरण से नाराज होकर लोगों ने अखबार और इसके पदाधिकारियों का पुतला भी फूंका था। जागरण की इस मुहिम के शुरू होने का कारण जागरण के द्वारा उस आरोपी के साथ खड़े होकर उसकी पैरवी करना था जिसने डीएम के आफिस में घुसकर उनकी जबरन सेल्फी ली थी। डीएम तो छोड़िए क्या कोई किसी आम महिला के साथ भी बिना उसकी इजाज़त लिए सेल्फी लेने गुस्ताख़ी कर सकता है। क्या ये किसी महिला की आज़ादी में अतिक्रमण नहीं था। फिर ऐसे शख्स की पैरवी किस आज़ादी के अधिकार से। हो सकें तो विनीत इन मुद्दों पर आज के कार्यक्रम में ज़रूर बोलना। आपने खुद ही कहा है कि आपको अपने हिसाब से बोलने दिया जाए तो आप किसी भी मंच पर जाकर बोल सकते हैं। अब मंच जागरण का है…और बोलना आपको है…आप क्या बोलते हैं और जागरण क्या छापता है, इसी पर हम सब की नज़रें हैं।

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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अखिलेश यादव को मक्खन लगाने में दैनिक जागरण के संपादक दिलीप अवस्थी ने कलमतोड़ पसीना बहाया, आप भी पढ़ें

दैनिक जागरण, लखनऊ के संपादक दिलीप अवस्थी हैं. अखिलेश यादव की सरकार के चार साल पूरे होने पर इन्होंने एक विशेष आर्टकिल लिखा है दैनिक जागरण में. इस आर्टकिल को पढ़ते पढते आपको महसूस होगा कि इन्होंने अखिलेश यादव को मक्खन लगाते लगाते इस कदर कलमतोड़ पसीना बहाया है कि चमचागिरी के सारे प्रतिमान शरमा जाएं.

सरकारों के चार साल या तीन साल या दो साल या एक साल पूरे होने पर सरकारें खुद सूचना विभाग के जरिए अपने किए का विज्ञापन के जरिए धुआंधार प्रचार करती हैं. पत्रकार और अखबार अपनी तरफ से जब लिखता है तब उन कमियों त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाता है, जिस पर सरकार का ध्यान नहीं गया है. लेकिन अब बाजारवादी व्यवस्था है. पैसा अखबार मालिकों को भी कमाना है. सो, संपादक ऐसे रखते हैं जो कलम से स्याही नहीं बल्कि मक्खन तेल बहाए. दिलीप अवस्थी उन्हीं कैटगरी में शुमार हैं.

आप भी पढ़िए और आजकल की मुख्यधारा की पत्रकारिता को थू थू करिए. नीचे दिए गए संबंधित आर्टकिल के कटिंग पर क्लिक करिए और इत्मीनान से पढ़िए…

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दैनिक जागरण ने इलाहाबाद के पूर्व मेयर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह को जीते जी मार दिया

दैनिक जागरण महान अखबार है. यहां कभी मायावती के लिए गंदी गंदी गालियां छप जाया करती हैं तो कभी जिंदा लोगों को मरा घोषित कर दिया जाता है. ताजा मामला इलाहाबाद एडिशन का है. कल दैनिक जागरण इलाहाबाद में पेज नंबर नौ पर एक छोटी सी खबर छपी है जिसमें बताया गया है कि पूर्व मेयर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह के निधन के बाद कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष निर्मल खत्री ने उनके घर पहुंचे और उन्होंने वहां शोक संतप्त परिवार को सांत्वाना दी.

अखबार में यह खबर पढ़कर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह के होश उड़ गए. लोग उनके मरने की खबर जब पढ़े तो उनके घर पहुंच गए लेकिन हवां देखा कि चौधरी साहब तो जिंदा हैं और जागरण को पानी पी पी कर कोस रहे हैं. पता चला कि चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह की चाची जी का तेरह दिनों पहले निधन हुआ था और तेरहवीं में शामिल होने कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष निर्मल खत्री आए थे. इस संबंध में कांग्रेसियों ने प्रेस रिलीज भेजी कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष निर्मल खत्री ने पूर्व मेयर चौधरी जितेंद्र नाथ सिंह की चाची जी के निधन पर तेरहवीं में शामिल होने उनके घर पहुंचे और शोक संतप्त परिवार को सांत्वना दी.

लेकिन इस प्रेस रिलीज को विद्वान दैनिक जागरण वालों ने कुछ ऐसा एडिट किया को चाची को गायब करके डायरेक्ट पूर्व मेयर साहब को ही मार डाला. कांग्रेस बेचारे हाय मार डाला हाय मार डाला कह कर भले अपना सिर धुनते रहें लेकिन दैनिक जागरण वाले तो अपना कर्म कर के आगे बढ़ चले हैं, कोई जिए मरे उनकी बला से.

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मजीठिया : लेटलतीफी और समय पर जवाब न देने पर जागरण पर लगा 10 हजार रुपये का जुर्माना

नई‍ दिल्‍ली। दिल्‍ली में विश्‍वकर्मा नगर (झिलमिल कालोनी) स्थित उप श्रमायुक्‍त कार्यालय में चल रहे रिकवरी मामले में लेटलतीफी और समय पर जवाब नहीं देने पर दैनिक जागरण पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

जागरण के रवैये से नाराज उप श्रमायुक्‍त ने पहले 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। जागरण प्रबंधन द्वारा गुहार करने पर बाद में यह रकम 10 हजार रुपये कर दी गई। मजीठिया वेजबोर्ड की लड़ाई लड़ रहे जागरण कर्मी श्‍याम सुंदर ने यहां 69 लाख रुपये से ऊपर की रिकवरी लगा रखी है।

सूत्रों के अनुसार रिकवरी मामले में जागरण प्रबंधन उप श्रमायुक्‍त कार्यालय में कभी भी समय पर नहीं पहुंचता या फि‍र आता ही नहीं है। मालूम हो कि नई दुनिया के एक कर्मी की रिकवरी मामले में भी दैनिक जागरण 1 हजार रुपये का जुर्माना भर चुका है।

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दैनिक जागरण ने कब्जाई व्यापारी की करोड़ो की जमीन, कोर्ट में केस दर्ज

बुलंदशहर की जिलाधिकारी बी. चन्द्रकला के संग जबरन सेल्फी प्रकरण के बाद आरोपी की वकालत में फँसे दैनिक जागरण का नया फर्जीवाड़ा सामने आया है। बी0 चंद्रकला को उनके माता-पिता द्वारा परिवार की सम्पत्ति बँटवारे में मिले एक फ्लैट और तेलंगाना के नक्सल प्रभावित रंगारेड्डी जिले में कृषि योग्य कुछ ज़मीन पर सवाल खड़े करने वाला दैनिक जागरण खुद भूमाफिया है। समाचार-पत्र की आड़ में सरकारी सिस्टम पर हेकड़ी जमाकर दैनिक जागरण ने काली कमाई और अवैध जमीनों की खरीद का एक बड़ा साम्राज्य देश में खड़ा किया है। ताज़ा मामला राजधानी लखनऊ का है। आपको बताते हैं कैसे जागरण ने 50 करोड़ की ज़मीन को फर्जीवाड़ा करके कब्जा रखा है।

लखनऊ में फ़ैज़ाबाद रोड नेशनल हाइवे पर एक गाँव बसा हुआ है…नाम है अनोरा। अनोरा गाँव में दैनिक जागरण ने रोड से लगी हुई करोड़ो रूपये कीमत की सात बीघा जमीन कब्जा कर रखी है। जबकि इस जमीन का मालिकाना हक लखनऊ के जाने-माने व्यापारी रामशंकर वर्मा/जितिन वर्मा का है। दैनिक जागरण की नजर कई बरसों से वर्मा परिवार की जमीन पर थी। लिहाजा लखनऊ में फर्जी दस्तावेज़ के जरिये ज़मीन हड़पने की योजना बनाई गयी।

इस फर्जीवाड़े में नटवरलाल अशोक पाठक भी शामिल है जो लखनऊ का कुख्यात औऱ घोषित भूमाफिया है। अशोक पाठक हाल ही में एक फ्राड के मामले में जेल काटकर लौटा है। रामशंकर वर्मा और जतिन वर्मा को पता ही नहीं कब दैनिक जागरण वालों ने अशोक पाठक को उप-निबंधक कार्यालय में खड़ा करके वर्मा परिवार की पूरी सात बीघा जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली और पुलिस में अपने रसूखों के चलते वर्मा परिवार की जमीन पर कब्जा भी कर लिया।

दैनिक जागरण की करतूतों का कालाचिठ्ठा जब वर्मा परिवार ने समाजवादी पार्टी के एक बड़े नेता के सामने रखा और सारी हकीकत बयान की तो सरकार भी दैनिक जागरण की इस करतूत पर हैरान रह गयी। कोई अखबार समूह भला फर्जीवाड़ा और हथकंडे अपनाकर कैसे किसी की जमीन हड़प सकता है। रामशंकर वर्मा और जतिन वर्मा ने अपनी जमीन बचाने के लिए फौरन कोर्ट का सहारा लिया और अदालत में दैनिक जागरण के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा करके रजिस्ट्री कराये गये बैनामा के निरस्तीकरण के लिए केस दर्ज कर दिया है।

दैनिक जागरण द्वारा फर्जी बैनामे के आधार पर तहसीलदार की अदालत में दायर अमलदरामत का वाद खारिज कर दिया गया है और जमीन को वर्मा परिवार के नाम अभिलेखों में अंकित कर दिया गया है। दैनिक जागरण द्वारा कब्जाई गयी जमीन पर मालिकों के गुंडे और असामाजिक तत्वों को जमावड़ा रहता है जो जमीन पर अभी भी कब्जा किये हुए है। दैनिक जागरण द्वारा अपने गुंडों और रसूखदार लोगो के जरिये अब वर्मा परिवार पर इस बात का दबाब बनाया जा रहा है कि वह कौड़ियों के भाव में अपनी जमीन छोड़ दें। लेकिन वर्मा परिवार किसी भी सूरत में अपनी बेशकीमती जमीन छोड़ने को तैयार नही है। खुद को प्रतिष्ठित और दुनियां का सबसे ज्यादा प्रसारित प्रतिष्ठित अखबार कहने वाला दैनिक जागरण अब जमीन डकारने के लिए गुंडई पर उतारू है। पहले वर्मा परिवार की जमीन पर फर्जीवाड़े से कब्जा किया और अब जमीन न छोड़ने को लेकर जागरण गुंडागर्दी कर रहा है।

हकीकत ये है कि लोकतन्त्र में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर दैनिक जागरण के मालिक पूरे देश में इस तरह के कारनामों को अंजाम दे रहे है। इन्हें फोकट का माल चाहिए और इसके लिए अखबार के नाम की आड़ में पुलिस-प्रशासन पर दबाब बनाकर ये लोग किसी की भी जमीनें हथिया लेते है। दैनिक जागरण अखबार चोरी, बेईमानी और सीनाजोरी का अड्डा बन चुका है। दैनिक जागरण खुद, चोर, भ्रष्ट और बेईमान है। खुद तो पत्रकारिता की आड़ में आपराधिक कृत्य करते है औऱ दूसरों के ऊपर उँगलियां उठाते है। आज जरूरत है दैनिक जागरण को ये अच्छे से जानने की कि अगर दूसरों के लिए गड्डा खोदोगे तो खुद ही उसमें जमीदोंज हो जाओगे और अगर आसमान की ओर थूकने की जुर्रत की तो तुम्हारा ही मुँह मैला हो जायेगा।

दैनिक जागरण के संस्थापकों ने जिस जोश और जुनून और मिशन के लिए इस अखबार को अपने खून-पसीने से सींचा, उनके वारिस आज भूमाफियाओं के साथ मिलकर जमीन कब्जाने जैसी गलीच हरकतें कर रहे है। सवाल ये है कि इस अखबार समूह को आखिर कौन बचा रहा है इनके आपराधिक कृत्यों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नही होती। रामशंकर वर्मा औऱ जतिन वर्मा ने इस मामले में सरकार से दखल की अपील की है और अनुरोध किया है कि सरकार उनकी जमीन दैनिक जागरण के कब्जे से मुक्त कराये…जिससे अखिलेश यादव की सरकार पर व्यापारियों का भरोसा कायम रह सके।

श्री रामशंकर लखनऊ में जाने-माने व्यापारी हैं। उनसे संपर्क करके कोई भी पूरी जानकारी हासिल कर सकता है.

लखनऊ से गीत सिंह की रिपोर्ट. संपर्क: singhgeetsingh66@gmail.com

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जागरण ने जो कूड़ा देश में फैलाया है उसके सामने यह कूड़ा कुछ भी नहीं

Mohammad Anas :  सोनभद्र, उत्तर प्रदेश से भी निकलता है दैनिक जागरण. इस अखबार ने दिसंबर 2015 से लेकर जनवरी 2016 तक लगातार साठ दिन तक शहर में मौजूद बूचड़खाने के खिलाफ कैम्पेन चलाया. वह बताता है कि बूचड़खाने से शहर का माहौल ख़राब होता है. हर रोज़ तीन चार हिन्दू नाम वाले व्यापारियों की तस्वीर लगा कर उनके मत प्रस्तुत करता है. कभी भाजयुमो से प्रदर्शन करवाता तो कभी विहिप से. फर्जी विरोध प्रदर्शन को अच्छा स्पेस देता. हवा बनाता है.

मतलब ये कि बूचड़खाने से मुसलमान कसाइयों की रोजी रोटी छीनने का काम दैनिक जागरण करता है. दो महीना गुजरने के बाद भी प्रशासन अखबार की नहीं सुनता तो वह चुप हो कर बैठ जाता है. अखबार में इस कैम्पेन को चलवाने वाले कौन लोग हैं? वह सम्पादक जिसकी अच्छी खासी चुटिया है, या फिर जिसने जन्म से जनेऊ पहन रखा है? अखबार के मालिक उन बूचड़खानों पर क्यों कभी कोई कैम्पेन नहीं चलवाते जिनके मालिक हिन्दू या जैन हैं? जिनके लिए नरेंद्र मोदी सरकार आज भी सब्सिडी दे रही है.

छोटे बूचड़खाने को बंद करवाने की मुहीम चलवाने वाला दैनिक जागरण चार-पांच दिन से बुलंदशहर की जिलाधिकारी बी चन्द्रकला से भी उलझा हुआ है. डीएम के समर्थन में शहर के सफाई कर्मचारियों ने दैनिक जागरण जैसे सांप्रदायिक और पक्षपाती अखबार के दफ्तर पर कई गाड़ियों में भर के कूड़ा फेंक दिया है. bhadas4media के अनुसार दैनिक जागरण का ब्यूरो चीफ सुमन करन करोड़ो के आईटीआई परीक्षा घोटाले में संलिप्त है, उसी ने बी. चन्द्रकला से निजी बातचीत का ऑडियो वायरल करवाया है.

जागरण ने जो कूड़ा देश में फैलाया है उसके सामने यह कूड़ा कुछ भी नहीं. काश की सोनभद्र के कसाई भी इस अखबार के दफ्तर के बाहर जानवरों की हड्डियाँ फेंक आते.

युवा पत्रकार और मीडिया एक्टिविस्ट मोहम्मद अनस के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक जागरण के मालिकानों ने दिखाया अखिलेश सरकार को ठेंगा

नई दिल्ली/ नोएडा। हुआ वही जिसका अंदाजा था। तानाशाह दैनिक जागरण के मालिकानों ने उत्तर प्रदेश की समाजवादी अखिलेश यादव सरकार को ठेंगा दिखा दिया। अखिलेश सरकार ने गत 25 जनवरी को प्रदेश के मीडियाकर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्पलाइन सेवा का शुभारम्भ किया था। खुद मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने सेवा की शुरुआत करते हुए उत्तर प्रदेश के तमाम मीडियाकर्मियों को इस बात का विश्वास दिलाया था कि हेल्पलाइन निश्चित रूप से मीडियाकर्मियों के मसलों को सुलझाएगी और उन्हें इन्साफ दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

इससे उत्साहित मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के आंदोलित कर्मचारियों ने भी इस सेवा के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कराई। शासन के सीधे हस्तक्षेप के बाद 5 फरवरी को वार्ता की तिथि निश्चित हुई। लेकिन दैनिक जागरण के मालिकानों के इशारे पर वार्ता के लिए आये प्रतिनिधियों ने वार्ता करने से ही इनकार कर दिया। जागरण के प्रतिनिधियों ने वर्षों से संस्थान में सेवा दे रहे कर्मचारियों को कर्मचारी मानने से ही इनकार कर दिया।

बता दें कि आंदोलित कर्मचारियों ने ही शासन से दैनिक जागरण के तानाशाह रवैये की शिकायत की थी। लेकिन गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वार्ता से बचा नहीं जा सकता। जागरण प्रतिनिधियों के इस तानाशाही रवैये से वहां मौजूद आंदोलित कर्मचारी व जिले के प्रशासनिक अधिकारी भी बेहद नाराज दिखे। ऐसे में यह तो स्पष्ट है कि जागरण के मालिकानों ने मुख्यमंत्री की इस योजना का मजाक बना दिया। वार्ता के दौरान दैनिक जागरण के कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों के मसलों को रखा जिन पर जागरण के प्रतिनिधि जवाब देने में पूरी तरह विफल रहे।

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दैनिक जागरण की कुत्सित मानसिकता पर बुलंदशहर के सफाईकर्मियों का प्रहार, आफिस को कचरे से पाटा (देखें वीडियो)

बुलंदशहर में डीएम संग जबरन सेल्फी खिचाने वाले आरोपी की वकालत करने वाले दैनिक जागरण को अब समाज के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पिछले 5 दिनों से महिला विरोधी मानसिकता से की जा रही पत्रकारिता पर जिले के सफाईकर्मियों ने प्रहार कर दिया है। महिला सम्मान की इज्जत उतारने वाले दैनिक जागरण का आफिस कूड़े से पाट दिया गया है और सफाईकर्मियों ने ऐलान किया है कि अगर अपनी बदतमीजियां जागरण ने बंद नही की तो पूरे शहर का कचरा जागरण के आफिस पर डाला जायेगा।

आज सुबह दैनिक जागरण के चॉदपुर क्रासिंग पर स्थित आफिस के बाहर कई ट्राली कचरा भरा हुआ मिला। आफिस के बाहर के रास्ते में इतनी भी गुन्जाइश नही बची थी कि कोई दूसरी ओर जा सके। दैनिक जागरण के पत्रकारों ने अधिकारियों को जब इस बाबत बताया तो नगरपालिका के सफाईकर्मियों ने वहाँ से कूड़ा हटाने से मना कर दिया। साथ ही अफसरों को चेतावनी दी है कि पत्रकारिता की आड़ में छुपे ऐसी मानसिकता वाले अपराधियों का वह खुलकर विरोध करेंगे।

आज दोपहर को सफाईकर्मी इस बाबत सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपेगे। ज्ञापन में यह अल्टीमेटम भी जारी किया जा रहा है कि अगर दैनिक जागरण के पत्रकारों ने अपनी दिमागी सोच नहीं बदली तो अंजाम और बुरा होगा। सफाईकर्मियों ने शहर में हड़ताल करने और पूरे शहर का कूड़ा जागरण के आफिस में भरने की धमकी भी दी है।

ज्ञातव्य है कि पिछले कई दिनों से सेल्फी प्रकरण में दैनिक जागरण द्वारा सामाजिक सरोकारों को दरकिनार करके महिला सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले आरोपी के पक्ष में पत्रकारिता की जा रही है। जागरण की इस हरकत का पूरे समाज में विरोध हो रहा है। पेड न्यूज का सबसे बड़ा सौदागर दैनिक जागरण वैसे तो बड़े नेताओं और बड़े अफसरों के तलवे चाटता है लेकिन बुलंदशहर की महिला डीएम को कमजोर समझकर जो पीत पत्रकारिता शुरू की, उसका खामियाजा उसे अब खुद भुगतना पड़ रहा है।

दैनिक जागरण के बुलंदशहर आफिस को कूड़े से पाटे जाने का वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://youtu.be/kYVgY4D7qzc


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मानवाधिकारों का हनन कर रहा दैनिक जागरण, अहंकार त्यागने को तैयार नहीं मालिकान

नई दिल्ली/ नोएडा। मानवाधिकारों का हनन और कर्मचारियों का शोषण करने में नंबर एक संस्थान है दैनिक जागरण। ये अखबार खुद को विश्व में सबसे अधिक पढ़े जाने का दावा करता है। लेकिन इसे इस मुकाम तक पहुँचाने वाले कर्मचारियों का शोषण करने में इसने कभी कोई कसर नहीं छोड़ी। आप अखबार उठाकर देखिये पूरा अखबार सदाचार, संस्कार और नैतिकता के बारे में भाषणों से भरा हुआ मिलेगा।

अखबार में लोकतंत्र की रक्षा की बड़ी-बड़ी बातें लिखी होंगी। लेकिन माननीय उच्चतम न्यायालय का आदेश मानने से इसके मालिकानों ने साफ़ इनकार कर दिया। जब कर्मचारियों ने ऐसा करने का अनुरोध किया तो उनकी 20-25 साल की सेवा को इसके मालिकानों ने एक झटके में भुला दिया। इस अत्याचारी अखबार के मालिकों ने अपना हक़ मांगने पर 350 से अधिक कर्मचारियों को संस्थान से निकाल दिया है।

इन कर्मचारियों का कसूर बस इतना था कि इन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने का अनुरोध जागरण के मालिकों से किया था। गौरतलब है कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2014 में अखबार संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को मजीठिया वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार वेतन औए एरियर देने का अनुरोध किया था। लेकिन कर्मचारियों के चार माह तक सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के बावजूद इसके मालिकान अहंकार त्यागने को तैयार नहीं हैं।

जागरण प्रबंधन बेवजह की गुंडागर्दी करते हुए कर्मचारियों को न तो संस्थान के अंदर काम करने दे रहा है और न ही मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में अखबार जबरदस्त नुकसान में है और इससे उसे उबरने में लंबा समय लगेगा। लेकिन इस सबके बाद भी पहाड़ सरीखे अहंकार के चलते जागरण प्रबंधन कर्मचारियों को उनका वाजिब हक़ देने को तैयार नहीं है।

पस्त हुआ जागरण प्रबंधन, कर्मचारियों के हौसले बुलंद

मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशें लागू करने की मांग को लेकर पिछले दो वर्ष से संघर्ष कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों का संघर्ष अब रंग लाने लगा है। जागरण प्रबंधन से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि अखबार मालिकानों के सारे दांव विफल साबित हो गए हैं और उनके साथ साथ प्रबंधन से जुड़े अन्य लोगों में बेहद हताशा का माहौल है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट में पिछले महीने हुई सुनवाई में माननीय अदालत का रुख स्पष्ट रूप से कर्मचारियों के पक्ष में होने के बाद जागरण के मालिकान पूरी तरह बैकफुट पर हैं।

इसके अलावा कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से लगभग 100 करोड़ की रिकवरी भी डाली जा चुकी है। कर्मचारियों ने इससे पूर्व में अपने अधिवक्ता के माध्यम से मालिकानों को नोटिस भी भिजवा दिया था। बताया जा रहा है कि कर्मचारियों के बुलंद हौसलों के कारण ही अखबार मालिकान और प्रबंधन अब कर्मचारियों के साथ समझौता करने को विवश हो गए हैं। अब यह पूरी तरह स्पष्ट है कि अखबार मालिकानों के पास कर्मचारियों से समझौते के अलावा कोई रास्ता नहीं है।

इस संबंध में जागरण एम्प्लाइज यूनियन के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप कुमार सिंह कहते हैं कि अखबार मालिकानों ने पिछले दो साल में कर्मचारियों पर अत्याचार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अखबार मालिकानों के अत्याचार के कारण ही कर्मचारियों को सड़क पर उतरना पड़ा। आंदोलित कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि वे अखबार मालिकानों के झांसे में नहीं आएंगे और मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन और एरियर से कम पर बिलकुल समझौता नहीं करेंगे।

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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संजय गुप्ता यानि स्वतंत्रता का दुश्मन

Shrikant Singh : देश के इस दुश्‍मन को अच्‍छी तरह पहचान लें… दोस्‍तो, देश के दुश्‍मनों से लड़ने से कहीं ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण उन्‍हें पहचानना है। सीमापार के दुश्‍मनों से कहीं अधिक खतरनाक दुश्‍मन देश के अंदर हैं। आप उन्‍हें पहचान गए तो समझिए हमारी जीत पक्‍की। हम आपका ध्‍यान देश के एक ऐसे दुश्‍मन की ओर दिलाना चाहते हैं, जो पुलिस, प्रशासन, देश की न्‍यायपालिका और यहां तक कि देश की व्‍यवस्‍था तक को प्रभावित कर अपनी मुनाफाखोरी के जरिये इस देश को लूट रहा है। आप पहचान गए होंगे। हम दैनिक जागरण प्रबंधन की बात कर रहे हैं। आज 26 जनवरी है। गणतंत्र दिवस। इस दिन एक वाकया याद आ रहा है।

पहले दैनिक जागरण में स्‍वतंत्रता दिवस को सेलीब्रेट किया जाता था, लेकिन अब 26 जनवरी को सेलीब्रेट किया जाता है। इसके पीछे जन्‍मजात महान पत्रकार संजय गुप्‍ता ने तर्क दिया था कि अब इस देश को स्‍वतंत्रता की जरूरत नहीं है। अब जरूरत है तो नियमों पर चलने की। चूंकि 26 जनवरी को भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया था, इसलिए उन्‍होंने इसे नियमों का दिवस मानकर सेलीब्रेट कराना शुरू करा दिया। अब इंसान हर चीज को अपने फायदे के लिए किस प्रकार परिभाषित कर लेता है, उसका उदाहरण संजय गुप्‍ता से बड़ा और कौन हो सकता है। उन्‍होंने स्‍वतंत्रता का अर्थ अपने कर्मचारियों की स्‍वतंत्रता से लगाया और अपने मैनेजर, संपादक से लेकर चपरासी तक की स्‍वतंत्रता छीननी शुरू कर दी।

नियमों का अर्थ उनकी नजर में संविधान के नियम नहीं, बल्कि दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से थोपे जाने वाले संविधान विरोधी नियम थे। अब अपने चापलूसों के साथ बैठकर वह जो नियम बना देते हैं, उसका पालन करना दैनिक जागरण परिवार के हर सदस्‍य की मजबूरी बन जाता है। जो इस मजबूरी को ढोने से तोबा करने को मजबूर हो जाता है, उसे बाहर का रास्‍ता दिखा दिया जाता है। इसके भुक्‍तभोगी दैनिक जागरण के तमाम कर्मचारी हैं, जिनमें से सैकड़ों संघर्ष के लिए सड़क पर उतर आए हैं। राहत की बात यह है कि कल उत्‍तर प्रदेश सरकार ने एक हेल्‍पलाइन जारी की, जहां शिकायत कर आप दैनिक जागरण प्रबंधन को यह बता सकते हैं कि साहब नियम यह नहीं यह है। मेरी इस देश के पाठकों, विज्ञापनदाताओं और अभिकर्ताओं से गुजारिश है कि देश के इस दुश्‍मन को जितनी जल्‍दी हो सके सबक सिखाएं। नहीं तो बहुत देर हो जाएगी और यह मुनाफाखोर इस देश को पूरी तरह से लूट चुका होगा। अपना खयाल रखें। आज का दिन आपके लिए शुभ हो। गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।

दैनिक जागरण में मुख्य उपसंपादक पद पर कार्यरत क्रांतिकारी पत्रकार श्रीकांत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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शर्मनाक : गायकी के उस्ताद अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन को दैनिक जागरण ने पाकिस्तानी फ़नकार बताया!

शर्म से डूब मरने की बात है। हिंदी के सबसे बड़े अख़बार होने का दावा करने वाले दैनिक जागरण ने जयपुर की माटी में खिलकर, गायकी के उस्ताद बने अहमद हुसैन और मुहम्मद हुसैन को पाकिस्तानी फ़नकार बताया है। यह हाल है पराड़कर जी के शहर वाराणसी की पत्रकारिता का। नाक़ाबिले माफ़ी यह है ग़लती, क्योंकि सवाल किसी वर्तनीदोष या छपाई का नहीं है..इन उस्ताद भाइयों के परिचय में कुछ जोड़ा गया है यानी संपादनकला का परिचय दिया गया है…!

वरिष्ठ पत्रकार पंकज श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से. उपरोक्त स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं>

Latif Kirmani पंकज जी, दरअसल आजकल के कथित बड़े अख़बारों के बड़े पत्रकार भारतीय मुसलमान नेताओं और कलाकारों के नाम और परिचय से वाकिफ नहीं है या होना नहीं चाहते। नवभारत टाइम्स जैसे अख़बार में जब जामा मस्जिद के शाही इमाम अब्दुल्लाह बुखारी के देहांत की खबर छपी तो तस्वीर उनके बेटे अहमद बुखारी की लगा दी थी बाद में सहयोगी अखबार सांध्य टाइम्स में गलती के लिए खेद प्रकट किया गया। इसी तरह और भी उदाहरण है। जबसे ग़ुलाम अली का शो रद्द हुआ है तबसे पत्रकारों के दिमाग़ में हर मुसलमान फनकार पाकिस्तानी नज़र आता है…भाई हिंदी के पत्रकारों से अनुरोध करूँगा कि वो मुस्लिम फनकारों और नेताओं के बारें में जानकारी के लिए भी अध्ययन कर लिया करें…

Bhim Prakash जब मैंने पहली दफा इनकी ग़जल सुनी तो लगा ये एक ही गा रहे हैं फिर पता चला कि ये तो दो गा रहे हैं।कमाल की ताजगी है इनकी गायकी में।जो इनकी भारतीयता पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगा रहे हैं वो सबसे पहले खुद को जान लें फिर दूसरों से कहें।

Abdulwali Shabi इनको हर मुसलमान पाकिस्तानी नज़र आता है.

Aziz Waqaar Khan और आज तीन दिन हो गए इन्होंने अभी तक माफ़ी नही मांगी ।।

Prafulla Prabhakar जागरण के सम्पादक शायद उत्तर प्रदेश से बाहर की कोई जानकारी नहीं रखते….

Jawed Mohd इनको हर मुसलमान पाकिस्तानी नज़र आता है.

Tanweer Farooque यह आजकी नई युग की पत्रकारिता है जहाँ खबर कि गहराई से दुर दुर तक का कोई वास्ता नही है बस छापते जाओ। और इस देश को बाँटते जाओ।

Uttam Singh पत्रकारिता का स्तर दिनों दिन गिरता जा रहा है चाहे वह प्रिन्ट मीडिया हो या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया. कमरे में बैठ कर पत्रकारिता की जायेगी तो यही तो मिलेगा. जनाब, यह तो ग़नीमत है, ये लोग तो ये भी लिख सकते थे कि दो ‘पाक आतंकवादी’ ग़ज़ल भी गाते हैं.

Sayed Wajih Ul Haque हम तो दैनिक जागरण की मानसिकता को रोज़ झेलते हैं , कुत्सित मानसिकता के साथ पत्रकारिता होती है।

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सहारा और जागरण के हजारों मीडिया कर्मियों के इतने बड़े-लंबे आंदोलनों को कवरेज नहीं दे रहे बड़े मीडिया हाउसों को अब बेशर्मी छोड़ने की जरूरत

आउटलुक मैग्जीन को धन्यवाद जो उसने सहारा मीडिया के हजारों कर्मियों की बड़ी पीड़ा को आवाज दी. साल भर से बिना सेलरी काम कर रहे और लगभग भुखमरी के शिकार हजारों मीडियाकर्मियों के सड़क पर उतरने और प्रधानमंत्री व सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखने के बावजूद देश के बड़े मीडिया हाउसों की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली है. लगता है सहारा चिटफंड से अरबों खरबों का पैसा विज्ञापन के नाम पर डकारने के कारण ये मीडिया हाउस नमक का कर्ज अदा कर रहे हैं.

छोटी छोटी घटनाओं को ब्रेकिंग न्यूज बना देने वाले न्यूज चैनलों की नैतिकता भी बाजारू हो चुकी है जो उन्हें दिल्ली एनसीआर के इतने बड़े संकट से आंखें दो चार करने की हिम्मत नहीं पड़ रही है. अब वक्त आ गया है जब सहारा मीडिया के हजारों कर्मियों को उनका हक दिलाने के लिए सभी को एकजुट होकर लिखना पढ़ना और प्रयास करना चाहिए.

सहारा जैसा ही संकट दैनिक जागरण में है जहां नोएडा आफिस से सैकड़ों लोगों को इसलिए बर्खास्त कर दिया गया क्योंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेशित मजीठिया वेज बोर्ड को लागू करने की मांग प्रबंधन से की. बर्खास्त किए गए सैकड़ों लोग रोजाना फिल्म सिटी से लेकर जंतर मंतर तक और दैनिक जागरण के आफिस से लेकर इंडिया गेट तक धरना प्रदर्शन के साथ-साथ रैली निकाल रहे हैं लेकिन कोई मीडिया हाउस इसे कवरेज नहीं दे रहा क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि एक डकैत दूसरे डकैत के इलाके में चल रहे संकट में नाक नहीं घुसाता.

उम्मीद करता हूं कि मीडिया हाउस खुद को डकैत नहीं कहलाना पसंद करेंगे, वो मीडिया हाउस ही रहना चाहेंगे. इसलिए सहारा और जागरण के कर्मियों के आंदोलन को कवर करना शुरू करें. ऐसा नहीं करके आखिर फिर आप किस मुंह से पत्रकारिता, नैतिकता, सरोकार, जनहित, मानवीय मूल्य, लोकतंत्र, समानता, कानून, संविधान, न्याय आदि शब्दों को उच्चारेंगे.

-यशवंत
एडिटर, भड़ास4मीडिया
yashwant@bhadas4media.com

आगे के पेजों पर देखें सहारा मीडिया के संगठित हो चुके कर्मियों की तस्वीरें और पीएम को लिखा पत्र.

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दैनिक जागरण में अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल के एक माह हुए पूरे, कर्मचारियों ने कहा- डटे रहेंगे

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफरिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों की हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है। पिछले डेढ़ वर्ष से अपने हक़ और इंसाफ के लिए आंदोलित कर्मचारी बेहद अनुशासित ढंग से पूरे महीने दिल्ली और नोएडा में प्रदर्शन करते रहे लेकिन जागरण प्रबंधन उनके आंदोलन को कुचलने में अपनी सारी ताकत खर्च करता रहा।

गौरतलब है कि यह दैनिक जागरण में अब तक की सबसे बड़ी हड़ताल है।

कर्मचारियों की हड़ताल को दिल्ली के पत्रकार संगठनों और वरिष्ठ पत्रकारों का भी समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि दैनिक जागरण के कर्मचारी इतिहास लिखने जा रहे हैं। उनका कहना है कि प्रिंट मीडिया के इतिहास में कभी ऐसी जबरदस्त हड़ताल नहीं हुई और इसके पीछे जागरण प्रबंधन में बैठे वे धूर्त लोग जिम्मेदार हैं जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद भी कर्मचारियों के हक़ पर डाका डाले बैठे हैं।

दैनिक जागरण के नोएडा प्रबंधन में बैठे कुछ लोग कर्मचारियों की बरसों की मेहनत से खड़ी की गई इस यूनिट को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। कर्मचारी अब और ज्यादा उत्साह और ताकत के साथ आंदोलन को तेज करने की रणनीति बना रहे हैं। कर्मचारियों ने कहा है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे।

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कंजूस-मक्खीचूस और संविधान-कानून विरोधी मालिकों के खिलाफ दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने नोएडा के फिल्म सिटी में किया जोरदार प्रदर्शन

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जागरणकर्मियों ने किया जागरण के नोएडा दफ्तर के आगे प्रदर्शन, प्रबंधन हुआ चित्त

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दूसरी तिमाही में जागरण के मालिकों ने 91 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ कमाया लेकिन कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड देने में नानी मर रही है

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जागो कर्मचारियों, अखबारमालिक किसी के सगे नहीं

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पूरे जोश में जागरणकर्मी, बोले- मजीठिया लेकर रहेंगे

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दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने निलंबन वापसी और वेज बोर्ड लागू कराने के लिए अर्धनग्न होकर इंडिया गेट पर किया प्रदर्शन (देखें तस्वीरें)

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प्रबंधन के हथकंडों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दैनिक जागरणकर्मी हुए तैयार, देखें बैठक की फोटो

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दैनिक जागरण के सैकड़ों मीडियाकर्मी जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे, कई यूनिटों में हड़ताल (देखें वीडियोज)

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दूसरी तिमाही में जागरण के मालिकों ने 91 करोड़ रुपये से ज्यादा का लाभ कमाया लेकिन कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड देने में नानी मर रही है

30 सितंबर को खत्म हुए वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजे बताते हैं कि जागरण प्रकाशन लिमिटेड यानि जेपीएल ने शुद्ध मुनाफा 91.27 करोड़ रुपये कमाया है. इस बाबत दैनिक जागरण की वेबसाइट पर भी खबर प्रकाशित की गई है. लेकिन इन जागरण के मालिकों को जब कानून के मुताबिक सही सही सेलरी देने की बात कही जाती है तो इनकी नानी मरने लगती है.

सोचिए ये लोग जब एक तिमाही में 91 करोड़ कमा रहे हैं तो साल भर में यानि चार तिमाहियों में कितने कमा लेते होंगे. और, ये तो वो मुनाफा है जिसे कागजों पर दिखाया गया है, यानि नंबर एक में. जागरण ग्रुप नंबर दो में माल काटने और पैसा कमाने का उस्ताद रहा है. पेड न्यूज से लेकर ब्लैकमेलिंग तक की हरकतों के जरिए ये लोग खरबों रुपये की ब्लैक मनी इकट्टा किए हुए हैं.

अगर जागरण के मालिकों के सभी ठिकानों पर एक साथ छापा पड़ जाए तो इतने पैसे निकलेंगे कि गिनने वाले महीनों गिनते ही रह जाएंगे. पर सत्ता, नेता, न्यायपालिका, नौकरशाहों से तगड़ी सांठगांठ के कारण जागरण के मालिक न सिर्फ ब्लैक मनी रखने के बावजूद प्रसन्न घूम रहे हैं, कानूनन जो सेलरी इंप्लाइज को देनी चाहिए उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद न देकर मजे में हैं. यानि इनकी जेब में हर कोई है, इसलिए इनका बाल बांका तक नहीं हो पाता. पढ़िए वो मूल खबर जो जागरण द्वारा लाभ कमाने से संबंधित है और जिसे खुद जागरण वालों ने अपनी वेबसाइट पर छापा है…

Jagran Prakashan Limited reports Q2 net profit at Rs 91.27 crore

New Delhi: Jagran Prakashan Ltd (JPL), the publisher of leading Hindi daily Dainik Jagran, yesterday reported a consolidated net profit of Rs 91.27 crore for the second quarter ended September 30. The company had posted a net profit of Rs 56.60 crore in the July-September quarter of FY15, Jagran Prakashan said in a BSE filing. On a consolidated basis, JPL’s total income from operations during the quarter was Rs 519.50 crore, against Rs 436.27 crore in the year-ago period.

Revenue from advertisement was Rs 388.96 crore during the second quarter of FY16. It was Rs 306.93 crore in the same period last fiscal. Commenting on the performance, JPL CMD Mahendra Mohan Gupta said, “It gives me immense pleasure to report that the company has for the first time crossed the mark of Rs 500 crore in turnover in a quarter.”  

The company said its results are not comparable with the corresponding quarters and H1 period as it had acquired SBHPL Crystal and MBL.

“The result for the quarter and half year ended September 30, 2015 include the results of SBHPL Crystal and MBL, with effect from June 11, 2015, which have been acquired from the said date and accordingly are not comparable with the corresponding quarter and half year ended September 30, 2014,” JPL said.

The company’s consolidated net profit for the first half of FY16 was Rs 271.22 crore. It was Rs 111.68 crore in the same period a year ago. Its total income from operations on a consolidated basis during the first half of the current fiscal was Rs 1,000.65 crore. It was Rs 876.56 crore in the same period a year ago.सApart from Dainik Jagran, the group publishes papers such as Naidunia, Midday, INext, City Plus, Punjabi Jagran, Josh and Sakhi.

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प्रबंधन के हथकंडों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए दैनिक जागरणकर्मी हुए तैयार, देखें बैठक की फोटो

नई दिल्ली। दैनिक जागरण की गुंडागर्दी का कर्मचारी मुंहतोड़ जवाब देंगे। शनिवार को दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने बैठक कर मजीठिया के लिए चल रहे आंदोलन की रणनीति के बारे में चर्चा की। बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि मजीठिया की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को और धार दी जाएगी। कर्मचारियों ने कहा कि प्रबंधन आंदोलन का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ पत्रकार श्री प्रदीप कुमार सिंह जी के खिलाफ सोशल मीडिया पर झूठे आरोप लगाकर नीच हरकत कर रहा है।

कर्मचारियों ने एकजुट होकर कहा कि वे इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे। इसके अलावा जागरण प्रबंधन की कर्मचारियों पर जानलेवा हमले करने की खबरों पर भी सभी ने रोष व्यक्त किया। कर्मचारियों ने कहा कि प्रबंधन उनके धैर्य की परीक्षा न ले। गौरतलब है कि दैनिक जागरण के मालिक संजय गुप्ता ने माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश का पालन करने की मांग करने पर अत्याचार व गुंडागर्दी की सभी सीमाएं पार करते हुए 350 से अधिक कर्मचारियों व उनके परिवार को सड़क पर ला दिया है। कर्मचारियों ने कहा कि दैनिक जागरण प्रबंधन झूठे आरोप लगाकर पिछले डेढ़ वर्ष से कर्मचारियों को प्रताड़ित कर रहा था। इसके विरोध में कर्मचारी एकजुट हो गए थे।

कर्मचारियों को गुलाम समझने की मानसिकता वाला जागरण प्रबंधन इसे बर्दाश्त नहीं कर पाया और झूठे आरोप लगाकर कर्मचारियों को संस्थान से बाहर कर दिया। दैनिक जागरण के मालिकानों की एक ही कोशिश है कि किसी भी तरह उन्हें कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों का लाभ नहीं देना पड़े। 15 से 20 साल दैनिक जागरण को नंबर एक कहने लायक बनाने में देने वाले कर्मचारियों को इसके मालिक संजय गुप्ता ने एक मिनट में संस्थान से बाहर कर दिया। उनका कसूर बस इतना था कि वे अपना हक़ मांग रहे थे, इन्साफ करने की मांग कर रहे थे। अब कर्मचारियों ने फैसला किया है कि जागरण के मालिकों की इस गुंडागर्दी का मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा।

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सनातन धर्मी मानसिकता वाला दैनिक जागरण संकिसा बौद्ध स्तूप को टीला लिखता है ताकि बौद्ध अनुयायी अपमानित हो सकें

: संकिसा बौद्ध महोत्सव की झूठी खबर छापने से बौद्ध अनुयायियों में रोष : फर्रूखाबाद। विश्व प्रसिद्ध संकिसा बौद्ध पर्यटक स्थल पर आयोजित विशाल महोत्सव के बारे में दैनिक जागरण द्वारा झूठी खबर छापे जाने से बौद्ध अनुयायियों में रोष व्याप्त हो गया है। कानपुर से प्रकाशित दैनिक जागरण के फर्रूखाबाद संस्करण के आज 23 अक्टूबर के समाचार पत्र के पेज नम्बर 2 पर (बयानबाजी से संकिसा में माहौल गर्माया शीर्षक) समाचार प्रकाशित किया गया है। खबर धम्मा लोको बुद्ध बिहार के अध्यक्ष कर्मवीर शाक्य के हवाले से प्रकाशित किया गया है। इसमें कहा गया है कि उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एस अश्वघोष 26 अक्टूबर को अशोक स्तम्भ का अनावरण करेंगे।

इसी समाचार में मय फोटो समाचार प्रकाशित किया गया कि 22 अक्टूबर को राम नवमी के अवसर पर मां विसारी देवी सेवा समिति के संयोजक अतुल दीक्षित ने करीब देढ़ दर्जन साथियों के साथ संकिसा स्थित बौद्ध स्तूप पर मां विसारी देवी मंदिर के सामने हवन पूजन किया। बीते कई वर्षों से सनातन धर्मी मानसिकता के कारण दैनिक जागरण में बौद्ध अनुयायियों को अपमानित करने के लिये संकिसा के बौद्ध स्तूप को टीला लिखा जाता है। भारत सरकार यूपी सरकार एवं जनपद फर्रूखाबाद के सरकारी अभिलेखों में स्तूप परिसर की भूमि केन्द्र सरकार के पुरातत्व विभाग के अधीन है। भगवान बुद्ध का स्तूप होने के कारण ही स्तूप परिसर का अधिग्रहण किया गया था। पुरातत्व विभाग ने स्तूप परिसर की देखभाल करने के लिये चौकीदार जहरूद्दीन को तैनात किया है। जिला प्रशासन ने स्तूप परिसर की सुरक्षा के लिये स्थाई रूप से पुलिस गार्द को तैनात किया है।

संकिसा में विदेशी व स्थानीय अनुयायियों द्वारा बनवाये जा रहे बौद्ध बिहारों की लगातार  बढ़ी रही संख्या इस बात का सबूत है कि सनातन धर्म के लोग बौद्ध स्तूप व बौद्ध अनुयायियों के कार्यक्रमों का विरोध करते है। उतना ही संकिसा का विकास हुआ है। स्तूप की स्थापना के कारण ही संकिसा में गेस्ट हाउस, टेलीफोन एक्सचेंज के बाद पर्यटक हाउस बनवाया गया है। स्तूप की बदौलत ही मोहम्मदाबाद से संकिसा एवं काली नदी होते हुये भोगांव मैनपुरी की ओर काफी चौड़ी सड़क बनवाई गई है। जब कि संकिसा के वासिंदे गांव का विकास न होने के कारण 19वी सदी की तरह जिन्दगी जी रहे है। भगवान बुद्ध की कथित मौसी मां विसारी देवी के नाम पर मुठ्ठी भर लोग पूरे साल उसी समय अपना कार्यक्रम करके व्यवधान उत्पन्न करते है जब अक्टूबर माह के अंतिम सप्ताह में प्रदेश व विदेश के लोग बौद्ध महोत्सव का आयोजन करते है।

स्तूप की बदौलत ही 31 जनवरी 2015 को परमपावन दलाई लामा संकिसा स्तूप स्थल गये थे। श्री लामा ने स्तूप के निकट यूथ बुद्धिस्ट सोसाइटी की ओर से जसराजपुर बुद्ध बिहार में विशाल अशोक स्तम्भ का उद्घाटन किया था। संकिसा के विकास एवं बौद्ध धर्म के प्रचार के लिये सूवे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उसी दौरान संकिसा में ही  दलाई लामा से भेट की थी। कामरेड कर्मवीर शाक्य ने दैनिक जागरण में प्रकाशित झूठे समाचार पर नाराजगी जाहिर करते हुये बताया कि कायमगंज के प्रमुख उद्योगपति व समाज सेवी चन्द्र प्रकाश अग्रवाल 26 अक्टूबर को नवनिर्मित अशोक स्तम्भ का उद्घाटन करेगे न कि उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एस अश्वघोष। श्री शाक्य ने बताया कि श्री घोष 26 अक्टूबर को बौद्ध भिक्षु सम्मेलन का उद्घाटन करेगे। उन्होने बताया कि दैनिक जागरण वालों की पिक्को लाला से अनवन चल रही है। इसी लिये जानबूझकर झूठा समाचार प्रकाशित किया गया है। दैनिक जागरण बौद्ध अनुयायियों को अपमानित करने के लिये उनके पवित्र स्तूप स्थल को टीला लिखता है। श्री शाक्य ने दैनिक जागरण वालों को समय रहते भूल सुधार करने एवं भविष्य में स्तूप स्थल को टीला न लिखने की चेतावनी दी है।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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मोबाइल टावर्स लगाने का लालच और विज्ञापन के भूखे लालची अखबार… पढ़िए एक युवा ने क्यों कर लिया सुसाइड

Vinod Sirohi : जरूर शेयर करें —मोबाइल टावर्स लगाने का लालच और विज्ञापन के भूखे लालची अखबार — आप पर कोई बंदिश नहीं है आप इस मैसेज को बिना पढ़े डिलीट कर सकते हैं। अगर आप पढ़ना चाहें तो पूरा पढ़ें और पढ़ने के बाद 5 लोगों को जरूर भेजें।

मेरा नाम राहुल है। मैं हरियाणा के सोनीपत जिले के गोहाना का रहने वाला हूँ। आप भी मेरी तरह इंसान हैं लेकिन आप में और मुझमें फर्क ये है कि आप जिन्दा हैं और मैंने 19 अगस्त, 2015 को रेल के नीचे कटकर आत्महत्या कर ली।

चौकिये मत, नीचे पढ़िये।

मेरा परिवार गरीबी से जूझ रहा था। एक दिन मैंने एक हिन्दी के अख़बार में (अपने आप को हिन्दी जगत का प्रमुख अखबार बताने वाला ) मोबाईल टावर लगाने सम्बन्धी विज्ञापन पढ़ा। इसमें 45 लाख एडवांस, 50 हजार रूपये महीना किराया तथा 20 हजार रूपये प्रतिमाह की सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी देने की बात कही थी। मैनें दिये गये नम्बर पर फोन किया तो उन्होंने हमारे प्लाट का पता ले लिया जहाँ मैं टावर लगवाना चाहता था। अगले दिन उन्होंने मुझे फोन करके मुबारकबाद दी और कहा कि मेरा प्लाट टावर लगने के लिए पास हो गया है। उन्होंने मुझे रजिस्ट्रेशन फ़ीस के तौर पर 1550 रूपये स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाता 20266209852 ब्रांच लाजपत नगर नई दिल्ली में डालने के लिए कहा। मैंने 1550 रूपये डाल दिये तो उन्होंने मुझे रिलायंस कम्पनी का ऑफर लेटर तथा एक लेटर सूचना और प्रोद्द्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार का मेरी ईमेल पर भेजा जिसमें 27510 रूपये सरकारी टैक्स जमा करवाने की बात कही गई थी।

मैंने 27510 रूपये भी जमा करवा दिये तो उन्होंने मुझसे 13500 रूपये डिमांड ड्राफ्ट चार्जेज के तौर पर जमा करवाने के लिए कहा। मैंने ये रूपये भी जमा करवा दिए तो उन्होंने मेरे फोन उठाने बंद कर दिये। जो पैसे मैंने इस खाते में जमा करवाये वह पैसे मेरी बहन की शादी के लिए रखे थे। मैं अपने परिवार को 45 लाख रूपये का सरप्राइज देना चाहता था, लेकिन जब मुझे ठगी का एहसास हुआ तो मैं अपने परिवार को मुहँ दिखाने के लायक नहीं बचा और मैंने रेल के नीचे कटकर आत्महत्या कर ली।

मेरी असमय मौत के बाद मेरी रूह धरती पर ही भटक रही है और लोगों को ठगी के इस जंजाल के प्रति जागरूक कर रही है। मेरे दावे की सत्यता के लिये आप ऊपर दिये गये बैंक खाते की 11 अगस्त से 18 अगस्त की स्टेटमेंट देख सकते हैं। ऐसे लगभग 300 फ्रॉड ग्रुप अख़बारों में फर्जी विज्ञापन देकर भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इनके झांसे में ना आयें। आप 5 लोगों को 2 मिनट में ये सन्देश जरूर भेजें और पार्क, बैठक, घर और दफ्तर के लोगों को मौखिक तौर पर इस ठगी के खेल के बारे में जरूर बतायें। मेरी रूह को शान्ति मिलेगी और आपको आत्मसंतुष्टि।

यूपी पुलिस में इंस्पेक्टर विनोद सिरोही के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक जागरण कर्मियों ने अपने मालिक और संपादक संजय गुप्ता के आवास के बाहर प्रदर्शन कर अपना हक मांगा

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने बुधवार को अखबार के मालिक संजय गुप्ता के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित आवास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने महारानी बाग से लेकर न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी तक जुलूस निकाला और संजय गुप्ता के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने स्थानीय पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर बताया कि दैनिक जागरण के मालिक माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश को मानने को तैयार नहीं हैं। संजय गुप्ता पर माननीय न्यायालय की अवमानना का मुकदमा चल रहा है। इस दौरान वहां उपस्थित लोगों को दैनिक जागरण की ओर से 350 से अधिक कर्मचारियों को अपना हक़ मांगने पर संस्थान से बाहर करने की भी जानकारी दी गई।

कर्मचारियों का कहना है कि वे मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर संघर्ष और तेज करेंगे। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने गुंडागर्दी करते हुए मजीठिया की मांग कर रहे 350 से अधिक कर्मचारियों को निलंबित व बर्खास्त कर दिया है। कर्मचारी न्याय की मांग को लेकर दिल्ली से लेकर नोएडा की सड़कों पर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे अपना हक़ लेकर रहेंगे और मालिकों और उनके चमचों को मेहनतकशों की बद्दुआएं जरूर लगेंगी।

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दैनिक जागरण के क्रूर उत्पीड़न के शिकार होकर अधनंगे हो चुके इन सैकड़ो मीडियाकर्मियों को आपके समर्थन की जरूरत है

Yashwant Singh : अदभुत वक्त है ये. अदभुत सरकार है ये. ताकतवर लोगों, कट्टर लोगों, पूंजीवादी लोगों, बाहुबली लोगों का राज चल रहा है. सरकार जनता के मसलों पर चुप है. महंगाई पर चुप है, उत्पीड़न पर चुप है, शोषण पर चुप है. बस केवल जो अनर्गल मुद्दे हैं, उनको हवा दी जा रही है, अनर्गल मुद्दों के आधार पर जनता का बंटवारा किया जा रहा है. मोदी से मीडिया वालों को बहुत उम्मीदें थीं. आखिर कांग्रसी अराजकता का दौर जो खत्म हुआ था. लेकिन मोदी ने मीडिया वालों को यूं निराश किया और अराजकता की ऐसी कहानी लिखनी शुरू की है कि सब सकते में है.

ऐसे में वेज बोर्ड लागू कराने के लिए मीडिया वालों को अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन करना पड़ रहा है. अपना हक मांगने पर निलंबन की कार्यवाही झेल रहे दैनिक जागरण के सैकड़ों मीडियाकर्मियों के पक्ष में कोई आवाज नहीं उठ रही है. आखिर मीडिया वालों के उत्पीड़न शोषण की कहानी कौन छापेगा, कौन दिखाएगा क्योंकि सारे मीडिया मालिक अपने इंप्लाइज के शोषण उत्पीड़न के मसले पर एक जो हैं. ऐसे में हमको आपको इन्हें सपोर्ट करना होगा, इनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाकर इनकी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाना होगा. अपने व्यस्त समय में से कुछ वक्त निकाल कर इन आंदोलनकारी मीडियाकर्मियों को सपोर्ट करें. ज्यादा जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: Protest

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने निलंबन वापसी और वेज बोर्ड लागू कराने के लिए अर्धनग्न होकर इंडिया गेट पर किया प्रदर्शन (देखें तस्वीरें)

नई दिल्ली। मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे दैनिक जागरण के कर्मचारियों ने रविवार को इंडिया गेट पर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने वहां उपस्थित लोगों को दैनिक जागरण के मालिकानों द्वारा की जा रही सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के बारे में बताया। कर्मचारियों ने जागरण के मलिकानों द्वारा अपना हक़ मांगने पर बाहर किये गए 400 से अधिक कर्मचारियों के बारे में भी लोगों को जानकारी दी।

इंडिया गेट पर उपस्थित सैकड़ों लोगों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के बारे में बताया गया। इस दौरान कई लोगों ने जागरण का बहिष्कार करने और कर्मचारियों का साथ देने की भी बात कही। कर्मचारियों ने तय किया है कि निक्कर अभियान को जारी रखा जायेगा और आने वाले दिनों में कई जगहों पर इस तरह प्रदर्शन किया जायेगा। कर्मचारियों का कहना है कि जागरण ने गुंडागर्दी की सारी सीमाएं पार कर दी हैं। कर्मचारियों को मजीठिया की सिफारिशों को लागू करने की मांग करने पर पिछले डेढ़ वर्ष से धमकाया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वह अपना हक़ लेकर रहेंगे।

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