नवगछिया के वरिष्ठ पत्रकार सुनील कुमार झा उर्फ सुनील झा नहीं रहे

शुक्रवार को चार बजे सुबह पटना के आईजीआईएमएस में ली अंतिम सांस… बिहार के भागलपुर जिले के बिहपुर के दयालपुर ग्राम के निवासी सुनील कुमार झा का शुक्रवार को पटना के आईजीआईएमएस में इलाज के दौरान निधन हो गया. वे कैंसर से पीड़ित थे. कुछ दिनों पूर्व जब उन्हें परेशानी हुई तो उन्हें इलाज के लिए भागलपुर के जेएलएनएमसीएच में भर्ती कराया गया था. उन्होंने अन्न जल लेना पूरी तरह से बंद कर दिया था.

भागलपुर में सुधार नहीं होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान रेफर किया गया. लेकिन यहां भी उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ. शुक्रवार को सुबह चार बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके पार्थिव शरीर को दोपहर बाद तक उनके पैतृक आवास पर लाया गया. शनिवार को उनका दाह संस्कार किया गया. सुनील कुमार झा उर्फ सुनील दा करीब 25 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय थे. उन्होंने पटना व भागलपुर से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान, नई बात और दैनिक भास्कर में बिहपुर से कार्य किया. वे बिहपुर के पहले पत्रकार थे.

वे नवगछिया व्यवहार न्यायालय में अधिवक्ता भी थे. उनके निधन पर बड़े भाई विनोद कुमार, दिलीप कुमार झा, गोपी कृष्ण झा, मां गायत्री देवी गहरे सदमे में हैं. सुनील झा बेबाक और स्पष्टवादी पत्रकार के रूप में पूरे नवगछिया अनुमंडल में जाने जाते थे. वे प्रखर वक्ता भी थे. किसी मंच से उनका संबोधन श्रोताओं को ताली बजाने को मजबूर कर देता था. सुनील झा का स्कूली जीवन तुलसीपुर हाई स्कूल में बीता. वे यहां छात्रावास में रह कर पढ़ाई करते थे. फिर उन्होंने अंग्रेजी भाषा से एमए किया और एलएलबी भी किया. सुनील झा के निधन पर नवगछिया अनुमंडल के पत्रकार शोक संतप्त हैं. पत्रकारों ने उनके निधन पर शोक प्रकट किया है.

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लोकस्वामी मैग्जीन के संपादक रजनीकांत वर्मा का निधन

लोकस्वामी समूह के ग्रुप एडिटर रजनीकांत वर्मा नहीं रहे. हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया. वे पचपन साल के थे. वे पिछले कुछ समय से बीमार भी चल रहे थे जिसके कारण उनका इलाज चल रहा था. उत्तराखंड के हल्द्वानी (नैनीताल) के रहने वाले रजनीकांत ने करियर का काफी लंबा अरसा इंदौर में व्यतीत किया.

वे लोकस्वामी से पहले शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में कार्यरत थे. वे ‘माया’ पत्रिका में भी रह चुके हैं. रजनीकांत वर्मा काफी समय से दिल्ली में रहकर ‘लोकस्वामी’ हिंदी पाक्षिक पत्रिका का संपादन करते थे. वे लंबे समय तक इंदौर में रह चुके हैं. वे पिछले 26 साल से लगातार लोकस्वामी समूह से जुड़े हुए थे. लोकस्वामी समूह के समूह संपादक रजनीकांत वर्मा के अचानक चले जाने से उनके जानने वाले स्तब्ध हैं.

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