लखनऊ में उर्दू के वरिष्ठ पत्रकार नाफे किदवाई का निधन

लखनऊ, 15 अक्टूबर, 2014। उर्दू के वरिष्ठ पत्रकार श्री नाफे किदवाई के निधन पर उ0प्र0 जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की लखनऊ इकाई लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ला ने गहरा शोक व्यक्त किया है और दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति अपनी संवेदना  व्यक्त की है।

ज्ञातव्य है कि श्री किदवाई का कल यहां लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया था। वे 56 वर्ष के थे। श्री किदवाई ने उर्दू दैनिक कौमी आवाज और रोजनामा उर्दू राष्ट्रीय सहारा सहित विभिन्न समाचार पत्रों से सम्बद्ध रहने के साथ-साथ स्वतंत्र पत्रकार के रूप में भी अपनी सेवाएं उपलब्ध कराईं ।

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वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार गर्ग ने कैंसर जैसी बीमारी को अपने पर कभी हावी नहीं होने दिया

लखनऊ : उ0प्र0 जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के सस्थापक सदस्य व  मेरठ के  वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार गर्ग के निधन पर उपजा की लखनऊ इकाई लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ला ने गहरा दुखः व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाए प्रकट की है और ईश्वर से प्रार्थना की है कि वह दुःख की इस घड़ी में परिजनों को सांन्त्वना प्रदान करे। उपजा के प्रदेश अध्यक्ष रतन कुमार दीक्षित ने भी वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार गर्ग के निधन पर गहरा दुखः व्यक्त किया है।

वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार गर्ग का निधन आज प्रातः मेरठ में हो गया। वे लगभग 75 वर्ष के थे तथा कैंसर जैसे असाध्य रोग से पीडित थे।  उनका अन्तिम संस्कार कल मेरठ में सम्पन्न होगा । राजकुमार गर्ग ने अपना कैरियर दैनिक अमर उजाला मेरठ से प्रारम्भ किया था तथा सेवानिवृत्ति होने के बाद उन्होने दैनिक प्रभात में भी कार्य किया था।

वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार गर्ग के निधन पर उपजा के प्रान्तीय कार्यालय में आज एक शोकसभा का आयोजन हुआ। पी0टी0आई0 के ब्यूरो प्रमुख प्रमोद गोस्वामी ने उपजा के संस्थापक सदस्य के निधन पर कहा कि उन जैसे सक्रिय और निष्ठावान साथी के निधन से संगठन की नींव की ईंट खिसक गई है। उनका निधन असहनीय है। उपजा के प्रान्तीय महामंत्री रमेश चन्द जैन ने गर्ग के निधन पर उनके विचारों को आगे बढाने की बात कही।  वरिष्ठ पत्रकार राजीव शुक्ल ने कहा कि उनका जीवन जीवनपर्यन्त जीवन्त था, उनकी अनुपस्थिति खलेगी। पत्रकार सर्वेश कुमार सिंह ने कहा कि 75 वर्ष की आयु मे भी वे स्कूटर चलाते थे। गर्ग ने कैंसर जैसी बीमारी को अपने ऊपर कभी हावी नहीं होने दिया। पत्रकार वीर विक्रम बहादुर मिश्र ने उन्हे अच्छा पत्रकार बताया।

एल0जे0ए0 के महामंत्री के0के0वर्मा, उपाध्यक्ष सुशील सहाय, भरत सिंह, रत्नाकर मौर्य, कोषाध्यक्ष मंगल सिंह, मंत्री अनुराग त्रिपाठी, एस0बी0सिह, विकास श्रीवास्तव सहित वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार, पूर्व सूचना आयुक्त वीरेन्द्र सक्सेना, प्रभाकर शुक्ल, डाॅ0मत्स्येन्द्र प्रभाकर, रवीन्द्र जयसवाल,सुनील टी त्रिवेदी व तारकेश्वर मिश्र ने भी वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार गर्ग के निधन पर गहरा दुखः व्यक्त किया है।

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मेरठ के पत्रकार राजकुमार गर्ग का निधन

मेरठ से एक दुखद खबर आ रही है कि वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार गर्ग का इंतकाल हो गया है. उन्हें लोग प्यार से ‘चचा’ कहा करते थे. सरल, सहज और हंसमुख स्वभाव के राजकुमार गर्ग पत्रकारीय मसलों को लेकर सक्रिय रहा करते थे. इन दिनों वह मेरठ से प्रकाशित अखबार प्रभात में कार्यरत थे.

लंबे समय तक अमर उजाला में काम किया. मेरठ के पत्रकारों ने चचा के निधन पर गहरा शोक जताया है और उन्हें श्रद्धांजलि दी है. राजकुमार गर्ग को पत्रकार बिरादरी हमेशा एक जज्बाती, हिम्मती, बेबाक और बेलौस शख्स के रूप में याद करते रहेंगे.

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सीओ की सरकारी गाड़ी से लगी टक्कर के कारण मौत हुई पत्रकार नीरज की!

बिहार के मधेपुरा से खबर है कि बीते आठ अक्टूबर को थाना क्षेत्र के हरैली गाव के निकट एनएच 106 पर सड़क हादसे में हिन्दी न्यूज चैनल के पत्रकार नीरज समेत दो युवकों की मौत मामले में परिजनों ने ठोकर मारने वाले वाहन के पहचान का दावा किया है। परिजनों की मानें तो उदाकिशुनगंज के सीओ के वाहन से ठोकर लगी थी। परिजनों ने थाना में आवेदन देकर वाहन के नंबर सहित पूरी जानकारी देते हुए कार्रवाई की गुहार लगाई है। आवेदन में जिस गाड़ी का उल्लेख किया गया है वह उदाकिशुनगंज के सीओ का बताया जा रहा है।

सीओ श्यामानंद झा का कहना है कि उन्हें भी इस बात की जानकारी मिली है। सच तो यह है कि उन्होंने ही घायल अवस्था में पत्रकार नीरज कुमार सहित दोनों युवकों को अपने वाहन से अस्पताल पहुंचाया। जिस तरह उन पर आरोप मढ़ा जा रहा है उससे तो कोई भी मदद को आगे नहीं आएगा। मालूम हो कि गत आठ अक्टूबर को मधेपुरा में एक न्यूज चैनल के पत्रकार नीरज कुमार और उसके साथी आजाद टोला निवासी राजू उर्फ अमर सिंह बाइक से उदाकिशुनगंज जा रहे थे। आवेदन देने वाले ने पुलिस से कहा है कि जरूरत पडने पर प्रत्यक्षदर्शी अपनी गवाही देंगे। इस संबंध में थानाध्यक्ष आरसी उपाध्याय का कहना है कि रजिस्टर्ड गाड़ी के संबंध में डीटीओ को लिखा जाएगा। जिसकी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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मनोज श्रीवास्तव के निधन की खबर अमर उजाला कानपुर ने एक लाइन नहीं छापी

Zafar Irshad : अफ़सोस–शर्मनाक–निंदनीय… जिन वरिष्ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्तव ने अपनी पूरी ज़िन्दगी अमर उजाला अखबार को समर्पित कर दी, और नौकरी पर जाते समय जान दे दी..उन मनोज के निधन के बारे में आज अमर उजाला कानपुर ने एक लाइन नहीं छापी, कितने शर्म की बात है… “सही कहते है कि पत्रकार अपने आप में एक खबर है, लेकिन वो दूसरों का दुःख-दर्द तो लिखता है, लेकिन उसकी अपनी दर्द भरी कहानी लिखने वाला कोई नहीं हैं “…

लखनऊ में खबर तो अच्छे से छपी लेकिन कानपुर और दूसरे एडिशन में क्यों नहीं छापा गया… मनोज श्रीवास्तव की लिखी खबर तो आल एडिशन छपती थी लेकिन उनकी खुद की मौत की खबर सिर्फ एक एडिशन में ही सिमट कर क्यों रह गई?

पीटीआई कानपुर में कार्यरत पत्रकार जफर इरशाद के फेसबुक वॉल से.

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अमर उजाला ने मनोज श्रीवास्तव की मौत पर विस्तार से और सकारात्मक खबरें छापकर शानदार काम किया है

: संवाददाता के निधन की खबरें छापकर पत्रकारिता मे नए युग का सूत्रपात : उपजा की लखनऊ इकाई में आयोजित हुई शोकसभा : लखनऊ 9 अक्टूबर। वरिष्ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्तव को यू0पी0 जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के कार्यालय में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। वक्ताओं ने उन्हें खबरों पर पैनी नजर रखने वाला स्वाभिमानी किन्तु अहंकार रहित पत्रकार बताया। उल्लेखनीय है कि अमर उजाला के विशेष संवाददाता स्वर्गीय मनोज श्रीवास्तव का 7अक्टूबर को दिल का दौरा पड़ने से वाराणसी में निधन हो गया था।

यू0पी0जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन की लखनऊ इकाई द्वारा आयोजित शोक सभा में पूर्व सूचना आयुक्त व पत्रकार वीरेन्द्र सक्सेना ने कहा कि मनोज उन लोगों में थे जिनमें दूरदृष्टि थी। वे प्रतिक्रियावादी नहीं, अंतरमुखी थे। उनकी लेखनी से व्यक्त किये भाव अहंकार रहित थे। उनमें व्यापक विषयों की गहरी समझ थी। सक्सेना ने कहा कि मनोज की खबर पर पकड़ बहुत अच्छी थी। वे बड़ी ईमानदारी और निष्ठा से काम किया करते थे। मनोज श्रीवास्तव वास्तव में मस्त और फक्कड स्वभाव के थे।

पी0टी0आई0 के ब्यूरो प्रमुख प्रमोद गोस्वामी ने कहा कि मनोज श्रीवास्तव ने जीवन में पीड़ा भले ही झेली हो किन्तु उन्होंने खबरों में प्रतिशोध का कोई भाव नहीं जगने दिया। गोस्वामी ने उनके संस्थान अमर उजाला की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस पत्र ने अपने संवाददाता के निधन की सकारात्मक खबरें छापकर पत्रकारिता के इतिहास में राजधानी ही नहीं देश में एक नए युग का सूत्रपात किया है। 

वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कपूर ने मनोज श्रीवास्तव से जुडे कई संस्मरण सुनाये और कहा कि वे बडों का सम्मान और बडी साफगोई से बात करते थे। कल्पतरू एक्सप्रेस के समाचार सम्पादक सर्वेश सिंह  ने कहा कि उनमें अद्भुत एकाग्रता थी। उनकी रिपोर्टिग सदैव संतुलित रही। वीर विक्रम बहादुर मिश्र ने उन्हे आध्यात्मिक क्षमताओं वाला व्यक्ति बताया। अमर उजाला के समाचार संपादक शिशिर द्विवेदी ने कहा कि वह अपना पूरा जीवन उत्सव तरह जिये।

कृष्ण मोहन मिश्र ने कहा कि वह खबर की विश्वसनीयता पर विशेष ध्यान देते थे। रवीन्द्र जायसवाल ने कहा कि उन्होने जीवन तो जिया लेकिन उन्होंने अपने स्वास्थ्य की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। रवीन्द्र जायसवाल ने उन्हे सहज व्यक्ति करार दिया।

उपजा की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष अरविन्द शुक्ला,ने कार्यक्रम का संचालन किया। इस मौके पर पत्रकार के0 के0 वर्मा, डाॅ0 मत्स्येन्द्र प्रभाकर, शक्तिधर यादव, डी0के0 सिन्हा, सुनील त्रिवेदी, मंगल सिंह, अनुराग मिश्र, विकास श्रीवास्तव, कैलाश वर्मा, डाॅ0 पूनम, राजेश सिंह, डाॅ0 सतीश अग्रवाल, विनीत राय,राजपाल यादव, सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों ने शोक सभा मे ंउपस्थित होकर चित्र पर फूल अर्पित किए। सभा के बाद दो मिनट का मौन धारण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गयी।

अरविन्द शुक्ला

अध्यक्ष

लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन

प्रेस रिलीज

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एबीपी न्यूज के मधेपुरा संवाददाता नीरज कुमार की सड़क हादसे में मौत

एबीपी के मधेपुरा संवाददाता नीरज कुमार की सड़क हादसे में हुई मौत पर पत्रकार जगत में शोक का माहौल है। मौत की खबर मिलते ही सभी पत्रकार अस्पताल और अन्त्यपरीक्षण कक्ष के सामने जुट गये। स्वभाव से शांत और सदा प्रसन्नचित रहने वाले नीरज समाचार संकलन में सदा आगे रहते थे। शोक व्यक्त करने वालों में धर्मेन्द्र भारद्वाज, दिनेश सिंह, अमिताभ कुमार, प्रदीप कुमार झा, विनय कुमार अजय, डॉ. सुलेन्द्र कुमार, प्रवीण कुमार सिंह, पृथ्वीराज यदुवंशी, सुकेश राणा, सुभाष कुमार, विनोद विनित, राकेश रंजन, नीरज झा, राकेश सिंह, मनीष कुमार सहाय, सुभाष सुमन, मनीष वत्स, बंटी सिंह, देवेन्द्र कुमार आदि शामिल थे।

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वरिष्ठ पत्रकार एम.वी. कामत का निधन

मुंबई से एक दुखद खबर है कि वरिष्ठ पत्रकार एम.वी. कामत नहीं रहे. उनका गुरुवार सुबह अपने पैतृक स्थान कर्नाटक के मणिपाल में निधन हो गया. वह 94 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. उनके भतीजे जयराम कामत ने यहां बताया कि उन्होंने सुबह करीब 6.30 बजे अंतिम सांस ली.

जयराम ने बताया, “वह लंबी उम्र के कारण पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहे थे, जिसे देखते हुए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार हम उनके शव को अधिक समय तक नहीं रखेंगे और आज ही (गुरुवार) उनका अंतिम संस्कार कर देंगे.”

प्रसार भारती के पूर्व चेयरमैन और वरिष्ठ पत्रकार एम वी कामत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आधिकारिक रूप से जीवनी लिखी है ‘नरेंद्र मोदी द आर्किटेक्ट ऑफ मॉडर्न स्टेट’. यह किताब काफी चर्चित रही. 

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मनोज श्रीवास्तव ने पत्रकारिता का रोब दिखाकर अपनी पत्नी का तबादला लखनऊ नहीं कराया, बल्कि वह स्वयं वाराणसी चले गये

लखनऊ । वरिष्ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्तव को आज यू.पी. प्रेस क्लब में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। वक्ताओं ने उन्हें उसूलों से समझौता न करने, खबरों पर पैनी नजर रखने और जल्द ही लोगों को दोस्त बना लेने वाला स्वाभिमानी पत्रकार बताया। अमर उजाला के विशेष संवाददाता स्वर्गीय मनोज श्रीवास्तव का परसों दिल का दौरा पड़ने से वाराणसी में निधन हो गया था। कल सुबह यहां बैकुण्ठ धाम पर उनके इष्ट मित्रों, राजनेताओं ओर पत्रकारों की भारी भीड़ के बीच अन्त्येष्टि की गयी।

शोक सभा में आई.एफ.डब्ल्यू.जे. अध्यक्ष के. विक्रम राव ने कहा कि मनोज उन लोगों में थे जिन्होंने पत्रकारिता का रोब दिखाकर अपनी पत्नी का तबादला लखनऊ नहीं कराया, बल्कि वह स्वयं वाराणसी चले गये। डी.एन.ए. के संपादक निशीथ राय ने कहा कि समझौता न करना उनकी आदत में शामिल था। अमर उजाला के समाचार संपादक शिशिर द्विवेदी ने कहा कि वह अपना पूरा जीवन उत्सव की तरह जिये। वह कभी भी बड़े आदमी से प्रभावित नहीं होते थे। यू.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी ने कहा कि वह नई नस्ल के उन पत्रकारों में थे जिन्हें पढ़ने का शौक था और जो पत्रकारिता पर बात करते थे। यू.पी. प्रेस क्लब के अध्यक्ष रवीन्द्र सिंह और सचिव जे.पी. तिवारी ने  कहा कि बहुत कम लोग इस आयु में पत्रकारिता में वह स्थान बना पाते हैं, जो मनोज ने बनाया। क्लब के उपाध्यक्ष गोविन्द पंत राजू ने कहा कि वह खबर की विश्वसनीयता पर विशेष ध्यान देते थे। लखनऊ श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष सिद्धार्थ कलहंस ने शिकायत की कि वह अलमस्त जीवन तो जिये लेकिन उन्होंने अपने स्वास्थ्य की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाण्डेय ने कहा कि लोगों ने मनोज को कभी उदास नहीं देखा। सुरेश बहादुर सिंह ने सुझाव दिया कि इस प्रकार की परिस्थितियों का शिकार होने वाले पत्रकार के परिवार की मदद के लिए कोई स्थायी व्यवस्था होना चाहिए। पूर्व सूचना आयुक्त और वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र सक्सेना ने कहा कि मनोज की खबर पर पकड़ बहुत अच्छी थी। वरिष्ठ पत्रकार उत्सकर्ष सिन्हा ने कहा कि मनोज पढ़ने के इतने शौकीन थे कि धर्मयुग की अन्तिम प्रति तक उन्होंने सुरक्षित रखी थी।  पत्रकार सुश्री सरिता सिंह ने मनोज के साथ की गयी पत्रकारिता की यादों में खोते हुए कहा उनकी व्यक्तियों के बारे में राय सही होती  थी ओर जल्द ही लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर लेना उनका गुण था।

उपजा की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष अरविनद शुक्ला ओर सपा नेता दीपक मिश्र ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। सभा में उ.प्र. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के महामंत्री पी.के.तिवारी, कोषाध्यक्ष आर.एन. बाजपेयी, लखनऊ इकाई की मंत्री विनीता रानी ‘विन्नी’’ और पत्रकार मुदित माथुर, सर्वेश सिंह, जावेद काजिम, संजय शर्मा, राकेश वर्मा, विजय शर्मा, हरीश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों ने शोक सभा में उपस्थित होकर चित्र पर फूल अर्पित किए। सभा के बाद दो मिनट का मौन धारण कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गयी।

बी.सी. जोशी
कार्यालय सचिव

प्रेस रिलीज

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मनोज श्रीवास्तव के व्यक्तित्व में एक आवारापन रहा… जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरने का आवारापन….

alok paradkar : हम नहीं हैं आदमी, हम झुनझुने हैं… मनोज श्रीवास्तव जी को पहले भी जब याद करता था, उनके द्वारा दोहरायी जाने वाली दुष्यन्त कुमार की पंक्ति ‘जिस तरह चाहो बजाओ इस सभा में, हम नहीं हैं आदमी, हम झुनझुने हैं’ की याद हो आती। पत्रकारों, खासकर अपने से जूनियर पत्रकारों, की आपसी भेंट-मुलाकातों में वे इसे अक्सर कहा करते थे और जब कभी नहीं कहते तो हम उन्हें इसकी याद दिला देते। फिर अपनी पीड़ा की इस अभिव्यक्ति पर हम सभी ठहाका लगाते। यह उस सामूहिक पीड़ा की अभिव्यक्ति थी जो किसी मीडिया संस्थान में प्रशिक्षु उपसम्पादक से लेकर विशेष संवाददाता तक की होती है। alokparadkar

( File Photo Alok Paradkar )

मनोज जी के भीतर जो फक्कड़पन था उसके कारण वे इसे कहीं भी कह सकते थे और कहा भी करते थे। पत्रकार के तौर पर मीडिया संस्थानों में आदमी से झुनझुने बनते जाने की नियति और उसके प्रतिरोध का द्वंद्व उनके चेहरे से जाहिर नहीं होता था, तो क्या उनकी दिमाग की नसों ने फटकर इसे जाहिर किया है?  कुछ समय पूर्व कोई भी इस बात को सहजता से स्वीकार नहीं कर पा रहा था कि आखिर बनारस जाने की उनकी वास्तविक वजह पारिवारिक ही थी? वे एक बड़े समाचार पत्र के विशेष संवाददाता थे और समाजवादी पार्टी जैसी महत्वपूर्ण बीट देखते थे। प्रदेश में सपा का शासन था। राजधानी की राजनीतिक चकाचौंध छोड़कर बनारस बस जाने का उनका फैसला एक पत्रकार और उसके कैरियर के तौर पर निश्चय ही बड़ा फैसला था लेकिन वह उस मन:स्थिति में पहुंच चुके थे जहां उन्होंने अपने ढंग से जीवन को कैरियर पर तरजीह देनी चाही। बनारस का माहौल उन्हें रास भी आया। वे संगीत समारोहों में नजर आने लगे। कलाकारों-साहित्यकारों के बनारस से किए गये उनके साक्षात्कार अक्सर दिख जाते थे। कुछेक कलाकारों के बारे में उन्होंने मुझसे पूछताछ भी की थी।

वास्तव में वे आज उन दुर्लभ होते जाते पत्रकारों में थे जिसे राजनीतिक और प्रशासनिक मामलों के साथ ही साहित्य और कला भी अच्छी समझ थी। इनका मिलाप उनकी पत्रकारिता को धार देता था। सस्ती सनसनी की जगह संवेदना उनकी रिपोर्टों की आधार होती थी। चुनावों की रिपोर्टों में भी वे गली-मोहल्ले की चकल्लस और मानवीय पहलुओं से जान डाल देते। उनके साप्ताहिक साक्षात्कारों में सवालों में विविधता होती थी। वे मुलायम सिंह यादव या शिवपाल यादव से विस्तार से बातचीत कर सकते थे तो गिरिजा देवी और काशीनाथ सिंह से भी। श्रीलाल शुक्ल जी को मृत्यु के पूर्व जब कई पुरस्कार मिले थे तो उन्होंने एक लम्बा साक्षात्कार किया था।

मेरा उनसे परिचय बहुत कम अवधि का रहा। हालांकि मैं उन्हें पत्रकार के तौर पर पहले से जानता था लेकिन भेंट 2011 में अमर उजाला आने पर ही हुई। बाद में अमर उजाला छोड़ने से पहले जब मैंने लम्बी छुट्टी ली तो वे कार्यालय के उन थोड़े से लोगों में थे जो फोन से हालचाल लिया करते थे। वे जब बनारस रहने लगे तो मेरे बनारस बराबर आने- जाने के कारण उनसे मुलाकात हो ही जाती थी। अमर उजाला में काम के दौरान वे मेरी रिपोर्टिंग के बारे में अक्सर राय दिया करते थे। मुझे अच्छी तरह याद है कि एक बार मजाज पर लिखे मेरे आलेख पर उन्होंने यह कहते हुए नाराजगी जाहिर की थी कि मजाज पर इतना ही काफी नहीं है! और जब वे ऐसा कह रहे थे मैंने महसूस किया कि मजाज के प्रति उनके मन में कितना स्नेह और सम्मान है। उनके मित्र बताते हैं कि लम्बे समय तक उनके व्यक्तित्व में एक आवारापन रहा, जगमगाती जागती सड़कों पे आवारा फिरने का आवारापन। मजाज की तरह वे भी अल्पायु हुए। कोई भी नहीं जानता था कि वे मजाज की इन पंक्तियों को भी भीतर ही भीतर कहीं गुनगुना रहे थे-‘जिन्दगी साज दे रही है मुझे, सहरो-एजाज दे रही है मुझे, और बहुत दूर आसमानों से, मौत आवाज दे रही है मुझे..!’

(पत्रकार आलोक पराड़कर की फेसबुक वाल से)

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श्रद्धांजलि : यकीन नहीं हो रहा कि मनोज श्रीवास्तव हम लोगों के बीच में नहीं हैं

Yashwant Singh : जब मैंने लखनऊ से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की तो जिन कुछ पत्रकारों का सानिध्य, संग, स्नेह, मार्गदर्शन मिला उनमें से एक मनोज श्रीवास्तव जी भी हैं. पर इनके आज अचानक चले जाने की सूचना से मन धक से कर के रह गया. लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार साथियों ने मुझे फोन पर सुबकते हुए मनोज के निधन की सूचना दी. मनोज श्रीवास्तव शख्स ही ऐसे थे कि वे सभी के प्रिय थे. तभी तो वे लखनऊ की अच्छी खासी पत्रकारिता को त्यागकर बनारस रहने के लिए तबादला लेकर चले गए थे.

अपनी पिछली कुछ लखनऊ यात्राओं में मैंने मनोज जी के संग कई घंटे प्रेस क्लब में गुजारे थे. उनके गीत सुने, उनके-अपने जीवन के अनुभव-संस्मरण साझा हुए. क्या पता था कि ये मुलाकात आखिरी मुलाकात में तब्दील होने जा रही है. मनोज श्रीवास्तव के जाने से अब ऐसा लगने लगा है कि अपने आसपास के लोग, अपने समय के लोग, अपने साथी-संगी लोगों के जाने की बारी आ गई है. कब कौन कहां कैसे चला जाए, कुछ नहीं पता.. मनोज भाई, आपके साथ तो अभी बनारस की गलियों में घूमना था… मस्ती करनी थी.. बतियाना था.. गाना था… पर आप अचानक ऐसे सब संगी साथियों को छोड़कर चले जाओगे, यकीन नहीं हो रहा… बेहद भारी मन से श्रद्धांजलि दे रहा क्योंकि यकीन अब तक नहीं हो रहा कि आप नहीं हो हम सभी के बीच. 

(भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.)

Golesh Swami : dosto mera sabse pyara dost manoj shrivastava mujhe akela chodkar chala gaya. manoj mere saath amar ujala mai tha. mai 2003 mai hindustan aa gaya lekin meri aur monoj ki dosti nahi tuti. hum dono har dukh shuk ki baate karte the. aise dost jeewan mai kam hi milte hai. pichle hafte hi to ham mile the. maine pooch tha ab kab aoge to kahne laga deewali par mulakat hogi. par yeh nahi malum tha ki tumhare shareer se tumhari aatma gayab hogi. aise jeewant aadmi ko khamosh dekhna wakai kashtkaari hai.alwida dost. lekin dost tumhari kami hamesha khalegi.

(लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार गोलेश स्वामी के फेसबुक वॉल से.)

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गाजीपुर जिले के युवा पत्रकार राजेश दुबे का निधन

गाजीपुर जिले के प्रतिभाशाली युवा पत्रकार राजेश दुबे का बुधवार को निधन हो गया। राजेश लंबे अर्से से इलेक्ट्रानिक मीडिया में बतौर संवाददाता काम कर रहे थे। उन्होंने सहारा न्यूज चैनल से अपने करियर की शुरुआत की थी। करीब पांच वर्षों तक सहारा न्यूज चैनल के लिए काम करने के साथ ही उन्होंने लाइव इंडिया, पी7 और एबीपी न्यूज के लिए भी पत्रकारिता की थी। कम समय में ही उन्होंने इलेक्ट्रानिक मीडिया के क्षेत्र खास मुकाम बनाया था। राजेश दो वर्षों तक गाजीपुर पत्रकार एसोसियेशन के अध्यक्ष भी रहे।

शहर के फुल्लनपुर मुहल्ले मे रहने वाले राजेश अपने नम्र स्वभाव और जिंदादिली के लिए दोस्तों के बीच काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने अपने करियर के दौरान गाजीपुर मऊ बलिया और वाराणसी में काम करते हुये की महत्वपूर्ण खबरें की थी। राजनैतिक, क्राइम और सम सामयिक खबरों को लेकर राजेश दुबे की लेखनी और दृष्टिकोण के लोग कायल थे। जिले का ये युवा प्रतिभाशाली पत्रकार पिछले कुछ समय से बीमार चल रहा था। गंभीर रूप से पीलिया और अन्य कई बीमारियों से ग्रसित राजेश पिछले दिनों कोमा मे चले गये थे जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

बीएचयू में इलाज के दौरान बुधवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। राजेश की मौत की खबर के साथ ही उनके दोस्तों शुभचिंतकों के साथ-साथ पत्रकारिता से जुड़े लोगों के बीच शोक का माहौल है। गाजीपुर श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जायेगा। वे अपने पीछे एक पुत्र और पुत्री छोड़ गये हैं।

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अमर उजाला, लखनऊ के पत्रकार मनोज श्रीवास्तव का हार्ट अटैक से निधन

एक दुखद खबर बनारस से आ रही है. अमर उजाला में कार्यरत पत्रकार मनोज श्रीवास्तव का हार्ट अटैक से निधन हो गया. मनोज अमर उजाला लखनऊ में लंबे समय से कार्यरत थे और कुछ माह पहले ही तबादला कराकर बनारस आए थे. मनोज की पत्नी बनारस में शिक्षिका हैं. सिगरा महमूरगंज में मनोज और उनकी पत्नी ने एक फ्लैट खरीदा और इसी में रह रहे थे. पत्नी पढ़ाने गई हुई थीं. मनोज की इकलौती संतान उनकी बिटिया झांसी से एमबीबीएस कर रही हैं. घर पर मनोज अकेले थे और अमर उजाला आफिस जाने के लिए तैयार होकर निकल रहे थे.

फ्लैट का ताला लगाते वक्त उन्हें हार्ट अटैक हुआ और वहीं गिर पड़े. करीब घंटे भर बाद लोगों ने उन्हें गिरे देखा तो अस्पताल ले गए जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. बताया जा रहा है कि मनोज का शव लखनऊ लाया जा रहा है जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. मनोज श्रीवास्तव विशेष संवाददाता के पद पर अमर उजाला में कार्यरत थे और यूपी के मान्यता प्राप्त पत्रकार थे. अभी तक उन्होंने हजारों बाइलाइन खबर लिखी होंगी जिसमें सैकड़ों खबरें फ्रंट पेज पर आल एडिशन छपी हैं.

मनोज बेहद विनम्र, मृदुभाषी, मिलनसार और लो प्रोफाइल जर्नलिस्ट थे. वे अपने काम से काम रखते थे और अपने काम को पूरी तल्लीनता से करते थे. पत्रकारिता में सरोकार और आम जन की आवाज को प्रमुखता से उठाने वालों में से थे. लखनऊ में लंबे समय से रहने के कारण वह अब अपने परिवार के साथ बनारस रहना चाह रहे थे इसी कारण उन्होंने बनारस तबादला कराने के लिए अमर उजाला प्रबंधन को अर्जी दी. अमर उजाला प्रबंधन मनोज को  लखनऊ से मुक्त नहीं करना चाह रहा था लेकिन उनकी जिद के कारण उनका तबादला बनारस कर दिया.

न्यूज कवरेज के दौरान यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ वरिष्ठ पत्रकार मनोज श्रीवास्तव. (फाइल फोटो)

RIP :  मनोज के निधन की सूचना से लखनऊ और बनारस के मीडिया जगत के लोग स्तब्ध हैं. मनोज की उम्र करीब 50 वर्ष के आसपास रही होगी. लखनऊ के पत्रकारों प्रद्युम्न तिवारी, सिद्धार्थ कलहंस आदि ने मनोज के निधन पर शोक जाहिर किया है. इन लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक भरोसा नहीं हो रहा कि मनोज उनके बीच से चले गए. लखनऊ के पत्रकार Siddharth Kalhans अपने फेसबुक वॉल पर लिखते हैं : ”प्रिय साथी मनोज श्रीवास्तव, अमर उजाला का देहावसान हो गया है। वाराणसी में अमर उजाला में फिलवक्त काम कर रहे मनोज जी का निधन आज सुबह 11 बजे कार्यालय जाते समय हुआ। मनोज जी की पत्नी राजघाट कालेज में रीडर हैं और परिवार में एक पुत्री है। मनोज श्रीवास्तव के माता-पिता का निधन पहले हो चुका है। मनोज श्रीवास्तव नवजीवन, दैनिक जागरण, करंट वीकली, आयडियल एक्सप्रेस में काम कर चुके थे। बीते दो दशक से वो अमर उजाला ब्यूरो में कार्यरत थे।”

लखनऊ के पत्रकार Utkarsh Sinha का कहना है कि मनोज का जाना उनके लिए बहुत ही निजी क्षति है …श्रद्धांजलि.  पत्रकार Hemant Tiwari फेसबुक पर लिखते हैं- ”मनोज का जाना अत्यंत दुखद है। परमपिता परमेश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। एक उच्च कोटि के पत्रकार का असमय अवसान पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है और मेरे लिए तो नितान्त निजी। श्रद्धांजलि।”

उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ व जाने माने पत्रकार मनोज श्रीवास्तव के देहावसान पर उत्तर प्रदेश राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति ने दुख व्यक्त करते हुए उनके शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना जतायी है. समिति के सचिव सिद्धार्थ कलहंस ने कहा कि मनोज श्रीवास्तव अपनी जनपक्षधर, मानवीय संवेदना से परिपूर्ण और तथ्यपरक रपटों के लिए हमेशा जाने जाएंगे. मनोज की अयोध्या, बाबरी मस्जिद विवाद की खबरें हमेशा इतिहास का हिस्सा रहेंगी. मनोज श्रीवास्तव उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब के कार्यकारिणी के सदस्य रह चुके हैं. मनोज जी की पत्नी राजघाट कालेज में रीडर हैं और परिवार में एक पुत्री है. मनोज श्रीवास्तव के माता-पिता का निधन पहले हो चुका है. मनोज श्रीवास्तव नवजीवन, दैनिक जागरण, करंट वीकली, आयडियल एक्सप्रेस में काम कर चुके थे. बीते दो दशक से वो अमर उजाला ब्यूरो में कार्यरत थे.

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अस्‍पताल की मर्चुरी में 5581 का टैग लगा आपका शरीर

अपने हाथों अपने ही जीवन को समाप्‍त करने का ऐसा कोई दूसरा उदाहरण मैंने नहीं देखा, बावजूद इसके कि, आप खुद चाहते तो ऐसा नहीं होता, पर यह राह आपने ही चुनी थी… आपका अक्‍खड़पन टेढमिजाजी सब कुछ उतनी बुरी नहीं थी, बल्‍कि थी ही नही, और ना ही इससे जीवन समाप्‍त होता है… आपको शराब और नशे की गोलियां खा गई… और यह दोनों चीजें आपके लिए कतई जरूरी ना थी… आप वे शख्‍स, जिसकी दहाड़ से बड़े बड़े तुर्रम कांपते थे… आप इस मौत के काबिल नहीं थे जैसी मौत आपने चुनी… आप ठहर सकते थे, आप मान सकते थे, पर आप माने नहीं… घर कहीं पीछे छूट गया, कोई इर्द गिर्द ना रहा…

अस्‍पताल की मर्चुरी में 5581 का टैग लगा आपका शरीर अकेले ढंका पड़ा था… मैं आपको आपके सुनहरे अक्षरों की लिखावट और बेबाक लेखनी के लिए याद करना चाहता हूं…. एक शख्‍स ऐसा जिसकी जिद पर सब सहमते थे… एक शख्‍स ऐसा जिसने सत्‍ता के सवारों को तलवों पर ला गिराया… भीड़ कुछ कहे पर करना कहना अपने मन की… पर जानता हूं कि मैं आपको याद करूंगा कि, अपने हाथों बगैर वजह और बुरी तरह अपनी लाइफ नष्ट करने वाला आपके अलावा कोई दूसरा ना देखा मैंने…,और प्रार्थना है कि, देखूं भी ना… कई मुलाकातें है जेहन में… हर मुलाकातों में आपके अंदाज वाले किस्‍सों की भी कमी नहीं… पर यह जो आज के पैतालिस मिनट थे न … जब अस्‍पताल के रिसेप्‍शन से लेकर मर्चुरी तक मैं भटकता रहा, यह मुलाकात मुझे हमेशा याद रहेगी…

टैग नंबर 5581 के रूप में मौजूद आपसे यह मुलाकात आखिर भूलना भी चाहूं तो भुलूंगा कैसे… दीदादिलेर, बला का हठी और शब्‍दों का कुशल चितेरा यह आपके भीतर का वह पत्रकार था जिसे आपने शराब और गोलियों के पीछे ढांप दिया… दबा दिया… वह पत्रकार जिसकी हमेशा से हम सबको जरूरत थी, आपने हमसे हमारा नायाब पत्रकार छीन लिया… आप ऐसा क्‍यूं करते थे जैसा कि आप करते थे, वह सवाल तब भी आपके लिए कोई मायने नहीं रखता था जबकि आपसे संवाद होता था, पर हां अब जबकि संवाद संभव नहीं है तो स्‍वप्‍न में ही सही अगर आ कर आप मुझे यह बता सकें कि, आपने ऐसी मौत क्‍यूं चुनी, तो कम से कम यह बताइएगा जरूर…

पत्रकार याज्ञवल्क्य वशिष्ठ के फेसबुक वॉल से.

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वरिष्ठ पत्रकार नईम शीरो के निधन पर मुख्यमंत्री रमन सिंह ने गहरा दुःख व्यक्त किया

राजधानी रायपुर के वरिष्ठ पत्रकार नईम शीरो का निधन हो गया. नईम शीरो ने राजधानी रायपुर के विभिन्न दैनिक समाचार पत्रों सहित प्रदेश के अन्य कई अखबारों को पत्रकार के रूप में अपनी सेवाएं दी.  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है. नईम शीरो का परसों निधन हुआ. मुख्यमंत्री ने कल  जारी शोक संदेश में कहा कि नईम शीरो ने 40 वर्ष से भी अधिक समय तक एक सजग और सक्रिय पत्रकार के रूप में समाज को अपनी मूल्यवान सेवाएं दी.

अपने जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वह पत्रकारिता की राह से विचलित नहीं हुए. डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा. वह एक अच्छे कहानीकार भी थे और स्थानीय साहित्यिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जुड़े हुए थे.

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बरेली में संपादक कंवलजीत सिंह का निधन, कानपुर में पत्रकार प्रदीप के पिता का दुर्घटना में निधन

बरेली से एक दुखद खबर है. जनमोर्चा अखबार के बरेली संस्करण के संपादक सरदार कंवलजीत सिंह का आज सुबह देहांत हो गया. कंवलजीत काफी समय से बीमार चल रहे थे. उनके निधन पर जिले के पत्रकारों ने शोक व्यक्त किया है. उधर, कानपुर से खबर है कि अमर उजाला में कार्यरत पत्रकार प्रदीप अवस्थी के पिता राजकुमार अवस्थी का 65 साल की उम्र में एक मार्ग दुर्घटना में निधन हो गया.

राजकुमार अवस्थी साईकिल से किसी कार्य से गए हुए थे. उनकी साईकिल में पीछे से डीसीयम ने टक्कर मार दी जिससे उनकी घटनास्थल पर ही  मौत हो गई. उनका अंतिम संस्कार आज प्रात: 11 बजे कानपुर के भैरव घाट पर किया गया.

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कई किस्म की बीमारियों से जूझ रहीं युवा पत्रकार सोनाली राठौड़ का निधन

DrPraveen Tiwari : दुखद खबर. युवा पत्रकार सोनाली राठौड़ का निधन. वे इंदौर में नइदुनिया के साथ लंबे समय से जुड़ी हुई थी. विवाह पूर्व वे सोनाली श्रीवास्तव के नाम से विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लिखती रहीं. मेरे अजीज मित्र श्याम सिंह राठौड़ से उनका विवाह हुआ था. सोनाली मेरे परिवार का भी हिस्सा रहीं. उनका निधन पूरे परिवार के लिए गहरा आघात है. वे लीवर की किसी पुरानी बीमारी का शिकार थीं. मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी लगातार डॉक्टर्स के संपर्क में थे. कल रात उन्हें जो मैसेज अस्पताल से आया, उससे आप सोनाली के कष्ट और बीमारी को शायद समझ पाएंगे.

Mrs Sonali Rathore , patient of Wilson disease (a rare genetic disease) with acute on chronic liver failure, She presently has kidney failure also and is on dialysis. Her blood is very thin (coagulopathy) and is bleeding from multiple sites. She has severe infection (SBP). Her condition is grim and we are trying our best to save her. Regards

निजी जीवन मे सोनाली पत्रकारिता की छात्रा के तौर पर मेरी जूनियर थीं और मेरी पीएचडी रिसर्च में उनकी अमूल्य सहायता को मैं कभी नहीं भूल सकता. मैं और मेरा पूरा परिवार शोक संतप्त है. इंडस्ट्री ने एक संभावनाशील महिला पत्रकार और मेरे परिवार ने एक सदस्य खो दिया. मेरी अश्रूपूरित श्रद्धांजलि.

लाइव इंडिया चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत डा. प्रवीण तिवारी के फेसबुक वॉल से.

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‘रांची एक्सप्रेस’ के पत्रकार भीम स्वर्णकार का निधन

हजारीबाग से खबर है कि ‘रांची एक्सप्रेस’ अखबार के बरही संवाददाता भीम स्वर्णकार का निधन हो गया. वह पिछले दो माह से बीमार चल रहे थे. उनका इलाज जमशेदपुर में किया जा रहा था. कल चिकित्सकों ने परिजनों को जवाब देते हुए कहा कि इन्हें घर ले जाएं. बताया जाता है कि घर आने के कुछ ही क्षणों बाद उनका देहावसान हो गया. स्वर्णकार अपने पीछे दो पुत्र व दो पुत्री सहित भरापूरा परिवार छोड़ गए हैं.

स्वर्णकार के निधन पर हजारीबाग जिले के पत्रकारों ने शोक संवेदना प्रकट की है. हजारीबाग कार्यालय में दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गयी. शोक संवेदना प्रकट करने वालों में कार्यालय प्रभारी शाद्वल कुमार, अर्जुन सोनी, गोपाल राणा, अरविंद कुमार, अभय कुमार सिन्हा, राहुल कुमार, सुमन कुमार सिन्हा, सुमंत कुमार साह, उपेन्द्र मालाकार, बंटी कुमार, नवीन कुमार सिन्हा, गोपाल प्रसाद, चरण बैठा, विजय कुमार शर्मा, कृष्णा गुप्ता, प्रेस क्लब के सचिव टी. पी. सिंह, रविकुमार सिंह, राकेश कुमार सहित अन्य शामिल हैं.

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जगदलपुर के युवा पत्रकार अशोक देवांगन का सड़क हादसे में निधन

जगदलपुर (छत्तीसगढ़) :  स्थानीय पत्रकार और रायपुर से प्रकाशित हिंदी दैनिक देशबंधु के प्रतिनिधि अशोक देवांगन का परसों देर रात एक सड़क हादसे में निधन हो गया. वे मात्र 30 वर्ष के थे.

परसों रात साढ़े दस बजे अशोक देवांगन अपनी स्कूटी को चलाते हुए घर लौट रहे थे. तभी विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक ने ठोकर मार दी. इस दुर्घटना में देवांगन की घटनास्थल पर ही मौत हो गई. युवा पत्रकार देवांगन के  निधन पर पत्रकारों में शोक व्याप्त है.

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दिवंगत पत्रकार सूदनाथ के निधन को पत्रकारों ने बताया अपूरणीय क्षति

चंदौली। उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन मुगलसराय इकाई के सदस्यों द्वारा एक शोक सभा रोहित श्रीवास्तव के रविनगर स्थित आवास पर आयोजित की गयी। जिसमें दिवंगत पत्रकार सूदनाथ मौर्या को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही व दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति व परिवारजनों की सुख-समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई। इस मौके पर उपजा के मुगलसराय नगर इकाई अध्यक्ष घनश्याम पांडेय ने कहा कि सूदनाथ मौर्या एक हंसमुख व निर्भिक पत्रकार थे। जिनका जाना हम सभी पत्रकारों के लिए एक दुख की घड़ी है। महामंत्री सुनील सिंह ने कहा कि दुर्घटना की हम लोगों ने एक  होनहार पत्रकार खो दिया है, जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता हैं। बैठक में प्रदीप शर्मा, कुंवर संजय, ओमकार, विनय वर्मा, भौमिक दादा, महेन्द्र प्रजापति, राजेन्द्र प्रकाश, कृष्णा गौड़, सरदार महेन्द्र सिंह, सरदार रौशन सिंह, राम निवास आदि उपस्थित रहे।

वहीं आल मिडिया एंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सदस्यों व पदाधिकारियों ने मंगलवार को पत्रकार के असामयिक निधन पर दुःख व्यक्त करते हुए मुगलसराय स्थित कैम्प कार्यालय पर एक बैठक कर शोक सभा आयोजित की। सभा में पत्रकारों ने सूदनाथ मौर्या की आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा। इस दौरान एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार सैनी ने कहा कि सूदनाथ निर्भीक पत्रकार थे और वे समाज की समस्याओं के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे। उनके असामयिक निधन से जिले ने एक होनहार पत्रकार खो दिया है। सभा में मनोज उपाध्याय, अनिल कुमार सिंह, नागेन्द्र कुमार, संतोष वर्मा, मु. राशिद समेत कई पत्रकार उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता बृजेश व संचालन अजय राय ने किया। 

एक और संगठन आल इंडिया अखबार नवीस एसोसिएशन ने भी शोक सभा कर सूदनाथ को श्रद्धांजलि अर्पित की व दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति व परिवारजनों की सुख-समृद्धि के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। इस मौके पर आईना के संस्थापक अध्यक्ष सैयद फिरोजुद्दीन ने कहा कि सूदनाथ मौर्या एक संजीदा मिजाज और हंसमुख चेहरे के धनी पत्रकार थे। जिनका जाना हम सभी साथियों के लिए एक दुख की घड़ी है। मृतक के बेहद करीबी रहे पत्रकार आसाराम यादव ने कहा कि घटना की सूचना पर एक बार तो हमें विश्वास ही नहीं हुआ। लेकिन जब सच्चाई पता चली तो आज भी ऐसा लग रहा है कि हमारा एक अंग ही कहीं खो गया है। उन्होंने ईश्वर से सूदनाथ की आत्मा को शान्ति देने के साथ ही शोकाकुल परिवारजनों को दुख की इस घड़ी में सहनशक्ति देने की प्रार्थना की। बैठक में राम अवतार तिवारी, अजय सिंह, कौशल राय, शावेज बंटी, सत्यप्रकाश उपाध्याय, फैयाज अंसारी, मोहनलाल बरनवाल, अशोक श्रीवास्तव, सुधीर पटेल, कुलदीप, हनुमान केशरी, अमित केशरी, रितेश कुमार आदि उपस्थित रहे।

इसी क्रम में बुधवार को चकिया के पत्रकारों ने कस्बा स्थित गांधी पार्क में एकत्र हो कर दिवंगत पत्रकार की आत्मा की शान्ति हेतु दो मिनट का मौन रख उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर दिवंगत पत्रकार सुदनाथ के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने उन्हें एक कर्मनिष्ठ पत्रकार बताया। साथ ही उनके निधन से पत्रकारिता जगत को हुई एक अपूरणीय क्षति भी कहा। शोक सभा में दीपनारायण यादव, नसरुल्ला, रामजी मौर्या सरस, राकेश सैनी समेत कई अन्य पत्रकार उपस्थित रहे।

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तड़पकर मर गए पत्रकार शिवशंकर, देखने तक नहीं गया ‘हिन्दुस्तान’ प्रबंधन का कोई अधिकारी

Vinayak Vijeta : दिल्ली में आज दम तोड़ दिया बिहार के गया जिले के पत्रकार शिवशंकर ने… भले ही मशहूर अखबारों में काम करने से कोई पत्रकार अपने को गौरवान्वित महसूस करे पर अखबार में काम करने के वक्त उनके साथ होने वाली परेशानी में कोई अखबार मालिक खड़ा नहीं होता। इन पत्रकारों को असहाय छोड़ कर उन्हें कुत्ते की मौत मरने दिया जाता है। इसके उदाहरण हैं गया के सीनियर रिपोर्टर शिवशंकर, जिन्होंने आज दिल्ली के एक अस्पताल में अपनी एड़ियां रगड़-रगड़ अपनी मौत को स्वीकार कर लिया।

शिवशंकरशिवशंकर

शिवशंकर अल्प दिनों के लिए हिन्दुस्तान अखबार के गया जिले के प्रभारी थे और वह अभी वहां वरीय संवाददाता के पद पर अपराध और अन्य विभाग की खबरों को देख रहे थे। किसी भी व्यसन से दूर  रहने वाले शिवशंकर की बीते दिनों तबीयत खराब हो गई। उन्हें पहले पटना और बाद में दिल्ली ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शिवशंकर हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान को कई सालों से सेवा देते आ रहे हैं पर गंभीर स्थिति में उनके दिल्ली के अस्पताल में दाखिले की खबर के बाबजूद हिन्दुस्तान प्रबंधन द्वारा किसी तरह की आर्थिक मदद की बात तो दूर, कोई उन्हें देखने तक नहीं गया। आज भाई शिवशंकर की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। यही है हम पत्रकारों के जीवन की वह तल्ख सच्चाई जहां हम जीते हैं दूसरों के लिए पर वक्त आने पर कोई हमारे साथ नहीं होता। भाई शिवशंकर अब कभी मानव जीवन में जन्म नहीं लेना, लेना भी तो भूलकर पत्रकार नहीं बनना! आपको मेरी श्रद्धाजंलि! अफसोस की आपके जीते जी कभी आपसे सशरीर मुलाकात नहीं हुई फोन पर जब भी बाते हुर्इं आपने सर कहकर पुकारा और मेरे द्वारा मांगी गई हर सूचना को आपने मुझे अपना बड़ा भाई समझ उपलब्ध कराया।

पटना के पत्रकार विनायक विजेता के फेसबुक वॉल से.

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मेरठ के तेजस्वी पत्रकार सौरभ शर्मा का असमय निधन

मेरठ के तेजस्वी और बहुमुखी पत्रकार सौरभ शर्मा का आज दिल्ली के इंस्टीस्यूट ऑफ लीवर एंड बाइलियरी साइंसेज़ में असमय निधन हो गया। उनकी उम्र 39 साल थी। सौरभ को जांडिस (पीलिया) हो गया था। उसके बाद उन्हें लीवर से जुड़ी कुछ समस्याएं पैदा हो गई थी। पहले एक्सीडेंट, फिर जांडिस और अंतत: दैनिक जागरण, मेरठ में वरिष्ठ पद की नौकरी अचानक जाने के बाद वो अवसाद के शिकार हो गए। दुर्घटना और जांडिस के कारण वे पहले से ही लगातार अवकाश पर चल रहे थे। इसी कारण उन्हें तनाव भी था।

दैनिक जागरण के कुछ लोगों ने उनके साथ साजिश की और उन्हें दैनिक जागरण से बाहर कराने में बड़ी भूमिका निभाई। साजिशों के कारण दैनिक जागरण प्रबंधन ने सौरभ को बेहद बेहूदगी भरे बर्ताव के साथ इस्तीफा देने को मजबूर किया।  इसके कारण सौरभ कुछ ज्यादा ही अवसादग्रस्त और तनावग्रस्त हो गए। इससे उनकी हालत लगातार खराब होती बिगड़ती चली गई। सौरभ को शुगर (डायबिटीज) की भी शिकायत थी। इसके कारण उन्हें ठीक होने में वक्त लग रहा था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें दस रोज पहले मेरठ के जसवंत राय अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां के डाक्टरों ने कल सौरभ की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया था।

कल शाम उन्हें दिल्ली ले आया गया। दिल्ली में अस्पताल में भर्ती कराते ही उन्हें हृदयाघात हो गया। हर्ट अटैक कुछ अंतराल में लगातार दो बार आया। फिर उन्हें मस्तिष्क का आघात शुरू हो गया।  उन्हें बचाने की कोशिशें चरम पर थीं। उन्हें आईसीयू में रखकर लगातार इलाज किया जा रहा था। लेकिन आज शाम 6 बजे के करीब सौरभ को तीसरा हार्ट अटैक आया और उनके शरीर के सभी अंगों ने काम करना बंद कर दिया। काफी प्रयासों के बाद भी डॉक्टर उन्हे बचा नहीं पाए।

परिजन सौरभ के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक निवास बरेली ले गए हैं।

सौरभ अपने पीछे पत्नी, एक बेटी और एक बेटा छोड़ गए हैं। बेटी कक्षा सात और बेटा कक्षा चार में पढ़ता है। सौरभ के माता-पिता का पहले ही देहांत हो चुका है। सौरभ चार भाइयों में सबसे छोटे थे। सौरभ की साहित्य और संगीत में काफी रुचि थी। उन्होंने कई पुस्तकें लिखीं है।  उनके लिखे गीतों पर बालीवुड में फिल्में भी बन चुकी हैं। उन्होंने बाल कहानियों से लेकर उपन्यास और ग़ज़लें तक लिखी हैं। सौरभ के असमय गुजर जाने से उनके जानने वाले स्तब्ध हैं। ऐसे प्रतिभाशाली पत्रकार के असामयिक निधन पर कई पत्रकारों, पत्रकार संगठनों, लेखकों ने श्रद्धांजलि दी है।

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जागरण वालों के दुर्व्यवहार के कारण पत्रकार सौरभ शर्मा की हालत गंभीर, दिल्ली रेफर

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छत से गिरकर बांदा के पत्रकार राजकुमार की मौत

बांदा : उत्तर प्रदेश में बांदा के देहात क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार मिश्र उर्फ बागी की छत से गिरने से मौत हो गई. वे 45 वर्ष के थे. बागी सोमवार की रात कोतवाली देहात थाना के अंतर्गत आने वाले अपने गांव जमालपुर में घर की छत पर सोए हुए थे. इसी दौरान बारिश होने के चलते उनकी नींद खुल गई. बचने के लिए छत से नीचे उतरते समय उनका पैर सरक गया और वे गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए. 

पारिवारिक सदस्‍यों ने बताया कि उन्‍हें गंभीर हालत में उपचार के लिए कानपुर ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्‍यु हो गई. पुलिस ने शव का पीएम कराकर परिजनों को सौंप दिया. बागी के निधन से बांदा के पत्रकारों में शोक व्‍याप्‍त है. कई संगठनों ने भी बागी के असामयिक निधन पर गहरा शोक जताया है. 

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आर. अनुराधा का निधन

नई दिल्ली । भारतीय सूचना सेवा की वरिष्ठ अधिकारी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग में संपादक आर. अनुराधा नहीं रहीं। वे लम्बे समय से कैंसर से जूझ रही थी। 2005 में अनुराधा ने कैंसर से अपनी पहली लड़ाई पर आत्मकथात्मक पुस्तक लिखा था, “इंद्रधनुष के पीछे-पीछे : एक कैंसर विजेता की डायरी”। यह किताब राधाकृष्ण प्रकाशन से 2005 में प्रकाशित हुई थी। उनकी एक और महत्वपूर्ण कृति है- “पत्रकारिता का महानायकः सुरेंद्र प्रताप सिंह संचयन” जो राजकमल से जून 2011 में प्रकाशित हुआ था।  वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की पत्नी होने के वावजूद आर. अनुराधा की अपनी अलग लेखकीय पहचान थी।

केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाह ने आर. अनुराधा के निधन पर शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा- भारतीय सूचना सेवा की अधिकारी, सामाजिक मुद्दों पर प्रखर-बेबाक आर.अनुराधा नहीं रहीं। उनके निधन की खबर से काफी मर्माहत महसूस कर रहा हूँ। अनुराधा जी की लेखनी के कारण एक अपनी खास पहचान है पर उनको वरिष्ठ पत्रकार और मेरे अनन्यतम छोटे भाई के समान दिलीप मंडल जी की पत्नी होने की वजह से भी जानता हूँ ।  दिलीप मंडल ने हाल ही में इंडिया टुडे में मैनेजिंग एडिटर के तौर पर अपना काम इसीलिये छोड़ दिया था ताकि आर. अनुराधा की सेवा कर सकें और उनके साथ ज्यादा वक्त गुजार सकें। मै इस दुख की घड़ी में अनुराधा और दिलीप के परिवार के साथ खड़ा हूँ। यह मेरे लिये पारिवारिक क्षति की तरह है। उनके तमाम सहयोगियों, शुभचिंतकों से भी मैं अनुराधा जी के असामयिक निधन पर अपना दुख और हार्दिक संवेदना प्रकट करता हूँ ।

एच एल दुसाद ने आर. अनुराधा के निधन पर फेसबुक पर लिखा, मंडल साहब ने जब इंडिया टुडे से इस्तीफा दिया तभी से हम इस दुखद घटना का सामना करने की मानसिक प्रस्तुति लेने लगे थे। इस बीच अनुराधा जी से मिलने के लिए मंडल साहब के समक्ष एकाधिक बार अनुरोध किया, पर वह मिलने की स्थिति में नहीं रहीं। बहरहाल, इस दुखद स्थित के लिए लम्बे समय से मेंटल प्रिपरेशन लेने के बावजूद आज जब उनके नहीं रहने की खबर सुना, स्तब्ध रह गया। अनुराधा जी विदुषी ही नहीं, बेहद सौम्य महिला थीं। उनके नहीं रहने पर एक बड़ी शून्यता का अहसास हो रहा है। बहुजन डाइवर्सिटी मिशन की ओर से उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि।

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