उनकी डिग्रियां भी जाली हो सकती हैं मगर उन्हे शर्म क्यों नहीं आती !

क्यों नहीं सभी विधायकों, सांसदों, मंत्रियों व नौकरशाहों की डिग्रियों का सत्यापन करके देखा जाये? हो सकता है, काफी लोगों की डिग्री फर्जी निकले। कुछ तो नेता व मंत्रियों के फर्जी डिग्री के मामले आज कल चर्चा में भी है, यहां तक कि तमाम ऐसे लोग विदेशी डिग्री भी लिए फिरते हैं। लोक सेवा आयोग, इलाहाबाद के अध्यक्ष, अनिल यादव की डिग्री/मार्कशीट का सत्यापन कराया जाये, हो सकता है कि अवश्य फर्जी निकले ! आम आदमी क्या करे, उसे तो जेल में डालना आसान है, इन बड़ों को कौन पकड़े?

फर्जी डिग्री व रिमाण्ड तो एक बहाना है… असल में कुछ और निशाना है…

दिल्ली के कानून मंत्री जीतेन्द्र सिंह तोमर की गिरफ्तारी ने कई विवाद खड़े कर दिए हैं। गिरफ्तारी की अन्दरूनी सच्चाई भले ही कुछ भी हो लेकिन देश हित में जीतेन्द्र सिंह तोमर की गिरफ्तारी ने सवालों की झड़ी लगा दी है। सवाल यह नहीं कि देश की राजधानी का कानून मंत्री खुद शिकंजे में है। सवाल यह भी नहीं कि डिग्री फर्जी है या नहीं। सवाल यह है कि गिरफ्तारी का जो तरीका अपनाया गया वह कितना जायज है।