यशवंत की जागरण कर्मियों को सलाह- संजय गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए चुनाव आयुक्त को पत्र भेजो

Yashwant Singh : दैनिक जागरण का संपादक संजय गुप्ता है. यह मालिक भी है. यह सीईओ भी है. एग्जिट पोल वाली गलती में यह मुख्य अभियुक्त है. इस मामले में हर हाल में गिरफ्तारी होनी होती है और कोई लोअर कोर्ट भी इसमें कुछ नहीं कर सकता क्योंकि यह मसला सुप्रीम कोर्ट से एप्रूव्ड है, यानि एग्जिट पोल मध्य चुनाव में छापने की कोई गलती करता है तो उसे फौरन दौड़ा कर पकड़ लेना चाहिए. पर पेड न्यूज और दलाली का शहंशाह संजय गुप्ता अभी तक नहीं पकड़ा गया है.

संजय गुप्ता ने पिछले कुछ वर्षों में मजीठिया वेज बोर्ड के तहत सेलरी और बकाया मांगने वाले सैकड़ों लोगों को संस्थान से बाहर कर दिया. इन्हें और इनके परिजनों को भूखों मरने को मजबूर कर दिया. लगता है ईश्वर ने बदला लेने का मौका जागरण के उन पूर्व कर्मियों को दे दिया है जिनके पेट पर संजय गुप्ता ने लात मारा था. इन सभी साथियों को चुनाव आयोग को लेटर लिख कर एग्जिट पोल छापने के मुख्य अभियुक्त संजय गुप्ता को फौरन अरेस्ट करने की मांग करनी चाहिए.

लगातार चिट्ठी मेल भेजे जाने से चुनाव आयोग पर असर पड़ेगा. संजय गुप्ता बाहर क्यों? संजय गुप्ता को तो जेल में होना चाहिए. संजय गुप्ता दिखा रहा चुनाव आयोग को ठेंगा. गिरफ्तारी से बचने के लिए संजय गुप्ता ने पुलिस प्रशासन और सिस्टम को अपने अनुकूल किया. ऐसे वाक्य लिख लिख कर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को मेल करिए. लोहा गरम है. एक हथौड़ा भी काम कर सकता है. तो देर न करिए दोस्तों. चूकिए नहीं. फौरन आगे बढ़िए और शाम तक सौ पचास मेल तो करा ही दीजिए.

भड़ास के एडिटर यशवंत की एफबी वॉल से. संपर्क : yashwant@bhadas4media.com

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संपादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया, गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये : देवेंद्र सुरजन

Devendra Surjan : एक्ज़िट पोल छापने वाले जागरण परिवार की पूर्व पीढ़ी के दो और सदस्य सांसद रह चुके हैं. गुरुदेव गुप्ता और नरेन्द्र मोहन. यह परिवार सत्ता की दलाली हमेशा से करता आ रहा है. वर्तमान में जागरण भाजपा का मुखपत्र बना हुआ है. सत्ताधीशों का धन इसमें लगा होने की पूरी सम्भावना है. हर राज्य में किसी न किसी नाम से और किसी न किसी रूप में संस्करण निकाल कर सरकार के क़रीबी बना रहना इस परिवार को ख़ूब आता है. एक्ज़िट पोल छाप कर सम्पादक तो फ़िज़ूल में गिरफ़्तार हो गया जबकि गिरफ़्तारी गुप्ता बंधुओं की होनी चाहिये थी.

Arun Maheshwari : यह भारतीय पत्रकारिता का संभवत: सबसे काला दौर है। अख़बारों और मीडिया की मिल्कियत का संकेंद्रण, हर पत्रकार पर छटनी की लटकती तलवार और ट्रौल का तांडव – इसने डर और आतंक के एक ऐसे साये में पत्रकारिता को ले लिया है, जिसके तले इसके स्वस्थ आचरण की सारी संभावनाएँ ख़त्म हो रही हैं। सोशल मीडिया तक को नहीं बख़्शा जा रहा है। हमारे देश का संभवत: अब तक का सबसे जघन्य घोटाला व्यापमं, जिसमें सत्ता के घिनौने चरित्र का हर पहलू अपने चरम रूप में उजागर हुआ है, उस पर न सिर्फ सरकारी जाँच एजेंसियाँ कुंडली मार कर बैठी हुई है, बल्कि अबखबारों में भी इसकी कोई चर्चा नहीं है। बीच-बीच में सुप्रीम कोर्ट की तरह की संस्थाओं के फैसले भी इसको चर्चा में लाने में असमर्थ रह रहे हैं। चारों और एक अजीब सा संतुलन करके चलने का भाव पसरा हुआ है। इसमें जो लोग मोदी जी को अपने को सौंप दे रहे हैं, उनके सिवाय बाक़ी सभी तनाव में रह रहे हैं । ऐसा तो शायद आंतरिक आपातकाल के दौरान भी इतने लंबे काल तक नहीं हुआ था। यह भारतीय पत्रकारिता को पूरी तरह से विकलांग बना देने का दौर चल रहा है।

Urmilesh इस परिवार के एक सेठ को मुलायम सिंह यादव ने राज्य सभा में भेजा था।

Indra Mani Upadhyay ‘महेंद्र मोहन गुप्त’ को सपा ने राज्यसभा में भेजा था।

Om Thanvi इस बार इनकार कर दिया।

Situ Sharma आपने तो पोस्ट में बीजेपी का जिक्र किया है! फिर इनकार से सपा का क्या ताल्लुक..? सर

Om Thanvi ताल्लुक़ बहुत साफ़ है। सपा ने मना किया तो उन्हें फ़र्ज़ी पोल से सबक़ दिया जाएगा, भाजपा ख़ुश होगी, आगे भला करेगी जैसे अतीत में किया था।

Aneesh Rai दोबारा नहीं भेजा, इसीलिए तो नाराज हैं ।

Atul Tiwari अवसरवादी बिजनेसमैन हैं।

वरिष्ठ पत्रकार देवेंद्र सुरजन, अरुण माहेश्वरी, उर्मिलेश आदि के ये कमेंट जिस फेसबुक पोस्ट पर आए हैं, उसे पढ़ने के लिए नीचे दिए शीर्षक पर क्लिक करें :

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