दैनिक जागरण ने रैली की पुरानी तस्वीर छापकर मोदी को तेल लगाने का नया कीर्तिमान बनाया!

Deshpal Singh Panwar : दैनिक जागरण जैसा सबसे बड़ा कहलाने वाला अखबार अगर सबसे खराब हरकत करे तो पत्रकारिता कहां जाएगी.. वैसे तो सब जानते हैं कि ये अखबार जिसकी सरकार हो उसका पक्ष लेता है लेकिन जबसे मोदी सरकार आई है तबसे से तो ये मोदी सरकार की पब्लिसिटी में भाजपा को भी पीछे छोड़ गया है। बनारस में कल मोदी रोड़ शो कर रहे थे और ये अखबार सबको पछाड़ने की तैयारी कर रहा था… दैनिक जागरण के समझदार मीडिया साथियों ने 2014 की मोदी की तस्वीर लगाकर दिखा दिया कि हम सबसे आगे। बहुत खूब…

वरिष्ठ पत्रकार देश पाल सिंह पंवार की एफबी वॉल से.

ज्ञात हो कि दैनिक जागरण ने 5 मार्च 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली की पुरानी तस्‍वीर छापी है। 4 मार्च को नरेंद्र मोदी ने बनारस में एक रोड शो किया था। उसी दिन बसपा नेता मायावती और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन की रैली भी थी। दैनिक जागरण अख़बार ने बसपा की रैली की तस्‍वीर नहीं छापी। ब्‍लंडर ये किया है कि मोदी की रैली के नाम पर 2014 के लोकसभा चुनाव की एक रैली की तस्‍वीर छाप दी है।

स्‍थानीय लोगों की मानें तो अखिलेश-राहुल की रैली बहुत विशाल थी जबकि मोदी के रोड शो में ज्‍यादा भीड़ नहीं थी। अखिलेश-राहुल की रैली को टक्‍कर देने के चक्‍कर में जागरण ने मोदी की रैली की पुरानी फोटो छाप दी। यह फर्जीवाड़ा ऐसे पकड़ में आया कि मोदी जिस गाड़ी में बैठकर रोड शो कर रहे थे वह काली टोयोटा थी लेकिन अखबार में छपी तस्‍वीर में दिख रही गाड़ी सफेद सफारी वाली है। इस फर्जीवाड़े की ओर वाराणसी के एक पाठक संतोष यादव ने ध्‍यान दिलाया और इस संबंध में फेसबुक पर पोस्‍ट डाली।

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यह शख्स जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया!

Deshpal Singh Panwar : अगर ये खबर सच है कि हिंदुस्तान टाइम्स समूह को मुकेश अंबानी खरीद रहे हैं तो तय है कि अच्छे दिन (स्टाफ के लिए पीएम के वादे जैसे) आने वाले हैं। वैसे इतिहास खुद को दोहराता है… कानाफूसी के मुताबिक एक शख्स जो इस समूह के हिंदी अखबार में चोटी पर है वो जहां रहा वहां या तो बंटवारा हुआ, या वो अखबार तबाह होता चला गया।

बनारस के ‘आज’ से लेकर जागरण के आगरा संस्करण का किस्सा हो या फिर वो अखबार जिसके मालिकों की एकता की मिसाल दी जाती थी और एक दिन ऐसा आया कि भाई-भाई अलग हो गए, बंटवारा हो गया, पत्रकारिता के लिए सबसे दुखद दिन था वो, कम से कम हम जैसों के लिए। अगर ये बात सच है तो इतने पर भी इनको चैन पड़ जाता तो खैरियत थी, एक भाई को केस तक में उलझवा दिया, उसके बाद जो हुआ वो भगवान ना करे किसी के साथ हो, वो सब जानते हैं…लिखते हुए भी दुख होता है..

अब अगर हिंदुस्तान समूह के बिकने की बात है तो कानाफूसी के मुताबिक इस हाऊस को भी लगा ही दिया ठिकाने। अगला नंबर मुकेश अंबानी का होगा अगर उन्होंने इन्हें रखा तो, वैसे ये जुगाड़ कर लेंगे, पीएम की तरह बोलने की ही तो खाते हैं.दुख किसी के बिकने और खुशी किसी के खरीदने की नहीं है हां स्टाफ का कुछ बुरा ना हो बस यही ख्वाहिश है। वेज बोरड की वजह से बिक रहा है ये मैं मानने को तैयार नहीं हूं। जो हो अच्छा हो..

कई अखबारों में संपादक रह चुके वरिष्ठ पत्रकार देशपाल सिंह पंवार की फेसबुक वॉल से.

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