लगातार टूट रहे जागरण के पाठक, विज्ञापनदाता और शुभचिंतक

हमेशा रावणत्‍व की पराकाष्‍ठा पर रामत्‍व का आविर्भाव अवश्‍यंभावी होता है। यह नित्‍य नियम है। इससे कोई भी बच नहीं सकता। भले ही वह कितना भी साधन संपन्‍न अथवा शक्तिशाली हो। रावण के पास साधनों की कमी नहीं थी तो राम साधनहीन थे। इसी पर तुलसीदास जी ने लिखा- रावण रथी विरथ रघुबीरा। देखि विभीषन भयो अधीरा।। राम-रावण युद्ध में रावण को रथ पर सवार और राम को बिना रथ के देख विभीषण विचलित होने लगे। लेकिन परिणाम क्‍या हुआ—रावण का अंत हुआ और…आप सब जानते हैं।