दैनिक जागरण वाले चोर ही नहीं, बहुत बड़े झुट्ठे भी हैं… देखिए इनका ये थूक कर चाटना

दैनिक जागरण के मालिक किसिम किसिम की चोरियां करते हैं. कभी कर्मचारियों का पैसा मार लेते हैं तो कभी कानूनन जो देय होता है, उसे न देकर फर्जी लिखवा लेते हैं कि सब कुछ ठीक ठाक नियमानुसार दिया लिया जा रहा है. ऐसे भांति भांति के फर्जीवाड़ों और चोरियों का मास्टर दैनिक जागरण समूह अब तो बहुत बड़ा झुट्ठा भी घोषित हो गया है. यही नहीं, जब इसका झूठ पकड़ा गया तो इसे थूक कर चाटने को मजबूर किया गया और इसे ऐसा करना भी पड़ा.

जागरण वालों ने बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बड़ी बड़ी होर्डिंग लगाकर खुद को नंबर वन बता रहे थे. अचानक एक रोज इन्होंने अपने ही अखबार में बड़ा बड़ा माफीनामा छापा कि हम लोगों को मालूम नहीं था कि हम लोग इस जिले में नंबर वन नहीं हैं इसलिए गलती से गलती हो गई भाइयों! नीचे पढ़िए वो माफीनामा जो जागरण के 13 अगस्त के मुजफ्फरपुर एडिशन में पेज नंबर दस पर बड़ा बड़ा प्रकाशित किया गया है. उपर अखबार का वो पेज नंबर दस है जिसमें नीचे दाहिने साइड बड़ा सा माफीनामा छपा दिख रहा है.

ऐसा नहीं है कि दैनिक जागरण के मालिकों को पता नहीं था कि वे मुजफ्फरपुर में नंबर वन नहीं हैं. इन्हें खूब पता था लेकिन चोरी और सीनाजोरी इनकी आदत है. सत्ता, कानून, सिस्टम सब कुछ को ये ठेंगे पर रखकर चलते हैं. पर जब दूसरे अखबारों ने जागरण के झूठे दुष्प्रचार पर आपत्ति कर वाद ठोंका तो जागरण को अपनी चोरी कबूल करनी पड़ी और मजबूरन माफीनामा छापना पड़ा.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Samruddha Jeevan Fraud : महेश किशन मोटेवार समेत तीन डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

लाइव इंडिया न्यूज चैनल संचालित करने वाली चिटफंड कंपनी समृद्धि जीवन के डायरेक्टरों महेश किशन मोटेवार, संतोष पायगोडे और राजेंद्र भंडारे की संपत्ति कुर्क करने के आदेश ग्वालियर की एक अदालत ने दिए हैं. इन तीनों डायरेक्टरों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश रोकने को लेकर दाखिल याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है. तीनों के खिलाफ मजिस्ट्रेट कोर्ट से स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुके हैं.

शासकीय अधिवक्ता जगदीश प्रसाद शर्मा ने बताया कि समृद्धि जीवन चिटफंड कंपनी के डायरेक्टरों महेश मोटेवार, संतोष पायगोडे और राजेंद्र भंडारे के खिलाफ थाटीपुर थाने में जनता के साथ धोखाधड़ी किए जाने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 3/4 के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया है. लोगों को उनका धन कम समय में दुगना करने का लालच देकर पैसे वसूलने वाली इस कंपनी के तीनों डायरेक्टर एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही फरार हैं. इन पर न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा स्थायी गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए धारा 82/83 की कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है.

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कथित मुख्यधारा के मीडिया घराने चिटफंड कंपनियों के हजारों करोड़ रुपये के फ्राड पर लंबी चुप्पी साधे रहते हैं, दिखाते भी हैं तो बस दो चार सेकेंड के लिए या नीचे पट्टी पर चला कर मुंह सिल लेते हैं. वैसे तो छोटे व गैर-जरूरी मसलों पर दिन भर मुंह फाड़े चिल्लाते रहते हैं लेकिन चिटफंड कंपनियों के फर्जीवाड़े के खुलासे पर इन्हें सांप सूंघा रहता है. इसकी बड़ी वजह चिटफंड कंपनियों से मीडिया हाउसों की सेटिंग हैं. हजारों करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में घिरी चिटफंड कंपनियां मीडिया हाउसेज को मुंहमागी कीमत देकर उनका मुंह बंद रखने का काम करती हैं. इसी कारण लुटेरी चिटफंड कंपनियों के फ्राड पर न कभी कोई ‘प्राइम टाइम’ होता है, न कभी कोई ‘विशेष’ आता है और न ही ‘आज की बात’ होती है. ‘धड़ाधड़’ और ‘फटाफट’ खबरों में भी चिटफंड कंपनियों के फ्राड की खबरों पर खूब कृपा करके उन्हें बख्श दिया जाता है.

अब जबकि सहारा के श्री महोदय जेल में हैं और छूट नहीं पा रहे हैं, पीएसीएल पर अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगा है, निवेशकों को पचास हजार करोड़ रुपये लौटाने के आदेश को कायम रखा गया है, साईं प्रसाद की मालकिन धोखाड़ी के आरोप में जेल जा चुकी हैं, समृद्ध जीवन फूड्स को भी पैसे लौटाने के आदेश सेबी ने दिए हैं, आपको अब एक नई खबर बताते हैं. यह खबर समृद्ध जीवन से जुड़ी हुई है. लाइव इंडिया नामक चैनल संचालित करने वाली यह कंपनी देश के कई राज्यों में अवैध तरीके से हजारों करोड़ रुपये की उगाही करने में जुटी है. सारे नेता, अफसर, एजेंसियां चुप्पी साधे हैं क्योंकि सबको महीना पहुंच रहा है. इस समृद्ध जीवन कंपनी के कारनामों को लेकर एक सरकारी संस्था ने जो जांच की है, उसकी जांच रिपोर्ट भड़ास के पास है. इस जांच रिपोर्ट में इस कंपनी के देश विरोधी, जन विरोधी, अवैध और अनैतिक कारनामों का खुलासा किया गया है. इस जांच रिपोर्ट के हर पन्ने को यहां प्रकाशित किया जा रहा है. शुरुआत पहले पन्ने से करते हैं…

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पीएसीएल पर सेबी ने अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया, देने होंगे 7269 करोड़ रुपये

नई दिल्‍ली। बाजार नियामक सेबी ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) और इसके चार डायरेक्‍टर्स पर 7,269 करोड़ रुपए की पेनल्‍टी लगाई है। पीएसीएल को यह रकम 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। सेबी द्वारा किसी कंपनी पर लगाई गई यह सबसे बड़ी पेनल्‍टी है। सेबी के अनुसार पीएसीएल के डायरेक्‍टर्स तरलोचन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रता भट्टाचार्य ने लोगों से अवैध तरीके से पैसा जुटाया है। इसके चलते कंपनी पर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया है। ज्ञात हो पर्ल और पीएसीएलल की तरफ से ही एक न्यूज चैनल पी7 न्यूज चलाया जाता था। साथ ही कई पत्रिकाएं भी निकाली जाती थीं। बाद में कंपनी के फ्राड का खुलासा होने और कई एजेंसियों के शिकंजे में फंसने के बाद ये मीडिया हाउस बंद हो गया। यहां के कर्मचारियों ने अपने बकाया वेतन के लिए लंबा आंदोलन चलाया जिसके बाद उन्हें उनका हक मिल सका। हालांकि अब भी ढेर सारे कर्मी अपना बकाया पाने के लिए भटक रहे हैं।

पिछले साल सेबी ने पीएसीएल को पिछले 15 साल में फर्जी स्‍कीमों के माध्‍यम से जुटाए गए 49,100 करोड़ रुपए निवेशकों को वापस करने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश के खिलाफ पीएसीएल ने सिक्‍युरिटी अपीलेट ट्रिब्‍युनल (सेट) में अपील की थी। लेकिन पीएसीएल की अपील को खारिज करते हुए पिछले महीने सेट कंपनी की अपील खारिज करते हुए निवेशकों को पैसा वापस करने को कहा था। सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि पीएसीएल ने पिछले एक साल में भारी मात्रा में निवेशकों से अवैध स्‍कीमों के माध्‍यम से पैसा जमा किया है। इसके चलते कंपनी का मुनाफा सिर्फ एक साल के भीतर बढ़कर 2,423 करोड़ हो गया। सेबी ने इस मामले में कड़े शब्‍दों का प्रयोग करते हुए कहा कि जिस तरह कंपनी ने अवैध तरीके से पैसा जुटाया है। उसे देखते हुए अभी तक की सबसे बड़ी पेनल्‍टी लगाए जाने के लिए पीएलसीएल से बेहतर कोई दूसरा मामला नहीं हो सकता।

सेबी के अनुसार पीएसीएल पर उसका यह सख्‍त रवैया अवैध तरीके से पैसा जुटाने की कोशिश में जुटी फाइनेंस कंपनियों को एक कड़ा संदेश देगा। पिछले कुछ वर्षों में इस प्रकार की गतिविधियों में तेजी आई है। देश में लाखों लोगों की बड़ी रकम इन्‍हीं स्‍कीमों में निवेश के चलते डूब गई है। ऐसे गंभीर मामलों को हल्‍के में नहीं लिया जा सकता। सेबी के नियमों के तहत यह फर्जी तरीके से धन जुटाने वाली कंपनियों पर 25 करोड़ रुपए से लेकर उनके सालाना मुनाफे के तीन गुना तक पेनल्‍टी वसूलने का अधिकार है। जहां तक मौजूदा मामले का सवाल है, सेबी ने इसी नियम का पालन करते हुए कंपनी पर उसके मुनाफे की तीन गुनी पेनल्‍टी लगाई है।

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चिटफंड कंपनी ‘समृद्ध जीवन’ से सावधान, इसका भी हाल पीएसीएल और शारधा घोटाले वाला होने वाला है!

आजमगढ़ । समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के मेरठ ब्रांच के पूर्व शाखा प्रबंधक संदीप राय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के उपर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये सोसायटी देश में चल रही चिटफंड कंपनियों में अग्रणी है और इसका भी हाल पीएसीएल और शारधा चिट फंड घोटाले जैसी कंपनियों वाला होने वाला है। पीएसीएल और शारधा चिटफंड कंपनियों ने आम नागरिकों की 60 हजार करोड रुपये से भी ज्यादा की खून पसीने की कमाई को जी भर कर लूटा था। इसी कडी में अगला एपिसोड समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी का होने वाला है। राय ने कंपनी पर आरोप लगाते हुये प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सोसायटी प्रबंधन से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

1-वर्ष 2002 सें अब तक कंपनी को अपने नाम क्रमशः गुरूकृपा डेयरीज, समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लि0, प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड, समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी एवं गोल्डन पेटल नाम क्यों रखने पड़े। क्या ये किसी संदिग्धता की भावना के चलते तो नहीं किया गया।

2-जब सेबी ने दिनांक 2013 ने समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड एवं प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड पर बैन लगाया एवं किसी भी प्रकार की नयी कंपनी अथवा लुभावनी स्कीम्स के संचालन से रोक लगाई तो समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी का गठन किस आधार पर किया गया क्योंकि दोनों के संचालक मंडल एवं कार्य करने का प्रकार क्रमशः एक जैसा ही है।

3-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के बॉयलाज में यह उल्लेखित होने पर कि मांग पर भुगतान किया जायेगा, आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के तहत अनुबंध कराया जा रहा हैं, जिसमें मात्र परिपक्वता पर भुगतान दिये जाने का उल्लेख किया गया। इस प्रकार समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा अपने बॉयलाज की मंशा के विपरीत कार्य किया जा रहा है, क्यों।

4-सेबी द्वारा 26 नवंबर 2013 को जारी अपनी जांच रिपोर्ट में समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड द्वारा करायी गयी पालिसी मुख्यतः आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान पर तत्काल से कस्टमर से धनराशि ना लिये जाने के आदेश जारी किये गये थें। जबकि समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड द्वारा आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के अंतर्गत करवायी गयी पालिसी को देश भर में समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के नाम के तहत जारी रखा गया, जोकि सेबी के आदेशों का पूर्णतः उल्लंघन है।

5-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा बॉयलाज की मंशा के विपरीत आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के अंतर्गत जो योजना चलाई जा रही हैं बांड के अनुसार उसमें लाइव स्टाक देने की बात लिखी जाती हैं, जबकि कस्टमर को किसी भी प्रकार का लाइव स्टाक नही दिया जाता हैं बदलें में धनराशि ही दी जाती हैं, इसका उल्लेख सेबी द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट में भी किया गया हैं। इस प्रकार बिजनेस प्लान के नाम पर सोसायटी द्वारा एक प्रकार से टर्म डिपाजिट लेकर बैंकिग का ही कार्य किया जा रहा हैं जोकि कृषि मंत्रालय एवं सहकारिता के नाम पर धोखा हैं।

6-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड एवं प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड द्वारा कस्टमर के नाम जारी चेक को भुगतान किया गया हैं एवं इस प्रकार बैंकिग रेग्यूलेशन एक्ट 1949 के पैरा-49-ए का पूर्णरूप से उल्लंघन किया गया हैं।

7-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के लखनउ एवं हल्द्वानी स्थित शाखायें जोकि प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया के नाम से खरीदी गयी थी एवं जिसमें आज दिनांक तक समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी का कार्य चल रहा हैं इस तथ्य से साबित होता हैं कि नाम बदले हैं काम नही ।

8-मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के आदेश दिनांक 13 जुलाई 2012 के संदर्भ में राय ने सोसायटी प्रबंधन से जवाब मांगा हैं कि क्यों आपकों माननीय मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने भगोडा घोषित किया था।

9-उडीसा राज्य के तलचर, जाचपुर एवं बाडगाह जिलों में दर्ज सोसायटी प्रमुख श्री महेश किसन मोतेवार के खिलाफ दर्ज 420 के मुकदमों के बारे में सोसायटी प्रबंधन का क्या जवाब है।

10-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी किस आधार पर ऐजेंटों की नियुक्ति करती हैं एवं किस आधार पर उनकों ओ0आर0सी0 ;ओवर रायडिंग कमीशनद्ध एवं एम0एफ0ए ;मंथली फिल्ड ऐलाउंस का वितरण करती हैं जबकि उसको कृषि मंत्रालय एवं सहकारिता की मूल भावना के अंतर्गत केवल सदस्यों के माध्यम से ही व्यवहार करना था।

11-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के कर्मचारी का पी0एफ जोकि उनका मूलभूत अधिकार हैं उसमें अपना अंशदान क्यों नहीं जमा करती।

12-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी अपने कर्मचारियों को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अवकाश क्यों नही प्रदान करती।

13-अभी हाल ही में पंजाब सरकार के कापरेटिव सोसायटी के रजिस्ट्रार ने आपको चिन्हित किया था कि आपके पास पंजाब राज्य में कार्य करने हेतु आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र नही था फिर भी आपने संपूर्ण राज्य में अनाधिकृत रूप अपनी अनेक शाखाओं के माध्यम से करोडों का हेरफेर किया, आखिर क्यों ।

14-उत्तराखंड राज्य में आपकी समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी की निबंधन तिथि 8 जून 2012 थी एवं उत्तराखण्ड राज्य में कार्य करने की अनुमति 28 मार्च 2013 को प्राप्त हुई, जबकि समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा निबंधन तिथि से पूर्व ही समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के नाम की जमा रसीद कस्टमर को दी गई, इस प्रकार से यह स्पष्ट हैं कि आपके द्वारा अपने निबंधन से पूर्व ही उत्तराखण्ड राज्य में कार्य करना आरंभ कर दिया गया था जोकि अवैध है।

15-निबंधक सहकारी समितियां उत्तराखण्ड के कार्यालय पत्रांक 27107/अधि0-सं-का/मल्टी स्टेट को0 आप/निरीक्षण-जांच 2014-15 दिनांक 4 जुलाई 2014 में मुख्य जांच अधिकारी श्री नीरज बेलवाल की जांच रिपोर्ट में जिसमें की आपके ध्वस्त होने एवं कानून व्यवस्था बिगडने तक की बात कही गयी हैं उसके बार में सोसायटी प्रबंधन का क्या कहना है।

16-आपके द्वारा चार बार नाम बदलने के पीछे कही किसी प्रकार की घृणित मानसिकता तो नही हैं।

17-आपने अफ्रीकी गणराज्य लिथुआनिया की नागरिकता लेने के पीछे जो आपने वहा 10 लाख डालर का निवेश किया हैं कही वो आपका पलायन तो नही दर्शाता है।

18-प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया पर रोक के बावजूद आपके द्वारा संचालित लाइव इंडिया न्यूज चैनल एवं मी मराठी नाम के चैनल को चलाने का आखिर क्या उद्वेश्य है, कहीं ऐसा तो नही कि आप अपने कारनामों से खुद को बचने बचाने के लिये ऐसा करते हों।

19-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के पास केवल सावधि जमा एवं पिग्मी डिपाजिट का ही लायसेंस हैं वो भी केवल सदस्यों के मध्य में फिर भी आप आय0 पी0 एवं एस0 आय0 पी0 प्लानों का संचालन धडल्ले से कर रहें हैं और वो भी सेबी के प्रतिबंध के बावजूद।

20-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के द्वारा सर्कुलरों अथवा विशेष लुभावनी स्कीमों का संचालन जो आपके द्वारा समय समय पर बिजनेस को बढाने के लिये किया जाता हैं  वो आप किस आधार पर करते हैं क्योंकी सहाकारिता आपकों इस बात की इजाजत नही देती हैं।

21-किस प्रकार से आप अपने ऐजेंटो के मध्य 12 साल का कैरियर एवं 12 रैंक देते हैं, इस तरह का कार्य तो केवल मल्टी लेवल मार्केंटिग एवं चिट फंडी करते हैं। आप क्लब मेंबरशिप भी प्रदान करते हैं।

22-अपने भांजे श्री प्रसाद परसवार की शाही शादी जो कि आपने पुणे के बालेवाडी स्टेडियम में की थी वो एवं उसमें तकरीबन 3 लाख लोगों की आमद हुई थी एवं इस शादी के लिये आपने पुणे शहर के तमाम मैरिज हाल, बैंक्वेट हाल एव पंडाल बुक किये थे, साथ ही चार विशेष रेलगाडिया एवं तकरीबन पूरे भारत की 80 प्रतिशत वायु सेवा को आपने बुक किया था। उस शाही शादी में आपने सेलो कंपनी से 80 हजार कुर्सियां खरीदी एवं इस पूरे तामझाम को पूरा करने के लिये आम जनता की गाढी कमाई के 90 करोड़ रुपये आपने खर्च कर दिये, आखिर किस हैसियत से।

23-आपके पास राल्य रायस एवं लुब्रगिनी जैसी गाडियों का काफिला हैं जोकि भारत जैसे देश में भी अल्प मात्रा में उपलब्ध हैं आखिर अपनी शाही जिंदगी के लिये कब तक आप जनता का खून चूसते रहेंगे।

24- 13 साल के आपकी कंपनी के इतिहास में आपने अभी तक 14 हजार करोड रूप्ये की धनराशि आपने 21 राज्यों की जनता से बटोरी हैं उसकों लोटाने के लिये आपके पास पर्याप्त बैलेंस है कि वो आपने लिथुआनिया देश में अपने बुढापें के लिये बचा कर रखा हैं।

मेरा माननीय प्रधानमंत्री जी एवं पाठकों से अनुरोघ हैं कि वो अपने विवके का प्रयोग करें साथ ही इस प्रकार की चिट फंडी कंपनी के खिलाफ एकजुट होकर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर, इस कंपनी के भागने के मार्ग को अवरूद्ध करनें में अपना योगदान दें जिससे की जनता की गाढी कमाई का बचाया जा सकें।

सधन्यवाद,

आपका

संदीप राय

आजमगढ

संपर्क: 07895998665, sandyazam7@gmail.com

प्रेस विज्ञप्ति


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अपनी नौकरी बचाने के लिए शशि शेखर नीचता पर उतर आये हैं

रमन सिंह : हिन्दुस्तान में साइन कराने का सिलसिला शुरू… अपनी नौकरी बचाने के लिए शशि शेखर नीचता पर उतार आये है. इसी का नतीजा है कि इन दिनों हिन्दुस्तान अखबार में कर्मचारियों से दूसरे विभाग में तबादले के कागज पर साइन कराने का दौर शुरू हो गया है. दिल्ली में तो खुद शशि शेखर जी साइन करा रहे हैं. साइन नहीँ करने वालों को निकालने की धमकी भी दी जा रही है.  मजीठिया से घबराया हिन्दुस्तान फिलहाल जिस कागज पर साइन करा रहा है उसमें भी कई फर्जीवाड़ा है. इसलिए नीचे के फोटो को आप ध्यान से पढ़िए. दो फोटो हैं, दोनों को ध्यान से देखिए. कई फर्जीवाड़े समझ में आएंगे. 

दोनों फोटो को आप अगर ध्यान से देखेंगे तो उसमें शशि शेखर का हस्ताक्षर अलग अलग है. अब आप पता लगाइये कि कौन सही है. दूसरा फर्जीवाड़ा ये है कि लैटर 29 मई 2015 को जारी हुआ है और लोगोँ से साइन सितम्बर में कराया जा रहा है. तीसरा फर्जीवाड़ा- जिस कागज पर साइन करा कर कर्मचारियों को हिन्दुस्तान अखबार से हटा कर इंटरनेट डिवीज़न में डाला जा रहा है उसका वितीय वर्ष 2014-15 है जबकि कागज 29 मई 2015 को जारी हुआ है.

फेसबुक पर सक्रिय किन्हीं रमन सिंह के वॉल से.

वो कौन सी दो तस्वीरें हैं जिनको ध्यान से देखने पर कई किस्म का फर्जीवाड़ा नजर आता है. उन दोनों तस्वीरों को देखने के लिए नीचे लिख कर आ रहे 2 या Next पर क्लिक कर दें>>

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बिहार और यूपी विधानसभा चुनावों को देखते हुए आ गई फर्जी न्यूज चैनलों की बाढ़… रहें सावधान…

मीडिया क्षेत्र में अगर फर्जीवाड़े की बात करें तो सबसे ज्यादा धोखेबाजी और छल न्यूज चैनलों की दुनिया में है. चुनाव आए नहीं कि लुटेरों का गिरोह सक्रिय. आगे है बिहार और यूपी के विधानसभा चुनाव. इन दोनों बड़े राज्यों के चुनाव में खरबों रुपये के वारे न्यारे होते हैं. नेता अपनी ब्लैकमनी जनता के बीच ले आते हैं और वोट खरीदने के वास्ते कैश से लेकर शराब आदि तक बंटवाते हैं. इसी रकम बटाई में से कुछ हिस्सा अपने पाले में करने के लिए कुछ शातिर दिमाग लोग चैनल ले आते हैं. हालांकि नेता चालाक हो चुके हैं और वो जानते हैं कि कौन चैनल मौसमी चैनल है और कौन-से पहले से चल रहे हैं.

एक बार फिर कई चैनल मैदान में आने को मचल रहे हैं. कई चैनलों से कई आरोपों से निकाले गए एक सज्जन काफी दिनों से अपनी दुकान सजाने की फिराक में है. आखिरकार उन्होंने इसमें सफलता पाई और न्यूज नाऊ नाम से यूपी यूके केंद्रित एक चैनल लांच करने को लेकर काफी समय से चर्चा चला रहे हैं. इस चैनल की तरफ से विज्ञप्ति जारी कर सबको बता दिया गया है कि दुकान नोएडा में सज गई है और आइए हम सब मिलकर धंधा करें. हजारों मीडियाकर्मी बार बार छले जाने के बावजूद इस चैनल से जुड़ेंगे और तनख्वाह न मिलने पर सबका आह्वान करेंगे कि आइए हम सब मिलकर लड़ें. खासतौर पर भड़ास को जरूर कसम खिला खिला कर कहेंगे कि आप भड़ासियों को इन संघर्षरत मीडियाकर्मियों के साथ खड़े होना चाहिए.

उधर, भांति भांति के फ्राडों के कारण तिहाड़ के कई दफे चक्कर लगा चुके महुआ ब्रांड वाले पीके तिवारी को मीडिया इंडस्ट्री में लूटने फूलने के लिए कंधा मिल गया है. यह कंधा दिया है सन स्टार ब्रांड वाले गोपाल दास ने. सन स्टार नामक अखबार निकाल रहे गोपाल दास चैनल भी लाने वाले हैं. इनके साथ ओंकारेश्वर पांडेय, राघवेश अस्थाना, विद्याशंकर तिवारी आदि जुड़े हैं. समझा जा सकता है कि जो पीके तिवारी नामक शख्स खुद का न्यूज चैनल नहीं चला पाया और मीडियाकर्मियों की सेलरी हड़पकर भागने की फिराक में था, वह किसी दूसरे के पार्टनरशिप में कैसे सज्जन और उदार जन बन जाएगा. जानकार कहते हैं कि ये सन स्टार नामक ग्रुप भी पत्रकारिता के लिए कम, मालिकान के धंधे फैलाने और चैनल के नाम पर अन्य तरीके से पैसे बनाने के लिए मैदान में उतर रहा है. इनका पूरा कार्यक्रम बिहार और यूपी के चुनाव तक केंद्रित है.

इसलिए हे मीडिया के समझदार प्राणियों. फिर फिर जाल में न फंसना. सेक्युरिटी मनी जमाकर माइक आईडी लेने के चक्कर में न पड़ना. बिना तनख्वाह पाए महीनों काम करते जाने के मकड़जाल में न फंसना. जिन समझदार संपादकों ने धनपशुओं को चढ़ा बढ़ाकर फांसा है, उन संपादकों और उनकी टीम के लग्गूओं भग्गूओं का तो काफी कल्याण हो जाएगा लेकिन मारे जाएंगे बेचारे वो जो मीडिया में कुछ करने के इरादे से आने की चाहत में इनके साथ जुड़ फंस जाते हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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गुरुकुल मीडिया और एन.के. मीडिया की धंधेबाजी की कहानी

समूचे देश के परिपेक्ष्य में अगर देखा जाए तो राष्ट्रीय और क्षेत्रीय चैनलों की एक लम्बी फेहरिस्त मिलेगी, कुछ वैध तो कई अवैध तरीके से अपना संचालन करते हुए पाए जायेंगे| कई चैनलों ने तो वैध माध्यमों से कार्य करते हुये सफलता की कहानी और इतिहास लिख डाला है, इनमे राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों चैनल शामिल हैं| लेकिन जब आप निचले पायदान पर खड़े चैनलों को देखेंगे तो पायेंगे इनमे से अधिकतर चैनलों के संचालन की नींव ही अवैध रूप से खड़ी की गयी है| अवैध संचालन एक संगठित गिरोह की तरह काम करता है, प्रशासन चाहते हुए भी इस पर संगठित अपराध की कोई धारा नहीं लगा सका|

इसी श्रेणी का एक चैनल झारखंड में पिछले तीन साल से संचालित है। इस चैनल के संचालन का जिम्मा लिया है गुरुकुल मीडिया ने जिसने एक सशर्त भागीदारी के तहत 70 प्रतिशत शेयर के साथ एन.के. मीडिया नामक संस्था से करार किया है, जिसके नाम से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने लाइसेंस जारी किया है| मंत्रालय के शर्तों की अवहेलना की शुरुआत यहीं से होती है। एन.के. मीडिया के प्रवर्तक भुवनेश्वर स्थित शिक्षा व्यवसाय से जुड़े सज्जन प्रभात रन्जन मल्लिक हैं| मल्लिक साहब इस चैनल को ओडिशा में उड़िया भाषा में चलाते हैं और गुरुकुल मीडिया इसे झारखण्ड में हिंदी भाषा में चलाता है| आर्थिक और संगठित अपराध के तौर पर यदि देखा जाए तो कई अपराध पिछले तीन साल से निरंतर होते चले आ रहे हैं। झारखण्ड सूचना जनसंपर्क विभाग को गलत जानकारी मुहैय्या कराकर ये चैनल पिछले दो वर्षों से विज्ञापन हासिल करता आ रहा है। दरअसल केन्द्रीय संस्था डीएवीपी ने उडिया भाषी चैनल को विज्ञापन दर की स्वीकृति दी थी, उसी स्वीकृति को हिंदी भाषी चैनल का बताकर झारखण्ड सूचना एवम जनसम्पर्क विभाग में विज्ञापन जारी करने हेतु आवेदन दे दिया गया| डीएवीपी द्वारा एन.के मीडिया की मान्यता होने के वाबजूद झारखण्ड सूचना एवं जनसंपर्क विभाग गुरुकुल मीडिया के नाम से भुगतान करता आ रहा है। इसकी इजाज़त सूचना जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों ने बिना किसी छानबीन के दे दी। अब अगर कहीं गलती से इसकी जांच ही गयी तो विभागीय अधिकारी को जवाब ढूँढने से भी नहीं मिलेगा|

पिछले तीन साल से यह संस्था बदस्तूर विज्ञापनों का प्रसारण करता आ रहा है लेकिन आज तक सेवा कर के नाम पर एक पैसा भी जमा नहीं कराया गया, भारतीय सेवा कर अधिनियम के मुताबिक़ हर तीन महीने पर सेवा कर के नाम पर वसूली गई राशि विभाग को जमा करानी पड़ती है| इस संस्था में लगभग एक सौ से ज्यादा कर्मचारी पिछले तीन साल से कार्यरत हैं, इनके वेतन का भुगतान जब भी किया जाता है उसका माध्यम नगद होता है ऐसे में पीएफ़ और ईएसआई कौन सी चिड़िया का नाम है, यहाँ के कर्मचारियों को नहीं मालूम लेकिन पहले दिन से यहाँ उपस्थिति के लिये बायोमेट्रिक अटेंडेंस सिस्टम जरूर काम कर रहा है | ये तो हुए पहले दर्जे के आपराधिक गतिविधियों की कहानी| दूसरे दर्जे में जो अपराध यहाँ हो रहे हैं उसके भुक्तभोगी दिग्गज पत्रकार श्रीकांत प्रत्युष जैसे वरिष्ठ पत्रकार भी हो चुके हैं| श्रीकान्त प्रत्युष ने जब जी मीडिया से नाता तोड़ा तब एक प्रमोटर की सहायता से इस चैनल को बिहार तक ले जाना चाहा लेकिन उनकी इस चाहत ने उस प्रमोटर के डेढ़ करोड़ रुपयों का नुकसान करा दिया जो आज भी गुरुकुल मीडिया के पास बकाया हैं|

श्रीकांत प्रत्युष जैसे कई पत्रकार जिन्होंने इस चैनल को बिहार ले जाना चाहा उन्हें लाखों गंवाने पड़े, ताजा फेहरिस्त के मुताबिक़ बिहार चुनाव से पहले इस चैनल को बिहार ले जाने की कवायद में पटना के एक व्यवसायी वर्ग को तीस लाख रुपया से हाथ धोना पडा | गुरुकुल मीडिया के एक निदेशक नितीश श्रीवास्तव ने जब इन घटनाओं का विरोध करना शुरू किया तो उन्हें भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, हालांकि कागजी तौर पर आज भी वे निदेशक बने हुए हैं | अगली कड़ी में इसके दुसरे निदेशक कन्हैया तलेजा हैं  जो आज भी अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं लेकिन अपनी व्यावसायिक मजबूरियों की वज़ह से अलग हो पाने में असमर्थ हैं, इन्हें भी कभी-किसी समय बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है |

अब सवाल यह उठता है कि ऐसी क्या वज़ह है जिसके कारण श्रीकांत प्रत्युष जैसे दबंग माने जानेवाले पत्रकार भी इनके आगे कुछ कर पाने में असमर्थ हैं, तो इसकी मुख्य वज़ह है इस चैनल के मुख्य संचालक की धर्मपत्नी झारखण्ड पुलिस में महानिदेशक (अग्नि-शमन एवं होम गार्ड) हैं| जब बेगम भये कोतवाल तो डर काहे का….। इसके आगे की कहानी और भी गन्दी और घिनौनी है। श्रीमान खुद सेवामुक्त आईएएस अधिकारी हैं और ज्रेड़ा जैसी सरकारी संस्था में आर्थिक अपराध में वांछित है, पिछले साल अक्टूबर से मई तक गैर जमानतीय वारन्ट की वज़ह से गायब थे, अदालत ने कुर्की जब्ती का आदेश भी दिया लेकिन झारखण्ड पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पाई, अभी फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में केस विचाराधीन है|

कानूनी प्रावधानों के तहत झारखण्ड में हर बहुमंजिली इमारत (रिहाइशी अथवा व्यावसायिक) को अग्नि शमन विभाग के अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है, ऐसे में आप की ईमारत अग्नि शमन विभाग के शर्तों का पालन यदि नहीं करती है तो चिंता की कोई बात नहीं है, आप इनसे मिलिए, आपका काम हो जाएगा| रांची के पांच सितारा होटल रेडिसन ब्लू, पटाखा व्यवसायी ट्रेड फ्रेंड्स के संचालक सिंघानिया बंधु और प्रतिष्ठित स्कूल टौरीयन वर्ल्ड स्कूल का काम भी इन्होंने ही आसान किया था। आजकल बिल्डरों से इनके अच्छे ताल्लुकात बताये जाते हैं। गाहे-बगाहे कोई बिल्डर यदि बात नहीं मानता है तो आधी रात को इनका नुमाइन्दा उसके घर जाने में भी नहीं हिचकता| आधिकारिक रूप से वसूली एजेंट होने की वज़ह से राज्य अग्निशमन पदाधिकारी इन्हें विभाग में वसूली गयी रकम पहुंचाने हर दुसरे दिन पहुँच जाते हैं | मजे की बात तो ये है की झारखण्ड  मुख्यमंत्री के साथ-साथ पुलिस के आलाधिकारियों को भी इन घटनाओं की विस्तृत जानकारी है, लेकिन बात वही है बेगम भये कोतवाल तो डर काहे का….।

रांची से केके की रिपोर्ट.

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‘नेशनल दुनिया’ के कर्मचारियों का पैसा खा गए शैलेंद्र भदौरिया

दोस्तों, इस सूचना के माध्यम से हम आपका ध्यान इस ओर दिलाना चाहते हैं कि अगर आप या आपका कोई मित्र, रिश्तेदार, जानकार ‘महाराणा प्रताप ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स यानी ‘एमपीजीआई’ के किसी संस्थाीन में प्रवेश लेना चाहता है, नौकरी करने वाला है या किसी अन्य तरह से जुड़ने जा रहा है तो इस बात से सचेत रहे कि यह ग्रुप अपने यहां काम करने वालों के पैसे नहीं देता। 

इस संस्थान का ‘नेशनल दुनिया’ के नाम से अखबार भी निकलता है। उसमें काम करने वालों को कई-कई महीने से पैसा नहीं दिया जा रहा है। अब चूंकि महीनों की मेहनत की कमाई फंसी हुई होती है, इसलिए बेचारे कर्मचारी नौकरी छोड़कर भी नहीं जा पाते हैं। यानी एक तरह से वे बंधुआ मजदूरी कर रहे हैं। इसके अलावा जिन लोगों ने नौकरी छोड़ने का साहस जुटा भी लिया, उनके बकाया पैसे भी कई सालों से नहीं दिए गए हैं। 

यहां तक कि ‘पीएफ’ के नाम पर काटे गए पैसे भी हड़प कर लिए गए हैं। इसलिए इस ग्रुप से जुड़ने से पहले अच्छी तरह से सोच-विचार कर लें और पुरानी लोगों से भी बात करके सचाई जान लें। यह ग्रुप बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए बच्चों को आकर्षित करता है, सब्जबाग दिखाता है, मोटा पैसा खर्च करके विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करता है और उनमें देश के नामी-गिरामी लोगों को बुलाकर अपनी अच्छी छवि दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन आपको सावधान किया जाता है कि इस छवि के पीछे की सचाई भी जान लें।

(जनहित में जारी – कृपया फेसबुक, ट्वीटर, ईमेल आदि के जरिए इस सूचना को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा दें। इसे टैग करें, लाइक करें और शेयर करें।)

पत्रकार सुमन गौतम से संपर्क : suman.gautam462@gmail.com

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इतनी बड़ी कॉरपोरेट जालसाज़ी के आरोपियों में टाइम्‍स ऑफ इंडिया समूह के मालिक समीर जैन भी

कोई भी कहानी कभी भी खत्‍म नहीं होती। बस, हम उसका पीछा करना छोड़ देते हैं। पचास साल पुरानी एक लंबी और जटिल कहानी से मेरी मुलाकात दस साल पहले 2005 में हुई थी जिसका नायक उस वक्‍त 84 साल का था। निर्मलजीत सिंह हूण नाम के इस एनआरआइ के इर्द-गिर्द मुकदमों का जाल था। एक ज़माने में कॉरपोरेट जगत पर राज करने वाले शख्‍स को इस देश के कारोबारियों, पुलिस और न्‍याय व्‍यवस्‍था ने पंगु बनाकर छोड़ दिया था। फिर इस शख्‍स ने इस देश की न्‍याय प्रणाली का परदाफाश करने को अपना मिशन बना लिया। उसके मिशन में से एकाध कहानियां हमने भी उठाकर 2005 में ‘सीनियर इंडिया’ में प्रकाशित की थीं, जिसके बाद प्रतिशोध की कार्रवाई में संपादक आलोक तोमर समेत प्रकाशक और मालिक सबको जेल हो गई। पत्रिका बंद हो गई, आलोकजी गुज़र गए, हूण से हमारा संपर्क टूट गया, लेकिन उनका मिशन जारी रहा।

अचानक इतने दिन बाद जब उनकी याद आई और मैंने कहानी के छूटे सिरे को पकड़ना शुरू किया, तो इस खबर पर नज़र पड़ी। पिछले पचास साल से दर्जनों मुकदमे लड़ रहे हूण को 48 साल बाद कलकत्‍ता उच्‍च न्‍यायालय से एक छोटा सा इंसाफ मिला है। उन्‍हें ठगने वाले कारोबारियों के ऊपर कलकत्‍ता पुलिस ने एफआइआर दर्ज की है। हूण अब 18,402 करोड़ रुपए की वसूली के लिए एक और मुकदमा करने जा रहे हैं। भारत के कॉरपोरेट इतिहास में यह सबसे महंगा दीवानी मुकदमा होगा।

आप पूछ सकते हैं कि इसमें हमारे काम का क्‍या है? मित्रों, 1967 के इस कॉरपोरेट जालसाज़ी वाले मुकदमे में जिन लोगों के खिलाफ़ एफआइआर दर्ज हुई है उनमें इंद्र कुमार गुजराल के भतीजे अमित जाज, उनकी पत्‍नी, टाइम्‍स ऑफ इंडिया समूह के मालिक समीर जैन और उनके दिवंगत पिता अशोक जैन भी हैं। क्‍या किसी मृत व्‍यक्ति के ऊपर एफआइआर हो सकती है? हूण ने एक बार हमें बताया था कि अशोक जैन के जिस विमान हादसे में मारे जाने की खबर बहुप्रचारित है, वह दरअसल फर्जी थी। उन्‍हें फेमा/फेरा में अंदर जाने से बचाने के लिए यह कहानी गढ़ी गई है। अशोक जैन जिंदा हैं।

ऐसे दावों को हम तब भी एक बुजुर्ग की सनक मानकर खारिज करते थे और आज भी इस पर विश्‍वास नहीं होता। सवाल उठता है कि कलकत्‍ता उच्‍च न्‍यायालय के आदेश और कलकत्‍ता पुलिस के एफआइआर का क्‍या मतलब निकाला जाए? इच्‍छुक पत्रकार मित्र अगर इस स्‍टोरी को फॉलो करना चाहें तो उनका स्‍वागत है। अपने जीते जी भारतीय कॉरपोरेट जगत की रंजिशों का ऐतिहासिक दस्‍तावेज बन चुके एन.एस. हूण को आज भी चार दर्जन मुकदमों में इंसाफ़ का इंत़जार है।

अभिषेक श्रीवास्तव के एफबी वाल से

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रिपोर्टर बनाने का सपना दिखा प्रेस आईडी कार्ड देने के नाम पर 4500 रुपये वसूलती है ये न्यूज एजेंसी

दिल्ली के द्वारका में एक न्यूज एजेंसी है. नाम है- परफेक्ट न्यूज इंटरनेशनल. इसके मालिक का नाम कुमार सौरव है. ये एजेंसी प्रेस आईडी कार्ड देने के नाम पर लोगों से 4500 रुपये वसूलती है. पैसे लेकर आईडी कार्ड दिए जाते हैं. आईडी कार्ड देकर कहा जाता है कि अब तुम रिपोर्टर बन गए. साथ ही अगर कोई स्टेट ब्यूरो पाना चाहता है तो उसे पंद्रह हजार रुपये देने पड़ते हैं.

कई लोग तो ऐसे भी हैं जिन्होंने पैसे दे दिए लेकिन न्यूज एजेंसी ने उन्हें कोई रिस्पांस नहीं दिया. इस न्यूज एजेंसी से जुड़े रहे लोगों का कहना है कि यहां काम करवा कर पैसे तक नहीं दिए जाते. बताया जा रहा है कि यहां पर जनवरी महीने से इंप्लाईज को सेलरी नहीं दी गई और मांगने पर मीडिया के नाम की धमकी दी जाती है. यहां तक धमकाया जाता है कि तुम्हारा फ्यूचर खराब कर देंगे, हिम्मत है तो सेलरी लेकर दिखाओ.

आरोप है कि दिल्ली और दिल्ली के बाहर के बहुत सारे लोगों का पैसा यह न्यूज एजेंसी दबा चुकी है. जयपुर, लखनऊ, बिहार समेत कई जगहों प्रदेशों के लोगों का पैसा फंसा हुआ है. चर्चा है कि न्यूज एजेंसी रजिस्टर्ड तक नहीं है और ये लोग पहले ऐसा ही कुछ कारनामा पंजाब के लुधियाना में किया करते थे. वहां पुलिस कंप्लेन हुई तो बोरिया बिस्तर समेटकर दिल्ली आ गए. अभी हाल में ही एक महिला मीडियाकर्मी ने इस कंपनी के फर्जीवाड़े को लेकर पुलिस में कंप्लेन दर्ज कराई है. आपसे अनुरोध है कि इस न्यूज एजेंसी के फर्जीवाड़े के बारे में सबको बताएं ताकि दूसरे लोग धोखाधड़ी का शिकार होने से बच सकें. 

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यूपी में ‘टाइम इन्फार्मेशन सर्विसेज’ कंपनी का महाठगी अभियान

 

लखनऊ : श्रीनगर, आलमबाग, लखनऊ निवासी सुशील अवस्थी का कहना है कि यूपी की टाइम इन्फार्मेशन सर्विसेज प्राइवेट लि. कंपनी अपना व्यवसाय बढ़ाने के लिए आम जनता को ठग रही है। इस कंपनी का पता है – बख़्शूपुर, जमनिया रोड, ग़ाज़ीपुर (यूपी)। इस कंपनी का CIN नंबर है- U74120UP2011PTC045400. यह कंपनी भारत सरकार की स्वावलम्बन पेंशन योजना का अपने व्यावसायिक लाभ के लिए बेज़ा इस्तेमाल कर रही है। सुशील अवस्थी बताते हैं कि वह तमाम उच्चाधिकारियों, कंपनी से संबंधित विभाग और सरकार से अपनी फरियाद सुनाने के साथ पुलिस में कंपनी की करतूतों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा चुके हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जानबूझकर मीडिया भी इसके कारनामों पर रहस्यमय ढंग से खामोशी साध बैठा है। 

नीचे प्रस्तुत हैं कंपनी की ठगी के कुछ प्रामाणिक दस्तावेज –

वह बताते हैं कि ‘स्वावलम्बन योजना’ के तहत पीऍफ़आरडीए (पेंशन फंड रेगुलेटरी अथॉरिटी) द्वारा आम आदमी को 60 वर्ष की उम्र के बाद आजीवन पेंशन देने की केंद्र सरकार की योजना है। इस योजना में प्रान कार्ड बनता है।  टाइम इन्फार्मेशन सर्विसेज प्राइवेट लि. कंपनी मल्टी लेबल मार्केटिंग पद्धति से यह कार्ड बना रही है, जबकि वह ऐसा करने के लिए भारत सरकार की विनियामक संस्था पीएफआरडीए से अधिकृत नहीं है। पहले तो यह कंपनी अपने प्रशिक्षित एजेंटों के जरिये आम नागरिकों को मोटी कमाई का झांसा देकर उनसे अपना कार्ड बनवाने के नाम पर सात-सात सौ रुपये वसूलती है। फिर ये कहकर कि ‘कार्ड बनकर आने में तीन महीने का समय लगता है’, जुड़े लोगों को कमीशन का लालच देकर दूसरे लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित करती है। तीन महीने बाद जब लोग कंपनी और उसके प्रशिक्षित एजेंटों से संपर्क साधते हैं तो पता चलता है कि एजेंट उस शहर से चम्पत होकर अन्यत्र किसी शहर या कसबे में भोले-भाले लोगों को ठगने के लिए भाग चुके हैं। इस तरह कंपनी अपना धंधा बदस्तूर और बेख़ौफ़ जारी रखे हुए है। 

उनका कहना है कि कंपनी की वेबसाइट www.timeinfo.in और उसके कस्टमर केयर नंबर 0548-2230033, मोबाइल नंबर – 8115563563 पर भुक्त भोगियों द्वारा संपर्क किये जाने पर कंपनी द्वारा एकदम नयी कहानी गढ़कर सुना दी जाती है कि कंपनी तो प्रान कार्ड बिलकुल ही नहीं बनाती है। वह तो सिर्फ बायो एनर्जी कार्ड बेचती है। जो भी लोग कंपनी से बायो एनर्जी कार्ड खरीदते हैं, कंपनी उनका प्रान कार्ड निःशुल्क बनाकर देती है ।

सुशील अवस्थी का शासन, प्रशासन और सरकार से पूछना है कि क्या इस तरह प्रान कार्ड बनवाने के इच्छुक लोगों को बायो एनर्जी कार्ड खरीदने के लिए बाध्य करना उचित है? क्या इस तरह भारत सरकार की किसी योजना को अपने व्यावसायिक हित के लिए अनुचित उपयोग कर कंपनी के इस आचरण को उचित साबित किया जा सकता है? नहीं, बिलकुल भी नहीं। पीऍफ़आरडीए द्वारा संचालित टोल फ्री नंबर – 1800110708 पर बात करने पर पता चलता है कि कंपनी का यह आचरण भी गैर क़ानूनी है। 

वह बड़े अफ़सोस के साथ बताते हैं कि वह भी कंपनी की ठगी का शिकार हो चुके हैं। करीब पांच-छह महीने पहले उनकी भी मुलाकात कंपनी के प्रशिक्षित ठग एजेंट (राज नारायण पासी, निवासी २४ क, भुआल चक, ग़ाज़ीपुर यूपी) से हुई थी। उन्होंने बगैर कुछ ज्यादा सोचे-विचारे उस ठग की मीठी-मीठी बातों पर भरोसा कर खुद तो फ़ंसे ही, अपने सैकड़ों इष्ट-मित्रों को भी कंपनी के इस ठगी के मकड़जाल में फँसा दिए। अभी तक न तो उनके किसी मित्र का प्रान कार्ड आया है, न ही गया हुआ धन मिला है। कंपनी के स्वयंभू एम.डी. रामा यादव से जब भी उसके मोबाइल नंबर 8858405055 पर उन्होंने संपर्क किया, भांति-भांति के बहाने, पूर्वांचल के अनेक बाहुबलियों का नाम लेकर धमकियों के सिवा कुछ भी नहीं प्राप्त हुआ है। 

सुशील अवस्थी के मुताबिक कंपनी द्वारा इस तरह ठगे गए लोगों की संख्या सैकड़ों में नहीं, बल्कि हज़ारों में है। उनकी जानकारी के अनुसार कंपनी का मकड़जाल एक-दो प्रदेशों नहीं बल्कि पूरे भारत में फैला हुआ है। कंपनी से ठगे जाने के बाद उनके पास दो विकल्प थे। पहला यह कि हज़ारों पीड़ितों की तरह वह भी कथित एमडी की धमकियों में आकर शांत हो जाएं या फिर दूसरा ये कि ठगों को कानूनी सजा दिलाने के लिए संघर्ष का रास्ता अख्तियार करें। उन्होंने शासन, प्रशासन और सरकार से महाठगी का धंधा कर रही कंपनी के आरोपियों को दबोच कर उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग है ताकि उसके कारनामों से अपरिचित-अनजान कोई और व्यक्ति उसके झांसे का शिकार होने से बच जाए। यदि कार्रवाई नहीं होती है तो माना जाएगा कि उस ठगी में जिम्मेदार अधिकारियों, सत्तासीन राजनेताओं और पुलिस की भी मिलीभगत है। 

सुशील अवस्थी संपर्क : 9454699011 

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मातृश्री पुरस्कार या दलालश्री एवार्ड! : साधना के मालिक गौरव गुप्ता और पंजाब केसरी के मालिक आदित्य नारायण चोपड़ा को किस काम के लिए पुरस्कार?

मातृश्री पुरस्कार या दलालश्री एवार्ड? यह सवाल अब उठेगा. साधना टीवी और पंजाब केसरी अखबार के मालिकों के बेटों को किस बात के लिए किस काम के लिए पुरस्कार देने की घोषणा की गई है? गौरव गुप्ता और आदित्य नारायण चोपड़ा ने आखिर पत्रकारिता क्षेत्र में क्या इतना बड़ा योगदान कर दिया है कि इन्हें भरी जवानी में पुरस्कृत किया जा रहा है? कहने का आशय ये कि जिन्हें अपने खानदान के मीडिया बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए आए हुए जुम्मा जुम्मा दो ही दिन हुए हों, उन्हें एवार्ड देने की जल्दी क्यों?  

आजकल पुरस्कारों की स्थिति बहुत बुरी हो गई है. हर कोई पुरस्कृत हो रहा है. वह चाहे बेइमान हो या इमानदार. पुरस्कार देने वाले लाइन लगाए हैं. ओबलाइज हो रहे हैं और ओबलाइज कर रहे हैं. मातृश्री पुरस्कारों को ही ले लीजिए. इस बार साधना टीवी चैनल के मालिक गौरव गुप्ता और पंजाब केसरी के मालिक आदित्य नारायण चोपड़ा को भी यह एवार्ड देने की घोषणा की गई है. इन युवा मालिकों ने अभी कुछ ही दिन हुए जब अपने अपने पिताओं के संस्थानों में कामकाज संभाला है. मालिकों के बेटे को हमेशा निदेशक ही कहा जाता है. यह पद वंशानुगत होता है. कभी कभी बेटा एमडी यानि मैनेजिंग डायरेक्टर भी हो जाया करता है और पिता सीएमडी यानि चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर कहलाया करता है. बाप बेटे पदों की कबड्डी ऐसे ही खेला करते हैं और अपना धंधा पानी चमकाते रहते हैं.

पहले बात गौरव गुप्ता की. इन सज्जन ने ऐसा क्या एक काम कर दिया है, जिसके कारण उन्हें मातृश्री एवार्ड दे दिया गया? यह पुरस्कार देने वाले नहीं बता रहे. लेकिन साधना टीवी से जुड़े रहे लोगों का कहना है कि गौरव गुप्ता ने अपने चैनल के माध्यम से पत्रकारिता को कलंकित करने का काम ही हमेशा किया है, सरोकारों से उनका दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं. बिजनेस-धंधा-मार्केटिंग ही इस शख्स का पेशा शगल क्षेत्र रहा है. जिस भी तरीके से हो, ज्यादा से ज्यादा पैसा बनाओ, यह इसका एजेंडा रहा है. इसी तरह मातृश्री पुरस्कार देने वालों से पूछा जाना चाहिए कि पंजाब केसरी के निदेशक आदित्य नारायण चोपड़ा ने ऐसा क्या कर दिया है कि उन्हें पुरस्कार दिया जा रहा है. सिर्फ इसलिए कि वे चोपड़ा खानदान में से किसी एक चोपड़ा के पुत्र हैं? गौरव गुप्ता हों या आदित्य नारायण चोपड़ा, इन युवा मीडिया मालिकों ने सिर्फ अपने अपने संस्थानों को ज्यादा से ज्यादा मानेटाइज करने के लिए अपना दमखम लगाया है, अच्छी पत्रकारिता के लिए कोई एनर्जी खर्च नहीं किया है. बल्कि संभव है कि कुछ अच्छे पत्रकारों को धंधे में उतारकर मीडिया का माकीनाकासाकीनाका करने में अच्छा-खासा योगदान दिलाया हो.

ऐसा लगता है कि ये पुरस्कार हर साल मीडिया के ढेर सारे अच्छे बुरे लोगों को ओबलाइज करने के लिए एक साथ थोक के भाव दे दिया जाता है… जब घटिया लोगों को एवार्ड दिया जाएगा तो सवाल उठना लाजिमी है. बात सिर्फ मातृश्री पुरस्कारों की ही नहीं है. साल भर में हजारों पुरस्कार मीडिया वालों के लिए अलग अलग संगठन संस्थाएं ट्रस्ट एनजीओ कंपनियां सरकारें घोषित करती हैं जिनका अपना अपना निजी एजेंडा होता है. इसी कड़ी में मातृश्री पुरस्कारों की भी अपनी एक मनमर्जी वाली निजी राजनीति है. हो सकता है मातृश्री पुरस्कार के लिए कई जेनुइन लोगों का भी सेलेक्शन किया गया है. लेकिन जैसे एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर सकती है उसी तरह पुरस्कार के लिए एक घटिया और सेटिंग वाला चयन सारे पुरस्कार लेने वालों पर सवालिया निशान लगाने के लिए काफी है.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया


मातृश्री एवार्ड से जुड़ी मूल खबर इस प्रकार है…

मातृश्री मीडिया अवार्ड समिति के संयोजक दिनेश शर्मा ने मातृश्री पुरस्कारों की घोषण कर दी. उन्होंने बताया कि साधना टीवी चैनल के निदेशक गौरव गुप्ता, पंजाब केसरी के निदेशक आदित्य नारायण चोपड़ा, यूनीवार्ता की पत्रकार प्रीति कनौजिया और पीटीआई के संजय आनंद को इस वर्ष का मातृश्री पुरस्कार प्रदान किया जाएगा. उन्होंने बताया कि कला और पत्रकारिता के क्षेत्र में इस वर्ष के मातृश्री पुरस्कारों की घोषणा कर दी गयी है जिनमें चर्चित फिल्म मैरीकाम’’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म माना गया है. समाज सेवा के क्षेत्र में पूर्व विधायक श्याम लाल गर्ग का चयन किया गया है. उन्होंने कहा कि 40 वें मातृश्री पुरस्कारों के लिए पत्रकारों और कलाकारों का चयन कर लिया गया है.

श्री शर्मा ने बताया कि पुरस्कार वितरण समारोह 26 अप्रैल को होगा और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ये पुरस्कार प्रदान करेंगे. इस पुरस्कार के तहत पत्रकारों तथा कलाकारों को भारत माता की आकृति वाली शील्ड और प्रशस्ति पत्र भेंट दिया जाता है. उन्होंने बताया कि समाचार समितियों में युनाईटेड न्यूज आफ इंडिया की पत्रकार रिंकू बहेड़ा और यूनीवार्ता की प्रीति कनौजिया तथा प्रेस ट्रस्ट आफ इंडिया के पत्रकार संजय आनंद और भाषा के अजय श्रीवास्तव का चयन किया गया है.

इसके अलावा नवभारत टाइम्स के शाहनवाज मलिक, पंजाब केसरी के आदित्य नारायण चोपड़ा, साधना टीवी चैनल से गौरव गुप्ता के नाम की घोषणा की गयी है. दैनिक हिन्दुस्तान के अनुराग मिश्र, अमर उजाला के पवन कुमार, राष्ट्रीय सहारा के अजय नैथानी, सांध्य टाइम्स के मेखला गुप्ता और सार इकोनोमिस्ट के डा. अरविंद कुमार को मातृश्री पुरस्कार देने का फैसला किया गया है. इसके अलावा पीटीआई के फोटोग्राफर शाहनवाज खान, आज तक टीवी चैनल के कपिल दुबे, टोटल टीवी चैनल के जितेंद्र चौहान, चैनल वन की प्रीत किरण, दूरदर्शन के महेंद्र दुबे, आकाशवाणी की ललिता चतुव्रेदी, न्यूज नेशन के सुमित चौधरी, इंडिया न्यूज के कैमरामेन प्रकाश तिवारी और आईबीएन के रवि सिंह को भी यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा.

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वांटेड चैनल मालिक अरूप चटर्जी को बचा रहे हैं झारखंड के भाजपाई मुख्यमंत्री रघुवर दास!

(झारखंड की मीडिया का नटवरलाल अरुप चटर्जी जो हर कानून और हर सरकार को ठेंगा दिखा रहा)

गैर जमानत योग्य वारंटी अरूप चटर्जी को पुलिस गिरफ्तार करे भी तो कैसे? अभी मिली जानकारी के अनुसार 15 अप्रैल को अरूप ने पार्टी दी थी जिसमें मुख्यमंत्री रघुबर दास 7:45 से 8:15 बजे तक मौजूद थे। 13 और 14 अप्रैल को अरूप की पटना यात्रा के दौरान उसकी मुलाक़ात अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान से हुई थी। अरूप और रांची के उसके एक व्यवसायिक मित्र की मुलाक़ात धर्मेन्द्र प्रधान से दिल्ली में 19 तारीख को तय है।

यदि किसी पत्रकार मित्र के पास अदालत में वांटेड अरूप की मुख्यमंत्री रघुवर दास और अमित शाह के साथ मुलाकात की फुटेज हो तो कृपया यहाँ अपलोड कर दें। अगर नहीं दे सकते तो उन्हें मसरत पर मर्सिया करने का कोई नैतिक हक़ नहीं। बाकी धर्मेन्द्र प्रधान से होने वाली मुलाकात का फोटो मैं जुगाड़ कर लूंगा। तो ये है सच झारखण्ड में न्याय का। कल ही मैं अदालत से अपील करूँगा कि वह मुख्यमंत्री को भी नोटिस करे कि एक वांछित वारंटी अरूप की पार्टी में उनकी शिरकत को क्यों नहीं न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने और मुझे न्याय से वंचित करने की कोशिश माना जाए।

कृपया बताएं, कानूनी स्थिति क्या है – पुलिस अगर किसी फरार अपराधी को पकड़ नहीं रही हो, और वह आराम से घूम रहा हो तो आम जन क्या कर सकता है?

क. पकड़ कर पुलिस के हवाले कर सकता है .
ख. उसे गोली भी मार सकता है
ग. क़ानूनी तौर पर कुछ नहीं कर सकते सिवा अदालत को सूचित करने के.
घ. उसे जिन्दा या मुर्दा पकड़वाने वाले को इनाम देने की घोषणा कर सकता है ।
च. सिर्फ उसका सामाजिक बहिष्कार कर सकता है और पुलिस पर थू थू कर सकता है।

झारखण्ड में अर्जुन मुंडा की सरकार थी तब भी झारखंड के रीजनल न्यूज चैनल ”न्यूज 11” के मालिक अरूप चटर्जी के खिलाफ कोर्ट के वारंट तेलहंडे में जाते रहे. हेमंत सोरेन थे तब भी अरूप आजाद रहे और रांची पुलिस उसे तेल मालिश करती रही. अब रघुवर दास जी, आपकी सरकार है. तब भी पुलिस को हिम्मत नहीं उसे गिरफ्तार कर के कोर्ट में पेश कर सके. मेरे चेक बाउंस के केस में जनवरी में ही उसकी जमानत रद्द कर दी गई, फिर उसकी कंपनी के खिलाफ भी वारंट हुआ लेकिन पुलिस उसे पकड़ नहीं पा रही है. रघुवर दास जी ये बताइये कि क्या अब मैं उसकी टांग में गोली मार कर रांची पुलिस को तश्तरी में पेश करूँ ताकि वह उसे अदालत में पेश कर सके? अगर आपकी पुलिस उसे नहीं पकड़ पा रही है तो आप बताइये कि मैं क्या करूँ और अदालत क्या करे.

लेखक गुंजन सिन्हा वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार हैं.


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‘न्यूज11’ चैनल के डायरेक्टर अरूप चटर्जी पर धोखाधड़ी का मुकदमा

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राज चाहे हेमंत सोरेन का हो या रघुवर दास का, ऐश अरूप चटर्जी की चल रही है…

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मजीठिया वेतनमान से बचने के लिए दैनिक जागरण प्रबंधन ने किया इतना बड़ा फ्रॉड

लो जी, दैनिक जागरण प्रबंधन प्रायोजित फर्जी यूनियन की पूरी जानकारी और वह भी पूरे प्रमाण और दस्‍तावेज के साथ। यूनियन का नाम है-”जागरण प्रकाशन लिमिटेड इम्‍प्‍लाइज यूनियन 2015”। 

अब नाम से ही पता चलता है कि यह यूनियन कालजयी नहीं, सालजयी है। यूनियन के नाम में 2015 जोड़ने का मतलब तो यही लगता है कि इसका काम 2015 में ही रहेगा। मणिसाना की तरह मजीठिया को भी सांठगांठ के हवाले कर छुट्टी पा लेनी है। यूनियन में जिन कर्मचारियों के नाम हैं, उन्‍हें किसी तरह धोखा देकर शपथ पत्र पर हस्‍ताक्षर करा लेने हैं या उन्‍हें बिना कुछ बताए फर्जी हस्‍ताक्षर बना देने हैं। प्रबंधन के सलाहकारों ने भी तो यही कहा होगा-दैनिक जागरण बहुत बड़ा समूह है। उससे कौन पूछने जा रहा है कि यह फर्जी काम है। हम तो बड़ा से बड़ा अपराध करके बच सकते हैं। हमारे साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो हैं। इस परामर्श में यदि कपिल सिब्‍बल भी शामिल हैं, तो समझिए वह दैनिक जागरण को फर्जीवाड़ा के दलदल में फंसाते जा रहे हैं।

मजे की बात तो यह है कि दैनिक जागरण जिस प्रकार अपने कर्मचारियों का खून चूस रहा है, उससे आम कर्मचारी को किसी प्रकार की सहानुभूति की उम्‍मीद तो है नहीं। फिर ये कैसी उदारता कि जागरण प्रबंधन ने खुद कर्मचारियों की ओर से यूनियन का सदस्‍यता शुल्‍क जमा करा दिया है। उसकी बाकायदा रसीद कटी है, लेकिन इसकी जानकारी यूनियन में शामिल किए गए कई पदाधिकारियों तक को नहीं है। यहां हम पदाधिकारियों के नाम का भी खुलासा कर देते हैं। आप खुद उनसे पूछ लीजिए। यूनियन के पेपर का पहला पेज भी यहां दिया जा रहा है। उससे आप अपना हस्‍ताक्षर भी मिला लें कि वह असली है या टोटल फर्जी।

यूनियन के कर्ता-धर्ताओं की ये सूची असली या नकली?

यूनियन का नाम-जागरण प्रकाशन लिमिटेड इम्‍प्‍लाइज यूनियन 2015, अध्‍यक्ष-इष्‍टदेव सांकृत्‍यायन, उपाध्‍यक्ष-नरवीर सिंह, उपाध्‍यक्ष-प्रदीप कुमार सिंह, महामंत्री-रतन भूषण प्रसाद सिंह, संयुक्‍त मंत्री-चक्रपाणि पाठक, संयुक्‍त मंत्री-अरुण कुमार बरनवाल, संगठन मंत्री-दिलीप कुमार दिवेदी, कार्यालय मंत्री-राजेश कुमार झा, प्रचार मंत्री-वृजकिशोर यादव, कोषाध्‍यक्ष-कृष्‍ण कुमार पाठक । कार्यकारिणी सदस्‍य – रवींद्र पाल सिंह, हरीश सिंह, कृष्‍ण मोहन त्रिवेदी, हरपाल सिंह, ललित मोहन बिष्‍ट। 

यह तो रही दैनिक जागरण प्रबंधन प्रायोजित यूनियन की कार्यकारिणी। आगे सदस्‍यों के नामों का भी खुलासा किया जाएगा, ताकि आप समझ सकें कि आपके साथ मजीठिया मामले में किस तरह फ्रॉड किया जा रहा है और माननीय सुप्रीम कोर्ट को भी झांसा देने की तैयारी कितने जोर शोर से की जा रही है।

FourthPillar एफबी वॉल से 

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पीएसीएल के निवेशक परेशान, भंगू ने सम्मन फेंका कूड़ेदान में, एजेंसियां लाचार

पीएसीएल के हजारों करोड़ रुपये के फ्राड के पीड़ित धीरे धीरे सामने आ रहे हैं लेकिन पूरे तंत्र को भंगू ने इस तरह साध लिया है कि कहीं पीड़ितों की आवाज तक नहीं उठ रही है. सहारा उगाही मामले में सेबी और सुप्रीम कोर्ट ने भले तल्ख रुख दिखाकर सुब्रत राय को अंदर कर दिया लेकिन भंगू मामले में सारी मशीनरी असहाय दिख रही है. भारतीय सेना के रिटायर अधिकारी केएल शर्मा ने अपनी बिटिया की शादी के मकसद से पीएसीएल में अपनी सेविंग को इनवेस्ट कर दिया था. यह बात 2007 की है. बीते साल यह निवेश मेच्योर हो गया. उन्होंने कुल पौन तीन लाख रुपये लगाए थे. कंपनी ने मेच्योरिटी पर जो देने का वादा किया था, उसे तो छोड़िए, सेना के इस रिटायर अधिकारी को अपना मूल धन वापस नहीं मिल रहा. इस अधिकारी ने धन डबल होने के लालच में पैसा लगा दिया था.

राजस्थान के रहने वाले केएल शर्मा कहते हैं कि उन्होंने अपने गांव के एक एजेंट के लोकलुभाव वादों में आकर पीएसीएल में निवेश कर दिया था पर अब मैं स्तब्ध हूं. कहीं से पैसे मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही है. ज्ञात हो कि पीएसीएल पर किसी भी तरह का पैसा उगाहने पर रोक है लेकिन इसके एजेंट अब भी बैकडोर से भोले भाले लोगों से पैसे जमा करा रहे हैं. सहारा की तरह पीएसीएल में भी जिन लोगों ने पैसे लगाए हैं और वापसी की मांग कर रहे हैं, उन्हें पैसे वापस मिलने में कई साल लग जाएंगे और कई किस्म की कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ेगा. 

बात सिर्फ पीएसीएल की ही नहीं है. ऐसी दर्जनों कंपनियों का मामला सेबी और अन्य एजेंसियों के पास पड़ा है लेकिन इनके खिलाफ सहारा जैसी सख्त कार्रवाई नहीं हो पा रही है. इन चिटफंड कंपनियों के आका पूरे सिस्टम को साधने में सफल हो जाते हैं और इस तरह लाख कोशिश के बावजूद सेबी की लाचारी नजर आने लगती है. पीएसीएल का प्रकरण सबसे ज्यादा ज्वलंत और सामयिक है लेकिन यह पूरा मामला मीडिया से इस कदर गायब हुआ पड़ा है कि लोगों कई बार मीडिया की तरफ शक की नजर से देखते हैं. साथ ही अन्य एजेंसीज के कर्ताधर्ता भी शक के दायरे में आते हैं. आखिर क्या वजह है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद पीएसीएल के कर्ताधर्ता अब तक सींखचों के बाहर हैं. उधर, हजारों करोड़ डूबने की आशंका से निवेशक परेशान हैं और मारे-मारे घूम रहे हैं.

मिलेनियम पोस्ट नामक वेबसाइट पर पीएसीएल और इसके मालिक भंगू के बारे में छपी खबर यह बताने के लिए पर्याप्त है कि किस तरह बड़े लुटेरों पर सत्ता-सिस्टम मेहरबान हो जाता है और इनका कुछ भी नहीं बिगड़ता. झेलता सिर्फ गरीब आदमी है. सीरियस फ्राड इनवेस्टीगेशन आफिस यानि एसएफआईओ की तरफ से दर्जनों नोटिस और सम्मन पीएसीएल के मालिक भंगू को भेजे गए लेकिन भंगू ने सबको डस्टबिन में फेंक दिया. पूरी स्टोरी यूं है….

PACL founder Bhangoo not responding to SFIO summons

New Delhi : Pearl Agrotech Corporation Limited’s (PACL) founder Nirmal Bhangoo is not responding to ‘couple of summons’ sent by Serious Fraud Investigation Office (SFIO), an organisation that probes financial frauds. It was found that the company continues to be involved in collecting money ‘illegally’ despite an ongoing CBI inquiry, which is monitored by the Supreme Court.

SFIO has sent letters to Bhangoo’s office in Delhi and Chandigarh on January 28 and February 2 and asked him to respond to it at the earliest. The probe agency, which falls under the Ministry of Corporate Affairs (MCA) asked Bhangoo to explain over his ‘agents’ continued involvement in collecting money mainly from the rural areas.

“He has failed to provide any explanation to us. We have sent reminders but (got) no reply,” sources said.

It was learnt that SFIO wanted to have the exact figures of PACL’s collection and funds mobilised during the period of April 1, 2012 to February 25, 2013. Also, he was asked to provide details of funds collected during April 2013 to August 2013 and in December 2013 to February 2014.

“This is the period, which are crucial in terms of his collection as we are anticipating that the figures could be more. So, far as per our total amount mobilised by the company, by its own admission comes to a whopping Rs 49,100 crore. But we suspect that this could be more and therefore, we have asked for his explanation,” sources said.

Earlier, on November 14, 2014, the SEBI has written an ‘alert letter’ to the MCA and requested it to take action against Company’s agents involved in such activities. Probe revealed that they are mainly targeting people living in the rural areas of South India and some parts of Uttar Pradesh, Bihar and Jharkhand.

Meanwhile, CBI and Serious Fraud Investigation Office (SFIO) made contact with its Australian counterparts to get ‘every single’ piece of information about his other investments.

CBI Chief Anil Sinha had recently claimed that they have formed four separate teams to go deep in to the case. It was learnt that one of the teams, was asked to look in to foreign affairs of Bhangoo and already they are in touch with the Australian authorities in getting details of Bhangoo’s dubious investment in real estate, hotels, sports and remittance business. Also, Indian sleuths are also in touch with the Australasian Consumer Fraud Taskforce (ACFT) to strengthen their case against Bhangoo.

There are reports that Bhangoo has made some investments in Dubai too and that the probe agency will take on with its Dubai counterparts soon. “If required we will also take help from the Interpol to unearth how he came in contact with the notorious fugitive Christopher Skase, who died in 2001.

Bhangoo’s Pearls Australasia Company paid $62 million cash for the luxurious Sheraton Mirage Resort and Spa to Skase, and spent another $20 million on its renovations. There must be some middleman who broke the deal and we need those information,” sources said. (मिलेनियम पोस्ट में प्रकाशित सुजीत नाथ की रिपोर्ट.)

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मजीठिया वेज बोर्ड संघर्ष : शोभना भरतिया और शशि शेखर को शर्म मगर नहीं आती… देखिए इनका कुकर्म…

हिंदुस्तान अखबार और हिंदुस्तान टाइम्स अखबार की मालकिन हैं शोभना भरतिया. सांसद भी हैं. बिड़ला खानदान की हैं. पैसे के प्रति इनकी भूख ऐसी है कि नियम-कानून तोड़कर और सुप्रीम कोर्ट को धता बताकर कमाने पर उतारू हैं. उनके इस काम में सहयोगी बने हैं स्वनामधन्य संपादक शशि शेखर. उनकी चुप्पी देखने लायक हैं. लंबी लंबी नैतिक बातें लिखने वाले शशि शेखर अपने घर में लगी आग पर चुप्पी क्यों साधे हैं और आंख क्यों बंद किए हुए हैं, उनसे पूछा जाना चाहिए. आखिर वो कौन सी मजबूरी है जिसके कारण वह अपने संस्थान के मीडियाकर्मियों का रातोंरात पद व कंपनी जबरन बदले जाने पर शांत बने हुए हैं.

शोभना भरतिया अपने इंप्लाइज की पद व कंपनी इसलिए बदल रही हैं ताकि मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उन्हें सेलरी न देनी पड़े. पर कुछ हिंदुस्तानियों ने तय किया है कि वे इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएंगे. इन लोगों ने इस दिशा में पहला कदम भड़ास को सारे डाक्यूमेंट्स भेजकर उठाया है. जो दस्तावेज यहां दिए गए हैं, उसे आप ध्यान से देखिए और पढ़िए. दूसरों की आवाज उठाने वाले पत्रकारों के साथ रातोंरात कितना बड़ा छल हो जाता है लेकिन वे चुप्पी साधे रहने को मजबूर रहते हैं.

इन दस्तावेजों से पता चलता है कि हिन्दुस्तान अखबार ने अपने एडिटोरियल के लोगों के पदनाम और कंपनी के नाम बदल दिए हैं. सूत्रों के मुताबिक ये संपादकीयकर्मी 28 अप्रैल 2015 को समस्त गलत व झूठे दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में दे देंगे. बताते चलें कि शोभना भरतिया और शशि शेखर दस्तावेजों में हेरफेर करके फर्जी तरीके से सैकड़ों करोड़ रुपये का सरकारी विज्ञापन छापने और इसका पेमेंट लेने के मामले के आरोपी भी हैं जिसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.  

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‘अभय सिन्हा जैसे घटिया और भ्रष्‍ट लोगों से आनंद कुमार को बचना चाहिए’

Abhishek Srivastava : कल रात मोबाइल पर एक संदेश आया, ”कृपया स्‍वराज संवाद में योगदान के लिए निमंत्रण स्‍वीकारें, 14 अप्रैल, 10-6 बजे, इफको चौक मेट्रो स्‍टेशन के अतिनिकट। आप को आगे बढ़ाएं। न छोड़ेंगे, न तोड़ेंगे। सुधरेंगे, सुधारेंगे। धन्‍यवाद। आनंद कुमार, अभय सिन्‍हा।” Prof Anand Kumar के साथ अभय सिन्‍हा का नाम देखकर थोड़ा अचरज हुआ। अभय सिन्‍हा से मेरा और Rajesh Chandra का 2003 में पाला पड़ चुका है। ये तीन सिन्‍हा बंधु हैं।

सबसे छोटा वाला गैर-कानूनी तरीके से एडमिशन करवाने का धंधा करता था और जेल जा चुका है। बाकी दो- अजय और अभय सिन्‍हा, जयप्रकाश नारायण के नाम पर एक रैकेट चलाते थे और पत्रिका निकालते थे। इसी नाम पर इन्‍होंने समाजवादियों को बरसों से भरमाए रखा है। हम लोग 2003 में भीषण बेरोज़गारी के दौर में इनकी पत्रिका ”संपूर्ण खोज” के चक्‍कर में पड़ गए थे। इन्‍होंने हमारे पैसे मार लिए। अंत में पता चला कि पत्रिका नियमित नहीं थी बल्कि जेपी की जयंती के आसपास अक्‍टूबर में ये लोग हर साल विज्ञापन निकाल कर कुछ पत्रकारों को काम पर रखते थे और पत्रिका का अंक व जेपी के नाम पर स्‍मारिका निकालते थे।

अभय सिन्‍हा पिछले साल भर तक आम आदमी का प्रवक्‍ता बनकर इंडिया न्‍यूज़ के पैनल में बैठने का सुख ले चुके हैं। वे फरवरी में पुस्‍तक मेले में बरसों बाद अचानक मुझसे टकराए थे। उस वक्‍त वे Punya Prasun Bajpai से उनका मोबाइल नंबर मांग रहे थे कि मैंने मौज लेने के लिए आवाज़ लगायी। वे मुझे देखकर सकपका गए और भागे-भागे आकर मेरा नंबर मांगने लगे। Arvind Shesh इस घटना के गवाह हैं। ऐसे घटिया और भ्रष्‍ट लोगों से आनंद कुमार को बचना चाहिए। Swaraj Samwad में अभय सिन्‍हा जैसे लोगों की संलग्‍नता समाजवादियों की विश्‍वसनीयता को और घटाने का काम करेगी, जिन्‍हें स्‍वराज का आधा स तक नहीं पता है।

पत्रकार अभिषेक श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से.

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डा. जेके जैन और इनके सुपुत्र के फर्जीवाड़े को सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं

Yashwant Singh : डा. जेके जैन का नाम हो सकता है बहुतों ने न सुना हो. जैन टीवी के मालिक हैं. भाजपा के नेता रहे हैं. कहने को डाक्टर हैं लेकिन डाक्टरी को छोड़कर बाकी सारे धंधे करते हैं. जैन टीवी के जरिए उगाही बिजनेस करने के अलावा ये दूसरे जो धंधे करते हैं उसमें एक धंधा हेल्थ सेक्टर का भी है. इनकी एक कंपनी कैसे फर्जी डाक्टरों को नियुक्त कर जनता के तन और सरकारी धन के साथ खिलवाड़ करती है, इसकी एक बानगी आप लोगों के सामने पेश है. इस लिंक http://goo.gl/POlIyW पर क्लिक करें. एक आडियो टेप मिलेगा, जिसे आप सुनिएगा. इसे आप डेस्कटाप या लैपटाप पर सुन सकते हैं. जिन जिन मोबाइल में फ्लैश फाइल होगा, वे भी सुन सकते हैं.

 

डा. जेके जैन और इनके सुपुत्र के फर्जीवाड़े को सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं. बिहार के सहरसा जिले के अखबार वालों व पत्रकारों के लिए खासतौर पर ध्यान देने लायक यह खबर है. कई बार लगता है कि ऐसे लोगों को सीधे फांसी दे देना चाहिए. इस डा. जैन ने पत्रकारों को खूब लूटा है. जाने माने पत्रकार स्व. आलोक तोमर जब जिंदा थे तो उन्होंने अपने हिस्से की सेलरी के लिए इस जैन को सरेआम पीटा था. एक बार Supriya भाभी ने भी डा. जैन को दौड़ाया था. इस लतिहड़ डाक्टर और भाजपाई के काले कारनामें एक के बाद एक सामने आते जा रहे हैं पर सारी एजेंसियां सोई पड़ी हैं. इस रावण की लंका का दहन कब होगा, किसी को नहीं पता. फिलहाल आप इस लिंक पर क्लिक करें… http://goo.gl/POlIyW

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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सहारा वालों ने बिहार के सीएम के गांव की बूढ़ी लाचार महिला का सवा तीन लाख रुपये हड़पा

Regarding SAHARA maturity not paid to investor

Yashwant Sir,

Editor, www.Bhadas4Media.com

My mother Saroj Singh 70 years old is illeterate. Her SAHARA a/c control no- 20719201775, date 15-12-2003 maturity amount Rs 320000/-. Without her permission by keeping her in dark maturity amoung fixed in other scheme Receipt no-034005534023-43, Date 19-09-2014, Amount Rs 320000/-. This is the case of Bihar CM village Harnauth branch code (2071). branch Manager Mr Vijay Singh-09939205612, 09471004666.

Regarding this when I contact Mr Rajesh Singh Media Head TV, Noida on his Mobile no 09811170008 on 05-04-2015 at 9 am with my wife and friend he says “SAHARA main humse puch kar paisa jama karaye the, Main kuch nahi kar sakta. Main para banking main nahi hoon. paise lene ke liye sidhe tareke se baat karoo” After that his mobile switch off.

Yashwant g please help so that I may get back hard earned money without interest.

Regard,
Saroj Singh
Mother of Dinkar Prasad Singh
09891136359
dinkarprasadsingh@gmail.com

दिनकर प्रसाद सिंह द्वारा भड़ास को भेजे गए पत्र पर आधारित.

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जैन टीवी वाले डाक्टर जेके जैन और उनके सुपुत्र अंकुर जैन का नया फर्जीवाड़ा… (सुनें ये आडियो टेप)

Dear Sir, I am sending a conversation between a company Vice president HR and Project GM. Company working for Indian Goverment health projects like NRHM and etc. They recruit fake doctors without any verification and they recruiting 50 above doctors from 2009 to till date.

Company also involve in NRHM scam and its ex CEO Mr Atul prakash Nigam is in Dashna Jail for NRHM scam. Without verifying of documents they can not recruit doctors because its matter of Public health and life. You can check Voice clips as a proof.

Company Name – Dr Jain Video On wheels Ltd a sister concern of Jain Studios Ltd.
Address – Scindia villa , near Hotel hayat,Ring Road sarojini Nagar -110023
Current CEO- Dr Alok Lodh
Director – Shalini Dhandha
Owner-Dr JK Jain and his Son Mr Ankur Jain

आडियो टेप यूं है…

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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पत्रकार की खाल में दलाल… (सुनें आडियो टेप)

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आलोक तोमर के कर्जदार डा. जेके जैन को सुप्रिया ने चेताया

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मीडिया घरानों को ब्लैकमेल करने वाली जोड़ी

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सेठजी, मीडिया ना बन जाइए

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सुभाष चंद्रा ग्रुप के हिमगिरी जी विश्वविद्यालय का फ्रॉड, छात्र-छात्राएं हो रहे परेशान

Respected Sir, Myself xxx from Dehradun, i got your mail ID from Internet as you are so famous among everyone. The reason for this mail is I need your support and help, as may be you heard about our problem though the means of Media… FOCUS NEWS. 

I am the student of HIMGIRI ZEE UNIVERSITY, Dehradun its part of Subhash Chandra Group and Pursuing my LLB degree of 3 years. I got enrolled in 2013 for LLB (3 Year course) on the fake statements by the management of HIMGIRI ZEE UNIVERSITY that only few seats were left, then i took my admission on the same day, but as soon as i started going to the college i got to know that there were only 3 students in the LLB, after that classes were started and there were only one Teacher to reach us all the subjects in 1st Sem.

But Few days back i got to know from some reliable sources that our college is going to close the Law Department in between the Session(in 2015), so after knowing this we went to our Head of Department (Ms. Shilpa Shukla), regarding this issue but she simply said that she was not aware about all this and then we went to the higher management that is our Registrar (Mrs Geeta Rai) she simply said yes we are going to transfer all the Law students to any other college in June 2015, as the College Management don’t want to renew there Bar Council Registration. When we student asked the reason she said “niklo yaha se mujhe kaam hai.” When we sourced to our VC (Mr. Abhishek Asthana) he simplified said no to meet.

After this kind of rude and informal behavior we contacted Media (Amar Ujala, Thalka News, Times of India and Focus News), Infact Focus Team Contacted us from Delhi and a complete team of Focus News Came from Delhi to Help us even they really helped us but after we approached to media against the college, the college registrar logged a fake Complain to Police Station against the Law Students for our mental harassment and after that the college management suspended all the students. As we also sourced to SSP Dehradun, CO Dehradun, BCI State as well as CM of Uttrakhand but still nothing is happened.

I really heard about your team i hope your team can also support us in this. Rest i am attaching all the required documents related to this Case. Kindly go through it and do let me know if any other document is required. We are total 7 students, 4 students are from LLB 3 yrs and 3 students are from BBA LLB  5 yrs.

You Can Check all the Videos on Youtude/ Focus News/ Himgiri zee university. If you can send me your watsapp number then i can send me more pics and documents, You can also visit our college website – himgirizeeuniversity.com

Thanking you,

Regards…

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एक छात्रा द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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‘लाइव इंडिया’ न्यूज चैनल : सेलिब्रिटी कॉन्ट्रेक्ट के नाम पर चैनल के अंदर-बाहर के लोगों ने बनाया पैसा!

पूरी कहानी को समझने के लिए सबसे पहले इस यूट्यूब लिंक ( https://www.youtube.com/watch?v=KZPOILhTRf4 ) पर क्लिक करके वीडियो देखें जो महाराष्ट्र टीवी पर प्रसारित खबर है. इसमें रोशनी चोपडा, जो एकंर हैं, इस समय लाइव इंडिया के साथ वर्ल्ड कप के लिए जुडी हैं, की चीटिंग की कहानी है. आरोप है कि प्रोडक्शन हाउस को धोखा इस वजह से किया गया क्योंकि इस कांट्रेक्ट के जरिए लाइव इंडिया चैनल से जुड़े टॉप लोगों ने पैसे बनाए.

इंजमाम उल हक और दिलीप वेंगसरकर के कॉन्ट्रेक्ट में भी घपले की बात चर्चा में है. चैनल के मालिकों का पैसा चैनल में ही काम रहे लोगों ने कई बहानों से अपनी जेब में डाल लिया. पहले भी इस चैनल के संपादक और उनके खास लोगों पर कुछ कार्यक्रमों में मंत्रियों को बुनाले के लिए लाखों रुपए बनाने के आरोप लग चुके हैं. चिटफंडिया चैनल के मालिकों को इस मामले की जानकारी पूरे सबूत के साथ पहुंचाई जा चुकी है लेकिन उनकी मजबूरी ये है कि वे दूध देने वाली गाय की लात को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. आखिर चिटफंडियों के घपले घोटाले के मामलों को सलटाने वाले संपादक रिपोर्टर तो चाहिए ही. ऐसे में अगर ये संपादक रिपोर्टर कुछ काला पीला कर लें तो मालिक कैसे बोल सकता है कि क्योंकि वह तो आकंठ काले पीले के धंधे से ही जनमा पनपा है. 

अब आइए रोशनी चोपड़ा की कहानी पर. उपरोक्त जो यूट्यूब लिंक है, वह महाराष्ट्र टीवी पर प्रसारित खबर से संबंधित है, जिसका प्रसारण महाराष्ट्र टीवी पर तीन मार्च को किया गया. इसका प्रसारण महाराष्ट्र टीवी के संपादक सैय्यद सलमान अहमद ने कराया. इस मामले में कुछ खास अपडेट / जानकारियां इस प्रकार हैं…

Promises & commitments are made to be broken, this has been proved once again, this time by a celebrity. Comedy Cicus fame anchor Roshni Chopra & her manager Neeti Simoes cheated a Production house based in New Delhi. Kridha Productions claims Roshni Chopra & Neeti Simoes misguided them just for the sake of ‘saving agency fee’ & this has been said by Neeti celearly on whats app chat. So called production company was the one who managed Roshni’s anchoring schedule for Live India (National News Channel) for on going cricket world cup series. For that agency was in touch with Roshni & Neeti from day one through phone calls & whats app. Kridha Productions made several phone calls to Roshni’s manager & sent an e-mail from kridhaproductions@outlook.com having all the details for Roshni’s Anchor Schedule in the News Channel. E-mail sent on 24/01/2015 also contains the Signing amount of Roshni i.e. 13 Lakh 50 thousand. Production house also mentioned their fee in that particular mail. Roshni’s manager Neeti cheated Kridha production in smart & professinal way. Initialy she said they will pay agency fee once the contract will signed up, when the contract got signed she said, they will pay agency fee when they will got the money, “we will pay you one time fee as we are ethical enough not to overstep ur involvement here” said Neeti. But when everything done & when they had no excuse Neeti Clearly said “Yes we are saving agency fee” on whats app chat. Finaly she also said…. you havn’t done anything for us. Production company tried to informed all this to Roshni but in vain she didn’t replied on phone. Kridha productions posting each & every chat along with the mail which was sent to Roshni’s manager, so that people should aware of truth.

E-mail sent to Neeti Simoes (Roshni’s Manager) on 24th Jan :-

Greetings From Kridha Productions !!!!

Dear All,

As per our discussion with you, I am sending you the details of Roshni Chopra’s Anchoring Proposal for News Channel, Live India, Delhi

1. Roshni Chopra Must be available in Delhi From 13th Feb 2015 to 29th March 2015.

2. Roshni Chopra will Anchor sports based special show for 30 days during this period.  (Two shows daily).

3. Exact dates of those 30 days, will be given to you,  well in advance.

4. Live India will arrange costume designer & hair stylist for Roshni chopra… Initially, for 2-3 shows, you have to manage yourself.

5. Live India also arrange two way Air tickets for Roshni Chopra & her manager.

7. Roshni Chopra’s fee will be  Rs 13.5 Lakhs + Service tax.

8. 10-20 % of Roshni’s fee will be given as an advance.

9.Live India will send you CONTRACT PAPERS very soon.

10. Agency charges will be 10% of Roshni’s Fee, as discussed earlier.

You are free to call me anytime !!!

Thanks & regards

Kapil

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Whats app chat between Kridha Productions & Neeti Simoes (Roshni’s Manager) with actual date & time:-

11:38PM, Jan 22 – Kapil Gambhir: Hi Neeti… Roshni jus gave ur no. To me…. I need Roshni as an anchor in news channel, delhi for 30 days. For cricket world cup. Is she available ???
11:38PM, Jan 22 – Kapil Gambhir: IMG-20150122-WA0032.jpg (file attached)
Regard – kapil gambhir
12:08AM, Jan 23 – Neeti Simoes: Let’s talk in the morning
12:08AM, Jan 23 – Kapil Gambhir: Sure
10:58AM, Jan 23 – Neeti Simoes: Hi called u. Plscall back wen free
11:06AM, Jan 23 – Kapil Gambhir: Hi
11:07AM, Jan 23 – Kapil Gambhir: Cl u back…. After sometime
11:07AM, Jan 23 – Kapil Gambhir: Plz wait
1:23PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Hi neeti
1:24PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Is der any update ???
1:24PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: If yes then, plzzz let me know.
1:24PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Coz they want to hear from me soon
2:50PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Hi
2:50PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: I’ll send u a mail
2:50PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Wts ur e mail I’d???
2:52PM, Jan 24 – Neeti Simoes: Neetisimoes@gmail.com
2:52PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: K
2:52PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Thanks
3:29PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Mail sent
3:29PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Plz check
5:37PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Hi
5:37PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Neeti
5:37PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Plz reply soon
5:37PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: I got the contract papers from live india
6:13PM, Jan 24 – Neeti Simoes: I will need time till tom
6:14PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Wt hpnd Neeti ?
6:14PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: I HV done the deal on your assurance
6:14PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Dats y they gave me the contract papers
6:15PM, Jan 24 – Neeti Simoes: What assurance? I told u I need to speak to roshni n get back. I did not give u any assurance
7:01PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: K….
7:01PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: No issues
7:02PM, Jan 24 – Kapil Gambhir: Tk ur time
12:41PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Hi
12:41PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Neeti
12:41PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Wts up??
12:41PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Anurag g SE BAAT ho gyi aapki ???
12:39PM, Jan 25 – Neeti Simoes: Hi..roshni is reaching mumbai in some time.. I’ll discuss with her n get back to u by tonight
12:45PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: K
12:45PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Plz… Let me know asap
12:46PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: They are calling me
1:13PM, Jan 25 – Neeti Simoes: Pls tell them I will let all of u know tonight
1:13PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Oks
8:10PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Hi Neeti
8:10PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Any update ???
11:27PM, Jan 25 – Kapil Gambhir: Hi Neeti….. Still waiting for ur reply !!!!
12:22AM, Jan 26 – Neeti Simoes: Hi.. Will sign the contract tomorrow
12:22AM, Jan 26 – Neeti Simoes: Need to discuss a few a more details
12:22AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Oks
12:22AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: I’ll cl after 12
12:23AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: I’ll cl u after 12
12:24AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Shud I cl u knw ??
12:24AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Nw
12:31AM, Jan 26 – Kapil Gambhir: K… Catch u tomorrow
7:23PM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Hi Neeti…
7:23PM, Jan 26 – Kapil Gambhir: Plz update me…
7:28PM, Jan 27 – Neeti Simoes: Hi.. M still waiting for anuraag to send me the final contract.
7:28PM, Jan 27 – Neeti Simoes: We will pay u a one time fee as we are ethical enough not to overstep ur involvement here.
7:34PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: K
7:34PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: Thanks for ur conern
7:37PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: Koi b development ho toh plz let me knw…
7:37PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: ????????
7:43PM, Jan 27 – Neeti Simoes: Yep will do
7:44PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: ??????
7:44PM, Jan 27 – Kapil Gambhir: ??
9:12PM, Feb 5 – Kapil Gambhir: Kapil gambhir
9:12PM, Feb 5 – Kapil Gambhir: Kridha productions
9:12PM, Feb 5 – Kapil Gambhir: 09582332552
9:13PM, Feb 5 – Neeti Simoes: ??
4:02PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Hi neeti
4:02PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Wts up!!
4:03PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Roshni’s promo in live India is already aired !!!
4:04PM, Feb 10 – Neeti Simoes: Yes it must have
4:04PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Didn’t hear anything from ur side !!!
4:05PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Show is also gonna be aired by tomorrow
4:06PM, Feb 10 – Neeti Simoes: Yep cos she has not signed yet
4:06PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Wt?
4:07PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Not yet ?
4:07PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Ok…
4:07PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Then KB tk sign hoga ??
4:12PM, Feb 10 – Neeti Simoes: Tom
4:13PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Oks
4:14PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Plz let me kn w
4:14PM, Feb 10 – Kapil Gambhir: Knw
6:11PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Hi Neeti…
6:11PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Show is already aired
6:11PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: !!!
6:12PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Wt are u waiting for ???
6:31PM, Feb 11 – Neeti Simoes: Excuse me?
6:31PM, Feb 11 – Neeti Simoes: What do u mean by msging me what r u waiting fo
6:31PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: I mean… Its been a long time
6:37PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: She has signed the contract yet or not ?
6:37PM, Feb 11 – Neeti Simoes: U can’t send me such msgs like we owe u something. We got a call directly. Still out of basic ethics I told u we will pay u a token. U don’t need to keep calling n msging me like this. We will pay u wen we receive the money. Take care.
6:38PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: When will u pay me… I just wanted to know this ??
6:41PM, Feb 11 – Neeti Simoes: M not answerable to u. U will get ur payment wen we do. Thx
6:42PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Neeti, it was me… Who told u everything in the beginning… The channel, the contract money… N all… I even mail u when everything got final….
6:46PM, Feb 11 – Neeti Simoes: No. We got 3 inquiries. N u were one of them. N finally the contract, monies everything was done directly with anuraag.
6:47PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: So, wts ur call ??
6:48PM, Feb 11 – Neeti Simoes: I think I told u clearly. We will pay u for ur involvement. I cannot keep repeating myself.
6:49PM, Feb 11 – Kapil Gambhir: Oks
3:06PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: When will u pay agency’s fee ?
3:07PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: I made a call…
3:07PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: But u didn’t reply !!!
3:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: I knw… Initial amount from live India ???
3:09PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: I knw roshni got initial amount from live India !!!
3:19PM, Feb 19 – Neeti Simoes: So?
3:19PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Firstly I wud like to know on what basis r u asking us for the money. What was ur contribution in the entire process
3:20PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: U know everything
3:20PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: U committed to
3:20PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: We will pay u a one time fee as we are ethical enough not to overstep ur involvement here.
3:21PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: It WS ur msg
3:21PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: ????????
3:37PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Yep but u were just one of the many people who approached us for this. Neither did u help in agreements or anything. The reason why we even considered cos anuraag was awkward about u calling him too.
3:38PM, Feb 19 – Neeti Simoes: So I don’t think we owe u anything.
3:38PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Thanks.
3:54PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Which means u r trying to save AGENCY fee
4:02PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Yes ?? if that’s what u want to believe. What fees? What did u do for us? Kindly awaken me
4:07PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Few days earlier u said… U r waiting for contract…. Then u said u r waiting for money…
4:07PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: N nw this….
4:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: These are ur ethics ???
4:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: We will pay u a one time fee as we are ethical enough not to overstep ur involvement here.
4:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Apka msg apko jagane k liye
4:08PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: ??????????
4:09PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: This is small world… Jus remember this things
4:10PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Yep. Thanks for the advice.
4:10PM, Feb 19 – Neeti Simoes: U still have not answered my question. What did u do for us that ur asking for fee?
4:11PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Shud I send u that msg again ???
4:11PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Neeti, it was me… Who told u everything in the beginning… The channel, the contract money… N all… I even mail u when everything got final….
4:12PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Y did u say…
4:12PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: We will pay u after the contract
4:13PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: I can again send ur msgs to u
4:13PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Please answer.
Have u got us the show?
NO

Did u finalize our money?
NO

Did u do our contract work?
NO

Did u give dates?
NO

Did u do ANYTHING?
NO
4:14PM, Feb 19 – Neeti Simoes: Thanks. Take care.
4:16PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: U misguided me…
4:16PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Each every
4:17PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Yeah I do everything
4:17PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: Check mail
4:18PM, Feb 19 – Kapil Gambhir: From Kridhaproductions@outlook.com

NO REPLY FROM NEETI AFTER THIS

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उधर, लाइव इंडिया में मनमानी से जुड़ी एक और खबर सामने आई है. गुजरात में एक रिपोर्टर है जो गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में खद को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सबसे करीबी बताता फिरता है और लाइव इंडिया की नौकरी बजाते हुए दूरदर्शन से भी वेतन पा रहा है. दिनभर दूरदर्शन में बैठता है. दूरदर्शन की ही फीड को लाइव इंडिया में भिजवाने का काम करता है. वैसे भी लाइव इंडिया पर गौर करें तो कई दूसरे लोग जिसमें एकंर से लेकर मैग्जीन-पेपर के संपादक तक हैं, दो से तीन जगह काम करते हैं. ऐसे में दूरदर्शन तो घर की बात है इन लोगों के लिए.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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पीएसीएल ने भारतीय तंत्र को दिखाया ठेंगा, पाबंदी के बावजूद जमकर उगाही जारी

चिटफंड कंपनी पीएसीएल को हजारों करोड़ रुपये का फ्रॉड करने के कारण भले ही सरकारी सिस्टम चौतरफा शिकंजे में लिए हो लेकिन इस कंपनी की सेहत पर कोई असर पड़ता दिख नहीं रहा है. कंपनी के मालिक निर्मल सिंह भंगू के अघोषित आदेश के कारण पीएसीएल का पैसा उगाही अभियान जोरों पर जारी है. एक ताजे आंतरिक सर्वे में पता चला है कि इस कंपनी ने बिहार, यूपी, राजस्थान, मध्य प्रदेश समेत भारत के बहुत बड़े हिस्से में निवेशकों को बरगलाकर पैसे जमा कराने का काम जारी रखा हुआ है.

(राजस्थान का कोटा शहर. यहां चिटफंड कंपनी पीएसीएल का चमचमाता बड़ा सा आफिस बीच शहर में जोर शोर से चालू है. यहां हर रोज लाखों रुपये निवेशकों का जमा कराया जाता है. पीएसीएल के एजेंट स्थानीय लोगों को लंबे चौड़े सपने दिखाकर पैसे जमा कराते हैं और खुद भारी भरकम कमीशन खाते हैं. यह खेल पूरे देश में जारी है. हालांकि सेबी, सुप्रीम कोर्ट समेत कई एजेंसियों संस्थाओं ने इस कंपनी पर पाबंदी लगाकर निवेशकों से पैसे जमा कराने पर रोक लगा दी है और पहले जमा कराए गए पैसे लौटाने को कहा है. पर पीएसीएल के कर्ताधर्ता भारतीय तंत्र को धता बताकर अपना धंधा जारी रखे हुए हैं.)

उधर, जो निवेशक परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद पैसे मांगने कंपनी के आफिस आ रहे हैं तो उन्हें हर हाल में बिना पैसे दिए टरका दिया जा रहा है. इन लोगों को उनका पैसा किसी अन्य स्कीम में डालने का प्रलोभन दिया जा रहा है ताकि पैसा कंपनी से बाहर न जाए. ऐसे हजारों लोगों ने पिछले दिनों पीएसीएल के मालिकों के घरों के सामने प्रदर्शन किया लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है. कंपनी प्रबंधन अब भी भारतीय सिस्टम को पटाने और खरीदने में जुटा हुआ है. चर्चा है कि इसी कारण अभी तक भंगू गिरफ्तार नहीं हो पा रहा है.

एक चर्चा यह भी है कि भंगू ने सारी संपत्ति देश से बाहर ले जाकर दूसरे देशों में धंधा जमा लिया है. इसने भारत में अपनी कंपनियों में खुद की पोजीशन ऐसी कर ली है कि मालिक के रूप में दूसरे लोग फंसेंगे, वह खुद को बेदाग निकाल लेने में सफल रहेगा. मास्टर माइंड निर्मल सिंह भंगू के इस खेल पर से आंतरिक सर्वे एजेंसी ने परदा उठाया है.

पर्ल्स और पीएसीएल के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू और उनके रिश्तेदारों का पीएसीएल लिमिटेड की तीन में से दो मातृ कंपनियों पर नियंत्रण है. ये ब्योरा 61 वर्षीय भंगू के उस दावे के बाद सामने आ रहा है जिसमें उन्होंने खुद को कंपनी का ‘सलाहकार’ होने का दावा किया. जिन दिनों बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पीएसीएल लि. से 5.85 करोड़ निवेशकों से जुटाए गए 49,100 करोड़ रुपये लौटाने के लिए कहा था तब भंगू ने सेबी को बताया कि उन्हें कारण बताओ नोटिस गलत भेजा गया है.

पीएसीएल की वार्षिक रिपोर्ट में उसके शीर्ष शेयरधारकों में तीन कारोबारी इकाइयों के नामों का उल्लेख है. ये सिंह एंड सिंह एंड सिंह टाउनशिप डेवलपर्स लिमिटेड याशिका फिनलीज लि. और अलार्मिंग फिनवेस्ट लि. थीं, जिनके पास पीएसीएल की कुल 20 फीसदी हिस्सेदारी थी. निर्मल सिंह भंगू के पास याशिका फिनलीज की 8.84 फीसदी हिस्सेदारी है. निर्मल सिंह भंगू के रिश्तेदार हरविंदर सिंह भंगू की याशिका में 9.55 फीसदी हिस्सेदारी है. शेयर बाजारों को दी गई जानकारियों में इस शख्स और भंगू के बीच संबंध को स्पष्ट नहीं किया गया. इसमें हरविंदर को दिल्ली के पश्चिम विहार का निवासी बताया गया है और पिता / पति के कॉलम में ‘निर्मल सिंह भंगू’ लिखा था. इस प्रकार यह भंगू का बेटे हो सकता है. परिवार के बारे में जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि भंगू के बेटे का नाम हरविंदर था, जो कुछ साल पहले गुजर गया. उनकी दो बेटियां ऑस्ट्रेलिया में कारोबार का प्रबंधन करती हैं. याशिका की स्थापना वर्ष 1994 में की गई थी.

ऐसे तमाम खेल, गणित, तिकड़मों के जरिए भंगू खुद बचा लेने का मंसूबा पाले हुए है. देखना है कि भारतीय न्याय प्रणाली, भारतीय जांच व्यवस्था भारत के इस सबसे बड़े चारसौबीस को सीखचों के पीछे पहुंचाने और निवेशकों को उनका वाजिब धन दलाने में में कामयाब हो पाती है या फिर सबको चकमा देकर भंगू भारत से भागकर विदेशों में ऐश का जीवन बसर करता रहेगा व भारत के करोड़ों निवेशक अपनी गाढ़ी कमाई के लिए खून के आंसू रोते रहेंगे.

भड़ास4मीडिया के स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) के हेड सुजीत कुमार सिंह प्रिंस की रिपोर्ट. संपर्क: 09170257971

पूरे मामले को समझने के लिए इन खबरों को भी पढ़िए…

PACL कंपनी दिवालिया, निवेशकों का धावा, मालिक भंगू फरार, सीबीआई टीमें कर रही तलाश

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49 हजार करोड़ रुपये के PACL Chitfund Scam में CBI ने अब तक किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं की : ममता बनर्जी

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‘PACL’ की असलियत : परिपक्वता अवधि पूर्ण होने के बाद भी एजेंट का लाखों रुपये दाबे बैठी है कंपनी

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बिहार में पीएसीएल के चार ठिकानों पर छापेमारी, बैकडेट में जमा करा रहे थे पैसे

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पीएसीएल का फ्रॉड और भंगू का झूठ : इनके सामने सहाराश्री तो बेचाराश्री नजर आते हैं

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सहारा के लिए गरम और पीएसीएल के प्रति नरम क्यों है सेबी?

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भंगू, भट्टाचार्या समेत पीएसीएल के नौ प्रमोटरों-डायरेक्टरों के खिलाफ फ्राड-चीटिंग का मुकदमा चलेगा

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सुब्रत राय की राह पर निर्मल सिंह भंगू… SEBI ने दिया आदेश- निवेशकों को 50 हजार करोड़ रुपये PACL लौटाए

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1500 करोड़ के चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी कमल सिंह का सबसे खास एजेंट मिहिर मौलिक जेल गया

जादूगोड़ा : झारखंड के राजकॉम 1500 करोड़ के चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपी कमल सिंह के सबसे मुख्य एजेंट मिहिर मौलिक को जादूगोड़ा पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. इसके बाद निवेशकों मे भारी खुशी का माहौल है. अब निवेशक जल्द से जल्द कमल सिंह की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं. मिहिर मौलिक पर जादूगोड़ा थाना क्षेत्र के रहने वाले कुशों मुखी ने ठगी, जातिसूचक गालीगलोच करने, चेक बाउंस होने एवं नौकरी के नाम पर 15 लाख रुपया ठगी का आरोप लगाकर जादूगोड़ा थाना मे मामला दर्ज़ करवाया. इसके बाद कार्रवाई करते हुए थाना प्रभारी अरविंद प्रसाद यादव ने मिहिर मौलिक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. उस पर चारसौबीसी एवं एसटीएससी समेत अन्य धाराओ में मामला दर्ज़ किया गया है.

कमल सिंह के सबसे विश्वस्त साथी एवं बड़े एजेंट यूसिल बाग्जाता में कार्यरत अधिकारी (सहायक अधीक्षक माइंस) मिहिर चंद्र मौलिक ने कमल के चिटफंड कंपनी में लगभग 200 करोड़ से अधिक का निवेश कराया था, जिसमें विदेशों से भी बड़ी मात्रा में पैसा का निवेश कराया गया था. कमल के भाग जाने के बाद मिहिर मौलिक भी जादूगोड़ा से फरार हो चुका था. मिहिर चंद्र मौलिक के ऊपर जादूगोड़ा थाना में कई लोगों ने धोखाधड़ी और ठगी का मामला दर्ज कराया. इसके बाद पुलिस द्वारा मिहिर मौलिक के गिरफ्तारी के लिए वारंट निकाला जा चुका था. मिहिर पर वारंट निकाले हुए लगभग 14 माह हो चुके हैं फिर भी वह गिरफ्तारी से दूर था. मिहिर के फ़रारी के बाद कई निवेशकों का कहना है कि मिहिर आराम से कोलकाता में रह रहा था और करोडो की लागत से मौलिक बाजार बना रखा है. मिहिर मौलिक कमल के हर राज से वाकिफ है और कमल के फ़रारी के बाद ज्यादातर एजेंट उन्ही के यहाँ शरण लिए हुए थे. पिछले 14 महीनो से फरार मिहिर मौलिक अचानक से तीन दिनों पहले जादूगोड़ा स्थित अपने क्वाटर पहुंचा था जहां उसके आने की खबर से निवेशक उसके घर जाकर पैसा वापसी की मांग को लेकर हंगामा कर रहे थे. ज्योतिका चक्रवर्ती के नेतृत्व में महिलाओं ने मिहिर के क्वाटर जाकर जबर्दस्त हंगामा किया. इधर मिहिर की गिरफ्तारी के बाद निवेशकों ने जल्द से जल्द मुख्य आरोपी कमल सिंह एवं दीपक सिंह की गिरफ्तारी की मांग की है.

जादूगोड़ा से संतोष अग्रवाल की रिपोर्ट.

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पाठकों से खुलेआम चीटिंग : सीबीएसई का नाम लेकर एक निजी इंस्टीट्यूट की वेबसाइट को प्रमोट कर रहा है दैनिक जागरण

आदरणीय यशवंत जी, एक ओर दैनिक जागरण खुद को देश का नंबर एक अखबार होने का दावा करता है दूसरी ओर जागरण के संपादक व कार्यकारी अधिकारी समाचार पत्र को उतनी गंभीरता से नही लेते। इसकी बानगी 20 जनवरी 2015 के जागरण के बागपत संस्करण में देखने को मिली। हालाकि दी गई खबर मेरठ के एक पत्रकार ने लिखी है तो जाहिर है कि खबर मेरठ यूनिट के अन्य संस्करणों में भी गई होगी।

20 जनवरी के जागरण के बागपत संस्करण में पेज नंबर 6 पर प्रकाशित समाचार जिसका शीर्षक ‘सीबीएसई बनी है हर परीक्षार्थी की गाइड’ में बताया गया है कि सीबीएसई ने छात्रों की सुविधा के लिए एक वेबसाइट बनाई है (www.mycbseguide.com) जहां कक्षा 3 से 12 तक की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है। यह पत्रकार अमित तिवारी की बाईलाइन खबर है। मुझे हैरानी तब हुई जब पता चला कि जिस वेबसाइट का समाचार में जिक्र किया जा रहा है उसका सीबीएसई से कोई संबंध नही। वेबसाइट पर दिया गया पता दिल्ली के द्वारका के सेक्टर आठ का है। जोकि एलपिस टैक्नोलॉजी सोल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा चलाई जा रही है।

सवाल यह है कि क्या जागरण जैसे प्रसिद्ध बैनर अपने पाठकों को बिना पड़ताल किए ऐसे भ्रामक समाचार मुहैया कराता है। यह वास्तव में जागरण परिवार के लिए सोचनीय प्रश्न है।

भड़ास को भेजे गए एक पत्र पर आधारित.

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मनोरंजन टीवी के फर्जीवाड़ा ‘चेहरा पहचानो इनाम जीतो’ का एक शिकार मैं भी हूं

विषय : Fraud of Manoranjan TV

निदेशक
मनोरंजन टीवी
आदरणीय सर

आपके चैनल Manoranjan TV पर आने वाले ‘चेहरा पहचानो इनाम जीतो’ विज्ञापन के जरिए लोगों को पागल बनाने का काम किया जाता है. इसका एक शिकार मैं भी हुआ हूं. मेरे पास आज दिनांक 09 दिसंबर को फोन आया कि आपको 12 लाख 50 हजार रुपए इनाम में मिलने वाला है. इसे पाने के लिए मेरे से अभी तक इनाम देने वालों ने 86 हजार रुपए तक वसूल लिए हैं.

जब मैंने पैसे वापस करने के लिए कहा तो भी इन्होंने कहा कि इसके लिए 14 हजार रुपए और एकाउंट में डाल दो. आपसे निवेदन है कि आप इस संदर्भ में मदद करने की कृपया करें ताकि मुझ गरीब को न्याय मिल सके. मैं आपको वह मोबाइल नंबर दे रहा हूं जिसके जरिए मुझे लगातार फोन किया गया और पैसे मांगे गए. वह नंबर 08969362566 है.

सतीश चन्द शर्मा
कोटपूतली जयपुर राजस्थान
M. 09314090617
satishsharma.pa@gmail.com

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‘PACL’ की असलियत : परिपक्वता अवधि पूर्ण होने के बाद भी एजेंट का लाखों रुपये दाबे बैठी है कंपनी

लगता है पीएसीएल कंपनी भी धराशाई होने की कगार पर है. यही कारण है कि यह कंपनी अपने निवेशकों का धन उन्हें परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद लौटा नहीं रही है. भड़ास4मीडिया को भेजे एक मेल में पीएसीएल के एक निवेशक सुरेंद्र कुमार पुनिया ने बताया है कि उनका इस कंपनी में एजेंट कोड Agent Code 1950022771 है. इनके कुल आठ एकाउंट हैं जिसमें कुल चार लाख रुपये यानि 4,00,000/- जमा हैं. इनकी परिपक्वता अवधि दिसंबर 2013 और जनवरी-फरवरी 2014 थी. पर कंपनी पैसे लौटाने में आनाकानी कर रही है. सुरेंद्र ने PACL Amount Refund मामले में भड़ास से दखल देने की गुजारिश की है.

ज्ञात हो कि ऐसे मामलों को सेबी देखती है और सेबी ही वो प्लेटफार्म है जहां निवेशक / एजेंट सीधे मेल कर रिफंड की फरियाद लगा सकते हैं. Surendra Punia की मेल आईडी surendrak.punia@gmail.com है.  सुरेंद्र पुनिया तो मात्र एक उदाहरण हैं. ये मेल लिख भेज लेते हैं इसलिए इनकी बात सुनी भी जा रही है, प्रकाशित भी हो रही है. लेकिन ऐसे हजारों एजेंट हैं जो अपढ़ हैं और मेल वगैरह का इस्तेमाल नहीं करते. वे लोग अपनी शिकायत बात कहां रख पाते होंगे. पीएसीएल के कई एजेंटों का कहना है कि उन्हें परिपक्वता अवधि पर पैसा लौटाने की जगह कंपनी किन्हीं दूसरी योजनाओं में पैसा लगवा दे रही है, वह भी बिना सहमति लिए. ऐसी गुंडागर्दी देखकर आज ये निवेशक / एजेंट उस क्षण को कोस रहे हैं जब उन्होंने अपना पैसा पीएसीएल में लगाने का फैसला किया.

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सेबी का आदेश- पीएसीएल नामक कंपनी के पास कोई मान्यता नहीं, जनता पैसा न लगाए

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बिहार में पीएसीएल के चार ठिकानों पर छापेमारी, बैकडेट में जमा करा रहे थे पैसे

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सुब्रत राय की राह पर निर्मल सिंह भंगू… SEBI ने दिया आदेश- निवेशकों को 50 हजार करोड़ रुपये PACL लौटाए

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‘पी7 न्यूज’ के निदेशक केसर सिंह को हड़ताली कर्मियों ने बंधक बनाया, चैनल पर चला दी सेलरी संकट की खबर

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काले से गोरा बना देने का हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड का कारोबार यानि सबसे बड़ी ठगी

ज्योतिष के नाम पर ठगी का कारोबार काफी छोटा है. हम हमेशा अपनी आय का एक काफी-काफी छोटा अंश इस नाम पर खर्चते हैं. मसलन कोई दस हज़ार की नौकरी करने वाला होगा तो वो पंडित को 11 रुपया दक्षिणा देगा, कोई करोड़पति होगा तो एक-दो नीलम-पुखराज पहन लेगा. लेकिन इस ठगी के बरक्स ज़रा बड़े ठगों पर ध्यान दीजिये. आज हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड (दुनिया भर में उस देश का नाम और आगे लीवर लिमिटेड जोड़ दीजिये) का काले से गोरा बना देने का कारोबार किस हद तक ठगी का नायब नमूना है, उसे देखिये. ज़रा उसका टर्न ओवर देख लीजिये. कई देशों के जीडीपी से ज्यादा इनकी अकेले आमदनी है.

किसी जान्शन एंड जान्शन या प्रोक्टर एंड गेम्बल द्वारा ऐसे ही की जा रही ठगी और अवैज्ञानिक अंधविश्वास पर नज़र डालिए. विश्व सुन्दरी हमेशा उस देश से बनाए जाने के कारोबार को देखिये जहां बाज़ार की संभावना दिखे. एक विज्ञापन का अंधविश्वास देख लीजिये जिसमें घोषणा की जाती है कि मेरी कंपनी का डियो इस्तेमाल करोगे तो लड़कियां पास आयेंगी.. दूसरे का करोगे तो बस छींक आयेगी. जेनरिक दवाओं के बदले ब्रांडेड का कारोबार देख लीजिये. दो रुपये कीमत वाले रसायन का 2 हज़ार दाम वसूलते दवा कारोबारी को देखिये.

बीज और खाद के नाम पर फैले अन्धविश्वास और ठगी को देख लीजिये. एक रुपया किलो में आलू खरीद 200 रुपया किलो का चिप्स बेचने वाले ठगों को देखिये. सारदा जैसे सैकड़ों कंपनियों द्वारा फैलाये अंधविश्वास को देखिये कि सारा खून-पसीना किसी ममता बनर्जी के पास बंधक रख दीजिये, किरपा आयेगी. मज़हब के नाम पर ‘मानव बम’ बन जाने वाले अंधविश्वास को देखिये. एक-एक नाकाबिल और अन्धविश्वासी व्यक्ति द्वारा चार-चार लड़कियों की जिन्दगी बर्बाद कर देने वाले कानूनी ठगी को देखिये. 72 हूरों के मिलने का अंधविश्वास और उसे पाने के लिए बहाई जाती खून की नदियों को देखिये. किसी पॉल दिनाकरण को देखिये. इसाई संत बनाने के कारोबार को देखिये. नक्सलवाद के नाम पर हर साल ठगे जा रहे हज़ारों करोड़ को देखिये. फसल की उचित कीमत नहीं मिलने पर किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या और उसी फसल को दस गुना ज्यादा कीमत पर आपको बेचने की ठगी पर नज़र डालिए. मौसम विभाग द्वारा हमेशा गलत अनुमान प्रस्तुत कर देश से हजारों करोड़ झटक लेने की ठगी को देख लीजिये.

तय मानिये… इसकी तुलना में किसी गरीब ज्योतिषी का कारोबार आपको भूसे के ढेर में सूई की मानिंद ही लगेगा. लेकिन भूसे के बदले हमेशा ‘सूई’ को खोजते रहने की मिडिया की मजबूरी ये है कि जिस दिन ‘भूसे’ को दमदारी से प्रसारित करना शुरू किया, उसी दिन से उसका बाल-बच्चा पालना मुश्किल हो जाएगा. वो इसलिए क्यूंकि तमाम टीआरपी का अंधविश्वास और विज्ञापन की ठगी का जरिया वही ऊपर वाली चीज़ें हैं. सो… अपनी अकल लगाइए और सोशल मीडिया के ज़माने में अपना एजेंडा खुद सेट कीजिये. किसी सनी लियोनी या चैनल के सितारों को बस मनोरंजन के लिए इस्तेमाल कीजिये. जैसे कभी-कभार वयस्कों वाली फिल्म देखते हैं न, वैसे ही समाचार चैनल भी देखिये. पोर्न स्टार जितना ही ‘सम्मान’ इस कथित चौथे खम्भे को दीजिये. खुद को फेसबुक पर व्यक्त कीजिये. यहीं से अपना ओपिनियन बनाइये…बस.

और आखिर में तीन किस्से…

पत्रकारिता के एक कनिष्ठ मित्र अपने संपर्क में थे. लगातार फोन आदि करते रहते थे. एक दिन मित्र ने जानकारी दी कि अंतत उनकी नौकरी लग गयी एक बड़े अखबार में. बधाई देने के बाद पूछा कि अभी क्या कर रहे हो वहां? तो बोले कि अभी तो सीख ही रहा हूं. हां.. संपादक के नाम पत्र वाला कॉलम आजकल मैं ही देखता हूं. सारे पत्र मैं ही लिखता हूं. अब ऐसे ही बड़े अखबार दैनिक राशिफल भी खुद ही लिख लेते हैं तो इसमें ज्योतिष का क्या कसूर?

दूसरा किस्सा भारत के प्रधानमंत्री रहे स्व. चन्द्रशेखर के बारे में. यह किसी से सुना था या कहीं कभी पढ़ा था एक बार. ज़ाहिर है उनका कद ऐसा तो था ही कि वो चाहते तो हमेशा मंत्री बने रह सकते थे, वो भी बड़े से बड़ा पोर्टफोलियो लेकर. अपन सब जानते हैं कि उस ‘भोंडसी के संत’ की ज्योतिष आदि पर भी अगाध आस्था थी. उनके ज्योतिषी ने चन्द्रशेखर से कहा था कि उन्हें राजयोग है तो ज़रूर लेकिन क्षीण योग है. और वो भी बस एक बार ही किसी राजकीय पद तक पहुचा सकता है. कहते हैं कि तभी चन्द्रशेखर जी ने यह तय कर लिया था कि अगर एक बार ही बनना है तो प्रधानमंत्री ही बनेंगे, दूसरा कोई पद नही लेंगे. अब इस बात का कोई आधिकारिक प्रमाण तो हो नही सकता लेकिन अनुभवी लोग शायद इस बात पर कोई प्रकाश डाल पायें.

तीसरा किस्सा मेरे यहां के एक ज्योतिषी कामेश्वर झा जी का. आंखों-देखी झा जी के फलादेश की कहानियां इतनी है मेरे पास कि क्या कहूं? खैर..वो कहानी फिर कभी. अभी बस ये याद आया कि वो पतरा (पंचांग) भी बनाते थे. चन्द्र या सूर्य ग्रहण कब लगेगा, ये जानने उन्हें किसी इसरो या नासा के वैज्ञानिकों के पास नहीं जाना पड़ता था. कॉपी-कलम उठाते थे. कुछ गुणा-भाग किया और बता देते थे कि फलाने दिन चन्द्र ग्रहण तो ठिमकाने दिन सूर्य ग्रहण लगेगा. मजाल है राहू के बाप का कि एक दिन भी वो कामेश्वर जी द्वारा बताये समय पर नहीं हाज़िर हुआ हो, अपने ‘शिकार’ के पास. बिलकुल चाक-चौबंद और पाबंद रहता था राहु. अपना मूंह फाड़े बिलकुल तैयार. आप अगर चाहते तो अपनी घड़ी सही कर सकते थे राहु की उस सवारी के अनुसार.

भाजपा से जुड़े युवा पत्रकार और एक्टिविस्ट पंकज कुमार झा के फेसबुक वॉल से.

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घोटालेबाज प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी करने की तैयारी

ऐसी खबर है कि देश की प्रमुख समाचार एजेंसी यूएनआई के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर एनबी प्लांटेशन के नाम से करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप है. चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी एनबी प्लांटेशन के डायरेक्टर रह चुके हैं. सेबी वही सरकारी एजेंसी है जो सहारा और शारदा चिट फण्ड के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है.

चारों तरफ से घिर चुके प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ अब ह्यूमन राइट कमीशन, मायनॉरिटी कमीशन और नेशनल विमन कमीशन की कार्यवाही के अलावा अब दिल्ली विजिलेंस के लोग भी सक्रिय हो गये हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर यूएनआई के अध्यक्ष पर रहते हुए आर्थिक घपले-घोटोलों के तमाम आरोप हैं. उन पर ये सारे आरोप ”सेव यूएनआई मूवमेंट” ने लगाए हैं. कहा जाता है कि घपले-घोटाले करना प्रफुल्ल माहेश्वरी की फितरत में शामिल है. प्रफुल्ल माहेश्वरी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से प्रकाशित एक हिंदी अखबार को चलाने वाली कंपनी के प्रमुख निदेशक मालिक-संपादक भी हैं.

प्रफुल्ल माहेश्वरी की यह कंपनी बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की ब्लैक लिस्ट ‘विल फुल डिफॉल्टर’ में दर्ज है. प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा से 1541 लाख रुपये का कर्जा लिया था. आदत से मजबूर प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा का पैसा वापस नहीं किया. बैंक के अधिकारियों ने कर्जा वापसी की लाख कोशिशें की. हर बार नाकाम रहने के बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्रा ने प्रफुल्ल माहेश्वरी की कंपनी को उन देनदारों की सूची में डाल दिया जो जानबूझ कर कर्ज वापस नहीं करना चाहते हैं.

बैंक ऑफ महाराष्ट्रा  के देनदारों की काली सूची में नाम दर्ज होने से भी कोई फर्क नहीं है. सेव यूएनआई के वर्कर्स का कहना है कि प्रफुल्ल माहेश्वरी यूएनआई को भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शक्ल में चालाना चाहते हैं. इसी हठधर्मिता की वजह से उन्होंने यूएनआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एक गैर मीडिया पर्सन की एंट्री करवा दी है. आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन कहा जाता है  कि रिएल इस्टेट कंपनी चलाने वाले गैर मीडिया पर्सन को प्रफुल्ल माहेश्वरी ने यूएनआई की जमीन पर कब्जा दिलाने के सब्ज बाग दिखाए थे. सेव यूएनआई मूवमेंट ने भी प्रफुल्ल माहेश्वरी के कच्चे चिटठे खोले हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी की एक अन्य कंपनी एनबी प्लांटेशन भी आर्थिक अनियमितताओं के चलते सेबी के रडार पर काफी पहले से है. ऐसे भी कयास हैं कि एनबी प्लांटेशन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप में सेबी प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकती है.

उपरोक्त प्रकरण के बारे में जब प्रफुल्ल माहेश्वरी से संपर्क किया और आरोपों पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका रिवर्ट मैसेज था, ‘Sorry to read all this junk. Pl get in touch with the person who has given this false information and verify yourself…’ ”….I am not the chairman of UNI and can only speak for myself.”

हालांकि, प्रफुल्ल माहेश्वरी को फिर से कुछ सवाल भेजे गये हैं. अगर वो अपना पक्ष रखते हैं तो अगली किश्त में उनको भी प्रकाशित किया जाएगा. इन सब के अतिरिक्त एमपीएसआईडीसी के जमीन घोटाले में भी प्रफुल्ल माहेश्वरी का नाम शामिल है. उसकी जानकारी भी अगली किश्त में विस्तार से दी जाएगी.

भड़ास के एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) राजीव शर्मा की रिपोर्ट. संपर्क: 09968329365

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