भिंडरावाले और गोडसे के कितने पूजने वालों को देशद्रोह में जेल भेजा!

जेएनयू प्रकरण पर कुछ सवाल हैं जो मुंह बाए जवाब मांग रहे हैं। मालूम है कि जिम्मेदार लोग जवाब नहीं देंगे, फिर भी। लेकिन उससे पहले नोट कर लें-

1. देश को बर्बाद करने की कोई भी आवाज़, कोई नारा मंजूर नहीं। जो भी गुनाहगार हो कानून उसे माकूल सजा देगा।
2. कोई माई का लाल या कोई सिरफिरा संगठन न देश के टुकड़े कर सकता है न बर्बाद कर सकता है। जो ऐसी बात भी करेगा वो यकीनन “देशद्रोही” है।
3. किसी नामाकूल से या देशभक्ति के किसी ठेकेदार से कोई सर्टिफिकेट नहीं चाहिए।
4. कोई भी किसी भी मुद्दे पर असहमत है तो ये उसका हक़ है। हां कोई भी। कोई माई का लाल असहमति को “देशद्रोह” कहता है तो ये उसकी समझ है।