ईटीवी के सीनियर रिपोर्टर आलोक शर्मा ने छेड़छाड़ कर भाग रहे एक वहशी दरिंदे को धर दबोचा

Alok Sharma : दोस्तों, लड़की के साथ अभद्रता और छेड़छाड़ कर भागे लड़के को करीब एक किलोमीटर दौड़ कर पकड़ा, मुद्दा ये नहीं था कि मुझे हीरो बनना था, बड़ी बात ये थी कि आज उसे छोड़ दिया जाता या वो बच जाता तो कल को हमारी बहन-बेटियों के साथ भी ऐसा ही करता। घटनाक्रम सात मई की रात 9.30बजे का है। अपने परिवार के साथ B 2- By Pass के पास गार्डन में घूम रही स्कूल से कुछ समय पहले ही Pass Out हुई लड़की के साथ यह सब हुआ। बेशर्म में हवस इतनी थी कि उसकी गोद में बैठी डेढ़ साल की बच्ची को भी गोद से गिरा दिया।

आलोक शर्मा

पार्क में अचानक चीखने की आवाजें आई, आरोपी भाग निकला। मैं भी वहीं था वॉक पर। मैंने पहले सोचा शायद किसी ने महिला के गले की चैन तोड़ ली दिखती है। जैसे ही अलर्ट हुआ तो एक लड़का ये कहते हुए वहां से भागा कि ‘उधर छेड़छाड़ हुई है भागो’। उसे रोका तो गार्डन की दीवार कूदकर और तेजी से भागा। 3-4 seconds में ही माजरा समझ आ गया कि जो राह दिखा रहा है वही अपराधी है।

सब लोग एक ही दिशा में भागे जबकि मैं विपरीत दिशा में। आखिरकार 8-10 minute में B 2- By Pass पर भरे ट्रैफिक और ट्रकों के बीच पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर उसे पकड़ने में कामयाबी मिली। दोनों में जोर आजमाइश हुई। आखिरकार उसे काबू में किया और पकड़कर लड़की और उसके परिजनों को सौंपा।

उस परिवार की महिलाओं ने जमकर धुनाई की, हालांकि पीड़ित परिवार ने बाद में मामले को कानूनी तौर पर आगे नहीं बढाने की इच्छा जाहिर की, जिसके बाद ID & Photo लेकर उसे छोड़ा गया। लड़की अपने साथ अचानक हुए इस घटनाक्रम से इतनी सहमी थी कि आरोपी की पिटाई करने के लिए उसका हाथ तक नहीं उठ पाया। आज जब वह थोड़ा सामान्य हुई तो ये मैसेज आया- ‘सर आप कल तो हीरो बन गए मेरे’। अच्छा लगा मैसेज देखकर, मैं किसी का Hero बना। यह पोस्ट केवल इसलिए ताकि आप भी इसी तरह किसी के मददगार बन सकें। लड़की का नाम और पता उसकी निजता भंग न करने के लिए सार्वजनिक नहीं कर सकता।

जयपुर में पदस्थ ईटीवी राजस्थान के सीनियर रिपोर्टर आलोक शर्मा की एफबी वॉल से.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

ईटीवी के पत्रकार ऋतुराज ने खून देकर आदिवासी भाई-बहन की जान बचायी

देवघर में ईटीवी बिहार के पत्रकार ऋतुराज सिन्हा ने रक्षाबंधन के दिन खून देकर आदिवासी भाई बहन की जान बचायी. प्राप्त सूचना के अनुसार देवघर के एक अस्पताल कुंडा सेवा सदन में एक आदिवासी भाई बहन जिनकी उम्र सात साल एवं नौ साल बतायी जा रही है, सेरेब्रल मलेरिया से ग्रसित होकर भर्ती थे. वहाँ उन बच्चों का हीमोग्लोबिन काफी नीचे गिर गया था. उन बच्चों की जान खून के अभाव में जा भी सकती थी. ईटीवी के पत्रकार ऋतुराज को इस संबंध में जानकारी मिली तो उन्होंने उन बच्चों को खून देने का निर्णय लिया.

अस्पताल के चिकित्सक डॉ संजय कुमार ने ऋतुराज के इस निर्णय और कार्य के लिए उन्हें बधाई दी. डा. संजय ने बताया कि अगर किसी को भी तेज बुखार आए तो उसे मलेरिया की जांच करानी चाहिए. फालसीपेरम मलेरिया उग्र रूप लेता है तो ब्रेन मलेरिया हो जाता है. डा. संजय के मुताबिक ऋतुराज द्वारा दोनों बच्चों को आधा-आधा यूनिट खून देने से बच्चों की स्थिति में सुधार हुआ है और दोनों बच्चे फिलहाल खतरे से बाहर हैं. दोनों का इलाज जारी रहेगा. उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के दिन पत्रकार ने खून देकर एक आदिवासी भाई बहन की जान बचाई है, यह सराहनीय है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: