मीडिया का नेशनल इश्यू… हनीप्रीत! हनीप्रीत!! हनीप्रीत!!!

गोविंद गोयल
श्रीगंगानगर। हनीप्रीत इस देश के मीडिया के लिए बड़ा मुद्दा है। उस मुद्दे से भी बड़ा जो जन जन से जुड़ा हो सकता है। इसीलिए तो तमाम मीडिया केवल और केवल हनीप्रीत की खबर दिखा और छाप रहा है। हनीप्रीत मिल भी जाए तो इससे जनता का क्या भला होने वाला है। वह मिल जाए तो बाद पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो जाएंगे क्या! ना मिले तो नोट बंदी फिर से लागू होने वाली नहीं। सीधी बात सीधे शब्दों मेँ कि उसका मिलना ना मिलना देश हित मेँ कोई महत्व नहीं रखता।

नागरिक करे तो जागरूकता, पत्रकार करे तो धौंस

गोविंद गोयल
श्रीगंगानगर। फेसबुक की एक छोटी मगर बहुत प्यारी पोस्ट के जिक्र के साथ बात शुरू करेंगे। पोस्ट ये कि एक दुकानदार ने वस्तु का मूल्य अधिक लिया। ग्राहक ने उलाहना देते हुए वीडियो शूट किया। दुकानदार ने सॉरी करना ही था। हर क्षेत्र मेँ जागरूकता जरूरी है। बधाई, उस जागरूक ग्राहक को। तारीफ के काबिल है वो। लेकिन अगर यही काम किसी पत्रकार ने किया होता मौके पर हँगामा  हो जाता। लोग पत्रकार कि वीडियो बनाते। सोशल मीडिया पर बहुत से व्यक्ति ये लिखते, पत्रकार है, इसलिए धौंस दिखा रहा है। पत्रकारिता की आड़ लेकर दुकानदार को धमका रहा है। चाहे उस पत्रकार को कितने का भी नुकसान हुआ होता। पत्रकार के रूप मेँ किसी की पहचान उसके लिए मान सम्मान के साथ दुविधा, उलझन, कठिनाई भी लेकर आती है। क्योंकि हर सिक्के दो पहलू होते हैं। एक उदाहरण तो ऊपर दे दिया। आगे बढ़ते हैं।