डकैतों का मीडिया इंटरव्यू : मलखान से निर्भय तक

आज बदनामशुदा अपराधियों के इंटरव्यू छापने से भी मीडिया को परहेज नहीं है क्योंकि भले ही उनके महिमा मंडित होने की वजह से समाज का भीषण अहित होता हो लेकिन उनका इंटरव्यू सेलेबिल होता है और व्यावसायिक पत्रकारिता के दौर में खबर को प्रमुखता देने का मानक यही है कि उसमें ग्राहक को आकर्षित करने की क्षमता कितनी है लेकिन जब पंजाब और जम्मू कश्मीर का आतंकवाद नहीं आया था जिसकी धमक अपने-अपने राज्यों तक सीमित नहीं रही बल्कि देश की राजधानी और शीर्ष सत्ता केंद्रों को भी इस आतंकवाद ने अपनी चपेट में लेने का दुस्साहस किया, तब तक क्राइम की इवेंट के रूप में राष्ट्रीय स्तर तक चंबल के डकैतों से जुड़ी समाचार कथाओं की न्यूज वैल्यू सबसे ज्यादा मानी जाती थी।