मुसलमान होते हैं कैसे?

मैंने एक बार एक व्यक्ति से पूछा कि मुसलमान कैसे होते हैं? तो उसने बताया कि जो दंगा-फसाद और आतंक फैलाए वो मुसलमान है, जो 6-7 शादियां करके ज्यादा बच्चे पैदा करे वो मुसलमान है, जो हिंदू लड़की से शादी करके धर्म परिवर्तन करवाए, वो मुसलमान होता हैं और भी बहुत कुछ बोला था लेकिन मुझे याद नहीं है। उस व्यक्ति की बातों ने मेरे दिमाग पर गहरा असर किया। मैं सोचने लगा कि वाकई अगर मुसलमान ऐसे होते हैं तो मुझे उनसे दूर रहना चाहिए। उस व्यक्ति की बातें मेरे दिमाग में चल ही रही थीं कि मैं चाय पीने चला गया।

जी हाँ ! हम ठगते हैं और ठगने का लाइसेंस देते हैं !

नागरिकों को सामान्य और व्यावसायिक शिक्षा देना, रोजगार उपलब्ध करवाना कल्याणकारी सरकार का संवैधानिक धर्म है। अत: शैक्षणिक गतिविधियों से कोई वसूली करना स्पष्ट: संविधान विरुद्ध है किन्तु स्वयं शिक्षा जगत का क्या हाल है और सरकार इसकी किस तरह दुर्गति कर रही है, इसका शायद आम नागरिक को कोई अनुमान नहीं है। उदारीकरण, जो कि संविधान की समाजवाद की मूल भावना के सर्वथा विपरीत है, का लाभ धनपतियों और कुबेरों को मुक्त हस्त दिया जा रहा है। यही कारण है कि पंचवर्षीय योजनाओं को ठेंगा दिखाती हुई गरीब और अमीर के बीच की खाई स्वतन्त्रता के बाद बढ़ती ही जा रही है। शायद इस अधोगति के रुकने के कोई आसार भी नहीं दिखाई देते।