यही हाल रहा तो ‘आज तक’ के मंच पर जो हुआ, वो हर मंच पर होगा

सवाल ये कि ऐसी डिबेट्स में पार्टी कार्यकर्ताओं, नेता व प्रतिष्ठित लोगों को ही क्यों रखा जाता है। आम आदमी रिक्शे वाला, ढकेल वाला या युवा छात्र, गृहिणी व अन्य जमीन से जुड़े लोगों की राय कोई मायने नहीं रखती क्या? उन लोगों के बीच जाकर बहस क्यों नहीं करायी जाती।