पत्रकारिता का सबसे यादगार दिन… काश मैं भी एक सेल्फी खिंचवा पाता…

Harsh Kumar : दोस्तों, प्रधानमंत्री की पत्रकारों के साथ मुलाकात की खबर सुर्खियों में है। जहां एक ओर पत्रकार इस बात से प्रफुल्लित नजर आ रहे हैं कि पीएम के साथ कुछ समय बिताने का अवसर उन्हें मिल गया वहीं कुछ लोग इसका बड़े ही नकारात्मक तरीके से आकलन करने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ साथियों ने इसे पत्रकारिता के लिए काला दिन और न जाने क्या-क्या कह डाला है। मैं इस बारे में ये कहना चाहूंगा कि काश मुझे भी अपने देश के पीएम से मिलने का मौका मिल गया होता आज। पर कोई बात नहीं, कम से कम मुझे आज के वाकये के बाद ये दिलासा तो मिला कि देश के पीएम से कभी न कभी तो मिला जा सकता है। नहीं तो अब तक इस देश के पीएम आम आदमी की पहुंच से तो दूर थे ही बल्कि खास लोग भी आसानी से नहीं मिल पाते थे।

सौरभ में बहुत जज़्बा था… पिछले दस साल में कितना कुछ कर डाला…

Saurabh Sharma


 

Pankaj Shukla : पिछले महीने 17 तारीख़ को तुमसे कितनी लम्बी बात हुई। पंकज भाई ये करना है , पंकज भाई वो करना है – मेरठ आने का बुलावा। इसके बाद फिर याद दिलवाया कि जल्दी कार्यक्रम बनाऊं। गजब कर दिया सौरभ तुमने , इतनी जल्दी चले गए। अरे, बहुत जज़्बा था इस आदमी में। पिछले दस साल में कितना कुछ कर डाला। पत्रकारिता के साथ कहानी , कविताएं – एल्बम लांच। ऊब तो गया था वो अख़बार के अंदर हो रही घटिया राजनीति से, आहत भी था लेकिन कुछ नया करने का हौसला और ज़्यादा कुलांचे मार रहा था। हिल गया हूं मौत की ख़बर सुनकर। बहुत दुःख हो रहा है। एक बढ़िया इंसान चला गया। बहुत याद आओगे सौरभ। (न्यूज30 चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार पंकज शुक्ल के फेसबुक वॉल से.)