खुश रहिए कि बाज़ार को हिंदी से इश्क हो गया है!

Vivek Satya Mitram लो जी, फ़िर आ गया 14 सितंबर। यही वो तारीख़ है जिस दिन मुझे मेरी हिंदी सबसे बेचारी नज़र आती है। ऐसा लगता है मानो ‘हिंदी दिवस’ हिंदी का उल्लास नहीं हिंदी का मातम मनाने के लिए आता है। सरकारी आयोजनों से लेकर, अख़बारों, पत्रिकाओं, टीवी चैनलों और सांस्कृतिक-साहित्यिक कार्यक्रमों तक में …

हैप्पी हिंदी डे

एक साल में ६९ दिन को हम विभिन्न दिवसों (इसमें बाज़ार आधारित दिवस मसलन वेलेनटाइन डे, फादर-मदर आदि दिवस शामिल नहीं हैं) के रूप में मनाते हैं….किसी-किसी महीने तो १०-१० दिवस मना लेते हैं, एक दिन एक अक्टूबर विश्व प्रौढ़ दिवस होता हैं तो इसी दिन रक्तदान दिवस भी है। क्यों है, यह तो पता नहीं अगर होता भी तो क्या कर लेते। हम आजाद हैं जब चाहे तब दिवस जो चाहे वो दिवस मनायें। फिर हिंदी राष्ट्र भाषा है राष्ट्र भाषा को एक दिन या सप्ताह/पखवाड़ा दे दिया तो कौन सा पहाड़ टूट गया|