खुद को पत्रकार बताने में अब ज़बान लड़खड़ाने लगती है!

यूं तो दोस्तों और हमउम्र के जानने वालों के ज़रिए जब यह सवाल पूछा जाता है कि ‘क्या करते हो’ तो मज़दूरी करते हैं जैसे तमाम हल्के जवाबों से उनके सवालों को टाल देता हूं। लेकिन यही सवाल कोई बड़ा (उम्र में), रिश्तेदार, घर में आए मेहमान करते हैं तो ज़बान लड़खड़ाने लगती है, यह …

अंगरेजी पत्रकारिता के दुराग्रह

हिंदी के वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह को हाल ही में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया। इसमें शायद ही कोई मतभेद हो कि अपनी आधी शताब्दी पूरी करने की ओर बढ़ने के बावजूद आज भी भारतीय भाषाओं के लेखकों को मिलने वाला यह सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। यह भी जगजाहिर है कि साहित्य अकादेमी पुरस्कार पाने के बाद लगभग हर भारतीयभाषी लेखक की खुली-छिपी महत्त्वाकांक्षा यह रहती है कि उसे ज्ञानपीठ पुरस्कार मिले।