मृत्यु को महोत्सव बनाने का विलक्षण उपक्रम है संथारा

जैन धर्म में संथारा अर्थात संलेखना- ’संन्यास मरण’ या ’वीर मरण’ कहलाता है। यह आत्महत्या नहीं है और यह किसी प्रकार का अपराध भी नहीं है बल्कि यह आत्मशुद्धि का एक धार्मिक कृत्य एवं आत्म समाधि की मिसाल है और मृत्यु को महोत्सव बनाने का अद्भुत एवं विलक्षण उपक्रम है। तेरापंथ धर्मसंघ के वरिष्ठ सन्त ‘शासनश्री’ मुनिश्री सुमेरमलजी ‘सुदर्शन’ ने इसी मृत्यु की कला को स्वीकार करके संथारे के 10वें दिन चैविहार संथारे में दिनांक 4 अगस्त 2018 को सुबह 05.50 बजे देवलोकगमन किया। Continue reading

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जैन धर्म ने कक्षा 8 में पढ़ने वाली हैदराबाद के ज्वैलर्स की 13 वर्षीय बेटी आराधना की हत्या कर दी!

Balendu Swami : अहिंसा का धर्म कहे जाने वाले जैन धर्म ने कक्षा 8 में पढ़ने वाली हैदराबाद के ज्वैलर्स की 13 वर्षीय बेटी आराधना की हत्या कर दी! आराधना को 68 दिन तक उपवास करने पर “बाल तपस्विनी” की उपाधि दी गई, उसकी अंतिम यात्रा को शोभा यात्रा कहा गया और 600 लोग उसके अंतिम संस्कार के जलसे में शामिल हुए! इस मासूम बच्ची से घरवालों ने स्कूल छुड़वा कर तपस्या करवाई! भक्तों ने उसके साथ सेल्फियाँ लीं, मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने उसके साथ फोटो खिंचवाई और हर तरह से उसका महिमामंडन कर उसे गिफ्ट दिए!

कृपया ये न कहें कि अन्धविश्वास ने इस बच्ची की जान ले ली, ये तो धार्मिक परम्पराएँ हैं जिन्हें कि हजारों सालों से हमारे ऋषि मुनि करते चले आ रहे हैं और धर्म ग्रंथों में इनका वर्णन है! इस बिटिया के जीवन की बलि ले लेने के बाद अब इसे देवी बनाकर प्रस्तुत और कैश किया जाएगा और धर्म का धंधा चलता रहेगा! कभी कोई शिव भक्त जहर पिलाकर चमत्कार की आशा में खुद की और अपने मासूम बच्चों समेत पूरे परिवार की जान ले लेता है तो कभी मासूम बच्चों की देवी को बलि चढ़ा दी जाती है, डायन बताकर महिलाओं की हत्या कर दी जाती है तो कभी इस तरह से मासूम बच्ची के सपनों को जवान होने के पहले ही धर्म की भेंट चढ़ा दिया जाता है!

वृंदावन के स्वामी बालेंदु की एफबी वॉल से.

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