भास्कर डाट काम ने नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का झूठा इंटरव्यू छापा

भास्कर डाट काम की जिस खबर पर बवाल मचा है, उसके बारे में कुछ तथ्य साझा करना चाहता हूं. भास्कर डाट काम ने नेशनल सिक्युरिटी एडवाइजर अजित डोभाल का झूठा इंटरव्यू छापा था. जिसका डोभाल ने तत्काल  खंडन कर दिया लेकिन भास्कर बेशर्मी से इंटरव्यू को अभी तक चलाये जा रहा है. कोई भी हिंदी मीडिया को गंभीरता से नहीं लेता उसका ये फायदा उठाते हैं. अगर यह इंटरव्यू किसी अंग्रेजी अखबार की साइट पर होता तो अब तक बवाल मच गया होता.

हकीकत यह है कि डोभाल साहब से कुछ मिनट की अनौपचारिक बातचीत में इस संवाददाता रोहिताश्व मिश्र ने सहमे अंदाज के एक दो सवाल पूछे उसके बाद पूरा इंटरव्यू मनगढ़ंत लिख के चला दिया. डोभाल साहब ने इस पर कारर्वाई करने को कहा है. इससे पहले भी यह संवाददाता पाकिस्तान जाकर दाउद के घर से खबर करने का झूठा दावा कर चुका है जबकि यह आज तक इंडिया से बाहर नहीं गया.

उस वक्त उसने जो खबर की थी वह कई महीने पहले एक्सप्रेस व हिंदू में छप चुकी थी. इंटरव्यू पढ़कर देखिये. क्या एनएसए इस भाषा में बात करता है. यह दसवीं पास पत्रकार की भाषा है. इस पत्रकार से ज्यादा तरस तो इस अखबार के मालिकों व संपादकों पर आता है जो ऐसे चोर व फर्जी पत्रकारों को अपने यहां जगह दिये हैं. इतना ही नहीं, एनएसए के खंडन के बाद उसे गाड़ी व सुरक्षा भी भास्कर प्रबंधन ने मुहैया करायी है. जय हो.

एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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आज तक के स्ट्रिंगर शरद के खिलाफ डकैती का मुकदमा झूठा निकला

यशवंत भाई आदाब,  अभी कुछ समय पहले ‘भड़ास 4 मीडिया’ पर एक समाचार प्रकाशित हुआ था जिसका शीषर्क था- ‘आज तक के स्ट्रिंगर के खिलाफ डकैती का  मुकदमा दर्ज’.  ये खबर मुरादाबाद से आज तक के जिला संवादाता शरद गौतम के लिये उनके चाहने वालों ने भड़ास पर पोस्ट कराई थी और उनकी मंशा ये रही होगी कि इस खबर से आजतक समूह  शरद गौतम को बाहर का रास्ता दिखा देगा लेकिन हुआ इसका उलट. 14  oct 2014 को ये  मुकदमा संभल जनपद के चंदोसी कोतवाली में दर्ज हुआ और 18 OCT 2014 को जाँच अधिकारी ने मुकदमा झूठा पाया और एक्सपंज कर दिया.

जानकारी के मुताबिक़ संभल जनपद के कुछ प्रिंट के लोग जो फर्जी नामों से न्यूज़ चैनल के लिए भी काम करते हैं, शरद गौतम से खुन्नस रखते हैं. वो ये चाहते हैं कि शरद गौतम संभल जनपद की खबरें न कवर करें ताकि वो अपने हिसाब से खबरों को मैनज कर सकें और कुछ कमाई कर सकें. लेकिन ऐसे दलाल टाइप पत्रकार विफल हो गए हैं. मुझे उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि ऐसे टुच्चे पत्रकार मेरी पोस्ट पड़कर फर्जी नाम से टिप्पणी करेंगे वो इसलिये कि वो उनकी आदत में शामिल है. ऐसे घटिया लोगों ने मुरादाबाद में न जाने कितने पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज करा कर थूक कर चाटा है. और, अब ये ही काम जनपद संभल और मुरादाबाद के कुछ चुटिया टाइप पत्रकारों ने अंजाम दिया है.  शरद गौतम के खिलाफ दर्ज मुक़दमे में एक्सपंज रिपोर्ट की छायप्रति भी पोस्ट कर रहा हूं जिसको जहां जरूररत हो इस्तेमाल कर सकता है.

अब्दुल वाजिद

मुरादाबाद

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