RECOMMENDATIONS TO PM AND CJI FOR REFORMS IN LEGAL SYSTEM IN INDIA

3.4.2015
Hon’ble Mr. Narendra Modi,
Prime Minister of India
New Delhi.

Hon’ble Mr. Justice H.L.Dattu,
Chief Justice of India,
New Delhi.

SUB : RECOMMENDATIONS FOR REFORMS IN LEGAL SYSTEM IN INDIA

Hon’ble Prime Minister and Hon’ble Chief Justice,

The People of India and in particular the legal fraternity have high hopes and aspirations from the Prime Minister who is leading a single party government which was formed for the first time in thirty years and the Chief Justice of India who has had a distinguished judicial tenure contributing to a fair and efficient administration of justice. We demand the following reforms from your goodself:

कोटा के बाद दैनिक भास्कर भीलवाड़ा में भी बगावत, प्रबंधन पीछे हटा

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने वाले कर्मियों को लगातार परेशान करने के कारण भास्कर ग्रुप में जगह-जगह विद्रोह शुरू हो गया है. अब तक प्रबंधन की मनमानी और शोषण चुपचाप सहने वाले कर्मियों ने आंखे दिखाना और प्रबंधन को औकात पर लाना शुरू कर दिया है. दैनिक भास्कर कोटा में कई कर्मियों को काम से रोके जाने के बाद लगभग चार दर्जन भास्कर कर्मियों ने एकजुटता दिखाते हुए हड़ताल कर दिया और आफिस से बाहर निकल गए.

बाएं से दाएं : आंदोलनकारी मीडियाकर्मियों के साथ बात करते भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह, अजमेर के वरिष्ठ पत्रकार रजनीश रोहिल्ला और जर्नलिस्ट एसोसिएशन आफ राजस्थान (जार) के जिलाध्यक्ष हरि बल्लभ मेघवाल.

मजीठिया की जंग : जो लेबर इंस्पेक्टर कभी अखबार दफ्तरों की तरफ झांकते न थे, वे आज वहां जाकर जानकारी मांगने को मजबूर हैं

साथियों,  हिमाचल प्रदेश में मजीठिया वेज बोर्ड लागू करने को लेकर मेरे द्वारा बनाया गया दबाव काम करता नजर आ रहा है। हालांकि श्रम विभाग हरकत में तो आया है, मगर अखबार प्रबंधन के दबाव के भय और सहयोग न करने की आदत के चलते श्रम निरीक्षकों को वांछित जानकारी नहीं मिल पा रही है। राहत वाली खबर यह है कि जो श्रम निरीक्षक कभी अखबारों के दफ्तरों की तरफ देखने से भी हिचकिचाते थे, वे आज वहां जाकर जानकारी मांगने को मजबूर हैं। जैसे की आपको ज्ञात है कि मैं मजीठिया वेज बोर्ड के खिलाफ मई २०१४ से लड़ाई लड़ रहा हूं। श्रम विभाग में शिकायतों व आरटीआई के तहत जानकारियां मांगने का दौर जारी है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में पिछले सात माह से मामला चल रहा है। हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट में भी लड़ाई पहुंचा दी है।

दैनिक भास्कर होशंगाबाद के 25 कर्मचारी मजीठिया के लिए गए हाईकोर्ट, नोटिस जारी

दैनिक भास्कर से सबसे ज्यादा मीडियाकर्मी मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी एरियर पाने के लिए कोर्ट की शरण में गए हैं. ये संख्या हजारों में हो सकती है. ताजी सूचना होशंगाबाद यूनिट से है. यहां के करीब 25 मीडियाकर्मियों ने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है. जब इसकी खबर भास्कर के वरिष्ठ पदाधिकारियों को मिली तो इन्होंने हाईकोर्ट जाने वालों कर्मियों को एक एक कर अलग अलग केबिन में बुलाया और धमकाना शुरू कर दिया. इन्हें नौकरी से निकाल दिए जाने की धमकी भी दी गई है. कर्मचारियों से कहा गया कि उन्हें सात दिन गैर-हाजिर दिखाकर नौकरी से टर्मिनेट कर दिया जाएगा.

बगावत की आग दैनिक भास्कर तक पहुंची, कोटा में हड़ताल

मजीठिया वेज बोर्ड पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने वाले मीडियाकर्मियों के प्रताड़ना का सिलसिला तेज हो गया है. दैनिक जागरण नोएडा के कर्मियों ने पिछले दिनों इसी तरह के प्रताड़ना के खिलाफ एकजुट होकर हड़ताल कर दिया था और मैनेजमेंट को झुकाने में सफलता हासिल की थी. ताजी खबर दैनिक भास्कर से है. यहां भी मीडियाकर्मियों को सुप्रीम कोर्ट जाने पर परेशान किया जाना जारी है. इसके जवाब में दैनिक भास्कर के कोटा के दर्जनों कर्मियों ने एकजुट होकर हड़ताल शुरू कर दिया है.

भास्कर प्रबंधन घनघोर उत्पीड़न कर रहा अपने मीडियाकर्मियों का, ऐसे करें बचाव

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए अपने कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट जाते देख दैनिक भास्कर प्रबंधन बुरी तरह भड़क गया और इस बौखलाहट में ऐसे ऐसे कदम उठा रहा है जिससे वह आगे और संकट में फंसता जाएगा. सूत्रों के मुताबिक दैनिक भास्कर प्रबंधन की तरफ से राजस्थान के स्टेट एडिटर ओम गौड़ इन दिनों भास्कर के मैनेजरों की टीम लेकर दैनिक भास्कर के कोटा भीलवाड़ा भरतपुर आदि संस्करणों की तरफ घूम रहे हैं और यहां आफिस में बंद कमरे में बैठक कर एक-एक कर्मी को धमका रहे हैं. कइयों से कई तरह के कागजों पर साइन करवाया जा रहा है तो कुछ को आफिस आने से मना किया जा रहा है.

(अगर मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर कोर्ट जाने पर प्रबंधन आपको परेशान कर रहा है तो उपरोक्त फार्मेट को डाउनलोड कर भर कर लेबर आफिस से लेकर पुलिस-थाना तक जमा कर दें और रिसीविंग रख लें.)

मजीठिया वेज बोर्ड : खुलकर और गोपनीय रूप से लड़ने का रास्ता अब भी है खुला

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील उमेश शर्मा का कहना है कि मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर ढेर सारे मीडियाकर्मियों को फोन और सवाल आ रहे हैं. सभी ये जानना चाहते हैं कि क्या अब खुलकर या गोपनीय रूप से लड़ने का रास्ता बंद हो चुका है या कोई विकल्प है. ऐसे में सबको बताया जाना चाहिए कि अब भी रास्ता खुला हुआ है. जो लोग खुलकर लड़ना चाहते हैं उनकी लड़ाई हाईकोर्ट के जरिए लड़ी जाएगी. जो लोग गोपनीय रूप से लड़ना चाहते हैं, उसके लिए भड़ास पर दुबारा मुहिम शुरू किया जा रहा है.

राजस्थान पत्रिका में मजीठिया वेज बोर्ड के साइड इफेक्ट : डीए सालाना कर दिया, सेलरी स्लिप देना बंद

कोठारी साहब जी, मन तो करता है पूरे परिवार को लेकर केसरगढ़ के सामने आकर आत्‍महत्‍या कर लूं

जब से मजीठिया वेज बोर्ड ने कर्मचारियों की तनख्‍वाह बढ़ाने का कहा व सुप्रीम कोर्ट ने उस पर मोहर लगा दी तब से मीडिया में कार्य रहे कर्मचा‍रियों की मुश्किलें बढ रही हैं. इसी कड़ी में राजस्‍थान पत्रिका की बात बताता हूं। पहले हर तीन माह में डीए के प्‍वाइंट जोड़ता था लेकिन लगभग दो तीन वर्षों से इसे सालाना कर दिया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश को ठेंगा दिखाते हुए तनख्‍वा बढ़ी तो जहां 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी होनी थी तो मजीठिया लगने के बाद कर्मचारियों की तनख्‍वाह में मात्र 1000 रुपए का ही फर्क आया। किसी किसी के 200 से 300 रुपये की बढ़ोतरी।

कोर्ट जाने पर छह मीडियाकर्मियों को भास्कर प्रबंधन ने किया टर्मिनेट

गुजरात से खबर है कि दैनिक भास्कर वालों के गुजराती अखबार दिव्य भास्कर की मेहसाणा यूनिट के 20 मीडियाकर्मियों ने प्रबंधन के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी है. ये लोग मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप सेलरी एरियर न दिए जाने के खिलाफ कोर्ट गए हैं. प्रबंधन को अपने कर्मियों के कोर्ट जाने की जानकारी मिली तो अब सभी को परेशान किया जा रहा है.

संजय गुप्ता को रात भर नींद नहीं आई, जागरण कर्मियों में खुशी की लहर

बहुत दिनों बाद ऐसा हुआ. इसे पहले ही हो जाना चाहिए था. डिपार्टमेंट का कोई भेद नहीं था. सब एक थे. सब मीडियाकर्मी थे. सब सड़क पर थे. सबकी एक मांग थी. मजीठिया वेज बोर्ड खुलकर मांगने और सुप्रीम कोर्ट जाने वाले जिन-जिन साथियों को दैनिक जागरण प्रबंधन ने परेशान किया, ट्रांसफर किया, धमकाया, इस्तीफा देने के लिए दबाव बनाया, उन-उन साथियों के खिलाफ हुई दंडात्मक कार्रवाई तुरंत वापस लो और आगे ऐसा न करने का लिखित आश्वासन दो.

दैनिक जागरण, नोएडा के हड़ताल की आंच हिसार तक पहुंची

दैनिक जागरण, नोएडा में कर्मचारी सड़कों पर उतर गए हैं. प्रबंधन की दमनकारी और शोषणकारी नीतियों के खिलाफ कर्मचारियों का सालों से दबा गुस्‍सा अब छलक कर बाहर आ गया है. मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर एक संपादकीय कर्मचारी का तबादला किए जाने के बाद सारे विभागों के कर्मचारी एकजुट होकर हड़ताल पर चले गए हैं. मौके पर प्रबंधन के लोग भी पहुंच गए हैं, लेकिन कर्मचारी कोई बात सुनने को तैयार नहीं हैं. प्रबंधन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल को बुला लिया है, लेकिन प्रबंधन के शह पर सही गलत करने वाली नोएडा पुलिस की हिम्‍मत भी कर्मचारियों से उलझने की नहीं हो रही है. 

एबीपी न्यूज के एडिटर इन चीफ शाजी जमां अपने चैनल में न्याय क्यों नहीं कर रहे?

: कानाफूसी : एबीपी न्यूज चैनल से खबर है कि पीसीआर में कार्यरत एक वरिष्ठ महिला मीडियाकर्मी को इन दिनों न्याय की तलाश है. एडिटर इन चीफ शाजी जमां को सब कुछ पता है. लेकिन पीड़िता को न्याय नहीं मिल पा रहा. हुआ ये कि पीसीआर में कार्यरत वरिष्ठ महिला मीडियाकर्मी ने एक रोज अपने फेसबुक पेज पर बिना किसी का नाम लिए यह लिख दिया कि ‘एंकर ने कितना घटिया सवाल पूछा’.

मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास की जंग : लीगल नोटिस भेजने के बाद अब याचिका दायर

Yashwant Singh : पिछले कुछ हफ्तों से सांस लेने की फुर्सत नहीं. वजह. प्रिंट मीडिया के कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से उनका हक दिलाने के लिए भड़ास की पहल पर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने की प्रक्रिया में इनवाल्व होना. सैकड़ों साथियों ने गोपनीय और दर्जनों साथियों ने खुलकर मजीठिया वेज बोर्ड के लिए भड़ास के साथ सुप्रीम कोर्ट में जाने का फैसला लिया है. सभी ने छह छह हजार रुपये जमा किए हैं. 31 जनवरी को दर्जनों पत्रकार साथी दिल्ली आए और एडवोकेट उमेश शर्मा के बाराखंभा रोड स्थित न्यू दिल्ली हाउस के चेंबर में उपस्थित होकर अपनी अपनी याचिकाओं पर हस्ताक्षर करने के बाद लौट गए. इन साथियों के बीच आपस में परिचय हुआ और मजबूती से लड़ने का संकल्प लिया गया.

(भड़ास की पहल पर मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर शुरू हुई लड़ाई के तहत मीडिया हाउसों के मालिकों को लीगल नोटिस भेज दिया गया. दैनिक भास्कर के मालिकों को भेजे गए लीगल नोटिस का एक अंश यहां देख पढ़ सकते हैं)

If you want to be judge, please do not have a live in relationship : Markandey Katju

Markandey Katju : Live in Relationship as a disqualification for Judgeship! I was Acting Chief Justice of Allahabad High Court, and Chief Justice of Madras and Delhi High Courts. In these High Courts I had to recommend names of lawyers for appointment as Judges of the High Court. In one of these 3 High Courts (I will not mention which, to avoid identification of the persons concerned) I got a good impression of a certain middle aged male lawyer who appeared several times before me, and always argued his cases well.

चैनल वन से बकाया सेलरी के लिए लड़ रहे एक मीडियाकर्मी का खुला पत्र

संपादक, भड़ास4मीडिया, सादर प्रणाम, मैं भड़ास4 मीडिया का एक नियमित पाठक हूं. आप लोगों ने ना जाने कितनी बार हम पत्रकार लोगों के साथ जो अन्याय कभी हुआ है उसके खिलाफ कदम से कदम मिला कर साथ दिया है, उसके लिए तहे दिल से शुक्रिया अदा करना चाहूंगा. मैं आपको अपने साथ जो अन्याय हुआ है उसके बारे में अवगत कराना चाहूंगा. आशा करता हूं कि आप इसे प्रमुखता से छापकर मेरे जैसे ना जाने कितने लोगों को फर्जी स्टिंग, ब्लैकमेलिंग और कर्मचारियों का शोषण करने वाले इस बदनाम प्रवृति के न्यूज चैनल ‘चैनल वन’ से सावधान कर उनका सही दिशा में मार्ग दर्शन कर सकते हैं. 

मजीठिया वेज बोर्ड पाने के लिए गोपनीय रूप से लड़ाई लड़ें, आखिरी मौका 31 जनवरी तक

मजीठिया वेज बोर्ड पाने के लिए भड़ास की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जाने हेतु आखिरी मौके की तारीख वकील उमेश शर्मा जी की सहमति से बढ़ाई जा रही है. अब आप 31 जनवरी तक इस लड़ाई में गोपनीय / हिडेन / रूप से शिरकत कर सकते हैं. आपको करना सिर्फ इतना है कि नीचे दिए गए अथारिटी लेटर को डाउनलोड कर / सेव एज करके प्रिंट कर लें और उसमें अपने इंप्लायमेंट डिटेल विस्तार से लिखकर (2010 से कब-कब कहां-कहां किन-किन पदों पर रहे हैं) रख लें.

भड़ास के साथ मजीठिया वेज बोर्ड के लिए खुलकर लड़ने वालों के लिए सूचना, 31 जनवरी को दिल्ली पहुंचें

भड़ास के साथ मिलकर मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार एरियर और वेतन पाने की लड़ाई लड़ने वाले उन सभी मीडियाकर्मियों के लिए एक सूचना है जो यह लड़ाई खुलकर अपने नाम पहचान के साथ लड़ना चाहते हैं. ऐसे सभी साथियों को 31 जनवरी को दिल्ली पहुंचना है. 31 जनवरी को दिल्ली में आईटीओ के पास दीनदयाल रोड स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान में 12 बजे से 2 बजे तक बैठक होगी. इसमें वकालतनामा और याचिका पर हस्ताक्षर कराए जाएंगे.

राजस्थान पत्रिका के दस मीडियाकर्मियों ने सभी निदेशकों को भेजा लीगल नोटिस

राजस्थान पत्रिका से खबर है कि यहां के दस मीडियाकर्मियों ने सुप्रीम कोर्ट के एक वकील से संपर्क साधकर मालिकों को लीगल नोटिस भिजवाया है. लीगल नोटिस भिजवाने की पहल की है राजस्थान पत्रिका, उदयपुर के ललित जैन ने. ललित जैन 13 वर्षों से पत्रिका में जूनियर मेंटनेंस आफिसर के पद पर कार्यरत हैं. जैन के नेतृत्व में दस मीडियाकर्मियों ने पत्रिका जो लीगल नोटिस भिजवाया, उसे पत्रिका समूह मुख्यालय की तरफ से रिसीव भी कर लिया गया है.

संदर्भ- आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की सरकारी घेराबंदी : …नहीं तो शेर खा जाएगा!

बचपन में एक कहानी सुनी थी। हांलाकि कहानी तो कहानी ही यानि मनघड़ंत होती है…मगर उससे कुछ सीख मिल जाए तो क्या बुराई है! कहानी कुछ यूं थी कि एक जंगल में चार भैंसे रहते थे। आपस में बेहद प्यार और मिलजुल कर रहते थे। वहीं एक शेर भी रहता था। जिसका मन उनका शिकार करने को हमेशा बना रहता था। लेकिन उनकी एकता के आगे उसकी कभी न चली। जब भी शेर हमला करता चारों मिलकर उसको खदड़े देते। तभी एक लोमड़ी से शेर की वार्तालाप हुई। लोमड़ी को भी शेर के शिकार में अपने पेट भरने के आसार नज़र आए और उसने शेर से कुछ वादा किया।

रेप-उत्पीड़न की शिकार मेडिकल छात्रा का केस सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा लड़ेंगे, पीड़िता ने जारी की रेपिस्ट की तस्वीरें

(पीड़ित मेडिकल छात्रा द्वारा न्याय के लिए बनाए गए फेसबुक पेज के लैटेस्ट स्टेटस का स्क्रीनशाट जिसमें उसने रेपिस्ट की तस्वीरें जारी की हैं.)


भड़ास पर प्रकाशित दिल्ली की एक मेडिकल छात्रा के रेप-उत्पीड़न की खबर पढ़कर सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा ने अपनी तरफ से पहल करते हुए पूरे मामले की कानूनी लड़ाई को अपने हाथ में ले लिया है. इस सार्थक पहल से न्याय के लिए दर-दर भटक रही छात्रा के मन में उत्साह का संचार हुआ है और अब उसे यकीन है कि रेपिस्ट और चीटर मनोज कुमार को दंड मिलेगा.

दिल्ली में रेप, उत्पीड़न और उपेक्षा की शिकार मेडिकल छात्रा ने खुद की कहानी फेसबुक पर विस्तार से बयान की

my story… I am working in a reputed medical institute in Delhi and a victim of the attrocities and crime committed against me by Mr Manoj Kumar S/O Raghaw Pandey resident of village: Adapur, Shyampur, Motihari, Champaner, Bihar. He is a Phd scholar in Dept of Microbiology, Dept of lab medicine, AIIMS under the supervision of Dr Sarman Singh. What has happened with is the rememberence of the time when the women were downtrodden by the powerfull persons in the past. With malafide intentions this Manoj Kumar befriended with me through common friends and then contacted me through social media, he started showing interets in me through common friends.

भड़ास की मुहिम पर भरोसा करें या नहीं करें?

जिन्हें हो खौफ रास्तों का, वो अपने घर से चले ही क्यों?
करें तूफानों का सामना, जिन्हें मंजिलों की तलाश है।

प्रिय साथियों,

समय कम बचा है। अब किसी सुखद अहसास का इंतजार मत करो। अपने कदम बढ़ाओ। वक्त निकलने के बाद आप के हाथ में कुछ भी नहीं रहेगा। मेरे पास देश के हर प्रदेश के पत्रकार साथियों के फोन आ रहे हैं। मैं सबसे हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं कि मुझे फोन करना बंद कर दीजिए। कुछ पत्रकार भड़ास के संपादक यशवंतजी को लेकर आशंकाओं से भरे हैं। पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि भड़ास की मुहिम पर भरोसा करें या नहीं करें। मुझे ऐसे सवालों से दुख हो रहा है।

बंद हो चुके ‘भास्कर न्यूज’ चैनल के मालिकों-संपादकों में घमासान, लेबर डिपार्टमेंट ने आरसी जारी की

‘भास्कर न्यूज’ चैनल के शीर्षस्थ लोगों में घमासान शुरू हो चुका है. खबर है कि राहुल मित्तल ने हेमलता अग्रवाल व समीर अब्बास के खिलाफ नोएडा के किसी थाने में मुकदमा दर्ज करा दिया है. उधर, हेमलता अग्रवाल और समीर अब्बास ने भी राहुल मित्तल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने हेतु थाने में तहरीर पहले से दे रखा है. सूत्रों के मुताबिक चैनल के फेल होने के बाद इसका ठीकरा एक दूसरे पर फोड़े जाने की कवायद शुरू हो गई है.

घर बैठे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करें और मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ उठाएं

Yashwant Singh : अखबार मालिक अपने मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी, एरियर नहीं दे रहे हैं. जो-जो मीडियाकर्मी सुप्रीम कोर्ट गए, उनके सामने प्रबंधन झुका और उनको उनका हक मिल गया. पर हर मीडियाकर्मी सुप्रीम कोर्ट तो जा नहीं सकता. इसलिए भड़ास ने सुप्रीम कोर्ट के एक धाकड़ वकील Umesh Sharma को अपना वकील नियुक्त किया और देश भर के मीडियाकर्मियों का आह्वान किया कि अगर वो मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अपना हक सेलरी एरियर चाहते हैं तो सिर्फ मुझे एक निजी मेल कर दें, अपना नाम पता अखबार का नाम अपना पद अखबार का एड्रेस मोबाइल नंबर मेल आईडी आदि देते हुए. अब तक सैकड़ों मेल मिल चुके हैं.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह का एक पुराना इंटरव्यू

मीडियासाथी डॉट कॉम नामक एक पोर्टल के कर्ताधर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने 10 मार्च 2011 को भड़ास के संपादक यशवंत सिंह का एक इंटरव्यू अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया था. अब यह पोर्टल पाकिस्तानी हैकरों द्वारा हैक किया जा चुका है. पोर्टल पर प्रकाशित इंटरव्यू को हू-ब-हू नीचे दिया जा रहा है ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और यशवंत के भले-बुरे विचारों से सभी अवगत-परिचित हो सकें.

यशवंत सिंह

 

7 फरवरी के बाद मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकेंगे, भड़ास आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार

जी हां. ये सच है. जो लोग चुप्पी साध कर बैठे हैं वे जान लें कि सात फरवरी के बाद आप मजीठिया के लिए अपने प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जा पाएंगे. सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक साल पूरे हो जाएंगे और एक साल के भीतर पीड़ित पक्ष आदेश के अनुपालन को लेकर याचिका दायर कर सकता है. उसके बाद नहीं. इसलिए दोस्तों अब तैयार होइए. भड़ास4मीडिया ने मजीठिया को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस ली है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील उमेश शर्मा की सेवाएं भड़ास ने ली है.

( File Photo Umesh Sharma Advocate )

”P7 में आपका दुबारा स्वागत है…” लेकिन ध्यान से, कहीं फंस मत जइहो भइये

पी7 यानि पीएसीएल उर्फ पर्ल्स ग्रुप का न्यूज चैनल.  लगातार फ्रॉड करते रहने वाले इस ग्रुप के चैनल का अंत भी फ्रॉडगिरी करके हुआ, सैकड़ों मीडियाकर्मियों की तनख्वाह मार के. लेकिन मीडियाकर्मी लड़े और जीते. लेकिन पर्ल्स ग्रुप ने पैंतरा मारते हुए फिर नया खेल किया है. सूत्रों के मुताबिक चैनल को कांग्रेस के नेता जगदीश शर्मा ने खरीद लिया है. इसे देखते हुए पर्ल्स ग्रुप का नया पैतरा ये है कि कर्मचारियों के फुल एंड फाईनल सेटेलमेंट से ठीक पहले पी7 मैनेजमेंट ने अपने आफिस के गेट पर लुभावने आफर वाला एक नोटिस चस्पा कर दिया है.

मजीठिया के हिसाब से पैसा मिलते ही रजनीश रोहिल्ला ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली (देखें कोर्ट आर्डर)

आरोप लगा सकते हैं कि रजनीश रोहिल्ला ने सबकी लड़ाई नहीं लड़ी, अपने तक सीमित रहे और मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से दैनिक भास्कर से पैसे मिलते ही सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली. ज्यादा अच्छा होता अगर रजनीश रोहिल्ला सबकी लड़ाई लड़ते और सारे पत्रकारों को मजीठिया के हिसाब से पैसा दिला देते. लेकिन हम कायर रीढ़विहीन लोग अपेक्षाएं बहुत करते हैं. खुद कुछ न करना पड़े. दूसरा लड़ाई लड़ दे, दूसरा नौकरी दिला दे, दूसरा संघर्ष कर दे, दूसरा तनख्वाह दिला दे. खुद कुछ न करना पड़े. न लड़ना पड़े. न संघर्ष करना पड़े. न मेहनत करनी पड़े.

दिल्ली की भरी कोर्ट में जज को 50 वकीलों ने धमकाया

दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में करीब 50 वकीलों ने जज को धमकाया और सुनवाई करने से रोका। जज ने वाकया आर्डर में लिखकर जिला जज को कॉपी भेजी है। दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) के आपसी विवाद पर डाली गई एक याचिका की सुनवाई के दौरान डीडीसीए के कोषाध्यक्ष रविन्द्र मनचन्दा की तरफ से जिला बार संघ ने ये हंगामा किया।