एचटी और नईदुनिया जैसे बड़े अखबार भोपाल की प्राइम लोकेशन पर बंगला कबाड़े हुए हैं!

मध्यप्रदेश की साहसिक महिला राजपत्रित अधिकारी ने बरसों धीरज रखने के बाद अपने दाम्पत्य जीवन के कृष्ण पक्ष को सकुचाते हुए सार्वजनिक किया है. इससे संबंधित पोस्ट में जहाँ साहित्यिक गतिविधियों से जुड़े पति के भटकने का सच है वहीं अनजाने ही पत्रकार कोटे के सरकारी मकानों का काला सच एक बार फिर सामने आ गया है. मैं इस काले सच को हाईकोर्ट में जनहित याचिका के मार्फ़त उजागर कर चुका हूं.

हिन्दी दैनिक जन माध्यम के मुख्य सम्पादक और पूर्व आईपीएस मंजूर अहमद का फर्जीवाड़ा

: जन माध्यम के तीन संस्करण चलाते हैं मंजूर अहमद : दूसरे की जमीन को अपने गुर्गे के जरिए बेचा, खुद बने गवाह : ताला तोड़कर अपने पुत्र के मकान पर भी कराया कब्जा, पुलिस नहीं कर रही मुकदमा दर्ज : लखनऊ, पटना व मेरठ से प्रकाशित होने वाले हिन्दी दैनिक समाचार पत्र जन माध्यम मुख्य सम्पादक, 1967 बैच के सेवानिवृत्त आई0पी0एस0 अधिकारी एवं लखनऊ के पूर्व मेयर एवं विधायक प्रत्याशी प्रो0 मंजूर अहमद पर अपने गुर्गे के जरिए दूसरे की जमीन को बेचने व खुद गवाह बनने का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। प्रो0 मंजूर अहमद के इस फर्जीवाड़े का खुलासा खुद उनके पुत्र जमाल अहमद ने किया।