स्थायी समाधान नहीं है कर्ज और माफ़ी

यह बड़े दुख की बात है कि भारत जैसे कृषि प्रधान देश के किसान लगातार आत्महत्या की ओर प्रवृत हो रहे हैं. आश्चर्य की बात तो यह कि पिछली सरकार के कृषिमंत्री यह कहते रहे कि उन्हें यह  नहीं मालूम कि किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के 31 मार्च 2013 तक के आंकड़े बताते हैं कि 1995 से अब तक 2,96 438 किसानों ने आत्महत्या की है. 2014 में किसानों की आत्महत्या का ब्यौरा जून महीने तक ज्ञात हो सकेगा. जानकार इस सरकारी आकंडे को काफी कम कर आंका गया बताते हैं.