जस्टिस काटजू और टाइम्स ऑफ इंडिया को कोर्ट का नोटिस

इलाहाबाद की जिला अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू के खिलाफ क्रिमिनल केस की अर्जी मंजूर करते हुए उन्हें नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब तलब किया है। गाय के मांस संबंधी काटजू के बयान पर जस्टिस काटजू जवाब मांगते हुए कोर्ट ने टाइम्स ऑफ इंडिया को भी नोटिस जारी कर दिया है, क्योंकि उसने खबर प्रकाशित की थी। 

काटजू की बात पर मीडिया और सरकार दोनो खामोश क्यों, चीफ जस्टिस पर लगे आरोपों की जांच क्यों नहीं ?

”देश के चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया का मामला है । क़रीब दस महीनों से प्रधानमंत्री समेत क़ानूनी बिरादरी के महानुभावों और मीडिया में ठोकरें खा रहा है । इसकी जाँच क्यों नहीं होनी चाहिए?” अपने एफबी वाल पर शीतल पी सिंह लिखते हैं – ” देश के प्रधानमंत्री ने मना कर दिया है कि वे गौतम अडानी के बारे में, उनके (प्रधानमंत्री के सरकारी घर में ) आने जाने के बारे में किसी RTI का कोई जवाब नहीं देंगे ? सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काट्जू पिछले आठ महीने से सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस के बारे में उन तक पहुँचे दस्तावेज़ों की जाँच की माँग करते प्रतीक्षारत हैं ? व्यावसायिक tycoon और वक़्त फ़िलहाल वांछित ललित मोदी के हवाले से देश के सबसे बड़े अख़बार ने कहा है कि महामहिम राष्ट्रपति की सबसे प्रमुख सहयोगी/सलाहकार/सचिव ओमिता पाल देश के सबसे बड़े हवाला कारोबारी की भागीदार हैं ? इससे बड़े सवाल एक साथ देश के सामने कब थे ? जस्टिस मार्कंडेय काटजू की एक गंभीर टिप्पणी ने भारत के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। काटजू का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोप सही हैं तो दत्तू को भारत का मुख्य न्यायाधीश नहीं होना चाहिए। इस मामले की जांच जरूरी है। दत्तू पर लगे आरोपों की फाइल काटजू ने तत्कालीन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद, वरिष्ठ अधिवक्ता शांति भूषण, उनके बेटे प्रशांत भूषण, टाइम्स ऑफ इंडिया के धनंजय महापात्रा, इंडियन एक्सप्रेस और द हिंदू के पत्रकारों को उपलब्ध करा दी थी। 

भारत के चीफ जस्टिस एचएल दत्तू एवं जस्टिस मार्कंडेय काटजू

जिस दिन काटजू जैसे लोग अपना मुंह बन्द कर लेंगे तो फिर फासीवाद आया ही समझो…

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बरकरार रखने का संघर्ष…

एक जज जब जज होता है तो उसे अपनी जुबान और कलम बन्द रखनी पड़ती है। काटजू Markandey Katju साहब ने बहुत कुछ पढ़ा है, समझा है और जिया है। उनमें अभिव्यक्ति की भूख उसी तरह है जिस तरह सचिन जैसे क्रिकेटर के लिए कहा जाता है कि वह रनों का भूखा है। एक बार जज के खोल से बाहर निकलने के बाद उन्होंने खुद को, अपने विचारों को खुल कर व्यक्त करने का निश्चय किया और इसे वे उसी ब्लागस्पाट डाट इन के उसी प्लेटफार्म पर लिखते हैं जिस पर हजारों साधारण लोग अपना ब्लाग लिखते हैं।

वीके सिंह ने फिर साधा मीडिया पर निशाना, काटजू भी बोल पड़े- मीडिया का बड़ा तबका प्रेस्टीट्यूट है!!

मीडिया को वेश्या कहने वाले विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने अपने बयान के बचाव में फिर मीडिया पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया है कि मेरे साधारण से बयान का मतलब अगर मीडिया ने ये निकाला कि मेरा यमन जाना पाक दिवस कार्यक्रम में जाने से कम रोमांचकारी है तो ऐसी विकृत मानसिकता से भगवान ही बचाए. वी के सिंह ने अपने बयान पर सफाई देते हुए प्रेस कांउसिल ऑफ इंडिया को चिट्ठी भी लिखी है जिसमें मीडिया के एक हिस्से को कोसा है.

गांधी, सुभाष और संसद से भी बड़े हो गए मार्कंडेय काटजू!

खबरों में बने रहने की कला कोई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू से सीखे। एक चुंबक की तरह वे हर एक-दो सप्ताह में किसी न किसी विवाद को आकर्षित कर लेते हैं। इस विवादप्रियता ने न्यायाधीश के दायित्व से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्हें सार्वजनिक जीवन से ओझल नहीं होने दिया। कई बार वे खरी बात कह जाते हैं। ऐसी, जो शायद सच है और जिसे कहने का साहस किसी और ने अब तक नहीं दिखाया। उनकी छवि एक ईमानदार जज की रही है। लेकिन रिटायरमेंट से पहले और रिटायरमेंट के बाद उनके ज्यादातर सार्वजनिक बयान कभी मनोरंजक तो कभी विस्फोटक होते रहे हैं। प्रायः बहुत बड़े मुद्दों पर दिए जाने वाले ये बयान उनकी निजी मान्यताओं और पूर्वग्रहों पर आधारित होते हैं- ऐसे बातें जो हम आपसी बातचीत में अनायास ही कह जाते हैं लेकिन जिन्हें सार्वजनिक रूप से कहा जाना उचित नहीं है। कम से कम देश की सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश रहे व्यक्ति के लिए जिसे इस बात का अच्छी तरह अंदाजा होना चाहिए कि लक्ष्मण रेखा कहाँ है।

राज्यसभा में काटजू के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित

नई दिल्ली: प्रेस काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू अपने ब्लॉग पर लिखी विवादित टिप्पणी को लेकर फंस गए हैं। उनके खिलाफ राज्यसभा में निंदा प्रस्ताव पारित हो गया है। महात्मा गांधी से मुलाकात कर चुके एवं सदन में मौजूद एक अदद ऐसे सदस्य कांग्रेस सदस्य करन सिंह ने इस मामले को सदन में उठाया।

महात्मा गांधी अंग्रेजों के एजेंट : काटजू

अपनी टिप्पणियों से प्रायः सुर्खियों में रहने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने अब अपने ब्लॉग में महात्मा गांधी को ब्रिटिश हुकूमत का एजेंट लिखा है। उन्होंने लिखा है कि गांधी की सभाओं में हिंदू भजन रघुपति राघव राजा राम के बोल सुनाई देते थे। उनके भाषणों और अखबारों में छपे उनके लेख को देखकर यही लगता है कि उनका हिंदुओं के प्रति खास झुकाव था। गांधी अंग्रेजों के डिवाइड एंड रूल की पॉलिसी काम करते थे। महात्मा गांधी ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है। राजनीति में धर्म को घुसाकर फूट डालो और राज करो की ब्रिटिश नीति को आगे बढाया था। गांधी हर भाषण में रामराज्य, ब्रह्मचर्य, गोरक्षा आदि हिन्दूवादी विषयों का जिक्र करते थे। इससे मुस्लिम लीग जैसे संगठनों की पहचान को बल मिला। मुसलमान आकर्षिक हुए। काटजू ने बापू पर निशाना साधते हुए लिखा है कि उनकी वजह से देश को काफी नुकसान हुआ। 

If you want to be judge, please do not have a live in relationship : Markandey Katju

Markandey Katju : Live in Relationship as a disqualification for Judgeship! I was Acting Chief Justice of Allahabad High Court, and Chief Justice of Madras and Delhi High Courts. In these High Courts I had to recommend names of lawyers for appointment as Judges of the High Court. In one of these 3 High Courts (I will not mention which, to avoid identification of the persons concerned) I got a good impression of a certain middle aged male lawyer who appeared several times before me, and always argued his cases well.

काटजू की जगह पूर्व न्यायाधीश सीके प्रसाद होंगे पीसीआई प्रमुख

खबर है कि जस्टिस मार्कंडेय काटजू की जगह प्रेस काउंसिल आफ इंडिया के नए चेयरमैन जस्टिस सीके प्रसाद बनाए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सीके प्रसाद का प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के नए प्रमुख के रूप में चयन उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की अध्यक्षता वाली समिति ने किया है. इस संबंध में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को आदेश मिल चुका है.

जस्टिस मार्कंडेय काटजू का मजाकिया बयान हाईकोर्ट के जज साहब पर भारी पड़ गया!

Markandey Katju : In a divorce case I was hearing in the Supreme Court I said orally in lighter vein “If you want happiness in life do whatever your wife tells you to do. If she tells you to turn your head to the left, turn it left. If she tells you to turn it right, turn in right. Don’t ask the reason. Just do it.”