डीडी के मठाधीशों, आने वाली पीढ़ियों की जड़ों में मट्ठा मत डालो

सोशल मीडिया से ही सुना-पढ़ा है कि गोवा फिल्म फेस्टीवल में डीडी नेशनल का बैंड बजवा चुकी महिला एंकराइन को लेकर संस्थान में ही कई गुट हो गये हैं। प्रसार भारती के सीईओ जवाहर सिरकार इस सवाल के जवाब को लेकर व्याकुल हैं, कि इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम की कवरेज के लिए इन भद्र और अनुभवहीन महिला एंकर को गोवा भेजा ही क्यों गया? इस सवाल की पड़ताल के लिए प्रसार भारती ने अतिरिक्त महानिदेशक स्तर के आला-अफसर को दिल्ली से मुंबई भेजा है। साथ ही प्रसार भारती ने इस सब कलेश को ‘सिस्टम फेल्योर’ मान लिया है।

माखनलाल में मेरी पांच साल की पढ़ाई और आज की विज्ञापनी पत्रकारिता

सम्पादकीय पर विज्ञापन इस कदर हावी है कि लगता ही नहीं कहीं पत्रकारिता हो रही है। ये दौर ऐसा है कि हर कुछ को चाटुकारिता की चाशनी में बार-बार डुबाया जाता है और इसे ही सच्चा बताकर पेश किया जाता है। पत्रकार बनने का सपना लिए हमने 5 साल माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल में गुजारे। काफी गुर भी सीखे। पत्रकारिता की बारीकियों को हमारे गुरुओं ने हमें दम भर सिखाया। इंटर्नशिप ट्रेनिंग के लिए हमें दिल्ली आजतक भी भेजा। लेकिन पढ़ा था कि विज्ञापन और सम्पादकीय दो अलग चीजें होती हैं। लेकिन जब सच्चाई का सामना हुआ तो दिल के टुकड़े हजार भी हुए। हर समय विज्ञापन हावी रहा सम्पादकीय पर।