अखबार मालिकों के संगठन ‘आईएनएस’ की मांग- पत्रकारों के लिये वेतनबोर्ड की व्यवस्था खत्म हो

बेंगलुरु : देश के समाचारपत्रों के सबसे बड़े संगठन इंडियन न्यूज़पेपर्स सोसाइटी (आईएनएस) ने सरकार से अपील की कि वे प्रिंट मीडिया की आर्थिक व्यवहार्यता के लिये अखबारों के पत्रकार एवं गैरपत्रकार कर्मियों के लिये वेतनबोर्ड की प्रणाली समाप्त कर दे और सरकारी विज्ञापनों की दरों में वृद्धि करे. आईएनएस की 76वीं वार्षिक महासभा को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष किरण बी वडोदरिया ने कहा कि सरकार को प्रिंट मीडिया की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये सकारात्मक कदम उठाने चाहिये. मजीठिया वेतनबोर्ड की सिफारिशों के कारण वेतन में असहनीय वृद्धि और सरकारी विज्ञापनों के बजट में कटौती के कारण देश के तमाम छोटे एवं मझोले प्रकाशनों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया है. श्री वडोदरिया ने कहा कि दशकों पुरानी वेतन निर्धारित करने की संवैधानिक प्रणाली को जारी रखने की कोई आवश्यकता नहीं है.

‘पंजाब केसरी’ की खबर में ‘दैनिक सवेरा’ अखबार के मालिक को ‘गंजा’ कहकर संबोधित किया गया!

पंजाब में पंजाब केसरी और दैनिक सवेरा अखबारों के बीच आपसी लड़ाई खूब होती रहती है. ये दोनों अखबार एक दूसरे की पोल खोलते रहते हैं और इसकी खबरें भी अखबार में छापते रहते हैं. पंजाब केसरी की वेबसाइट पर एक खबर फोटो समेत है जिसमें एक दैनिक अखबार की प्रतियां फूंके जाने की बात बताई गई है. दैनिक सवेरा के प्रति पंजाब केसरी के गुस्से को इस बात से समझा जा सकता है कि खबर में कहीं दैनिक सवेरा का नाम भले ही न हो लेकिन उसके मालिक को गंजा कहकर संबोधित किया गया है. फोटो से जाहिर हो जा रहा है कि अखबार दैनिक सवेरा ही है. कम से कम एक दूसरे को गंजा या काला या नाटा कहकर बिलो द बेल्ट वार तो नहीं ही की जानी चाहिए. बाकी, पोल खोल खबरों से असल फायदा जनता को, पाठकों को होता है जिन्हें बड़े-बड़ों की छोटी-चीप हरकतों के बारे में मालूमात होता रहता है. नीचे पंजाब केसरी में प्रकाशित तस्वीर और तस्वीर है.

-यशवंत, एडिटर, भड़ास4मीडिया