भड़ास की मुहिम पर भरोसा करें या नहीं करें?

जिन्हें हो खौफ रास्तों का, वो अपने घर से चले ही क्यों?
करें तूफानों का सामना, जिन्हें मंजिलों की तलाश है।

प्रिय साथियों,

समय कम बचा है। अब किसी सुखद अहसास का इंतजार मत करो। अपने कदम बढ़ाओ। वक्त निकलने के बाद आप के हाथ में कुछ भी नहीं रहेगा। मेरे पास देश के हर प्रदेश के पत्रकार साथियों के फोन आ रहे हैं। मैं सबसे हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं कि मुझे फोन करना बंद कर दीजिए। कुछ पत्रकार भड़ास के संपादक यशवंतजी को लेकर आशंकाओं से भरे हैं। पत्रकार मुझसे पूछ रहे हैं कि भड़ास की मुहिम पर भरोसा करें या नहीं करें। मुझे ऐसे सवालों से दुख हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया- मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को रिपोर्ट के प्रावधानों के अनुसार ही लागू करना है

मजीठिया मंच : मालिकों को जोर का झटका, धीरे से… इंडियन एक्सप्रेस बनाम कर्मचारी यूनियन के दिल्‍ली वाले मामले में 18 तारीख की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को रिपोर्ट के प्रावधानों के अनुसार ही लागू करना है। माननीय कोर्ट ने प्रबंधन की इस रिपोर्ट को अपने तरह से लागू करने की कोशिश पर शपथप्रत्र दायर करने को कहा है। प्रबंधन इस रिपोर्ट के एसीडी और डीए तथा बेसिक वेतनमान को अपने तरह से परिभाषित करने की कोशिश कर रहा है।

भड़ास संग मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने को 250 मीडियाकर्मी तैयार, 25 जनवरी तक कर सकते हैं आवेदन

जी हां. करीब ढाई सौ मीडियाकर्मियों ने भड़ास के साथ मिलकर अपना हक पाने के लिए मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने हेतु भड़ास के पास मेल किया है. जिन-जिन ने मेल किया, उन सभी एडवोकेट उमेश शर्मा का एकाउंट नंबर और अथारिटी लेटर भेज दिया गया है. सिर्फ छह हजार रुपये देकर घर बैठे अपने हक की लड़ाई लड़ने के भड़ास के इस अनूठे पहल का देश भर में स्वागत किया जा रहा है.

घर बैठे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करें और मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ उठाएं

Yashwant Singh : अखबार मालिक अपने मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी, एरियर नहीं दे रहे हैं. जो-जो मीडियाकर्मी सुप्रीम कोर्ट गए, उनके सामने प्रबंधन झुका और उनको उनका हक मिल गया. पर हर मीडियाकर्मी सुप्रीम कोर्ट तो जा नहीं सकता. इसलिए भड़ास ने सुप्रीम कोर्ट के एक धाकड़ वकील Umesh Sharma को अपना वकील नियुक्त किया और देश भर के मीडियाकर्मियों का आह्वान किया कि अगर वो मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से अपना हक सेलरी एरियर चाहते हैं तो सिर्फ मुझे एक निजी मेल कर दें, अपना नाम पता अखबार का नाम अपना पद अखबार का एड्रेस मोबाइल नंबर मेल आईडी आदि देते हुए. अब तक सैकड़ों मेल मिल चुके हैं.

Newspaper establishment definition for Majithia Wage Board

(File Photo Advocate Umesh Sharma)


: A brief discussion on Newspaper establishment definition for Majithia Wage Board : After the pronouncement of the judgment directing all newspaper establishments to pay the benefits of Majithia Wage Board to its employees, most of the newspaper establishments have reluctantly started granting the benefits halfheartedly. Now another issue has cropped up as most of the affected employees from both journalists and non-journalist category are facing another problem of fixation of their benefits under the Wage Board. Most of the establishments; with a view to circumvent the laws and deny the benefits to employees have adopted manifold strategy including misrepresentation of their turnovers and floating different companies, legal entities to bifurcate the gross revenue of the entire establishment.

Majithia Case: Order of SC dated 12th January 2016

Dated: 12/01/2016

ITEM NO.2 COURT NO.7 SECTION X

S U P R E M E C O U R T O F I N D I A

RECORD OF PROCEEDINGS

CONTEMPT PETITION (C) NO. 411/2014

IN

WRIT PETITION (C) NO. 246/2011

AVISHEK RAJA & ORS. PETITIONER(S)

VERSUS SANJAY GUPTA RESPONDENT(S)

(WITH APPLN. (S) FOR IMPLEADMENT AND OFFICE REPORT)

WITH CONMT.PET.(C) NO. 33/2015 IN W.P.(C) NO. 246/2011

(WITH APPLN.(S) FOR PERMISSION TO PLACE ADDL. DOCUMENTS ON RECORD AND OFFICE REPORT)

ON hearing the counsel the Court made the following

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह का एक पुराना इंटरव्यू

मीडियासाथी डॉट कॉम नामक एक पोर्टल के कर्ताधर्ता महेन्द्र प्रताप सिंह ने 10 मार्च 2011 को भड़ास के संपादक यशवंत सिंह का एक इंटरव्यू अपने पोर्टल पर प्रकाशित किया था. अब यह पोर्टल पाकिस्तानी हैकरों द्वारा हैक किया जा चुका है. पोर्टल पर प्रकाशित इंटरव्यू को हू-ब-हू नीचे दिया जा रहा है ताकि यह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और यशवंत के भले-बुरे विचारों से सभी अवगत-परिचित हो सकें.

यशवंत सिंह

 

7 फरवरी के बाद मजीठिया के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकेंगे, भड़ास आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार

जी हां. ये सच है. जो लोग चुप्पी साध कर बैठे हैं वे जान लें कि सात फरवरी के बाद आप मजीठिया के लिए अपने प्रबंधन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जा पाएंगे. सात फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के एक साल पूरे हो जाएंगे और एक साल के भीतर पीड़ित पक्ष आदेश के अनुपालन को लेकर याचिका दायर कर सकता है. उसके बाद नहीं. इसलिए दोस्तों अब तैयार होइए. भड़ास4मीडिया ने मजीठिया को लेकर आर-पार की लड़ाई के लिए कमर कस ली है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील उमेश शर्मा की सेवाएं भड़ास ने ली है.

( File Photo Umesh Sharma Advocate )

मजीठिया के हिसाब से पैसा मिलते ही रजनीश रोहिल्ला ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली (देखें कोर्ट आर्डर)

आरोप लगा सकते हैं कि रजनीश रोहिल्ला ने सबकी लड़ाई नहीं लड़ी, अपने तक सीमित रहे और मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से दैनिक भास्कर से पैसे मिलते ही सुप्रीम कोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली. ज्यादा अच्छा होता अगर रजनीश रोहिल्ला सबकी लड़ाई लड़ते और सारे पत्रकारों को मजीठिया के हिसाब से पैसा दिला देते. लेकिन हम कायर रीढ़विहीन लोग अपेक्षाएं बहुत करते हैं. खुद कुछ न करना पड़े. दूसरा लड़ाई लड़ दे, दूसरा नौकरी दिला दे, दूसरा संघर्ष कर दे, दूसरा तनख्वाह दिला दे. खुद कुछ न करना पड़े. न लड़ना पड़े. न संघर्ष करना पड़े. न मेहनत करनी पड़े.

जागरण के वकील ने कोर्ट से कहा- 708 कर्मचारियों ने मजीठिया मसले पर प्रबंधन से समझौता कर लिया है

जब पीपी राव हुए निरुत्तर…  मजीठिया वेज बोर्ड पर सुनवाई… नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट । कोर्ट नंबर 9 । आइटम नंबर 42 । जैसे ही दैनिक जागरण प्रबंधन के खिलाफ यह मामला सुनवाई के लिए सामने आया न्याययमूर्ति रंजन गोगोई ने दैनिक जागरण प्रबंधन के वकील से सीधे पूछ लिया कि क्या आपने अपने यहां मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू किया। इस पर दैनिक जागरण की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील श्री पीपी राव पहली बार तो कुछ नहीं बोले लेकिन जब न्याययमूर्ति गोगोई ने दोबारा यही सवाल किया तो श्री राव ने कहा कि उन्हें अदालत का नोटिस नहीं मिला है।

मजीठिया वेज बोर्ड : रजनीश रोहिला समेत तीन मीडियाकर्मियों के आगे झुका भास्कर प्रबंधन, पूरे पैसे दिए

(फाइल फोटो : रजनीश रोहिला)


इसे कहते हैं जो लड़ेगा वो जीतेगा, जो झुकेगा वो झेलेगा. अजमेर भास्कर के सिटी रिपार्टर रजनीश रोहिला, मार्केटिंग के संदीप शर्मा और संपादक के पीए ने अखबार मालिकों के तुगलकी फरमान को न मानकर लड़ाई लड़ी और जीत गए. इस तरह भास्कर प्रबंधन को झुकाकर इन तीनों ने लाखों बेचारे किस्म के पत्रकारों को रास्ता दिखाया है कि लड़ोगे तो लोगे, झुकोगे तो झेलोगे. तीनों ने भास्कर से अपने हिस्से का मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से भरपूर पैसा ले लिया है.

मजीठिया वेज बोर्ड : जगजीत राणा यानि कार्टूनिस्‍ट तोता बाबू जागरण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए, गुलाब चंद कोठारी पर भी केस

साथियों, दैनिक जागरण के खिलाफ सर्वोच्‍च न्‍यायालय में एक और अवमानना का मामला दर्ज कराया गया है। यह मामला जगजीत राणा यानि कार्टूनिस्‍ट तोता बाबू ने दर्ज कराया है। सर्वोच्‍च न्‍यायालय के रजिस्‍ट्री में इसे 28 अक्‍टूबर को दर्ज करया गया है। इस तरह जेपीएल के मालिकों के खिलाफ दो मामले अब तक दर्ज हो चुके हैं। सबसे उत्‍साहजनक खबर राजस्‍थान पत्रिका से है। वहां के साथियों ने भी गुलाब चंद कोठारी के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज करा दिया है। इसका केस नंबर 572 है। इसी माह हैदराबाद के एक अखबार मालिक के खिलाफ भी अवमानना का मामला दर्ज हो चुका है। इसका केस नंबर 571 है। अगर पूरक काउज लिस्‍ट में ये दोनों मामले शामिल कर लिए जाते हैं तो उम्‍मीद की जानी चाहिए कि इनकी भी सुनवाई 5 जनवरी को हो सकती है।

इंडियन एक्सप्रेस के सभी संस्करणों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर मजीठिया देने की खानापूर्ति कर रहे हैं विवेक गोयनका

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खिल्ली उड़ाने में जुटे हुए हैं भारत के हिंदी-अंग्रेजी समेत दर्जनों भाषाओं के अखबार व पत्र-पत्रिकाएं


: इंडियन एक्सप्रेस लखनऊ के कर्मचारियों को मजीठिया के नाम पर लगा दी गहरी चपत : इंडियन एक्सप्रेस अखबार समूह के मालिक-मैनेजमेंट का एक ही रोना है कि उसकी आय-कमाई इतनी नहीं है कि पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों के अनुसार बढ़ाकर वेतन एवं अन्य लाभ-फायदे दिए जा सकें। अपनी इस रोनी अदा को स्थाई रूप देने के लिए उन्होंने बनावटी-झूठी दलीलों का पुलिंदा बना-तैयार करके रखा हुआ है। उन्होंने सबसे पुख्ता, पर उतनी ही झूठी, गैर कानूनी दलील-तर्क, खासकर लखनऊ संस्करण के संबंध में यह गढ़ रखी है कि उनका यह संस्करण कमाई के मामले में फिसड्डी है। इस एडीशन में कमाई इतनी भी नहीं हो रही है कि हम कर्मचारियों को मौजूदा सेलरी ही सहजता से दे सकें, मजीठिया के हिसाब से वेतन देना तो दूर की बात है। लेकिन जब से सुप्रीम कोर्ट का डंडा चलना शुरू हुआ है तो मालिकान ने उसकी चोट से बचने के लिए इस संस्करण में भी मजीठिया देने का एलान किया हुआ है। वो भी पांचवीं श्रेणी का स्केल।

राजस्थान पत्रिका के इंप्लाई रहे सुमित ने मालिकों-संपादकों को पत्र लिखकर मजीठिया वेजबोर्ड के हिसाब से भुगतान मांगा

नैतिकता और नीतियों की दुहाई दे देकर खुद का घर भरने वाले अखबारों के मालिकों की चमड़ी इतनी मोटी हो गई है कि इन्हें अब किसी से भय नहीं लगता. राजनीति, नौकरशाही और न्यायपालिका को अपनी मुट्ठी में कर चुके ये लोग अब सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं. पर इनकी अकूत ताकत से हार न मानते हुए कुछ ऐसे वीर सामने आ जाते हैं जो इन्हें खुली चुनौती दे डालते हैं. ऐसे ही एक वीर का नाम सुमित कुमार शर्मा (मोबाइल- 07568886000) है.

 

ये संपादक लोग अपने चैनल के अंदर कर्मचारियों के चल रहे सतत् शोषण-उत्पीडऩ से अनजान क्यों बने रहते हैं

: मजीठिया पर सुप्रीम कोर्ट की नोटिस को चैनलों ने भी खबर आइटम बनाने की जहमत नहीं उठाई : ‘पी 7 चैनल के पत्रकार कर्मचारी लंबी लड़ाई के मूड में हैं।’ इस चैनल के पत्रकारों के जारी आंदोलन और उनकी तैयारियों की बाबत भड़ास पर प्रकाशित इस पंक्ति सरीखी अनेक पंक्तियों एवं फोटुओं-छवियों से पूरी तरह साफ हो जाता है कि इस चैनल के पत्रकार कर्मचारी अपने मालिक की बेईमानी, वादाखिलाफी, कर्मचारियों को उनका हक-पगार-सेलरी-बकाया-दूसरे लाभ देने के लिए किए गए समझौते के उलट आचरण-बर्ताव करने का दोटूक, फैसलाकुन, निर्णायक जवाब देने के लिए तैयार-तत्पर-सक्रिय हो गए हैं। उनके रुख से साफ है कि वे किसी भी सूरत में झुकेंगे नहीं और अपना हक लेकर, अपनी मांगें पूरी करा कर रहेंगे।

इंडियन एक्सप्रेस चंडीगढ़ में मजीठिया पर मैनेजमेंट का रवैया : दिलेरी की पत्रकारिता का परचम और कर्मचारियों के पेट पर लात

मस्तक यानी मास्टहेड पर अंकित है journalism of courage । मतलब दिलेरी, धैर्य, निर्भयता, पराक्रम, प्रताप, वीरता, शौर्य, शूरता, साहस, हिम्मत की पत्रकारिता। इंडियन एक्सप्रेस अखबार समूह इन्हीं शब्दों को अपने ध्वज-पताके-परचम पर दर्ज करवा कर उसे उठाए-लहराए चल रहा है, चलता जा रहा है। इसी को अपने हक में भुना रहा है, भुनाता रहा है और आगे भी भुनाते रहने की मंशा बांधे बैठा है। एक लिहाज से यह ठीक भी है। व्यवसाय, कारोबार, धंधे का अंतिम लक्ष्य तो लाभ-फायदा-मुनाफा कमाना ही तो होता है! लेकिन सवाल है कि इसे करने वाला है कौन? आदमी, मनुष्य, इंसान? या कोई और?

दैनिक जागरण के मालिकों ने नरेंद्र मोदी से की मुलाकात, जागरणकर्मियों का चेहरा हुआ उदास

खबर है कि दैनिक जागरण के मालिकों की टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें पीएम राहत कोष के लिए चार करोड़ रुपये का चेक सौंपा. साथ ही सबने प्रधानमंत्री के साथ फोटो खिंचवाई. दैनिक जागरण के CMD महेंद मोहन गुप्त, प्रधान संपादक और CEO संजय गुप्त समेत कई गुप्ताज और इनके वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत मिश्र तस्वीर में दिख रहे हैं, मुस्कराते. पर निराशा जागरण कर्मियों के चेहरे पर छा गई है.

मजीठिया वेज बोर्ड : डीएनए, मुंबई में लागू होते ही कर्मी डिमोट हो गए और सेलरी घट गई!

खबर है कि डीएनए अंग्रेजी अखबार मुंबई में मजीठिया वेज बोर्ड का इंप्लीमेंटेशन वर्ष 2010 के डिजीगनेशन के हिसाब से किया गया है. उस वक्त जो जिस पद पर था, उस पद के हिसाब से मिल रही सेलरी के आधार पर मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक नई सेलरी फिक्स की गई है. इस कारण ज्यादातर लोग एक तो डिमोट हो गए और वर्तमान में मिल रही सेलरी से कम सेलरी पाने लगे हैं. अदभुत है यह पत्रकारों का वेज बोर्ड भी.

इंडियन एक्सप्रेस चंडीगढ़ के 38 कर्मचारियों का वेतन कम कर दिया गया

: गंभीर मसला है वेतन कटौती का : इंडियन एक्सप्रेस चंडीगढ़ के 38 कर्मचारियों का वेतन कम कर दिया गया है जबकि मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक सभी का वेतन ढाई से तीन गुना तक बढऩा चाहिए। कर्मचारियों को उम्मीद थी, उनका आकलन था कि नए वेज बोर्ड के क्रियान्वयन से उनकी सेलरी में भरपूर इजाफा होगा। लेकिन हो उल्टा गया। अब कर्मचारी बहुत परेशान हैं। असल में मालिक विवेक गोयनका की मंशा-नीयत ही ऐसी है कि कर्मचारियों को मजीठिया के पूरे लाभ कर्मचारियों को न दिए जाएं।

भास्कर के मालिकों की इच्छा पूरी न हो सकी, सुप्रीम कोर्ट की सख्ती से बेहाल

 

सुप्रीम कोर्ट की ओर से दी गई दो महीने की मियाद खत्म होने में अब थोड़ा ही वक्त शेष रह गया है। यही वह गंभीर, गलाकाटू या कहें कि जानलेवा खंजर-तलवार, नए जमाने का वह आयुध है जो यदि प्राण बख्श भी दे तो चेत-चेतना को कदापि नहीं बख्शेगा। मतलब, जान बच भी जाए तो शेष जीवन अचेतावस्था में ही गुजरने के सारे बंदोबस्त मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों को लागू करने के सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश ने कम से कम दैनिक भास्कर के महामहिम मालिकों के लिए तो कर ही दिए हैं। भास्कर मालिकान ने मजीठिया से बचने के लिए अपने भरसक सारे जुगत – कोशिश – उपाय – प्रयास कर लिए, यहां तक कि उन कर्मचारियों को भी येन-केन प्रकारेण अपने पक्ष में करने, धमकाने-फुसलाने-बहलाने, खरीदने, सेटलमेंट-समझौता करने के अथक-अनवरत प्रयास किए, लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिली।

मजीठिया की लड़ाई : श्रम विभाग अवैध कमाई का सबसे बड़ा जरिया, सीधे कोर्ट जाएं

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी मजीठिया न देना दैनिक भास्कर, जागरण के मालिकों के लिए गले का फंस बन सकता है। इन दोनों अखबारों के मालिक अपने अपने अखबारों के कारण ही खुद को देश का मसीहा समझते हैं। देश का कानून ये तोड़ मरोड़ देते हैं। प्रदेश व देश की सरकारें इनके आगे जी हजूरी करती हैं। लेकिन अब देखना होगा कि अखबार का दम इनका कब तक रक्षा कवच बना रहता है क्योंकि जनवरी में मानहानि के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। कारपोरेट को मानहानि के मामले में सिर्फ जेल होती है। अब देखना होगा कि सहाराश्री के समान क्या अग्रवाल व गुप्ता श्री का भी हाल होता है या फिर मोदी सरकार अखबार वालों को कानून से खेलने की छूट देकर चुप्पी साध लेती है। मोदी सरकार पत्रकारों को मजीठिया दिलवाने के मामले में बेहद कमजोर सरकार साबित हुई है। मालिकों को सिर्फ नोटिस दिलवाने से आगे कुछ नहीं कर पाई।

सलाखों के भय से ‘चंडीगढ़ इंडियन एक्सप्रेस’ ने मजीठिया आधा-अधूरा लागू किया, …लेकिन भास्कर कर्मियों का क्या होगा?

सबके दुख-सुख, विपदा-विपत्ति, परेशानी-मुसीबत, संकट-कष्ट, मुश्किल-दिक्कत, आपत्ति-आफत आदि-इत्यादि को अपनी कलम-लेखनी, कंप्यूटर के की-बोर्ड से स्टोरी-आर्टिकल, समाचार-खबर की आकृति में ढाल कर अखबारों, समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की अनवरत मशक्कत-कसरत करने वाले मीडिया कर्मियों को अपने ही गुजारे के लिए मिलने वाली पगार अमृत समान हो गई है। हां जी, अमृत समान! मजीठिया वेज बोर्ड की संस्तुतियों को लेकर अखबारों के कर्मचारियों और मालिकान के बीच चल रही लड़ाई शायद इसी पौराणिक कथा का दूसरा, पर परिवर्तित रूप लगती है।

मजीठिया वेज बोर्ड देने में महाराष्ट्र के दूसरे सबसे बड़े समाचार पत्र समूह ने गड़बड़ी-धोखाधड़ी की!

यशोभूमि (हिंदी), पुण्यनगरी (मराठी), मुंबई चौफेर (मराठी), आपलं वार्ताहर (मराठी), कर्नाटक मल्ला (कन्नड़) का प्रकाशन करने वाले तथा अपने आपको महाराष्ट्र का दूसरा सबसे बड़ा समाचार पत्र समूह बताने वाले संस्थान अंबिका ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशनुसार मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन गणना करते समय गड़बड़ी की है. कंपनी द्वारा वेज बोर्ड के मुद्दे पर उदासीनता दिखाने पर लंबे समय तक इंतजार करने के बाद पत्रकारों ने कामगार आयुक्त के यहां शिकायत दर्ज कराई थी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार वेतन दिलवाने का आग्रह किया था। जिस पर आयुक्त ने अंबिका ग्रुप से इस बारे में जबाब मांगा था। अंबिका ग्रुप ने 30 अक्टूबर को कामगार आयुक्त के यहां पत्र देकर आश्वस्त किया था कि वह इसी माह से कोर्ट के निर्देशानुसार निर्धारित वेतन देने लगेंगे और एरियर का भी भुगतान इसी वर्ष कर देंगे।

मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से सेलरी और डीए कैलकुलेशन के लिए इसे जरूर पढ़ें

भड़ास के पास मीडिया के दो साथियों ने आज दो अलग अलग मेल भेज कर ढेर सारे अखबार कर्मियों के लिए मजीठिया के हिसाब से एक्चुवल सेलरी और डीए गणना के काम को आसान कर दिया है. पहले नंबर वाला मेल नवभारत अखबार छत्तीसगढ़, रायपुर के कर्मचारियों की तरफ से भड़ास को प्रेषित है.

मजीठिया लागू होने के बाद इस मीडिया संस्थान के पत्रकारों का न्यूनतम वेतन 40 हजार हो गया है!

गुवाहाटी : 29 नवंबर को पूर्वोत्तर के दौरे पर आ रहे प्रधानमंत्री गुवाहाटी से प्रकाशित अंग्रेजी दैनिक असम ट्रिब्यून के स्वर्ण जयंति समारोह में भाग लेंगे। यह देश का एक मात्र ऐसा अखबार है जिसने अपने कर्मचारियों के लिए मजीठिया वेतन आयोग बिना देरी किए लागू कर दिया। मजीठिया लागू होने के बाद इस संस्थान के पत्रकारों का न्यूनतम वेतन 40 हजार हो गया है। जबकि इसी प्रदेश में दूसरे अखबारों के पत्रकारों की अधिकतम सैलरी आवश्यकताओं की पूर्ति के लायक भी नहीं है। अर्थात 90 फीसदी पत्रकारों का वेतन 6000 हजार से नीचे है। जो एक राजमिस्त्री और उसके मजदूर की दिहाड़ी से भी कम है।

मजीठिया वेज बोर्ड देने से पहले नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बना रहा नई दुनिया प्रबंधन!

श्रवण गर्ग के नई दुनिया से विदा होने के बाद पत्रकारों पर बिजनेस लाने के लिए दबाव दिया जाने लगा है. पिछले माह 17 सितंबर को जबलपुर मुख्यालय में ब्यूरो की मीटिंग की गई. मीटिंग में इंदौर से भी कुछ लोग आए थे. मीटिंग में पत्रकारों से कहा गया कि अब आपको न्यूज के साथ बिजनस और सर्कुलेशन भी देखना है. इसके बाद इसी माह 15 नंवबर को एक बार फिर मीटिंग का आयोजन जबलपुर कार्यालय में किया गया. इस मीटिंग में सभी ब्यूरो को अलग अलग बुलाकर डांट पिलाई गई. निकाले जाने की धमकी भी दी गई. मीटिंग के बाद से देखने में आ रहा है कि न सिर्फ बिजनेस बल्कि न्यूज में भी डेस्क प्रभारियों के रंग बदल गए हैं.

मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना रिटायर करने पर भास्कर वालों को नोटिस भेजा

आदरणीय यशवंतजी, मैं दैनि​क भास्कर सागर संस्करण में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर पदस्थ हूं। मैंने मजीठिया वेज बोर्ड में तहत भास्कर प्रबंधन को एक नोटिस दिया है। अभी तक प्रबंधन ने इस पर ​कोई संज्ञान नहीं लिया है। मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दिए बिना कंपनी ने 4 अक्टूबर को मेरा रिटायरमेंट तय कर दिया।

सिर्फ 5000 रुपये में काम कर रहे हैं दैनिक जागरण, लखीमपुर के रिपोर्टर

दैनिक जागरण लखीमपुर ब्‍यूरो आफिस में इन दिनों संवाददाताओं / रिपोर्टरों का जमकर शोषण हो रहा है… बेहद कम पैसे में ये लोग काम करने पर मजबूर हैं.. प्रबंधन की तरफ से वेतनमान बढाने का झांसा काफी समय से दिया जा रहा है… बार वादा हर बार वादा ही साबित हो रहा है… बेरोजगारी के कारण रिपोर्टर चुपचाप मुंह बंद कर काम कर रहे हैं.. कोई आवाज नहीं उठाता क्योंकि इससे उन्हें जो कुछ मिल रहा है, वह भी मिलना बंद हो जाएगा…

CM Okram Ibobi hums Majithia Wage Board tune

IMPHAL : The mandatory tripartite committee comprising of working journalists, publishers and Government representatives has already been formed and the State Government is fully committed to implement the Justice Majithia Wage Board in the State, said Chief Minister Okram Ibobi while speaking at the inaugural function of the three-day National executive meeting of the Indian Journalists Union (IJU) at the banquet hall of 1st Manipur Rifles today.