नवभारत मुंबई प्रबंधन की प्रताड़ना के शिकार मजीठिया क्रांतिकारी विमल मिश्र की मौत

मुंबई : चार साल से नवभारत प्रबंधन की प्रताड़ना से जंग लड़ रहे नवभारत के रिपोर्टर विमल मिश्र का निधन हो गया। नवभारत प्रबंधन ने उन्हें न तो ट्रांसफर किया था, ना ही सस्पेंड किया और ना ही टर्मिनेट किया। इसके बावजूद वेतन नहीं दे रहा था। तकरीबन 4 साल पहले श्री मिश्र ने नवभारत के मालिक विनोद माहेश्वरी व प्रबंधन के खिलाफ ठाणे कोर्ट में प्रताड़ना का केस दायर किया जो अभी तक विचाराधीन है। Continue reading

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मजीठिया वेज बोर्ड मामले में पत्रकारों के पक्ष में बॉम्बे हाई कोर्ट का अहम फैसला

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में बॅाम्बे हाई कोर्ट ने दी कर्मचारियों को बड़ी राहत, लेबर कोर्ट में हो रही सुनवाई पर हस्तक्षेप करने से किया इनकार, कंपनी द्वारा उठाये गए आपत्ति को भी किया रिजेक्ट, एडवोकेट उमेश शर्मा ने दमदार तरीके से रखा बॉम्बे हाई कोर्ट में कर्मचारियों का पक्ष…

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राष्ट्रीय सहारा के गुणानंद को मजीठिया मामले में मिली लेबर कोर्ट में जीत

लेबर कोर्ट देहरादून ने दिया सहारा को बड़ा झटका… ठेका कर्मी को नियमित कर्मचारी मानते हुए मजीठिया देने का आदेश…

राष्ट्रीय सहारा को लेबर कोर्ट देहरादून ने करारा झटका दिया है। श्रम न्यायालय ने सहारा प्रबंधन के तमाम तिकडम और दबाव के बावजूद कर्मचारियों के हक में फैसला दिया है। श्रम न्यायालय के माननीय जज एस के त्यागी ने राष्ट्रीय सहारा देहरादून में मुख्य उप संपादक के रूप में कांट्रेक्ट पर तैनात गुणानंद जखमोला को नियमित कर्मचारी माना। Continue reading

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सहारा को तीन बर्खास्त मीडियाकर्मियों की बहाली और मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से वेतन देने के निर्देश

देहरादून। राष्ट्रीय सहारा प्रबंधन को अपने यहां से निकाले गए मीडियाकर्मियों के मामले में झटका लगा है। लेबर कोर्ट ने तीन कर्मियों की बर्खास्तगी को अवैध मानते हुए उनकी बहाली के साथ ही मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन देने का भी निर्देश दिया है। Continue reading

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मजीठिया केस : दैनिक जागरण पर लगा बीस हजार रुपये का जुर्माना

Brijesh Pandey : दैनिक जागरण हिसार के 41 कर्मियों का टेर्मिनेशन का मामला… हिसार के 41 कर्मियों के टर्मिनेशन के मामले में 16 A की शिकायत के बाद सरकार ने 17 की शक्ति का प्रयोग करते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में 6 माह की समय सीमा के साथ न्यायनिर्णय हेतु लेबर कोर्ट हिसार भेज कर दोनों पक्षों को 29 जनवरी 2018 को उपस्थित होने का निर्देश दिया। Continue reading

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मजीठिया मामले में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने जरूरी कदम उठाने का दिया भरोसा

उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने उत्तर प्रदेश के पत्रकारों को भरोसा दिलाया है कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को पूरी तरह लागू कराने के लिये वे जो भी आवश्यक कदम होगा, जरूर उठायेंगे। इसके लिये राज्यपाल ने कहा है कि पत्रकार अपने एजेंडे के साथ उनसे मिलने आयें और इस वेज बोर्ड को लागू कराने में जो भी समस्या आयेगी, उसे दूर करने के लिये दखल दिया जायेगा। Continue reading

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जागरण ग्रुप के नई दुनिया अखबार से होगी दो लाख तीस हजार रुपये की वसूली, देखें आदेश की कॉपी

श्रम न्यायालय ने जारी किया आदेश, पत्रकारों में खुशी लेकिन मालिकों में मायूसी… जागरण ग्रुप के नई दुनिया अखबार के इंदौर आफिस में प्लांट पर कार्य करने वाले मनोहर यादव ने बकाया वेतन की राशि के लिए श्रम न्यायालय की शरण ली थी। इसी कारण नई दुनिया प्रबंधन ने उन्हें दो वर्ष पूर्व अवैध तरीके से रिटायर कर दिया था। इस दौरान मनोहर की मृत्यु हो गई तथा न्यायालय में केस विचाराधीन था।

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दैनिक भास्कर के जालंधर आफिस की कुर्की का आदेश

BHASKAR

मजीठिया वेजबोर्ड का बकाया ना देने के कारण होगी कार्रवाई… ए.एल.सी. द्वारा पास किया 23.52 लाख का क्लेम ब्याज सहित अदा ना किया तो होगी भास्कर कार्यालय की नीलामी…

पंजाब के फिरोजपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां सहायक लेबर कमिश्रर फिरोजपुर की कोर्ट द्वारा भास्कर कर्मी राजेन्द्र मल्होत्रा को 23 लाख 52 हजार 945 रुपये 99 पैसे की राशि देने के आदेश के बाद भास्कर प्रबंधन द्वारा आनाकानी करने के उपरांत भास्कर के जालंधर कार्यालय की संपत्ति की कुर्की का आदेश हो गया है। भास्कर की प्रॉपर्टी अटैच करके वहां नोटिस भेज दी गयी है। जल्दी ही नीलामी की कार्यवाही शुरू कर कोर्ट राजेन्द्र मल्होत्रा को उसका बकाया हक दिलवाएगी। Continue reading

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डीएलसी बरेली के खिलाफ हाईकोर्ट ने वारंट जारी कर दिया

मजीठिया मामले में डीएलसी के खिलाफ वारंट के आदेश से श्रम विभाग में मचा हड़कंप….

उत्तर प्रदेश के बरेली से बड़ी खबर आ रही है। तीन क्लेमकर्ताओं की सेवा समाप्ति के आदेश को रद्द कर एक सप्ताह में समस्त बकाया अदा करने का आदेश देने वाले बरेली के उपश्रमायुक्त रोशन लाल गुरुवार को याचिका पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट में ना तो स्वयं पेश हुए और ना ही स्टैंडिंग काउंसिल को विभाग या राज्य सरकार का पक्ष भेजा। इस पर नाराजगी जताते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा ने बरेली डीएलसी के खिलाफ वारंट जारी कर दिया। अगली सुनवाई 4 जुलाई को होगी।

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बिहार के एक पत्रकार को दैनिक जागरण देगा साठ लाख बयालीस हजार रुपये, आरसी जारी

बिहार के गया जिले के पत्रकार पंकज कुमारका सपना सच हो गया. वे सुप्रीम कोर्ट से लेकर बिहार हाईकोर्ट और गया जिले की अदालतों के चक्कर काटने के बाद अंतत: दैनिक जागरण को मात देने में कामयाब हो गए. इस सफलता में उनके साथ कदम से कदम मिला कर खड़े रहे जाने माने वकील मदन तिवारी.

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दैनिक जागरण हिसार के 49 मीडियाकर्मियों की लड़ाई जीत की ओर, देखें नोटिस की कापी

Brijesh Pandey : मजीठिया केस रिकवरी का मामला… दैनिक जागरण हिसार के 49 साथियों ने मजीठिया के तहत एक्ट की धारा 17 (1) के अंतर्गत रिकवरी फाइल किया था..  अब तक की कार्यवाही में सरकार ने यह पाया कि दैनिक जागरण की देनदारी बनती है,…

सरकार ने दैनिक जागरण हिसार को शो-काज नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिया कि 30 दिन के भीतर क्लेम राशि का भुगतान कर दे या कुछ कहना है तो 30 दिन के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करें… अगर ऐसा नहीं किया गया तो रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करके वसूली की कार्यवाही अमल में लायी जायेगी… नोटिस की कॉपी ये है…

दैनिक जागरण हिसार में मैनेजर पद पर कार्यरत ब्रिजेश पांडेय की एफबी वॉल से.

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भास्कर ग्रुप को धूल चटाने वाली इस लड़की का इंटरव्यू देखें-सुनें

मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ने में बहुत बड़े बड़े पत्रकारों की पैंट गीली हो जाती है लेकिन भास्कर समूह में रिसेप्शनिस्ट पद पर कार्यरत रही एक लड़की ने न सिर्फ भास्कर ग्रुप से कानूनी लड़ाई लड़ी बल्कि अपना हक हासिल करने की अग्रसर है.

कोर्ट के आदेश पर भास्कर ग्रुप ने मजीठिया वेज बोर्ड के तहत इसे मिलने वाले लाखों रुपये अदालत में जमा करा दिए हैं. लतिका चह्वाण नामक यह लड़की डीबी कार्प के मुंबई आफिस में रिसेप्शनिस्ट हैं. इनसे बातचीत की आरटीआई एक्सपर्ट और मजीठिया क्रांतिकारी शशिकांत सिंह जी ने.

इंटरव्यू देखने सुनने के लिए नीचे दिए वीडियो पर क्लिक करें :

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कोर्ट ने मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर हिन्दुस्तान टाईम्स से वसूली किए जाने पर लगी रोक हटायी

टर्मिनेट कर्मचारी पुरुषोत्तम सिंह के मामले में शोभना भरतिया को लगा तगड़ा झटका, एडवोकेट उमेश शर्मा ने लगातार दो दिन की थी जोरदार बहस….  जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में हिन्दुस्तान टाईम्स की मालकिन शोभना भरतिया को एक बार फिर मंगलवार १९ /२/२०१८ को दिल्ली उच्च न्यायलय में मुंह की खानी पड़ी। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मजीठिया वेज बोर्ड मामले से जुड़े वसूली मामले में लगायी गयी रोक को हटा लिया। इससे हिन्दुस्तान प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड मामले में लगाये गये १७ (१) के मामले में वसूली का रास्ता साफ हो गया है।

१७ (१) का यह क्लेम हिन्दुस्तान टाईम्स दिल्ली से जबरन टर्मिनेट किये गये डिप्टी मैनेजर पुरुषोत्तम सिंह ने लगाया था जिस पर कंपनी को बकाया देने के लिये नोटिस गयी तो हिन्दुस्तान प्रबंधन ने उस नोटिस पर स्टे ले लिया। लगभग तीन साल तक चली लंबी लड़ाई के बाद आखिर दिल्ली हाईकोर्ट ने नोटिस पर लगी रोक को हटा लिया है। पुरुषोत्तम सिंह का मामला जाने माने एडवोकेट उमेश शर्मा ने रखा। उन्होंने लगातार दो दिन तक बहस किया और यह रोक हटवा लिया।

बताते हैं कि हिन्दुस्तान टाईम्स दिल्ली में डिप्टी मैनेजर पद पर कार्यरत पुरुषोत्तम सिंह को वर्ष २०१५ में कंपनी ने टर्मिनेट कर दिया। उसके बाद उन्होंने  एडवोकेट उमेश शर्मा से मिलकर अपने टर्मिनेशन के खिलाफ एक केस लगवाया। पुरुषोत्तम सिंह ने २०१५ में ही दिल्ली सेंट्रल के डिप्टी लेबर कमिश्नर लल्लन सिंह के यहां १७(१)का केस लगाया जिस पर पदाधिकारी ने २१ लाख की रिकवरी का नोटिस भेजा। उसके बाद कंपनी दिल्ली हाईकोर्ट गयी और वहां दिल्ली हाईकोर्ट की जज सुनीता गुप्ता ने इस नोटिस पर एकतरफा कारवाई करते हुये रोक लगा दिया।

इस मामले में पुरुषोत्तम सिंह ने देश भर के मीडियाकर्मियों की तरफ से माननीय सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा से अपना पक्ष रखने का अनुरोध किया। लगभग तीन साल तक चले इस केस में १९ फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट में उमेश शर्मा ने पुरुषोत्तम सिंह का पक्ष जोरदार तरीके से रखा। न्यायाधीश विनोद गोयल के सामने हमेशा की तरह हिन्दुस्तान प्रबंधन नई तारीख लेने के प्रयास में जुटा लेकिन उमेश शर्मा ने विद्वान न्यायाधीश से निवेदन किया कि इस बहस को लगातार जारी रखा जाये क्योंकि नोटिस पर स्टे देना पूरी तरह गलत है। मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट सबकुछ क्लीयर कर चुका है।

इसके बाद विद्वान न्यायाधीश ने सुनवाई अगले दिन भी जारी रखने का आदेश दिया। २० फरवरी को फिर दिल्ली हाईकोर्ट में बहस हुयी और उसके बाद न्यायाधीश विनोद गोयल ने नोटिस पर लगी रोक हटा लिया। यानि अब हिन्दुस्तान प्रबंधन के खिलाफ आरआरसी जारी होने का रास्ता साफ हो गया है। इस मामले में पुरुषोत्तम सिंह ने हिन्दुस्तान टाईम्स की मालकिन शोभना भरतिया और एचआर डायरेक्टर शरद सक्सेना को पार्टी बनाया था। पुरुषोत्तम सिंह को मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे देश भर के मीडियाकर्मियों ने बधाई दी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

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फिरोजपुर से भास्कर कर्मी राजेन्द्र मल्होत्रा के पक्ष में जारी हुयी साढ़े बाईस लाख की आरसी

पंजाब के फिरोजपुर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां दैनिक भास्कर में कार्यरत ब्यूरो चीफ राजेन्द्र मल्होत्रा के आवेदन को सही मानते हुये फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त सुनील कुमार भोरीवाल ने दैनिक भास्कर प्रबंधन के खिलाफ २२ लाख ५२ हजार ९४५ रुपये की वसूली के लिये रिकवरी सार्टिफिकेट जारी की है। राजेन्द्र मल्होत्रा ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अपने बकाये की रकम के लिये सुप्रीम कोर्ट के वकील उमेश शर्मा की देख-रेख में फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त के समक्ष १७ (१) का क्लेम लगाया था।

इसके बाद कंपनी को नोटिस मिली तो दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डीबी कार्प ने राजेन्द्र मल्होत्रा का ट्रांसफर बिहार के दरभंगा में कर दिया। उसके बाद राजेन्द्र मल्होत्रा ने एडवोकेट उमेश शर्मा के बताये रास्ते पर चलते हुये फिरोजपुर के इंडस्ट्रीयल कोर्ट में केस लगाया और ट्रांसफर पर स्टे की मांग की। इंडस्ट्रीयल कोर्ट के स्थानीय एडवोकेट ने राजेन्द्र मल्होत्रा का मजबूती से पक्ष रखा और इंडस्ट्रीयल कोर्ट ने राजेन्द्र के ट्रांसफर पर रोक लगा दी।

इसके बाद राजेन्द्र कंपनी में ज्वाईन करने गये तो उन्हे कंपनी ने ज्वाईन नहीं कराया। इसके बाद भी राजेन्द्र मल्होत्रा ने हिम्मत नहीं हारी तथा डीबी कार्प के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर अग्रवाल, स्टेट हेड बलदेव शर्मा, कार्मिक विभाग के हेड मनोज धवन, एडिटर नरेन्द्र शर्मा और रोहित चौधरी सहित पांच लोगों के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस फाईल किया। इसकी सुनवाई चल रही है।

उधर राजेन्द्र मल्होत्रा के मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार मांगे गये दावे को सही मानते हुये फिरोजपुर के सहायक कामगार आयुक्त सुनील कुमार भोरीवाल ने दैनिक प्रबंधन के खिलाफ २२ लाख ५२ हजार ९४५ रुपये की वसूली के लिये रिकवरी सार्टिफिकेट जारी कर दी है। राजेन्द्र मल्होत्रा दैनिक भास्कर में पहले स्ट्रिंगर थे। बाद में उन्हें रिपोर्टर बनाया गया। उसके बाद उन्हें चीफ रिपोर्टर बनाया गया। चीफ रिपोर्टर बनने के बाद उन्हें ब्यूरो चीफ बना दिया गया। मगर जैसे ही उन्होंने प्रबंधन से मजीठिया वेज बोर्ड की मांग की, उनका ट्रांसफर बिहार के दरभंगा में कर दिया गया। मगर अब कंपनी के पास बकाया देने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टीविस्ट
९३२२४११३३५

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मजीठिया वेज बोर्ड मामले में दैनिक भास्कर के खिलाफ एक और आरसी जारी

मुंबई से खबर आ रही है कि यहां दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लिमिटेड में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे का रिकवरी सर्टीफिकेट (आरसी) जारी किया गया है। इस आरसी को मुंबई (उपनगर) के कलेक्टर को भेज कर आदेश दिया गया है कि वह आवेदक के पक्ष में कंपनी से भू-राजस्व की भांति वसूली करें और आवेदक अस्बर्ट गोंजाल्विस को यह धनराशि प्रदान कराएं। आपको बता दें कि इस मामले में अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अपने एडवोकेट एस. पी. पांडे के जरिए मुंबई उच्च न्यायालय में कैविएट भी लगवा दी है।

डी. बी. कॉर्प लि. के मुंबई स्थित बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स वाले कार्यालय में कार्यरत सिस्टम इंजीनियर अस्बर्ट गोंजाल्विस का कंपनी ने अन्यत्र ट्रांसफर कर दिया था। इसके बाद अस्बर्ट गोंजाल्विस ने अदालत की शरण ली और उधर जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के तहत अपने बकाये की रकम और वेतन-वृद्धि के लिए उन्होंने माननीय सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा के दिशा-निर्देश पर चलते हुए मुंबई के कामगार विभाग में क्लेम भी लगा दिया था।

करीब एक साल तक चली सुनवाई के बाद लेबर विभाग ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष को सही पाया तथा कंपनी को नोटिस जारी कर साफ कहा कि वह आवेदक को उसका बकाया 26 लाख 38 हजार 203 रुपए 98 पैसे जमा कराए, परंतु दुनिया के चौथे सबसे बड़े अखबार होने के घमंड में चूर दैनिक भास्कर की प्रबंधन कंपनी डी. बी. कॉर्प लि. ने जब यह पैसा नहीं जमा किया तो सहायक कामगार आयुक्त वी. आर. जाधव ने अस्बर्ट गोंजाल्विस के पक्ष में आरसी जारी कर दी और कलेक्टर को आदेश दिया कि वह डी. बी. कॉर्प लि. से भू-राजस्व नियम के तहत उक्त राशि की वसूली करके अस्बर्ट गोंजाल्विस को दिलाएं।

गौरतलब है कि इसके पहले डी. बी. कॉर्प लि. के समाचार-पत्र दैनिक भास्कर के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के साथ रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया शेख के पक्ष में भी कामगार विभाग ने आरसी जारी की थी… यह संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में जारी हुई पहली आरसी थी, मगर आरसी का विरोध करने के लिए संबंधित कंपनी जब मुंबई उच्च न्यायालय गई तो माननीय उच्च न्यायालय ने डी. बी. कॉर्प लि. को निर्देश दिया कि वह तीनों आवेदकों के बकाये रकम में से सर्वप्रथम 50 प्रतिशत रकम कोर्ट में जमा करे।

मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद डी. बी. कॉर्प लि. सर्वोच्च न्यायालय चली गई, जहां सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट तौर पर कह दिया कि मुंबई उच्च न्यायालय के इस आदेश पर उसे दखल देने की आवश्यकता नहीं है, अत: डी. बी. कॉर्प लि. के अनुरोध को खारिज किया जाता है। ऐसे में इस कंपनी के पास और कोई विकल्प नहीं बचा था, लिहाजा डी. बी. कॉर्प लि. पुन: मुंबई उच्च न्यायालय आई और धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, लतिका चव्हाण और आलिया शेख के बकाये में से 50 फीसदी की राशि वहां जमा करा दिया। सो, माना जा रहा है कि अस्बर्ट गोंजाल्विस के मामले में भी अब डी. बी. कॉर्प लि. को जल्दी ही उनके बकाये की 50 प्रतिशत रकम मुंबई उच्च न्यायालय में जमा करानी होगी।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

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महाराष्ट्र के चार मीडिया कर्मियों का बकाया न देने पर भास्कर समूह के खिलाफ आरसी जारी

अपने कर्मियों का हक मारने के कारण दैनिक भास्कर को झटके पर झटका लग रहा है. भास्कर अखबार की प्रबंधन कंपनी डीबी कॉर्प द्वारा संचालित मराठी अखबार दैनिक दिव्य मराठी के अकोला एडिशन से खबर आ रही है कि यहां के ४ मीडिया कर्मियों के आवेदन पर भास्कर के खिलाफ आरसी जारी हुई है. इन मीडियाकर्मियों के पक्ष में सहायक कामगार आयुक्त अकोला श्री विजयकांत पानबुड़े ने रिकवरी सार्टिफिकेट आदेश जिलाधिकारी अकोला को दिया है।

मीडियाकर्मियों ने मजीठिया वेज बोर्ड के पैरामीटर के अनुरूप बकाया न दिए जाने की शिकायत की थी. साथ ही अपना पूरा बकाया क्लेम किया था. दिव्य मराठी (मराठी) अखबार महाराष्ट्र  के इन  चारों मीडियाकर्मियों के नाम हैं दीपक वसंतराव मोहिते, राजू रमेश बोरकुटे, संतोष मलन्ना पुटलागार और रोशन अम्बादास पवार। रोशन अम्बादास डीटीपी इंचार्ज हैं. बाकी तीनों पेजमेकर हैं. इनमें से पेज मेकर  दीपक वसंतराव मोहिते ने कुल रिकवरी राशि १३ लाख ३५ हजार २५२ रुपये का क्लेम किया है. पेजमेकर राजू रमेश बोरकुटे की रिकवरी राशि १२ लाख ६६ हजार २७५ रुपये है. पेजमेकर संतोष मलन्ना पुटलागार की रिकवरी राशि ११ लाख ९८ हजार ५६५ रुपये है. डीटीपी इंचार्ज रोशन अम्बादास पवार ने ६ लाख १७ हजार ३०८ रुपये का अपना बकाया मांगा है. 

इसके लिए सहायक कामगार आयुक्त ने १८ अगस्त २०१७ को एक आर्डर डी बी कॉर्प प्रबंधन को भेजा था। इस आर्डर की एक-एक कापी दैनिक भास्कर के चेयरमैन रमेशचंद्र अग्रवाल, पूरा पता प्लाट नंबर ६, द्वारिका सदन, प्रेस काम्प्लेक्स, मध्य प्रदेश नगर भोपाल (मध्य प्रदेश), प्रबंध निदेशक सुधीर अग्रवाल (पता उपरोक्त), निशिकांत तायड़े स्टेट हेड, दैनिक दिव्य मराठी, डीबी कोर्प लिमिटेड जिला अकोला को भी प्रेषित किया गया।

इस नोटिस के बाद भी डीबी कॉर्प कंपनी ने इन चारों मीडियाकर्मियों  को उनका बकाया नहीं दिया ।  उसके बाद १२ दिसंबर  २०१७ को मा. सहायक कामगार आयुक्त अकोला श्री विजयकांत पानबुड़े ने अपने विभाग से जिलाधिकारी अकोला को एक वसूली लेटर जारी कर कलेक्टर को भू राजस्व की भांति वसूली करके  बकायेदारों को देने का निर्देश दिया है।
इन सभी कर्मचारियों ने अपने एडवोकेट के जरिये हाईकोर्ट में कैविएट भी लगा दिया है जिससे कंपनी प्रबंधन को स्टे आसानी से नहीं मिल सके।

रिकवरी सर्टिफिकेट जारी होने से डीबी कार्प प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है। ये सभी साथी हिम्मत नहीं हारे और लेबर विभाग, हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट तक अपने अधिकार के लिये लड़ाई लड़ते रहे। इन कर्मचारियों ने डी बी कार्प के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी है। आपको बता दें कि गुजरात के अहमदाबाद से भी डी बी कार्प के दैनिक दिव्य भास्कर अखबार से १०६ लोगों के पक्ष में रिकवरी सार्टिफिकेट जारी किया गया है। इससे कंपनी प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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संयुक्त आयुक्त श्रम ने जागरण के मालिक मोहन गुप्त को नोटिस भेजा, शेल कम्पनी ‘कंचन प्रकाशन’ का मुद्दा भी उठा

दैनिक जागरण के एचआर एजीएम विनोद शुक्ला की हुई फजीहत…  पटना : दैनिक जागरण के मालिक महेंद्र मोहन गुप्त को श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त डा. वीरेंद्र कुमार ने नोटिस जारी कर जागरण कर्मियों द्वारा दायर किए गए जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा को लेकर वाद में पक्ष रखने के लिए तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 22 दिसंबर को होनी है। वहीं दैनिक जागरण पटना के एजीएम एचआर विनोद शुक्ला के जागरण प्रबंधन के पक्ष में उपस्थिति पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए अधिवक्ता मदन तिवारी ने संबंधित बोर्ड के प्रस्ताव की अधिकृत कागजात की मांग कर एजीएम शुक्ला की बोलती बंद कर दी। दैनिक जागरण के हजारों कर्मियों को अपना कर्मचारी न मानने के दावे एजीएम शुक्ला के दावे की भी श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डा.  वीरेंद्र कुमार के सामने हवा निकल गई।

दैनिक जागरण, गया के वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुमार को प्रबंधन ने गया जिले से जम्मू तबादला कर दिया। पंकज कुमार की गलती सिर्फ इतनी थी कि उन्होंने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा के आलोक में वेतन और अन्य सुविधाओं की मांग की थी। पंकज कुमार गम्भीर रूप से बीमार पिछले साल हुए थे। मजीठिया वेज बोर्ड की मांग को लेकर प्रबंधन इतना खफा हो गया कि 92 दिनों की उपार्जित अवकाश शेष रहने के बाद भी अक्टूबर और नवंबर 2016 के वेतन में 21 दिनों की वेतन कटौती कर दी।

पंकज कुमार ने प्रबंधन के फैसले के खिलाफ माननीय सर्वोच्च न्यायालय की शरण में न्याय की गुहार लगाई। एरियर का बकाया 32.90 लाख रुपए के भुगतान की मांग की। साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय से गया से जम्मू तबादला को रद्द करने की गुहार लगाई। सर्वोच्च न्यायालय ने पंकज कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में छह महीने का टाइम बांड कर दिया। यानि छह माह में फैसला हो जाना है।  पंकज कुमार सहित दैनिक जागरण के कई कर्मियों के वाद की सुनवाई 5 December को पटना के श्रम संसाधन विभाग के संयुक्त आयुक्त डा.वीरेंद्र कुमार के समक्ष हुई।

पंकज कुमार की तरफ से अधिवक्ता मदन तिवारी ने जागरण की ओर से उपस्थित एजीएम विनोद शुक्ला की उपस्थिति पर सवाल उठाया। अधिवक्ता मदन तिवारी का कहना था कि किस हैसियत से विनोद शुक्ला जागरण के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता, सीईओ संजय गुप्ता, सुनील गुप्ता एवं अन्य की ओर से उपस्थिति दर्ज कराई है। एजीएम शुक्ला ने कम्पनी सेक्रेटरी द्वारा प्रदत्त एक पत्र की फोटो कापी दिखाई। फोटो कापी पर विनोद शुक्ला को अधिकृत होने की बात कही गई थी।

इस पर अधिवक्ता मदन तिवारी ने कहा कि कम्पनी द्वारा पारित किसी भी प्रस्ताव की अभिप्रमाणित प्रति जो बोर्ड की बैठक की अध्यक्षता करने वाले चैयरमेन या निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित रहेगी, वही प्रति न्यायालय में कम्पनी द्वारा अधिकृत व्यक्ति के शपथ पत्र के साथ दायर की जानी चाहिए। अधिवक्ता मदन तिवारी ने लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई। उसके बाद न्यायालय ने विनोद शुक्ला को निर्देश दिया कि वे बोर्ड के प्रस्ताव की अधिकृत प्रति हलफनामा के साथ दायर करें।

अधिवक्ता मदन तिवारी ने श्रम विभाग द्वारा जागरण के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता सहित अन्य निदेशकों के स्थान पर प्रबंधन जागरण को नोटिस जारी करने के मामले को उठाया।  संयुक्त आयुक्त डा. वीरेंद्र कुमार ने आपत्ति उठाए जाने पर कहा कि पूर्व में नोटिस जारी की गई थी। लेकिन अब जागरण समूह के अध्यक्ष मदन मोहन गुप्ता को नोटिस जारी किया गया है।

जागरण के कई कर्मियों ने श्रम विभाग के संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र कुमार को बताया कि एजीएम विनोद शुक्ला को ओर से दायर जवाब में कहा गया है कि गोपेश कुमार एवं अन्य कंचन प्रकाशन के कर्मी हैं…  कंचन प्रकाशन के साथ जागरण प्रकाशन का कांट्रैक्ट प्रिंटिंग के जाब वर्क का है… इसलिए ये सभी दैनिक जागरण के कर्मचारी नहीं है।

अधिवक्ता मदन तिवारी ने संयुक्त आयुक्त वीरेंद्र कुमार के सामने न्यूज पेपर रजिस्ट्रेशन एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी अखबार एवं पत्रिका को अपने अखबार में अनिवार्य अधिघोषणा में उस प्रेस का नाम पता देना जरूरी है जहां अखबार प्रिन्ट होता है। लेकिन जागरण के किसी भी एडिशन में कंचन प्रकाशन को लेकर कोई घोषणा नहीं की गई या की जा रही है। ऐसे में न्यूज पेपर रजिस्ट्रेशन एक्ट का उल्लघंन जागरण प्रकाशन कर रहा है। ऐसे में अनिवार्य अधिघोषणा न करने  के नियम का न पालन करने के कारण अखबार का निबंधन भी रद्द हो सकता है।

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महाराष्ट्र के लेबर कमिश्नर का निर्देश- ठेका कर्मचारियों को भी मजीठिया वेजबोर्ड का लाभ देना जरूरी

सभी अखबारों की होगी फिर से जांच…  महाराष्ट्र के लेबर कमिश्नर द्वारा बुलाई गई त्रिपक्षीय समिति की बैठक में लेबर कमिश्नर यशवंत केरुरे ने अखबार मालिकों के प्रतिनिधियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि आपको माननीय सुप्रिमकोर्ट के आदेश का पालन करना ही पड़ेगा। श्री केरुरे ने कहा कि वेज बोर्ड का लाभ ठेका कर्मचारियों को भी देना अनिवार्य है। मुम्बई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स के लेबर कमिश्नर कार्यालय में बुलाई गई इस बैठक में  राज्यभर के विभागीय अधिकारियों को भी आमंत्रित किया गया था।

इस बैठक में सवाल उठाया गया कि जस्टिस मजिठिया वेजबोर्ड के अनुसार अपने बकाये का क्लेम लगाने में मीडिया कर्मियों में डर का माहौल क्यों है। अखबार मालिक लोगों को परेशान क्यों कर रहे हैं। ट्रांसफर टर्मिनेशन क्यों कर रहे हैं। नौकरी से निकालने या पेपर बन्द करने की धमकी देकर सादे कागज पर साइन क्यों कराया जा रहा है। कई अखबार मालिक अपने समाचार पत्र के कर्मचारियों से त्यागपत्र लेकर नई कंपनी में ठेके पर ज्वाइन करा रहे हैं। कई अखबार मालिक अपने कर्मचारियों को डिजिटल में ज्वाइन करा रहे हैं। ये मुद्दा नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट महाराष्ट्र की पत्रकार प्रतिनिधि शीतल करंदेकर ने उठाया।

इस पर लेबर कमिश्नर ने कहा कि मीडियाकर्मियों को घबड़ाने की कोई जरूरत नहीं है। मजीठिया वेजबोर्ड का लाभ मीडियाकर्मियों को मिलेगा। इसमें संदेह नहीं किया जाना चाहिए। उन्हें इसका लाभ जरूर मिलेगा। माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश न मानने वालों के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना का मामला चलेगा और जहां भी मीडियकर्मियोंको परेशान किया जा रहा है, वे शिकायत करें। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों का तीन महीने में निस्तारण किया जाए।

एनयूजे महाराष्ट्र ने सभी अखबारों के फिर से सर्वे करने की मांग की जिस पर सहमति बनी। इस पर अखबार मालिकों के प्रतिनिधियों ने एतराज जताया और कहा कि फिर से जांच की कोई जरूरत नही है। इस दौरान ये मुद्दा भी उठा कि अखबार मालिक सरकारी विज्ञापन लेते समय खुद को नंबर वन का ग्रेड बताकर विज्ञापन लेते हैं जबकि मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू करते समय खुद को निचले ग्रेड का बताते हैं। आयुक्त ने जनवरी तक सभी समाचार पत्रों की जांच करने का आदेश दिया। इस जांच की डेट सभी पत्रकार प्रतिनिधियों को भी बताने की मांग की गई जिसे आयुक्त ने मान्य कर लिया।

इस अवसर पर बी यू जे के इन्दर जैन ने फिक्सेशन सार्टिफिकेट प्रत्येक कर्मचारी को देने का निवेदन किया। इस अवसर पर एनयूजे महाराष्ट्र ने मांग की कि समिति के कई सदस्य बैठक में नहीं आते। उनकी जगह मजीठिया के जानकार लोगों को सदस्य बनाया जाए। इस दौरान शीतल करंदेकर ने ये भी मुद्दा उठाया कि लेबर विभाग ने सुप्रीम कोर्ट को जो रिपोर्ट भेजा है, उसमें कई अखबारों में दिखाया गया है कि इन अखबारों में माणिसना वेज बोर्ड की सिफारिश लागू है। इसकी भी जांच कराई जाए। इस बैठक में लेबर डिपार्टमेंट के उपसचिव कार्णिक भी मौजूद थे। बैठक का संचालन ड्यूपीटी लेबर कमिश्नर श्री बुआ ने किया।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
एनयूजे महाराष्ट्र मजीठिया वेज बोर्ड समन्यवयक
9322411335

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मजीठिया मामला : दैनिक भास्कर मुंबई के सुनील कुकरेती ने भी लगा दिया क्लेम

डी बी कॉर्प लिमिटेड द्वारा संचालित दैनिक भास्कर समाचार-पत्र के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह द्वारा मजीठिया वेज बोर्ड मामले में कंपनी को धूल चटाए जाने के बाद ‘भास्कर’ के मुंबई ब्यूरो में बागियों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। अपने बकाए की वसूली के लिए श्रम विभाग पहुंचने वालों में अब नया नाम जुड़ा है सुनील कुकरेती का। सुनील इस संस्थान में बतौर सीनियर रिपोर्टर कार्यरत हैं।

आपको बता दें कि धर्मेन्द्र प्रताप सिंह के बाद रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया शेख ने भी बगावत का बिगुल बजाया था, जिसके परिणाम स्वरूप श्रम विभाग से कटी आरसी पर स्टे लेने के लिए ‘भास्कर’ प्रबंधन बॉम्बे हाई कोर्ट गया। इस पर न्यायालय ने जब आदेश दिया कि आरसी में उल्लेख की गई रकम की आधी धनराशि पहले कोर्ट में जमा की जाए, तब प्रबंधन ने माननीय सुप्रीम कोर्ट में जाकर हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती दी। यह बात और है कि सुप्रीम कोर्ट से इन्हें बैरंग लौटना पड़ा… आखिर हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, प्रबंधन ने सिंह और चव्हाण के साथ ही आलिया की आरसी का आधा पैसा माननीय अदालत में जमा करवा दिया है।

‘भास्कर’ प्रबंधन की हुई इस फजीहत का नतीजा यह हुआ है कि पहले जहां सिस्टम इंजीनियर ऐस्बर्ट गोंजाल्विस और ब्यूरो चीफ अनिल राही ने क्लेम लगाया, वहीं हालिया डेवलपमेंट को देखते हुए अब हिम्मत का परिचय सुनील कुकरेती ने दिया है… कुकरेती ने भी कंपनी के खिलाफ बगावत का झंडा उठा लिया है! जी हां, सुनील कुकरेती ने मुंबई के श्रम आयुक्त कार्यालय में 7 नवंबर, 2017 को 35 लाख रुपए का क्लेम लगा कर अपने बकाया की मांग की है, जिसके तहत कंपनी को नोटिस जारी हुआ और विगत 27 नवंबर से सुनवाई भी शुरू हो चुकी है। इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 15 दिसंबर है। यहां बताना आवश्यक है कि मजीठिया क्रांतिकारियों के संपर्क में ‘भास्कर’ के दो और कर्मचारी हैं, जो जल्द ही क्लेम लगाने जा रहे हैं। जाहिर है कि ‘भास्कर’ संस्थान में बागियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है तो देश के सबसे बड़े और विश्वसनीय अखबार में इन दिनों हड़कंप का माहौल है!

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
एनयूजे मजीठिया सेल समन्वयक
9322411335

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मजीठिया वेज बोर्ड मामला : सुप्रीम कोर्ट ने अखबार मालिकों को राहत देने से किया इनकार, देखें ऑर्डर की कापी

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट अखबार मालिकों के खिलाफ सख्त होता जा रहा है। जी हां, सुप्रीम कोर्ट ने अखबार मालिकों के लिए दो सख्त आदेश दिए हैं… पहला तो यह कि उन्हें अपने कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देना ही पड़ेगा, भले ही उनका अखबार घाटे में हो। दूसरा, अखबार मालिकों को उन कर्मचारियों को भी मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक लाभ देना पड़ेगा, जो ठेके पर हैं। सुप्रीम कोर्ट के रुख से यह भी स्पष्ट हो चुका है कि जिन मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ चाहिए, उन्हें क्लेम लगाना ही होगा।

आपको बता दें कि मीडियाकर्मियों ने माननीय सुप्रीम कोर्ट का ध्यान जब इस ओर दिलाया कि लेबर कोर्ट में जाने पर बहुत टाइम लगेगा और वहां इस तरह के मामले में कई-कई साल लग जाते हैं, तब माननीय सु्प्रीम कोर्ट ने उन्हें एक और राहत दी। यह राहत थी लेबर कोर्ट को टाइम बाउंड करने की। सुप्रीम कोर्ट ने लेबर कोर्ट को स्पष्ट आदेश दे दिया कि वह 17 (2) से जुड़े सभी मामलों को वरीयता के आधार पर 6 माह में पूरा करे। इसके बाद कुछ मीडियाकर्मी फिर सुप्रीम कोर्ट की शरण में पहुंच गए और वहां गुहार लगाई कि मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार, अपना बकाया मांगने पर संस्थान उन्हें नौकरी से निकाल दे रहा है!

इस पर सुप्रीम कोर्ट के विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने मीडियाकर्मियों के दर्द को एक बार फिर समझा और आदेश दिया कि जिन लोगों का भी मजीठिया मांगने के चलते ट्रांसफर या टर्मिनेशन हो रहा है, ऐसे मामलों का भी निचली अदालत 6 माह में निस्तारण करे। इससे अखबार मालिकों ने मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार, बकाया मांगने वालों के ट्रांसफर / टर्मिनेशन की गति जहां धीमी कर दी, वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा मीडियाकर्मियों का दर्द समझे जाने का असर यह हुआ कि अब निचली अदालतें भी नए ट्रांसफर / टर्मिनेशन के मामलों में मीडियाकर्मियों को फौरन राहत दे रही हैं।

यहां बताना यह भी आवश्यक है कि पिछले दिनों मुंबई में ‘दैनिक भास्कर’ की प्रबंधन कंपनी डी बी कॉर्प लि. के प्रिंसिपल करेस्पॉन्डेंट धर्मेन्द्र प्रताप सिंह, रिसेप्शनिस्ट लतिका चव्हाण और आलिया शेख के पक्ष में लेबर डिपार्टमेंट ने रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किया था… कलेक्टर द्वारा वसूली की कार्यवाही भी तेजी से शुरू हो गई थी। हालांकि डी बी कॉर्प लि. ने इस पर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंच कर आरसी पर रोक लगाने की मांग की, मगर हाई कोर्ट ने उनकी एक न सुनी और साफ शब्दों में कह दिया कि कर्मचारियों की जो बकाया धनराशि है, पहले उसका 50 फीसदी हिस्सा कोर्ट में जमा किया जाए।

यह बात अलग है कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद डी बी कॉर्प लि. ने माननीय सु्प्रीम कोर्ट में पहुंच कर विद्वान न्यायाधीश रंजन गोगोई से गुहार लगाई कि हुजूर, हाई कोर्ट का पैसा जमा कराने का आदेश गलत है और इस पर तत्काल रोक लगाई जाए। लेकिन वहां इनका दांव उल्टा पड़ गया। गोगोई साहब और जस्टिस नवीन सिन्हा  का नया आदेश एक बार फिर मीडियाकर्मियों के पक्ष में ब्रह्मास्त्र बन गया है। असल में डी बी कॉर्प लि. को राहत देने से इनकार करते हुए उन्होंने ऑर्डर दिया कि हमें नहीं लगता कि हाई कोर्ट के निर्णय पर हमें दखल देना चाहिए। स्वाभाविक है कि इसके बाद मरता, क्या न करता? सो, जानकारी मिल रही है कि डी बी कॉर्प लि. प्रबंधन ने बॉम्बे हाई कोर्ट में तीनों कर्मचारियों की आधी-आधी बकाया राशि जमा करवा दी है। इससे साफ हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने यहां अखबार मालिकों के आने का रास्ता लगभग बंद कर दिया है। अब कोई भी मीडियाकर्मी अगर क्लेम लगाता है तो उसका निस्तारण भी जल्द होगा।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट
एनयूजे मजीठिया सेल समन्वयक
9322411335

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हिन्दुस्तान प्रबन्धन को डीएलसी की कड़ी चेतावनी, कहा- हठधर्मी का रास्ता छोड़ें

बरेली से खबर आ रही है कि मजिठिया को लेकर उत्पीड़न के मामले की सुनवाई के दौरान उपश्रमायुक्त बरेली ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि हिन्दुस्तान का प्रबन्धन हठधर्मी का रास्ता छोड़े। यदि कोई ये समझता है कि वह सर्वोपरि है तो ऐसे लोग जान लें, सुप्रीम कोर्ट से बढ़कर कोई नहीं है। ना मैं और ना अखबार मालिक। लिहाजा आपसी समझौते से शिकायतकर्ता कर्मचारियों से मसला निपटा लें, नहीं तो अगली तिथि पर मजबूरन उनको विधि सम्मत कड़ा निर्णय लेना पड़ेगा।

उपश्रमायुक्त ने मामले में प्रतिवादी संपादक मनीष मिश्रा, यूनिट हेड योगेंद्र सिंह की ओर से आये हिन्दुस्तान बरेली यूनिट के एच आर हेड सत्येंद्र अवस्थी को साफ-साफ कहा कि उनका संदेश वे उच्च प्रबन्धन तक पहुँचा दें। शिकायतकर्ताओं को मजिठिया के मुताबिक उनके सभी ड्यूज तत्काल अदा कर दें। इससे बचने के लिए शिकायतकर्ताओं को नोटिस देना, धमकाना, कथित जांच बैठाना, कार्रवाई करना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है।ये सब कुछ वह नहीं होने देंगे।

अंतिम नोटिस के बावजूद हिन्दुस्तान के एचआर डायरेक्टर राकेश सिंह गौतम अपना पक्ष रखने को ना तो स्वयं आये और ना ही उनका कोई प्रतिनिधि। शिकायतकर्ता मनोज शर्मा, राजेश्वर विश्वकर्मा, निर्मल कांत शुक्ला ने उप श्रमायुक्त को अवगत कराया कि एचआर डायरेक्टर राकेश सिंह गौतम बेहद शातिर है। संपादक और जीएम भी उनके समक्ष आने से मुंह छिपा रहे हैं, क्योंकि इनके पास किसी भी बात का कोई जवाब है ही नहीं। सत्येन्द्र अवस्थी पर कोई अधिकार नहीं हैं। सत्येन्द्र सिर्फ मैसेंजर की भूमिका में हैं। उप श्रमायुक्त ने अंतिम मौका देते हुए सुनवाई की अगली तिथि 30 नवम्बर मुकर्रर की है।

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मजीठिया मांगने पर भाजपा विधायक ने रिपोर्टर को अखबार के दफ्तर में घुसने से रोका, मामला पहुंचा पुलिस स्टेशन

मुंबई : खुद को उत्तर भारतीयों का रहनुमा समझने वाले भाजपा विधायक और हमारा महानगर अखबार के मालिक आरएन सिंह के अखबार में उत्तर भारतीय कर्मचारियों का सबसे ज्यादा शोषण किया जा रहा है। इस अखबार के सीनियर रिपोर्टर (क्राइम) केके मिश्रा को विधायक के पालतू गार्ड हमारा महानगर के दफ्तर में पिछले कुछ दिनों से नहीं घुसने दे रहे हैं।

कृष्णकांत सभापति मिश्रा उर्फ केके मिश्रा की गलती सिर्फ इतनी है कि उन्होंने विधायक जी से माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेशानुसार मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार अपने वेतन वृद्धि की मांग कर ली। हमारा महानगर अखबार के मालिक और भाजपा विधायक आर एन सिंह को ये बात नागवार गुजरी। उन्होंने अपनी निजी सुरक्षा कंपनी के गार्डों को हिदायत दे दिया कि केके मिश्रा को किसी भी तरह ऑफिस में घुसने मत दो।

उल्लेखनीय है कि केके मिश्रा पहले भी इस अखबार में काम कर चुके हैं और उसके बाद इस्तीफा देकर दूसरे अखबार में चले गए थे। मगर 2015  में अखबार मालिक आरएन सिंह ने फोन कर केके मिश्रा को वापस बुलाया और भरोसा दिया था कि अच्छा भुगतान किया जाएगा। मगर हुआ उल्टा। फिलहाल केके मिश्रा को विधायक जी के आदेश पर ऑफिस में नहीं आने दिया जा रहा है। के के मिश्रा ने  9 नवंबर 2017 को पुलिस स्टेशन और कामगार विभाग में विधायक जी के खिलाफ शिकायत दी है। केके मिश्रा के इस कदम से हमारा महानगर प्रबंधन में हड़कम्प का माहौल है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आर टी आई एक्सपर्ट
9322411335

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मजीठिया पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का होगा अनुपालन, केन्द्रीय मंत्री ने पत्रकारों को दिया आश्वासन

केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे और बिहार भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने मंगलवार को मीडियाकर्मियों को आश्वासन दिया कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के आलोक में वे पत्रकारों की भावना को सक्षम स्थान व नेतृत्व के समक्ष अवश्य रखेंगे। केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने बिहार के गया जिले में पत्रकारों के समक्ष दावा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में किसी को भी दवा के अभाव में मरने नहीं देने को लक्षय रखा है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे के इस दावे पर मीडियाकर्मियों ने सवाल किया कि केन्द्र सरकार जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा के आलोक में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को क्रियान्वित कयो नही करा रही है। बिहार में कई  मीडिया हाउस प्रखंड और अनुमंडल के पत्रकारों को क्रमशः दो और पांच सौ रुपए प्रति माह देता है। ऐसे में पत्रकार अपने परिवार का पालन कैसे करेगा। श्रम कानून के तहत ईपीएफ ईएसआई, सर्विस बुक आदि की सुविधा से 95 प्रतिशत पत्रकार वंचित है। केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे और प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि वे यह सुनिश्चित कराने का प्रयास करेंगे कि उन्हें श्रम कानून के तहत उपलब्ध सभी सुविधाएं मिले। केन्द्रीय मंत्री और भाजपा प्रवक्ता के बयान के बाद पत्रकारों के बीच उम्मीद जगी कि शायद सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन निकट भविष्य में केन्द्र सरकार करा सकती है

केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पत्रकारों को श्रम कानून के तहत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए करेंगे पहल

केन्द्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने बिहार के गया में पत्रकारों के हक की लडाई में पहल करने की घोषणा की है। केन्द्रीय मंत्री श्री सिंह को जब पत्रकारों ने बताया कि जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा के आलोक में वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं मिल रही है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा को लागू करने के लिए फैसला सुना दिया है। केन्द्रीय मंत्री श्री सिंह ने कहा कि श्रम कानून के तहत ईपीएफ ,ईएसआई, सर्विस बुक सहित जो भी सुविधाएं देय है। उसे दिलाने के लिए केन्द्रीय श्रम मंत्री से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि यह जानकर तकलीफ हुआ कि बड़ी संख्या में  लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के मित्रों को प्रतिदिन तय दैनिक मजदूरी भी नहीं मिल रहा है। औरंगाबाद के सांसद सुशील कुमार सिंह ने भी पत्रकारों से सम्बंधित ज्ञापन की मांग कर आश्वासन दिया कि इस सम्बन्ध में वे पीएमओ और श्रम मंत्री तक पत्रकारों की बात पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

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सीनियर आईटी मैनेजर ने किया हिन्दुस्तान पर केस, मांगे 43.64 लाख

बरेली से बड़ी खबर आ रही है कि नोयडा बुलाकर जबरन इस्तीफा लिखा लेने से तिलमिलाए बरेली यूनिट के सीनियर आईटी मैनेजर हरिओम गुप्ता ने हिन्दुस्तान के प्रबन्धन को सबक सिखाने की ठान ली है। वे अपने हक के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने को मैदान में उतर गए हैं। उन्होंने इस उत्पीड़न की वजह मजिठिया वेज बोर्ड के मुताबिक वेतन-भत्ते आदि की मांग करना बताया। उन्होंने हिन्दुस्तान प्रबन्धन पर 43 लाख 64 हजार 850 रुपये के मजिठिया के बकाया एरियर का दावा उपश्रमायुक्त बरेली के समक्ष ठोंक दिया है। उपश्रमायुक्त ने हिन्दुस्तान के प्रबंधन को नोटिस जारी कर तलब किया है।

दरअसल माह मई में मजीठिया वेज बोर्ड के अनुरूप वेतन और भत्ते ना देने के मामले में अवमानना के केस में सुप्रीम कोर्ट के संभावित कड़े फैसले के आने से पहले ही हिन्दुस्तान प्रबंधन बुरी तरह बौखला गया था। बौखलाहट में हिन्दुस्तान प्रबंधन ने स्टाफ को और कम करना शुरू कर दिया था।ताकि मजीठिया मांगने और प्रबंधन की मुखालफत करने की  वह कर्मचारी हिम्मत ना जुटा सकें, जो अभी भी पांच-पांच आदमियों के काम का बोझ उठाकर उफ़ भी नहीं कर रहें हैं और मजीठिया वेतनमान व एरियर मिलने की झूठी उम्मीद पाले हुए नौकरी कर रहे हैं।

इसी साल माह मई में हिंदुस्तान प्रबंधन ने दहशत कायम करते हुए बरेली यूनिट के सीनियर आईटी मैनेजर हरिओम गुप्ता को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। उनकी जगह लखनऊ से बुलाकर रमेश कुमार को सीनियर आईटी मैनेजर की कुर्सी सौंप दी थी। हरिओम गुप्ता को पहले नोयडा बुलाया गया फिर उनसे मजिठिया मांगने की हिमाकत करने की सजा देते हुए जबरन इस्तीफे पर साइन कर लिए गए थे।

बरेली में उसी समय इतना ही नहीं हिन्दुस्तान प्रबंधन ने कई सालों से बरेली यूनिट में कार्यरत गरीब मेहनतकश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के भी पेट पर लात मार दी थी।ये कर्मचारी रोजी-रोटी खोकर सड़क पर आ गए हैं।जिनमें ऑफिस कर्मचारी विपिन कुमार राणा, राजेश कुमार शर्मा, माली विजयपाल , हाउस कीपर सुभाष वाल्मिकी, प्रोडक्शन के सुशील कुमार और पैकिजिंग सेक्शन के चार कर्मचारी हैं।

सुप्रीम कोर्ट की लगातार अवमानना करके न्यायपालिका को खुली चुनौती दे रहे बेख़ौफ़ हिन्दुस्तान प्रबंधन को अब जबरन निकाले गए सीनियर आईटी मैनेजर हरिओम गुप्ता ने सबक सिखाने की ठान ली है। उन्होंने हिन्दुस्तान द्वारा किये गए उत्पीड़न की उपश्रमायुक्त बरेली से शिकायत की है। साथ ही मजिठिया वेज बोर्ड के मुताबिक वेतन-भत्तों आदि के एरियर का बकाया 43 लाख 64 हजार 850 रुपये का भुगतान दिलाने का आग्रह किया है। उप श्रमायुक्त बरेली के समक्ष श्री गुप्ता की ओर से पैरवी मजिठिया मामलों के जानकार/अधिवक्ता मनोज शर्मा व आलोक शंखधार कर रहे है। मनोज शर्मा ने बताया कि बरेली हिन्दुस्तान के सात और कर्मचारियों ने मजिठिया के क्लेम तैयार कराए हैं, जिन्हें श्रम विभाग/श्रम न्यायालय से न्याय दिलाने को वह  इसी सप्ताह केस करने जा रहे हैं। बरेली में मजिठिया की लड़ाई तेज होती जा रही है।

मालूम हो कि बरेली में 31 मार्च को डीएलसी के स्तर से हिंदुस्तान के चीफ रिपोर्टर पंकज मिश्रा के पक्ष में 25,64,976 रूपये, सीनियर कॉपी एडिटर मनोज शर्मा के पक्ष में 33,35,623 रूपये और सीनियर सब एडिटर निर्मलकांत शुक्ला के पक्ष में 32,51,135 रूपये की वसूली के लिए हिन्दुस्तान बरेली के महाप्रबंधक/यूनिट हेड और स्थानीय संपादक के नाम आरसी जारी हो चुकी हैं।

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मजीठिया वेज बोर्ड : SC के आदेश का असर, लेबर कोर्ट ने दी छोटी डेट

सुप्रीम कोर्ट के 13 और 27 अक्टूबर के आदेश का असर अब लेबर कोर्ट में चल रहे मजीठिया वेज बोर्ड के केसों में दिखना शुरू हो गया है। लेबर कोर्ट प्रबंधन की लंबी डेट की मांग को अनसुना कर अब छोटी डेट दे रहे हैं। इससे रिकवरी, ट्रांसफर, टर्मिनेशन आदि के केस लड़ने वाले कर्मचारियों के अंदर उत्साह का संचार दौड़ पड़ा है।

30 अक्‍टूबर को होशांगाबाद लेबर कोर्ट में दैनिक भास्‍कर के 5 कर्मियों के ट्रांसफर और टर्मिनेशन में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 13 और 27 अक्‍टूबर के आदेश की प्रतियां लगाई गईं। इसके बाद माननीय जज साहब ने 13 नवंबर की तारीख दी। भास्‍कर के वकील ने अपनी तरफ से लंबी डेट मांगने का पूरा प्रयास किया। परंतु माननीय जज साहब ने बोला कि 13 दिन का समय बहुत होता है। इसके बाद भास्‍कर का वकील कुछ नहीं बोल सका और उसके चेहरे का रंग उड़ गया। वहीं कर्मियों के चेहरे पर मुस्‍कान खिल गई। सुनवाई के दौरान 5 में से 4 कर्मियों ने अपनी गवाही पूरी की।

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मजीठिया वेजबोर्ड मांगने पर हुए ट्रांस्फर / टर्मिनेशन के मामले भी छह माह में निपटाने होंगे : सुप्रीम कोर्ट

रविंद्र अग्रवाल की रिपोर्ट

अखबार कर्मियों को दिवाली के बाद छठ का तोहफा, पंकज कुमार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया उत्साहजनक आदेश…

अखबार मालिकों के सताए अखबार कर्मियों को सुप्रीम कोर्ट से एक और बड़ी राहत भरी खबर मिली है। माननीय सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस गोगोई और जस्टिस सिन्हा की बैंच ने आज मजीठिया वेजबोर्ड मांगने पर की गई टर्मिनेशन और ट्रांस्फर के मामलों को भी छह माह में निपटाने के आदेश जारी किए हैं। आज दैनिक जागरण गया के कर्मचारी पंकज की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अखबार मालिकों के खिलाफ लगाई गई अवमानना याचिाकाओं पर 19 जून को दिए गए आने निर्णय के पैरा नंबर 28 में बर्खास्तगी और तबादलों को लेकर दिए गए निर्देशों को भी वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा 17(2) के तहत रेफर किए गए रिकवरी के मामलों में 13 अक्तूबर को दिए गए टाइम बाउंड के आर्डर के साथ अटैच करते हुए इन मामलों की सुनवाई भी छह माह के भीतर ही पूरी करने के निर्देश जारी किए हैं।

ज्ञात रहे कि गया के मजीठिया क्रांतिकारी पंकज कुमार मजीठिया वेजबोर्ड मांगने के चलते तबादले का शिकार हुए थे और उन्होंने पटना उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश रह चुके सेवानिवृत्त जस्टिस नागेंद्र राय के सहयोग से दैनिक जागरण की इस तनाशाही के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए कार्यवाही करने से पल्ला झाड़ लिया था कि ट्रांस्फर व टर्मिनेशन के मामलों को अनुच्छेद 32 के तहत इतने उच्च स्तर की रिट याचिका में उठाना उचित नहीं है, क्योंकि ये मामले कर्मचारी की सेवा शर्तों से जुड़े होते हैं और इन्हें उचित प्राधिकारी के समक्ष ही उठाया जाना उचित रहेगा।

19 जून की जजमेंट के पैरा 28 का अनुवाद इस प्रकार से है-

“28. जहां तक कि तबादलों/ बर्खास्तगी के मामलों में हस्तक्षेप की मांग करने वाली रिट याचिकाओं के रूप में, जैसा कि मामला हो सकता है, से संबंध है, ऐसा लगता है कि ये संबंधित रिट याचिकाकर्ताओं की सेवा शर्तों से संबंधित है। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस न्यायालय के अत्याधिक विशेषाधिकार रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल इस तरह के सवाल के अधिनिर्णय के लिए करना न केवल अनुचित होगा परंतु ऐसे सवालों को अधिनियम के तहत या कानूनसंगत प्रावधानों(औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 इत्यादि), जैसा कि मामला हो सकता है, के तहत उपयुक्त प्राधिकारी के समक्ष समाधान के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए।”

उधर, माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले 13 अक्तूबर, 2017 को 17(2) के तहत मजीठिया वेजबोर्ड के रिकवरी केे मामलों की सुनवाई को श्रम न्यायालयों में रेफ्रेंस प्राप्त होने के छह माह के भीतर प्राथमिकता के तौर पर निपटाने के आदेशों के बाद आज यानि 27 अक्तूबर को अवमानना याचिकाओं पर दिए गए निर्णय के पैरा 28 में उदृत्त ट्रांस्फर और टर्मिनेशन के मामलों को भी इन्हीं आदेशों से जोड़ कर छह माह में ही निपटाने के आदेश जारी करके अखबार मालिकों की लेटलतीफी की रणनीति से परेशान मजीठिया क्रांतिकारियों का उत्साह दोगुना कर दिया है। उनकी पिछले छह वर्षों से चली आ रही यह जंग अब निर्णयक दौर में है।

आज के इस निर्णय के लिए पंकज कुमार को इस मुकाम तक पहुंचने में निशुल्क मदद करने वाले पूर्व जस्टिस एवं अधिवक्ता नागेंद्र राय जी और उनकी टीम बधाई और आभार की पात्र है। उनकी टीम के सह अधिवक्ता मदन तिवारी और शशि शेखर ने पंकज कुमार को काफी हौसला दिया था। पंकज कुमार ने इस निर्णय के बाद खुशी जाहिर करते हुए बताया कि वे अपने अधिवक्ता पूर्व जस्टिस नागेंद्र राय के आभारी हैं, जिन्होंने उन्हें बिना किसी फीस के इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की। वहीं उनके सह अधिवक्ताओं ने हमेशा उनकी हौसला अफजाई की और दिलासा देते रहे कि यकीन रखें जीत हमेशा सत्य की ही होती है।

उधर, 13 अक्तूबर के निर्णय के लिए मुख्य अवमानना याचिका संख्या 411/2014 के अविषेक राजा और उनके वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंज़ाल्विस  भी  उतने ही बधाई और आभार के पात्र हैं, जिन्होंने 19 जून और 13 अक्तूबर के निर्णयों में अहम भूमिका निभाई थी।

रविंद्र अग्रवाल

वरिष्ठ संवाददाता

धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश

संपर्क : 9816103265

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छह माह में मजीठिया मामले निपटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की लिखित कापी देखें

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट ने आज २४ अक्टुबर २०१७ को एक आदेश जारी कर देश भर की लेबर कोर्ट और इंडस्ट्ीयल कोर्ट को निर्देश दिया है कि १७(२) के मामलों का निस्तारण प्रार्थमिकता के आधार पर ६ माह के अंदर करें। माननीय सुप्रीमकोर्ट ने आज जारी अपने आदेश में उन मामलों पर कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की जो लेबर विभाग में चल रहे हैं।  माननीय सुप्रीमकोर्ट के आज जारी आदेश का उन मीडियाकर्मियों ने स्वागत किया है जिनका मामला लेबरकोर्ट या इंडस्ट्रीयल कोर्ट में १७(२) के तहत चल रहा था। लेकिन उन लोगो को थोड़ी परेशानी होगी जिनका १७(१) का मामला लेबर विभाग में चल रहा है।

आज आये माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश का एडवोकेट उमेश शर्मा ने स्वागत किया है और कहा है कि ये आर्डर बहुत ही अच्छा है। उन्होंने कहा है कि इसमें सुप्रीमकोर्ट को १७ (१) को भी कवर करना चाहिये था। उन्होंने कहा है कि माननीय सुप्रीमकोर्ट के आज आये आर्डर से मीडियाकर्मियों की लड़ाई आसान हो गयी है मगर मीडियाकर्मियों को चाहिये कि अपनी लड़ाई अब होश में लड़ें। सबसे पहले कागजों पर अपनी कंपनी का क्लासिफिकेशन करें। आप जिस पद पर काम कर रहे हैं और आपका पोस्ट तथा ड्यूटी चार्ट जरूर अच्छी तरह से रखें।

उमेश शर्मा ने कहा है कि कर्मचारी अपनी ओर से लेबरकोर्ट या लेबर विभाग या इंडस्ट्रीयल कोर्ट में डेट ना लें। क्लेम करने वाले मीडियाकर्मी कागजातों से ही लड़ाई जीत सकते हैं, इसलिये ज्यादा से ज्यादा कागजाती द्स्तावेज अपने पास रखें। एडवोकेट उमेश शर्मा ने यह भी कहा है कि जिन लोगों ने १७(१) का क्लेम लगाया है, उन्हें इस आर्डर से निराश होने की जरूरत नहीं है। वे अपना मामला जल्द से जल्द १७(२) के तहत लेबर कोर्ट में ले जायें, जहां से उनकी जीत तय है।

सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश नवीन सिन्हा की खंडपीठ ने वेजबोर्ड के तहत वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट की धारा 17(2) के मामलों को निपटाने के लिए देश भर के लेबर कोर्टों/ट्रिब्यूनलों को श्रम विभाग द्वारा रेफरेंस करके भेजे गए रिकवरी के मामलों को छह माह के भीतर प्राथमिकता से निपटाने के आदेश जारी किए हैं। आज सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर यह आदेश अपलोड होते ही मजीठिया की लड़ाई लड़ रहे अखबार कर्मियों में खुशी की लहर दौड़ गई। ज्ञात रहे कि हजारों अखबार कर्मी सात फरवरी 2014 को दिए गए सुप्रीम कार्ट के आदेशों के तहत मजीठिया वेजबोर्ड के तहत एरियर व वेतनमान की जंग लड़ रहे हैं। इनमें से सैकड़ों कर्मी अपनी नौकरी तक खो चुके हैं।

सुप्रीमकोर्ट का आर्डर ये है :

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

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दैनिक जागरण को लगा झटका, रामजी के तबादले पर श्रम विभाग ने लगाई रोक

कानपुर। “स्वघोषित चैम्पियन” दैनिक जागरण के मालिकान को ताजा झटका कानपुर श्रम विभाग से मिला है। सहायक श्रम आयुक्त आरपी तिवारी ने मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुरूप वेतन एवं बकाये की मांग करने वाले दैनिक जागरण कानपुर में कार्यरत कर्मचारी रामजी मिश्रा के सिलीगुड़ी स्थानांतरण पर फिलहाल रोक लगा दी है। श्री तिवारी द्वारा जारी आदेश में दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से रामजी मिश्रा का कानपुर कार्यालय से सिलिगुड़ी किए गए तबादले को अनुचित एवं अवैधानिक करार दिया गया है।

गौरतलब है कि रामजी मिश्रा ने कानपुर श्रम विभाग में दिनांक 18 जुलाई 2017 को रिकवरी का क्लेम फाइल किया था। इससे झुब्ध होकर दैनिक जागरण के प्रबंधक ने दिनांक 24 जुलाई 2017 को रामजी का तबादला सिलीगुड़ी कर दिया था। इसके बाद रामजी ने तबादला निरस्त किए जाने की गुहार कानपुर श्रम विभाग में लगाई थी। बतातें चलें कि 19 जून 2017 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से देश के नंबर वन अखबार के मालिक सकते में आ गए थे।

कोर्ट के रुख और भविष्य की अड़चनों को सतही तौर पर ध्यान में रखते हुए मलिकान ने “कमजोर पेड़ों” को काटने की “सुपारी” प्रबंधक अजय सिंह को दे दी थी। इसके बाद अजय सिंह ने बेहद शातिराना अंदाज में उत्पीड़न करने के बाद 23 लोगों का तबादला कर दिया था। ये फैसला इन्हीं 23 कर्मचारियों में शामिल रामजी मिश्रा के मामले में आया है।

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नवभारत अखबार के 47 कर्मचारियों ने लगा दिया मजीठिया वेज बोर्ड का क्लेम

महाराष्ट्र के प्रमुख हिंदी दैनिक नवभारत में माननीय सुप्रीमकोर्ट के 13 अक्टूबर यानि आज के आदेश का असर दिखने लगा है। यहां आज दिनांक 13 अक्टूबर को बांबे यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट संलग्न महाराष्ट्र मीडिया एंप्लाइज यूनियन से जुड़े नवभारत हिंदी दैनिक के 47 कर्मचारियों ने सामूहिक रुप से ठाणे लेबर कमिश्नर कार्यालय में मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार बकाये का क्लेम फाइल किया।

इसी बीच खबर आयी कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि छह माह के अंदर श्रम विभाग और श्रम न्यायालय में मजीठिया वेज बोर्ड से संबंधित सभी मामलों का निपटारा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के ताजे आदेश की खबर और ठाणे लेबर कमिश्नर कार्यालय में क्लेम फाइल की खबर मिलते ही नवभारत कर्मियों ने खुशी का इजहार किया और वहीं प्रबंधन की सांस फूलने लगी है।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
9322411335

मूल खबर…

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश- ‘मजीठिया वेज बोर्ड के सभी प्रकरण 6 महीने के भीतर निपटाएं’

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अहम फैसला सुनाते हुए देश के सभी राज्यों के श्रम विभाग एवं श्रम अदालतों को निर्देश दिया कि वे अखबार कर्मचारियों के मजीठिया संबंधी बकाये सहित सभी मामलों को छह महीने के अंदर निपटाएं। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति रंजन गोगोई एवं नवीन सिन्हा की पीठ ने ये निर्देश अभिषेक राजा बनाम संजय गुप्ता / दैनिक जागरण (केस नंबर 187/2017) मामले की सुनवाई करते हुए दिए।

गौरतलब है कि मजीठिया के अवमानना मामले में 19 जून 2017 के फैसले में इस बात का जिक्र नहीं था जिसे लेकर अभिषेक राजा ने सुप्रीम कोर्ट से इस पर स्पष्टीकरण की गुहार लगाई थी। हालांकि स्पष्टीकरण की याचिका जुलाई में ही दायर कर दी गई थी मगर इस पर फैसला आज आया जिससे मीडियाकर्मियों में एक बार फिर खुशी की लहर है।

आप सभी मीडियाकर्मियों से अपील है कि अपना बकाया हासिल करने के लिेए श्रम विभाग में क्लेम जरूर डालें अन्यथा आप इससे वंचित रह सकते हैं। अब अखबार मालिक किसी भी तरह से आनाकानी नहीं कर सकेंगे और मामले को लंबा नहीं खींच सकेंगे। अगर वे ऐसा करते हैं तो इस बार निश्चित रूप से विलफुल डिफेमेशन के दोषी करार दिए जाएंगे।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
मुंबई
संपर्क : 9322411335 , shashikantsingh2@gmail.com

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