नोटबंदी के बाद पार्टी एकाउंट में करोड़ों जमा कराने को लेकर चुनाव आयोग ने बसपा को दी भारी राहत

बहुजन समाज पार्टी द्वारा नोटबंदी के बाद दिल्ली के करोल बाग़ स्थित यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के अपने पार्टी अकाउंट में 02 दिसंबर से 09 दिसंबर 2016 के बीच 104 करोड़ रुपये के पुराने नोट जमा कराये जाने के सम्बन्ध में निर्वाचन आयोग ने पार्टी को भारी राहत दी है. इस सम्बन्ध में इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में पीआईएल दायर करने वाले प्रताप चंद्रा की अधिवक्ता डॉ नूतन ठाकुर ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने 29 अगस्त तथा 19 नवम्बर 2014 द्वारा वित्तीय पारदर्शिता सम्बन्धी कई निर्देश पारित किये थे.

…लेकिन मायावती सबक लेने को तैयार नहीं हैं!

अजय कुमार, लखनऊ
फिर बसपा से एक और नेता की विदाई और एक बार फिर मायावती पर धन उगाही का आरोप। यह सिलसिला लगता है कि बीएसपी के लिये अनवरत प्रक्रिया हो गई है। बसपा छोड़ने या निकाले जाने वाला शायद ही कोई ऐसा नेता रहा होगा जिसने ‘बहनजी’ पर धन उगाही का आरोप न लगाया हो। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भी इसी सिलसिले को आगे बढ़ाया है। अपनी बात साबित करने के लिये उनके द्वारा मायावती से टेलीफोन पर हुई वार्तालाप का ऑडियो क्लिप जारी किया गया है। नसीमुद्दीन की विदाई के साथ ही बीएसपी में एक युग समाप्त हो गया है। नसीमुद्दीन को कांशीराम ही बसपा में लाये थे। नसीमुद्दीन के बाहर जाने के बाद अब बसपा में कांशीराम के समय का कोई कद्दावर नेता पार्टी में नहीं बचा है। बड़े नेताओं के नाम पर मााया के अलावा सतीश मिश्रा ही बचे हैं। सतीश मिश्रा भले ही बीएसपी के कद्दावर नेता हों, लेकिन बीएसपी में उनका आगमन काफी देरी से हुआ और बीएसपी मूवमेंट में उनका कोई खास योगदान भी नहीं रहा है।