16 मई के बाद कितना और कैसे बदला मीडिया (पार्ट-3)

: जन-आंकाक्षाओं तले मीडिया की बंधी पोटली के मायने : बीते सात महीनों में एक सवाल तो हर जहन में है कि देश में मोदी का राजनीतिक विकल्प है ही नहीं। यानी जनादेश के सात महीने बाद ही अगर मोदी सरकार की आलोचना करने की ताकत कांग्रेस में आयी है या क्षत्रपों को अपने अपने किले बचाने के लिये जनता परिवार का राग गाना पड़ रहा है तो भी प्रधानमंत्री मोदी के विकल्प यह हो नहीं सकते। राहुल गांधी हो या क्षत्रपों के नायक मुलायम, नीतिश या लालू ।