बीएचयू कांड ने हम पत्रकारों को समझा दिया…. मीडिया निष्तेज तलवार हो चुकी है…

BHU हंगामे के दूसरे दिन हम तब अवाक रह गए जब जिला प्रशासन ने खवरनवीसों को आइना दिखाते हुए मेडिकल कालेज से आगे बढ़ने से ही रोक दिया… कुछ बायें दायें से रुइया हास्टल चौराहे तक पहुंचे लेकिन यहाँ पहले से ज्यादा की तादात में डटे वर्दीधारियों ने प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के लोगों के साथ आंय-बांय करते हुए इन्हें आगे नहीं जाने दिया… एक दो बार के असफल प्रयास के बाद अखबार के रिपोर्टर, फोटोग्राफर, चैनल के कैमरापर्सन, स्ट्रिंगर और रिपोर्टर समझौतावादी नीति के तहत वहीं अपनी-अपनी धूनी जमा ली… लेकिन कुछ खुरचालियो किस्म के खबरनवीसों ने धोबिया पछाड़ दाँव लगाते हुए पुलिसिया करतूत को कैमरे में कैद कर ही किया…

हां हम अयोग्य हैं, इसीलिए पत्रकार हैं क्योंकि….

”अयोग्य लोग ही इस पेशे में आते हैं, वे ही पत्रकार बनते हैं जो और कुछ बनने के योग्य नहीं होते..” आज स्थापित हो चुके एक बड़े पत्रकार से कभी किसी योग्य अधिकारी ने ऐसा ही कहा था… कहां से शुरू करूं… मुझे नहीं आता रोटी मांगने का सलीका… मुझे नहीं आता रोटी छीनने का …

मीडिया वाली बाई

1975 से 1977 तक देश में आपात-काल था ! “दबंग” इंदिरा गांधी ने पत्रकारों को झुकने को कहा था , कुछ रेंगने लगे, कुछ झुके और कुछ टूटने के बावजूद झुकने से इंकार कर बैठे ! 2014 का नज़ारा कुछ अलग है ! भाजपा और आर.एस.एस. के नरेंद्र नरेंद्र मोदी और उनकी टीम दबंगई की जगह भय और अर्थ के ज़रिये कूटनीतिक रवैया अपना रही है ! ये टीम धौंस और धंधे की मज़बूरी को बख़ूबी कैश कराना जानती है ! परदे के पीछे की धौंस और पत्रकारिता का लेबल लगाकर धंधा करना, मोदी-राज में यही दो वज़ह है जो पत्रकार की खाल में (द) लाल पैदा कर रही है ! बारीक़ी से नज़र डालें, तो अब पत्रकार की जगह ज़्यादातर मैनेजर्स नियुक्त किये जा रहे हैं ! बड़े चैनल्स की सम्पादकीय कही जाने टीम पर गौर-फ़रमाएंगें तो पायेंगें कि  निम्नतम-स्तर के ज़्यादातर पत्रकार और उम्दा कहे जा सकने वाले ये एजेंट ही सम्पादकीय लीडर बने फिर रहे हैं ! पत्रकारों की क़ौम को ही ख़त्म कर देने पर आमादा मोदी और उनकी टीम ने पत्रकारिता में शेष के नाम पर कुछ अवशेष छोड़ देने का बीड़ा उठाया है और इसे साकार कर के ही छोड़ने पर तुली है ! शर्म आती है ! मोदी और उनकी टीम को भले ही ना आये ! और आयेगी भी क्यों ? यही तो चाहत है !

दारुबाजी में पत्रकारों से होटल कर्मियों ने की मारपीट, मामला दर्ज

उरई (जालौन)। शहर के चर्चित शाकाहारी दांतरे होटल में दारुबाजी करना उत्‍तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) के प्रदेश अध्यक्ष रतन दीक्षित को महंगा पड़ गया। विवाद हो जाने पर होटल के नौकरों ने उनके समेत कई पत्रकारों से मारपीट की। उनके साथ उपजा के प्रदेश मंत्री व यूनीवार्ता के कथित संवाददाता एवं हरदोई गूजर इंटर कालेज के शिक्षक दीपक अग्निहोत्री, लोकभारती के संवाददाता और उपजा का जिला कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश राठौर से भी होटल कर्मचारियों मारपीट की। बाद में होटल मालिक अनुराग दांतरे ने संजय मिश्रा सहित तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज करवा दिया।

मोदी को ’24 घंटे वालों’ से डर लगता है!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सांसदों को कुछ बोलते हुए डर लगता है कि ‘24 घंटे वाले’ जाने क्या रंग दे डाले। मोदी ने संसद भवन परिसर में बालयोगी सभागार में कांग्रेस के करण सिंह, भाजपा के अरूण जेटली और जदयू के शरद यादव को ‘उत्कृष्ठ सांसद’ का पुरस्कार दिये जाने के लिए आयोजित समारोह में यह बात कही।