पंकज जी की बर्खास्तगी का उत्सव मनाने वाले भाइयों, गुजारिश है कि साथ में भाजपाई एजेंडों की जीत का जश्न भी मनाते जाइए!

: आईबीएन सेवन से पंकज श्रीवास्तव की बर्खास्तगी को लेकर मीडिया में चल रही बतकही के बीच :  ”बंद हैं तो और भी खोजेंगे हम, रास्ते हैं कम नहीं तादाद में” …ये पंक्तियाँ ही कहीं गूँज रही थीं पंकज भाई की बर्खास्तगी की खबर के बाद। … बनारस आने के बाद न जाने कितनी बार उनके साथ इन पंक्तियों को दुहराया होगा। …”हम लोग कोरस वाले थे दरअसल” .… इरफ़ान भाई के ब्लॉग पर आज उसी आवाज को फिर से सुनना बढ़िया लगा. कल प्रेस क्लब में थोड़ी देर के लिए मुलाकात भी हुई कई लोगों से.…

बकरी चराने वाले को जिंदा जलाना और कूड़ा बीनने वालियों के साथ गैंगरेप

Mitra Ranjan : हमारे समाज में मौजूद जातिगत दर्जेबंदी ने किस कदर लोगों को वहशी बना दिया है उसके बारे में कुछ भी कहना कम है। अभी बिहार में हुई दो घटनाएँ इसी ओर इशारा कर रही हैं – किसी दबंग साहब के खेत में एक दलित परिवार की बकरी चले जाने पर १५ साल के किशोर के साथ मार-पीट और बाद में उसको जिन्दा जला देने का अमानवीय कृत्य और कूड़ा बीनने वाली ५ दलित बच्चियों /महिलाओं के साथ गैंगरेप की क्रूर घटना ! किस संवेदना की बात करते हैं साहब। और मीडिया- चैनल और प्रिंट, इन खबरों को संजीदगी एवं तत्परता से सामने लाने से मुंह चुराते रहे।