अपने कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड न देने वाले रमेशचंद्र अग्रवाल अपने साथ कुछ न ले जा सके!

देश के प्रसिद्ध समाचार पत्र दैनिक भास्कर को संचालित करने वाली कंपनी डीबी कार्प के चेयरमैन रमेशचंद अग्रवाल कल अहमदाबाद में ईश्वर को प्यारे हुए और खाली हाथ ही दुनिया से चले गए. अपने इतने बड़े साम्राज्य में से कुछ भी अपने साथ न ले जा सके. रमेश चंद्र अग्रवाल ने जीते जी अपने कर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड के हिसाब से एरियर और वेतन न देने की जिद कर रखी थी और दिया भी नहीं. मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. मजीठिया वेज बोर्ड न दिए जाने की सबसे ज्यादा शिकायत दैनिक भास्कर समूह से ही आई है.

महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड लागू किए जाने की फर्जी रिपोर्ट भेजी

महाराष्ट्र राज्य के श्रम आयुक्त की मीडिया मालिकों से मिलीभगत है, ऐसी आशंका तो बहुत पहले से जताई जा रही थी। परन्तु इस बात की पुष्टि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार के विभिन्न कार्यालयों से  आरटीआई के जरिए प्राप्त हुए कागजातों ने कर दी है। जैसा कि विदित है माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस मजीठिया वेजबोर्ड के अनुसार सभी मीडिया संस्थानों में वेतन देने का निर्देश दिया है और इसके लागू कराने की जिम्मेदारी श्रम आयुक्तों को सौंप दी है।

‘हिन्दुस्तान’ अखबार को मजीठिया क्रांतिकारियों ने हराया, जीएम व संपादक की आरसी कटी

बरेली से बड़ी खबर आ रही है कि उपश्रमायुक्त ने हिन्दुस्तान के महाप्रबंधक और स्थानीय संपादक के खिलाफ मजीठिया बेज बोर्ड के अनुसार तीन कर्मचारियों के वेतन व एरियर की बकाया वसूली के लिए आरसी जारी कर जिलाधिकारी को भेज दी है। हिन्दुस्तान प्रबंधन को सोमवार को श्रम न्यायालय में करारी हार का सामना करना पड़ा। इस खबर से हिन्दुस्तान के उच्च प्रबंधन में हड़कंप मच गया है। हालांकि हिन्दुस्तान प्रबंधन सोमवार को आरसी का आदेश रिसीव होने तक उसे रुकवाने के लिए आला अफसरों के जरिये दबाव बनाने में लगा रहा।

सीएम से शिकायत की धमकी देते ही डीएलसी ने हिन्दुस्तान के संपादक को भेजा नोटिस

बरेली से बड़ी खबर आ रही है कि हिन्दुस्तान बरेली में कार्यरत सीनियर कॉपी एडिटर राजेश्वर विश्वकर्मा के मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक वेतनमान व एरियर के दाखिल क्लेम पर आखिरकार उपश्रमायुक्त बरेली ने संपादक को नोटिस जारी कर ही दिया। संपादक मनीष मिश्रा को 4 अप्रैल को श्रम न्यायालय में तलब किया गया है।

न्यायमूर्ति मजीठिया ने पत्रकारों की सेवानिवृत्ति उम्र 58 से बढ़ाकर 65 कर दी थी!

Om Thanvi : दाद देनी चाहिए शरद यादव की कि संसद में पत्रकारों के हक़ में बोले, मजीठिया वेतन आयोग की बात की, मीडिया मालिकों को हड़काया। यह साहस – और सरोकार – अब कौन रखता और ज़ाहिर करता है? उनका पूरा भाषण ‘वायर‘ पर मिल गया, जो साझा करता हूँ। प्रसंगवश, बता दूँ कि मालिकों और सरकार का भी अजब साथ रहता है जो पत्रकारों के ख़िलाफ़ काम करता है। देश में ज़्यादातर पत्रकार आज अनुबंध पर हैं, जो कभी भी ख़त्म हो/किया जा सकता है। ऐसे में मजीठिया-सिफ़ारिशें मुट्ठी भर पत्रकारों के काम की ही रह जाती हैं। क़लम और उसकी ताक़त मालिकों और शासन की मिलीभगत में तेल लेने चले गए हैं। क़ानून ठेकेदारी प्रथा के हक़ में खड़ा है। 

हिंदुस्तान प्रबंधन की लखनऊ के बाद आगरा में आरसी कटी, बरेली में भी तैयारी

आगरा से बड़ी खबर आ रही है, जहां मजीठिया के मामले में हिंदुस्तान प्रबंधन को मुंह की खानी पड़ गई। मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों के तहत अपने बकाए और अंतरिम वेतन की मांग कर रहे हिन्दुस्तान अखबार के कर्मचारियों की शिकायत का निस्तारण कर श्रम न्यायालय ने हिंदुस्तान प्रबंधन की आरसी काट दी है। बरेली में भी आरसी कटने की तैयारी है, जहां श्रम न्यायालय ने अभी आदेश सुरक्षित कर लिया है।

बरेली डीएलसी को हिंदुस्तान के चार शिकायतकर्ताओं की तलाश

शिकायतें मिली नहीं या फिर श्रमायुक्त कार्यालय कानपुर से आने के बाद बरेली में उपश्रमायुक्त कार्यालय में दबा ली गईं, कुछ तो जरूर हुआ है। डीएलसी बरेली 23 व 24 मार्च को कानपुर में श्रमायुक्त की मीटिंग में जब पहुंचे तो उनसे बरेली में हिंदुस्तान के विरुद्ध मजीठिया के क्लेम को लेकर श्रमायुक्त कार्यालय से भेजी गई नौ शिकायतों के निस्तारण की प्रगति पूछी गई। तब उन्होंने हैरानी जताते हुये सिर्फ पांच हिंदुस्तानियों की शिकायतें ही मिलने की बात कही।

मजीठिया वेज बोर्ड : दिव्या सेंगर मामले में हाईकोर्ट ने ‘नयी दुनिया’ को राहत देने से किया इनकार

इंदौर से एक बड़ी खबर आ रही है। यहां नई दुनिया अखबार में एक्जीक्यूटिव मार्केटिंग के पद पर कार्यरत दिव्या सेंगर के रायपुर में हुये ट्रांसफर पर सिविल कोर्ट द्वारा रोक लगाने के बाद हाईकोर्ट गए जागरण प्रबंधन के सहयोगी अखबार नयी दुनिया प्रबंधन को भयंकर हार का सामना करना पड़ा है। हाईकोर्ट ने साफ़ कह दिया कि निचली अदालत द्वारा ट्रांसफर पर लगाई गई रोक पूरी तरह सही है।

बरेली में डीएलसी ने पूरी की मजीठिया क्लेम की सुनवाई, फैसला सुरक्षित

बरेली से बड़ी खबर आ रही है। बरेली के श्रम न्यायालय में मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतनमान और एरियर के दाखिल हिंदुस्तान के तीन कर्मचारियों के क्लेम पर शनिवार को उपश्रमायुक्त ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित कर लिया है। उपश्रमायुक्त ने हिंदुस्तान प्रबंधन को अब और समय देने से दो टूक इंकार कर दिया।

लोकसभा में सीपीएम के सांसद ने न्यूज चैनल वालों को भी वेज बोर्ड के अधीन लाने की मांग की

सांसद ए. संपत ने पत्रकारों के वेतन में वृद्धि और नए वेज बोर्ड के गठन के लिए भी आवाज उठाई….

नयी दिल्ली : लोकसभा में कल एक सदस्य ने पत्रकारों के वेतन वृद्धि करने के लिए तुरंत वेज बोर्ड का गठन किए जाने की मांग की और साथ ही कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कार्यरत मीडियाकर्मियों को भी इस वेज बोर्ड के दायरे में लाया जाए।

लोकसभा में फिर उठी मजीठिया की मांग, अबकी RSP के प्रेमचंद्रन ने उजागर किया पत्रकारों का दर्द

देश भर के प्रिंट मीडियाकर्मियों का दर्द अब संसद सदस्यों को भी समझ में आने लगा है। कल दूसरे दिन भी लोकसभा में पत्रकारों के वेतन, एरियर और प्रमोशन से जुड़ा जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का मामला उठा। इससे पहले मंगलवार को झारखंड के कोडरमा से सांसद डॉ रविन्द्र कुमार राय ने पत्रकारों को मिलने वाले वेतन व सुविधाओं का मामला उठाते हुए मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों को लागू करने की मांग लोकसभा में की थी।

मजीठिया वेज बोर्ड पर शरद यादव के जोरदार भाषण का मीडिया ने किया बहिष्कार, राज्यसभा में मीडिया को जमकर दुत्कार

शरद यादव द्वारा कल राज्यसभा में मजीठिया वेज बोर्ड, मीडिया की आजादी और मीडिया मालिकों की धंधेबाजी पर दिए गए जोरदार भाषण को न किसी चैनल न दिखाया और न किसी अखबार ने छापा… आज राज्यसभा में मीडिया की इस हरकत की जमकर की गई निंदा 

जदयू नेता शरद यादव द्वारा बुधवार को राज्यसभा में उठाये गये जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के क्रियान्वयन के मुद्दे को आज देश भर के किसी भी बड़े समाचार पत्र ने एक लाईन नहीं प्रकाशित किया। मीडिया मालिकों की इस हरकत से राज्यसभा में आज विपक्ष का तेवर तल्ख दिखा। विपक्ष ने गुरुवार को राज्यसभा में यह मुद्दा उठाया और कहा कि मीडिया ने उच्च सदन में कल चुनाव सुधारों पर हुई चर्चा के दौरान संपन्न रचनात्मक बहसों तथा सुझावों का प्रकाशन नहीं किया।

नवोदय टाइम्स : मेहनत करे पत्रकार, हक खाए दलाल

दूसरों को नियम कानून और नैतिकता का उपदेश देने वाले मीडिया संस्थान इन्ही उपदेशों का किस तरह नंगा नाच करते हैं यह किसी से छुपा नहीं है। एक ऐसी ही शिकायत है नवोदय टाइम्स के कर्मचारियों की जहां कर्मचारियों से मशीन की तरह काम लिया जाता है, लेकिन उसके बदले मालिक और संपादक की नजर कर्मचरियों के वेतन काटने में रहती है। किसी को मेडिकल कार्ड नहीं, अवकाश कार्ड नहीं, पीएफ का पैसा कहा जाता है, पता नहीं लेकिन मुंह खोले तो निकालने की धमकी पहले दी जाती है। यहां साप्ताहिक अवकाश या अवकाश के बारे में सोचो ही मत। जान पर आफत हो तो क्या,  दवाई खाकर आओ और काम करो। जान से ज्यादा यहां काम कीमती है।

‘ईयर ऑफ विक्टिम्‍स’ और मजीठिया मामले में इंसाफ की आस

मजीठिया वेज अवॉर्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे अवमानना केसों की सुनवाई ठहर गई है। रुक गई है। एक तरह से विराम लग गया है। तारीख पड़नी बंद हो गई है। तारीख क्‍यों नहीं पड़ रही है, इस पर कुछ वक्‍त पहले अटकलें भी लगती थीं, अब वो भी बंद हैं। सन्‍नाटा पसर गया है। हर शोर, हर गरजती-गूंजती-दहाड़ती, हंगामेदार आवाज इन्‍हें निकालने वाले गलों में शायद कहीं फंस कर रह गई है। या हो सकता है कि इन्‍हें निकालने वाले गलों ने साइलेंसर धारण कर लिया हो। जो भी हो, यह स्थिति है आस छुड़ाने वाली, निराशा में डुबाने वाली, उम्‍मीद छुड़वाने वाली, नाउम्‍मीदी से सराबोर करने वाली, सारे किए-धरे पर पानी फिरवाने वाली।

मजीठिया क्रांतिकारी मनोज शर्मा की कविता- …होठों को सी कर जीने से तो मरना ही अच्छा है!

मनोज शर्मा हिंदुस्तान बरेली के वरिष्ठ पत्रकार हैं. ये मजीठिया क्लेम पाने के लिए हिन्दुस्तान प्रबंधन से जंग लड़ रहे हैं. इन्होंने आज के वर्तमान परिस्थियों में अखबारों में कार्यरत साथियों की हालत को देखते हुए एक कविता लिखी है. कविता पढ़ें और पसंद आए तो मनोज शर्मा को उनके मोबाइल नंबर 9456870221 पर अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराएं….