इंदौर में मजीठिया के समस्त प्रकरण 17 (2) में हो जा रहे हैं ट्रांसफर!

माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदत्त विशेषाधिकार के तहत मजीठिया वेज बोर्ड के मामलों की सुनवाई कर रहे मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित श्रमायुक्त कार्यालय में  सहायक श्रमायुक्त श्री एल पी पाठक की कोर्ट में मजीठिया वेज बोर्ड की मांग कर रहे पत्रकार साथियों के करीब 150 से 200 प्रकरण विचाराधीन है। इन समस्त प्रकरणों में सुनवाई और बहस निरन्तर जारी है। किन्तु बहस के दौरान ए.एल.सी श्री पाठक का रुख़ पीड़ित पत्रकार साथियों की तरफ न होकर अख़बार प्रबंधन की और ज्यादा सकारत्मक दिखाई पड़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण अभी अभी देखने में आया है कि इंदौर और आसपास के शहरों से अनेक पीड़ित कर्मचारियों ने अख़बार मालिकों के विरूद्ध केस लगा रखे है जिनकी सुनवाई ए.एल.सी.श्री पाठक की कोर्ट में निरन्तर चल रही है।

मजीठिया वेज बोर्ड : नयी दुनिया प्रबंधन के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी

इंदौर से एक बड़ी खबर आ रही है. यहां नई दुनिया अखबार प्रबंधन के खिलाफ अदालत की अवमानना संबंधी नोटिस जारी की गयी है. पूरा मामला नयी दुनिया में एक्जीक्यूटिव विपणन पद पर कार्यरत दिव्या सेंगर के रायपुर में हुये ट्रांसफर पर सिवील कोर्ट द्वारा रोक लगाने के बाद भी नयी दुनिया प्रबंधन द्वारा उन्हें अब तक वापस पुराने स्थान पर ज्वाइन ना कराने से जुड़ा है। दिव्या सेंगर के अधिवक्ता मनीष पाल ने खुद इस खबर की पुष्टि की है। मनीष पाल के मुताबिक नई दुनिया समाचार पत्र के प्रधान संपादक, संपादक, कमलेश पांडेय, संजय शुक्ल आदि सभी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना का वाद प्रस्तुत किया गया. इस पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए सभी विपक्षीगण को नोटिस जारी कर दिया. ऐसे मामलों में जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान है.

हिन्दुस्तान प्रबंधन ने जबरन इस्तीफा लिखाया, सदमे में मीडियाकर्मी की मौत

दिल्ली से हिन्दुस्तान मीडिया वेंचर लिमिटेड प्रबंधन के करतूत की एक दिल दुखा देने वाली खबर आ रही है। यहां जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार कर्मचारियों को वेतन और उनका बकाया ना देना पड़े, इसके लिये प्रबंधन उन लोगों से जबरी त्यागपत्र लिखवा रहा है और टार्गेट कर रहा है जिन्होंने अपने हक के लिए अदालत में केस नहीं लगाया है और ना ही लेबर विभाग में क्लेम किया है।

मजीठिया जंग : हेमकांत को स्टे के बावजूद ऑफिस में न घुसने देने वाले दैनिक भास्कर प्रबंधन पर कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्रवाई

मजीठिया मांगने वाले हेमकांत चौधरी को ट्रांसफर पर स्टे के बावजूद ऑफिस में नहीं घुसने देने वाले दैनिक भास्कर के अफसरों पर कोर्ट ने शुरू की अवमानना कार्रवाई… तीन महीने जेल की सजा और 5000 जुर्माना होना तय, भास्कर के अफसरों में हड़कंप… मजीठिया मामले में अब तक की सबसे बड़ी खबर महाराष्ट्र के औरंगाबाद से प्रकाशित होने वाले दैनिक भास्कर के मराठी अखबार दिव्य मराठी से आई है। यहाँ प्रबंधन की लगातार धुलाई कर रहे हेमकांत चौधरी ने अबकी बार प्रबंधन के चमचों को पटखनी देते हुए एक ही दांव में न केवल धूल चटा दी है बल्कि चारों खाने चित्त कर दिया है।

Majithia : Registry has assured that the Case will be listed on the priority basis

Dear Comrades,

The office of the ‘Indian Federation of Working Journalists’ (IFWJ) has been inundated with innumerable telephone calls and emails to know as to why the date of hearing of the Majithia case, which was fixed on 17th January 2017, was not taken up? On the last of date of hearing i.e. 10th January the matter was listed for arguments on Legal Issues. The arguments remained inconclusive.

मजीठिया वेज बोर्ड : अखबार मॉलिकों के खिलाफ 24 आरसी जारी, भास्कर में हड़कंप

मध्यप्रदेश के श्रम विभाग कार्यालय के काम करने के तरीके से दूसरे राज्यों के कामगार आयुक्त कार्यालयों को भी सीख लेनी चाहिए। पिछले दिनों श्रम विभाग द्वारा मध्यप्रदेश के विभिन्न समाचार पत्रों में कार्यरत पत्रकार एवं गैर पत्रकार कर्मचारियों के वेतन के मामलों का निराकरण कर 24  आर.आर.सी. जारी की गई। इनमें सबसे ज्यादा आर सी दैनिक भास्कर प्रबंधन के खिलाफ काटी गयी।

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली सुनवाई टली

आज मंगलवार के दिन जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले की सुप्रीमकोर्ट में सुनवाई होनी थी लेकिन इसे टाल दिया गया है. देश भर के मीडियाकर्मियों के वेतन, एरियर और प्रमोशन से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले की 17 जनवरी 2017 को होने वाली सुप्रीमकोर्ट की सुनवाई आगे बढ़ा देने से मीडियाकर्मी निराश हैं. बहुत देर से न्याय मिलने को न्याय मिलना नहीं कहते हैं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट जाने किस कारण इसी तर्ज पर काम करता दिख रहा है.

मुंबई के ‘हमारा महानगर’ ने एक अक्टूबर 2016 से लागू किया मजीठिया वेज बोर्ड

एरियर देने के लिये मांगा समय… 74 कर्मचारियों की सूची कामगार विभाग को सौंपी गयी…

मुंबई से खबर आ रही है कि यहां ‘हमारा महानगर’ अखबार ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की स्रिफारिश लागू कर दिया है। मुंबई के कामगार आयुक्त कार्यालय को सौंपी गयी अपनी रिपोर्ट में हमारा महानगर प्रबंधन ने एक एफिडेविट देकर यह जानकारी दिया है कि उसने अपने यहां कार्यरत 74 कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश का लाभ दे दिया है।

‘प्रातःकाल’ अखबार कर्मचारियों का नाम छिपा रहा है

मुम्बई से प्रकाशित गोयल फैमिली के अखबार प्रातःकाल में बड़े गड़बड़झाले की खबर सामने आ रही है। चर्चा है कि प्रातःकाल अखबार के सर्वेसर्वा गोयल फैमिली के चाचा- भतीजे ने अपने यहाँ कार्यरत मीडियाकर्मियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ ना देना पड़े, इसके लिए दर्जनों मीडियाकर्मियों का नाम झटके से अपने रजिस्टर से बाहर कर दिया है। जब लेबर विभाग की ओर से दबाव पड़ा तो इन्होंने जो नाम दिया उसमे वर्किंग जर्नलिस्ट कैटेगरी में सिर्फ दो नाम हैं- पहला नाम था सुरेश गोयल जो कि मुख्य संपादक हैं और दूसरा महीप गोयल जो स्थानीय संपादक हैं।

नासिक में सिर्फ 6 अखबार मालिकों ने दी बैलेंससीट, रिकवरी क्लेम एक भी नहीं

देश भर के मीडियाकर्मियों के वेतन, एरियर और प्रमोशन तथा अन्य सुविधाओं के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में महाराष्ट्र के नासिक जिले में सिर्फ 6 अखबार मालिकों ने माननीय सुप्रीमकोर्ट के दिशा निर्देश का पालन करते हुए अपनी कंपनी का वर्ष 2007 से 2010 तक का बैलेंससीट दिया है। ये अखबार हैं- दैनिक भ्रमर नासिक, श्रीरंग प्रकाशन, गावकरी प्रकाशन नासिक, आपला महाराष्ट्र धुले, दैनिक वार्ता धुले और दैनिक तरुण भारत जलगांव। अन्य अखबारों के मालिकों ने सुप्रीमकोर्ट के आदेश को गंभीरता से नहीं लिया।

शोकाज नोटिस देने के बाद भी जलगांव के किसी अखबार ने नहीं लागू किया मजीठिया

पत्रकारों ने भी मांगना उचित नहीं समझा अपना बढ़ा हुआ वेतन… आर टी आई से हुआ खुलासा… माननीय सुप्रीमकोर्ट के आदेश के बावजूद महाराष्ट्र के जलगांव में एक भी अखबार ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश लागू नहीं किया है। यह खुलासा हुआ है आरटीआई के जरिये। मुंबई के निर्भीक पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट शशिकांत सिंह ने आरटीआई के जरिये जो जानकारी निकाली है उसके मुताबिक जलगांव के तीन अखबारों जलगांव तरुण भारत, दैनिक जनशक्ति और दैनिक साईंमत में से दैनिक जलगांव तरुण भारत तथा जनशक्ति का मुख्यालय जलगांव में है। इन तीनों अखबारों ने आज तक जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश तो छोड़िये, मणिसाना वेज बोर्ड भी लागू नहीं किया है।

मजीठिया वेज बोर्ड के लिये यूपी में भी गठित हुई त्रिपक्षीय कमेटी, कई पत्रकार भी बनाए गए सदस्य

देश भर के मीडियाकर्मियों के वेतन, एरियर और प्रमोशन तथा अन्य सुविधाओं को दिलाने के लिये गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को सुचारू रूप से क्रियान्यवयन कराने के लिये भारत सरकार के आदेश पर अब देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश में भी त्रिपक्षीय समिति का गठन किया गया है। यह गठन उत्तर प्रदेश शासन की अधिसूचना पर किया गया है। इसी तरह की त्रिपक्षीय समिति इसके पहले महाराष्ट्र में बन चुकी है। जानकार बताते हैं कि यह त्रिपक्षीय समिति सिर्फ नाम के लिये बनायी जाती है।

मीडियाकर्मियों ने मांगी छुट्टी तो ‘हिन्दुस्तान’ के संपादक ने दी गालियां!

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर प्रबंधन से मांगने पर स्वामी भक्त संपादकों को भी बुरा लग रहा है। सबसे ज्यादा हालत खराब हिन्दुस्तान अखबार की है। खबर है कि हिन्दुस्तान अखबार के रांची संस्करण के दो कर्मियों अमित अखौरी और शिवकुमार सिंह ने जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन प्रबंधन से मांगा तो यहां के स्वामी भक्त स्थानीय संपादक  दिनेश मिश्रा को इतना बुरा लगा कि उन्होंने पहले मजीठिया कर्मियों को ना सिर्फ बुरा भला कहा बल्कि एक कर्मचारी को तो गालियां भी दीं। बाद में इन दोनों कर्मचारियों ने विरोध किया तो उन्हें मौखिक रूप से स्थानीय संपादक ने कह दिया कि आप दोनों कल से मत आईयेगा।

मजीठिया वेज बोर्ड : नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट ने की कामगार मंत्री से शिकायत

मुंबई : देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिश को महाराष्ट्र में अखबार मालिक और कामगार आयुक्त की सांठगांठ से लागू नहीं कराया जा रहा है। यह आरोप लगाते हुए नेशनल यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष डाक्टर उदय जोशी और महासचिव शीतल करदेकर ने महाराष्ट्र के कामगार मंत्री को एक शिकायती पत्र लिखा है। इस पत्र में आरोप लगाया गया है कि जानबूझ कर कामगार आयुक्त की तरफ से माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहवेलना की जा रही है।

श्री अम्बिका एजेंसी ने मजीठिया वेज बोर्ड न देने के लिए नया कुतर्क ढूंढा

मुंबई : देश भर के मीडियाकर्मियों के लिए गठित जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ पाने का सपना देखने वाले मुम्बई के श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस की न्यूज़ पेपर वितरण कंपनी श्री अम्बिका एजेंसी के कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज का लाभ अब नहीं मिल पायेगा। 21 अक्टूबर 2016 को श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस के पर्सनल आफिसर दयानेश्वर विठ्ठल रहाणे ने मुंबई के कामगार आयुक्त कार्यालय को एक पत्र लिखकर जानकारी दी है कि श्री अम्बिका एजेंसी पार्टनरशिप फर्म है। ये कोई कंपनी नहीं है। श्री अम्बिका एजेंसी कई समाचार पत्रों का, जिसमें श्री अम्बिका प्रिंटर्स एन्ड पब्लिकेशंस के समाचार पत्र भी शामिल हैं, का वितरण करती है।

दैनिक जागरण मजीठिया का लाभ कर्मचारियों को नहीं देगा! हिंदुस्तान, अमर उजाला और सहारा ने भी चली चाल

खुद को देश का नंबर वन अखबार बताने वाले दैनिक जागरण के कानपुर प्रबन्धन ने अपने कर्मचारियों को जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से साफ़ तौर पर पलटी मार लिया है। यही नहीं कानपुर से प्रकाशित हिंदुस्तान और अमर उजाला तो यहाँ तक दावा कर रहे हैं कि वह अपने कर्मचारी को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ दे रहे हैं। कानपुर से प्रकाशित राष्ट्रीय सहारा और आज अखबार ने अपने आर्थिक हालात का रोना रोते हुए मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ देने से इनकार कर दिया है।

Gopal Subramaniam Assures Implementation of Majithia

We have been getting inquiries from all over the country as to what had happened on 16th November in the Supreme Court during the hearing of the Majithia case. Many employees from the newspapers were present in the court room and they have communicated the information to other employees, yet the curiosity still persists. Although no hearing has taken place on that date yet for the employees, particularly of the Ushodaya Publications, the publishers of the multi edition Eenadu newspaper, there appeared to be the silver linings of hopes when, Senior Advocate Mr. Gopal Subramaniam sought time to from the Court to discuss the details of the implementation of the Majithia Wage Board from his client Mr. Ramoji Rao, the owner of the newspaper.

मजीठिया मामले में सुप्रीम कोर्ट में इस वकील के पाला बदलने से हर कोई अचरज में

पहले मीडियाकर्मियों के पक्ष में खड़ा होता था, इस बार मीडिया मालिकों के पक्ष में खड़ा हो गया… कभी सुप्रीम कोर्ट में महाधिवक्ता रह चुके कांग्रेस के मोहन पराशरन के खिलाफ जल्द ही बार एसोसिएशन में शिकायत की जायेगी. शिकायत करेंगे मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर के मीडिया कर्मियों की तरफ से सुप्रीमकोर्ट में केस लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा.

मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट में मीडिया मालिकों की चाल होने लगी कामयाब, अगली डेट 10 जनवरी को

लीगल इश्यू के दावपेंच में पूरे मामले को लंबा खींचने की रणनीति में सफल दोते दिख रहे मीडिया मालिकों के वकील : जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में बुधवार को लीगल इश्यू पर माननीय सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुयी। इस सुनवाई में पहले से ही घोषित एक रणनीति के तहत तय किया गया कि मीडियाकर्मियों की तरफ से सिर्फ एक एडवोकेट श्री कोलीन ही बहस करेंगे और बाकी एडवोकेट उमेश शर्मा, परमानंद पांडेय आदि चुप रहेंगे। बहस के दौरान लीगल इश्यू के मुद्दे को मीडिया मालिकों की ओर से खड़ी एडवोकेट की भारी भरकम टीम ने हाईजैक कर लिया। यह सत्यता स्वीकार किया है माननीय सुप्रीमकोर्ट में मीडियाकर्मियों की तरफ से लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने।

मजीठिया वेतनमान: काश! कोर्ट से पूछने का अधिकार होता…

मजीठिया वेतनमान मामले में अगर मुझे सुप्रीम कोर्ट से पूछने का अधिकार होता तो पूछता कि आपको यह न्यायालय के अवमानना का मामला क्यों नहीं लगता? पत्रकारों को मजीठिया वेतनमान दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने भले ही कई कदम उठाए हैं लेकिन प्रेस मालिकों पर इसका तनिक भी भय नहीं है। अधिकांश पत्रकार आज भी मजीठिया वेतनमान के लिए तरस रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में दो साल से न्यायालय अवमानना का सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

सुप्रीम कोर्ट को समझ में आ गया है कि मीडियाकर्मियों का हित क्या है और अखबार मालिकों की बेईमानी का इलाज क्या है।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में मीडियाकर्मियों की हर हाल में मदद करना चाहता है सुप्रीम कोर्ट : सुप्रीम कोर्ट में 8 नवंबर को हुई सुनवाई में मजीठिया वेज बोर्ड मामले को जल्दी निपटाने की दिशा में एक पहल की गई। यह तय किया गया है कि एक समिति या एक एसआईटी या एक मानीटरिंग कमेटी बना दिया जाए जो सारे मामले को अंजाम तक पहुंचाए। साथ ही राज्यों के लेबर कमिश्नरों की रिपोर्ट पर अब चर्चा न होकर सीधे मजीठिया मामले की कानूनी पहलुओं पर चर्चा करने का दौर शुरू होगा। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट 23 अगस्त की सुनवाई के बाद इस मामले के सबसे विवादित और महत्वपूर्ण पहलू 20(जे) तथा अनुबंध पर रखे गए कर्माचारियों के मुद्दे पर चर्चा करने के आदेश दिए थे लेकिन 4 अक्टूबर की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों के वकीलों की दलीलों के कारण स्थिति गड्डमड हो गई।

मजीठिया वेज बोर्ड : सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी बनाने का निर्देश दिया

सही दिशा में जा रही है जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई :  देश भर के मीडियाकर्मियों के वेतन एरियर तथा प्रमोशन से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में माननीय सुप्रीमकोर्ट ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम यानी एसआईटी बनाने का निर्देश दिया है। इस एसआईटी को लीड करेंगे हाईकोर्ट के एक रिटायर जज। आखिर ये एसआईटी के गठन के बाद जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई किस दिशा में जा रही है? देश भर के मीडियाकर्मियों में इस बात को लेकर सवाल उठ रहा है। तमाम शंकाओं के समाधान के लिए मैंने इस मामले में पत्रकारों की तरफ से लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा और परमानंद पांडे जी से बात की।

दैनिक जागरण ने अब तक नहीं दिया मजीठिया वेज, परंतु कर्मचारियों का शोषण जारी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी जागरण मैनेजमेंट के लोग अब तक कर्मचारियों को मजीठिया वेज बोर्ड का लाभ तो दूर, सम्मानित वेतन तक नहीं दे रहे। एक ही वेतन में दो कार्य (अखबार के लिए रिपोर्टिंग/एडिटिंग और डिजिटल के लिए ऑनलाइन ब्रेकिंग) लिया जा रहा है। लगातार शोषण से जागरण के कर्मी परेशान है। जागरण मैनेजमेंट झूठ पर झूठ बोल रहा है।

मजीठिया वेज बोर्ड मामले में सुप्रीम कोर्ट में कल हुई सुनवाई का विवरण जानिए एडवोकेट उमेश शर्मा से

जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में देश भर के मीडियाकर्मियों की तरफ से सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहे एडवोकेट उमेश शर्मा ने अपने फेसबुक वॉल पर मजीठिया वेज बोर्ड की सुनवाई का ब्यौरा साझा किया है, पढ़िए आप भी…

कंचन प्रिंटिंग प्रेस और लक्ष्मी प्रिंटिंग प्रेस को लेकर दैनिक जागरण के मालिकों ने लेबर कोर्ट में बोला झूठ

कंचन प्रिंटिंग प्रेस जागरण का हिस्सा नहीं… जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड मामले में अपने कर्मचारियों का लगातार उत्पीड़न कर रहे दैनिक जागरण के मालिकान अब बिना किसी ठोस आधार के लेबर कोर्ट में झूठ बोल रहे हैं। 11 नवंबर 2011 को भारत सरकार ने पत्रकारों और गैर पत्रकारों के वेतन तथा भत्ते से जुड़े जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड की अनुशंसा को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी।इस अधिसूचना में अंग्रेजी के पेज नंबर 12 पर साफ़ लिखा है कि अखबार की सभी इकाइयों,शाखाओं तथा केंद्रों को उसका अंग माना जाएगा मगर  जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड को लेकर दैनिक जागरण प्रबंधन गंभीर नहीं है।

आदर्श पेलने वाले अखबार मालिकों की असलियत

कुछ भी हो, मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिशों ने अच्छे-अच्छों की पोल खोल कर रख दी है… दुनिया भर का आदर्श पेलने वाले अखबार मालिकों की असलियत देखनी हो तो बस, एक बार मजीठिया वेज बोर्ड के मुताबिक़ अपनी सैलरी एवं बकाया की मांग कर के देख लीजिये!

मजीठिया वेतनमान : वो अपना राजधर्म निभा रहे हैं लेकिन आप?

मोदी सरकार हो या और सरकारें। कुछ प्रेस मालिकों को इसलिए नागदेव के सामन पूजती हैं कि वे उनकी छवि बनाते हैं, नतीजन प्रेस में लेबर लॉ किस बदहाली में है, पत्रकारों के वेज दिलाने की हिम्मत कोई सरकार नहीं कर पाई। यही काम मोदी सरकार भी कर रही है। प्रेस मालिक अपना राजधर्म निभा रहे हैं, सोशल मीडिया में सरकार की आलोचना हो रही है। लेकिन मजीठिया वेतनमान की बात आती हैं तो मोदी सरकार का राजधर्म चीन-भारत युद्ध, काश्मीर विवाद, पाकिस्तान को सबक सिखाने चला जाता है। लेकिन देश के भीतर जिन दुश्मनों को सबक सिखाना है उन्हें नहीं सिखाया जाता। जब आप देश में ठीक से लेबर लॉ लागू नहीं करा पा रहे हैं। कुछ उद्योगपतियों के सामने इतने असहाय हैं तो फिर चीन, पाकिस्तन की क्या बात करते हैं?

‘प्रातःकाल’ अखबार में भी उठी मजीठिया की मांग

मुंबई : राजस्थानी समाज में गहरी पैठ रखने वाले मुम्बई के हिंदी दैनिक प्रातःकाल में भी जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन, एरियर और प्रमोशन की मांग उठी है। यहाँ खबर है कि प्रातःकाल के मुख्य उपसंपादक अश्विनी राय ने भी जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर की मांग को लेकर 17 (1) का एक रिकवरी क्लेम श्रम आयुक्त कार्यालय महाराष्ट्र में दाखिल किया है। इससे प्रातःकाल प्रबंधन में हड़कंप का माहौल है।

रिसेप्शनिस्ट ने डीबी कॉर्प की सहायक महाप्रबंधक को श्रम विभाग में तलब कराया

मुंबई : मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन और एरियर मांगने पर डी बी कॉर्प के मुम्बई ऑफिस में कार्यरत महिला रिलेप्शनिस्ट लतिका आत्माराम चव्हाण का ट्रांसफर सोलापुर कर दिया गया था। लतिका ने इस मामले की शिकायत श्रम आयुक्त कार्यालय मुम्बई में लिखित रूप से कर दी। लतिका की इस शिकायत पर श्रम आयुक्त कार्यालय की सरकारी कामगार अधिकारी निशा नागराले ने डी बी कॉर्प प्रबंधन को नोटिस भेजा।