जानिए, मोदी का मूड बिगड़ा तो किस तरह चौटाला के बगल वाली बैरक में पहुंच जाएंगे मुलायम!

ये ‘सीबीआई प्रमाड़ित ईमानदार’ क्या होता है नेताजी?

सौदेबाज मुलायम का कुनबा 26 अक्टूबर 2007 से वाण्टेड है, क़ानूनी रूप में सीबीआई की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद 40 दिनों में एफआईआर हो जानी चाहिए थी. चूँकि सीबीआई सत्ता चलाने का टूल बन चुकी है, सो सीबीआई कोर्ट पहुँच गई एफआईआर की परमीशन मांगने। उस वक्त मुलायम के पास 39 सांसदों की ताकत थी। खुली लूट की आजादी में रोड़ा बन रहे वामपंथियों से मनमोहन का गिरोह छुटकारा चाहता था और अपने आकाओं के इशारे पर हरहाल में न्यूक्लियर डील कराने पर आमादा था।