मजीठिया वेज बोर्ड : यशवंत के साथ ना सही, पीछे तो खड़े होने की हिम्मत कीजिए

Rajendra Hada


मंगलवार, 20 जनवरी 2015 की शाम भड़ास देखा तो बड़ी निराशा हुई। सिर्फ 250 पत्रकार मजीठिया की लड़ाई लड़ने के लिए आगे आए? दुर्भाग्य से, जी हां दुर्भाग्य से, मैंने ऐसे दो प्रोफेशन चुने जो बुद्धिजीवियों के प्रतीक-स्तंभ के रूप में पहचाने माने जाने जाते हैं। वकालत और पत्रकारिता। दुर्भाग्य इसलिए कि दुनिया को अन्याय नहीं सहने की सलाह वकील और पत्रकार देते हैं और अन्याय के खिलाफ मुकदमे कर, नोटिस देकर, खबरें छापकर मुहिम चलाते हैं लेकिन अपने मामले में पूरी तरह ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हैं। अपनी निजी भलाई से जुडे़ कानूनों, व्यवस्थाओं के मामले में बुद्धिजीवियों के ये दो वर्ग लापरवाही और अपने ही साथियों पर अविश्वास जताते हैं। यह इनकी निम्नतम सोच का परिचय देने को काफी है।

दस साल तक दैनिक नवज्योति अखबार और उसके बाद दस साल तक दैनिक भास्कर अखबार में रहते हुए साथियों के अनुभव से मैंने यही जाना कि सेठ यानि मालिक सिर्फ मालिक होता है और आप सिर्फ नौकर। आप मालिक के साथ कितनी भी भलाई करें, मालिक अगर आपको दूध में मक्खी की तरह निकालना होगा तो, निकालकर ही मानेगा। मेरे साथ गनीमत रही कि जहां भी रहे, अपनी योग्यता के बल पर टिके रहे। पार्ट-टाइम रहते हुए भी जब जी चाहा तब तक नौकरी की और इच्छा होने पर बाकायदा एक महीने का नोटिस दिया। नोटिस में दी तारीख से अखबार के दफ्तर जाना छोड़ दिया। मालिक या संपादक के फैसले का इंतजार नहीं किया। इसीलिए नोटिस और इस्तीफे आज तक संभाल कर मेरे पास रखे हुए हैं।

हां, तो मैं बात कर रहा था साथियों की। मजेदार बात यह है कि मालिक के मुहंलगे, हां में हां मिलाने वाले, चमचागिरी कर यसमैन बने पत्रकार भी जरूरत पड़ने पर ऐसे आंखे फेर लेते हैं जैसे साथियों को जानते तक नहीं। हालात ऐसे होते हैं कि कई बार तो वह मालिक तो क्या शहर के एमएलए और अफसरों के तलुए चाटते दिखते हैं लेकिन अपने साथियों को इस कदर उपेक्षित करते हैं कि वे सोचने को मजबूर हो जाते हैं। यह और बात है कि वक्त बदलते देर नहीं लगती और जो अन्याय खुद अपने साथियों के साथ करते हैं, कुछ समय बाद उनके साथ वैसा तो क्या उससे बुरा भी होता है। भले ही वह झूठी शान में मरे जाते हैं परंतु उनकी हकीकत किसी से छिप नहीं पाती। ऐसे एक नहीं कई उदाहरण हैं, भगवान ने चाहा तो बहुत जल्द बाकायदा नाम सहित आपके सामने वे नंगे खड़े होंगे। कुछ ऐसा ही हाल वकालत में है परंतु वह फिर कभी।

अभी तो जमाना यह है कि आप बेइमान को बेइमान, घोटालेबाज को घोटालेबाज और चोर को चोर भी कह नहीं सकते। ऐसा कहते ही वे आपसे बात करना छोड़ देते हैं। आपको देखते ही मुंह फेर लेते हैं। उन्हें लगता है जैसे आंख बंद कर ली है तो अंधेरा हो गया है। उनके घर में एक पैसे की मेहनत की कमाई नहीं होती परंतु करोड़ों के मकान में रहते हैं, बच्चे महंगे स्कूलों में पढ़ते हैं। कुर्सी पर जब भी ये लोग जमे तो फर्जीवाड़े ऐसे-ऐसे किए कि आज तक हाथ पैर चलाए बिना उन बेनामी ट्रांजेंक्शंस की फसले काट रहे हैं। तुर्रा यह कि बनते ऐसे ईमानदार हैं कि दुनिया में राजा हरीशचंद्र के बाद पैदा ही वे हुए हैं। कई संस्थाओं में पैसा लगा हुआ है। नरेंद्र मोदी की नकल में ना खाउंगा ना खाने दूंगा जैसे नारे लगा रहे हैं।

आप सोच रहे होंगे आखिर कहना क्या चाह रहा हूं। दोस्तों यह भड़ास ही है जिस पर आपके सामने इन बेइमानों, घोटालेबाजों, चोरों के गिरोह के सभी लोगों को नंगा करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा कहने की हिम्मत भी इसलिए है कि यह यशवंत और उनका भड़ास ही है कि कई मुद्दे इस पर उठाए जा चुके हैं और उठाए जाएंगे। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और इनके पैरोकारों में तो वह ताकत रही नहीं कि कुछ लिखा जाए। वे खुद तो इतने पंगु है कि गलत होते हुए भी उसे गलत कहने का साहस नहीं रखते, अगर आप उस बारे में कुछ लिख देते हैं तो उसे छापने की हिम्मत भी नहीं रखते। अगर वह हिम्मत रखते हैं तो उनका सेठ इसकी इजाजत नहीं देता। परंतु वे कुर्सी पर जमे रहते हैं।

यशवंत से अपनी रूबरू मुलाकात सिर्फ दो दफा, और फोन व भड़ास के माध्यम से कई दफा की है। यशवंत को इतना विश्वास है कि अपन कभी गलत खबर नहीं भेजते और ना भेज सकते हैं। इसी कारण उन्होंने आज तक कोई इंक्वायरी नहीं की कि खबर क्यों छापी जाए। जो भेजा वह छापा। आप लड़ते हैं, यशवंत आपका साथ देते हैं। अजमेर से सवा तीन सौ किलोमीटर दूर बैठे और शायद आठ सौ किलोमीटर दूर के मूल बाशिंदे पर इतना विश्वास सिर्फ और सिर्फ इसलिए कि यशवंत आपके लिए लड़ते हैं। जब मामला आपका निजी हो तो भी वे जी जान लगा देते हैं और आप हैं कि खुद ही पीछे हट जाते हैं। जैसे कि इस बार मजीठिया के मामले में कर रहे हैं।

मजीठिया मिलने और सुप्रीम कोर्ट जाने से यशवंत को कुछ नहीं मिलने वाला। वे आपके लिए लड़ रहे हैं। ऐसे में आप उनके साथ ना सही, पीछे तो खड़े होने का साहस कीजिए। आप खुशनसीब हैं कि आपको यशवंत के रूप में आपका कोई हमदम, कोई दोस्त है। उस दोस्त की कद्र कीजिए। उस पर विश्वास कीजिए। दोस्तों जिंदगी में अवसर कभी कभार दस्तक देता है। इस अवसर को मत चूकिए। मजीठिया की लड़ाई लड़ने की पहल यशवंत ने की है। आप कम से कम साथ तो दीजिए। साथ ना सही पीछे तो खड़े होने की हिम्मत कीजिए। 

राजेंद्र हाड़ा
वरिष्ठ पत्रकार और वकील
अजमेर
राजस्थान
संपर्क : 09829270160, 09549155160
rajendara_hada@yahoo.co.in


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‘न्यूज एक्सप्रेस’ पर जहरीले पानी के खिलाफ मुहिम- ‘जल नहीं जहर’

नोएडा : देश के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल ‘न्यूज एक्सप्रेस’ ने जहरीले पानी के खिलाफ बड़ी मुहिम छेड़ी है। न्यूज एक्स्प्रेस की टीम देश के हर उस गांव, मोहल्ले, कस्बे और मोहल्ले तक पहुंच रही है जहां पानी जहरीला है। न्यूज एक्सप्रेस की टीम जहरीले पानी से परेशान लोगों से ही नहीं मिल रही, बल्कि पानी के जहरीले होने की वजहें भी तलाश रही है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, बागपत, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बलिया जैसे शहरों में न्यूज एक्सप्रेस की टीम ने जहरीले पानी की पड़ताल की। ये पड़ताल बिहार, उड़ीसा, और पंजाब के मालवा इलाके में भी चल रही है और ये जानने की कोशिश की जा रही है कि पानी में जहर घुल कहां से रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। न्यूज एक्सप्रेस दिल्ली में बैठे हुक्मरानों की नब्ज भी टटोल रहा है और ये जानने की कोशिश कर रहा है पानी में जहर घोलने वालों को रोकने में और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार नाकाम क्यों रही है।

इसी कोशिश में न्यूज एक्सप्रेस पर केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड के सदस्य विजय पंजवानी ने खुलासा किया कि राज्य प्रदूषण बोर्ड के सदस्य फैक्ट्री मालिकों से मिले होते हैं जिस वजह से फैक्ट्रियों से निकलने वाले कचरे को नदी में मिलने से रोकना मुमकिन नहीं हो पाता। पंजवानी ने ये भी कहा कि जो ईमानदार अधिकारी फैक्ट्री मालिकों से रिश्वत नहीं लेते उन्हें पिस्तौल दिखाकर डराया जाता है। ये वाकई चौंकाने वाला खुलासा है। ऐसे फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ मुहिम चलाई जानी चाहिए। न्यूज एक्सप्रेस की कोशिश है कि इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर आम लोगों में जागरूकता पैदा की जाए और इसके लिए जो भी करना जरूरी हो वो किया जाए। न्यूज एक्सप्रेस की इस मुहिम के साथ नोएडा और गाजियाबाद के किसान और 70 गांवों के लोग जुड़े। ग्रेटर नोएडा के अछेदा गांव में 50 गांवों की महापंचायत ने न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम के साथ जुड़ने का संकल्प लिया तो हापुड़ में 20 गांवों की महापंचायत ने संयोजक कृष्णकांत के नेतृत्व में मुहिम को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री रामकृपाल यादव ने न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम की सराहना की और कहा कि ऐसी मुहिम के जरिए ही जहरीले पानी के खिलाफ जनआंदोलन की शुरुआत हो सकती है। रामकृपाल यादव ने राज्य की सरकारों से भी आह्वान किया कि वो साफ पानी पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल करें और केंद्र उनकी पूरी मदद करेगा। केंद्रीय उड्डयन राज्यमंत्री और नोएडा से बीजेपी सांसद डॉ. महेश शर्मा ने कहा कि न्यूज एक्सप्रेस की इस मुहिम ने लोगों की ही नहीं नेताओं की भी आंखें खोल दी हैं। डॉ. महेश शर्मा ने भरोसा दिलाया कि नोएडा के लोगों को जहरीले पानी से निजात दिलाने के लिए वो पूरी कोशिश करेंगे। केंद्रीय राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम की सराहना की। केंद्रीय मध्यम और लघु उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने भी न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम की सराहना की है।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम की सराहना की और भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश सरकार लोगों को पीने का शुद्ध और साफ पानी मुहैया कराएगी। उत्तर प्रदेश के ग्राम विकास मंत्री अरविंद सिंह गोप ने भी न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम की सराहना की और कहा कि प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने फैक्ट्री मालिकों को निर्देश दिए हैं कि वो बिना शोधन के नदी में कचरा ना बहाएं। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव ने भी न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम जल नहीं जहर का स्वागत किया है।

जल विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह ने भी न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम का स्वागत किया है। फिल्म जगत ने भी जहरीले पानी के खिलाफ न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम की सराहना की है। ऐडगुरु प्रह्लाद कक्कड़, अभिनेता रजत कपूर, फिल्म निर्माता रितु सरीन ने भी न्यूज एक्स्प्रेस की मुहिम की तारीफ की है।  न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम का असर आम लोगों पर भी हो रहा है। पंजाब के मोगा में गृहणियों ने न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम का साथ देते हुए बाजार से जहरीली सब्जियां नहीं खरीदने और खुद खादरहित सब्जियां उगाने का संकल्प लिया है।

न्यूज एक्सप्रेस की अपील है कि जल और जिंदगी को बचाने की मुहिम में ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ें और अगर उन्हें लगता है कि उनके इलाके में भी पानी से बीमारियों हो रही हैं, तो न्यूज एक्सप्रेस को बताएं ताकि हर उस गांव, शहर और मोहल्ले तक न्यूज एक्सप्रेस पहुंचे और आपकी समस्या सरकार तक पहुंच सके। हम वादा करते हैं कि हम केवल समस्या नहीं बताएंगे बल्कि समाधान का भी हिस्सा बनेंगे।

हालात इस कदर बदतर — दिल्ली से सिर्फ 30 किलोमीटर दूर और उत्तर प्रदेश की शान कहे जाने वाले ग्रेटर नोएडा के 6 गांवों में जहरीले पानी से पिछले 5 सालों में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है । इन मौत की वजह है  कैंसर । पिछले पांच सालों में अकेले दुजाना गांव में 35 लोगों की कैंसर से मौत हो चुकी है जबकि इतने ही लोग कैंसर से अब भी पीड़ित हैं । पास के सादोपुर गांव में भी अब तक कैंसर से 25 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि सादोपुर में इस वक्त भी 20 लोगों का कैंसर का इलाज किया जा रहा है । ऐसे ही बिश्नूली गांव में कैंसर से 20 लोगों की मौत हो चुकी है और कैंसर से पीड़ित 20 लोगों का इलाज किया जा रहा है । खेड़ा धर्मपुरा गांव में 25 लोगों की मौत कैंसर से हुई है और अब भी 20 पीड़ित हैं । वहीं सादुल्लापुर में 10 की मौत हो चुकी है और 5 इस वक्त भी कैंसर से पीड़ित हैं । अच्छैजा गांव में भी 10 की मौत हो चुकी है और 5 लोग कैंसर से पीड़ित हैं। ये आंकड़े वाकई में किसी को भी डराने के लिए काफी हैं । जहरीले पानी की वजह से गांव के गांव कैंसर की कब्रगाह में तब्दील हो रहे हैं। जहरीले पानी से सबसे ज्यादा त्वचा की बीमारियां हो रही हैं। लिवर और आंत का कैंसर हो रहा है। पेट की और भी कई बीमारियां हो रही हैं।

गंगा किनारे बसे कानपुर से लेकर बनारस, आरा, भोजपुर, पटना, मुंगेर, फर्रुखा और पश्चिम बंगाल तक के कई शहरों में गंगा के दोनों तटों पर बसी आबादी में आर्सेनिक से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश के बहराईच, चन्दौली, गाज़ीपुर, गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, सन्त कबीर नगर, उन्नाव, बरेली और मुरादाबाद जिलों में पानी में आर्सेनिक की मात्रा खतरे के निशान को पार कर गई है जबकि रायबरेली, मिर्ज़ापुर, बिजनौर, मेरठ, सन्त रविदास नगर, सहारनपुर और गोण्डा में भी पानी में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ रही है। पश्चिमी यूपी में हिण्डन की सहायक नदियों काली और कृष्णी के किनारे बसे गांवों में कैंसर का कहर है। नाले के पानी में लेड की मात्रा 0.12 और क्रोमियम की मात्रा 3.50 मिग्रा.ली. पाई गई है। इस पानी को पीने से एनीमिया, मुँह में जलन,  लकवा, याददाश्त की कमी, लिवर और फेफड़ों का कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो रही हैं। मध्य प्रदेश में कुल सात हज़ार से ज़्यादा बस्तियों में पानी पीने के लायक नहीं है। कहीं पेयजल में फ्लोराइड है, तो कहीं नाइट्रेट की मात्रा ज़्यादा है।  राज्य में कुल 1 लाख 27 हज़ार बस्तियों में से 26 ज़िलों की 7 हजार से ज्यादा बस्तियों में 11569 जल स्त्रोतों में फ्लोराइड की मात्रा ज़रूरत से ज़्यादा है।

पश्चिम बंगाल में आर्सेनिक का कहर सबसे भयानक है। करीब 70 लाख लोग बीमारियों की चपेट में आ गए हैं। लगभग 20 जिले आर्सेनिक प्रभावित हैं। बिहार में तो पटना सहित 12 जिलों के लोग आर्सेनिक युक्त जहरीला पानी पाने के लिए मजबूर हैं। आर्सेनिक युक्त पेयजल के कारण गैंग्रीन, आंत, लीवर, किडनी और मूत्राशय के कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियां हो रही हैं। गंगा के किनारे रहने वाले 1,20,000 लोगों के जीवन को आर्सेनिक युक्त भू-जल से खतरा है। समस्या कितनी बड़ी है इसका अंदाजा सरकार को है। लेकिन इस समस्या से निपटने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की जरूरत है। न्यूज एक्सप्रेस ने इस समस्या पर तहतक तक जाकर पड़ताल की है और  बिना रुके इस मुहिम को जारी रखने का संकल्प लिया है।

न्यूज एक्सप्रेस के प्रधान संपादक प्रसून शुक्ला का कहना है कि न्यूज एक्स्प्रेस पूरी जिम्मेदारी के साथ इस मुहिम से जुड़ा है। हम ये मुहिम तबतक जारी रखेंगे जबतक इसका असर आम लोगों को दिखाई ना देने लगे। हम समस्या की तह तक जाकर ये जानने की कोशिश करेंगे कि पानी जहरीला क्यों हो रहा है, इसके लिए जिम्मेदार कौन है और कैसे इस समस्या से निपटेंगे। उत्तर प्रदेश हो या दिल्ली, बिहार हो या बंगाल, पंजाब हो या उड़ीसा न्यूज एक्सप्रेस जल को जहर से मुक्त करने की मुहिम में हर राज्य को जोड़ेगा। जरूरत पड़ी तो इस मुहिम को कामयाब बनाने के लिए न्यूज एक्सप्रेस प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पत्र लिखेगा क्योंकि इस मुहिम से कुछ ऐसे खुलासे भी हो रहे हैं जिसमें बड़े स्तर पर कार्रवाई किए जाने की जरूरत है। जो जानकारियां हमारे रिपोर्टर इकट्ठा करेंगे उसे संबंधित मंत्रालयों को भी भेजा जाएगा। हम ये भी कोशिश करेंगे कि न्यूज एक्सप्रेस की मुहिम का कहां और क्या असर हुआ उसे आप तक पहुंचाएं, सोते अधिकारियों को जगाएं और आम लोगों को इस मुहिम से जोड़ें। न्यूज एक्सप्रेस कोशिश करेगा कि संसद के शीतकालीन सत्र में भी इस मुहिम की गूंज हो ताकि जो पानी हमें जिंदगी देता है उसे जहरीला होने से बचाने की संजीदगी भरी पहल हो।

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