मजीठिया वेज बोर्ड : यशवंत के साथ ना सही, पीछे तो खड़े होने की हिम्मत कीजिए

Rajendra Hada


मंगलवार, 20 जनवरी 2015 की शाम भड़ास देखा तो बड़ी निराशा हुई। सिर्फ 250 पत्रकार मजीठिया की लड़ाई लड़ने के लिए आगे आए? दुर्भाग्य से, जी हां दुर्भाग्य से, मैंने ऐसे दो प्रोफेशन चुने जो बुद्धिजीवियों के प्रतीक-स्तंभ के रूप में पहचाने माने जाने जाते हैं। वकालत और पत्रकारिता। दुर्भाग्य इसलिए कि दुनिया को अन्याय नहीं सहने की सलाह वकील और पत्रकार देते हैं और अन्याय के खिलाफ मुकदमे कर, नोटिस देकर, खबरें छापकर मुहिम चलाते हैं लेकिन अपने मामले में पूरी तरह ‘चिराग तले अंधेरा’ वाली कहावत को चरितार्थ करते हैं। अपनी निजी भलाई से जुडे़ कानूनों, व्यवस्थाओं के मामले में बुद्धिजीवियों के ये दो वर्ग लापरवाही और अपने ही साथियों पर अविश्वास जताते हैं। यह इनकी निम्नतम सोच का परिचय देने को काफी है।

‘न्यूज एक्सप्रेस’ पर जहरीले पानी के खिलाफ मुहिम- ‘जल नहीं जहर’

नोएडा : देश के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल ‘न्यूज एक्सप्रेस’ ने जहरीले पानी के खिलाफ बड़ी मुहिम छेड़ी है। न्यूज एक्स्प्रेस की टीम देश के हर उस गांव, मोहल्ले, कस्बे और मोहल्ले तक पहुंच रही है जहां पानी जहरीला है। न्यूज एक्सप्रेस की टीम जहरीले पानी से परेशान लोगों से ही नहीं मिल रही, बल्कि पानी के जहरीले होने की वजहें भी तलाश रही है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद, बागपत, गौतमबुद्धनगर, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और बलिया जैसे शहरों में न्यूज एक्सप्रेस की टीम ने जहरीले पानी की पड़ताल की। ये पड़ताल बिहार, उड़ीसा, और पंजाब के मालवा इलाके में भी चल रही है और ये जानने की कोशिश की जा रही है कि पानी में जहर घुल कहां से रहा है और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। न्यूज एक्सप्रेस दिल्ली में बैठे हुक्मरानों की नब्ज भी टटोल रहा है और ये जानने की कोशिश कर रहा है पानी में जहर घोलने वालों को रोकने में और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में सरकार नाकाम क्यों रही है।