इन दो शानदार लोक गीतों और एक जानदार लोक कविता को अब तक नहीं सुना तो फिर क्या सुना… (देखें वीडियो)

जनता के बीच से जो गीत-संगीत निकल कर आता है, उसका आनंद ही कुछ और होता है. अवधी हो या भोजपुरी. इन देसज बोलियों की लोक रंग से डूबी रचनाओं में जो मस्ती-मजा है, वह अन्यत्र नहीं मिलता. नीचे तीन वीडियोज हैं. सबसे आखिर में जाने माने कवि स्व. कैलाश गौतम की रचना है, उन्हीं की जुबानी- ‘अमउवसा का मेला’. जो लोग इलाहाबाद में कुंभ-महाकुंभ के मेलों में जाते रहे हैं, उन्हें इस कविता में खूब आनंद आएगा.

अजराड़ा घराने के उस्ताद को संतूर शिरोमणि भजन सोपोरी ने यूं दी श्रद्धांजलि (देखें वीडियोज)

Yashwant Singh : क्या ग़ज़ब बजाते हैं भजन सोपोरी. इस संतूर उस्ताद को पहली बार लाइव देखा सुना. मेरठ के आरजी कालेज आडिटोरियम में आयोजित एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शिरकत करने आए पंडित भजन सोपोरी को देखकर लग नहीं रहा था कि यह शख्स सन 1948 की पैदाइश है. वही चेहरा मोहरा और अंदाज जो उन्हें हम लोग तस्वीरों-वीडियोज में देखते-सुनते आए हैं. इस आयोजन में मैं अपने सीनियर रहे आदरणीय Shrikant Asthana सर के साथ पहुंचा था.