पठनीय है ‘तहलका’ का वार्षिक अंक, जरूर खरीदें और पढ़ें

Abhishek Srivastava : कल ‘तहलका’ का वार्षिक अंक एक सुखद आश्‍चर्य की तरह हाथ में आया। एक ज़माने में इंडिया टुडे जो साहित्‍य वार्षिकी निकालता था, उसकी याद ताज़ा हो आई। बड़ी बात यह है कि ‘तहलका’ का यह अंक सिर्फ सहित्‍य नहीं बल्कि समाज, राजनीति, आंदोलन और संस्‍कृति सब कुछ को समेटे हुए है। आवरण पर एक साथ मुक्तिबोध और इरोम शर्मिला की तस्‍वीर को आखिर कौन नहीं देखना चाहेगा।