एबीपी न्यूज से पुण्य प्रसून बाजपेयी और अभिसार शर्मा भी हटा दिए गए!

Qamar Waheed Naqvi

Qamar Waheed Naqvi

एबीपी न्यूज़ में पिछले 24 घंटों में जो कुछ हो गया, वह भयानक है. और उससे भी भयानक है वह चुप्पी जो फ़ेसबुक और ट्विटर पर छायी हुई है. भयानक है वह चुप्पी जो मीडिया संगठनों में छायी हुई है. मीडिया की नाक में नकेल डाले जाने का जो सिलसिला पिछले कुछ सालों से नियोजित रूप से चलता आ रहा है, यह उसका एक मदान्ध उद्-घोष है. मीडिया का एक बड़ा वर्ग तो दिल्ली में सत्ता-परिवर्तन होते ही अपने उस ‘हिडेन एजेंडा’ पर उतर आया था, जिसे वह बरसों से भीतर दबाये रखे थे. Continue reading

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सहयोगी छात्र या सहपाठी?

Qamar Waheed Naqvi : आज एक हिन्दी दैनिक में छपी एक ख़बर में लिखा गया– सहयोगी छात्र! ‘सहयोगी छात्र’ के बजाय सही प्रयोग होता– सहपाठी. इसके साथ ‘छात्र’ शब्द जोड़ने की भी ज़रूरत नहीं है, क्योंकि सहपाठी का अर्थ है, साथ पढ़नेवाला. लिखते समय अकसर हम शब्दों की मूल बनावट पर ध्यान नहीं देते हैं, इसलिए अनजाने में ‘सहयोगी छात्र’ जैसे प्रयोग कर डालते हैं.

‘सह’ का अर्थ है—सहन करनेवाला, किसी काम में साथ-साथ रहनेवाला. 

सहयोगी का अर्थ हुआ, जो साथ में योगदान करे, सहायता करे, हाथ बँटाये.

अब कुछ शब्दों पर ध्यान दीजिए, जो ‘सह’ से बनते हैं:

सहकर्मी– जो साथ में काम करता हो.

सहधर्मी–जो समान धर्म का माननेवाला हो.

सहमत– जो किसी के विचार (मत) के साथ हो, समान मत रखता हो.

सहयात्री– जो साथ में यात्रा कर रहा हो.

सहगामी– जो साथ में जा रहा हो.

सहजातीय– जो समान जाति का हो.

सहचर– जो साथ चले.

सहभागी– साथ में शामिल होनेवाला, जैसे किसी प्रतियोगिता में सहभागी. 

सहशिक्षा– साथ में शिक्षा, आमतौर पर लड़के-लड़कियों की एक ही कक्षा में साथ-साथ शिक्षा के अर्थ में. 

सहानुभूति– किसी की अनुभूति में उसके साथ. किसी के सुख, दुःख में उसी के जैसा महसूस करना.

सहोदर–जो एक ही माता से उत्पन्न हुए हों.

तो ‘सहयोगी छात्र’ की तरह लिखने को तो ‘सहयोगी कर्मी’ या ‘सहयोगी यात्री’ या ‘सहयोगी भागीदार’ भी लिखा जा सकता है, लेकिन क्या ऐसा लिखना सही होगा? सही प्रयोग तो ‘सहकर्मी’ ही होगा. ‘सहयोगी कर्मी’ वह हुआ, जो आपको आपके काम में सीधे सहयोग करता हो, हाथ बँटाता हो, सहायक हो. सहकर्मी वह हुआ, जो आपके कार्यालय, विभाग या कम्पनी में काम करता हो.

जो आपके साथ यात्रा में साथ है, वह सहयात्री हुआ. ज़रूरी नहीं कि यात्रा में आपको उसका सहयोग मिले या आपको उसका सहयोग लेना पड़े. सहयोग अलग बात है और साथ अलग बात है. जैसे– ‘बस में कुछ सहयात्री इतना शोर मचा रहे थे कि बिलकुल नींद नहीं आयी.’ अब क्या इन्हें ‘सहयोगी यात्री’ लिखेंगे? और यदि सहयोग मिले, तो भी ‘सहयोगी यात्री’ लिखना सही नहीं होगा. जैसे, यात्रा में दुर्भाग्य से अगर जेब कट जाये और सहयात्रियों के सहयोग से काम चलाना पड़े, तो लिखेंगे— ‘जेब कट जाने के बाद सहयात्रियों के सहयोग से किसी तरह काम चला.’ अब यहाँ ‘सहयात्रियों’ के बजाय अगर ‘सहयोगी यात्रियों’ लिखा जाता, तो वाक्य कैसा अटपटा बनता—‘सहयोगी यात्रियों के सहयोग से….’ स्पष्ट है कि सहयात्रियों ने सहयोग किया, उसके बावजूद उन्हें ‘सहयात्री’ ही लिखा जायेगा, ‘सहयोगी यात्री’ नहीं.

इसी तरह जो किसी के साथ किसी सम्मेलन, कार्यक्रम, प्रतियोगिता आदि में भाग ले रहे हों, वह ‘सहभागी’ हुए. ज़रूरी नहीं कि उन्होंने उस व्यक्ति से कोई सहयोग किया हो, जिसके साथ वह भाग ले रहे हों. इसलिए उन्हें ‘सहयोगी भागीदार’ लिखना सही नहीं है.

हिन्दी बहुत सम्पन्न भाषा है और अलग-अलग अर्थों, कार्यों, भावनाओं को व्यक्त करने के लिए हिन्दी के पास शब्दों की कोई कमी नहीं है. बस ज़रूरत इतनी है कि लिखते समय हम इस पर थोड़ा ध्यान दे दें कि जो शब्द हम प्रयोग कर रहे हैं, क्या वह उस अर्थ को सही-सही अभिव्यक्त करता है.

कमर वहीद नकवी के एफबी वॉल से

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